मंगलवार, 6 सितंबर 2011

पण्डिज्जी का सबसे हाट ब्लाग :

किसी ब्लाग से तो नही पर फ़ेसबुक से मिला आलेख सबसे पहले पेश है 



3 जनवरी, 1831 को सावित्रीबाई फुले का जन्म हुआ था। भारत के पहले बालिका विद्यालय की पहली प्रिंसिपल और पहले किसान स्कूल की संस्थापक को नमन। एक महिला प्रिंसिपल के लिए सन 1848 में बालिका विद्यालय चलाना कितना मुश्किल रहा होगा, इसकी कल्पना शायद हम 2011 में नहीं कर पाएंगे। लड़कियों की शिक्षा पर उस समय सामाजिक पाबंदी थी। सावित्री बाई फुले उस दौर में न सिर्फ खुद पढ़ीं, बल्कि दूसरी लड़कियों के पढ़ने का भी बंदोबस्त किया, वह भी पुणे जैसे कूढ़मगज शहर में। वे स्कूल जाती थीं, तो लोग पत्थर मारते थे। उन पर गंदगी फेंक देते थे। आज से 160 साल पहले बालिकाओ के लिए स्कूल खोलना। जबकि वह पाप का काम था। कितना सामाजिक अपमान झेलकर यह काम किया गया होगा। सोचकर देखिए। देश में एक अकेला बालिका विद्यालय। इतिहास लिखने वालों ने इन असली नायकों-नायिकाओं से साथ न्याय नहीं किया। इतिहास का पुनर्लेखन एक अनिवार्य कार्यभार है। स्कूल तो क्या कॉलेज तक में विद्यार्थियों को बताते ही नहीं है कि कोई सावित्रीबाई फुले भी थीं, जिन्होंने देश का पहला बालिका विद्यालय खोला था। सावित्रीबाई फुले के स्कूल में सभी धर्म और जातियों की   बालिकाए पढ़ती थीं। और उन्होंने ब्राह्मण विधवा काशीबाई के बच्चे को गोद लिया था। सावित्रीबाई पूरे देश की महानायिका हैं। हर बिरादरी और धर्म के लिए उन्होंने काम किया। जब सावित्री बाई कन्याओं को पढ़ाने के लिए जाती थीं तो रास्ते में लोग उनपर गंदगी, कीचड़, गोबर, विष्ठा तक फैंका करते थे। सावित्री बाई एक साड़ी अपने थैले में लेकर चलती थीं और स्कूल पहुँच कर गंदी कर दी गई साड़ी बदल लेती थीं। अपने पथ पर चलते रहने की प्रेरणा बहुत अच्छे से देती हैं। साभार:फ़ेसबुक पर अमित जी से  

अब सुनिये एक टीचर जी का पाडकास्ट :ऐसी वाणी बोलिये   राकेश जी के ब्लाग मनसा वाचा कर्मणा से


सुर और असुर समाज में हमेशा से ही होते आयें हैं.  सुर वे जन हैं जो अपने विचारों ,भावों

और कर्मो के माध्यम से खुद अपने में  व समाज में  सुर ,संगीत और हार्मोनी लाकर
आनन्द और शांति की स्थापना करने की कोशिश में लगे रहते हैं.  जबकि असुर  वे  हैं
जो इसके विपरीत, सुर और संगीत के बजाय अपने विचारों ,भावों और कर्मो के द्वारा
अप्रिय शोर  उत्पन्न करते रहते हैं और समाज में अशांति फैलाने में कोई कोर कसर
नहीं छोड़ते.   इसका मुख्य कारण तो यह ही समझ में आता है कि सुर जहाँ ज्ञान का
अनुसरण कर जीवन में 'श्रेय मार्ग' को   अपनाना अपना ध्येय  बनाते हैं वहीँ असुर अज्ञान
के कारण 'प्रेय मार्ग'  पर ही अग्रसर रहना पसंद करते हैं और जीवन के अमूल्य वरदान को भी 
 निष्फल कर देते हैं. 
'प्रेय मार्ग'  तब तक  जरूर अच्छा लगेगा जब तक यह हमें भटकन ,उलझन ,टूटन  व अनबन
आदि नहीं प्रदान कर देता.  जब मन विषाद से अत्यंत ग्रस्त हो जाता है तभी हम कुछ
सोचने  और समझने को मजबूर होते हैं. यदि हमारा सौभाग्य हो तो ऐसे में ही संत समाज
और सदग्रंथ हमे प्रेरणा प्रदान कर उचित मार्गदर्शन करते हैं.
वास्तव में तो चिर स्थाई चेतन आनन्द की खोज में हम सभी लगे हैं. जिसे शास्त्रों में
ईश्वर के नाम से पुकारा गया है. ईश्वर के बारें में हमारे शास्त्र बहुत स्पष्ट हैं.
यह कोई ऐसा .काल्पनिक  विचार नहीं कि जिसको पाया न जा सके. इसके लिए 
आईये  भगवद गीता अध्याय १० श्लोक ३२ (विभूति योग) में  ईश्वर के बारे में दिए गए
निम्न शब्दों पर विचार करते हैं .(आगे पढ़िये ).

                                                                             
     मेरी मुलाक़ात पिछले दिनों एक और टीचर जी से हुई. बात बात पर भावुक होती ये देवी ब्लाग जगत  में अपने उद्दव जी के साथ इतनी सरल हैं कि यदी इनको सरलता की परिभाषा कहें तो कम है..येटीचर जी इधर हैं..


   

                  ब्रजेश त्रिपाठी जी जिला महिला बाल विकास अधिकारी छतरपुर मध्य-प्रदेश में हैं. ब्लाग जगत में आने के लिये कई दिनों से बेचैन थे. एक घंटा सत्रह मिनिट लम्बी चर्चा  फ़ोन  पर हुई ब्लाग बनाना सीखा. बना भी "Billya" ब्लाग उनका ही है. यानी ब्लाग से जुड़ने का जुनून .. वा पंडिज्जी क्या बात है. 
           अपने एक और ब्लागर हैं पंडिज्जी... इनके ब्लाग को ब्लाग-सेंसर बोर्ड  "A" सर्टिफ़िकेट से किसी भी वक़्त नवाज़ सकता है... इंतज़ार कीजिये महाराज़ .
               'वेब पत्रकारिता' को राजभाषा प्रोत्‍साहन पुरस्‍कार : राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल श्याम माथुर को यह पुरस्कार प्रदान करेंगी –खबर नुक्कड़ वाले भैया दे रहें हैं. सुना है अविनाश बाबू अब स्वस्थ्य हैं. मैदान-ए-ब्लाग में फ़िर हाज़िर हो चुके हैं. 

          प्रिंट मीडिया में कोई भी ब्लाग कैसे छपता है इस बात की पता साजी कर रहे बीमार ब्राडबैण्ड कनेक्शन के मालिक ललित शर्मा जी ने बताया:-अभी पता नहीं चल पाया. कहो कल कोई अखबार उनका ही ब्लाग चैंप दे कोई बड़ी बात नहीं. तब तलक आप इन कतरनों को बांचिये
                          रचना जी नें नारी ब्लाग पर एक ज़बरदस्त आलेख लिखा है. विवाह-संस्था के इर्द-गिर्द घूमता आलेख मानस-मंथन करनें में सहायक है. 
          नत्थू जी को आपने देखा है..? देखा भी हो तो याद कहां ? हिंदी ब्लागिंग ने बीड़ा उठा ही लिया बीती यादों तक ले जाने का तो खोजिये अपनी यादों की बंद संदूकची इस "चाबी" से जो भेजी  Atul Shrivastava जी ने छत्तीसगढ़ से हमारे लिये. एक चाबी ये भी तो है.. परिकल्पना ब्लागोत्सव के आले में वहां से भी नत्थू जी से मिला जाए 
                            आज तो हिमधारा ब्लाग कितना ऊष्ण है इसका पता तो वहीं जाकर लगाएं बेशर्मी की हद तक  जबकि ZEAL की पोस्ट "प्रेम के सांचे" की पड़ताल करती हुई भीड़ में अलग से नज़र आ रही है. 
      गत्यात्मक-ज्योतिष पर "    “१९ अगस्त को भारतीय शेयर बाजार में गिरावट चरम सीमा पर पहुँच गयी थी , ग्रहों की स्थिति को देखते हुए मुझे महसूस हो रहा था की गिरावट और जारी नहीं रहनी चाहिए , तो मैंने निवेशकों को निवेशकों को राहत प्रदान करने के लिए मैंने एक पोस्ट लिख दी की यह गिरावट और जारी नहीं रहेगी! और आजतक सचमुच ऐसा ही देखने को मिला . २४ , २५ और २६ अगस्त ग्रहीय दृष्टि से शेयर बाजार के लिए कुछ कमजोर थे ही. पर इस सप्ताह बाजार पहले केवल सोमवार व मंगलवार को ही खुला था और इन दो सत्रों में सेंसेक्स ने करीब 828 अंक की बढ़त हासिल की थी। आगे ...

बारिश दबे पाँव आती है,

और अपनी मौजूदगी के निशां,
खिड़की पर छोड़ जाती है,
जो कुछ देर बाद,
खुद-बा-खुद गायब भी हो जाते हैं,
पर तुम तो मेरी ज़िन्दगी में, 
अब भी नुक्ते की तरह समाई हो.
     अंत में मेरी वेदना 
                 क्यों..नहीं कह पाता हूं  दूर हो जाओ मुझसे..

सोमवार, 5 सितंबर 2011

गुरु वंदना .. सियासत के बदलते रंग ..ब्लॉग4वार्ता.. संगीता पुरी




आप सबों को संगीता पुरी का नमस्कार , जन लोकपाल बिल पर सरकार को झुका देने वाली टीम अन्‍ना के सदस्‍य और वरिष्‍ठ वकील प्रशांत भूषण को संसद के विशेषाधिकार हनन का नोटिस मिला है। भूषण पर सार्वजनिक रूप से यह कहने का आरोप है कि सांसद पैसे लेकर कानून पास करते हैं। अन्‍ना के सबसे करीबी सहयोगी अरविंद केजरीवाल को भी विशेषाधिकार हनन का नोटिस भेजा गया है। किरण बेदी को पहले ही नोटिस भेजा जा चुका है। टीम अन्‍ना के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की भी तैयारी हो रही है। दिल्‍ली पुलिस ने तय किया है कि टीम अन्‍ना ने रामलीला मैदान में आंदोलन के लिए जो लिखित हलफनामा दिया था, उसकी चार अहम शर्तों का उल्‍लंघन हुआ है और इसके लिए टीम अन्‍ना को कठघरे में खड़ा किया जा सकता है। आगे आगे देखा जाये , और क्या क्या होता है . इस खबर के बाद आपलोगों को लिए चलते हैं आज की वार्ता पे .......


कल शिक्षक दिवस है एक विद्यार्थी और शिक्षक का सम्बन्ध अन्य सामाजिक सम्बन्धों की तरह किसी स्वार्थ पर नहीं टिका होता, वह विश्वास, प्रेम और ज्ञान के तंतुओं से बुना होता है... प्रस्तुत है एक संवेदनशील विद्यार्थी की डायरी से अपनी. गुरु वंदना समस्त सम्माननीय मित्रों का सादर अभिनन्दन करते हुए ५ सितम्बर "शिक्षक दिवस"के अवसर पर राष्ट्र निर्माताओं/गुरुजनों को सादर समर्पित *"भाव सुमन" **.* * आज तिमिरों में निःशंक हो अपने कदम बढाऊँ मैं. अति असीम ... शिक्षक दिवस पर कुछ विचारशिक्षा एक सतत प्रक्रिया है जो जीवन पर्यंत चलती रहती है |पूरे जीवनकाल में न जाने कितने लोगों से हम कुछ न कुछ सीखते हैं |शिक्षक एक मार्ग दर्शक होता है जो विद्यार्थी को अंधकार से प्रकाश की और ले जाता है | ... "शिक्षक दिवस"*आता है शिक्षक दिवस, एक साल के बाद।*** *गुरुओं के सम्मान की, हमें दिलाने याद।।*** *सर्वपल्ली को आज हम, करते नमन हजार।*** *जिसने शिक्षक दिन दिया, भारत को उपहार।।*** *धन्य हुए गुरुजन सभी, पाकर यह सौगात...एक रि पोस्ट :- शिक्षक दिवस पर विशेष - तीन ताकतों को समझने का*यह संयोग भारत में ही संभव हो सकता था कि एक शिक्षक राष्ट्रपति बन जाए और एक राष्ट्रपति शिक्षक। * *बात हो रही है क्रमश: डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन (जिनका जन्मदिन आज शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जा रहा है...शिक्षक दिवस




सियासत के बदलते रंग ..पिछले दिनों अन्ना जी के आन्दोलन से हिली सरकार अब थोड़ा संभलने लगी हैं | और देश के नेता भी अपने रंग में आ गए है | यानि आरोप प्रत्यारोप के रंग में या यूँ कहें की अपने असली रंग में बयान बदलने में तो यह कितने राजाओं के राजा !!हम तो कह रहे हैं आओ, चलो, लड़ लो, भिड़ लो चुनावी अखाड़े में ... पर ये - अनशन आन्दोलन नारेबाजी भीडबाजी चक्कर घनचक्कर जंतर-मंतर रामलीला मैदान जन लोकपाल बिल पास-फ़ैल अच्छी बात नहीं न है ! रोज-रो....कदम चलते रहें, और भीड़ बढ़ती रहे !काश ! हमारे देश का मुखिया गूंगा, बहरा, या मूकबधिर होता पर जो होता, जैसा होता, हमारे सामने तो होता !! ... कूदने को कूद जाओ, क्या फरक पड़ता हमें रंज मत करना कभी, क्यों हमने रोका नहीं ! ... नहीं होता मैं ...नायक किस मिट्टी से बनते हैं - भाग 2. अन्ना बनना है तो शब्द और कृति को एक करो ... शुद्ध आचार, निष्कलंक जीवन, त्याग करना सीखो, कोई कुछ कहे तो अपमान सहना सीखो ~अन्ना हज़ारे (27 अगस्त 2011, रामलीला मैदान) पिछली प्रविष्टि और आपकी टिप्पणियों में हम..






.टीम अन्ना का एक और सदस्य निशाने पर [Cartoon][बलमुआ लउटि चलौ वहि ठाँ बलमुआ लउटि चलौ वहि ठाँव, सबसे सुन्नर, बहुत पियारा बाटै आपन गाँव। बलमुआ लउटि चलौ... बीते राति सबेरा होई, चिरइन कै कलराँव, यहि ठौं दिनवा रतियै लागै, घाम कहाँ?.. विशेषाधिकार हनन के तहत संसद में दवे जी की पेशी साहब नुक्कड़ मे तेजी से खबर फ़ैली कि दवे जी को संसद ने विशेषाधिकार हनन के आरोप मे नोटिस भेजी है। , हम भी सकते में थे। लोगो ने पूछा कैसे लपेटे मे आ गये दवे जी, हमने बताया- " अफ़जल गुरू को कोसा था एक लेख मे क..सॉफ़्टवेयरों सावधान बयान देने पर अवमानना का नोटिस मिल सकता हैपिछली पोस्ट *आखिरकार कम्प्यूटर से वायरस निकलने को सहमत हुए* के बाद सदन हरकत में आ गया और जैसे ही कम्प्यूटर को बिजली मिली और बूट हुआ, वैसे ही रैम ने ऑफ़िस सॉफ़्टवेयर पर आरोप लगाया कि कार्य धीमा होने ..






राजीव गांधी के हत्यारों,अफ़ज़ल गुरू के साथ-साथ कसाब को भी माफ़ कर दिया जाना चाहिये!सज़ा देने के लिये है ना,अन्ना की पूरी टीम राजीव गांधी के हत्यारो की फ़ांसी की सज़ा माफ़ कराने के लिये इसी देश के लोग सक्रिय हो गये हैं,विधानसभा में प्रस्ताव आ रहे हैं,अब संसद पर हमले के आरोपी अफ़ज़ल गुरू के लिये भी एक विधायक सामने आ गये हैं,दूसरी ... कांग्रेस क्या है? - शरद जोशी की व्यंग रचना "तीस साल का इतिहास" का एक और अंशतीस सालों की यह यात्रा कांग्रेस की महायात्रा है। वह खादी भंडार से आरम्भ हुई और सचिवालय पर समाप्त हो गई। पूरे तीस साल तक कांग्रेस हमारे देश पर तंबू की तरह तनी रही, गुब्बारे की तरह फैली रही, हवा की तरह सन.. माई नेम इज खुशदीप एंड आई एम नॉट ए कांग्रेसमैन. माई नेम इज खुशदीप एंड आई एम नॉट ए कांग्रेसमैन... माई नेम इज ख़ान एंड आई एम नॉट ए टेररिस्ट...शाहरुख ख़ान के इस डॉयलॉग ने ही उनकी फिल्म माई नेम इज़ ख़ान को नए मायने दिए थे...देश में ही नहीं विदेश में भी ...










दर्शन - 04-09-2011श्री राधा श्यामसुन्दर श्री राधा श्यामसुन्दर श्री कृष्ण बलराम श्री कृष्ण बलराम श्री गौर निताई श्री गौर निताई .शिवजी ने सिर्फ एक बालक के हठ के कारण उसका अंत नहीं किया होगा शिवजी तो देवों के देव हैं, महादेव हैं, भूत- वर्तमान-भविष्य सब उनके अनुसार घटित होता है, वे त्रिकालदर्शी हैं, भोले-भंडारी हैं, योगी हैं, दया का सागर हैं, बड़े-बड़े असुरों, पापियों को उन्होंने क्षमादान दिया ह.समाज के लिए अभिशाप बनता नशा‏ खुशबु(इन्द्री) नशा जिसे हम एक सामाजिक बुराई कहते हैं,के कारण आज के युवा विनाश की गर्त में जा रहे हैं। आज समाज में नशाखोरी कंी प्रवृति इस कद्र अपना साम्राज्य फै ला चुकी है कि युवा इसके कारण मौत के आगोश मे......गुड़ियाराजिम कुंभ में कैमरा लिए भटक रहा था, यह तस्वीर मिली।इस श्रृंखला की तस्वीर तब दैनिक छत्तीसगढ़ में छपी थी। अखबार और संपादक श्री सुनील कुमार के पुनः आभार के साथ यह पोस्ट






खबर है कि आदमी ने सांप को काटाकहते हैं खबर तब बनती है जब आदमी कुत्ते को काटता है मगर यहाँ खबर तब भी बनी जब आदमी ने सांप को काट खाया ..मामला कैलीफोर्निया का है जहां ४५ वर्षीय डेविड सैंक को पुलिस ने इसलिए गिरफ्तार कर लिया है कि उसने अपने प........पैसे बरसाने वाला भूत एक बार मेरे पास एक अनोखा मामला आया। श्रीमान इलीजर के घर में कुछ दिनों से भूत का आतंक छाया हुआ था। वह भूत दिन में घर के प्रत्‍येक हिस्‍से में कंकड़-पत्‍थर बरसाया करता था। कभी-कभी कंकड़ों के आज का प्रश्न-६८ question no.६ Qus.no 68 : चित्र मे जो दो बिंदु दिखाए गए हैं वो वास्तव मे क्या है ?










मौन होते हुए रिश्ते !खतरनाक होती हैं पसरती हुई खामोसी खतरनाक होते हैं बातों के सिमटते दायरे खतरनाक हैं शब्दों कि बदलती हुई परिभाषाएं जज्बातों की खोती हुई गरिमा खतरनाक है टूटते हुए भरम भावनाओं के उधड़ते जाल *खतरन....२४. ठाँव कहीं इक शांत एकांतकंकर-पत्थर के जंगल में गगन भेदते कोलाहल में बौराया मन ढूँढता फिरता ठाँव कहीं इक शांत- एकांत भागाभागी -आपाधापी आगे पीछे लोग ही लोग छूटी जाए समय की गाडी चहूँ दिशा में भागें लोग बीच गली की भीड़ -भाड़ म...परत दर परत आज जब कुछ भी नया नहीं है कहने को नीरवता में नदी के शांत जल की सतह पर एक कंकर फेंकता हूँ तुम्हारी स्मृति का और धीरे धीरे खुलने लगते हैं अनकहे रास्ते देख पाता हूँ वो सब जो किया है तुमने मेरे वा..वो पत्थर दिल पिघलता ही ग़ज़ल वो पत्थर दिल पिघलता ही नहीं है. मेरा कुछ ज़ोर चलता ही नहीं है. तकूँ मैं राह सुब्हो-शाम उसकी, वो इस रस्ते निकलता ही नहीं है. झरे हैं अश्रु बारहमास अपने, यहां मौसम बदलता ही नहीं है. मैं दिल को यूँ तो....भारतीय काव्यशास्त्र – 82भारतीय काव्यशास्त्र – 82 - आचार्य परशुराम राय पिछले अंक में गुणीभूतव्यंग्य पर चर्चा समाप्त कर दी गयी थी। इस अंक से * काव्य-दोष* पर चर्चा प्रारम्भ की जा रही है। *काव्य-दोष* को परिभाषित करते हुए ..






स्कूल चलें हम यह व्यंग्य तब लिखा गया था जब दूरदर्शन में एक विज्ञापन आता था...स्कूल चलें हम। लिखकर भूल चुका था। दिसम्बर 2009 में* रचनाकार* द्वारा एक व्यंग्य लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया तो मैने इसे यूँ ही भेज दिया..असंभव लगताअसंभव लगता कह पाना यूँ मानो अपने आप को दोहराता हुआ देह से भिन्न कोई आस्वादन, सत्य के अनुकरण में क्या इतना कुछ काफी नहीं, या फिर इसका उल्टा साल दर साल किसी का अनुयायी बने रहना शायद असंभव ही | असमंजस के भँवरअसमंजस के भँवर मन के समुद्र में आते रहते शब्द मगर मुंह से नहीं निकलते व्यथा किस से कहें सोचते रहते किस पर विश्वाश करें सवालों से झूझते रहते दर्द का बोझ निरंतर ढोते रहते 04-09-2011 1443-18...मोहभंग....ज़िन्दगी के संकरे रास्तों पर यथार्थ के कंकड़ इतने नुकीले होते हैं कि मायूस एहसास हाथ से छूटने लगते हैं .... * * * * *रश्मि प्रभा * * * * * * *इसका साग बनाया जाता।* *पूड़ी के संग खाया जाता।।* * **जब बेलों पर पक जाता है।* *इसका ...अहाताअहाता यादों के अहाते में उजड़ने बसने के कई किस्से हैं अवसाद कि कहीं खाई, कहीं खुशियों के टीले हैं गिरती हुईं दीवारें, कहीं छत से झड़ते पलस्तर हैं मिश्री सी मीठी बातें कहीं स्वर कर्कश और कंटीले हैं..वैवाहिक सप्तपदी (वर-वचन)पढ़ने के लिए बहुत दिनों से सँजो कर रखी अपने प्रिय चिट्ठों की फीड देखते-देखतेवाणी जीकी एक प्रविष्टि पर टिप्पणी करने चला । उस प्रविष्टि में वैवाहिक सप्तपदी का उल्लेख था, सरल हिन्दी में उसे प्रस्तुत करने क...






नाटक में नौटंकीएक नाटक में नौटंकी का दृश्य है यह। नाटक इप्टा की संस्था का था और जगदलपुर इकाई द्वारा कोंडागांव में मंचित किया गया। नाम था चंद्रमासिंह उर्फ चमकू। निर्देशक विजयसिंह। लेखक भानूभारती। नौटंकीवाली के वेश में मैं.... टीवी देखे अपने कंप्यूटर परअगर आपको टीवी देखने का शोक है तो आज मैं आपके लिए ऐसा सोफ्टवेयर लाया हु जिसे डालने के बाद आप अपने देश के अलावा दुसरे देश के भी चेनल देख सकते है इस सोफ्टवेयर में आपको हर तरह का चेनल मिल जायेगा तो देर किस ब सेरोलसर झील और जलोडी जोत (JALORI PASS) बहुत दिन पहले मैं कुल्लू जिले का नक्शा देख रहा था और उसमें भी कुल्लू का वो इलाका जो पर्यटकों में बिल्कुल भी मशहूर नहीं है लेकिन घुमक्कडों में लोकप्रिय है- तीर्थन घाटी। आमतौर पर कुल्लू जिला जहां से शुरू ह.






कर्ज नहीं चुकाया जा सकता हैदो कोशिकाओं का युग्मन फिर सतत बिखंडन बिखेर रहा है तमाम ज्ञात अज्ञात पीढ़ियों का अहशास जिस्म के कतरे-कतरे में.. जीवन की आधार कोशिकाएं बिखर रही हैं एक जिस्म से कई जिस्मों में बृहत् से बृहत्तर कर रही हैं जीवन क.. है नमन उनको है नमन उनको कि जो यशकाय को अमरत्व देकर इस जगत मैं शौर्य की जीवित कहानी हो गए हैं. है नमन उनको कि जिनके सामने बौना हिमालय जो धरा पर गिर पड़े, पर आसमानी हो गए हैं पिता, जिनके रक्त ने उज्जवल किया कुल-वंश-माथा ..हास्य कविता -मातमी कविता नहीं सुनाएं तो और क्या करें ?एक कविता प्रेमी मशहूर घाघ नेता ने हास्य कवी सम्मलेन का आयोजन किया नामी गिरामी हास्य कवियों को बुलाया भारी पारिश्रमिक का वादा किया कवियों का दिल बाग़ बाग़ हो गया जोश खरोश से सम्मलेन शुरू हुआ पहले...क्यों निराश इतना क्या सूर्य बुझ गया....क्यों निराश इतना क्या सूर्य बुझ गया सूख गए सागर, या हिमालय झुक गया आ बता कहाँ तुझे चोट है लगी धरती मां है देख लिए औषधि खड़ी इस उमर में थक गया संसार देख कर या डर गया सच्चाई का अंगार देखकर चल खड़ा हो, हार अभी.






उल्टी गंगा के देश में हमने कोई बड़ी बात की गुजारिस नहीं की ना ही कोई ना हो सकने वाली बात हमने तो सामने ला दी वो जो तुम्हारे मन में छिपी बैठी थी सदियों से और तुम लाचार कभी रिश्तों से कभी रिश्तों को निबाहने की कशमकश से स्वय...जब तसव्वुर मेरा, चुपके से तुझे छू आये...अपनी हर साँस सें, मुझको तेरी खुशबू आए | यादें ....अपनी पिछली पोस्ट में ,किए वादे के मुताबिक आप सब के सामनें..... ...हाज़िर हूँ ,एक अपनी पसंद की गज़ल ले कर आप सब की नज़र करने को ....भरपूर उम्मीद रखत .फिर भी तंहा हैं हम *कहने को हमसफर साथ है फिर भी तंहा हैं हम हमें सताते हैं दुनिया के गम हो जाती हैं अक्सर आंखें नम सोचते हैं क्यों है दुनिया में इतने ज्यादा गम दूसरों के गमों से हमें तो है सरोकार वैसे आज के जमाने में प्...क्यों इंसां समझ पाए ना इंसां के पीर को ये बारिश का पानी है या निगाहों की नमी है, रोया है आसमां क्यों भीगी जमीं है . समझ जाता है बादल क्यों धरा की पीर को, क्यों इंसां समझ पाए ना इंसां के पीर को. कोई फर्क नहीं आया मौसम



रविवार, 4 सितंबर 2011

शादी के लिये लड़के का सौदा करना भी तो भ्रष्टाचार है..?


            दरअसल जब से दुनिया बनीं है तब से दुनियां भर की समस्याएं भी बन गईं. समस्या है तो उनका ठीकरा किसके सर फ़ोड़ा जाए यह “खोज” दुनियां को नित-नये काम सुझाती है. अब भ्रष्टाचार को ही लीजिये यह आचरण कहां से शुरु हुआ इस पर विद्वान एक राय हो ही नहीं सकते. कोई कहता है कि ईव ने चाकू न होने की वज़ह से उस फ़ल का बिना काटे स्वाद चखा जिसमें विशेष प्रकार के कीड़े थे जो वे देख न सकीं. कुछ का मानना है कि भगवान की भूल की वज़ह से यह भाववाचक संग्या तेज़ी से हार्ट-टू-हार्ट हैल गई. लेकिन वर्तमान समय में इसे अन्ना के पीछे खड़ी हम भारतीयों की जमात ने नेताओं एवम कर्मचारियों के माथे पे दे मारा. बावज़ूद इसके कि बिना दिये कुछ मिलता नहीं का अनुपालन करती जनता खुद भ्रष्टाचार पनपाने के जतन में लगी हुई है. शादी के लिये लड़के का सौदा करना, खम्बों से बिजली चुराना, अपने फ़ायदे के लिये येन केन प्रकारेण किसी की भी दीवार पोत देना. दूसरों के भ्रष्टाचार को बुरा खुद के  किये भ्रष्टाचरण को अच्छा बताने वाले लोग उस समय सब कुछ भूल जातें हैं जब अपनी “बकत” बनाने के लिये इन सभी आचरणों का सहारा लेते हैं. मेरा एक मित्र है बेचारा समझता है कि दुनियां में जिसे कोई कष्ट होता है उसका कारण उस व्यक्ति का पाप करना है.. एक बार मुझे किसी षड़यंत्र का शिकार बनाया गया तो वो मेरा उल्लेख कर कर के अपने नैतिकता मय यशस्वी जीवन गाथा का यश गान कर रहा था .. मुझे उसके कार्यों की सतत रिपोर्ट मिल रही थी. वैराग्य भाव से मैं उसे देखता रहा कभी उसका प्रतिकार नहीं किया करता भी क्यों मुझे मालूम था कि :-“सलीब पर ईसा का टांगा जाना, राम का चौदह बरस के लिये वनवास भोगना उनके पाप का का परिणाम नहीं था  ”  
                           लोकपाल या जन लोकपाल बिल पास होगा इससे इस देश में कोई खास फ़र्क नहीं पड़ने जा रहा है. मारा सबसे कमज़ोर ही जाएगा जो उसकी नियति है.
                       है न सच्ची और खरी बात. हां,अन्ना ने जो करवाया उससे एक बात अवश्य सामने आई कि लोग भ्रष्टाचार से आज़िज़ आ चुके हैं. पर आत्म चिंतन कितने कर रहे हैं इस बात पर गौर करना ज़रूरी है.      
                 मेरे एक मित्र ने मुझे वार्ता सिखाई कि वार्ता कैसे की जाती है. उनका आभारी होना ही है. यदी वार्ता के आलेखन का कोई अकादमिक सलीका हो तो मुझ ग्यान-के गरीब तक अवश्य भेजिये.

शनिवार, 3 सितंबर 2011

कठपुतरी कस हे जिनगानी का ऐती का ओती ---ब्लॉग4वार्ता--ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार,  देश भर में जैन धर्मावलम्बियों ने पर्युषण पर्व मनाया6, क्षमा दिवस के रूप में. मेरे भी मोबाइल पे कुछ मैसेज आये. क्षमा याचना एवं  क्षमा करने से व्यक्ति के मन के मन के कलुष धुल जाते हैं. निर्मल मन के साथ नयी सुबह होती है और जीवन की गाड़ी फिर दैनिक दिनचर्या की और चल पड़ती है. अब हम भी चलते हैं आज की ब्लॉग4वार्ता पर कुछ सुन्दर से चिट्ठों के साथ..........सबो धरम के एके कहना जइसे राखे रहना जी ,जभे तलक हे सांस के डोरी जीयत जाव सोंचव झन।कठपुतरी कस हे जिनगानी का ऐती का ओती जी,सोच-सोंच के अधिया जाबे जीयत जाव सोचव झन।नाचत भर ले नाच ले प्रानी अउ दउड़त भर दउड़ जी,कभू दुरिहा कभू लकठा जीयत जाव सोंचव झन।

सबसे पहले चर्चा करते हैं ३६ गढ़ के चिट्ठों के संकलक हमर छत्तीसगढ़ की.यहाँ ३६ गढ़ के चिट्ठाकारों के चिट्ठों की नियमित फीड मिलती है,आज हम कुछ चिट्ठे यहाँ से ले रहे हैं वार्ता के लिए. उलट दिए प्रकृति के नियम - *कृत्रिम कोशिकाओं के ज़रिए धरती पर इंसान बनाने का सपना, अंडे और मुर्गी की गुत्थी सुलझाने का दावा या फिर बूढ़े चूहों को जवान कर दिखाने का कमाल. साल 2010 में...भारतीय शिक्षा में खामियों की बढ़ती खाई - यह तो सही है कि भारत में न पहले प्रतिभाओं की कमी रही और न ही अब है। पुरातन समय से ही यहां की शिक्षा व्यवस्था की अपनी एक साख रही है। कहा भी जाता है, जब शून्...धूम्रवर्णावतारश्चाभिमानासुरनाशक: - *धूम्रवर्णावतारश्चाभिमानासुरनाशक:* सूतजी बोले - 'हे मुने! मैंने तुम्हें भगवान् विघ्नराज का श्रेष्ठ वृतान्त सुना दिया है। अब तुम्हें उनके धूम्रवर्ण स्वरूप क...

सांप्रदायि‍क समभाव पर गीतों के साथ कुछ बातें - ईद, तीज और गणेश चतुर्थी का अनोखा संगम...... ईद और तीज का त्‍योहार एक ही दि‍न 1432 सालों बाद 30 अगस्‍त 2011 को पड़ा..... इस अवसर पर सांप्रद...मतलबी है अन्ना !! - भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आंदोलन करने वाले वाले अन्ना हजारे, अब अपने ही सहयोगियों को भुला रहे हैं। उनके आंदोलन के दौरान सैकड़ों लोगों ने अनशन किया, यही नही...कौन किसके लिए खतरनाक ? - कुछ लोग बुद्धिमान होने के कारण पुरस्कृत होते है तो कुछ लोग पुरस्कृत होने के बाद बुद्धिमान बनते हैं और अपनी बुद्धि से दुन...गणेश वंदना ..... - *-जनकवि कोदूराम "दलित"* * *जय -जय गणेश महाराजा मुसवा में चढ़ के आजा जय गणपति फरसाधारी कर दूर हमर बेकारी मैं तोला चढ़ाहूँ पानी तैं मोला बना दे ज्ञानी...



मन का दीप जला कर देख........ - **** *मुझको तू अपना कर देख* *प्रेम-पनीरी खा कर देख* *हर दुआ होगी कबूल* *बस ! दोनों हाथ उठा कर देख.* *मन में क्या है खटक रहा* *यहाँ-वहाँ क्यों भटक रहा* *‘ना.. .लिटिल लिटिया - गौरैया के बाद पंडुक, फिर पंडुक-पंडुक, और अब लिटिया। आकार से लगता है कि अंग्रेजी के लिटिल और लिटिया नामधारी इस छोटी सी चिडि़या का कोई रिश्‍ता जरूर होगा। लिट..पंछी उड़ जाना कफ़न बढा तो किसलिए नजर तू डबडबा गई, सिंगार क्यों सहम गया बहार क्यूँ लजा गई. न जन्म न मृत्यु बस इतनी सी बात है, किसी की आँख खुल गई किसी को नींद आ गई मृत्...उपाधि मिलने की वाहवाही - ‘उपाधि’ देने की परिपाटी बरसों से है। बदलते समय के साथ यह परिपाटी अब पूरे रंग में है। पहले आप कुछ नहीं होते हैं। उपाधि मिलते ही आप रातों-रात उपलब्धि की सभी ...


उमड़त घुमड़त विचार  *ॐ श्री गणेशाय नमः * *वक्रतुंड महाकाय कोटिसूर्यसमप्रभ । * *निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा *॥ "आप सभी को गणेश-चतुर्थी की बहुत बहुत शुभकामनाएं " डॉ अमर कुमार की याद - वैसे आज डॉ अमर कुमार का जन्मदिन था। मुझे रह-रह कर याद आ रही थी उनकी वह टिप्पणी जो उन्होंने अपने पिछले जनमदिन वाली पोस्ट पर की थी बड्डी गॅल्त बात है, पाबला...  नई ग़ज़ल / जुबां खामोश रहती है इशारे बोल उठते हैं..... - *जुबां खामोश रहती है इशारे बोल उठते हैं* *हम अक्सर बस इसी के ही सहारे बोल **उठते ** हैं* * * *रखोगे कब तलक बंदिश में सच को पूछता हूँ मैं* *हमारे होंठ तो ये ब...लोकपाल से क्या सुधरेगी व्यवस्था - अन्ना हजारे के सत्याग्रह ने जो अभूतपूर्व सफलता पाई है। वह अपने आप में एक इतिहास बन गया है। समूचे भारत में गांवों से लेकर शहरों में जो शंखनाद हुआ है. वह आशा...


न वैसे सिंहासन रहे न वैसे आरूढ़ होने वाले - ऐसा तो नहीं कि गलत इंसान के गलत तरीके से सत्ता हथिया कर किए जाने वाले गलत कार्यों को उस आसन का श्राप मिलता हो कि जा निकट भविष्य में तेरा नाश अवश्यंभावी है?...दुनिया गोल है - दुनिया गोल है एक रोज़ जब लेटा था हर रोज़ की तरह बगीचे में हवा का झोंका उड़ा लाया मेरे पास पास ही के पेड़ के एक फ़ूल को फ़ूल को मैंने देखा था, पहले भी उस ब...रामू बाबा का अनशन - रामू बाबा का अनशन बाबा रामू को कहीं से पता चला कि दवे जी नाम के एक फ़ोकट चंद लेखक मुफ़्त में सलाह देते हैं, सो वे हमारे पास चले आये। बाबा से हमने पूछा -"राम...बधाई ***************** *"ईद - चतुर्थी हर्ष के, गीतों का संचार.* *बरसे बरखा नेह की, पावन हो संसार* *पावन हो संसार, प्रफुल्लित सांझ - सकारे * *लिए ईद का चाँ... 

एक दिन ले दुय दिन … Ek Din Le Duy Din - हल्बी जनभाषा में गाये जाने वाले ‘तीजा जगार’ का आयोजन ‘अमुस तिहार’1 के बाद आरम्भ हो जाता है, जो भादों महिने के शुक्ल पक्ष तृतीया तक चलता है और चतुर्थी तिथि ...को आब्लाईज़ करना जरूरी है - राज्यपालों की भूमिका एक बार फ़िर चर्चा में है।चाहे कर्नाटक हो या गुज़रात,या फ़िर और कोई राज्य,राज्यपालों के फ़ैसले राजनैतिक विवादो का कारण बनते जा रहे हैं।... अलंकृत होकर खिले चेहरे - *0 खेल दिवस पर राज्य खेल पुरस्कार से अलंकृत हुए 21 खिलाड़ी 0 मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों को शहीद राजीव पांडे, शहीद कौशल यादव, वीर हनुमान सिंह, शहीद विनोद चौबे...बस्तर रेल खंड की मांग अब सीधे तौर पर उठी - अब जा कर यह मांग बस्तर के लोगों की तरफ से सीधे और स्पष्ट तौर पर उठी है कि बस्तर रेल खंड को ईस्ट कोस्ट रेल से अलगा कर दक्षिण पूर्व मध्य रेल ज़ोन के अंतर्गत...






आज जगमोहन कोकास की पुण्यतिथि है .... - अपनी युवावस्था में जगमोहन कोकास आज मेरे पिता जगमोहन कोकास की पुण्यतिथि है । आठ वर्ष पूर्व 28 अगस्त 2003 को उन्होंने इस संसार से विदा ली थी । जगमोहन कोकास क...अगर अन्ना को गुस्सा आया तो......... - क्या हो अगर अन्ना हजारे को गुस्सा आ जाए ? जी अभी तक अहिंसा का रास्ता अन्ना जी ने छोड़ा नहीं है पर कुछ तकनीकी लोगो ने अपनी भड़ास निकालने का नया तरीका निकाल ...संसद एक बाजार - भैया संसद बाजार में दुकानें लग गई, एतिहासिक बाजार था। पूरे देश की टकटकी लगी थी। तो कौन है जो अपना माल कम बेचने पर राजी हो। हो गए शुरू इकतरफा। सुषमा ने बेचा...शेष समय इतना करना प्रिय... - शेष समय इतना करना प्रिय। सपनों का आकाश बड़ा था, आँखों मुक्ताहार जड़ा था, चुन-चुन मोती बड़े जतन से संग-संग हाथों महल गढ़ा था, स्वप्न नहीं अब एक कहानी बन मे...
वार्ता को देते हैं, विराम, मिलते हैं ब्रेक के बाद, राम राम ...............................

शुक्रवार, 2 सितंबर 2011

घास की तरह कट रही हैं पहाड़ की औरतें-----ब्लॉग4वार्ता ---ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, आज पर्युषण पर्व है जाने अनजाने में हुयी गलतियों के लिए क्षमा मांगने का दिन.........अगर अनजाने में मनसा---वाचा---कर्मणा कोई गलती हुयी हो तो उसके लिए मैं क्षमाँ प्रार्थी हूँ.....४ दिनों से ब्लॉगर देशबोर्ड बंद है. मगजमारी भी बहुत की लेकिन वाही  ढाक के के तीन पात नजर आये. मामला कुछ सुधरा नहीं. गूगल के ड्राफ्ट ब्लॉगरड्राफ्ट ब्लोगर की शरण ली जिससे अभी पोस्ट लगाना हो पाया है. गूगल ने सभी ब्लॉगों पर चरणबद्ध रूप से नया देशबोर्ड लगाने का कार्य शुरू कर दिया है. अगर किसी का देश बोर्ड नहीं खुल रहा हो तो वह ड्राफ्ट ब्लॉगर की शरण ले सकता है. अब चलते है आज की ब्लॉग4वार्ता पर .......... 

सबसे पहले चिट्ठा लेते हैं एक आलसी का मणिपुरी मेंघूबी  बहुत दिनों से चाहा, बहुत कुछ लिखना तुम पर लेकिन नहीं लिख पाया। न नमन है और न ग्लानि (पाखंड लगते हैं मुझे), मेरा समर्थन तुम्हें है. फिर चलते हैं सफ़ेद घर पर छुई-मुई सांसदगिरी बजरिये चच्चा जेम्स वॉट  इस घटना से पता चलता है कि बड़े नाजुक हैं हमारे सांसद गण। एकदम गुलाब के पंखुड़ियों की तरह। जिस तरह पाकिजा फिल्म में मीना कुमारी के पांव देखकर राजकुमार ने कहा था - अपने पाँवों को जमीन पर मत उतारना, मैले हो जायेंगे....कुछ उसी तरह हमारे सांसदों के बारे में भी कहा जा सकता है - कि कृपया हवा में ही बने रहें, जमीन पर कदम रखते ही मैले हो जाएंगे...जमीन या सांसद ये आप तय करें।

बारिश से ठीक पहले ऊपर आसमान में घने बादलों भीड़ थी.शाम का वक़्त था पर रौशनी बहुत तेज़ भागती कहीं दूर जा पहुंची थी.ये शाम हर रोज़ जैसी नहीं थी.कुछ कुछ ज़िंदगी की शाम की तरह भारी, अवसाद से भरी हुई. अजीब सी घुटन फेफड़ों को मसल डालने में लगी थी. और गर्मी तो ऐसी कि कछुए की खाल तक से पानी निचोड़ दे.हवा में हल्कापन बिलकुल नहीं था.वो सब कुछ को पृथ्वी के गुरुत्व के हवाले करती जा रही थी. बाकी दिनों में गर्व के साथ आकाश बींधती ऊंची ऊंची इमारतें आज ऐंठ कर दोहरी होना चाहती थी.अपनी पीठ न खुजा पाने की बेबसी से भरा दुर्ग अपने शिल्प की तमाम शास्त्रीयताओं को तोडना चाह रहा था. आगे पढ़ें 
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जाने चले जाते हैं कहाँ. जग में रह जायेंगे प्यारे तेरे बोल.........जी चाहे जब हमको आवाज दो, हम हैं वहीं –हम थे जहाँ.......... मुकेश जी का जन्म दिल्ली में माथुर परिवार में 22 जुलाई 1923 को हुआ था. उनके पिता श्री जोरावर चंद्र माथुर अभियंता थे. दसवीं तक शिक्षा पाने के बाद पी.डब्लु.डी.दिल्ली में असिस्टेंट सर्वेयर की नौकरी करने वाले मुकेश अपने शालेय दिनों में अपने सहपाठियों के बीच सहगल के गीत सुना कर उन्हें अपने स्वरों से सराबोर किया करते थे किंतु विधाता ने तो उन्हें लाखों करोड़ों के दिलों में बसने के लिये अवतरित किया था. जी हाँ ‘अवतरित’ क्योंकि ऐसी शख्सियत अवतार ही होती हैं. सो विधाता ने वैसी ही परिस्थितियाँ निर्मित कर मुकेशजी को दिल्ली से मुम्बई पहुँचा दिया. 

आखिर चमत्‍कार हो ही गया ऊपर की बर्थ पर जो सज्‍जन लेटे थे वे रामपुर में ही कोई अधिकारी थे। उनके आने और जाने वाले फोन से पता लग रहा था। अब जब उन्‍होंने सेवक कह दिया तो अधिकारी महोदय को जवाब देना ही था। वे बोले कि नहीं नहीं सब बेकार की बात है। संसद सर्वोपरी है। अब वे भी नीचे की बर्थ पर आ चुके थे। कुछ देर तक ऐसे ही बातों का सिलसिला चलता रहा। अब जैसा कि कांग्रेस की आदत है कि सर्वप्रथम दूसरे का चरित्रहनन करो वैसे ही स्‍वर में वे अधिकारी बोले कि आप वोट कास्‍ट करते हैं? वे शायद उनका प्रश्‍न समझ नहीं पाए या सुन नहीं पाए। बस अधिकारीजी का बोलना शुरू हो गया कि वोट देते नहीं और रईसों की तरह चाय की टेबल पर चर्चा करते हैं। लेकिन तभी उन सज्‍जन ने उनका भ्रम तोड़ दिया कि वोट तो सभी देते हैं।

महुवा घटवारन से ठीक पहले - बचपन से 'बाढ़' शब्द सुनते ही विगलित होने और बाढ़-पीड़ित क्षेत्रों में जाकर काम करने की अदम्य प्रवृति के पीछे - 'सावन-भादों' नामक एक करुण ग्राम्य गीत है, शमा हूँ मै... - सिल्क के चंद टुकड़े जोड़ इस चित्र की पार्श्वभूमी बनाई. उस के ऊपर दिया और बाती रंगीन सिल्क तथा कढाई के ज़रिये बना ली. फ्रेम मेरे पास पहले से मौजूद थी. बल्कि...कुछ तकनीकी अज्ञान और कुछ मन की भटकन .... - कल की पोस्ट करते वक्त कुछ तकनीकी अज्ञान और कुछ मन की भटकन .... सब मिल कर गडमड हो गया.... अपने एक परिचित मित्र के मित्रों की दास्ताँ ने मन बेचैन कर दिया.....कहीं प्यार की अमर कहानी - कहीं प्यार की अमर कहानी मिरे प्यार की लचर कहानी जीने को प्रायोजित बंधन वहां प्रेम है समर कहानी उपजे भाव प्रणय के दिल में कहती है सब नज़र कहानी परम...

अमृता के जन्म दिन पर ....... - आज अमृता का जन्मदिन है ...वह अमृता जिसकी आत्मा का इक-इक अक्षर हीर के ज़िस्म में मुस्कुराता है ...जिसकी इक-इक सतर हीर की तन्हा रातों में संग रही है ... ये नज़.. . पल्टुआ, भैंस और स्टीफन हाकिंग - पल्टुआ बतियाता ही रह गया खड़ा नीम की आड़ में गवने से लौटी दुक्खी काका की बेटी फुलमतिया से और भैंस चर गयी लोबिया चन्नर पांड़े के तलहवा खेत में. हमा...पोटेंशियल हरामी - मैं किसी को दुआएं-फुआएं नहीं देता, मैं गालियाँ देता हूँ, जो मुझे पैसे नहीं देता.... और उसकी गाड़ी के पीछे पीछे दौड़ता हूँ... और चिल्लाता हूँ ! खेल? ये खेल थो...मैं एक सपना देखता हूँ - *(कई दिनों से मन बेहद बेचैन था....जब सारी बेचैनी समेटने की कोशिश की तो यह सब प्रलाप दर्ज हुआ...पहला ही ड्राफ्ट आप सबसे शेयर करने को बेचैन हूँ और आपकी बेबा....

जन्नत लुटाता एक दोजख - गायत्री आर्य (जे.एन.यू. में शोधार्थी व स्वतंत्र पत्रकार ) काफी समय पहले आलोचक-लेखक विजयमोहन सिंह का एक रोचक आलेख पढ़ने को मिला था। लेकिन उस लेख में ...हर साल कटती घास की तरह कट रही हैं पहाड़ की औरतें - ठियोग , हिमाचल प्रदेश के युवा कवि *मोहन साहिल *को आप ने यहाँ पहले भी पढ़ा है. पहाड़ की औरत पर केन्द्रित कविताओं के इस क्रम मे उन की एक कविता यहाँ लगा रहा हूँ...अन्ना हजारे और पीसी बाबू!! - पिछले दिनों अन्ना के आंदोलन के बीच सारा देश अन्नामय हो गया. हम भी अपवाद नहीं थे. समयानुसार टीवी, रामलीला मैदान, मोमबत्ती मार्च और शान्ति मार्च से अपना जु...पाले उस्तादजी - नौ बजने वाले थे और मैं बार बार मोबाईल में टाईम देख रहा था। इतना लेट तो कभी नहीं होते, हारकर फ़ोन मिलाया। पूछा कि कहाँ हो तो जवाब मिला कि जनाब आज चार्टर्ड ...

मृत्यु का उत्सव------ न जन्म न मृत्यु बस इतनी सी बात है, किसी की आँख खुल गई किसी को नींद आ गई  बैठे बैठे सोचने लगा कि इन्होने ही मृत्यु के रहस्य को पाया है. जीवन अगर उत्सव है तो मृत्यु भी उत्सव होना चाहिए. जिसकी जितनी साँस थी इस दुनिया में उसने अपनी सांसे पूरी कर ली. फिर किस चीज का शोक मनाना? उसकी जीवन यात्रा का उत्सव मनाना चाहिए. जितनी चाबी भरी राम ने उतना चले खिलौना. सभी का अपना अपना दृष्टिकोण है. कोई डूबते सूरज को देख कर रोता है और कोई हँसता है. रोने वाला सोचता है कि जिंदगी का एक दिन कम हो गया. हंसने वाला सोचता है कि जिन्दगी का एक दिन और अच्छे से जी लिया, ईश्वर तुम्हे धन्यवाद है, तुम्हारा आभार है. यही मृत्यु के शोक पर प्रगट होता है. कुछ लोग सोचते हैं कि कुछ दिन जीवन का उपभोग और कर लेते. जल्दी चले गए दुनिया से. कुछ लोग सोचते हैं कि सांसारिक जीवन का उपभोग अच्छे से कर लिया. अब चला भी जाये तो कोई अफ़सोस नहीं है. साथियों को उत्सव मनाना चाहिए. ...

भ्रष्टाचार और साहित्य - *साहित्य में भ्रष्टाचार* यह बात वर्षों से सुनते आए हैं कि साहित्य समाज का दर्पण होता है पर अब जाकर यह समझ पाए कि सचमुच साहित्य समाज का आईना ही तो है। एक...यादों में 'गुदरी माई' - कारी कोसी पर बने पुराने लोहे पुल को पारकर दुर्गा पूजा में लगने वाले मेले में दाखिल होने से ठीक पहले एक पुराने बरगद पेड़ पर लाल, उजले, हरे रंग के कई कपड़े ..खांडा विवाह परम्परा (तलवार के साथ विवाह)- राजस्थान के राजपूत शासन काल में राजपूत हमेशा युद्धरत रहते थे कभी बाहरी आक्रमण तो कभी अपना अपना राज्य बढ़ाने के लिए राजाओं की आपसी लड़ाईयां|इन लड़ाइयों के च...व्यवस्था के शस्त्रागार का एक नया हथियार- आनंद स्वरूप वर्मा - जो लोग यह मानते रहे हैं और लोगों को बताते रहे हैं कि पूंजीवादी और साम्राज्यवादी लूट पर टिकी यह व्यवस्था सड़ गल चुकी है और इसे नष्ट किये बिना आम आदमी की बेह...मैकडानेल माल में मियाँ मुहम्मद आजम से मुलाक़ात - आज ईद के त्यौहार का खुशनुमा माहौल चारो ओर था ..खुशियाँ उमड़ी पड़ रही थीं ..बहुत अच्छा लग रहा था..बेटी ने भी इस खुशी को अपने तरीके से सेलिब्रेट करने के लि.....

वार्ता को देते हैं विराम, मिलते हैं ब्रेक के बाद, राम राम  मिक्षामी दुक्कड़म ...........................

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