मंगलवार, 22 नवंबर 2011

रूकावट के लिए खेद है .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

सभी पाठकों को संगीता पुरी का नमस्‍कार ,  उत्‍तर प्रदेश की सरकार के लिए आज का दिन काफी अहम दिन रहा। मायावती ने अपने राजनीतिक पैंतरों से विपक्ष को चारों खाने चित कर दिया। जी हां मायावती ने ध्‍वनि मत से उत्‍तर प्रदेश के चार टुकड़ों में बंटवारे के प्रस्‍ताव को पारित करवा लिया और विपक्ष हंगामा ही करता रह गया। हंगामा शेयर बाजार में भी मचा है , जहां वैश्विक बाजारों में कमजोरी के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा सतत बिकवाली के चलते बंबई शेयर बाजार में गिरावट का दौर आज लगातार आठवें दिन जारी रहा जबकि सेंसेक्स 425 अंक और टूटकर 16,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे चला गया। इन मुख्‍य खबरों के बाद अब ब्‍लॉग जगत की कुछ पोस्‍टों पर एक नजर ...
ब्रह्म भावना*ब्रह्म भावना *** स्थिर नहीं है जग में कुछ भी, एक तत्व आकाश समान देह आदि मिथ्या लगते, जब शुद्ध ब्रह्म का होता ज्ञान मृतिका का घट मृतिका ही है, सत् से उत्पन्न जगत भी सत् सत् से परे न कुछ भी स्थित, तुम भ...आईने से डरती हूँ प्रेम करना भी एक अलग अहसास है ,मुझे लगता है मोह्हबत होने के लिए किसी एक शक्श का होना जरुरी नहीं होता...कुछ लोग बस मोहब्बत करने के लिए ही बनते हैं...वो एक शख्स उनकी जिंदगी में आ गया वो उसपर सारी मोहब्ब...नीड़ का निर्माण आधाबया ने भी ले लिया प्रण करेगा नीड़ का निर्माण खुद देखेगा - राधा बया कब तक रूकती है ....! ओह - *रश्मि प्रभा*  
वेशर्मी न हो तो नेता कईसन *चौबे जी की चौपाल * * * फूलपुर में राहुल की सभा में दबंग के चुलबुल पांडे टाईप मंत्रियों के द्वारा शांतिपूर्वक विरोध करने वाले लड़कों की पिटाई की बात सुनि के रामभरोसे एकदम सेंटिमेंटल हो गया और मुड़ि पीट...कमी नहीं होती ...कोई भी मंजिल अंतिम नहीं होती ज़िंदगी में लक्ष्यों की कोई कमी नहीं होती . मंजिल पाने के लिए निरतता* होनी चाहिए फिर रास्ते बनने के लिए पगडंडियों की कमी नहीं होती . पगडंडियों के लिए भी तितिक्षा* हो...
बधाई हो ! जन लोकपाल बिल बनने वाला है जी हाँ ! दोस्तो जन लोक पाल बिल बस कुछ ही दिनों में बन जायेगा। जैसा "सिविल सोसायटी ऑफ सेकुलरों" ने कहा है कुछ-कुछ वैसा ही बनेगा; शायद ! क्योंकि पढता कोई नहीं है इसलिए वैसा ही लगेगा। संसद में भी पास हो जायेग...
 
परिंदे की मौत जिन्दगी एक खुजली का नाम है। जब आत्मा को खुजली होती है तो वो किसी गर्भ में उतरती है और जिन्दगी की नौटंकी शुरू होती है। करोड़ों योनियां (जून या जन्म) हैं, करोड़ों भूमिकाएं। मुझे याद नहीं कि, यह तय करना अपने...हास्यकवि अलबेला खत्री का नया शाहकार 'हे हनुमान बचालो' अब बाज़ार में आने को तैयार *लीजिये प्यारे दोस्तों ! अलबेला खत्री हाज़िर है अपना नया ऑडियो एलबम लेकर...........जहाँ तक मेरा मानना है, इस नये सृजन को लोगों का भरपूर स्नेह मिलेगा और ये घर-घर बजेगा निवेदन यही है कि इस... 
FACEBOOK पर बैन नहीं लगाएगा कश्मीर सरकार *श्रीनगर*| जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर राज्य में प्रतिबंध लगाने लगातार ख़बरों के बीच कहा कि सरकार की कोई मंशा नहीं है। फेसबुक पर ईशनिंदा से सम्ब... 
चार जेपी और दो अन्ना पैग... मित्रों दो दिन पहले मैं कुछ दोस्तों के साथ यहां पांच सितारा होटल के बार में था। हमारा मित्र आस्ट्रेलिया से आया हुआ था, उसे वापस जाने के लिए रात तीन बजे की फ्लाइट पकड़नी थी, हम सबको साथ मिले भी काफी समय हो...
सिफर हो गई थी दुनिया सिफर था जिसपर करवट ली उसनें देखती रही कि जमीन और आसमान कही एक जगह पर डूब गये थे मौसमों के फेर बदल नें जमीन को गहरा और आकाश को और ऊँचा कर गया था क्षितिज के किसी कोनें में सांस ले रही करवट देख रही थ...

21 नवम्बर को - नजरिया वाले पवन कुमार - गीत कलश वाले राकेश खण्डेलवाल की वैवाहिक वर्षगांठ है बधाई व शुभकामनाएँ!!!!!!

गुरुवार, 17 नवंबर 2011

पाखी का जादू और साबुत आमलेट पराँठा .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

आप सबों को संगीता पुरी का नमस्‍कार , वैश्विक अनिश्चितता को देखते हुए डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्य में लगातार गिरावट देखी जा रही है। अर्थशास्त्रियों और कारोबारियों का कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपया अपने न्यूनतम स्तर के करीब पहुंच गया है और यूरो क्षेत्र में संकट गहराने से भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले 52 रुपये के स्तर को छू सकती है। बुधवार को रुपये में करीब 7 पैसे की गिरावट दर्ज की गई और यह डॉलर के मुकाबले 50.73 रुपये पर पहुंच गया। मार्च 2009 में भारतीय मुद्रा अपने न्यूनतम स्तर 51.97 रुपये पर पहुंच गई थी। पिछले तीन माह के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपये में करीब 15 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। रेटिंग एजेंसी केयर के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, 'रुपये में गिरावट से देश के व्यापार संतुलन पर असर पड़ रहा है। निर्यात में नरमी का रुख देखा जा रहा है जबकि आयात में तेजी आ रही है। इसके चलते डॉलर भी बाहर निकल रहा है।' उन्होंने कहा कि यूरोपीय ऋण संकट अगर आगे भी जारी रहा तो साल के अंत तक भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले 52 रुपये के स्तर पर पहुंच सकता है। आज की कुछ पोस्‍ट ....

नन्हीं ब्लागर अक्षिता (पाखी) का जादू ...सबसे कम उम्र में 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' (बाल दिवस, 14 नवम्बर पर विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में महिला और बाल विकास मंत्री माननीया कृष्णा तीरथ जी ने अक्षिता (पाखी) को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार-2011 से पुरस्कृत किया. अक्षिता इ...फुरसत का उपहार अब वह क्षण नहीं जब गुजरती है धडधडाती रेल संवेदना की पटरी पर और फेंक देती है ताज़े अखबार की तरह एक नई कविता मेरे आँगन में जिसे उठा कर तुरंत सहेजना होता है संभाल कर धडकनों के सुर सुना कर जतलाना होता है उ...भगवती शांता परम(मर्यादा पुरुषोत्तम राम की सहोदरी) सर्ग-२ भाग-1 महारानी कौशल्या-महाराज दशरथ और रावण के क्षत्रप सोरठा रास रंग उत्साह, अवधपुरी में खुब जमा | उत्सुक देखे राह, कनक महल सजकर खड़ा || मेरा इंतज़ार जंगली धूप और मरघटी रातों मे अनजान गलियों की , सुनसान सड़कों पर अकेले चलते हुए मैंने देखा - हर मोड़ पर कर रहे थे मेरा इंतज़ार वक़्त के अदृश्य पहरेदार! सुबह आठ और रात पौने नौ बजे का बुलेटिन-न्‍यूज़ रूम से शुभ्रा शर्मा: दसवीं कड़ी - रेडियोनामा पर जानी मानी समाचार वाचिका शुभ्रा शर्मा अपने दिलचस्‍प पाक्षिक संस्‍मरण लिख रही हैं। उनके सारे लेख आप यहां चटका लगाकर पढ़ सकते हैं। एक समय था...

साबुत आमलेट पराँठा देख कर मैं हैरान रह गया कभी कभी ऐसी चीजें देखने में आती हैं जो होती बेहद आसान हैं लेकिन उसे देखते ही भौंचक्का रह जाता है मानव। मेरे साथ भी कई बार ऐसा होता है तब मैं इस उधेड़-बुन में लग जाता हूँ कि आखिर यह है क्या और कैसे बना होगा।...बोलते वि‍चार 33 - आदमी-आदमी में भेद मत रखिए आदमी-आदमी में भेद मत रखिए बोलते वि‍चार 33 आलेख व स्‍वर - डॉ.आर.सी.महरोत्रा आदमी-आदमी में भेद करने वाले व्यक्तियों को ओलंपिक से शिक्षा लेनी चाहिए, जिसमें क्षेत्रवाद और जातिवाद तो क्या, सम्प्रदायवाद और ...घुमरी परौते का वर्ल्ड कप ......... आज कल यहाँ पंजाब में कबड्डी का वर्ल्ड कप चल रहा है .......बड़ी चर्चा है ...... अखबारों में चर्चा है ......टीवी पे लाइव आ रहा है ....... एक दिन शाहरुख आये ....देसिल बयना – 105 : जनमा पूत तो आया भूत…..-- *करण समस्तीपुरी*** ** उ दिन मधकोठी में दुइए आहट था, गमगमाहट और गनगनाहट। मुठिया केला से पूरा टोला गमगमा रहा था और लौडिसपीकर पर फ़िलमी कीर्तन से गनगना रहा था। सांझ से चहल-पहल और तेज हो गयी थी। ''दफ़नाने" पर भी "जलाना"...खुशदीप किसी शायर ने क्या ख़ूब कहा... 

ओल्ड एज होम ( लघुकथा) आज अचानक किसी ओल्ड एज होम में जाने का विचार आया , केवल यह देखने के लिए कैसे रहते हैं वह लोग जिनके अपने, उन्हें यहाँ छोड़ गए हैं |यह विचार कई बार मन में आया ऐसी कौन सी मज़बूरी होती है जिन माँ बाप, जिहोने क्या प्यार इसी को कहते हैं ?"क्या प्यार इसी को कहते हैं ?" पुस्तक कम्पलीट हुई मित्रों ... दो-तीन दिन में करेक्शन का काम पूरा करना है ... फिर कोशिश करेंगे शायद अपने जैसे नौसिखिये लेखकों को भी पब्लिशर मिल जाए ... गर नहीं मिला तब ... आपके हाथ में होंगे मुलायम लचीले फ़ोन...जैसा की आप चित्र में देख प् रहे होंगे अब मोबाइल फ़ोन लचीले और मुलायम होने जा रहे हैं । अग्रणी मोबाइल निर्माता कंपनी Nokia जल्दी ही लेकर आ रही है Flexible Smartphone यानि अब आपको फोन गिरकर टूटने की चिंता परम्परा से साक्षात्कार*इस वर्ष की दीपावली, मेरे दोनों बेटों को एक लोक परम्परा समझाने का माध्यम बनी। * *मेरी भाभीजी की मृत्यु के बाद यह पहली दीपावली हमारे लिए ‘शोक की दीपावली’ थी। मेरे दोनों बेटे इसका अर्थ नहीं समझ पाए। 

खतों का ताबीज बड़े दिनों बाद चिट्ठी जैसी चिट्ठी आई। नागपुर वाले *आरीफ जमाली *साहब की चिट्ठी। जमाली साहब जब रायपुर आए थे, तब उनकी कुछ गजलें मैंने जरा इधर भी में पोस्ट की थी। उन्होंने चिट्ठी में कुछ बेहतरीन गजलें और भेजी..वशीकरण मंत्र आज सुबह एक दुकान गया , .....जाते - जाते वो सज्जन पुछ बेठे ......भाई , क्या आप के पास कोई वशीकरण मंत्र हैं , जिससे मैं सबको अपने वश कर सकू . मैंने कहा ........हैं ना. .....बोलने में आसान पर करने में मुश्किल...देह का मोह छोडे और इसे मानव कल्याण मे समर्पित करे.कुछ समय पहले मै जब मृत्यु के बाद देह के बारे में सोचता था तो यह पाता था की जब जानवर मरते है तो उनके भी शरीर की कुछ न कुछ उपयोग मानव कल्याण में आ ही जाता है किन्तु जब मानव मरता है तो यह अमृत का इक सागर है यह अमृत का इक सागर है बुद्धि पर ही जीने वाले दिल की दुनिया को क्या जानें, वह कुएं का पानी खारायह अमृत का इक सागर है ! तर्कों का जाल बिछाया है क्या सिद्ध किया चाहोगे तुम, जो शुद्ध हुआ मन,

बसंत आने पर( बसंत की माया बहुत ही प्रसिद्द है .....देखिये क्या होगा बसंत आने पर ) पत्ता-पत्ता हुआ पल्लवित फूलों पर बिखरी है आभा बूढ़ा मन भी युवा हो गया देख बसंत की माया // जाग उठी है अब तरुनाई सुन बसंत की शहनाई पाकर...कल सुनना मुझे ज़िन्दगी जाने किन किन राहों से गुजरी, कितने चौक चौराहे पर ठिठकी, कभी पगडण्डी कभी कच्ची तो कभी सख्त राह से गुजरी I ज़ेहन में न जाने कितनी यादें हैं जो समय समय पर हँसाती है, रुलाती है तो कभी गुदगुदाती है Iहाँ हम बुतों को पूजते हैं हाँ हम बुतों को पूजते हैं - आदमी तो बात बात पर -यूँ ही सरे आम खड़े खड़े धूजते हैं . न्यायकर्ता -कोमल बदन-मन नहीं होता . देने को तुझे भगवान के पास कोई धन- जतन नहीं होता . लोग कहते भी हैं - ये तो पत्थर हैं इनके..ई-पण्डित / ePandit - Hindi Tech Blog ISO (सीडी, डीवीडी, बीडी इमेज) फाइलें क्या होती हैं -सीडी, डीवीडी, बीडी इमेज फाइलें क्या होती हैं, इनके क्या उपयोग एवं लाभ हैं। [[ यह पोस्ट सामग्री का केवल एक अंश है।

बुधवार, 16 नवंबर 2011

जय हो! मीडिया के मठाधीशों की -- ब्लॉग4वार्ता -- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, मित्रों 4 नवम्बर के पश्चात ब्लॉग4वार्ता पर पोस्ट नहीं लग पाई, इस बीच ब्लॉग जगत की सैर नहीं हो सकी। वार्ता के अनवरत चलते सफ़र पर कुछ दिनों का अल्पविराम लग गया। आज फ़िर आए हैं वार्ता का अगला अंक  लेकर। सभी पाठकों  को शुभकामनाएं। कितने दिनों की प्रतीक्षा बाद कितने दिनों की - प्रतीक्षा बाद ... जब सुनी वो - ममतामयी ..करुणामयी .. अविरल ..अनवरत ... अनाहत नाद ...!!! सौभाग्य के बादल... उमड़-घुमड़ कर .. घन घन करते ...ढोल बजाते .... खोले जब उर के द्वार ...! देखा ..

मुगलिया सल्तनत के युवराज कल एक लेख लिखा था .......उसमे बेचारे आम हिन्दुस्तानी को भेड़ बकरी बना रखा है मैंने ........जोर जुल्म के खिलाफ आवाज़ उठानी चाहिए , चुप चाप नहीं सहना चाहिए ....क्रान्त...स्वर्ग वहीं नजर आयागहन जंगल ,गहरी खाइयां लहराते बल खाते रास्ते था अटूट साम्राज्य जहां प्राकृतिक वन संपदा का | थे कहीं वृक्ष गगन चुम्बी करते बातें आसमान से चाय के बागान दीखते हरे मखमली गलीचे से | हरी भरी वादी के आगे थी श्रंखला...आज़ाद पुलिस की उड़ीसा यात्रा मुंबई जा कर पुलिस और प्रशासन की स्थिति देखने के बाद अपने शहर गाज़ियाबाद से बाहर अन्य शहरों में जाकर पुलिस की स्थिति और व्यवस्था को देखने समझने की मेरी इच्छा और बढ़ गयी...

गंभीर, स्थापित ब्लॉगर मुफ्त का मंच छोड़कर खुद की वेबसाईट पर क्यों चले जाते हैं?पिछले वर्ष दुधवा लाईव वाले कृष्ण कुमार मिश्रा जी ने मोबाईल पर हो रही बातचीत में जब कहा कि आप गूगल के बहुत बड़े प्रशंसक हैं तो मैंने भी हामी भरी कि गूगल सामान्यजन की नब्ज़ बड़ी बारीकी से पहचानता है और उसी के अ...आज से ढाई वर्षों तक तुला राशि में बने रहेंगे शनिदेव ... कैसा रहेगा इनका आप पर प्रभाव ????वैसे तो ज्‍योतिष के अनुसार अपने जन्‍मकालीन ग्रहों के हिसाब से ही लोग जीवन में सुख या दुख प्राप्‍त कर पाते हैं , पर उस सुख या दुख को अनुभव करने में देर सबेर करने की भूमिका गोचर के ग्रहों यानि आसमान में समय...देशाटन, तीर्थाटन और पर्यटन -जिज्ञासु प्रवृत्ति मनुष्य को देशाटन, तीर्थाटन को प्रेरित करती है, वह अज्ञात को जानना चाहता है। यही अज्ञात को जानने की ललक उससे यात्राएं करवाती हैं। पहले लोग जीवन के उत्तरार्ध में तीर्थाटन करत...


सहकारिता यानी " सब के लिए एक और एक के लिए सब "सहकारिता का सप्तरंगी ध्वज आज देश के प्रथम प्रधान मंत्री पं.जवाहर लाल नेहरू का जन्म दिन है .हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आज के दिन को बाल दिवस के रूप में मनाया गया . सहकारी आन्दोलन के प्रति पं. नेहरू के यो...नीदरलैंड्स से पुष्पिता ने मेरे लिये स्वेटर भेजी बिना बांहों वाली स्वेटर के लायक सर्दियों के दिन हमारे यहाँ कम होते हैं। और जब आदमी के पास दिखाने लायक कोई शानदार स्वेटर कहीं से आ गयी हो तो ये दिन और भी कम लगते हैं। और बहुत दिनों पहले से उनकी प्रतीक्षा ...रूहानी प्यार "रॉक स्टार"वहमों गुमान से दूर दूर ,यकीन की हद के पास पास,दिल को भरम ये हो गया कि ........जी नहीं मैं ये अचानक सिलसिला की बात नहीं कर रही हूँ .वरन ना जाने क्यों जोर्डन और हीर का प्रेम देख ये पंक्तियाँ स्मरण हो आईं. ज...

माफ करना मिसेज बच्चन! जय हो! मीडिया के मठाधीशों की.... *बचाओ ऐसी बुद्धिजीविता से..* *जी हां। करा-धरा किसी ने**, और माफी मैं मांग रहा हूं। मिसेज बच्चन से। मिसेज बच्चन यानि ऐश्वर्या राय बच्चन। माफी इसलिए कि मैं मीडिया से जुड़ा ...बाबा रामू का प्रवचनएक दिन सुबह सुबह श्रीमती ने फ़रमाईश रख दी- " बाबा रामू आये हुये हैं आपको हमे प्रवचन में ले चलना होगा। हमने कहा भी कि भाई आज कल बाबा रामू में पहले जैसे योग नही सिखाते है फ़ोकट राजनैतिक प्रवचन झेलना होगा" " इश्क पर जोर नहीं "इश्क पर जोर नहीं " तुझको भुलाने की कसम खाई हैं खुद से सनम ! तुझको भुलाना मेरी फितरत नहीं मेरी मज़बूरी हैं दिलबर !! यह न कहना की हम बे -वफ़ा थे सनम ! बा -वफ़ा हमने भी दोस्ती खूब निभाई हैं दिलबर !! तुझ...

वार्ता को देते हैं विराम, मिलते हैं ब्रेक के बाद, राम राम

शुक्रवार, 4 नवंबर 2011

हिंदी ब्लॉगरों का दीपावली मिलन -- ब्लॉग4वार्ता -- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, सुबह-सुबह अखबार ने नहीं, महफ़ूज ने बताया कि पिटरोल का रेट बढ गया है। दिल्ली नखलेऊ नजीक होने के कारण महफ़ूज के पास समाचार जल्दी पहुंच जाता  है, मतलब सबसे तेज चैनल, महफ़ूज चैनल। जब इतना ही चलता है तो काहे हलाल करवा रहे हैं, दू-दू रुपया में तो बहुत नुसकान हो रहा है, सीधे सौव्वे पे आने दीजिए, तभे कुछ बात बनेगी। पिटरोल पंप पर भी छूट्टे का लफ़ड़ा रहता है, या फ़िर राजाए या मोझी के खाते से सब्सीडी आने दीजिए, जनता को राहत मिलेगी और उन्हे भी पूण्य लाभ। शायद इस पूण्य के प्रताप से अंदर से बाहर आ जाएं। खैर जो भी हो, इतनी भयानक खबर आहिस्ता आहिस्ता दिया करो महफ़ूज भाई। कहीं झटके से झटका ही न आ जाए, अभिए तो दीवाली निकली है :), अब चलते हैं आज की ब्लॉग4 वार्ता पर........

सबसे पहले चर्चा करते हैं इस वर्ष जल्‍द ही पडने लगेगी ठंड कभी अतिवृष्टि तो कभी अनावृष्टि को झेलना भारतवर्ष की मजबूरी रही है। इसी वर्ष जुलाई से सितंबर तक होनेवाले लगातार बारिश से देश के विभिन्‍न भागों में लोग परेशान रहें। जहां गांव के कृषकों को खेत की अधिकांश फसलो...टूटा हुआ खिलौना खुद ही मरहम पट्टी कर पहले जैसा जुड़ जाएगादेखने सुनने में भले ही अविश्वसनीय लगे लेकिन कल्पना की जा सकने वाली बात को साकार कर दिखाया है विज्ञान ने. दरअसल वैज्ञानिकों ने अब एक ऎसी तकनीक विकसित कर ली है जिससे टूटे खिलौनों, चश्मों के टुकड़े जोड़ने के ...दुनिया में इससे मीठा कुछ हो तो बताइए.आप कभी न कभी तो दूसरे की किसी बात पर ज़रूर झल्लाते होंगे...मैं भी झल्लाता हूं...चलो झल्लाने की बात बाद में, पहले कुछ मीठा हो जाए..ठंडा ठंडा, कूल कूल...क्या मात्र पच्चीस हज़ार डॉलर का चॉकलेट संडे खाएंगे......

जन-गण-मनराज्य स्थापना दिवस की 11वीं वर्षगांठ के अवसर आज राजभवन के दरबार हाल में राज्यपाल श्री शेखर दत्त ने छत्तीसगढ़ के प्रगतिशील स्वरूप एवं गौरवशाली परंपरा को दर्शाने वाली तथा राष्ट्रगान 'जन-गण-मन' पर आधारित लघु...बच्चों के साथ..............सीखने की नई शुरूआत...बच्चों के साथ हम बड़ों के लिए भी सीखने समझने की एक नई यात्रा आरंभ होती है। एक ऐसी यात्रा जो हमें फिर से बचपन में लौटा ले जाती है। ऐसा लगता है मानों जो कुछ आज तक सीखा है, जाना है वो सब भूलकर उन्हीं की तर...पिण्डारी ग्लेशियर यात्राअक्टूबर 2011 की सुबह करीब छह बजे मे...दुनिया गोल है----मेरी अपनी जिन्दगी में जब पहली बार किसी ने कहा था कि 'भाई, दुनिया गोल है' तो इस बात के पीछे छिपा गूढ़ रहस्य उस समय उजागर नहीं हुआ था. बस मन में कुछ-कुछ ऐसा ही ख्याल आया था कि इसमे कौन सी नई बात कह दी या 'य...

नकली चेहरा : असली सूरत !भारत में बोलती फिल्मों का इतिहास एक सौ साल का भी नहीं हो पाया है. हमारे यहाँ पहली बोलती फिल्म 'आलम-आरा ' सन 1931 में रिलीज हुई थी . उसके बाद तो जैसे आजादी के आंदोलन के समान...जाने दो मुझे, आज जाने दोबजने दो आज फोन की घंटियां मर भी जाए तो क्या है मर जाए एक और डेडलाईन। गुज़र जाने दो घंटों को पटरियों पर दौड़ती रेल की तरह। आने दो ई-मेलों को घबराए हुए कबूतरों की तरह भरने दो इनबॉक्स। जाने दो ट्रैफिक के शोर क...नई दुनिया में हिंदी ब्लॉगरों के दीपावली मिलन का समाचार3 नवंबर 2011 को नई दुनिया, भिलाई संस्करण में 30 अक्टूबर को हुए छत्तीसगढ़ स्थित हिंदी ब्लॉगरों के दीपावली मिलन का समाचार..

बस्तर में ब्रह्मजगदलपुर के रविराज ने फेसबुक पर कुछ पुरातात्विक तस्वीरें पोस्ट की हैं। उन्होंने जो जानकारी दी है, उसके मुताबिक ये तस्वीरें बस्तर के बीजापुर जिले के गांव मिरतुर की हैं। गांव भैरमगढ़ तहसील में है। उन्होंने दा...गुरु गोविन्द सिंह जी ****गुरु गोविंद सिंह जी * * * *जन्म ---22 दिसंबर 1666 ई. * *मृत्यु ---7 अक्तुम्बर 1708 ई. * * * आज के भौतिक युग में अपने बहु संख्यक होने के कारण देश के शासन -प्रशासन में अपना प्रभुत्व कायम हो जाने के कार...आदिवासी कला-सामग्रियों का एक ऐसा भी संग्रहपत्रकारिता के अपने शुरुआती दिनों में मेरी एक धारणा ये बनी थी कि कला-वस्तुओं के निजी संग्रह का शौक 'चोर-वृत्ति' को बढ़ावा देता है। और यह बात मैंने अपने एक आलेख (नयी दुनिया-इंदौर) में लिखी भी थी। इसलिए उस ...

जबकि ऐसी कोई वजह नहीं...इन सुस्ताई हुई रातों की भोर के पहले पहर में आने वाले ख्वाबों में बच्चों की सेहत और एक उपन्यास जितना लम्बा अफ़साना लिखने के दृश्य होने चाहिए थे. लेकिन आज सुबह बदन में ठण्ड की ज़रा झुरझुरी हुई तब देखा क...चल बे .......पैसे निकाल ........चल त्यौहार मना छठ पूजा का त्योहार बीत गया, ........ अखबारों में खूब चर्चा रही ...........बाजारों में खूब रौनक रही ............खूब खरीदारी हुई .............आदमी पे आदमी चढ़ा जा रहा ...पशु-बलि : प्रतीकात्मक कुरिति पर आधारित हिंसक प्रवृतिईद त्याग का महान पर्व है, जो त्याग के महिमावर्धन के लिए मनाया जाता है। हमें संदेश देता है कि हर क्षण हमें त्याग हेतू तत्पर रहना चाहिए। प्रेरणा के लिए हम हज़रत इब्राहीम के महान त्याग की याद करते है। किन्तु ...

मिलते हैं ब्रेक के बाद -- राम राम............

गुरुवार, 3 नवंबर 2011

हाथों में अर्घ्य और सजल नयन में प्रतीक्षा .. सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक छठ व्रत .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी



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संपूर्ण चराचर जगत को अपने आलोक से प्रकाशित करने वाले भगवान सूर्य की आराधना-उपासना अनादि काल से होती रही है। इसी क्रम में कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तक मनाए जाने वाले सूर्य षष्ठी पर्व का महत्वपूर्ण स्थान है। बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और झारखंड के जन-मन में बसे इस पर्व को 'छठ महापर्वÓ भी कहा जाता है। इस पर्व में भगवान सूर्य को अघ्र्य दी जाने वाली सामग्री कच्चे बांस की टोकरी (डाला) में रखकर नदी या तालाब किनारे तक ले जाई जाती है, इसलिए इसे 'डाला छठÓ के नाम से भी जाना जाता है।

सूर्य और षष्ठी तिथि के पूजन की परम्परा जो आज मात्र भोजपुरी , मैथिली क्षेत्र मे सिमट गयी है । यह सूर्य पूजा कभी अफ़्रीका , अमेरिका महाद्वीप तक फ़ैली थी । सूर्य पूजा की परम्परा आदित्य कुल के भार्गवो ने शुरु करायी । हिस्टोरियन हिस्ट्री आफ़ दी वल्ड एवं मिश्र के पिरामिडो से मिले प्रमाणो के अनुसार महर्षि भृगु के वंशज भार्गवो ने जिन्हे इस महाद्वीप पर हिस्त्री , खूफ़ू ..., मनस नामो से जाना गया । इन लोगो ने यहां सूर्य पूजा की परम्परा हजारो साल चलायी । इस तथ्य की जानकारी मिश्र के अलमरना मे हुई खुदाई से मिले पुरातात्विक साक्ष्यो और अमेरिकी विद्वानो कर्नल अल्काट , ए0डी0मार , प्रो0 ब्रुग्सवे के शोध ग्रन्थो से की जा सकती है ।

कालिम्पोंग में छठ पर्व की तैयारी जोरशोर से होने लगी है। यहां के मेला ग्राउंड में साफ-सफाई भी तेजहो गया है। इसके तहत ग्राउंड में व्रती महिलाओं केपूजा करने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है औरउनको किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हो, इसकाध्यान भी रखा जा रहा है। यहां के हिन्दी भाषीलोगों में इस पर्व को लेकर खास उत्साह है औरइसके कारण वह जमकर खरीदारी में लगे हुए हैं।यही वजह है कि पूजन सामग्री के अलावा फल वअन्य सामान के मूल्य में भी वृद्धि हो गई है। यहां के वृद्ध लोगों ने बताया कि कालिम्पोंग में छठ पूजाकी शुरूआत वर्ष 1905 में हुई थी। उस समय यहां हिन्दी भाषी और बिहार के लोगों की आबादी कमथी। इसके बाद धीरे-धीरे आबादी बढ़ती गई और यह पर्व से महापर्व बन गया।

आधुनिकता के इस युग में भले ही गीतों के बोल बदल गए हैं लेकिन छठ पूजा के गीतों का आंचलिक पारंपरिक तरीका आज भी श्रद्धा की लहरें पैदा करता है। पूजा के गीतों के बोल आज भी अनमोल हैं। लोक आस्था का महापर्व आते ही बाजार से लेकर घर तक छठ पूजा के गीत बजने लगे हैं। छठ पूजा के गीतों का अपना एक अलग बाजार व अपनी एक अलग छटा है। इस पावन पर्व के गीतों में भी इतनी आस्था है कि गीत बजते ही लोगों का सिर श्रद्धा से नव जाता है। छठ की शाम के अ‌र्घ्यदान के दिन तक इसके कैसेटों की बिक्री होती है। घाट से लेकर घर तक हर जगह इसके गीतों की गूंज सुनाई पड़ने लगी है।

हाथों में अर्घ्य और सजल नयन में प्रतीक्षा, जल में ध्यानस्थ व्रती महिलायें, तट पर पथ निहारते अंशुमान को श्रद्धालु। पूर्व क्षितिज में उदित हुए रक्ताभ दिनकर। बांस के हरे सूपों पर गिरी अरुणिमा और व्रतियों का मन हुआ प्रसन्न। सूर्यदेव ने स्वीकार की आराधना। पूर्ण हुआ छ्ठ महाव्रत। मिला छ्ट्ठी मैय्या का आशीष। हरित कदलीस्तम्भों से निखरा माई का घाट और दीप-श्रृंखला से झिलमिलाती दीपमालिकायें।

भगवान सूर्य की उपासना का व्रत छठ अब सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक बन रहा है | भारत के बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में पूरे नियम और कायदे से मनाया जाने वाला छठ पूजा न केवल धर्मं की दीवारें तोड़ रहा है बल्कि देश की सीमाओं से बाहर जाकर अमेरिका और ब्रिटेन में भी अपना असर दिखा रहा है | छठ पूजा के दिन आस्था और श्रधा के साथ व्रत रखते हैं | बिहार में सूर्य उपासना की प्राचीन परंपरा रही है , यही कारण है की वहाँ दर्जनों सूर्य मंदिर हैं | बिहार में गंगा क्षेत्र से सूर्य षष्ठी व्रत प्रारंभ हुआ था | प्रथ्वी की तमाम सभ्यताओं में विभिन्न नामों से सूर्य की उपासना की जाती रही है , लेकिन इस पूजा में ही डूबते हुए सूर्य का सम्मान करते हुए उसे अर्घ्य दिया जाता है | ये विचार इस पूजा को औरों से विशिष्ट 


बनता है |

स्वस्ति श्री पत्र लिखा बंगलुरु से करण समस्तीपुरी के तरफ़ से छट्ठी मैय्या और बाबा सुरुजदेव के चरण-कमलों में सादर प्रणाम पहुँचे। व्रती महिलाओं को शुभकामनाएं और बिलागर बंधु-बांधवों को छ्ट्ठी मैय्या का आशीष।
आगे बात-समाचार सब तो ठीक है। मगर तत्र कुशलं अत्र नास्तु। एक तो आप वरुण देवता का पावर सीज करि रखी हो...! महराज रेवाखंड पर बरसिये नहीं रहे हैं बरसों से...! उपर से आपकी सौतिनिया डीजल-पिटरोल का दाम भी अकास ठेका दी है...! उ तो धन्य हो रेवाखंडी उत्साह... कि खेत सुखाए तो सुखाए मगर दमकलो से पोखर भरकर आपका अरघ जरूर उठाता है।

हमारे यहां भी छठ का त्‍यौहार बहुत हर्षोल्‍लास के साथ मनाया गया।

छठ के और कुछ चित्र आपको यहां  दिखाई देंगे !!

बुधवार, 2 नवंबर 2011

बंद मुट्ठी और ओस में लिपटी एक रात --- ब्लॉग4वार्ता -- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, चलते हैं आज की ब्लॉग4वार्ता पर ...... राज्य पूर्व के समाज : बेहतर जीवन की ओर-8 अनवरत इस श्रंखला के पिछले आलेख में मैं ने कहा था कि मनुष्य ने अपने जीवन के दो लाख वर्षों का लगभग 95 प्रतिशत काल बिना किसी राज्य व्यवस्था के बिताया ... और कि राज्य कोई ऐसी संस्था नहीं जिस के बिना मनुष्य जीवन संभ.. Mrs. Padma Sundaram, a great Hindutvavadi passed away *November 1, 2011 * *Late Mrs.P Sundaram* * * *Kartik Shukla 6, Kaliyug Varsha 5113* *From Our Correspondent : * *Mrs. Padma Sundaram, wife of former IAS officer and former associate editor of News Today,...तुम्म्हारी आँच  जीवन की सर्द और स्याह रातों में भटकते भटकते आ पहुँचा था तुम तक उष्णता की चाह में और तुम्हारी ऑच जैसे धीरे धीरे समा रही है मुझमें ठीक उसी तरह जैसे धीमी ऑच पर रखा हुआ दूध जो समय...

असर अब वो मुझमें कमियाँ बताने लगा है, चाहता है या फिर सताने लगा है ? अजनबी थे तो दोनों तरफ जिंदगी थी, अब वो हर बात अपने ढंग से बताने लगा है कभी ये शर्त थी कि मुझे मेरे नाम से बुलाना, अब वो सब नाम मुझे खुद स..दिवाली के बाद :दीप सब बुझ चुके हैं तेल सब हो गए हैं ख़त्म बाती जल चुकी है आधी कैसी यह उदासी (?) *२.* सड़क के उस ओर के कुछ बच्चे सुबह सुबह बीन रहे हैं अधजले पटाखे, फुलझड़ियाँ दिन भर सुखायेंगे उन्हें शाम को होगी उन... हीरो व ऎलेक्ज़ेंड्राईट की खदानो पर अब नक्सलियों का कब्ज़ा है जिसके भरोसे राज्य को टैक्स फ्री ज़ोन बनाने का सपना देखा गया था.. छत्तीसगढ पर खनिजों के मामले में ईश्वर की विशेष कृपा है.यंहा लोहे की खदानो के अलावा पहाड भी है.चूना पत्थर भी भरपुर है और शायद ही कोई बडा सिमेंट निर्माता हो जिसका यंहा कारखाना न हो.सामरिक महत्व का खनिज टीन ...

आत्महत्याअपने चुन्नु भाई ब्लाग जगत में गुस्साये घूम रहे थे हमने पूछ लिया - " क्या हुआ चुन्नू भाई सब खैरियत तो है।" वे भड़क गये, बोले -" दवे जी पिछले साल छह लाख लोगो ने आत्म हत्या कर ली। ये बेगैरत और मर जाता तो कितना...न्यू-मीडिया : नये दौर की ज़रूरतअंतर्जाल पर भाषाई के विकास के साथ ही एक नये दौर में मीडिया ने अचानक राह का मिल जाना इस शताब्दी की सबसे बड़ी उपलब्धि है.विचारों का प्रस्फ़ुटन और उन विचारों को प्रवाह का पथ मिलना जो शताब्दी के अंत तक एक कठि...फूलों की घाटीपुष्पघाटी की एक अलसायी सुबह पुष्पगंगा के सलिल पर पौड़कर मन तिर रहा था कुहरे की परतों पर अचानक छिछलते हुए पैठ गया अन्दर। ब्रह्मकमल की भीनी ख़ुश्बू निःशब्द अतीत की गहराइयों में खोलने लगा अवगुण्ठन इस अजर अमर ...

हिन्‍दू गर्ल्‍ज कॉलेज जगाधरी में यूथ फैस्‍टसंस्कृति से होती है प्रदेश की पहचान: अकरम खान- -कोरियाग्राफी में हिंदू गल्र्स कालेज ने मारी बाजी-* जगाधरी। किसी भी प्रदेश की पहचान उसकी संस्कृति से होती है। युवा महोत्सव ऐसा मंच है, जहां पर युवाओं को संस्...आज का सन्देश समर्पण क्या है. आपका जीवन किसे समर्पित है. इसके विषय मे आत्म-मंथन जरुरी है. मन कहीं, तन कहीं और दिमाग कुछ और करे, तो सोचना होगा, आप किसे समर्पित है.* - *सयाने/Sensible मानव पुरुषार्थ क...दूर से लगता हूँ सही सलामतमैं इससे दूर भागता रहता हूँ कि ज़िन्दगी के बारे में सवाल पूछना कुफ्र है. ये क्या सोचते हो? ऐसे तो फिर जीना कितना मुश्किल हो जायेगा? इस सवाल को रहने दो, जब तक है, अपने काम में लगे रहो... इन गैरवाजिब बा...


हेमन्त की एक सुबह लगता है कि इस वर्ष सर्दी कहीं सोयी रह गयी है. नवम्बर शुरु हो गया लेकिन अभी सचमुच की सर्दी शुरु नहीं हुई. यूरोप में हेमन्त का प्रारम्भ सितम्बर से माना जाता है. अक्टूबर आते आते ठँठक आ ही जाती है. मौसम की भव...टुकड़ों -टुकड़ों में बँटी हुई ज़िन्दगी..टुकड़ों -टुकड़ों में बँटी हुई यह जिन्दगी | हर एक टुकड़ा मांगता है अपना हिसाब मजबूर हूँ तलाशने को , उनके लिए रोज़ , नये नये जबाब| अपने दायित्वों का, बोझ में बदल जाना | जिन्दगी की रफ़्तार को कुछ और कम...अब सिर्फ गेंदा फूल भर नहीं है रायपुरराज्योत्सव के प्रसंग पर विशेष* *-*संजय द्विवेदी * *अभिषेक बच्चन की पिछले दिनों आई फिल्म दिल्ली-6 के गाने-‘*सास** **गारी देवे **, **देवर जी समझा लेवे**, **ससुराल गेंदा फूल...**’**.* में रायपुर का भी जिक्...

एक दृश्य.......यह भी..सन्डे'की सुबह 'पॉश'- 'कालोनी' के 'फ्लैट' की 'बाल्कनी' में , जो एक लम्बा सन्नाटा बिछ जाता है........ शनिवार की रात का 'साइड -इफेक्ट' साफ़ नज़र आता है. मंथर-गति से सुगबुगाहट सी होती है, पर्दे सरकते हैं , क...ओस में लिपटी एक रात.... तुम्हारे नर्म होठों का ख्याल आज फिर चूम गया मेरे गालों को तुम्हारी भीनी-सी साँसों की आवाज़ सुबह-सुबह महका गयी मेरे बालों को तुम्हारे बदन की चांदनी रात भर गुदगुदाती रही मुझे तुम्हारी हथेली की गर्मास ह...ग्यारह साल का छत्तीसगढ़ : फेसबुक पर जनता की राय .ग्यारह साल का छत्तीसगढ़ : नाटे का नाटा अर्थात उम्र तो बढ़ गई किन्तु शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक विकास ज्यों का त्यों, आपकी क्या राय है .....

बंद मुट्ठी.... संध्या शर्माबंद मुट्ठी में लिए बैठा है,* * सपने, अपने और * * और पीपल की घनी छाँव* * नहीं समझे ना...* * समझ भी नहीं सकोगे कभी* * तुम्ही तो छोड़ आये थे* * बेच आये थे उसे* * अपनी सोने सी धरती* * मिट्टी के मोल* * **नहीं तो...इन बातों को आप जानते हैं, फिर भी दोहरा रहा हूँशल्यचिकित्सा के जनक सुश्रुत हैं। - 'सिद्धान्त शिरोमणि' के रचयिता हैं सुविख्यात भारतीय गणितज्ञा एवं ज्योतिषाचार्य भास्कराचार्य! - पृथ्वी के द्वारा सूर्य की परिक्रमा करने में लगने वाल...प्यार की जलधारा !छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर विशेषएक परीक्षा है.......जीवन ....!ये कैसी प्रक्रिया है ..... क्या मेरी प्रतिक्रिया है... समेटना ...सहेजना ...संजोना ...संवरना-संवारना ..... खिलना- खिलाना ... दूर रहकर भी बहुत पास रहना ...या ... पास रहकर भी बहुत दूर रहना .... जीवन की आका...

मिलते हैं ब्रेक के बाद, राम राम

मंगलवार, 1 नवंबर 2011

एक ठोकू कविता, छुक छुक गाड़ी और राज्योत्सव --- ब्लॉग4वार्ता --- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, आज छत्तीसगढ राज्य का स्थापना दिवस है, इस अवसर पर सभी मित्रों को हार्दिक शुभकामनाएं, छत्तीसगढ राज्य उतरोत्तर तरक्की करें। मैं दो राज्यों के निर्माण का साक्षी रहा हूँ, 1 नवम्बर को छत्तीसगढ एवं 9 नवम्बर को उत्तरांचल, उत्तरांचल के देहरादून के कार्यक्रम में भी शामिल होने का मौका मिला। इस एतिहासिक दिन को विस्मृत कर पाना कठिन है। उत्तरांचल राज्य के लिए आन्दोलन कारियों ने बहुत लाठी डंडे खाए एवं अपने प्राणों की आहूति दी। हुतात्माओं को विनम्र श्रद्धांजलि। 11 वां वर्ष है राज्य निर्माण का, इन वर्षों में यह जाना है कि बड़े राज्यों की अपेक्षा छोटे राज्य अपने संसाधनों पर तेजी से विकास करते हैं और छत्तीसगढ में यह विकास दिखाई देता है। आज गिरीश पंकज जी का जन्मदिन है उन्हे ढेर सारी शुभकामनाएं और चलते हैं आज की ब्लॉग4वार्ता पर...........

एक और एक ग्यारह ; छत्तीसगढ़ इलेवन से वार्ता प्रारंभ करता हूँ,सोने का पिंजर ... अमेरिका और मैं सोने का पिंजर ... अमेरिका और मैं ... पिछले कुछ दिनों पूर्व मुझे डा० अजीत गुप्ता जी द्वारा लिखी यह पुस्तक पढने को मिली ... पुस्तक को पढते हुए लग रहा था कि सारी घटनाएँ मेरे सामने ही उपस्...हर की दून, भाग 3  सुबह दस बजे से चलते-चलते दोपहर के एक बजने वाले थे, अपुन को तो कुछ नहीं हुआ क्योंकि पानी जगह-जगह उपलब्ध था। लेकिन सांगवान को चाय की हुडक लगी थी मार्ग में एक दो जगह इस बारे में बात भी होती रही कि अगर चाय की इच..साधू अब नहीं आएगा खेत पेनेता हमारे ...हमेशा परेशान रहते हैं............आखिरी पायदान पे खड़े उस बेचारे गरीब के लिए .....जी मचल रहा है बेचारों का .....कुछ कर गुज़ारना चाहते हैं ......काफी कुछ कि...
 
सूजी आँखेंआज रात भर ........... जम कर बरसेंगे बादल तुम , मानो या न मानो पर....... मेरी इन बेमौसम बरसातों से तुम्हारा..... रिश्ता पुराना है . कसम है... मुझे ,तुम्हारी जो मेरी इन लाल ,सूजी हुई आँखों में सिवा तेरे ना...'बोल' के बोलमारना ज़ुर्म है तो पैदा करना क्यों नहीं ?'' ''नाजायज़ बच्चा पैदा करना गुनाह है तो जायज़ बच्चों की लम्बी कतार जिसकी परवरिश नहीं कर सकते गुनाह क्यों नहीं है ?'' ये सवाल ऐसे हैं जिससे दुनिया के किसी भी मुल...दीवाली खास क्यों?पिछले महीने कुछ निजि कारणों से अपनी ब्लागरी में व्यवधान आया। दीवाली का त्यौहार भी उन में से एक कारण था। बेटी और बेटा दोनों बाहर हैं, तो परिवार के चारों जन ऐसे ही त्यौहारों पर मिलते हैं, दीवाली उन में ख...
 
नाग नथैयाचित्र राष्ट्रीय सहारा के वाराणसी संस्करण से साभार। पूरा समाचार यहाँ पढ़ सकते हैं।* * * यह वाराणसी के तुलसी घाट पर 400 वर्षों से भी अधिक समय से प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला लख्खा मेला है। इसकी शुरूवात गोस्...बर्फ़ के फ़र्श परजिस,बर्फ़ के फ़र्श पर हम-तुम,चले थे,चार कदम,साथ-साथ वो,अभी पिघली नहीं है--- बेशक: ,छूटे हुए कदमों के निशां,दिखते नहीं हैं पर,उस पिघली हुई,बर्फ़ के फ़र्श पर--------- इंतज़ारों में,नज़र आते हैं,अब तल...मेरा आने वाला कार्यक्रमनमस्कार दोस्तों आज कहने की बात यह की मैंने आसाम के लोकल चैनल DY365 http://www.dy365.in/programmes.php में जो की कोमेडी किंग के नाम से प्रसारित किया जाएगा में आडिशन दिया है और आप सब की दुआ से दुसरे राउंड के...
 
खुश, सुखी व स्वस्थ रहना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं है।कुछ बातें अति साधारण लगती हैं, पर होती बडे काम की हैं। इनकी जानकारी जो बहुत लाभदायक होती हैं और अधिकांश लोगों को मालुम भी होती हैं, पर सब कुछ याद नहीं रह पाता। इसलिए इन सब बातों को जो जीवन में अहम महत्व र...छत्तीसगढ का राज्योत्सव :किसका राज्य और कैसा उत्सव.छत्तीसगढ को अस्तीत्व मे आये 11 साल हो गये है.हर साल गिरह पर राज्योत्सव मनाया जाता है.इस बार भी धूम मची हुई है.पूरा राज्य झूमेगा नेता जो सरकार मे है वे इतरायेंगे और जो विपक्ष में हैं आंसू बहायेंगे,ठीक वैसे ..."प्रवासी भारतीय " क्या होते हैं प्रवासी भारतीय, तो आपकी जानकारी के लिए बताना चाहूँगी कि भारतीय प्रवासी वह लोग हैं जो भारत छोड़ कर विश्व के दूसरे देशों में जा बसे हैं। प्रवासी भारतीय दिवस प्रति वर्ष भारत सरकार द्वारा ९ जनवरी...
 
नमकीन खीरमेरे ज़ख्मों पर छिडकते हो जब भी नमक , तो खाने में झर जाता है नमक सारा और नमकीन हो जाती है खीर भी . सब बढ़िया है....आधुनिकता के दौर में, टूटा हर सुख सपना, हुए स्वार्थी रिश्ते नाते, मीत बचा न कोई अपना, खींच खांच के चलती गाड़ी लढ़िया है... सब बढ़िया है...... टूटी फूटी खटिया पर, बैठा अध्यापक, जनगणना, मतगणना का हर काम है व...निजता में उसको पा जायेनिजता में उसको पा जाये धन कमाता चैन गंवा कर चैन कमाता धन गंवाकर, कैसा अद्भुत प्राणी मानव रह जाते दोनों खाली कर ! श्वास श्वास में भर सकता था बड़े परिश्रम से वह पाता, सहज ही था जो मिला हुआ दुगना श्रम कर उसे म...
 
अमीर भारत की जनता को गरीब बनाने वाले काले अंग्रेजयह तो हम सभी जानते हैं कि सोने की खदानें भारत में न तो आज हैं और न कभी पहले ही थी। फिर भी इतना सोना था भारत में कि उसे "सोने की चिड़िया" कहा जाता था। फिर प्रश्न यह उठता है कि आरम्भ ले लेकर अठारहवीं शताब्द...नवभारत में हिंदी ब्लॉगरों के दीपावली मिलन का समाचार31 अक्टूबर 2011 को नवभारत, भिलाई संस्करण में 30 अक्टूबर को हुए छत्तीसगढ़ स्थित हिंदी ब्लॉगरों के दीपावली मिलन का समाचारट्रैफिक जाम में फंसे हम बेचैन खड़े थे---दिल्ली की दीवाली की एक खास बात यह है कि दशहरे के बाद से ही सड़कों पर पुलिस के बैरिकेड लगने शुरू हो जाते हैं । यह सिलसिला तब से ज्यादा हुआ है जब कुछ वर्ष पूर्व दीवाली पर बम धमाकों में कई लोगों की जान चली गई ...
 
एक ठूँसू और ठोकू कविता .क्या लिखूं, ये सोच रहा हूँ कुछ सूझ गया तो ठीक वरना कुछ भी लिखने के नाम पे - ठोक दूंगा ! पढ़ने वालों की भी कोई कमी नहीं है वैसे भी ज्यादा से ज्यादा गिने-चुने पाठक ही तो - पढ़ने आते हैं आएंगे तो ठीक, और नहीं...बस धन्यवाद कहना हैपिछले दिनों जन्मदिन पर इतनी बधाईयाँ और प्यार मिला जिसे भूला नहीं पाउंगी कभी..और ये सिलसिला अब तक नहीं रूका है ... मेरे बच्चो, भाईयों और परिवार ने चकित कर दिया पूरे २४ घंटों तक ... जैसा उधर पा रही थी वैसा ...विकसीत -घरविकसीत-घर की परिकल्पना , या जुआ -घर रंग-मंच मानिंद आरम्भ है , फरमान ,अहसान ,पीड़ा ,अपमान , सम्मान ,कुंठा व्यथा , अभिमान का घर / अभिजात्य होने का दंभ, आदर्शों से कहीं दूर , छल,छद्म,घात-प्रतिघात , शिष्टता ,...
 
उदय और आम्रपाली के साथ छुक-छुक गाड़ी मेंअभनपुर जंक्शन भाई दूज मनाने का चलन बढा, जब से गाँव के घर-घर में गाड़ियाँ हुई, लोग पहुंच जाते हैं बहन-बेटियों के घर। हाल चाल के साथ साक्षात्कार भी हो जाता है, बहन-बुआ भी खुश कि पीहर से भाई-भतीजा आया है मिलने...इंतजार...नर्म मखमली घास पर नंगे पांव धीरे-धीरे चलते हुए उन्हें घंटों बीत चुके थे. उनमें कोई संवाद नहीं हो रहा था. न बोला, न अबोला. वे अपने-अपने एकांत में थे. एक साथ. वे एक-दूसरे के बारे में जरा भी नहीं सोच रहे थ...दुई ठो टइटूराजेशजी, मैं अभिषेक बोल रहा हूँ? आप बीजी तो नहीं हैं?' - मैंने संभलते हुए कहा। मुझे याद है एक दिन राजेशजी ने एक मिस्ड कॉल के जवाब में किसी को ब...
 
राम राम, मिलते हैं एक ब्रेक के बाद, अगली वार्ता में.............

एक चटका इधर भी हो जाए

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