शनिवार, 31 दिसंबर 2011

नूतन वर्ष की अशेष शुभकामनाएं....ब्लॉग़4वार्ता .... संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार...
जाने वाले को विदा और आने वाले का स्वागत  करना यही हमारी भारतीय संस्कृति है. हर साल की तरह दिसम्बर का महीना अपने साथ कडकडाती हुई ठण्ड और नए साल की आहट लेकर आता है. हम ठहरे उत्सवधर्मी.  प्रत्येक क्षण, प्रत्येक दिन आनंद और उत्साह से बिताया जाये यही सिखाया है हमारी संस्कृति ने हमें... 2011  के विदा और 2012  की स्वागत बेला करीब है. 

नया वर्ष, नयी दिशा, नयी सोच, नयी कामना, नयी आस, नयी भावना 
के  साथ स्वागत कीजिये नए साल का
आप सभी को नूतन वर्ष की अशेष शुभकामनाएं....

शब्द-शब्द उलझ जाने दे कविता-कहानी से बहल जाने दे रौशन रहेगा अक्षरों में लौ एक गीत को गज़ल हो जाने दे शाखों पर रुत आयेंगी और जायेंगी मेघों को दरख्तो पर बरस जाने दे राग और विराग का नाद बिखरा है यहाँ स...
वर्ष कहता है - मेरा नया आरम्भ तुम्हारा हो ..
विदा की बेला में रुकने की बात कर क्यूँ मेरे मन को कातर कर रहे हो विदा का जश्न मनाते तुम तो घड़ी की सुइयों में अटके हो कब १२ बजे और नया साल आए ... आँखें तो मेरी छलकने को हैं कुछ पल के लिए मेरी सोचो ...
शुभ हो नया वर्ष
शुभ हो नया वर्ष चलो एक बार फिर करें स्वागत नव वर्ष का ! यूँ तो सृष्टि हर क्षण नयी है उपजती है, मिटती हैउमडती है, गिरती है बनती है पल-पल अपनी गरिमा में कुछ और ही...नहीं था हिमालय का उत्तंग शिखर लाखों वर्ष प...
नव वर्ष ...डा श्याम गुप्त की कविता....
*पहली जनवरी को मित्र हाथ मिलाके बोले , वेरी वेरी हेप्पी हो न्यू ईअर, हेमित्रवर | हम बोले शीत की इस बेदर्द ऋतु में मित्र , कैसा नव वर्ष तन काँपे थर थर थर | ठिठुरें खेत बाग़ दिखे कोहरे में कुछ नहीं ...
आज ही के दिन नेता जी ने फहराया था अंडमान में राष्ट्रीय ध्वज
आज का दिन अंडमान में काफी महत्व रखता है. आज सुबह जब मैं पापा के गेस्ट-हॉउस में जा रही थी तो देखा कि नेता जी स्टेडियम के सामने राष्ट्रीय झंडा फहराया जा रहा है. मैंने सोचा कि आज क्यों झंडा फहराया जा रहा है ?...
ख्याल
जला के राख़ कर अब मेरे सब ख्यालों को ख्याल तेरा ही बस एक मेरे सर में रहे, कशिश ये हुस्न-ए-बुतां जिससे मांग लाया है वही नूर-ए-खुदा बस मेरी नज़र में रहे, तेरा ही ज़ोर मेरे दस्त-ओ-बाज़ू में  तेरी ही कु...
जिस्म तो बहुत मिलते है पर यहॉं प्यार नही मिलता हथेली पर लिए दिल खड़ा हूँ कोई खरीदार नही मिलता। कोई तो बताए पता मुझे उस दुकान का जो बेचता हो वफा वो दुकानदार नही मिलता। कैसे करू यकीं तेरी वफा पर त...
कैसे छुपा ले
 करीब से गुजरती हवाओ से कैसे कह दूँ कि तेरी खुशबू छुपा ले माना रात गहरी है अंधेरो से कैसे कह दूँ कि जुगनू छुपा ले आसमान पर सितारे सजे है चाँदनी से कैसे कह दूँ कि चाँद छुपा ले तू शहर में मशहूर बहुत ...
नये साल की खुशी मनाएं.....
*नए साल की खुशी मनाये... * मिली देश को आजादी, जन जन का मन हर्षाया पर भारत माता के ह्रदयघाव, कोई देख न पाया, वीर सपूतों ने दी थी कुर्बानी,अपनी जान गंवाकर मिटा दिया अ...
"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते"
 समझे न कोई अपना, सब दीन नज़र से देखें हों क्षमताएं असीम चाहे पर दोष अकूत आरोपें. शमित किया जिसने भी अपनाया ,कटु स्वरों से गोंदा सर्वस्व दिया अपना , पर अंत एकाकी पाया...
"माना कि मूल धन 'क' है"
गणित के पाठ्यक्रम में प्रारम्भिक कक्षाओं में अज्ञात राशि की गणना करने में बहुधा पहले अज्ञात राशि को मान लेते है कि वह 'क' है | तत्पश्चात उस काल्पनिक राशि के अन्य विवरण अनुसार उसकी व्य...
नितांत गोपनीय परंतु ओपनीय : चिट्ठाकार कहीं के मिल रहे हैं एक जनवरी बारह को - ग्‍यारह से बारह का चिट्ठाकारी सफर
 खबर आ रही है बहुत तेज चैनल है अब न्‍यू मीडिया मालूम ही नहीं चलता खबर कहां से आ जाती है खबर कहां चली जाती है मच जाता है हल्‍ला चाहे दिन हो साल का पहल्‍ला चिट्ठाकारी के लिए रुपहला इसे कहा जाता है नहले पर दहल...
नहीं सुमन सौगन्धों से
जीवन तो जीना पड़ता है, ना चलता अनुबन्धों से मनमानी जीवन में हो ना, शासित है प्रतिबन्धों से भले सोचकर कदम बढायें, अनहोनी होती रहतीं फिर भी कोशिश दूर रखें हम, जीवन को दुर्गन्धों से प्यार हुआ पहला तबतक म...
दिल सपने संजोने लगेगा  
 मत बतावो किसी को अपनी ख़ुशख़बरी उसको दुख होने लगेगा। ऊपर से वह ख़ुश दिखेगा, पर उसका अन्तर
रोने लगेगा।। अपने घाव भी मत दिखावो किसी को, वह उसमें उंगली पिरोने ... 
ज़रा सी जिंदगी, जीने का बहाना निकले... ये नया साल भी थोड़ा सा, पुराना निकले... ज़रा सा प्यार वो करें, तो बहुत सा तडपे... ये प्यार का ज़रा उल्टा सा, फसाना न... 
जीवन तो जीना पड़ता है, ना चलता अनुबन्धों से मनमानी जीवन में हो ना, शासित है प्रतिबन्धों से भले सोचकर कदम बढायें, अनहोनी होती रहतीं फिर भी कोशिश दूर रखें...
कहीं और से ... 
  * * *ये ब्रह्माण्ड * * * भले ही मैं बिछ जाता हूं तुम्हारे संकेत मात्र से किंतु एक दिन ये ब्रह्माण्ड मेरे चुम्बनों की ध्वनि से भर जाएगा ! * * ** *हि... 
 कैसा रहेगा आपके लिए 29 और 30 दिसंबर का दिन ??
मेष लग्नवालों के लिए 29 और 30 दिसंबर को किसी सामाजिक कार्यक्रम में पिता पक्ष का महत्व दिखाई देगा, कर्मक्षेत्र में भी आपको बडी जबाबदेही मिल सकती है। काफी ...
 ख़बर है - आगे बस डूब ही डूब है ,जाग ही जाग
लौटते हुए इन गीतों तक,वहीदा तक इस घड़ी सब ख़ाली है…ये लम्हा ख़ाली ,इसका क़तरा-क़तरा ख़ाली । ख़ाली कमरा, फ़र्श पर रखी कुर्सियां ख़ाली … कुछ भी दर्ज़ नहीं म...  
 नई ग़ज़ल/ सचमुच कितना पगला है वो....... 
*'सुख खोजूंगा' निकला है वो कितना तन्हा-तन्हा है वो उसकी गलती माफ़ भी कर दो जैसा भी है अपना है वो मंजिल वो इक दिन पायेगा गिरता मगर संभलता है वो मंजिल आखिर पा... 
 मैं और मेरे कवि मन के घर आँगन में 
इस १९ दिसंबर में मेरा ब्लॉग ...पूरे ३ साल का हो गया ....अपनी व्यवस्ता और कुछ बीमार होने की वजह से मैं ये पोस्ट पहले नहीं डाल सकी ...पर आज मन हुआ कि ...आप स...
मैं और मेरी तन्हाईयाँ -----! 
  * * * * मैं और मेरी तन्हाईयाँ * * *"अपने फ़साने को मेरी आँखों में बसने दो !* *न जाने किस पल ये शमा गुल हो जाए !" * बर्फ की मानिंद चुप -सी थी मैं ----क्या कहूँ ? कोई कोलाहल नहीं ? एक सर्द -सी सिहर...

चलते-चलते देखिये मेरी पसंद का एक गीत



सादर-
संध्या शर्मा
मिलते हैं अगली वार्ता पर... 

शुक्रवार, 30 दिसंबर 2011

कब तक तुझसे सवाल करेंगे ... ब्लॉग़4वार्ता --- संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार, वार्ता पर आप सभी का स्वागत है...  
प्रस्तुत है, मेरी पसंद के कुछ लिंक्स  

शुक्रिया तेरा
शुक्रिया तेरा, तेरे होने के अहसास का, शुक्रिया उन सब बातों का, जो कभी हुई ही नहीं, शुक्रिया खुशनुमा उस अहसास का, जो दिल को कभी मिला ही नहीं, जिंदगी तेरा भी शुक्रिया, तुझसे भी अब ...


उनके चेहरे पर सपने
आज भीड है हर जगह और उनके चेहरे पर सपने जेबे तलाशती हुई पर उसमे सिर्फ बचे ईंट पत्थर हाशिये से बाहर लोग अब बस भीड का हिस्सा है बदहवास सांसो की जमीन पर सपने में सिर्फ भूख है और उनके जलते पेट को एक...

आने को है नया साल
आने को है नया साल कुछ नया लिए कल सुबह आए खुशियों की सौगात लिए | तैयारी की स्वागत की जागे सारी रात अनोखा उत्सार जगा नया साल कुछ खास लगा | स्वप्नों के तानेबाने से एक नया संसार बुना जहां न हो भेदभाव ...

रेल में जागृत जन-मन और बिना टिकट यात्रा करता पत्रकार
कार्यालयीन व व्‍यावसायिक व्‍यस्‍तता के कारण बहुत दिनों से कलम कुछ ठहरी हुई है, फेसबुक और ट्विटर में में मोबाईल के सहारे हमारी सक्रियता भले ही नजर आ रही हो किन्‍तु ब्‍लॉगिंग के लिए समय नहीं निकल पा रहा है। ...


मै तुम्हारी आत्मा
मै क्यों ? तुम्हारे शरीर में रहूँ, एक हारे हुए शरीर में, जिसने कभी अन्दर की ओर झांक कर देखा ही नहीं, और बढ़ता रहा स्वयं सोच के रचे घरौदे की ओर , सम्रधता की ओर, न कोइ रहे तुम्हारे अपने न पराये , आं...

तू तू ..मैं मैं ...(४)
*डिफेक्टिव आइटम !* मुझे जरा बाद में पता चला पर तुम्हे तो मालूम था .... फिर क्यों भेज दिया मुझ जैसे डिफेक्टिव आइटम को यहाँ ...? बोलो क्वालिटी वालों के यहाँ भी आर टी आई लगाया तो कहते हैं प्रोडक्शन...

मन में है अपार ऊर्जा
 नए वर्ष के लिये कुछ और संकल्प श्रेष्ठ का चुनाव सदा हो, कुछ भी हेय न हो जीवन मेंप्रेय मार्ग पर बहुत चल लिये, श्रेय सधे अब तो जीवन में मन में है अपार ऊर्जा, सुप्त कहीं न रह जाये जहाँ पहुंचने की ठानी है, स्व...

बात पुरानी हो गयी!
दो बूँदें गिरी आँखों से और सारी कहानी हो गयी हमने कही तुमने सुनी... बात पुरानी हो गयी! फासले बढ़ते गए जीवन चलता ही रहा सूरज उदित हुआ रोज़ और रोज़ ढ़लता ही रहा कहाँ से राहों में इतने मोड़ आ गए तुम मुड़ गए ...
 
posted by noreply@blogger.com (गिरीश"मुकुल") at मिसफिट Misfit
 
कब तक तुझसे सवाल करेंगे और कब तक तुझे कटघरे में खड़ा करेंगे ! नहीं जानते तुझसे क्या सुनने की लालसा मन में करवटें लेती रहती है ! ज़िंदगी ने जिस दहलीज तक पहुँचा दिया है वहाँ हर सवाल गैर ज़रू...
 
जब कभी भी आँधियों का ज़िक्र आयेगा | तब टूटे हुए गुंचे भी याद आयेंगे | जिस बज़्म में वफ़ा का ज़िक्र हो रहा होगा | उस वक्त हम भी ज़रूर याद आयेंगे | रुख से नकाब हटाने से क्या फायदा होगा | चाँद शरमा कर छुप...
 
आज वक़्त से आँखें मिला ही लीं, और जान लिया वजूद को... जिसके भरोसे... अब तक पटकता रहा, उम्मीदों के पैर... वो भी झूठी तसल्ली सा निकला....
 
 एक लम्बे समय से मेरे ब्लॉग पर मेरी ड्राइंग अपलोड ही नहीं की गईं. आप भी सोच रहे होंगे की पाखी की ड्राइंग कहाँ गायब हो गईं. तो ये रहीं मेरी कुछेक नई ड्राइंग.. *..अब इन्हें देखकर जल्दी से बताइए कि...
 
* * १. पूर्णता स्वप्न है अधूरापन है सत्य २. पूर्णता मिथ है अधूरापन है हकीकत ३. पूर्णता माया है अधूरापन है अध्यात्म ४. पूर्णता मोह है अधूरापन है मोक्ष ५. पूर्णता मृत्यु है अधूरापन है जीवन 
 
 आप सभी को नव वर्ष की बहुत बहुत मंगलकामनाएं ... तुमसे अलग होने बाद कितनी बार तुमसे अलग होना चाहा पर हो न सका सुबह की अखबार के साथ तुम घर में घुसती हो तो तमाम कोशिशों के बावजूद निकलती नहीं ख़बरों के ...
 
कोई सुनता तो हम भी कुछ कहते...! 
एक रोज़ उठी बात एक मन में, जीवन को एक जगह पर रख.. कुछ ऊपर उठकर, हवाओं में हम रहते! कोई सुनता तो हम भी कुछ कहते!! अपने आप से ही परे जाकर, लम्बी यात्रा के बाद.. अपनी ही आत्मा संग, कुछ देर बहते! कोई सुनता तो ह...
 
उनके लबों पर क्या ख़ूब पान की लाली रची है पान का पत्ता वहां भी यहाँ भी मिठास ले रहा है / *पान का पत्ता वहां उनके मुहँ में और यहाँ हमारे दिल में ** 
 
जानती हूँ हाल तेरा तुझसे ज्यादा जो बातें तेरा दिल तुझसे नहीं कह पता वो मुझे आकर बता जाता है देख कितना अपना है मत रातों को ख्वाब सजाया कर मत रात के तकिये पर मोहब्बत सजाया कर खामोश दीवारें कब बोली हैं वहाँ तो...
 
 ** * * *मेरे आँसू तुम* *आँखों में ही रहना* *अतीत की धारों में* *तुम नहीं बहना * *लोग हँसेंगे * *ताने भी देंगे * *कुछ अपने तो * *कुछ ज़माने भी देंगे* *बस तुम सुनना * *मत कुछ कहना* *मेरे आँसू तुम * *आँखों में ...
चलते-चलते देखिये मेरी पसंद का एक गीत 

 
सादर-
संध्या शर्मा
मिलते हैं अगली वार्ता पर... 

गुरुवार, 29 दिसंबर 2011

कुहासे की चादर हटा मैं अंगार लिखूँगा --- ब्लॉग4वार्ता -- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, नया आने को है और पुराना वर्ष जाने को है। बस कुछ घंटे और बाकी हैं। उल्टी गिनती शुरु हो चुकी है। हमने भी शुन्य से गिनती शुरु की थी 10 मार्च 2010 से ब्लॉग4वार्ता पर। आज 4 बजकर 29 मिनट पर 1,00,000 हिट्स के जादूई आँकड़े को वार्ता ने पार कर लिया। मध्य में वार्ता दल के सदस्यों के पास समय नहीं होने के कारण वार्ता पर पोस्ट नहीं आई, पर पाठकों  का आगमन निरंतर जारी रहा। पाठकों की मांग पर वार्ता को हमें पुन: आरम्भ करना पड़ा। लगभग डेढ साल के कम समय में वार्ता ने अपना गरिमामय स्थान बनाया। समस्त पाठकों एवं वार्ता दल का आभार।

ब्लॉग जगत में किसी की ब्लॉग की लोकप्रियता को टिप्पणियों से आंका जाता है, लेकिन हमने पैमाना पृष्ठ दृश्य को बनाया। आज शाम 6 बजकर 7 मिनट पर अलेक्सा रैंकिग पर Global Rank 349,547 था और इंडिया रैंकिग 15,970 थी । सभी चिट्ठा चर्चाओं में वार्ता की रैंकिग सबसे अच्छी रही है। यह वार्ता की निरंतरता का परिणाम है। वार्ता ने बहुत झंझावात भी देखे,  झंझावात के उस दौर में प्रारंभ के वार्ताकार संगीतापुरी जी, जी ने हौसला बढाने में बहुत मदद की। राजीव तनेजा जी, जी ने मित्र धर्म निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
यशवंत मेहता जी, ने वार्ता पर काफ़ी समय दिया। जब मई माह 2010 में दिल्ली यात्रा पर था तो राजकुमार ग्वालानी जी ने निरंतर वार्ता कर इसका क्रम नहीं टूटने दिया। इसके बाद ताऊ जी, शिवम मिश्रा जी, गिरीश बिल्लौरे  जी (पॉडकास्टर) देवकुमार झा जी, अजयकुमार झा जी, रुद्राक्ष पाठक, सूर्यकांत गुप्ता जी ने अपना बहुमुल्य समय देकर वार्ता को उंचाईयों तक पहुंचायाअब बार्ता पर संध्या शर्मा जी सक्रीय योगदान दे रही हैं एवं केवल राम जी भी वार्ताकार की भूमिका निभाने को तैयार हैं। विश्वास है वार्ता निरंतर होते रहेगी।

 जब वार्ता पर लखपतिया हिट आई तभी शिखा जी की टिप्पणी भी मिली। इसलिए वार्ता पर लखपतिया टिप्पणी देने का श्रेय शिखा वार्श्नेय जी को जाता है। वह आया और करोड़ों की नसीहत दे गया !  इसलिए मित्रों विनम्र निवेदन है कि प्रेम में सब जायज़ है, इधर योगी था सो उठ गया आसन रही भभूत, जोगी और भभूत का सदा का साथ है। कोई कोई सुनता तो हम भी कुछ कहते बात तो पते की है, सुनते सुनते हम सो जाते। इसलिए ...........से बचना सीखिए और अधजल गगरियों को छलकने दीजिए। यह कैसी संसद? बहुत बड़ा प्रश्न है, देखिए कोई जवाब मिल जाए तो। नया अविष्कार है स्वप्न में दिखेगा आदमी. अब तक कौन दिखाई देता था राम जाने।

आ सखी चुगली करें फ़ुरसत हो तो कुहासे की चादर हटाएं, सूरज की किरणों के लिए रास्ता बनाएं फ़िर किसी की क्या ज़ुर्रत जो उजाले को रोक सके।  जलकर ढहना कहाँ रुका है  जले को तो ढहना पड़ता ही  है।फेसबुक स्माइलीज़ का प्रयोग करें, अपनी भावनाएं मायालोक में जाहिर करें। हँसे, रोएं, गुनगुनाएं, गुस्सा दिखाएं नई मंजिलें राह देखतीं हैं तुम्हारी।मेरे मन के आँगन में आईए कलम घिस्सी  की लघुकथा पढिए,कौन कब आता है और कब जाता है इसका पता नहीं चलता, ब्लॉग संसार भी विशाल होता जा रहा है।बात लिखने की है, ये कहते हैं मैं अंगार लिखूँगा,जिसने जहाँ कायम रखा ये औरत ही है, मातृरुपेण संस्थिता। अब चलें नए सोपान की ओर नई मंजिलें राह देखतीं और नव वर्ष पर नए-पुराने मीत हों नये वर्ष पर कुछ नया गीत हो। सभी को ढेर सारी शुभकामनाएं एवं बधाई।......................
मिलते हैं ब्रेक के बाद, वार्ता के अगले संस्करण में, राम राम, एक नजर आज के राशिफ़ल पर

बुधवार, 28 दिसंबर 2011

हँस मत पगली, प्यार हो जाएगा --- ब्लॉग4वार्ता --- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, कल शायर-ए-आजम मिर्जा असद उल्लाह खाँ का जन्म दिन था। मिर्जा साहब "गालिब" तखल्लुस का प्रयोग करते थे। अपने नाम से अधिक उपनाम से जाने जाते हैं। इनके विषय में बहुत सारी बातें कही जाती  हैं। उर्दू शायरी को इन्होने परवान चढाया। गालिब कहते हैं रेख़्ते के तुम्हीं उस्ताद नहीं हो "ग़ालिब", कहते हैं अगले ज़माने में कोई "मीर" भी था । कल्लू खाँ से इनका नाता ताजिन्दगी रहा, जब तक खाँ रहे तब तक कल्लू खाँ रहे। मिर्ज़ा ग़ालिब के दीवाने क़ासिद कूचा-ए-बल्लीमरान से लेकर कूचा-ए-कासिम जान तक सैर कर आए। गालिब की गलियों में घूम कर अच्छा लगा। बे दर-ओ-दीवार सा एक घर बनाया चाहिए कोई हमसाया न हो और पासबां कोई न हो। ऐसी सोच रखने वाले फ़क्कड़ स्वभाव के फ़कीर के घर की सैर कीजिए। अब चलते हैं आज  की वार्ता पर...........।
हम भी कौन गालिब से कम हैँ (डॉ दराल गालिब के मुजस्समे के साथ)

विष्णु वैरागी कह रहे हैं कि बढ़ती उम्र, घटता विश्वास, घटता साहस! यह मन का है विश्वास। आत्मबल रहे कायम तो नहीं चाहिए कायम चूर्ण, नहीं तो संत नगर के अन्ना भाई से पूछ लीजिए। वर्ष 2011 गुजर जाने को है दम ले ले घड़ी भर को प्यारे, देख नजारे न्यारे न्यारे।नैहरवा हमका न भावे तो ससुराल है, यही तो कमाल है। हर शादी शुदा के दो दो घर, एक ससुराल और नैहर पर किराया एक का ही देना पड़ता है। आने जाने में भी समय लगता है। जाट देवता का सफ़र जारी  है, अब की बारी अटल बिहारी है।ये तुम हो...? सवाल बड़ा है, यक्ष प्रश्न सा खड़ा है। कभी तो मुड़भेड़ होगी ताम्बुल और ताम्बुली की, सोचिए कैसे बचेगा भारत देश? 

मरा-मरा कहते कहते राम राम जप जाएगा, केवल राम ही इस जग से नैया पार लगाएगा। साहित्य सेवा  के गैंग में उलझ गया है मन, अब तक तो हम ही फ़ंसे थे, आपकी बारी है श्रीमन..आदेश आया है आओ जश्न का माहौल बनाएं, माहौल ही क्यों? जश्न भी मनाएं। अलबेला खत्री को उठाए उनसे गीत गवाएं। गीत से मन न भरे तो हो जाने दे भांगड़ा, थोड़ा बहुत नहीं बहुत ही तगड़ा। हम भी नाचेगें उन्हे भी नचाएगें। सब मिल कर धमाके दार जश्न मनाएगें। पर शर्त है पीले रंग का बैगी कमीज़ होना चाहिए। क्योंकि जन-गण-मन के 100 साल हुए पूरे राष्ट्र गान को एक शताब्दी हो गयी। सुगंधित बयार बह रही है। सौ साल की कथा कह रही है। 

अनकहे लफ़्जों से सजाई है महफ़िल कैलेण्डर के पन्ने कर हो रहे हैं झिलमिल। बीती ताहि बिसार दे आगे की सुध लेय, दो पल की जिनगी, दो पल की मानुष देह। मित्र कुहासा न छाने दो, जो कुछ है सामने आने दो।काफ़िए की एक रात  काफ़ी है। चलती का नाम गाड़ी, यात्रा आपा-धापी है। कहती है बुढापे में बॉक्सिंग रहने दे, कोई ढंग की मिल जाए तो शादी कर ले। भली बताई आपने भले बने हैं वीर, पर यह बात तो लक्ष्मण सिंह पर लागू क्यों नही होती? इनके भैया खुद पर लागु करें तो इन पर भी हो। बीच "- - कैसे सम्बन्ध होने चाहिए " ? जानना है तो इधर हो आईए।शरद की चांदनी की बात निराली है, चैटराम भिड़े हुए हैं, ब्लॉग पोस्ट खाली है। 
जुलाहों मे लठा लट्ठ

येल्लो सांपला से एक दसहजारी रिपोर्ट आयी। कह रहे हैं चंदा मामा दूर के, इतनी दूर मामा बनाने से पहले सोचना था। अब पछताए का  होत हैं? दिल्ली में बात न बने तो मित्रों भिलाई में स्‍वागत! है, यहाँ अतिथि से मिलिए, ज्ञान वर्धन कीजिए। बताओ न कि नये साल मे नया क्या है, यह भी सोचने की बात है, खाली समय हो तो सोचिए, माथे पर हाथ धरिए, जवाब मिल जाए तो हमें भी बताईए पर मत कल के घने कोहरे से ख़ौफ़ खाइये, खौफ़ खाने की चीज नहीं। समोसे खाईए और गुनगुनाईए  कभी चाहा था उन्हें, चाहत भी कमाल की शै है। नहीं चाहो तब आ जाती  है, चाह कर नहीं आती। अब वार्ता को देते हैं विराम, शुक्रिया राम राम ...............

चलते चलते कार्टून धमाका

मंगलवार, 27 दिसंबर 2011

ज़रा एक नज़र इधर भी………हम भी खडे हैं राह में………ये है मेरा सफ़र.... ब्लॉग़4वार्ता --- संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार, वार्ता पर आप सभी का स्वागत है. प्रस्तुत है, 
आज कुछ मेरी पसंद के  लिंक्स... ब्लॉगर मीट की रिपोर्ट यहां पढें

एक नया रूप धर कर.........2012
 * * * हर साल की तरह ये साल भी गुज़र गया, **कुछ दिल में सिमट गया तो कुछ टूट कर बिखर गया...* *कभी तो लगा की एक प...

प्रेम : कुछ क्षणिकाएं
* *१. प्रेम से होता है पराजित विज्ञान अर्थशास्त्र भी २. प्रेम गढ़ता है नया भूगोल ३. प्रेम देता है जन्म नए विषयों को जो समुच्चय होता है दर्शन शास्त्र और मनोविज्ञान का ४. प्रेम से उत्त्प्...

 मुहूर्त्‍त को लकर लोगों के भ्रम ... अतिथि पोस्‍ट ... (मेरे पिताजी श्री विद्या सागर महथा की)
 कई प्रकार की व्‍यस्‍तता के कारण कुछ दिनों से अपने ब्‍लोग पर नियमित रूप से ध्‍यान नहीं दे पा रही हूं। फिलहाल जहां एक ओर दोनो बच्‍चों की छुट्टियां मनमाने ढंग से मनाने में उनकी मदद कर रही हूं , वहीं दूसरी ओर ...

माचान पर सोयी नींद गौरैंया थी
आंखो में सिहरता समन्दर गोद में लहरे खौफ खाये बैठी रही आन्ने दो आन्ने की बात नही थी अब हजार में भी नही भरता था पेट मचान वही बनती जिसके नीचे लहलहाते खेत होते संतोष अमीरी में उगे तो मुश्किल क्या पर गरीबी...

सुनामी की याद और निकोबार की यात्रा
अंडमान में पिछले तीन दिनों से खूब बारिश और तूफानी हवाएं चल रही हैं. सभी द्वीपों पर जाने के लिए अधिकतर बोट, हेलीकाप्टर इत्यादि कैंसल हो गए हैं. इस सबके चक्कर में तो क्रिसमस का सारा मजा ही ख़राब हो गया. मेरी...

चाहा था उन्हें
कसूर इतना था कि चाहा था उन्हें दिल में बसाया था उन्हें कि मुश्किल में साथ निभायेगें ऐसा साथी माना था उन्हें | राहों में मेरे साथ चले जो दुनिया से जुदा जाना था उन्हें बिताती हर लम्हा उनके साथ यूँ करीब पा...

 कुंती
कर्ण को प्रवाहित कर उसकी संभावित मृत्यु से विमुख कुंती ने उसका त्याग किया यूँ कहें खुद को मुक्त किया ! कुंवारेपन का भय - चलो मान लिया पर कालांतर में जब सभी पुत्र दूसरों के थे तब अपने ध्यान के एक अंश...

ज़रा एक नज़र इधर भी………हम भी खडे हैं राह में………ये है मेरा सफ़र
वंदना गुप्ता का खामोश सफ़र सुमित प्रताप सिंह SUMIT PRATAP SINGH ON SUNDAY, DECEMBER 25, 2011 | प्रिय मित्रो सादर ब्लॉगस्ते! *आ*इये मित्रो आज क्रिसमस के शुभ अवसर पर काजू और किशमिश खाते हुए मिलते हैं ...

तेरी कशिश..
* * *मैं तुम्हे अपना बनाना चाहता हूँ !* *सात सुरों का सरगम सजाना चाहता हूँ !* * * *बनकर मैं बादल**,** **तेरे मन की धरती पर* *एक धीमें सावन को बरसाना चाहता हूँ !* * * *उठ रही जो लहर, मेरे दिल के दरिया में* *...

मैं क्यों अग्नि-परीक्षा देती रहूँ ?
नवभारत टाइम्स की वेबसाईट पर ये खबर पढ़ी - ''इस सप्ताह प्रीति जिंटा की बारी है अपने सबसे बड़े हेटर (नफरत करने वाले) चिराग महाबल ...

एक मुहावरा खिसियानी बिल्ली खम्भा नोंचे
 दादी कहती थी खिसियानी बिल्ली छीका नोंचे । शायद ये मुहावरा आज की परिस्थिती मे सरकार के लिये उपर्युक्त है । देशहित के लिये सशक्त लोकपाल के मुद्दों को ले अडिग है हमारे अन्ना । बे सिर पैर के नित इलज़ाम लगा ...

शुभकामनाएं
आते हुए नव वर्ष की कोमल हवाए, आपकी यश कीर्ति के मोती लुटाएं, सफल हो संकल्प, उम्मीदें, सभी सपने, साथ हों अज़ीज़ सब बिछुड़े सभी अपने, दे रहा दस्तक दरवाज़े पर तुम्हारे आसमा आगोश में हो आपके सोचा हुआ सा...

जंगल बेदना
जंगल बेदना सदय होने का मिला परिणाम क्या मनु को बचाने का मिला प्रतिदान क्या आध्यात्म फूला-फला जिसकी गोद में वो जल रहा है क्यों स्वयं अब क्रोध में क्यूँ कुपित न हो उजाड़ा जब उसे दोष मनु पुत्रों का देगा फिर...

अटल जी के जन्म दिवस पर सुशासन की शपथ
विस्फ़ोट से  मैं सत्य निष्ठा से शपथ लेता हूं कि, मैं प्रदेश में  सुशासन के उच्चतम मापदंडों को स्थापित करने के लिये सदैव संकल्पित  रहूंगा और शासन  को अधिक पारदर्शी,सहभागी, जनकल्याण केन्द्रित  तथा जवाब...

नारी के रूप और चेतावनी ........
बेटी जो पुकारोगे तो, गले में झूल जाएगी | बहन जो बनाओगे तो, राखी बांध जाएगी | पत्नी जो मानोगे तो, यह प्यार बरसायेगी| समझोगे माँ इसे तो, आँचल में छिपाएगी | खिलौना जो समझोगे तो, यह खेल भी दिखाएगी |...

याद
मेरी आंखों में, तुम्हारी याद, खारे पानी में, हो जाती है तब्दील। सोचता हूं मैं , तुमको भी, तन्हाई में, आती होगी याद मेरी? यादों को सम्हाल रखा है मैंनें, क्यूंकि, मुझे तुमसे प्यार है। तुमने कहां गलत किया ...

चलते-चलते देखिये मेरी पसंद का एक गीत
सादर-
संध्या शर्मा
मिलते हैं अगली वार्ता पर... 

सोमवार, 26 दिसंबर 2011

कैक्‍टस के मोह में बिंधा एक मन और कुनकुनी धूप में ब्लॉगर मीट --- ब्लॉग़4वार्ता --- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार,  काफ़ी ठंड के बावजूद सांपला में ब्लॉगर नेह मिलन हुआ। राज भाटिया जी की उपस्थिति में ब्लॉगोत्सव में मित्रों  का मिलन अच्छा लगा। रात अन्ना भाई की रिपोर्ट आ गयी थी और सुबह खुशदीप भाई ने पोस्ट लगाई। राजीव तनेजा जी ने फ़ेसबुक पर पिलर नम्बर 420 से कुछ फ़ोटो टांग दी थी। जिससे जानकारी  मिल गयी कि सांपला की यात्रा चालु आहे। फ़ोन लगाने पर महफ़ूज मियां और भाटिया जी से बात हुई। कहने का मतलब यह है कि सांपला से लाईव अपडेट मिलता रहा।  डॉ मीनाक्षी स्वामी के बहुचर्चित उपन्यास भूभल को अखिल भारतीय विद्वत परिषद वाराणासी द्वारा कादम्बरी सम्मान दिए जाने का समाचार मिला।
डॉ मीनाक्षी स्वामी जी के बहुचर्चित उपन्यास भूभल को कादम्बरी सम्मान

अम्ब्रेला छतरी भी टैम से पहुंच गए थे। योगेन्द्र मौद्गिल जी भी दिखे। जाट एक ही था, दूसरा गायब। शायद ब्याह का सीजन आने वाला है,  कहीं छोरी देखने गया हो। वंदना जी ने फ़ूलों के जख्म पर चित्रों का मलहम चढा दिया। अजय झा जी गन्ने चूस-चूस कर ढेर लगा दिया। केवल राम , दस हजारी और कुंवर जी भी दिखाई दिए, अंजु जी, संजु जी और सर्जना जी की सक्रीय भागीदारी रही, पर इंदुपुरी एवं पद्म अंकल चित्रों में अभी तक दिखाई नहीं दिए। अब चलते हैं आज की ब्लॉग वार्ता पर............।

एक मित्र ब्लॉगर होने पर शर्मिन्दा हैं, वे कहते हैं आज बड़ा सवाल ये है कि हम कब तक चूं चूं करती आई चिड़िया, दाल  का दाना लाई चिड़िया लिखकर लोगों की झूठी वाहवाही लूटते रहेगें। हम जिम्मेदार कब बनेगें ? जिम्मेदार कोई एक दिन में नहीं बन सकता, सवाल ये है कि हम इसकी पहल कब करेंगे ? अच्छा ऐसा भी नहीं है कि इसके लिए हमें हिमालय पर्वत पड़ चढना है, हमें सिर्फ सामाजिक सरोकारों से जुडना होगा। समाज के प्रति संवेदनशील होना पड़ेगा। कुनकुनी धूप धूप जो निकली है कुनकुनी सी मन होता है कि घूंट घूंट पी लूँ तृप्त हो जाऊं तो फिर मैं झंझावातों की आंधियां भी जी लूँ,…… 

आज सेंटा लायेगा ढेर सारे उपहार...हैप्पी क्रिसमस !! आज तो चारों तरफ क्रिसमस की धूम है. चारों तरफ क्रिसमस-ट्री, लटके हुए खूबसूरत स्टार, जिंगल बेल कितने अच्छे लगते हैं. सेंटा-क्लाज तो मुझे बहुत प्यारा लगता है. मैं सोचती हूँ की वह इस साल मेरे लिए भी खूब गिफ्ट रिश्तों के ताजमहल...स्फूर्ति उमंग उत्साह अपनापन कहाँ खोते जा रहे हैं रिश्तों के ताजमहल क्यों पीले होते जा रहे हैं मोबाइल इन्टरनेट टेलिविज़न दुनिया छोटी किये जा रहे हैं पर रिश्तों के ताजमहल क्यों पीले होते जा रहे हैं शिक्षित ह...
पिलर नम्बर 420 पे यात्री खड़े हैं, बस में नहीं जाएगें बस अड़े हैं।

दलित साहित्य के पुरोहित हिन्दी दलित साहित्य में कुछ ऎसी बहस करते रहने की परम्परा विकसित की जा रही है जिसका कोई औचित्य नहीं रह गया है .ये बहसे मराठी दलित साहित्य में खत्म हो चुकी हैं.लेकिन हिन्दी में इसे फिर नये सिरे से ...वाणी की कहानी "वो बुरी औरत" अगली कड़ी झोंपड़ी से महलो में आकर यही होता है ,मामी ने अपने मन का गुब्बार वही दुकान पर निकाल लिया,सुनाक्षी वाणी को अचंभित करना चाहती थी वाणी के पसंदीदा नेक्लस देकर. स...साहित्यिक सौगात
मेरे बाप पहले आप काम बाद में, पहले मैं सुनूंगा गाने (लक्ष्य का हट) प्रातः जब मैं लेप पर मेल वगैरह चैक कर रहा था तो मेरा 1वर्ष 9 माह का बच्चा लक्ष्य भी उठ खड़ा हुआ और लगा अपनी जिद दिखाने कभी लेपटॉप पर कोई की दबाता कभी कोई.. आ सखी चुगली करेंयूँ तो ना गयी वहाँ, कोई खबर.. पर आहों के खामोश असर पैगाम हुए ......बदनाम हुए .. यूँ तो ना दिए , कुछ सुख हमको .. पर उनसे जो पहुचें दुख हमको इनाम हुए ..बदनाम हुए जब होने लगे ये हाल अपने .. शब रोशन साफ़ खयाल...वेब सामग्री और कानून
प्रतियोगिता चालु आहे, बताएं कौन जीते हारे

चुनावों से ऐन पहले परदे पर गूंजेगा पवार को पड़ा थप्पड़अक्षय खन्ना की नई फिल्म ‘गली गली चोर है’ में सिस्टम के गाल पर आम आदमी का थप्पड़ पड़ने वाला है। जाहिर है ये दृश्य आपको दिल्ली में पवार के गाल पर पड़े थप्पड़ की याद भी दिलाएगा। सिस्टम से जूझते भारत कुमार की ...ग़ज़ल भीड़ में अस्तित्व अपना खोजते देखे गए, मौन थे जो आज तक वे चीखते देखे गए। आधुनिकता के नशे में रात दिन जो चूर थे, ऊब कर फिर जि़ंदगी से भागते देखे गए। हाथ में खंजर लिए कुछ लोग आए शहर में, सुना हे मेरा ठिकान...
एक होता है बाघ इसके दांत और जबड़े इतने मजबूत होते हैं कि यह अपने से दुगने आकार के जानवर को कुचल कर रख देता है। पर उन्हीं दांतों से जब अपने नवजात शिशु को उठा कर इधर से उधर ले जाता है तो उसके शरीर पर खरोंच तक नहीं आती। बा...श्रद्धा के लाभश्रद्धावान लभते’। यदि आप किसी के प्रति श्रद्धालु नहीं हैं तो आपके अपेक्षित लाभ नहीं मिल सकेगा। मंदिर तक पहुँचने वाले को ही देव दर्शन-लाभ मिलता है। ...सोना लेने म्हारे पी गए, अरी मोरा सूना कर गए देस
प्यारे तुम्हारा ध्यान है किधर, ब्लॉगिंग स्नेह मिलन श्रीमान है इधर

कैक्‍टस के मोह में बिंधा एक मन पांचवीं क्लास तक मैं जिस स्कूल में पढ़ा, उसका नाम था राजकीय प्राथमिक पाठशाला नंबर ९ . बहुत ही साधारण सा स्कूल था,अंग्रेज़ी के ए बी सी डी अभी कोर्स में नहीं थे हालांकि सभी गुरु लोग अंग्रेज़ी का नाम लेकर ड...एक अटल सितारा छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता माननीय अटलबिहारी वाजपेयी का राज्य निर्माण के बाद 28 जनवरी 2002 को पहली बार रायपुर आगमन हुआ तो उन्हें 36 लाख पुष्प पंखुड़ियों की माला से स्वागत किया गया . तस्वीर में स्वागत करते,,,,,,
इनमें से एक ब्लॉगर मुझे अहमदाबाद में मिलने का वादा करके छोड़ आए ( पहचान कौन?)

यू एस पी तुम और मैं दो विपरीत व्यक्तित्व तब भी चुम्बक की तरह एक दूजे की ओर खिंचे चले आये... क्या सच...विपरीतता ही आकर्षण का कारण बनी या मेरी जो कमियां हैं वो तुम पूरी कर देते हो और तुम्हारा अधूरापन मैं भर देती ..बचाएं अपना facebook अकाउंट फेसबुक जबर्दस्त स्पैम अटैक की चपेट में है। पिछले दो दिनों से लोगों को अपने वॉल पर अश्लील विडियोज के लिंक मिल रहे हैं। बेशक ऐसे में आपको अपने अकाउंट का खयाल रखने की जरूरत है : इस जबर्दस्त स्....,,,,,,,,,,,

वार्ता को देते हैं विराम, मिलते हैं ब्रेक के बाद, राम राम। ब्लॉगर स्नेह मिलन की फ़ोटो -- वंदना जी से साभार

रविवार, 25 दिसंबर 2011

अंदाज अलग जीने का ... ब्लाग4वार्ता...संध्या शर्मा


संध्या शर्मा का नमस्कार,
सबसे पहले क्रिसमस की ढेर सारी शुभकामनाये... आज फिर से आई हूँ वार्ता पर अपनी पसंद के कुछ लिंक्स के साथ. आशा करती हूँ आपको भी अच्छे लगेंगे. तो लीजिये प्रस्तुत है आज की वार्ता....   
 
KAVITAYEN
मोहब्बत भरी ज़िन्दगी कभी करती है आँख मिचौली, कभी सजाये सपनों की डोली, शरारत उम्र भर करती ही रहती, है ये मोहब्बत भरी ज़िन्दगी ! कभी खुशियों का मेला लगता है, कभी जीवन झमेला लगता है, कभी चुराए हमसे ये नज़र, ह...

कालाधन? नही.. नीयत का कालापन हूँ मैं
कहते है लोग काला हूँ मैं! न काला रंग है मेरा न काला मन मेरा न काले कर्म है मेरे न इरादों मे कालापन है क्यूं कहते है लोग काला हूँ मैं? किसी की जरूरत हूं तो किसी की शान हूँ, मेरी नजर छोटा तू, न वो बड़ा तेरी...

अंदाज अलग जीने का
हूँ स्वप्नों की राज कुमारी या कल्पना की लाल परी पंख फैलाए उडाती फिरती कभी किसी से नहीं डरी | पास मेरे एक जादू की छड़ी छू लेता जो भी उसे प्रस्तर प्रतिमा बन जाता मुझ में आत्म विशवास जगाता | ह...
दोस्तों, कृपया 1 मिनट का समय देकर इसे पढ़ें. अगर आपको लगता है कि बात में सच्चाई है तो यह सन्देश दूसरों को भी फॉरवर्ड करें . अन्ना, स्वामी रामदेव या अन्य जो भ्रष्टाचार के विरूद्ध लड रहे है उनसे कांग्रेस क्..
मेरे मन की इस बंजर धरा पर .. प्रेम के अंकुर फूटे हैं.... पहली बार . तुम ही कारण हो इसको बनाने में उर्वरा . स्नेह रस की वर्षा के बाद जब-जब चाहत की फसल उगेगी तुम याद आओगे,बेइंतिहा .... 
श्रीगंगानगर-नगर विकास न्यास के चेयरमेन ज्योति कांडा का कांग्रेस में कोई बड़ा कद बेशक ना हो किन्तु क्षेत्र के जाने माने बड़े बड़े कांग्रेस नेता उसकी छतरी के नीचे जरूर आ गए। सच है,जो पद पर है वही बड़ा। बाकी
गंगा किनारे तुलसीघाट के तुलसी मंदिर से गुरुवार को प्राचीन रामचरित मानस की हस्तलिखित प्रति चोरी हो गई। मंदिर के एक तरफ के द्वार की कुंडी तोड़कर चोर ‘रामचरित मानस’ के दो भागों के अलावा एक वाल्मीकि रामायण ... 
(कल के लिए पत्रिका के दिसंबर अंक में छपी इस कहानी को ब्लॉग पर सहेज रही हूँ बस )* * * सड़कें किसी मुर्दा देह की तरह ठंडी और अकड़ी हुई पड़ी थीं. उन पर रेंगने वाले लोग और धमाचौकड़ी मचाती ...
यायावर की वापसी (गुजरात यात्रा से) * गाड़ी थी पोरबंदर हावड़ा जय जोहार ...
अन्ना का नया रण....* *27 से अनशन का मुंबई संस्करण... * * * *मिल ही गया MMRDA का मैदान...* * * *बस करना पड़ेगा मोटा भुगतान...* * * *30 से जेल भरो का फ़रमान...* * * *सोनिया-राहुल के घर के बाहर भी होगा धरना-...  
बाज लगभग ७० वर्ष जीता है, पर अपने जीवन के ४०वें वर्ष में आते आते उसे एक महत्वपूर्ण निर्णय लेना पड़ता है। उस अवस्था में उसके शरीर के तीन प्रमुख अंग निष्प्रभावी होने लगते हैं। पंजे लम्बे और लचीले हो जाते है..
अधूरा कार्यक्रम छोड़कर अहमदाबाद से वापसी करनी पड़ी। गाड़ी 10 घंटे विलम्ब से रायपुर पहुंची। अशोक भाई से सूचना मिली थी कि पुराने मित्र पूर्णानंद सोनी ईलाज के दौरान हमें छोड़ चले। बहुत अफ़सोस हुआ, स...
पर्वतों पर दूर तक फैली धुंध.....ठंण्डी हवाओं के झोंके और सूरज के धूप की गर्माहट सदियों से लाहौल घाटी में आंख मिचैली खेल रही है। लाहौल घाटी हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले का वह हिस्सा है ... 
चलो तुम कुछ शुरुआत करो जहां तक बने कुछ बात करो बहुत हो चुकी जहां की बा...

पहुनाई
घुमता हुआ चाक ठहरी है कील बौराया सा वर्तुल नापे है मील इतरा -इतरा कर बहके है नागर माटी का पुतला है राज़ उजागर कंचन की बेड़ी सपनों की झाँकी आँसु की लड़ियाँ पाँसी में पाँखी भर आये म...

शिखर सम्मान
जब हम शरुआत करते हैं कुछ कहने की तो शब्दों को नापतौल कर उठाते हैं किसी भी नापतौल में शुद्धता नहीं होती यानि डंडी मार ही लेते हैं हम भावनाओं में फेर बदल करके हम कलम को कमज़ोर बना देते हैं ! पर जिस दिन...

 कार्टून :- कहां कहां बरफ पड़ेगी
 posted by काजल कुमार Kajal Kumar at Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून

सूली
छू रहे थे मेरे पाँव ज़ालिमों के सर के साथ किस क़दर ऊँचा था मैं सूली पर चढ़ जाने के बाद, नहीं जानते खुद कि क्या कर रहे है ये लोग बख्श देना ए! मेरे खुदा इन्हें मेरे जाने के बाद, -------------------------...

 चलते-चलते देखिये:



सादर-
संध्या शर्मा
मिलते हैं अगली वार्ता पर... 

शनिवार, 24 दिसंबर 2011

कुछ मुस्काने की बात करो आहिस्ता आहिस्ता -- ब्लॉग4वार्ता -- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार,  मित्रों एक सप्ताह की गैर हाजरी के पश्चात आज वार्ता पर पुन: उपस्थित हुआ हूँ, इस दौरान संध्या जी ने मोर्चा संभाल रखा था। इस अवधि में कई अच्छी पोस्टें आई, अब समय निकाल कर सिलसिले वार पढा जाएगा। स्वराज्य करुण जी ने एक गंभीर विषय को लेकर आलेख लिखा है। हिन्दी के सरलीकरण के नाम पर भाषा को बिगाड़ने का षड़यंत्र हो रहा है। हिन्दी वाक्य में अंग्रेजी के शब्द भी घुसेड़े जाएगें, जिन्हे अनचाहे ही लोगों को झेलना पड़ेगा। हिन्दी के सरलीकरण के नाम पर यह सही नहीं  है। इसका पुरजोर विरोध होना चाहिए। हिन्गलिश के पक्षधरों ने लार्ड मैकाले को भी पीछे छोड़ दिया। मैकाले ने हमारी शिक्षा पद्धति को बदल डाला तो उसके मानस पुत्र हमारी भाषा को ही बदल डालने के फ़ेर में हैं। अब चलते हैं आज की ब्लॉग4वार्ता पर..........।

सत्ता की सांप-सीढ़ी का खेल सीबीआई जारी है, पर सुकून गायब है, क्यों कि अन्ना भाई ने एलान कर दिया है कि अब कम ही सक्रिय रहूंगा मैं इंटरनेट पर , भैया हमारे कहने से तो माने नहीं, अच्छा हुआ हकीम के कहने से मान गए। क्योंकि एक होता है बाघ और एक होता है बघेरा, जब दिन निकले तब समझो सबेरा।बाली जात्रा महोत्सव हो रहा है, रात की गीली हथेली पर सरसों जमाई जा सकती  है, है ना कमाल का करिश्मा।हिंदी उर्दू के पंख उग आए हैं, परवाज सात समंदर पार है, यात्रा जारी है,  हरकीरत हीर जी ने अभूतपूर्व साहित्यिक दस्तावेज’ सौंपा है, अब जाकर ही देख आईए, किसे और क्यों सौंपा है। हम तो देख आए, पर टिपियाएगें बाद में, अभी चौखट पर खड़े पवन चन्दन और वार्ता का सफ़र जारी है।

उद्घोष हो रहा है एक नई इंकलाबी चाहिए, ले आईए भाई हमे कौनो इतराज नहीं है, हमें भी एक नयी रकाबी चाहिए, टूट गयी हो हल्ले में, गदर मचा है मुहल्ले में। अब कुछ कुछ मुस्काने की बात करो तो बात बने।आहिस्ता आहिस्ता बढते हैं, एक सवाल है देश की असली संसद कौन सी? अब जवाब आप दीजिए या अन्ना भाई से लीजिए। ठंड बढ रही है सर्द रात ख्वाबों में बड़ा कहर व्यापा है, सपने बहुत डराते है, नहीं डरना चाहिए डरावने सपनों से क्योंकि ज़माना बदल गया है  अब हमें भी बदलना चाहिए। संसार के खत्म होने से पहले माया पुजारियों ने विशेष धार्मिक कर्मकांड शुरू किए। अब देखते हैं संसार बचता है कि प्रलय आता है।

ब्लॉगोत्सव में टोपी, मफलर साथ लायें जी नहीं सांपला कोई हिल स्टेशन नही है, लेकिन पिछले ३-४ दिनों से बढती ठंड ने टोपी, मफलर को अनिवार्य कर दिया है। और रात के समय ७:०० बजे से १२:३० बजे तक कवि सम्मेलन में बैठना है तो जितनी एहतियात बरती जाये, मातृत्वब्लॉग जगत में आये मुझे लगभग ढाई साल हो गए है.इस समय में जो भी लिखा वो आप सभी लोगो ने सराहा.जिससे मुझे ओर लिखने की हिम्मत मिली .बीच बीच में कुछ रुकावटें भी आयी जिससे लिखना कम हुआ लेकिन लिखने का शौक ओर आपका...

इतना सा फसानाक्रिसमस का समय है. बाजारों में ओवर टाइम हो रहा है और स्कूलों में छुट्टी है .तो जाहिर है की घर में भी हमारा ओवर टाइम होने लगा है.ऐसे में कुछ लिखने का मूड बने भी तो अचानक " भूख लगी है ........या .."तू स्टुपि...हद-ए-वफ़ा क्या है आख़िर?नैना को पहली बार देखा था तो हैरान रह गई थी। कोई इतना भी ख़ूबसूरत हो सकता है? रौशन चेहरा, गोरा रंग, तीखे नक्श और चेहरे पर चमकती मुस्कान। हम पड़ोसी थे लेकिन सीढ़ियों पर आते-जाते एक-दूसरे का हाल पूछने के अलाव...घर का शौहर ! 

रेत के शिल्प में घरइधर हाल में गौतम चटर्जी को पढ़ने का अवसर मिला. उनकी कविताओं में जीवन के प्रति जिजीविषा, मृत्यु बोध और दर्शन की छाप जितनी गहन है, उतनी ही सरल उनकी भाषा भी है. फिलहाल एक प्रिय कविता और साथ में साल्वाडोर डा...कैसे बिछी लोकपाल पर मठ्ठा डालने की सियासी बिसातयह पहला मौका है जब सरकार ने किसी बिल को पेश करने से ज्यादा मशक्कत बिल पास न हो इस पर की। और अन्ना टीम को बात बात में पहले ही यह संकेत दे दिया गया कि अगर वाकई लोकपाल के मुद्दे में दम होगा तो आने वाले वक्त म...मेहरबानों के घर के बाहर 

चलते चलते व्यंग्य चित्र

मिलते हैं ब्रेक के बाद, राम राम

शुक्रवार, 23 दिसंबर 2011

पहचान तो खुद बोलती है... ब्लाग4वार्ता...संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार, वार्ता पर आप सभी का स्वागत है. प्रस्तुत है, आज कुछ निराले और ख़ूबसूरत लिंक्स... 

गीत तुमको ढ़ूँढ़ता है
आखिरी पल का अकेला, गीत तुमको ढ़ूँढ़ता है। रुक न जाये श्वास वेला, मीत तुमको ढ़ूँढ़ता है। स्नेह का आकाश अब भी, नेह का दो बूँद माँगे, अश्रु का प्रवाह बह-बह, नैनों का फिर बाँध लाँघे। सिसकियाँ देती है मेरे, सर्...

काश !
चौराहे पर खड़ा एक मोटर साईकिल सवार| कर रहा था हरी बत्ती का इंतज़ार| पड़ोस में खड़ी थी एक कीमती कार, आधी खुली खिड़की से कुत्ते का बच्चा झाँक रहा था बाहर| वह सवार, उस कुत्ते के बच्चे को , निहार रहा था बार ...

अलविदा ए वर्ष.....
अलविदा ए वर्ष तुम्हारा अभिनन्दन, सीने पर ले चले भ्रष्टता का क्रंदन, कभी नहीं सोचा था तुम ऐसे जाओगे, कुछ खुशियाँ कुछ जीवन को रंगबिरंगा कर जाओगे , उथल पुथल से भरा रहा ये सारा वर्ष, जीवन मुझ...

भारत पाक युद्ध के चालीस साल
भारत-पाक युद्ध की तस्वीर ( गूगल से साभार ) भारत-पाक के बीच हुआ 1971 का युद्ध स्वतंत्र भारत के इतिहास में हमेशा अविस्मरनीय रहेगा . तब हम मात्र 14-15 साल के थे तथा हायर सेकेंडरी के छात्र थे . एक दिन स्कूल...

"सूखे दरख़्त "
सूख चुके रिश्तों में, शायद, आँखों की नमी भी ना रही | फासले दरमियां, कुछ यूँ हुए, कि संग रह के भी संगदिल हुए | दूरियां क्या इतनी, कि तय हो ना सके | *अरे !* *सूखे दरख़्त हो,* *या हो रिश्ते* *शादाब हो भी सकते ...

पहचान प्रश्नचिन्ह तो नहीं  
पहचान प्रश्नचिन्ह तो नहीं पहचान तो खुद बोलती है बिना किसी शब्द के बिना किसी मोल भाव के पहचान तो बनती ही है फिर चाहे जड़ हो या चेतन चाहे कोई भी रूप हो रंग ह... 

साहिर लुधियानवी की नजरों में ताजमहल
ताज़ तेरे लिये इक मज़हर-ए-उल्फ़त ही सही तुम को इस वादी-ए-रंगीं से अक़ीदत ही सही मेरे महबूब कहीं और मिला कर मुझ सेताज तुम्हारे लिए प्यार का एक प्रतीक सही और तु... 
 
आह ! वो बचपन
वो गालों पे उँगलियों के निशान.. वो मार खा कर सूजे-सूजे होंठ, कंप-कपाता मन, डर के मारे... अश्रुओं से भीगा वो चेहरा मुझे भूलता ही नहीं है. ... 

'फहमियां' !
*जब ठिठुरती ठण्ड में,* * * *मेरी कक्षावधि शुरू होती थी * * * *और तुम्हारी ख़त्म,* * * *अक्सर ही * * * *महाविद्यालय के मुख्यद्वा... 

छिटकी धुप
आसमाँ के पथ से चल के सितारों की छाँव में सतरंगी झूले में झूल के बादलों के रथ पे हो सवार उतर धरती पे एक नन्ही किरन आई छिटकी धुप अलसाई सी रात गई अंगड़ाई लेती भ... 

ज़माना बदल गया है --आँखों देखी ---
ऋषि कपूर और नीतू सिंह पर फिल्माया गया एक गाना था -- खुल्लम खुल्ला प्यार करेंगे हम दोनों , इस दुनिया से नहीं डरेंगे हम दोनों । लेकिन तब न तो हकीकत में , ... 

वही तो हमराज है
वही तो हमराज है राज करना इस जहाँ पर, कायरों का काम है दिल पे अपने राज कर ले, वह बना सरताज है सो रहे हम क्यों तिमिर में, जग गया वह सूर्य बन राह रोशन कर गया...   

मुनु बिलाई रे मुनु बिलाई (बाल-गीत)
मुनु बिलाई रे मुनु बिलाई तयँ बघुवा के मौसी दाई. कुकुर देख के थर थर काँपे ठउँका दउँड़त प्रान बचाई. मुनु बिलाई रे मुनु बिलाई………………. नान नान तोर पीला दू किंजर..

 मातृत्व 
 ब्लॉग जगत में आये मुझे लगभग ढाई साल हो गए है.इस समय में जो भी लिखा वो आप सभी लोगो ने सराहा.जिससे मुझे ओर लिखने की हिम्मत मिली .बीच बीच में कुछ रुकावटें भी... 

रिश्ते...और हम... 
*मेरी डायरी से* ... बरौनी रिफायनरी २३-९-२००६ हर रिश्ता ... बड़े प्यार से, बड़े लगन से काफी समय में बन पाता है और कभी कभी instant भी बन जाता ह..  

दिवा- स्वप्न 
दिवा--स्वप्न दिवा स्वप्न देख-देख अब बहुत खुश हो चुकी , चैन से रातो को  सोना भी अब तो मुहाल हो गया !आकाश की गहराइयो को लांधकर बहुत थक चुकी ,पैर जमीं पर र...

चलते-चलते देखिये मेरी पसंद का एक गीत

 


सादर-
संध्या शर्मा
मिलते हैं अगली वार्ता पर... 



गुरुवार, 22 दिसंबर 2011

आज जी जाने को जी चाहता है.... ब्लाग4वार्ता...संध्या शर्मा


संध्या शर्मा का नमस्कार, आप सभी का स्वागत है. लीजिये प्रस्तुत है, आज की वार्ता कुछ नए और बेहतरीन लिंक्स के साथ...
बस यूँ ही .... - देर रात तक तारों संग , खिलखिलाने को जी चाहता है. चांदनी के आँचल को खुद पर से, सरसराते गुजरते जाने को जी चाहता है. पीपल की मध्धिम परछाई से छुपते छुपाते , ...  

समंदर सा इमरोज़ , सीप सा इमरोज़ - अमृता को मोती बनना ही था !
अमृता - एक टीनएजर की आँखों में उतरी तो उतरती ही चली गई ... वक़्त की नाजुकता रक्त के उबाल को किशोर ने समय दिया फिर क्या था समय अमृता को ले आया .... अमृता के पास शब्द थे इमरोज़ के पास सुकून का जादू ज...

स्कूल की छुट्टी..क्रिसमस की बधाइयाँ !!
आज से मेरे स्कूल की छुट्टियाँ आरंभ हो गई हैं. अब मेरा स्कूल क्रिसमस और नए साल के बाद 2 जनवरी को खुलेगा. तब तक तो मुझे खूब मस्ती करनी है, घूमना है. स्कूल बंद होने से पहले हम सभी को क्रिसमस कार्ड बनाने का प...

मैं और मेरी तन्हाईयाँ -----!
* * * * मैं और मेरी तन्हाईयाँ * * *"अपने फ़साने को मेरी आँखों में बसने दो !* *न जाने किस पल ये शमा गुल हो जाए !" * बर्फ की मानिंद चुप -सी थी मैं ----क्या कहूँ ? कोई कोलाहल नहीं ? एक सर्द -सी सिहर...

भारत तो धरती को रब की सौगात है !
सिन्दूरी सुबह है ...उजली हर रात है अपने वतन की तो जुदा हर एक बात है जितने नज़ारे हैं जन्नत से प्यारे है भारत तो धरती को रब की सौगात है . बासन्ती मादकता मन को लुभाती है रंगीले फागुन में सृष्टि रंग जाती...

बेचारे मजबूर प्रधानमंत्री ...
*सेवा में* *प्रधानमंत्री जी* *भारत सरकार* प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी, मैं पिछले कई दिनों से नहीं बल्कि महीनों से देख रहा हूं कि गल्ती कोई और कर रहा है, लेकिन निशाने पर आप हैं। इसके कारणों पर नजर डालें...

"सिसकते लम्हे" 
न अब यहाँ रुकने का मन न किसी को रोकने का, न किसी के आने का सबब न अब किसी के जाने का, बस सारी रात, तन्हा, बरस जाने का मन घुप्प अंधेरो में, अपनी ही परछाई से, सिसकते हुए लिपट जाने का मन

मेरी राय तो यही है कि जितना नुकसान फेसबुक ने हिन्‍दी चिट्ठाकारी (ब्‍लॉगिंग) को पहुंचाया है, उतना तो नहीं परंतु कुछ नुकसान तो अविनाश वाचस्‍पति जी की बीमार... 
 कभी तो निकलें मनुष्यता के मोर्चे मोर्चे जिनमें केवल महिला-पुरुष की बात ना हो ना ही नारे लगें एक धर्म की जय और दूसरे की पराजय के समानता ,असमानता का ... 
एक कोशिश करता रहता हूँ मैं बस.. मैं.. नहीं कुछ और हो जाऊँ उलझन उलझन तैर रहा हूँ जाने क्या से क्या हो जाऊँ कभी सोचता धूप बनूँ... 
 यादें.....!!! "यू उठा तेरी यादो का धूआँ जैसे चिराग बुझा हो अभी अभी"॥ क्यों याद आता है ,वो गुज़रा ज़माना  जो नामुमकिन है,लौट के वापस आना |  वो ठंडी ... 
*नेताओं का काम रुलाना है * * अपना तो काम हँसाना है * * होगई दो दिन की आरामगी * * अब फिर सफ़र पर जाना है* * * ______________22 -23 अहमदाबाद _______...  
 
*सभी मित्रों को प्यारी जिद्द भरा नमस्कार !! जिद्द भी कई तरह की होती है !! बच्चे की जिद , जो अच्छी लगती है ?? पत्नी या प्रेमिका की जिद , जो प्यारी लगती है...
   
 "अपनी यादों से कहो थोड़ी जगह खाली कर दें,

तेरे सपनों को कुछ और जगह चाहिए..." 
 
 
सादर-
संध्या शर्मा
मिलते हैं अगली वार्ता पर... 

बुधवार, 21 दिसंबर 2011

एक मीठा सा अपना ख्याल.... ब्लाग4वार्ता...संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार, आप सभी का स्वागत है आज की वार्ता मे प्रस्तुत है मेरी पसंद के कुछ खास लिंक्स

अपने अन्दर का ही ख्याल  एक मीठा सा अपना ख्याल

जनकवि नहीं रहे ....  जिनको सुनना था  उन्होंने न तब सुना ना आज 

खुद से मुलाकात.. कितनी मुश्किल है खुद से मुलाकात 

ये दिल्ली है........यहाँ  जाऊं-न-जाऊ.. 

जिंदगी सबकुछ सिखा देती है .....  क्या कभी आपके मन में भी यह खयाल आता है !!

इतना असर है ख़ादी के उजले लिबास में  अच्छी कविता अच्छा आदमी लिखता है 

जिसको खुद सहलाते हैं  संग तुम्हारे जो पल बीते, याद वही पल आते हैं 

आशा नयी इक ज्योति जगा जाता

स्मृतियों में रूस ... ( शिखा वार्ष्णेय ) ..मेरी नज़र से  ब्लॉगजगत का जाना माना नाम

महफिल सजी है आजा…………॥ देर ना हो जाये कहीं देर ना हो जायें 

हिंदी उर्दू के पंख ऐ परदेस मुझे, हिंदी उर्दू के पंख लगा के उड़ उड़ जाऊं मैं

अब कम ही सक्रिय रहूंगा मैं इंटरनेट पर : अविनाश वाचस्‍पति होगा कम आना जाना

सादर-
संध्या शर्मा
मिलते हैं अगली वार्ता पर... 
        



 

मंगलवार, 20 दिसंबर 2011

क्या कहता है ये तूफान...? ब्लाग4वार्ता...संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार, एक दिवसीय अवकाश के बाद प्रस्तुत हैं कुछ चुनिन्दा ब्लॉग लिंक उम्मीद करती हूँ आपको भी पसंद आयेंगे....

ज़िंदगी की तपती हुई ज़मीं पर...!
बोलने से दूरियां बढ़ती हैं निकटता में शब्द बहुत कम होते हैं! बिना कहे ही समझ ली जाए बात ऐसे रिश्ते कम होते हैं! ज़िंदगी की तपती हुई ज़मीं पर कुछ हिस्से ही नम होते हैं! मिटा नहीं सकती समय की धार ऐस...

सच-झूठ पर दोहे
*कुँवर कुसुमेश* सच्चाई फुटपाथ पर, बैठी लहू-लुहान. झूठ निरंतर बढ़ रहा,निर्भय सीना तान. उन्नति करते जा रहे,अब झूठे-मक्कार. होगा जाने किस तरह,सच का बेड़ा पार. झूठ तुम्हारे हो गए,कितने लम्बे पैर. सच की इज़्..

"लेन्ज़ का नियम और मनुष्य"
"लेन्ज़ का नियम कहता है कि चुम्बकीय फ़्लक्स में परिवर्तन होने पर उत्पन्न ई.एम.एफ़.से प्रवाहित धारा की दिशा इस प्रकार क़ी होती है कि उससे उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र उस कारण का ही विरोध करता है .

कैसे तय होगा
जो मैं कहूँ वो तुम कहो - ज़रूरी नहीं फिर जो तुम कहते हो वही मैं भी कहूँ - क्यूँ ज़रूरी होता है ? मैं तो मानती हूँ कि विचारों की स्वतंत्रता ज़रूरी है अपना अपना स्पेस ज़रूरी है तुम भी मानते हो ... तभी मेरी...

मुर्गा लडाई का रोमांच
स्‍पेन, पुर्तगाल और अमेरिका का बुल फायटिंग (सांड युध्‍द) का नजारा मैंने टीवी पर देखा है..... रोमांच का आलम वहां होता है इस खेल के दौरान पर पिछले दिनों मैंने उससे ज्‍यादा रोमांच देखा छत्‍तीसगढ के वनाचंल मे...

यह प्रामाणिक है परंतु प्रत्‍येक को अलग अलग बतलाऊं पासीबल नहीं है
दिनांक 17 दिसम्‍बर 2011 को दोपहर दो बजकर बीस मिनिट पर इंस्‍टीच्‍यूट लीवर एंड बायलरी साईसेंज, वसंत कुंज में लगाया गया है। इससे पहले 13 दिसम्‍बर से दो दो कैप्‍सूल Ribavirin and 1 capsule ..

क्या सिर्फ़ लिख कर ब्लागिंग की जाए : गिरीश बिल्लोरे मुकुल
पद्मसिंह जी के ब्लाग पद्मावलि से साभार * हिन्दी ब्लागिंग अब केवल लिपि आधारित ब्लागिंग नहीं रह गई है लोग आडियो-वीडियो ब्लागिंग के लिये भी आगे आ रहे हैं इनमें मध्य-प्रदेश सबसे अव्वल है इन्दौर से अर्चना चा...

महत्व ....
महत्व... आफिस में क्लर्क का, व्यापार में संपर्क का. जीवन में वर्क का, रेखाओं में कर्क का, कवि में बिहारी का, कथा में तिवारी का, सभा में दरवारी का,भोजन में तरकारी का. महत्व है,... ससुराल में साली का,बगीचे...

जिंदगी के मेलों में.......
जिंदगी के मेलों में, मैं देख रहा हूँ तमाशे कहीं ठेलों पर बिकती चाट, और कहीं पानी बताशे * खट्टा सा है स्वाद खुशी का ,कहीं गम मीठे लगते हैं जलजीरे मे कभी मिठास, कभी शर्बत तीखे लगते हैं पीना है फिर जीना है,ज..

मेरे मन की
मेरे दो अनमोल रतन .. - अरे कब बड़े हो गए पता ही नहीं चला ...... देखो तो जरा ----वही हैं ये .....  
हौसले जब जवान होते हैं, ज़ेर पा आसमान होते हैं. ग़म को पीकर जो मुस्कुतारे हैं, आदमी वो महान होते ह...    
बाल विवाहएक अभिशाप ......... - गुड्डे और गुड़ियों का व्याह जो रचाती है | अगले ही पल वह , ख़ुद दुल्हन बन जाती हैं | जो पिता नहीं कह पाती, वह पत्नी क्या कहलाएगी | जो दूध अभी पीती है, ... 
 
हामी..मुस्कुराहट...धूप...मेरा आसमान और तुम... - ख्यालों की सिगरेट जलती जा रही थी... झड़ती जा रही थी तगाफ़ुलों की राख अचानक मैंने कहा तुम से ‘सुनो मेरी ओर से हां है...’ तुम ने मुस्कुरा के कहा, ‘मेरी तरफ ...
 कालाधन ... - बिट्टू - चच्चू, काला धन क्या होता है ? चच्चू - बेटा ... कालाधन ... बोले तो, जो आम इंसान को दिखाई न दे ! बिट्टू - और सफ़ेद धन ? चच्चू - बेटा, वह जो आम इंसान... 
 दर्द तो होता रहता है, दर्द के दिन ही प्यारे हैं - जब चाहा इकरार किया, जब चाहा इनकार किया देखो, हमने खुद ही से, कैसा अनोखा प्यार किया. ऐसा अनोखा, ऐसा तीखा, जिसको कोई सह न सके हम समझे पत्ती पत्ती को, हमने ही ... 
 कुछ मीठा हो जाए ?--या फिर थोडा सा परोपकार ? - परोपकार करना चाहिए, ऐसा सभी कहते मिलेंगे लेकिन इस दिशा में प्रयासरत विरले ही होते हैं ! सभी अपनी-अपनी पूरी ऊर्जा के साथ कमाने में लगे हुए हैं! कोई धन कमा र..

  
मैं और मेरी कवितायेँ...
अंतिम कविता... संध्या शर्मा - *सृष्टि के अंतिम दिन उसके और हमारे बीच कोई नहीं होगा तब मृत्यु एक कविता होगी एक अंतिम कविता बिना किसी भेद-भाव के स्वागत करेगी सबका उस दिन यह दुनिया न तेरी...


"मन काफी खिन्न है, रविवार को दक्षिणी फिलिपीन्स में आये भीषण तूफ़ान को लेकर. 652 की मौत और 800 लापता. मरने वालों की संख्या इसलिए ज्यादा है क्योंकि बाढ़ अचानक आई लोगों के घर में पानी तब घुसा जब वे गहरी नींद में सो रहे थे, मतलब वे सो गए मौत की गहरी नींद में... ईश्वर वहां की जनता को इस दुःख को सहने की शक्ति दे.... "

हाँ आप सभी से मिलने वाले प्यार और सहयोग के लिए आप सब का बहुत बहुत आभार और धन्यवाद !

सादर-
संध्या शर्मा
मिलते हैं अगली वार्ता पर... 
        


एक चटका इधर भी हो जाए

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