गुरुवार, 31 मई 2012

बिना अभिमन्यु बने चक्रव्यूह नहीं टूटेगा .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

आप सबों को संगीता पुरी का नमस्‍कार , करीब एक सप्ताह में पहली बार देश की मुद्रा रुपया बुधवार को डॉलर के मुकाबले 56 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे पहुंच गई। बाजार के जानकारों का कहना है कि माह के आखिर में देनदारियों के भुगतान के लिए आयातकों के में डॉलर की मांग बढ़ने के कारण रुपये पर दबाव देखा जा रहा है। उनके मुताबिक डॉलर के मुकाबले यूरो में कमजोरी और शेयर बाजारों में गिरावट का भी रुपये पर नकारात्मक असर पड़ा। अर्थव्‍यवस्‍था में अनिश्चितता बनी हुई है , सरकार को ध्‍यान देने की आवश्‍यकता है , क्‍योकि लापरवाही से कहीं ऐसा न हो जाए कि हमें 1 डॉलर के लिए 100 रूपए चुकाना पड जाए।अब चलते हैं आज की वार्ता पर .. 
स्याह या सफ़ेद...? (http://www.anusheel.in/2012/05/blog-post_30.html ) न सफ़ेद होता है... न स्याह होता है बीच में कई रंग घुले-मिले होते हैं चरित्र में, इंसान झूलता रहता है दो किनारों के मध्य और आकार उभरते जाते हैं चित्र में... मानों, सब परिस्थितियां ही निर्धारित करती हैं, हमारी दुकान पे किसी से कोई प्रमाण पत्र माँगा नहीं जाता...(http://albelakhari.blogspot.in/2012/05/blog-post_30.html ) गड़गड़ गड़गड़ गड़गड़ गड़गड़ धुप्प गड़गड़ गड़गड़ गड़गड़ गड़गड़ धुप्प आओ आओ आओ, आजाओ आजाओ आजाओ हमारी दुकान पर आओ बिना पूछे घुस जाओ नो एंट्री वाला कोई गेट नहीं है देना कोई सर्टीफिकेट नहीतेरे आने के बाद (http://aprnatripathi.blogspot.in/2012/05/blog-post_30.html) *तेरे आने से पहले मेरी नींदें* *ख्वाबों से बेजार तो ना थी* * प्यार के अहसास से दिल* * मरहूम रहा हो ऐसा भी ना था* * मगर फिर भी तेरे आने से* * लगता है सब बदल सा गया* * अब ही से तो हमने किया है* *
 आग की आंच...( kaushal-1.blogspot.com/2012/05/blog-post_30.html) यदि पड़ोसी के घर लगी आग नहीं बुझाओगे तो इसमें खुद के घर भी जल जाने से नहीं रोक सकते। इतनी सी बात न तो प्रदेश के मुखिया को समझ आती है और न ही भारतीय जनता पार्टी के जेहन में बैठ रही है।  नाम दिल पर जो लिखा उसको मिटाकर देखो (http://ashutoshmishrasagar.blogspot.in/2012/05/blog-post_30.html) एक दिन अपने पराये को भुलाकर देखो एक दिन यूं ही नजर हमसे मिलाकर देखो मेरे सीने में जो दिल है, वो धडकता भी है आह निकलेगी कोई, इसको जलाकर देखो नाम तुमने जो मिटाया,. बिना अभिमन्यु बने चक्रव्यूह नहीं टूटेगा (http://www.nirantarajmer.com/2012/05/blog-post_8885.html) कहीं खो गया हूँ खुद को भूल गया हूँ सब की सोचते सोचते खुद भटक गया हूँ आत्मविश्वास से डिग गया हूँ निराशा के चक्रव्यूह में उलझ गया हूँ इतना अवश्य पता है

 पॉश खेल .. (shikhakriti.blogspot.in/2012/05/blog-post_30.html) विशुद्ध साहित्य हमारा कुछ उस एलिट खेल की तरह है जिसमें कुछ सुसज्जित लोग खेलते हैं अपने ही खेमे में बजाते हैं ताली एक दूसरे के लिए ही पीछे चलते हैं लगवाना है आर.ओ. तो ज़रा इधर नज़र मारो  (http://saadarblogaste.blogspot.in/2012/05/blog-post_30.html) दोस्तों मुझे भारत के लगभग हर हिस्से से लोग फोन करके पूछते हैं की हम वाटर प्यूरीफायर लगवाना चाहते हैं. कौन सा लगवाएं? वाटर प्यूरीफायर लगाना एक ऐसा धंधा बन चुका है, गंगा चित्र-6 ( गंगा दशहरा ) ( http://devendra-bechainaatma.blogspot.in/2012/05/6.html)हरिश्चंद्र घाट साधुओं की अड़ी केदार घाट पंचगंगा घाट दशाश्वमेध घाट
 

बढ़ कदम रुकने न पाये  (http://anukhyaan.blogspot.in/2012/05/blog-post_30.html) राह काँटों से भरी हो, या उमड़ती सी सरी हो, जीत की चाहत खरी हो, काल सिर नत हो झुकाये। बढ़ कदम रुकने न पाये। पंख अपने आजमाता, .मन-रेगा तन-रेगा -(http://anukhyaan.blogspot.in/2012/05/blog-post_30.html)(1) मन-रेगा रेगा अरे, तन रेगा खा भांग | रक्त चूस खटमल करें, रक्तदान का स्वांग | रक्तदान का स्वांग, उदर-जंघा जन-मध्यम | उटपटांग दो टांग, चढ़े अनुदानी उत्तम | पर हराम की खाय, पाँव हाथी सा फूला |‘‘आम‘‘ लोग ‘‘खास‘‘ कब से हो गये? (http://svatantravichar.blogspot.in/2012/05/blog-post_30.html)जब से पेट्रोल के भाव में 7.50 रू. की बढ़ोतरी पेट्रोलियम कम्पनियों द्वारा की गई है तब से पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ है, 
 अधूरी कविता...संध्या शर्मा (anamika7577.blogspot.com/2012/05/blog-post_30.html ) *जीवन के केनवास पर आज फिर नए रंग नयी तूलिका के साथ कब से बना रही हूँ एक तस्वीर आड़ी टेडी सीधी रेखाएं क्या बना रही हैं मैं खुद नही समझ सकी क्यों है ये रंगों का बिखराव क्यों है चौखटें (anamika7577.blogspot.com/2012/05/blog-post_30.html ) तुम्हारे घर की चौखटें तो बहुत संकीर्ण थी... चुगली भी करती थी एक दूसरे की... फिर तुम कैसे अपने मन की कर लेते थे...? शायद तुम्हारी चाहते घर की चौखटों से ज्यादा बुलंद थी तब. आज मसरूफ़ियत (sushilbhagasara.blogspot.com/2012/05/blog-post_30.html) आज फिर गोलू पहुँचा अपनी प्यारी दुनिया में खुशबुओं की क्यारी में रंग-बिरंगे फूल खिले थे हरे पेड़ तन कर खड़े थे भँवरे गुंजन कर रहे थे पक्षी खूब चहक रहे थे नाचा बहुत सुंदर मोर
फार्मूला ईजाद करनेवाला निर्देशक (http://anukhyaan.blogspot.in/2012/05/blog-post_30.html) दिबाकर बनर्जी जब अपनी फिल्म ‘खोंसला का घोंसला’ लेकर आये थे, तो इस फिल्म ने बनने में जितना वक्त लिया, उससे कहीं अधिक वक्त व संघर्ष उन्होंने फिल्म को रिलीज कराने के लिए किया."झंडा है जरूरी" (http://vandana-zindagi.blogspot.in/2012/05/blog-post_30.html)ये मत समझ लेना कि वो बुरा होता है पर तरक्की पसंद जो आदमी होता है किसी ना किसी पार्टी से जुडा़ होता है पार्टी से जो जुडा़ हुवा नहीं होता है उसकी पार्टी तो खुद खुदा होता है.श्रापित मोहब्बत हो कोई और उसे मुक्तिद्वार मिल जाये (http://vandana-zindagi.blogspot.in/2012/05/blog-post_30.html) आज भी कुंवारी है मेरी मोहब्बत जानते हो तुम रोज आती हूँ नंगे पाँव परिक्रमा करने उसी बोधिवृक्ष की जहाँ तुमने ज्ञान पाया जहाँ से तुमने आवाज़ दी

आज के लिए बस इतना ही ... मिलते हैं एक ब्रेक के बाद

बुधवार, 30 मई 2012

अपने परिचय से अनजान सहगामिनी... ब्लॉग4वार्ता....संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार... पेट्रोल दाम वृद्धि के चौतरफा विरोध से घबराई UPA सरकार.डीजल, मिटटी के तेल और रसोई गैस के दामो में फ़िलहाल कोई बढ़ोत्तरी नहीं.१.५० रुपये  तक सस्ता हो सकता है, देखते हैं आगे -आगे क्या होता है. आइये फिर चलते हैं आज की ब्लॉग 4 वार्ता पर कुछ  अनूठे लिंक्स के साथ...  ....

"एक पगडण्डी नई ............"राह हो, न हो, रहगुजर हो, न हो, साथ हो, न हो , साथी हो, न हो , साया हो , न हो, रौशनी हो, न हो, सितारे हो ,न हो, पंछी बोले , न बोले , नदी थमे या रुके पवन, पौ फटे , न फटे, पग उठ जाते हैं अब , चल पड़ने को रो... मन उपवन इन दिनों मेरे मन उपवन में बहार अपने पूरे यौवन पर है ! ह्रदय के बीचों बीच वर्षों से गहरी जड़ें जमाये मेरे दुःख के अमलतास की हर डाल पर इन दिनों दर्द के ज़र्द पीले गुच्छे ही गुच्छे लटक रहे हैं ! मेरे ... उड़ने को .. उड़ने को आसमां है घर बनाने को जमीं होती - अश्कों का सिलसिला है जब आँखों में , नमीं होती- आते हैं , ख़यालात बहुत , जब किसी की, कमीं होती- बनती है गल , फ़सा...

सुप्रसिद्ध लेखिका एवं समाजसेवी जेन्नी शबनम से अशोक लव की बातचीत *1.**आपकी रुचि साहित्य की ओर कैसे हुई **?* *** साहित्य के प्रति रुचि कब से है, इस विषय पर कभी सोचा नहीं. लेकिन इतना ज़रूर है कि पढ़ने-लिखने के प्रति अभिरुचि बचपन से रही है| मेरे माता-पिता शिक्षा के क्षेत्...बाल्टी और नल गर्मी का मौसम दहकते अंगारों के बीच ये बाल्टी इंतजार में है नल के जब बाल्टी खाली होती तब रुठ जाता है नल मुए मुंशीपाल्टी वाले भरने नहीं देते बाल्टी आधी बाल्टी भरते ही चला जाता है नल मोंटू की दो चार नैपी धोकर ट... सुबह सबेरे दो-चार कदम की दूरी पर सुबह-सुबह दो चार सौ कदम की दूरी पर मडई में बच्चों को चहकते देखा सभी के सभी एक एक लत्ते में थे आंखे कदमो से कई गुन्नी रफ्तार में चल रही थी धुँआ पहाडो में खो रहा था हर पचास कदम पर मिट्टी से बने घरो...
 
अन्तर्सम्बन्ध मेरा भी मन मचलता है एक प्रश्न के साथ, हमेशा गिरता और सम्भलता है क्यूँ नहीं लिख पाता एक कविता मुक्त छंद की? मुक्त छंद की कविता या छंद मुक्त कविता? आप जो भी कह लें, जो भी नाम दें लेकिन यह सवाल मेरे मन में...अपने परिचय से अनजान सबका परिचय पाना चाहता है दिल खुद अपने परिचय से घबराता है दिल कितना झूठ , कितना धोखा , कितनी बईमानी है हममे ........ हाँ इस पैमाने को अच्छे से जानता है दिल शायद इसलिए खुदको मिलने से घबराता है दिल मंदिर म... मैं - अजल से गाता रहा ..... तुम – अजल से सुनती रही मैं पिघल रहा था , उसके बदन के ताप से – और वो रात भर लिपटी रही, मुझको चन्दन किए हुये। **************************** मैं – आकाश हूँ .... झुक जाता हूँ, तुमपे हरदम ..... तुम – पृथा हो कर , हर वक़्त मुझे – ..
 
सहगामिनी .सहगामिनी हो जीवन-पथ की, सहभागी एक-से स्वप्नों की, हाँ, उसके सुरमयी स्वप्नों की संचयिका बनना चाहता हूँ. वो कहे तो मैं सजदे कर लूँ, या खुद के घुटनों पे हो लूँ, मगर जहाँ वो सिर रख सके, वो कन्धा देना चाहता ह... .हक जिसे ,जब, जहां जाना है चला जाए अबकि, रोकूंगी नहीं. थक गयीं हूँ मनुहार करते-करते . मुझे प्यार है ,तुमसे तुम पास रहो यह चाहत है तुम्हारी ज़रूरत है केवल तुम्हारी आदत है. उसका रत्ती भर भी अगर .. ...तुम महसूस ... एक समय जो गुजर जाने को है - एक बार फिर- तीन कविताओं के साथ प्रस्तुत. शायद जल्द नियमित हो जाऊँ इस उम्मीद के साथ. एक नये उपक्रम को अंजाम देने की चाहत में कुछ पुरानी नियमित दिनचर्या से... 
 
नन्हें कन्धों पर जीवन का बोझ - आज नवभारत, 26 जुलाई 1984 अंक में प्रकाशित यह रपट : आज जब सारे के सारे जंगल काट लिये जा रहे हैं, न केवल बड़े शहरों में बल्कि सुदूर गाँवों में भी ईंधन के ल... इसलिए ... - अक्सर मेरी कविता लाँघ जाती है अनगिनत खींची हुई लक्ष्मण रेखाओं को... रावणों को चकमा देकर हथिया लेती है पुष्पक विमान... विस्मृति में कहीं भटक रहे हैं हनुमान.....तभी पढ़ें जब आपके पास प्रमाण-पत्र हो ! - •जी हाँ ,आपने सही समझा ! अब मैं कोई ऐसा वैसा ब्लॉगर या लेखक नहीं रहा. मैं इत्ता पढ़ा जाता हूँ कि मेरा दम घुटने लगा है.मेरी कोई भी रचना अब मेरे निजी पेटे...  
 
आज की वार्ता को देते हैं विराम मिलते हैं, अगली वार्ता पर तब तक के लिए नमस्कार ........

मंगलवार, 29 मई 2012

गुल बत्ती के बीच ब्लॉग नगरिया की सैर ----- ब्लॉग4वार्ता ---- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, फ़ेसबुक पर स्वराज करुण कह रहे हैं - मेरे जैसे कई लोगों को कपड़े सिलना नहीं आता और कपड़े सिलने में माहिर दर्जियों को हम जैसों की तरह कम्प्यूटर चलाना. कई पढ़े-लिखे डाक्टर ,वकील ,पत्रकार ,अफसर और प्रोफ़ेसर आदि आसानी से कार ,स्कूटर और मोटरसायकिल चला सकते हैं लेकिन उनके बिगड़ने पर उन्हें बनाना नहीं जानते इसके लिए उन्हें आठवीं फेल छोटू मिस्त्री के ही पास जाना पड़ता है .और ज्यादा दूर क्यों जाएँ ? हम जैसे कई लोग घरों में केवल खाना जानते हैं लेकिन खाना बनाना नहीं , जबकि अधिकाँश घरों की गृहणियां अपने-अपने रसोई घरों की विशेषज्ञ होती हैं . वह काम जो हम कर सकते हैं ,कोई दूसरा नहीं कर सकता और जो काम दूसरे कर सकते हैं उन्हें हम नहीं कर पाते . कई बार स्वयं से यह सवाल पूछता हूँ कि इनमे से कौन सबसे बड़ा है ? जवाब नहीं मिलता . क्या आपके पास है कोई जवाब ? आप दीजिए जवाब तब तक हम चलते हैं ब्लॉग नगरिया की सैर पर…………

कनाडा में फूलों का मौसम है और मेरा घर भी अछूता नहीं.इनदिनों कानाडा में फूलों का मौसम है और मेरा घर भी अछूता नहीं.....घर के आँगन में  फूल ही फूल खिल रहे हैं. ..देखिये...  वैसे हम बता देते हैं...ई अभी ट्रेलर है पिक्चर अभी बाकी है...  :)यूपी विधान सभा का दंगलजिस बात की आशंका थी की प्रदेश में शुरू हो रहे नयी विधान सभा के पहले सत्र में काम काज को प्रभावित करने की कोशिशें विपक्ष द्वारा की जायेंगीं ठीक वैसा ही सदन के शुरू होते ही दिखाई दिया. प्रदेश में स...सालगिरह और भीड़सालगिरह... आँख की छत से बारिश की झालर लटका दी है... काग़ज़ का फ्लोर लगा दिया है... कुछ गुज़रे लम्हों की फ्लैश लाइट लगा दी है थोड़ा ओल्ड फैशंड हूँ न इसलिए... पुरानी गुरुदत्त वाली प्यासा के किसी गाने पर.....

गर्मी पे चढा शबाब , और आदमी भुन के हुआ कबाबगर्मी की मार से हो सकती है आपकी सेहत खराब , सेहत खराब , अजी यहां तो दिमाग का दही हो गया जनाब , (गर्मी पे चढा शबाब , और आदमी भुन के हुआ कबाब ) पीएम पर भ्रष्टाचार के आरोप गलत हैं , ऐसा कह रही है सरकार , अ..अश्रुमालनाथ तुम्हारी क्षुद्र सेविका लाई यह रत्नों का हार , तुम पर वही चढ़ाती हूँ मैं करना मेरे प्रिय स्वीकार ! मेरा मुझ पर नाथ रहा क्या जो कुछ है वह तेरा है , मुझे निराशा अरु आशा की लहरों ने प्रभु घेर..ब्लोगिंग के उत्थान में शानदार भूमिका है फेसबुक कीफेसबुक पर अक्सर हिंदी ब्लॉग लेखकों की टिप्पणियाँ पढ़ने को मिली कि- "फेसबुक ब्लोगिंग के लिए खतरा है|" दरअसल ज्यादातर ब्लॉग लेखकों द्वारा फेसबुक पर ज्यादा समय देने से ब्लॉगस् पर लेख आने की फ्रिक्वेंसी कम ह...

मन चंचलमन चंचल है नहीं कुछ करने देता तब सफलता हाथों से कोसों दूर छिटक जाती है उस चंचल पर नहीं नियंत्रण इधर उधर भटकता और अधिक निष्क्रिय बनाता भटकाव यह मन का नहीं कहीं का छोड़ेगा बेचैनी बढ़ती जायेगी अंतर ...समय कठिन आंखें मत फेर प्राण-सखा -वीरेन डंगवालसमय कठिन प्राण सखा आंखें मत फेर टोक-टोक जितना भी जी चाहे टोक पर आंखे मत फेर !इन दुबले पांवों को हाथों को पकड़-जकड़ चढ़ी चली आती है अकड़ भरी लालच की बेल शुरू हुआ इस नासपीटे वसन्‍ता का स...याद आये रात फिर वही अहद तेरा यूँ लेकर दिल में याद आये रात फिर वही बदगुमान बन तेरी चाहत में अपने हर एहसास लिये मुझे * *याद आये रात फिर वही अनछुये से उस ख़्वाब का बेतस बन पुगाने में मुझे याद आये रात फिर वही उनवान की खा...

जिजीविषा (लघुकथा)एक-दो रोज की बात होती तो इतना क्लेश न होता लेकिन जब ये रोज की ही बात हो गई तो एक दिन बहूरानी भड़क गई. ''देखिये जी आप अपनी अम्मा से बात करिए जरा, उनकी सहेली बूढ़ी अम्मा जो रोज-रोज हमारे घर में रहने-खाने चल...वैष्‍णो देवी यात्रा.सफर का आनंद माता के दरबार जाने की इच्‍छा पि‍छले कई महीनों से मन में थी। सोचा,‍ इस बार बच्‍चों की गर्मी की छ़ुट़टि‍यां जैसे ही शुरू होंगी, नि‍कल पड़ेंगे। सो सीटें आरक्षि‍त करवा कर हम नि‍श्‍चिंत हो गए क...बगड़ के कुछ धार्मिक, शैक्षिक, दर्शनीय स्थलबगड़ की शान पीरामल गेट * आज आपको दिखाते है बगड़ नगर जहा मेरी दुकान हैं वहा के कुछ धार्मिक, ऐतिहासिक,शैक्षिक व दार्शनिक स्थल* * बगड़ की शान पीरामल गेट* चावो वीरो सती मन्दिर का प्रांगण* * चावो वीरो...

एक बार फिर मौसम ने ली अँगड़ाईविदेशी गर्मियों का एक और सुनहरा दिन वह भी कई दिनों की बारिश और ठंड के बाद, यहाँ सूर्य नारायण का अपने रोद्र रूप में निकलना यानि खुशियों का त्यौहार जैसे धूप न निकली हो कोई महोत्सव हो रहा हो। या फिर इस संदर...
नन्हें कन्धों पर जीवन का बोझ आज नवभारत, 26 जुलाई 1984 अंक में प्रकाशित यह रपट : आज जब सारे के सारे जंगल काट लिये जा रहे हैं, न केवल बड़े शहरों में बल्कि सुदूर गाँवों में भी ईंधन के लिये लकड़ी की भारी कमी से लोगों को दो-चार होना पड़...करुणा भगवत जी से असल परिचय तब हुआ जब उनके जाने की ख़बर मिली. अनूप सेठी के ब्लॉग पर उनके हिस्से के भगवत के बारे में जाना, समझा. जीवट से भरे भगवत जी ने जैसे मृत्यु पर विजय पा ली हो. यहां भगवत...

वार्ता को देते हैं विराम, मिलते हैं ब्रेक के बाद……… राम राम

सोमवार, 28 मई 2012

तुम मुझे टिप्पणी दो मैं तुम्हें पोस्ट दूंगा --------- ब्लॉग4वार्ता ......... ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार , चलिए आज की फटाफट वार्ता में सीधे भाटापारा से ............... प्रस्तुत है कुछ उम्दा लिंक्स .........

तुम मुझे पोस्ट दो मैं तुम्हें टिप्पणी दूंगाआज खुशदीप भाई की इस पोस्ट पर कमाल की टिप्पंणियां देखने पढने को मिलीं ।खुशदीप भाई ने जैसे ही चिंतन करते हुए पूछा कि , हाय राम , कैसे होगा ब्लॉगिंग का उत्थान और उसमें लिखा कि ,* "यहां ऐसा भी है कि खुद अ...1988 की कवितायें1988 में कवितायें कम लिखीं । तीन प्रेम कवितायें जो 1987 में लिखी थीं उन्हें फाइनल किया और उसके अलावा " नीन्द न आने की स्थिति में लिखी कुछ कवितायें " चलिये पहले यह तीन प्रेम कवितायें .. " झील से प्यार करते...'काकस्पर्श'कुछ फिल्में भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में माइलस्टोन के तौर पर जानी जाती हैं, जिनमें कि मेनस्ट्रीम फिल्मों के साथ-साथ क्षेत्रिय फिल्में भी आती हैं. ऐसी ही एक माइलस्टोन मराठी फिल्म इन दिनों महाराष्ट्र ...

उद्योगों की दादागिरी...छत्तीसगढ़ में जिस पैमाने पर रमन सरकार ने उद्योग के लिए रास्ते खोले हैं। उद्योगपति अब अपनी जेब में सरकार को रखने लगे है। खुलेआम कब्जे और पेड़ो की कटाई के साथ भयंकर प्रदूषण फैला रहे उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई ...अमित उपमन्यु की कविताएँअमित उपमन्यु ने अभी हाल में ही कविताएँ लिखना शुरू किया है. कुछ कविताएँ परिकथा के नवलेखन अंक में आई हैं और कुछ अन्य पत्रिकाओं में आनी हैं. अनुनाद पर पहली बार प्रकाशित उनकी इन कविताओं में उनका नवाचार देखा.उठो लाल अब आँखें खोलो...उठो लाल अब आँखें खोलो पानी लाई हूँ मुहं धोलो बीती रात कमलदल फूले उनके ऊपर भौंरे झूले (एक लाइन भूल गयी) बहने लगी हवा अति सुन्दर नभ में न्यारी लाली छाई धरती पर प्यारी छवि आयी। मेरे बचपन की धरोहर, मेरे सुहा...

बदलता मौसम....छंटते बादल..कहानी अब तक * * * *(जया के कविता संग्रह को पुरस्कार मिलने पर पत्रकारों ने उसकी दर्द भरी कविताओं का राज़ पूछा . जया पुरानी यादों में खो गयी..उसका बचपन बड़े प्यार में बीता था ....राजीव से शादी होने के बा...लहर आएगी, तो मेहर कर देगा, मुझे भी अपने नूर से भर देगामहक ये उसी के मन की है जो चली आ रही है केश खोले दहक ये उसी बदन की है जो दहका रही है हौले हौले महल मोहब्बत का आज सजा संवरा है आग भड़कने का आज बहुत खतरा है डर है कहीं आज खुल न जाए र...हँसी बहुत  अनमोल कर प्रयत्न राखें सभी, मन को सदा प्रसन्न, जो उदास रहते वही, सबसे अधिक विपन्न। गहन निराशा मौत से, अधिक है ख़तरनाक, धीरे-धीरे जि़ंदगी, कर देती है ख़ाक। वाद-विवाद न कीजिए, कबहूँ मूरख संग, सुनने वाला ये कहे, ...

ले गये स्टम्प उखाड़, देखते रह गये धोनी . किंग खान का हो गया, स्वप्न आज साकार आईपीएल का चैम्पियन बन गया केकेआर बन गया केकेआर, डोन के ग्यारह डोनी ले गये स्टम्प उखाड़, देखते रह गये धोनी कोलकाता की बढ़ गई आन बान और शान बहुत मुबारक आ...यूपीए-2 के 3 साल, सरकार मस्त -जनता बेहाल केंद्र सरकार याने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के तीन साल पूरे हुए। केंद्र में दुबारा सत्ता हासिल कर लगातार आठ साल में सरकार जनता को वह नहीं दे सकी जो उसने वायदे कि...हर बात है कुछ खासनमस्कार आज सोमवार , नयी पुरानी हलचल में आप सभी का स्वागत हैं । * *कोई तो बात होती हैं हर लफ़्ज के कहे जाने में - *कोई खास बात या कुछ और देखिये इन लिंक्स में -* * ...

जरूरी सूचनाऐसा है कि दो महीने होने वाले हैं मुझे घर से बाहर निकले हुए। कभी अप्रैल के शुरू में जोशीमठ गया था, अब जून आने वाला है। जितनी भी यात्रा कथाएं थीं, सब खत्म हो गई हैं। मतलब ये बनता है कि मेरी दुकान आजकल घाटे म...अब जो भी बाधा है पथ मेंअब जो भी बाधा है पथ में   तुमको ही तुमसे मिलना है खुला हुआ है मन उपवन, जब जी चाहे चरण धरो तुम सदा गूंजती है धुन अर्चन ! न अधैर्य से कँपतीं श्वासें शुभ्र गगन से छाओ भीतर, दिनकर की रश्मि बन छू...सिंगरौली के संघर्ष का सफरयह रास्ता जंगल की तरफ जाता जरुर है लेकिन जंगल का मतलब सिर्फ जानवर नहीं होता। जानवर तो आपके आधुनिक शहर में हैं, जहां ताकत का एहसास होता है। जो ताकतवर है उसके सामने समूची व्यवस्था नतमस्तक है। लेकिन जंगल मे...

वार्ता को देते हैं विराम, मिलते हैं ब्रेक के बाद .........राम राम 

रविवार, 27 मई 2012

मेरे "ये" एकदम वोडाफोन के "वो..." हैं...ब्लॉग4वार्ता...संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार...जब सोशल नेटवर्किंग साइटों का आरम्भ हुआ था, तब हर कोई दोस्त बनाने में जुटा था, जिसके जितने ज्यादा दोस्त वह उतना ही कूल. अब वैसा उत्साह नहीं रहा लोग बड़ी संख्या में ऑनलाइन दोस्तों की काट - छांट में लगे है, मतलब अब शुरू हो चुका है एक नया ट्रेंड "डीफ्रेंडिंग" . हम जैसे -जैसे आयु व अनुभव में बढ़ते हैं हमारी वरीयताएं और जरूरतें बदलती रहती हैं. उसी के हिसाब से कुछ लोग जुड़ते और कुछ छूट जाते हैं. यही सब वास्तविक जीवन में भी होता है, इसलिए यह  "डीफ्रेंडिंग" कोई नई चीज नहीं है, बस फर्क इतना है कि वर्चुअल वर्ल्ड में शौक और असल जीवन में भावनात्मक लगाव के कारण दोस्त बनते हैं. ये तो हुई दोस्त बनाने और उनसे अलग होने की बात. हमारा साहित्य से बड़ा मजबूत रिश्ता है, जो कभी टूट नहीं सकता. तो आइये फिर चलते हैं आज की ब्लॉग 4 वार्ता पर कुछ नए और अनूठे लिंक्स के साथ... 

http://vrinittogether.blogspot.in/ पर अंजना (गुडिया) जी ने बुन दी अपनी बेवकूफी लफ़्ज़ों में…यादों की सलाखें हाँ, शायद यह कविता एक बेवकूफ़ी सी है… गुज़र गए वक़्त को यूँ ढूँढना नादानी ही है… मगर दर्द में कमी के लिए इस बेवकूफी को अल्फाज़ देना अकलमंदी भी है इसलिए बुन दी अपनी बेवकूफी लफ़्ज़ों में… कहाँ है वो हिंदुस...http://manoramsuman.blogspot.in/ पर श्यामल सुमन जी कह रहे हैं देखो फिर से नभ की ओरचेहरा क्यूँ दिखता कमजोर। देखो फिर से नभ की ओर।। तारे जहाँ सदा हँसते हैं, और चमकता चंदा। जी सकते तो जी लो ऐसे, छूटेगा हर फंदा। आग उगलता सूरज फिर भी, नित ले आता भोर।। देखो फिर से नभ की ओर।। नदियों की खुशिया... http://sudhinama.blogspot.in/ पर साधना वैद्य जी की रचना पढ़िए हाशिये तुमने कितना कुछ सिखाया है ना मुझे ! हाशिये पर सरकाये हुए सवाल हमेशा अनुत्तरित ही रहते हैं ! हाशिये पर रुके हुए कदम कभी मंज़िल तक का सफर तय नहीं कर पाते ! हाशिये पर टिके रिश्ते आजीवन बे...

http://rajey.blogspot.in/ पर  राजे_शा जी की रचना पढ़िए ये भी बुरा हैअगर मैं इससे बेखबर रहूं कि मैं खुद, और तुम कब तक साथ रहेंगे? और दिन ऐसे बिताऊं जैसे मैं या तुम हमेशा ही साथ रहेंगे, और तुम्हें कोई वजह ना होने से भुलाऊं कभी जरूरी ही कोई बात करूं और सारा दिन काम धंधें में ...http://pratibhakatiyar.blogspot.in/  पर प्रतिभा कटियार जी लिख रही हैं यमन की सी मिठास गंगा की शान्ति उसे रंगों से बहुत प्यार था. कुदरत के हर रंग को वो अपने ऊपर पहनती थी. उसका बासंती आंचल लहराता तो बसंत आ जाता. चारों ओर पीले फूलों की बहार छा जाती. वो हरे रंग की ओढनी ओढती तो सब कहते सावन आ गया है. उसका मन..http://jazbaattheemotions.blogspot.in/ पर इमरान अंसारीजी की लिखी खूबसूरत ग़ज़ल पढ़िए क़ातिल यारों किसी क़ातिल से कभी प्यार न माँगो खुद अपने कलेजे के लिए तलवार न माँगो, गिर जाओगे तुम अपने मसीहा की नज़र से मर कर भी इलाज-ए-दिल-बीमार न माँगो,  उस चीज़ का क्या ज़िक्र जो कभी मुमकिन ही नहीं  सहरा... 

http://www.nukkadh.com/ पर काजल कुमारजी बता रहे हैं बी.जे.पी. की श्वासनली अवरूद्ध है भारत में राजनैति‍क पार्टि‍यां लीडरों के व्‍यक्‍ति‍गत charisma के कारण ही चलती आई हैं. जनता पार्टी, कॉंग्रेस के वि‍रूद्ध जन्‍मी पार्टी थी जो कालांतर में भारतीय जनता पार्टी में रूपांतरि‍त होकर अटल बि‍हारी http://mauryareena.blogspot.in/ पर रीना मौर्याजी लिख रही हैं "क्या है इंसान की पहचान शारीरिक सुंदरता या मन की सुंदरता उसके स्वभाव और गुण " *"क्या है इंसान की पहचान* *शारीरिक सुंदरता या मन की सुंदरता उसके स्वभाव और गुण "* *आपको क्या लगता है ?? एक बार की बात बताती हूँ मै अपनी सहेलियों के साथ बस में सफ़र कर रही थी...सफ़र क्या वो लोग कॉलेज में...http://ashutoshmishrasagar.blogspot.in/ पर  Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" जी की रचना पढ़िए वतन के हर सच्चे सिपाही को हैं हवालातें रंग-ओ-तस्वीरें अभी वही हैं,हैं वही बातें अमन-ओ-चैन से कटती नहीं अभी रातें दल बदल जाते उसूलात बदलते ही नहीं कोई महफूज़ रहे कैसे, चारसू लगीं घातें लहू जिसका बहा है स्वेद बन के खेतों में मोती पैदा कि...

http://sharda-arorageetgazal.blogspot.in/ पर शारदा अरोराजी कह रही हैं  लौट आते परिन्दे *क्या कहिए अब इस हालत में , अब कौन समझने वाला है कश्ती है बीच समन्दर में तूफाँ से पड़ा यूँ पाला है हम ऐसे नहीं थे हरगिज़ भी हालात ने हमको ढ़ाला है कह देतीं आँखें सब कुछ ही जुबाँ पर बेशक इक ताला है ... http://amit-nivedit.blogspot.in/  पर अमित श्रीवास्तवजी बता रहे हैं कुछ खास मेरे " ये " एकदम वोडाफोन के "वो..." हैं ठीक ठीक तो मुझे याद नहीं ,मै शायद नींद में था पर थोड़ा थोड़ा सुन भी पा रहा था | मेरी श्रीमती जी किसी से फोन पर बात कर रही थी | ये कोई ख़ास बात नहीं है | ख़ास बात यह थी कि बातचीत की विषयवस्तु मै था | यह ... http://hathkadh.blogspot.in/ पर  K C जी सुना रहे हैं "एक 'चुप' की आत्म कथा" और कुछ मौत के बाद... बेवजह की बातें लिखना, मुहब्बत करने जैसा काम है कि हो गई है, अब क्या किया जा सकता है. पोस्ट का एंट्रो लिखना घर बसाने सरीखा मुश्किल काम... "एक 'चुप' की आत्म कथा" मेरी हज़ार सखियाँ थी मैं जब भी रही अपन..

http://kuchhalagsa.blogspot.in/ पर गगन शर्मा जी कह रहे हैं प्रभू भी लाचार हैं। - * पर अब तक यह पता नहीं चल पाया है कि भगवान के रोने की खबर सर्वोच्च न्यायालय तक कैसे और किसने पहुंचाई। खबरचियों की टीमें इस बात का पता लगाने पूरी त... http://rashifal.gatyatmakjyotish.com/पर जानिए संगीता पुरी जी से ( rashifal ) कैसा रहेगा आपके लिए 26 और 27 मई 2012 का दिन ?? - मेष लग्नवालों के लिए 26 और 27 मई 2012 को किसी कार्यक्रम में माता पक्ष का भी महत्व दिख सकता है, वाहन या किसी प्रकार की छोटी या बडी संपत्ति को प्राप्त करने ... .http://jholtanma-biharibabukahin.blogspot.in/ पर अजय कुमार झा जी कह रहे हैं आओ ब्लॉगिंग की हम वाट लगाएं ........... - * * * * * * ** * * * आओ ब्लॉगिंग की हम वाट लगाएं , सुलग रही चिंगारी पर घी डाल कर आग लगाएं ,* *जब संपादक मैग्जीनों अखबारों के खूब गरियाते , तो फ़िर ब्लॉगर ...

आज की वार्ता को देते हैं विराम मिलते हैं, अगली वार्ता पर तब तक के लिए नमस्कार .....

शनिवार, 26 मई 2012

हर लिखने वाला खास होता है...ब्लॉग4वार्ता....संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार... जी हाँ मैं भी मानती हूँ कि लिखा दिमाग से कम और दिल से अधिक जाता है, क्योंकि हर लिखने वाला खास होता है, क्योंकि लिखना हर किसी के बस की बात नहीं होती और क्योंकि हर एक लिखने वाले के लिए पढने वाला जरुरी होता है, और हम चुनकर पहुंचाते हैं आपकी खास रचना को उन खास लोगों तक क्योंकि पढने वाला और भी खास होता है....
मौसम के तेवर बदले, फैली धूप और जलन
बरस रही आग फिर भी कोई शीत लिखना चाहता है
कोई प्रीत, कोई जीत, कोई संगीत, कोई गीत
तो कोई मन मीत लिखना चाहता है...
आइये अब चलते हैं आज की ब्लॉग 4 वार्ता पर कुछ उम्दा लिंक्स  के साथ 

कन्या भ्रूण हत्या कन्या भ्रूण हत्या पर खूब चिंतन हो रहा है। भयावह आंकड़े प्रस्तुत किये जा रहे हैं। सभी यह मान रहे हैं कि यह जघन्य अपराध है। इसके लिए स्त्री को या डाक्टर समुदाय को दोषी ठहराया जा रहा है। जहाँ न पहुँचे रवि, ...नवाबिन और कठपुतली ! *पहनकर नकाब हसीनों ने, कुछ पर्दानशीनों ने,* *गिन-गिनकर सितम ढाये,बेरहम महजबीनों ने ! * ** *हर पल इस तरह गुजरा, वादों की बौछारों से, * *हफ़्तों को दिनों ने झेला, सालों को महीनों ने !* ** *निष्कपटता,...एक अकेले छिद्र पर टिकी आस! मन में निरंतर चल रही एक प्रार्थना के कुछ अंश यूँ लिख गए... सो बस सहेज ले रहे हैं यहाँ...! एक छेद भर रौशनी भीतर आती रहे और ढूंढ़ ले खोया हुआ उत्साह वो उत्साह जो चूक गया है बीतते उम्र के साथ शायद कहीं दुबक ...

 सबां हर शाम सुहानी आये खुशियों के सबां लाये मौजे तबस्सुम के सुबहे मसर्रत में हर सफर बीत जाये ज़ाम मए तरब हो मुबारक तुझे राहगुजर के खिजा खार दे दे मुझे शबे इंतजार भी रौशन सहर लाये शाम आती रहे बिन्ते महताब ब...मैं उस जमाने का हूँ ... कवितानुमा एक कथा !  मैं उस जमाने का हूँ जब दहेज में घड़ी, रेडियो और साइकिल मिल जाने पर लोग ...फिर बहुओं को जलाते नहीं थे बच्चे स्कूलों के नतीजे आने पर आत्महत्या नहीं करते थे बल्कि ... स्कूल में मास्टर जी और घर में... जीवन की आपाधापी सच जीवन की आपाधापी सच जब दुःख की वीणा छेड़ी थी पीछे चल रहा जमाना था, अब सुख का राग उठा जब से सँग अपने अब वीरानी है ! दुःख ही बोये दुःख ही काटे सुख की भाषा बेगानी सी, जीवन की आपाधापी सच ‘उस...

मुखौटे  ज़िंदगी की दौड़ में सबसे आगे रहने की चाह में, हर रिश्ते हर संबंधों के सामने पहन लिये अनगिनत मुखौटे. आज खड़ा विजय रेखा पर अनजान अपने ही अस्तित्व से, ढूंढ रहा हूँ वह चेहरा जो हो गया है गुम अनगिनत मुखौटों ... ज़रा सोचिये .. मैं मानती हूँ कि लिखा दिमाग से कम और दिल से अधिक जाता है, क्योंकि हर लिखने वाला खास होता है, क्योंकि लिखना हर किसी के बस की बात नहीं होती और क्योंकि हर एक लिखने वाले के लिए पढने वाला जरुरी होता है और जिसे...दुखों पर ही अपना घर...  नीम के घने पेड़ों की छाँव थी. तीन मंज़िला होस्टल के तीन गलियारे थे. एक रास्ता था जो अख़बार के दफ़्तर जाता था, दूसरा रास्ता सेंट्रल लायब्रेरी. अख़बार के दफ़्तर जाते हुए एक दिन अच्छा लिख सकने की हसरत टां... 

वो पनीली आँखें.....स्तब्ध सी ! शून्य में ताकती सूनी सूनी सी वो खाली आँखें... सूखे होंठों वाले उदास चेहरे पर टंकी डबडबाई सी वो पनीली आँखें... बंजर पड़ी ह्रदय भूमि को जब तब आंसुओं से सींचती, जाने क्यों कभी हँसती नहीं ... नैनीताल ..भाग 2 *नैनीताल की नैनी झील * नैनीताल भाग 1 पढने के लिए यहाँ क्लिक करे ........ रात को 11बजे के बाद *अजमेर -रानीखेत *गाडी प्लेटफार्म पर आई ...पूरी तरह खचाखच भरी थी ,यहाँ हमें कूपा नसीब नहीं हुआ ...3 मही... तलाश क्या है यह तलाश क्या है क्यूँ है और इसकी अवधि क्या है ! क्या इसका आरम्भ सृष्टि के आरम्भ से है या सिर्फ यह वर्तमान है या आगत के भी स्रोत इससे जुड़े हैं ? क्या तलाश मुक्ति है या वह प्रलाप जो नदी के गर्भ में है ... 
अब देते हैं वार्ता को विराम मिलते हैं अगली वार्ता पर तब तक के लिए नमस्कार ......

शुक्रवार, 25 मई 2012

मन समंदर और प्रीत का दीप...ब्लॉग4वार्ता....संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार....महंगाई की मार से जूझ रही जनता पर और बड़ी मुसीबत आन पड़ी है. तेल कम्पनियों ने बुधवार की शाम को पेट्रोल की कीमत में 7.50 रुपये की बढ़ोत्तरी की घोषणा कर दी और आधी रात से कीमतें लागू भी हो गई। अटकलें तो यहाँ तक हैं कि कल डीजल और गैस का नंबर है, इससे महंगाई और बढ़ेगी और आम आदमी का जीना पहले से भी अधिक दूभर हो जायेगा. आइये अब चले ब्लॉग नगरी की सैर पर आज की ब्लॉग4वार्ता के साथ ……… प्रस्तुत हैं कुछ उम्दा लिंक……

http://aruncroy.blogspot.in/ पर अरुण चन्द्र रॉय जी लिख रहे हैं रुपया * * १. रुपया गिर रहा है लगातार होकर कमजोर वह रुपया जो आम जनता की जेब में नहीं है, फिर भी रोटी आधी हो रही है नमक कम हो रहा है उसकी थाली से, फिसल रहा है उसकी जेब से २. रुपया से खरीदनी है पेट्रोल, गाड़ि... http://aadhasachonline.blogspot.in/ पर महेन्द्र श्रीवास्तव जी से सुन लीजिये कहानी ऊंचे लोग ऊंची पसंद .... जी हां, आज यही कहानी सुन लीजिए, ऊंचे लोग ऊंची पसंद । मेरी तरह आपने भी महसूस किया होगा कि एयरपोर्ट पर लोग अपने घर या मित्रों से अच्छा खासा अपनी बोलचाल की भाषा में बात करते रहते हैं, लेकिन जैसे ही हवाई जह... http://babanpandey.blogspot.in/ पर बबन पाण्डेय जी की बाल कविता पढ़िए आग उगल रही आकाश ( बाल कविता लिखना भी आसन नहीं होता, मैंने एक प्रयास किया है ) तप रही है सारी धरती आग उगल रही आकाश // क्या पीयेगें , वन के प्राणी कहाँ टिकेगें , सारे नभचर सिकुड़ गयी है पेट सभी की सूख गयी ह...

http://satish-saxena.blogspot.in/ पर  सतीश सक्सेना जी कह रहे हैं फिर भी हम इंसान हैं -सतीश सक्सेना * अब *** *अब हंसीं मुस्कान भी , * *विश्वास के लायक नहीं* *क्या कहेंगे, क्या करेंगे* *कुछ यकीं, इनका नहीं* *नज़र चेहरे पर लगी है, ध्यान केवल जेब पर* *और कहते हैं कि डरते क्यों ?भले इंसान हैं !* *काम गंदे स... http://gatika-sangeeta.blogspot.in/ पर संगीता स्वरुप जी ने बनाया है एक सुन्दर सा मन समंदर लहरें तो आती जाती हैं दुख सुख का भी हाल यही फिर हम इतना क्यों सोचें बस मन समंदर करना है , मोती सीपों में मिल जाते पर गोता खुद लगाना है श्रम से फिर क्यों भागें हम बस तन अर्पण करना है ...  http://pratibhakatiyar.blogspot.in/ पर प्रतिभा कटियार जी कह रही हैं नहीं, इतना एकांत काफी नहीं... दूर-दूर तक फैला एकांत का विस्तार और उसमें चहलकदमी करती खामोशी. एक पांव की आहट दूसरे को सुनाई नहीं देेती. एकांत का हर हिस्सा अंधकार मे डूबा हुआ. इतना घना अंधेरा कि सब कुछ एकदम साफ नजर आ रहा है...सचमुच अं... http://swapnmere.blogspot.in/ परदिगम्बर नासवा जी ने शब्दों में पिरोये हैं, सुन्दर अहसास  मेरी जाना ... रोज सिरहाने के पास पड़ी होती है चाय की गर्म प्याली और ताज़ा अखबार याद नहीं पड़ता कब देखा माँ की दवाई और बापू के चश्मे से लेकर ... बच्चों के जेब खर्च और नंबरों का हिसाब पता नहीं कौन सी ...

http://hathkadh.blogspot.in/ पर  K C जी ने बना रहे हैं  भुरभुरी चट्टानों के बीच घर एक छोटी कविता और कुछ बेवजह की बातें. मैं एक ख़राब कवि हूँ. मुझे फिलिस्तीन पर लिखना नहीं आता मगर महमूद दरवेश से प्यार है. मैंने उनको पहली बार साल नब्बे में पढ़ा था. उन्हीं दिनों मैंने अंगोला के किसी  कवि... http://jdwcdblog.blogspot.in/ पर गिरीश बिल्लोरे जी का आलेख पढ़िए जन-सहयोग से एक करोड़ 32 लाख 77 हजार 966 की राशि एकत्रित महिला-बाल विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती रंजना बघेल ने आज अटल बिहारी वाजपेयी बाल आरोग्य एवं पोषण मिशन की गतिविधियों तथा जिलों द्वारा पिछले वित्तीय वर्ष में व्यय की गई राशि की समीक्षा की।मह..... http://dheerendra11.blogspot.in/ पर धीरेन्द्र जी पूछ रहे हैं कौन करेगा निर्माण सुनहरा कल,,,,, सुनहरा कल, सड़क तट पर लिखे हुए अनगिनत नारे हम एक अरसे से पढ़ रहे है, उनमे से एक 'हम सुनहरे कल की ओर बढ़ रहे है'! हमने नारी की पीड़ा को बहुत नजदीक से मौन रह कर देखा है, तंदूर में रोटी की जगह मानव ने एक अबला को ...

http://neelkamalkosir.blogspot.in/ पर Sudheer  Maurya 'Sudhee  ....सुधीर मौर्या जी कह रहे हैं तुम प्रीत का दीप जला देना  जब तेरे शब्दों की दुनिया परिवक्व पल्लवित हो जाये जब तेरे आँचल में खुशियाँ अपार अपिर्मित हो जाये तब चुपके से आकर होले से तुम प्रीत का दीप जला देना जब गंगा तट पर गंगा की लहरें आशीष तुम्हरे ही सर दे जब नील ग.... http://sushma-aahuti.blogspot.in/ पर सुषमा आहुति जी जिन्दगी के गुजरे लम्हों को पलट रही हैं  मेरी डायरी..... !!! से *फिर आज पुरानी डायरी के, * *पन्ने पलट रही हूँ..* ***इन पन्नो के साथ,* *मैं जिन्दगी के गुजरे* *लम्हों को पलट रही हूँ...* *मेरी ख्वाइशों की तरह,* *मेरी डायरी भी जिम्मेदारियों .....http://vandana-zindagi.blogspot.in/ पर है वंदना गुप्ताजी की यादें बाबुल मेरो नैहर छूटो ही जाये यादों की कस्तूरी कैसे छुपाऊँ ज़ेहन में बसी याद कैसे मिटाऊँ जीवन के वो पल कैसे भुलाऊँ जहाँ सफ़र का पहला कदम पड़ा जहाँ रूह को इक जीवन मिला टिमटिमाता दिया बुझने की कगार पर है आ सहेज लूं पलों को रौशनी के कतर...

http://zealzen.blogspot.in/ पर zeel जी का आलेख पढ़िए  पलायमान ब्लॉगर्स - कोई भी क्षेत्र हो,पलायन तभी होता है जब व्यक्ति उस संस्था से, पद्धति से, अनियमितताओं से , गुटबाजियों से अथवा पक्षपाती रवैय्ये से निराश हो चुका होता है। ब्ल...http://www.yuvarocks.com/ पर  जी कह रहे हैं मजबूर हूं, वरना मैं देश बदल देता। - माता पिता के ख्‍वाबों का जिम्‍मा है मेरे महबूब के गुलाबों का जिम्‍मा है मजबूर हूं, वरना मैं देश बदल देता। जॉब से छुट्टी नहीं मिलती विद पे ऐसे उलझे भैया क्‍.. .http://lalitdotcom.blogspot.in/  पर ललित शर्माजी ने आरंभ कर रहे हैं एक युद्ध डायबीटिज से……… ललित शर्मा - डॉ सत्यजीत साहू जब से लोग सुविधाभोगी हुए हैं, तब से भारत में डायबीटिज रोगियों का तेजी से प्रसार हो रहा है। ऐसा नहीं है कि डायबीटिज कोइ नया रोग है, चरक संहि... ....
वार्ता का सफ़र जारी रहेगा,  मिलते हैं, अगली वार्ता में तब तक के लिए नमस्कार............

गुरुवार, 24 मई 2012

चले आईए, दौड़े आईए, ले आए हैं शर्मा जी पेसल वार्ता

ललित शर्मा का नमस्कार,  बकरा किश्तों में हलाल हो रहा है, पैट्रोल का मूल्य फ़िर बढा दिया। जय  हो मन्नु बाबा की। जब चाहे जो करो। रुपया भी लुढकते लुढकते रसातल की ओर जा रहा है। इससे साबित होता है अर्थ शास्त्री का अर्थ शास्त्र कहीं फ़ेल हो रहा है और इसका खामियाजा राष्ट्र को भुगतना पड़ रहा है। राष्ट्र की प्रत्येक इकाई पर इनके प्रयोगों  का असर दिखाई दे रहा है। मंहगाई चरम सीमा पर  है, दाल रोटी के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। देखना है कि मंहगाई कहाँ जाकर ठहरती है। गरीबी के मारे किसान व्यापारी और आम आदमी आत्महत्या करने को मजबूर है। एक बार मंहगाई बढाने से इनका पेट नहीं भरता। इसलिए बार बार यही क्रम दोहराया जाता है। इसका सीधा अर्थ यही है कि बकरा (जनता) किश्तों में हलाल करने का उपक्रम जारी है। अब चलते हैं आज की ब्लॉग4वार्ता पर……… प्रस्तुत हैं कुछ उम्दा लिंक……

संजय भास्कर कह रहे हैं अपने आप पर कविता लिखना चाहता हूँ, लिखो भाई, एक नहीं दो चार लिखो, दो चार नहीं हजार लिखो। कम से आत्मावलोकन आवश्यक है। जो आत्मावलोकन करता है वही एक दिन सिद्ध होता है। सिद्ध बनने की राह पर पहला कदम आत्मावलोकन है। देव कुमार झा सांड और इंसान. पर पिल पड़े हैं। सांड से बच भी सकते हैं, पर इंसान से बचना कठिन ही नहीं नामुमकिन है। वह इंसान जिसे 14 मुल्कों की पुलिस ढूंढ रही हो और फ़िर भी न मिल रहा हो। तो बताओ सांड उससे बचेगा कैसे? सांड और इंसान भिड़ भी गए तो जाको रखे साइयाँ , मार सके न कोय । यह तो उपर वाले पर है किसे मारे और किसे बचाए। जेही पर किरपा राम के होई, ताहि पर किरपा करे सब कोई, जितनी चाबी भरी राम ने उतना चले खिलौना। एक अजीब शख्स से मुलाकात हुई है। तेरी, मेरी , अपनी, सबकी खबर रखने वाले। खबर सारी खबरीलाल जी ले आते हैं, अब अखबार की जरुरत पड़ती नहीं।

डॉक्टर अब पूर्णत: व्यावसायिक हो गए हैं, माल है तो जान बचाने की  कोशिश होगी। घर बेच कर लाओ रुपए, अब तो यह हो गया है कि आदमी गंभीर रुप से बीमार पड़ना ही नहीं चाहता। बीमार पड़ने की बजाए राम नाम सत्य हो जाए वही अच्छा है। डाक्टर की संवेदन शुन्यता ने फिर एक जान ले ली, किसी के घर पर डाका डालते ही पुलिस सक्रीय हो जाती है पर नर्सिंग होम में प्रतिदिन डाके डाले जा रहे हैं इस पर किसी की  निगाह जाती नहीं। अभी एक समाचार आया है कि महाराष्ट्र के बीड़ इलाके का एक डाक्टर कुत्तों को खिला देता था कन्या भ्रूण। संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। रुपए के लिए लोग किस हद गिर जाते हैं। इसके माँ बाप को शर्म आ रही होगी कि ऐसे हैवान को क्यों जन्म दिया। ये डॉक्टर कोई दम्पत्ति कोई पगला-पगली  नहीं है। मानवता को कलंकित करने वाले कार्य ये पूरे होश-ओ-हवास में करते थे। अब देखते हैं कानून इन्हे क्या सजा देता है।

सितमगर कभी तेरा यूं देखना दिल को दहला देता है,  शायद तभी रविकर मइके जाय, पिए जो माँ की घुट्टी गुहार रहे हैं। महेश परिमल जी यूपीए से उम्‍मीदें बाकी, हर मोर्चे पर मिली मात होने पर भी उम्मीद लगाए बैठे हैं। उम्मीद के सहारे जीता है जमाना, वो क्या जिए जिसे कोई उम्मीद ही न हो। इतने सब हवाले-घोटाले घटने के बाद यूपीए से उम्मीद लगाना बेमानी है। इनकी तो फ़ितरत है कि जब तक संडास की छत पर 4 करोड़ नहीं छिपे होते इन्हे हाजत ही नहीं आती। लूट लो इंडिया को, मिल जुलकर, दोनो हाथों से। अजीत सिंह जैसे सदा सुहागन तो हर सरकार में मंत्री बने रहते हैं। चाहे यूपीए हो या एनडीए हो। अब मैं 85 का हो चुका हूं स्वीकार करने के बाद भी नेता कूर्सी छोड़ने को तैयार नहीं। अब इन्हे कोई जबरदस्ती रिटायर करने से तो रहा। अगर जनता ने रिटायर कर दिया तो लोकसभा में जाने की बजाए पिछले दरवाजे से राज्यसभा में धमक जाएगें। मामला लस्सी और चाय की लड़ाई  जैसा ही मानिए। जाना दोनो को पेट में ही है।

मेरा मन भी अजीब है, मन का काम ही अजब-गजब करना है। जो चाहे मन वह करता है। मन छत पर सोया एक रात गिनते रहा तारे सारी रात। सप्त ॠषि से लेकर, हिरणी तक, चमकीले शुक्र से लेकर ध्रुव तारे तक, सब जगह मन विचरता रहा, ब्रह्माण्ड में गोते लगता रहा। ये मन ही है जो पल में पहुंचा देता है। अब पेट्रोल मंहगा हो गया इसलिए मन की सवारी  ही सस्ती पड़ेगी। पलक झपकते ही जहाँ चाहो वहाँ पहुंच जाओ। भाभियों की दुआ का एक लफ्ज , और वर्षों की इबादत  बड़ा सुकून देती हैं। भाभियां ही है जो वक्त पर काम आती है। होली पर पड़ी भाभियों की मार का असर अम्ब्रेला छतरी पर अब हो रहा है, कह रहे हैं शान्ति की राह पर चलना चाहता हूँ। चलो भाई किसने रोका है:) ये तो पहले सोचना था हंगामा मचाने से पहले। कुछ यूँही सकारात्मक सोचना चाहिए। उससे ही भलाई है।  ताजा समाचार है कि परिकल्‍पना सम्‍मान से पहले अन्‍नाबाबा बोल गए। अभी ही काहे बोले, पहले बोल  जाते तो क्या फ़र्क पड़ता? रायता खाना ही नहीं तो बखेर दो, किसी और के भी काम का न रहे। 

याद आता  है गाँव का वो घर-वो गर्मी की छुट्टी, कितना धमाल होता था। आम के पेडों की छांव में दिन कट जाता था। जंगल जलेबी (गंगा इमली) के काटें पैरों चुभ जाते थे। टींट (केर) के कांटो से चप्पल भरे रहते थे। ना जाने क्योँ अचार खाने की इच्छा कांटों की चुभन भी न होने देती थी। छुट्टी के समय खोयी मुमताज की तलाश खास होती थी। एक जमाना था जब खत ही संदेश भेजने का मुख्य साधन था। महबूबा को भेजा प्रेम पत्र हो या वसियत का खत या अंतिम इच्छा सभी खत पर लिखी जाती थी। अब तो वसियत मोबाईल एसएमएस और ईमेल से भी मान्य होनी चाहिए। भाई इंटरनेट का जमाना है, इसका भी सार्थक उपयोग होना चाहिए। मेरी डायरी भी नेट पर लिखी जा रही है। कागजी काम कम हो गया। हार्ड की जगह साफ़्ट से ही काम चल रहा है। वो जिसकी दीद में लाखों मसर्रतें पिन्हाँ थीं वो रुपया भी नेता हो गया  हैफिर एक आम जिन्दगी को जीने वाली लक्ष्मी , औरो से खास कैसे बन गई, ये है  देहात की नारी.चलिए आज की वार्ता हुई पूरी, अब एक मुस्कान के साथ हँसना तो बनता है  यारों।

मिलते हैं ब्रेक के बाद ………… राम राम 

बुधवार, 23 मई 2012

मेरी नज़रें गुजरे ज़मानों में थी ... ब्लॉग 4 वार्ता ....केवल राम

वार्ता के इस अंक में आपका स्वागत है . मैं हूँ आपका दोस्त केवल राम . हिंदी ब्लॉगिंग आजकल पूरी तरह से नए रूप में नजर आ रही है . तुम मुझे पन्त कहो, मैं तुम्हें निराला की प्रवृति जोरों  पर है . ऐसे में मन असमंजस की स्थिति से गुजर रहा है , कहीं पर पोस्ट सामने आ रहीं हैं तो कहीं पर पोस्टनुमा टिप्पणियाँ भी अपना महत्व सिद्ध करती जा रही हैं . ऐसे में एक नया मनोवैज्ञानिक स्वरूप उभर कर सामने आया है लेखन का , बिना कुछ जाने बहुतों को नामांकित किया जा रहा है .....किसी ख़ास सम्मान के लिए, कोई उसकी चयन प्रक्रिया पर अंगुली उठा रहा है तो किसी को वह सम्मान तथाकथित लगा रहा है,  हालाँकि हम इस बात के पक्षधर हैं कि लेखक किसी सम्मान का मोहताज नहीं होता . अगर वह ही ऐसे किसी चुंगल में फंस जाता है तो उसके लेखन का क्या होगा ? यह एक यक्ष प्रश्न की तरह बार - बार मन को कुरेद रहा है ......चलिए आप सब अपना काम अनवरत गति से कर रहे हैं यही एक संतोषका विषय है .....चलिए आज वार्ता का सफ़र आप मेरे साथ तय करेंगे कुछ चुनिन्दा लिंक्स के साथ ......! 

शिखा जी अपने ब्लॉग स्पंदन http://shikhakriti.blogspot.in/ पर लिख रहीं हैं  "मैं" बनाम "हम"...इस पार से उस पार  / जो राह सरकती है / जैसे तेरे मेरे बीच से / होकर निकलती है और फिर अनुपमा जी अपने ब्लॉग अनुपमा सुकृति http://anupamassukrity.blogspot.in/ पर लिख रहीं हैं , चल मन ....लौट चलें अपने गाँव .....!! जेठ कि तपती है.. /  जब दुपहरी ..../  कहीं झिर झिर.../  कुछ झरता है ....बिन बदरा भी बरसता है .....ऐसे माहौल में गिरिजेश राव अपने ब्लॉग एक आलसी का चिटठा http://girijeshrao.blogspot.in/ पर लिखते हैं  , शक, शर्म और आलस छोड़िये... सबसे प्रिय ब्लॉग की खोज के अभियान में लोगों से सम्पर्क करने पर कुछ बातें पता चली हैं। उन पर अपनी बात रख रहा हूँ: डॉ जे. पी. तिवारी अपने ब्लॉग pragyan - vigyan http://pragyan-vigyan.blogspot.in/ पर लिखते हैं इतना गम मनाओ तुमएक करारी हार पर /  न इतना गम मनाओ तुम! /  वीर हो, तुम धीर हो /  पग दूसरा फिर बढाओ तुम. संतोष कुमार अपने ब्लॉग beloved life http://belovedlife-santosh.blogspot.in/  पर  चाँद की उलझन ! में हैं ....आज फिर /  शाम ने /  रात के साथ मिलकर /  कसम खाई है../  सुबह .. होने ना देगी /  मुझे जाने ना देगी. एक तरफ चाँद की बातें हो रहीं हैं तो दूसरी तरफ दीपक शर्मा जी हिमधारा http://blog.himdhara.in/ पर लिख रहे हैं कि स्वर्ग से सुन्दर कुल्लू घाटी ....बच्चों को गर्मीं की छुटियाँ पड्नें  वाली हैं I इसमें अधिकतर लोग बच्चों को साथ लेकर पहाड़ों पर घूमनें जाते हैं I जैसे शिमला,कश्मीर,कुल्लू मनाली I यह  सभी पर्यटक स्थल खूबसूरत हैं I 

अमित श्रीवास्तव अपने ब्लॉग बस यूं ही अमित..... http://amit-nivedit.blogspot.in/ पर लिख रहे हैं वो तिरछे होंठ बहुत पहले टी.वी. पर 'बलसारा' कंपनी के विज्ञापन में डा.माया अलग एक विशेष प्रकार से 'ओफ्फ ओ ' बोलती थीं ,जिसमे उनके होंठ एक ओर थोडा सा ऊपर उठ जाया करते थे. गिरीश पंकज जी सद्भावना दर्पण http://sadbhawanadarpan.blogspot.in/ पर दिल के हालत वयां कर रहे हैं .... दिल का क्या कब कौन सुहाए ..दिल का क्या कब कौन सुहाए / बात यही कुछ समझ न आए / सुबह सुहानी खूब सुहाए /  उजियाला भीतर बस जाए .   डॉ . निशा महाराणा अपने ब्लॉग My Expression http://nishakidisha.blogspot.in/ पर अगले मोड़ की बात कर रहीं हैं ....तुम्हें सूरज  की किरणें चाहिए / मुझे चंदा की चांदनी ...../  तुम टकसाल  के प्रहरी हो ??? / मैं वीणा की रागिनी ...छान्दसिक अनुगायन http://jaikrishnaraitushar.blogspot.in/ पर एक नवगीत -खुली हुई वेणी को धूप में सुखाना मत / खुली हुई वेणी को / धूप में सुखाना मत / बूंद -बूंद धरती पे गिरने दो | दिलीप जी अपने ब्लॉग ....दिल की कलम से http://dilkikalam-dileep.blogspot.in/ पर लिख रहे हैं....वो मुझसे पूछ रहा है, कहो ग़ज़ल क्या है...वो मुझसे पूछ रहा है, कहो ग़ज़ल क्या है.../ बीज को क्या बताऊं मैं कि ये फसल क्या है.../ सूद तन्हाइयों का इस कदर चढ़ा मुझ पर.../ मैं भूल सा गया हूँ इश्क़ का असल क्या है....  महेंद्र वर्मा अपने ब्लॉग शाश्वत शिल्प http://shashwat-shilp.blogspot.in/ पर दो कवितायें लिखीं हैं : मैं ही  / सही हूँ  / शेष सब गलत हैं....मुझे  / एक अजीब-सा / सपना आया ...संध्या शर्मा जी मैं और मेरी कवितायें http://sandhyakavyadhara.blogspot.in/ पर ठिकाने के बारे में लिख रही हैं ....रफ़्ता रफ़्ता घर को सजाना होगा, / सपनों की जन्नत को बसाना होगा. /  कभी तो आएगा चलकर यहाँ वो, / सफ़र में जो मुसाफ़िर बेगाना होगा. 

अब आज की वार्ता को देते हैं विराम ....मिलते हैं फिर चलते-चलते .....आप सबको राम - राम ...

मंगलवार, 22 मई 2012

महिला मुक्ति मोर्चा से मुटभेड़ और माल रोड़ शिमला --- ब्लॉग4वार्ता --- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, डॉ महेश परिमल लिख रहे हैं इन दिनों अभिनेता शाहरुख चर्चा में हैं। जब से आईपीएल शुरू हुआ है, तब से न जाने क्यों वे स्वयं को कानून से ऊपर मानने लगे हैं। एक ओर यही शाहरुख अमेरिका में इमिग्रेशन विभाग द्वारा किए गए अपमान को आसानी से पचा जाते हैं, वही दूसरी ओर वे देश के कानून को तोड़ने में भी संकोच नहीं करते। आखिर इसका कारण क्या है? जब हमारे देश का संविधान तैयार किया गया, तब सभी को कानून की दृष्टि से समान माना गया है। पर वास्तव में ऐसा नहीं है। आज भी कई लोगों के लिए कानून हाथ का खिलौना मात्र है, तो कई लोगों को पूरी जिंदगी घुट-घुटकर जीने के लिए विवश करता है। राज्य सभा में अब तक न जाने कितने लोगों ने शपथ ली गई होगी, पर रेखा ने जब शपथ ली, तब कैमरा पूरे समय तक उन्हीं पर फोकस रहा। इसके पहले इस तरह से किसी भी सदस्य को तरजीह नहीं मिली। ……… अब चलते हैं आज  की वार्ता पर… आईए मेरे साथ-साथ सैर कीजिए ब्लॉग  नगरिया की………

संजय व्यास लिख रहे हैं हिसाब की पांडुलिपि -- किसी पवित्र पांडुलिपि की तरह सहेज कर रखा गया था हिसाब का ये पन्ना कितनी बची है मूंग की दाल और कितना चाहिये इस महीने मूंगफली का तेल सब कुछ इसमें था गृहणी की उँगलियों के कोमल बंधन में चौकन्नी चलती कलम... इनका ब्लॉग पता है - http://sanjayvyasjod.blogspot.in ……… रजनीश परिहार की माँग है - आई पी एल बंद हो - बाबा रामदेव ने जब से काले धन का मुद्दा उठाया है ,तभी से पूरा तंत्र उनके खिलाफ सक्रिय हो गया है ! उनके खतों की जांच हो रही है ,दवाइयों को उच्च मानकों पर परखा जा रहा है ,आयकर विभाग अलग से कार्यवाही कर रहा ह... इनका ब्लॉग पता  है - http://yeduniyahai.blogspot.in - संगीता जी के ब्लॉग पंचनामा पर समस्या है - अभी तक में अपने ब्लॉग पर क्लिक नहीं कर सकी हूँ ,व्यक्तिगत तिपानी नहीं कर सक रही हूँ *।सदा* की बीते हुए लम्हों के गुजरने की व्यथा*,शास्त्रीजी ,*की सुन्दर रचना ,*यादों* पर भावों के मधुर संयोजन,*मेरी धरोहर* ... इनका ब्लॉग पता है - अभी तक में अपने ब्लॉग पर क्लिक नहीं कर सकी हूँ ,व्यक्तिगत तिपानी नहीं कर सक रही हूँ *।सदा* की बीते हुए लम्हों के गुजरने की व्यथा*,शास्त्रीजी ,*की सुन्दर रचना ,*यादों* पर भावों के मधुर संयोजन,*मेरी धरोहर* ...

अनिता जी लिख रही  हैं - अब सहज उड़ान भरेगा मन - अब सहज उड़ान भरेगा मन अब तू भी याद नहीं आता अब मस्ती को ही ओढ़ा है, अब सहज उड़ान भरेगा मन जब से हमने घर छोड़ा है ! वह घर जो बना था चाहों से कुछ दर्दों से, कुछ आहों से, अब नया-नया सा हर पल... इनका ब्लॉग पता है - http://anitanihalani.blogspot.in/ -- अरुणेश दवे की महिला मुक्ति मोर्चा से मुटभेड़ हो गयी - साहब हम नुक्कड़ छोड़ कहीं आते जाते नही| पर मुसीबत है कि कोई न कोई बहाने से हमारे पास चली ही आती है। एन ऐसे एक बुरे दिन, हम चैन से गुजरती हुई सुंदरियो को निहारते खड़े ही थे। कि मिसेज रूनझुन जो कि शहर महिला... इनका ब्लॉग पता  है - http://aruneshdave.blogspot.in ---- अरुण चंद राय की कविता - माल रोड, शिमला - गोरखा युद्ध से लौटे अपने सेनापति के लिए ब्रिटिश साम्राज्य का उपहार था शिमला जिसे कालांतर में बनाई गई गुलाम भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी कहा जाता है कालों को अनुमति नहीं थी माल रोड तक पहुचने की और गुल... इनका ब्लॉग पता है- http://aruncroy.blogspot.in

डॉ शरद सिंह के ब्लॉग पर पढिए - खजुराहो में सुर-सुन्दरियों एवं नर्तकियों की वेशभूषा - व्यक्तित्व को आकर्षित बनाने के लिये वेश-भूषा का महत्व सदैव रहा है. इससे जहां एक ओर तत्कालीन संस्कृति का बोध होता है,** **वहीं दूसरी और व्यक्ति की रुचि तथा जीवन के प्रति उसके दृष्टि... इनका ब्लॉग पता है - http://amirrorofindianhistory.blogspot.in --- नुक्कड़ पर पढिए - पित्त-पथरी? बिना आपरेशन सफ़ल चिकित्सा -पित्त-पथरी? बिना आपरेशन सफ़ल चिकित्सा: easy remedies for gallstones गाल ब्लाडर में पथरी (gallstones)बनना एक भयंकर पीडादायक रोग है। इसे ही पित्त पथरी कहते हैं। पित्ताषय में दो तरह की पथरी बनती है। प्रथम ... ब्लॉग़ पता है - http://www.nukkadh.com -- जगदीश्वर चतुर्वेदी लिख रहे हैं - ममता बनर्जी के पापुलिज्म का टूटता तिलिस्म - राजनीति में पापुलिज्म कैंसर है। पापुलिज्म के आधार पर सरकार गिराई जा सकती है लेकिन सरकार चलायी नहीं जा सकती। पापुलिज्म के आधार पर इमेज बना सकते हैं लेकिन इस इमेज को टिकाऊ नहीं रख सकते। आज यही पापुलिज्म मु... इनका ब्लॉग़ पता है - http://jagadishwarchaturvedi.blogspot.in

पंकज शुक्ला लिख रहे हैं - लीक पर चलने का आदी नहीं रहा - लीक लीक चले होते तो शाहिद कपूर की भी इन दिनों साल में चार पांच फिल्में रिलीज हो रही होतीं, इनमें से एकाध हिट भी हो जाती। लेकिन, शाहिद को वो करने में आनंद आता है, जिसकी उनसे उम्मीद नहीं की जाती। मशहूर फिल...इनका ब्लॉग़ पता है -  http://thenewsididnotdo.blogspot.in -- दिनेश द्विवेदी जी की कानूनी सलाह - स्त्री के साथ छल से किया गया यौन संसर्ग पुलिस हस्तक्षेप लायक गंभीर अपराध नहीं - पुलिस के सामने इस तरह के मामले अक्सर आते हैं जिन में किसी महिला द्वारा यह शिकायत की गई होती है किसी पुरुष ने उस के साथ विवाह करने का विश्वास दिला कर यौन संसर्ग किया। पुरुष अब उस के साथ धोखा कर किसी द... अभिषेक ओझा को पढिए ओझा उवाच पर - जर गया तेरा बंगला  - पिछले दिनों भारत आया तो बैरीकूल का फोन आया। हाल खबर की लेनदेन के बाद बोला - "भईया, गाँव आइये त पक्का से मिलते हैं।" मैंने कहा - "बीरेंदर, देख लो गर्मी का दिन है इतनी दूर आना पड़ेगा तुम्हें। वैसे अग... इनका ब्लॉग पता  है - http://uwaach.aojha.in

जीवन के रंग - अदा जी के संग - हे भगवान् !..आज फिर देर हो जायेगी ..ओ भईया ज़रा जल्दी करना ...मैंने रिक्शे वाले से कहा ..वो भी बुदबुदाया ..रिक्शा  है मैडम हवाई जहाज नहीं...और मैं मन ही मन सोचे जा रही थी...ये भी न ! एक कप चाय भी नहीं बना सक... इनका ब्लॉग पता  है - http://swapnamanjusha.blogspot.com - खबर है कि जाट राम याने नीरज जाट जोशीमठ यात्रा- चमोली से वापस दिल्ली लौट आए हैं - पांच तारीख थी और साल था यही अपना दो हजार बारह। रात हो गई थी, अन्धेरा भी हो गया था और मेरे साथ थे विधान चन्द्र उपाध्याय। हम दोनों चमोली में थे। जो... इनका पता ठिकाना है - http://neerajjaatji. blogspot.in …… अशोक बजाज बता रहे हैं - फसल में लगी भयानक आग - ग्रामीणों की सूझबूझ से बच गया लखना * आग की लपट अभनपुर ब्लाक के ग्राम लखना में शाम को भीषण आग लग गई. नवापारा राजिम से 4 की.मी. दूर ये वही लखना ग.. इनका ब्लॉग पता है - http://www.ashokbajajcg.com

वार्ता को देते हैं विराम, मिलते हैं ब्रेक के बाद, समय हो तो इधर भी घुम आईए…………… 

सोमवार, 21 मई 2012

सम्मान से बड़ा आत्म सम्मान ... ब्लॉग4वार्ता....संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार, ....न्यूज चैनलों पर दिन - रात प्रसारित होने वाली आपराधिक ख़बरें, रियलिटी कार्यक्रमों व धारावाहिकों में बढती अश्लीलता और युवाओं पर आधारित  कार्यक्रमों की आपत्तिजनक भाषा का प्रभाव आप अपने बच्चों के व्यव्हार में भी देख सकते हैं. उनमे दूसरों के प्रति संवेदनशीलता घट रही है, और असुरक्षा तथा भय जैसे भाव बढ़ रहे हैं. बचपन को यूँ गुम होने से बचाना हम अभिभावकों की जिम्मेदारी है. वर्ना बच्चे S for SUN की बजाय  S for सनी लिओन सीखेंगे... आइये अब चलते हैं आज की ब्लॉग 4 वार्ता पर कुछ चुने हुए लिंक्स  के साथ....

http://amit-nivedit.blogspot.in/ पर अमित चंद्रा जी लिख रहे हैं "यो -यो" एक खिलौना अथवा ......जीवन दर्शन ......" ' यो-यो ' एक अत्यंत साधारण सा खिलौना है ,जिससे बचपन में सभी ने खेला होगा । दो पतली सी चकती के बीच उन्हें आपस में जोड़ने वाली एक महीन सी पिन लगी होती है और उसी पर एक लंबा सा धागा बंधा होता है । खेलने के... http://allexpression.blogspot.in/ पर पढ़िए अनु जी कर रही हैं पटाक्षेप एक नाटक का  *कैसा मधुर स्वर था,* *जब तुमने हौले से * *किया था वादा..* *मुझसे मिलने का.* *मानों बज उठें हों,कई जलतरंग एक साथ....* *मानों झील में खिला कोई सफ़ेद झक **कमल..* *मानों तारों भरा आकाश टिमटिमाने लगा ...द्विगु... http://aadhasachonline.blogspot.in/  पर महेंद्र श्रीवास्तव जी लिख रहे हैं सम्मान से बहुत बड़ा है आत्म सम्मान .... सच कहूं तो इस समय देश की ही ग्रह दशा ही खराब है। हर जगह गंदगी और बेईमानी का का बोलबाला है। लगता है कि सच्चाई और ईमानदारी आज कल किसी हिल स्टेशन पर बैठकर देश में हो रहे तमाशे को देख रही हैं। बात करें राजनी...
 
http://merehissekidhoop-saras.blogspot.in/ पर पढ़िए सरस जी की रचना अतिप्रिय रोज़ की तरह ,आज भी वह खतरों को टोहता हुआ , बढ़ गया और फ़ेंक गया एक कंकर अंत:स के कई अनबूझे प्रश्नों में . कई प्रश्न.............जैसे . क्या सोचता होगा वह ! शायद शीश को कुछ ऊपर उठाये - पूछता होगा इश्... http://udayaveersingh.blogspot.in/ पर उदयवीर जी लिख रहे हैं लहलहाती फसल अफीम की ....  * * *खिलकर कीचड़ में हमने आसन बनते* * ऐश्वर्य का , कमल देखा है -* * * *अनुत्तरित है रोटी का प्रश्न , लहलहाती * *हुयी , अफीम की फसल देखा है -* * * *कर्मयोगी की ... http://kajalkumarcartoons.blogspot.in/ पर काजल कुमार जी के कार्टून कर रहे हैं  कार्टून:- ठंडा ठंडा कूल कूल काजल कुमार Kajal Kumar at Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून  
 
http://nivedita-myspace.blogspot.in/ पर पढ़िए निवेदिताजी का आलेख हत्या :एक दृष्टिकोण ये भी समाचार-पत्र हो अथवा समाचार , हत्या का विवरण प्रमुखता से पर्याप्त स्थान घेरे रहता है | हमेशा तो नहीं पर कई बार सोचा इस कृत्य का मूल कारण क्या रहा होगा ! हर बार विभिन्न मन;स्थति ने भिन्न-भिन्न कारण बताये ... .http://dheerendra11.blogspot.in/ पर धीरेन्द्र जी से किताबें,कुछ कहना चाहती है,.... किताबें,कुछ कहना चाहती है,.... किताबे,कुछ कहना चाहती है, तुम्हारे पास रहना चाहतीं है, किताबें करती है बातें, बीते जमानों की, दुनिया कि इंसानों की! आज की, कल की,एक एक पल की, खुशियों की, गमो की,फूलों और बम. http://zindaginaamaa.blogspot.com/ पर निधि टंडन जी लिख रही हैं भूत बीती बातें...गुजरी बातें भूत ..कहते हैं ,इनको. सही ही कहते हैं न .. भूत सरीखी ही होती हैं,ये सारी . एक बार पीछे पड़ जाएँ तो पीछा नहीं छोडती कभीं . बीती गुजरी बातों के भूत को रिफाइंड भाषा में याद कह देते हैं. 
 
http://mauryareena.blogspot.in/ पर रीना मौर्या जी की रचना पढ़िए खुद में ढूंढ़ती हूँ तुम्हें...... एक बेरंग जिंदगी जो अपने रंगीन जीवन के सारे रंगों को खुद में समेटती है और ढूंढ़ती उस खास रंग को जो उसके माथे पर सजते थे .... *खुद में ढूंढ़ती हूँ तुम्हें......* *तुम्हारी अदा को अपनी अदा बनाकर * *खुद में ढू... http://sharmakailashc.blogspot.in/ पर कैलाश शर्मा जी द्वारा लिखित श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद (आठवीं-कड़ी) पढ़िए द्वितीय अध्याय (सांख्य योग - २.३८-४४) सुख दुःख, लाभ हानि सम, हार जीत न चिंतित करते. जो ऐसा सोच युद्ध में उतरें, वे नहीं पाप के भागी बनते. सांख्य बुद्धि बतलाई अब तक, कर्म योग मैं अब बतलाता. पाकर कर्म योग... http://archanachaoji.blogspot.in/ पर अर्चना चावजी  लिख रही हैंखामोश पल !! - *तुम जो कुछ पल मेरे साथ रहें * *कुछ चुप-चुप से , बिना कहे * *अब वो बाते दोहराती हूँ * *खुद को सुनती हूँ* *समझाती हूँ ..* *खुद ही चुप हो जाती हूँ ...* *बिन ब...   
 
वार्ता का सफ़र जारी रहेगा, चलते चलते यहाँ भी देखिये... मिलते हैं, अगली वार्ता में तब तक के लिए नमस्कार.....

रविवार, 20 मई 2012

हर एक ब्लॉगर जरूरी होता है - ब्लॉग4वार्ता - ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, ब्लॉगर अनिल पुसदकर कह रहे हैं - एक विदेशी क्रिकेटर और एक विदेशी बाला के बीच के मामले को देशी मीडिया ने इतना तुल दिया जैसे ये रूपये के लगातार गिरने,महंगाई के लगातार बढने,पुलिस वालो को अपराधियों द्वारा ट्रकों से कुचल कर मारने और जंगल में अगवा कर नक्सलियो द्वारा मार डालने से ज्यादा गंभीर मामला हो.हैरानी की बात तो ये है कि उस विदेशी बाला को महिला आयोग के बारे में पता तो चला ही उसका पता भी चल गया.वो न केवल वंहा पहुंची बल्कि उनके पहले सारा का सारा मीडिया वंहा पहले से तैनात था.आखिर सबके सब वंहा पहले से कैसे?खैर जितना दम लगाया इस मामले में खुद ट्रायल कर फैसला देने में उसे अदालत ने नकार दिया और ज़मानत दे दी.फोर्सफुल एन्ट्री का आरोप खारिज़ हो गया.एक बात और पूरे मामले में बुरी तरह घायल कहे जाने वाले कथित मंगेतर को अभी तक़ नही दिखाया गया कि वो कितना घायल है? अब चलते हैं आज प्रकाशित चिट्ठों की सैर पर, प्रस्तुत हैं कुछ उम्दा ब्लॉग लिंक्स …………

अदा जी संस्मरण सुना रही हैं -आवाज़ की दुनिया भी कितनी पारदर्शी होती है...है ना ! बात आज से ४ साल पहले की होगी...तब मैं रेडियो जॉकी थी, जो मेरा बहुत प्रिय पार्ट टाईम शौक़ भी है, और बहुत प्यारा काम भी.... कनाडा, में ९७.९ FM, पर 'आरोही' मेरा और मेरे सुनने वालों का अपना प्रोग्राम हर दिन शा...46 वर्षों से बाट जोह रहे उपन्यास "धान के देश में" का प्रकाशन -कारज धीरे होत है, काहे होत अधीर। समय पाए तरुवर फ़ले, केतक सींचो नीर। इस कथन से लगता है कि किसी भी कार्य को भाग्य एवं ईश्वर के भरोसे छोड़ देना चाहिए। समय आने पर कार्य होगा ही। लेकिन अधिरता भी रखना जरुरी है... राहुल सिंह जी के ब्लॉग  सिंहावलोकन पर पढिए - देव सुमिरन - *टांगीनाथ* जैसे लोगों ने टांगीनाथ-टांगीनाथ कहते है। उसमें एक जन्दगनी मुनी का आसरम था उसका एक लड़का परशुराम था। जन्‍दगनी मुनी ने पूरे विश्वा का राजा लोगों को या प्रजा तन्त्र को पार्टी में बुलाया और राजा मह...

प्रवीण पाण्डेय जी पोस्ट पढिए -सीट बेल्ट और इंच इंच सरकना - बंगलोर में अभी कुछ दिन पहले सीट बेल्ट बाँधना अनिवार्य कर दिया गया है। इस निर्णय ने मुझे कई कोणों से और बहुत गहरे तक प्रभावित किया है। आप भी पालन कीजिये बंगलोर में संरक्षा को प्राथमिकता मिलनी चाहिये, पर आ... हिन्‍दी ब्‍लॉगर चूकें मत :हिंदी भवन में शनिवार शाम पांच बजे हिंदी पत्रिका नव्या का लोकार्पण  नव्या का लोकार्पण आज हिंदी भवन में शनिवार शाम पांच बजे हिंदी पत्रिका नव्या का लोकार्पण है। कृपया पधारें फज़ल इमम मल्लिक ……सुनिए आँखों की जबां.. से -ये सच है कि आँखें बोल देती हैं, गर इश्क की जबाँ न हुई तो क्या हुआ ... मिले हैं राहों में दोस्त सुकूं के लिए गर जो हमारा कोई न हुआ तो क्या हुआ... निभा तो जाएंगे रस्में सारी हम गर जमाने का दस्तूर न हुआ तो ...

पंचम दा सफ़ेद घर में बमचक मचाए हुए हैं -कौन राह चलिहौ सरोखन ? परधान जी सरोखन के साथ कोईराना की ओर चल पड़े। चलते-चलते उन्हें महसूस हुआ कि जैसे प्लास्टिक के जूते में कोई कंकड़ आ गया है। रूककर पैरों में से सस्तहवा जूता निकाले, टेढ़ा करके झाड़े-झूड़े, ... चलिए अंधड़ पर - कूलिंग पीरिअड़ बाद की रोटी खाई थी, इसलिए दिमाग की बत्ती भी थोड़ी देर से ही जलती थी ! हाँ, ये बात और है कि मजाक में भी जो बात कह जाता उसके भी परिणाम गंभीर ही निकलते थे! शादी के बाद घर आई नई-नवेली दुल्हन ने भी फुर्सत के ... दिनेश राय द्विवेदी जी कह रहे हैं - डर के जो हाँ भर रहा, वह भी घोंघा बसन्तघोंघा एक विशेष प्रकार का जंतु है जो अपने जीवन को एक कड़े खोल में बिता देता है। इस के शरीर का अधिकांश हिस्सा सदैव ही खोल में बंद रहता है। जब इसे आहार आदि कार्यों के लिए विचरण करना होता है तो यह शरीर का...

वाणी जी लिख रही हैं - परिवार वही बेहतर हैं जहाँ आपस में प्रेम , विश्वास और अपनापन है , संयुक्त परिवार हो या एकल !समाजशास्त्र की किताबों में पढ़ा था कि मनुष्य एक सामाजिक पशु है . पशु समूह में रहना पसंद करते हैं , मनुष्य के लिए भी विभिन्न कारणों से अकेले रहना संभव नहीं . वह परिवार , कबीला ,गाँव आदि बनाकर एक समूह म.. बैठे ठाले पढें- अफ़सोस ! अपनी जान का सौदा न कर सके  विकास शर्मा 'राज़' जिस वक़्त रौशनी का तसव्वुर मुहाल था उस शख़्स का चिराग़ जलाना कमाल था रस्ता अलग बना ही लिया मैंने साहिबो हालाँकि दायरे से निकलना मुहाल था उसके बिसात उलटने से मालूम हो गया अपनी शिकस्त का उ.. अन्तर्मंथन पर पढें - हम बुलबुल मस्त बहारों की श्री सतीश सक्सेना जी की प्रथम पुस्तक -- मेरे गीत -- प्रकाशित होकर हमारे बीच आ चुकी है । ज्योतिपर्व प्रकाशन द्वारा प्रकाशित १२२ प्रष्ठों की इस पुस्तक में सतीश जी के ५८ गीत शामिल किये गए हैं । हालाँकि अधिक...

अनिता जी लिख रही हैं  - कविता अपनी मर्जी से आयेगी कविता अपनी मर्जी से आयेगी कभी उगाएगी फूल कभी दर्द जगायेगी उसे लाया नहीं जा सकता उस तरह जैसे बाजार से लाते हैं सामान वह उतरती है तब जब भीतर मौसम गाते हैं कभी सुख के कभी दुःख के कुछ पल याद आत... दशक का चिट्ठाकार : हर एक ब्लॉगर जरूरी होता है ।कल अचानक जाल भ्रमण के दौरान दिव्या जी की एक पोस्ट पर मेरी नज़र पड़ी । उन्होने हर विषय पर बड़ी साफ़गोई के साथ अच्छी और सच्ची टिप्पणियाँ करके मेरा मार्गदर्शन कर दिया । मैं हतप्रभ हूँ और उत्साहित भी इस सारगर..कुत्ते की दूमछत्तीसगढ़ में राहुल गांधी आये अपनों से मिले और चले गये। तीन दिनों के जद्दोजहद के बाद कांग्रेस किस तरह से सत्ता हासिल करेगी यह तो वहीं जाने लेकिन इन तीन दिनों का आखिरी अध्याय कांग्रेस के बड़े नेताओं के लिए कि..

वार्ता को देते हैं विराम - मिलते हैं ब्रेक के बाद -राम राम, चलते चलते पढिए आकांक्षा 



एक चटका इधर भी हो जाए

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