रविवार, 22 जुलाई 2012

ये जिंदगी उसी की है, जो किसी का हो गया... ब्लॉग4वार्ता....संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार... जिंदगी को ज़िन्दादिली और भरपूर उत्साह से  जीना जरूरी है, उत्साह के  बिना जिंदगी एकदम खाली बर्तन की तरह है, यह तो आप मानते ही होंगे. चलिए, हम सब मिलकर एक बार फिर जीवन का अर्थ तलाशने की कोशिश में जुट जाते हैं और दोहराते हैं वही सनातन मंत्र — "ये जिंदगी उसी की है, जो किसी का हो गया... " किसी का होने का सच्चा अर्थ है - दूसरों के होंठों पर खुशी के गीत पिरोने की खूबसूरत सी ऐसी कोशिश, जिसका अंजाम किसी के लिए भी मुस्कुराहटों की लहलहाती फसल उगाना हो. अब वक्त आ गया है कि हम परस्पर स्नेह और भाईचारे की बोली को समझें और एक मुस्कान के बदले ढेर सारी हंसी देने को तैयार रहें. लीजिए, मैं मुस्कुरा रही हूं, अब आप भी अपनी हंसी की गठरी खोलिए न झट से... अब प्रस्तुत है, आज की ब्लॉग 4 वार्ता...

अनिश्चितता के बादल ! *तुम्हारे वादे , * *तुम्हारी कसमें !* *कितनी गहराई छुपी हैं न इनमें ? * *तुम...हारे.....! ...... तुम... हारी........ !!* *और मैं हूँ कि** * *न **उन्हें** झूठा करार पाता हूँ * *और न सच मानने को तैयार, ... भोर की पहली किरण *भोर की पहली किरण * अँधेरी रात की काली चादर को चीर भोर की पहली किरण जब धरती पर आई सारी धरती सुंदूरी रंग में रंगी नव वधु सी शरमाई शीतल मंद पवन ने छेड़ा फिर जीवन का राग सुहाना हिम शैल शिखर से फिसलती किरणें ...कैसे कोई बच सकता है कैसे कोई बच सकता है पलकों पे थमे झट से न गिरे वे दो कतरे आँसू के झरे मन भीग गया.. प्राची में जब फूल उगे हिम शिखरों पर चांदी बिखरे पिघले सोना सागर में जब अवाक् हुआ मन भीग गया..  

( rashifal ) क्‍या करें क्‍या न करें 21, 22 और 23 जुलाई 2012 को ?? मेष लग्नवालों के लिए 21 , 22 और 23 जुलाई 2012 बुद्धि ज्ञान के मामलों के लिए महत्वपूर्ण होंगे , संतान पक्ष के मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं। धन की स्थिति मजबूत होगी , इसे मजबूत बनाने के...अबला कौन ?  अबला कौन ? बचपन में एक बार मुझे याद है की हमारे पड़ोसी के पोल्ट्री फार्म में एक बिल्ली घुस गयी थी , उस बिल्ली ने रात भर में दो मुर्गियां चट कर दी और एक मुर्गी अधमरी कर दी ! सब लोगों के कहने के अनुसार मेरे...मुझे आजादी चाहिए ** *मैं अपने ही घर में कैद हूँ मुझे अपनों से ही आजादी चाहिए रोती बिलखती सर पटकती रही मैं अब मेरी आवाज को एक आवाज चाहिए जी रही हूँ कड़वे घूँट पीकर न मेरी राह में कांटे उगाइये मैं अपने ही घर में कैद हूँ  ...

खेलों और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने के परिणाम मिलना शुरू पांच वर्ष में मिले 1708 पदक साभार: खास-खबर फ़ोटो राज्य सरकार द्वारा खेलों और खिलाड़ियों को भरपूर प्रोत्साहन देने के साथ ही अधोसंरचना पर विशेषध्यान दिया जा रहा है। मध्यप्रदेश का खेल बजट 4 करोड़ से बढ़ाकर 100 करोड़ से ऊपर किया गया है...कि कुछ नहीं हो सकता रात के कई पहर बीत जाने के बाद भी अजनबी आवाज़ें, सन्नाटे को तोड़ती रहती है. उदास थकी हुई करवट, पसीने से भीगी हुयी पीठ, तसल्ली की थपकियाँ देती रेगिस्तान की सूखी हवा. सो जाओ, रात जा रही है...विक्रम और वेताल  एक बार राजा विक्रम को वेताल ने चोर और ताले की कथा सुनार्इ वेताल ने पूछा चोर कौन है? जो पकड़ा गया या वह जो पकड़ा ही नहीं गया? घर पर ताला क्यों लगाया जाये? ताला किसके लिये लगाया जाये? ताला कब लगाया जाये? ...

लकड़बग्गों का विधानलकड़बग्गों का विधान नहीं बदला है वो आज भी द्रोपदी का चीरहरण नहीं चूकते तथस्ट धर्तराष्ट्रों की संख्या बढ़ गयी है और लकड़बग्गों का जीन पूल डोमिनेंट है निपूंसकों का विधान नहीं बदला है वो... बावरी सी हो तुम... तुम तो बावरी नदी सी हो कभी तो होती हो शांत फूलों की पंखुड़ियों सी, और कभी हो जाती हो चंचल, जैसे शाम में समुद्र की लहरें... तुम तो उस पतंग जैसी हो, जो उड़ना चाहती है आसमान में और थामे हो मुझे एक डोर की तरह.... ध्येय मेरा नहीं आसान इस लोक में दुर्गम मार्ग से जाना सकरी बीथिका में कंटकों से बच पाना पर एक लक्ष्य एक ध्येय देता संबल मुझे तुझ तक पहुँचने का तुझ में रमें रहने का मन में व्याप्त आतुरता खोजती तुझे दीखता जब ...

महिलाओं की अस्मिता पर चोट हमारी पूरी सामाजिक-पारिवारिक और प्रशासनिक व्यवस्था की विफलता है गुवाहाटी में एक छात्रा के साथ सडक़ पर हुई शर्मसार करने वाली बेहूदगी भरी छेडख़ानी और बागपत में महिलाओं के लिए घर से ना निकलने का फरमान । दोनों घटनाएं एक साथ ही हुई और फिर सामने ले आईं वही ...मौत  मौत कितनी आसान होती अगर हम जिस्म के साथ दफ़न कर पाते यादों को भी.... ...................................................... मौत कुदरत का तोहफा है ये मिटा देती हैं सभी दर्द... उसके, जो मरा है... रखते हैं लोग जिल्द में दिल की किताब को कांटों से भरी शाख पर खिलते गुलाब को. हमने क़ुबूल कर लिया कैसे अज़ाब को. दिल की नदी में टूटते बनते हुबाब को. देखा नहीं किसी ने मेरे इज़्तराब को. चेहरों से झांकते नहीं जज़्बात आजकल रखते हैं लोग जिल्द में दि...

सबब ... - सच ! मर्म को, तू मर्म अब रहने भी दे उन्हें देखे बिना, चैन अब मिलता नहीं ? ... 'उदय' ये आशिकी का कौन-सा सबब है कि - वो रात में अपने, और दिन में किसी ...चांदनी रात- मैं बहुत परेशान हूँ अपने देश के हालत पर, कोई लड़ रहा भाई- भतीजा कोई जातिवाद पर | सरहद पर खून शहीदों का जैसे वारि की धारी है , हर... एक पुनर्प्रस्तुति: शिलालेखों में अक्षर नहीं होते - *ताड़ पत्रों के लेख पढ़ते और पत्थरों के गीत सुनते * *बबूल के जंगलों से घिरी थोड़ी छाँव* *कुछ भाग्यशाली शिलायें रह रह जाती हैं झाँक। * *मन में तिरस्करिणियों ... 

लगता इसकी मति गई मारी बाबाजी - नीयत हो यदि साफ़ हमारी बाबाजी नियति भी तब लगेगी प्यारी बाबाजी पुस्तक, सी डी और दवायें बेच रहे सन्त नहीं, वे हैं व्यापारी बाबाजी कोई किसी का सगा ...गुवाहाटी से मानेसर तक ....बंटाधार - पिछले पखवाड़े देश में ऐसी दो घटनाएं हुई हैं जिन्होंने एक आम हिन्दुस्तानी को शर्मसार कर दिया है ..... हथियारों की यह होड हमें कहाँ ले जायेगी - ब्रिटेन की संस्था ऑक्सफैम की रिपोर्ट के अनुसार हर साल दुनिया भर में छोटे हथियारों के लिए गोले-बारूद का चार अरब डॉलर से अधिक का कारोबार होता है. दुनिया भर... 

सैर कीजिये छत्तीसगढ के कर्ण प्रयाग की और मुझे दीजिये इजाजत मिलते हैं अगली वार्ता में तब तक के लिए नमस्कार ..........

शनिवार, 21 जुलाई 2012

बस चंद पल और यहाँ आगे रब की मर्जी...ब्लॉग4वार्ता....संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार...सुबह उठने से लेकर देर रात सोने जाने तक हमारी जिंदगी़ का एक पल भी आज ऐसा नहीं जिसमें  तकनीक की दखल न हो. किचन हो या दफ्तर, रास्ता हो या खेल का मैदान, बाजार हो या अस्पताल, यहां तक कि पृथ्वी हो या भूगर्भ या समुद्र या फिर अंतरिक्ष.. ऐसी कोई जगह ही नहीं बची जहां तकनीक की दखल न हो.  अगर कहा जाए कि आज तकनीक ही सर्वव्याप्त व सर्वशक्तिसंपन्न है तो गलत नहीं होगा.  यह बात कम से कम शहरी जीवनशैली पर तो सही ही ठहरती है. इधर सर्वज्ञता का आलम तो इंटरनेट ने ऐसा बना दिया है कि किताबें सहेजने की आदत अब बडे लोग भी छोडने लगे हैं और अगली पीढी को तो शायद बताना पडे कि हमारे जमाने में नोटबुक या किताब जैसी कोई चीज होती थी.अपनी सारी जिम्मेदारियां तकनीक के हवाले करते जा रहे हैं, और कहते हैं "ये है हमारी हाईटेक जिंदगी..." प्रस्तुत है, आज की ब्लॉग 4 वार्ता कुछ खास लिंक्स के साथ... 

देऊरपारा का कर्णेश्वर महादेव: छत्तीसगढ का कर्ण प्रयागमहानदी उद्गम  पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक खजाने से छत्तीसगढ समृद्ध है। हम छत्तीसगढ में किसी भी स्थान पर चले जाएं,वहां कुछ न कुछ प्राप्त होता है और हमारी विरासत को देख कर गर्व से भाल उन्नत हो जाता है। ...वही जहाँ तुम्हारा आना जाना है कौन से कोने में छुपाऊ सफेद कबूतरों को रह सके, सफेद और बदले नही उनकी दुनिया ऐसा मुकम्मल जहाँ कहाँ से लाऊँ भोर के होते ही घण्टालो के बीच दब जाती है सुहानी सुबह शोर के साथ दिन की शुरुआत ... याद की आँच बढ़ाने की ज़रूरत क्या है.. याद की आँच बढ़ाने की ज़रूरत क्या है... ये भीगा खत यूँ जलाने की ज़रूरत क्या है... आना जाना तो बदस्तूर लगा रहता है... फिर भला दिल को लगाने की ज़रूरत क्या है... सामने आँख के जब ख्वाब जी रहा हो कोई.... तो मुई...

चिड़िया घंटियों के ऊपर दाने की जुगत में बैठी चिड़िया। वर्षा के बाद धान के खेत में तृप्त और संतुष्ट चिड़िया। उड़ती चिड़िया को पकड़ना क्या फोटू खींचना भी मुश्किल है। हाथ हिल गया और फोटो बर्बाद हो गया। :( . इस बार झूम कर आया है....ये सावन... *ये बारिश से भीगा मौसम... और तुम्हारे प्यार से भीगा मेरा मन...... इस बार झूम कर आया है....ये सावन....... कुछ मैंने की थी ख्वाइश, कुछ बूंदों ने कि है साजिश...मेरा पद्म तुम्हें भर लेगा गिरने दो अपनी अहं - दीवारें सम्पूर्ण - समर्पण की राहों में तब मेरा पद्म तुम्हें भर लेगा मूक -मिलन के मधुर बाँहों में तुम चाहे जिस -जिस देश रहो जब -जब चाहे कोई वेश धरो पल -पल ...

नश्तर !  आज उसने मुझे एक कविता भेजी एक याद और साथ में थोड़ी सी ख़ामोशी उसका कहना है कि वो मुझे प्यार नहीं करती ! ----------------- जान लेने से पहले तुमने हर अहतियात बरता ... .बूंदों के साथ उतरता बोतलबंद जिन प्रकृति ने हमें बहुत कुछ दिया शायद उसका देना बनता था हमारा लेना बनता था उसने दिल खोल कर दिया और हमने खुले दिल से ले लिया ,पानी को भी हमने प्रकृति की वेसी ही देन समझा है और पानी है भी वैसी ही देन ... वो वाली गज़ल.. पिछले आलेख के साथ वादा था कि गज़ल पूरी सुनाऊंगा तो पढ़िये पूरी…और हाँ. मेरी आवाज में सुनना हो तो कमेंट करो..अगली पोस्ट में गा कर सुनायेंगे एक अलग अंदाज में..मगर कहो तो...

छत्तीसगढी प्रशासनिक शब्दकोश: एक टिप्पणी किसी भी भाषा के प्रशासनिक शब्दकोश का निर्माण महत्वपूर्ण कार्य है। छत्तीसगढ विधानसभा ने प्रशासनिक शब्दकोश का निर्माण का सराहनीय कार्य किया है। इसका परीक्षण, परिमार्जन एवं प्रकाशन छत्तीसगढी राजभाषा आयोग ने ....श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद (२२वीं-कड़ी)  पंचम अध्याय (कर्मसन्यास-योग - ५.१-१०) * * *अर्जुन * * * कभी कर्म सन्यास श्रेष्ठ है, कर्म योग की कभी प्रशंसा. निश्चित श्रेष्ठ कौन दोनों में, कृष्ण करो उसकी अनुशंसा. (१) *श्री भगवान * कर्म योग व कर्म सन...सागरमाथा के देश में  अपनी व्यावसायिक प्रतिबद्धता और पैर में शनिचर होने के कारण ,मुझे ना जाने कितने घाटों और तटों का पानी पीना पड़ता है . इस यायावरी ने मुझे भारतवर्ष के उत्तर में कश्मीर की हिम आच्छादित वादियों से लेकर...

मंजर बदल गए .. *जलें दीप , उत्सव मनाएं बार , * *अब तो दुआओं में, कसीना है ,* * * *थे दुश्मन के , इंतजामात कभी* *अब खुशहाली का नगीना हैं -* * * *गुल खिल रहे, ...रब की मर्जी खुली खिडकी से आती रोशनी तुम्हारे चेहरे को सहलाती है सवेरा कितना प्यारा । ये खुली हवा, ये आसमाँ , ये छन छन कर आती धूप, माँ के आंचल सी । कितना निश्छल, कोमल विश्वास भरा, प्यारा प्यारा तुम्हारा ये चेहेरा ..भ्रम, आस, विश्वास और मैं* * *भ्रम से लेकर मैं तक का सफ़र...एक तपस्या है जो करते हैं वो लोग* *जो किसी का अनचाहा रिश्ता बन जाते है....और इस अनचाहे रिश्ते में प्यार घोलने की एक कोशिश है क्यूंकि रिश्ते बनते है जुड़ने के लिए ना की टूट...

बस चंद पल और यहाँ  बस चंद पल और यहाँ बस चंद पल और यहाँ फिर डेरा डंडा समेटना होगा फूल जो उगा है मस्ती में शाम होते ही उसे झर जाना होगा कीमती हैं ये चंद पल भीतर जो भी लुटाएं जी भर सुमन बिखेर देता  सुरभि...धुआँ उठता है थोड़ी दूर पर, क्या जला होगा... धुआँ उठता है थोड़ी दूर पर, क्या जला होगा... कोई इंसान, कोई घर या फिर बचपन जला होगा... फटे आँचल को ठंडी राख का तोहफा मिला है आज... ज़मीं को गोद में इंसान रखना अब ख़ला होगा... अंधेरा आज फिर बुझते हुए चाँदों... क्योंकि मैं हूं सोनिया गांधी ... *मैं *चाहे ये करुं, मैं चाहे वो करुं मेरी मर्जी। अरे अरे आप सब तो गाना गुनगुनाने लगे। ऐसा मत कीजिए मै बहुत ही गंभीर मसले पर बात करने जा रहा हूं। मैं इस बात को मानने वाला हूं कि देश की कोई भी संवेधानिक संस...

मेरा पहाडू *न टपकौउ तौं आंसूं तै निर्भागी जुकड़ी मा चुभी जांदा घंतुलियों मा समाली खुद दुनिया कै क्यांकू दिखौन्दा लगली खुद तब ऊं तै जब ठोकर खौला कपाली खुज्लंदी तब तैमु ओला, समुण समाल्यी रखी गाड गदनियों तै सव्द्येउ ल्ग...यूँ ही...कुछ परिभाषाएँ ! - ** *1॰ पहला 'आल-इन' शाश्वत प्रेम*: *पार्वती -* जन्म कोटि लगि रगर हमारी। *बरउँ संभु न त रहउँ कुआरी*। तजउँ न नारद कर उपदेसू। आपु कहहिं सत बार महेसू। महा..( rashifal ) क्‍या करें क्‍या न करें 19 ] 20 और 21 जुलाई 2012 को ?? - मेष लग्नवालों के लिए 19 , 20 और 21 जुलाई 2012 को माता पक्ष के किसी कार्यक्रम में बाधा उपस्थित होगी , वाहन या किसी प्रकार की संपत्ति कष्‍ट का कारण बनेगी। ... 

मिलते हैं अगली वार्ता में तब तक के लिए नमस्कार ............

शुक्रवार, 20 जुलाई 2012

माई डियर पुष्पा; हेssss, .... हेssssss पुष्पा ! क्या हुआ ? ब्लॉग4वार्ता ------ ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, गिरीश पंकज जी की व्यंग्य उपन्यास प्रकाशित हो रही है। वे फ़ेसबुक पर कहते हैं -अपनी एक खुशी में आपको शामिल करने का मोह संवरण नहीं कर पा रहा हूँ. देश के बड़े हिंदी प्रकाशन संस्थान ''प्रभात प्रकाशन'', नयी दिल्ली से मेरा व्यंग्य उपन्यास ''मीडियाय नमः'' छपने वाला है. यह मेरा पाँचवाँ उपन्यास है. ''मीडियाय नमः'' किताब तो कुछ महीने बाद ही छप कर आयेगी, क्योंकि किताब छपने में समय लगता है. लेकिन आज शाम ईमेल के जरिये अनुबध पत्र आ गया है. इस उपन्यास में मीडिया के बदलते चहरे और चरित्र पर शालीन-व्यंग्य-दृष्टि डालने की कोशिश की है. 'प्रभात प्रकाशन'' जैसे संस्थान से प्रकाशित होने के कारण किताब दूर-दूर तक जायेगी, इस बात का संतोष है.…… गिरीश जी को ढेर सारी शुभकामनाएं एवं बधाई…… अब चलते हैं आज की ब्लॉग4वार्ता पर…… प्रस्तुत हैं कुछ पोस्ट लिंक्स……

बदली और बारिश...मौसमों की राह नही तकती बदली मेरी पलकों में छुप जाती है जब भी उसका मन चाहे बिन मौसम ही बरस जाती है... पानी का मोल भी नहीं जानती कई बार प्यासी रह जाती हूँ सूने सपाट जीवन को ढोते इंद्रधनुषी रंगों को त...टाइम हो गया है, पैक अपमैंने पहली बार उन्हें एक फिल्म पत्रिका में देखा, शायद फिल्मफेयर थी। उन्होंने फिल्मफेयर-माधुरी प्रतियोगिता जीती थी, वो प्रतियोगिता जिसके लिए आने वाले साल में मैंने भी अप्लाई किया और रिजेक्ट कर दिया गया। .भारत का प्रधान मंत्री कांग्रेस में चिहाड़ मची है .ये अमरीकी तो साले हैं ही बदतमीज लोग .बेचारा सीधा सादा सा आदमी है .गऊ जैसा .कोई time magazine है इन साले अमरीकियों की .सुनते है की उसने कह...

बकरी का दूधबकरी का दूध हमारे आपके लिए कोई अनोखी चीज नहीं है ,लेकिन हम इसका प्रयोग बिलकुल नहीं करते।आखिर क्यों? हमारे राष्ट्रपिता बापू जी तो रोज बकरी का दूध पीते थे . अगर हम उनकी एक यही बात मान लें तो पूरा देश अनगिनत ...मेरी शब्द यात्रा..*आंसू एक बूंद* *आंसू की एक बूंद (चित्र _गूगल .कॉम)* *बूंद याने 'कतरा'. बूंद याने गोल आकृति सा दिखाई देने वाला द्रव्य. ये बूंद खून की भी हो सकती है या फिर पानी की या शराब की भी. पर एक बूंद है जो अमूल्य ..."आज हिन्दुस्तान के सामने कोई एजेंडा नहीं है"वर्तमान समय की पत्रकारिता के एतिहासिक परिपेक्ष्य में पुण्य प्रसून वाजपेयी की प्रो.इम्तियाज अहमद से बातचीत-* पुण्य प्रसून- प्रो.साहब क्या यह माना जाए कि वर्तमान समय में जो पत्रकारिता चल रही है, वह एक शू...

चला कहाँ बलखाते लश्कर सहाब काक्यों न कहूँ इसे मौसम की साहिरी, बूटे-बूटे में सब्ज़ की सावनी छटा है | चला कहाँ बलखाते लश्कर सहाब का, ऐसे लगे किसी की जुल्फों की घटा है | झील के सीने पर रवाँ हंस का जोड़ा, शायद एक - दूसरे पर मर मिटा ह...चलो किसी रोते हुए को हंसाया जाए यह पोस्ट कल प्रकाशित होनी थी . लेकिन अकस्मात काका -- राजेश खन्ना की मृत्यु का दुखद समाचार पढ़कर , उनके सम्मान में इसे स्थगित कर दिया था .* इस रविवार से हास्य का हमारा पसंदीदा कार्यक्रम आरंभ हुआ .हालाँकि ...27 अगस्त को होगा ब्लॉग संसार का फिर से धमालजी हाँ, गालिब की नगरी दिल्ली के बाद अब तहजीब की नगरी लखनऊ म...धुआँ उठता है थोड़ी दूर पर, क्या जला होगा...धुआँ उठता है थोड़ी दूर पर, क्या जला होगा... कोई इंसान, कोई घर या फिर बचपन जला होगा... फटे आँचल को ठंडी राख का तोहफा मिला है आज... ज़मीं को गोद में इंसान रखना अब ख़ला होगा... अंधेरा आज फिर बुझते हुए चाँदों...

हां! मैं बहुत शर्मीली हूंकिसे पता था कि आर्मी ज्वॉइन करने निकली एक लड़की बॉलीवुड पहुंचकर अभिनय की दुनिया में झंडा गाड़ेगी! इसे किस्मत कहें, करिश्मा या कर्म... जो भी है लेकिन माही गिल अभिनय की जंग में सशक्त सिपहसालार बनकर उभरी ह...डूब मरो समाज और कानून के ठेकेदारो....आईये “कपड़ा-फाड़”, फाइट में सब नंगे हो लें!**एक शिकार, कई शिकारी*संजीव चौहान अंधा बांटे रेवड़ी, बार-बार अपने को दे। कहावत सबने सुनी है। उस्ताद का जितना बड़ा या खास चेला होगा, उस्ताद अंधा होने के बाद भी,...अगस्‍त्‍य मुनि और दादाजीअगस्‍त्‍य मुनि.....अगस्‍त्‍य मुनि बुदबुदाने लगते थे वो बूढ़े होंठ जब भी आकाश में बादलों की गर्जन होती... बि‍जली और बरसात का संगम जब भी होता ओसारे पर एक बोरसी बिन कहे ही दादी सुलगा देती थी एक मोटी लोई ओढ़क...

आई हेट टेअर्स पुष्पा   माई डियर पुष्पा ; हे, .... हे पुष्पा ! क्या हुआ ? फिर तुम्हारी आँखे गीली ? ...... तुम्हे कितनी बार कहा है कि मुझसे तुम्हारे ये आंसू नहीं देखे जाते.........आई हेट टेअर्स पुष्पा... आई हेट टेअर्स ! दिल..  पुतलियां  कहां का रास्‍ता पूछते हैं कहां जा रहे हैं मल्‍हार अब वहां खामोश हें सारे राग कोई नहीं छेड़ता तान न कोई लेता आलाप कुछ मूर्तियां हैं खड़ी रहती हैं चुपचाप पुरातत्‍व के चौकीदार की नजर बचाकर ऊंघती हैं या...  मेरे हर गीत में प्रिय! तेरा अनुराग समाया है  सूरज चाँद सितारों में तुम्हे पाया है!! जिंदगी के हर रंग में तेरा ही साया है!! जिंदगी का हर रंग तुम ही हो मेरे प्रिय!! जिंदगी का हर रिश्ता तुम्ही में पाया है!! मैं धरती हूँ जीवन की ऐसा मैंने माना है अपना ज... 

उन्हें सिर्फ सत्ता चाहिएशायद ही कोई दिन ऐसा जाता हो जिस दिन देश के समाचार पत्रों और न्यूज चैनलों में किसी न किसी स्त्री के साथ दुर्व्यवहार का समाचार प्रकाशित न होता हो। घरों, कार्यस्थलों, विद्यालयों, रेलों, बसों, मनोरंजन स्थल...इग्नोर करनाइग्नोर करना भी अच्छा होता है... कभी न कभी इससे .. मैं भी सीख जाउंगी तुम्हारे प्रति उदासीन होना . तुम्हारा मुझे इग्नोर करना मुझे सिखा देगा कि कैसे तुमसे नफरत और प्यार किये बगैर ज़िंदा रहा जा सकता है . ..गीदड़ों वाला तालाबरामगढ़ सेठान" शेखावाटी का महत्तवपूर्ण व प्रमुख क़स्बा है यह क़स्बा बनियों (सेठों) द्वारा बसाया हुआ है, हालाँकि राजस्थान में एक कहावत प्रचलित है कि- "गांव बसावै बाणियो, पार पड़े जद जाणियौ" अब ये कहावत कब और क...

तुम्हारे बादतुम थी तो ये मकान भी एक घर था. तुम थी तो मैं भी था, अब ना जाने मेरा ‘मैं’ कहाँ खो गया है. तुम थी तो ये वाटिका गुलजार थी, अमलतास, गुलमोहर और गुलबहार एक साथ खिले रहते थे, इस सदाबहार को जैसे तुषार ने जला ड...क्यों झाँकना नज़र में ये, नक़ाब जैसा है...मिला जब वो प्यार से, तो गुलाब जैसा है आँखों में जब उतर गया, शराब जैसा है खामोशियाँ उसकी मगर, हसीन लग गईं  कहने पे जब वो आया तो, अज़ाब जैसा है करके नज़ारा चाँद का, वो ख़ुश बहुत हुआ  ख़बर उसे कहाँ...ट्रेन से भारत परिक्रमाइस पूरी यात्रा की सभी ट्रेनों का टाइमटेबल देखने के लिये यहां क्लिक करें। इस बार बडा ही धाकड प्रोग्राम बनाया है। अक्सर मेरी सोच ज्यादा लम्बी नहीं चलती, बस एक महीने आगे की ही सोच सकता हूं। जून का महीना जब चल ...

वार्ता को देते हैं विराम, मिलते हैं ब्रेक के बाद राम राम्…………

गुरुवार, 19 जुलाई 2012

होनी पे किसका बस चला है बाबू मोसाय, अलविदा,अलविदा ----- ब्लॉग4वार्ता ----- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, सावन का महीना फ़िल्म कलाकारों के लिए भारी पड़ रहा है। पहले दारा सिंग चले गए और अब सदाबहार हीरो राजेश खन्ना जी। फ़ेसबुक पर संजय महापात्र ने राजेश खन्ना को श्रद्धांजलि देते हुए कहा - बाबू मोसाय , हम सब रंग मंच की कठपुतलियाँ है और सबकी डोर उपर वाले के हाथ में हैं । होनी पे किसका बस चला है बाबू मोसाय , अलविदा पर तुम्हे भूल नहीं पायेंगे । ईश्वर तुम्हे शांति दे बाबू मोसाय :(……… हम भी राजेश खन्ना को विन्रम श्रद्धाजंलि देते हैं। आज छत्तीसगढ का प्रमुख त्यौहार "हरेली तिहार" है। सभी को हरेली तिहार की हार्दिक शुभकामनाएं। अब प्रस्तुत है आज की वार्ता………

मुझसे ये आसू नहीं देखे जाते, आई हेट टीयर्सबाबू मोशाय, हम सब तो रंगमंच की कठपुतलिया हैं ... जिसकी डोर उस ऊपर वाले के हाथों में है जहाँपनाह , कब कौन कहाँ कैसे उठेगा ये कोई नहीं जानता ... हा हा हा ....बेटियों को पटने दो गांव वालोदेखिये साहब इस तरक्की शुदा इंडिया के उपर ये पिछड़ी सोच के गांव वाले किसी कलंक से कम नही। आदर्श इंडिया की राह में हिंदुस्तान रोड़े अटका रहा है। अचानक इंडिया कैसा हो यह नजारा मेरी आंखो के सामने तैर गया। चार ...एक मंज़र  उफक के दरीचों से किरणों ने झाँका फ़ज़ा तन गयी रास्ते मुस्कुराए सिमटने लगी नर्म कोहरे की चादर जवाँ शाखसारों ने घूँघट उठाये परिंदों की आवाज़ से खेत चौंके पुर असरार लय में रहट गुनगुनाये हंसी शबनम आलूद ...

‘कुल’ का ‘खेल’म नुष्य शुरू से ही समूह में रहने का आदी रहा है । मानव समूह ही *‘समाज’*कहलाता है । मानव के घुमक्कड़ समूहों से शुरुआती समाजों की रचना हुई । समाज शब्द में ही यायावरी है । हिन्दी का समाज बना है...मणिकर्ण, एक पवित्र तीर्थ-स्थलमणिकर्ण, हिमाचल मे पार्वती नदी की घाटी मे बसा एक पवित्र तीर्थ-स्थल है। हिन्दु तथा सिक्ख समुदाय का पावन तीर्थ, जो कुल्लू से 35 कीमी दूर समुंद्र तट से 1650 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां आराम से बस या टै.क्योंकि मैं हूं सोनिया गांधी ...मैं *चाहे ये करुं, मैं चाहे वो करुं मेरी मर्जी। अरे अरे आप सब तो गाना गुनगुनाने लगे। ऐसा मत कीजिए मै बहुत ही गंभीर मसले पर बात करने जा रहा हूं। मैं इस बात को मानने वाला हूं कि देश की कोई भी संवेधानिक संस...

पेज नेविगेशन में अगली-पिछली पोस्ट का शीर्षक दिखायेंब्लॉगर में डिफ़ाल्ट सेटिंग के अंतर्गत जब आप पोस्ट पढ़ते हैं तो अगली पोस्ट पर जाने के लिए अगली पोस्ट और पिछली पोस्ट पर जाने के लिए पिछली पोस्ट पर क्लिक करके जाते हैं यदि ऐसा हो कि अगली और पिछली पोस्ट की जगह प...जो लोग हँसते हैं , वे अपना तनाव हटाते हैंइस रविवार से हास्य का हमारा पसंदीदा कार्यक्रम आरंभ हुआ .हालाँकि इसे घर में बस हम ही देखते हैं . लेकिन पहले दिन की ओपनिंग देखकर निराशा हुई . सबसे कमज़ोर कड़ी तो लगी -- एंकर . कहाँ पहले वाली परिज़ाद और कहाँ...'समय' होत कमजोरसमय सुना था हर दूरियाँ पाट देता है बहुत बलवान होता है पाया ठीक उल्टा, सुना था हर ज़ख्म भर देता है ... मैं जब भी ऐसा सोंचता हूँ मुस्करा पड़ता हूँ मैं खुश हूँ कि ऐसा नहीं कर पाया वो और इसीलिये मैंने ...

जड़ से चेतन की ओर जग त्यक्त कर ही .... तुममें अनुरक्त हुई ... तुम्हारी छब हृदय में रख .. स्वयं से भी प्रेम में .. आसक्त हुई ...... प्रेम का वर्चस्व ... है तुममे ही सर्वस्व ..... प्रसन्नता से चहकती ... अल्हड़ सी ..खि...'गटारी' सेलिब्रेशनगटारी फेस्टिवल नजदीक है, शराबी प्राणी अपनी-अपनी सेटिंग में लगे हैं , प्लान बना रहे हैं कि इस बार की गटारी कहां हो, किसका घर खाली है, किसके छत पर महफिल जमाई जा सकती है, कहां से सस्ती पेटी मिल सकती है.....अधमुंदी पलकों में मुट्ठी भर ख्वाब ज़रूरी हैसागर की वंशज की आँखों में ख्वाब भागीरथ की गंगा बन धरती पर आया पंछियों से उड़ने का ख्वाब राईट बंधुओं की हकीकत बन आया चाँद को पा लेने का ख्वाब पला कितनी आँखों में मानव चाँद पर भी हो आया इन बड़े- बड़े ख...

बस्तर पर टीका-टिप्पणीएकबारगी लगा कि यह मार्च महीने में लक्ष्य प्राप्त कर लेने की आपाधापी तो नहीं, जब वित्‍तीय वर्ष 2012 की समाप्ति के डेढ़ महीने में बस्तर पर चार किताबें आ गईं। 15 फरवरी को विमोचित राजीव रंजन प्रसाद की 'आमचो बस...बगल में छोरा याने इस उम्र में सीखनाकल का सवेरा वल्कल के फोन से हुआ। मेरी, कलवाली पोस्ट पढ़ते ही उसने फोन किया था। बोला - ‘‘पापा! फोन में आप ‘गेलेरी’ में जाकर, अपना मनपसन्द फोटो छाँटकर, जरा ध्यान से, फोन पर, फोटू के आसपास देखना। आप फोटो क...लौ-ए-उम्मीदवो कौफ-ऐ-सज़ा में बांधते रहें हैं तुझे,* *तू माफ़ी की खुली हवाओं में मिलता रहा है मुझे* a * * * * *तेरे नाम के कई ठेकेदार हैं, ऊँची इमारतों में रहते हैं,* *तू सर्दी में ठिठरती रूहों में मिलता रहा है मुझे*...

शssssssss डरना मना है जादू-टोना-*टोनही* शब्द ही भय उत्पन्न करने के लिए काफ़ी होता है। बचपन से सुनते आए हैं कि* तंत्र-मंत्र *से प्राप्त शक्ति द्वारा किसी का भी अहित किया जा सकता है। अहित करने वाला *टोनहा-टोनही* कहलाता है। इन *त... ख्वाब क्यों ??? आप सभी को *सदा *का नमस्‍कार .... इस रविवार यदि आप *फिल्‍म देखने से चूक गये हों *तो आज की हलचल में आपको एक साथ मिलेंगी दो फिल्‍मों की समीक्षा ... बेहतर कौन ? ये तो आपको ही बताना होगा ... तो चलें *आज के लि... उर्वशी, एक परिक्रमा उर्वशी पुस्तक दस वर्ष पहले खरीदी थी, बिलासपुर में, किताबघर से। प्रतीक्षित पुस्तकों की सूची में पड़ी रही वह, दस वर्षों तक। बक्सों में भरकर न जाने कितने स्थानान्तरण झेले, उतने ही घरों की मुख्य अल्मारियों मे...

1989 की कवितायें - कबाड़घर के सामने से जब भी कोई रद्दीवाला या कबाड़ी गुजरता है ,आवाज़ देता हुआ ..लोहा, टीना ..प्लास्टिक .. रद्दी पेपर .. तो मुझे लगता है काश कोई कबाड़ी ऐसा भी होता जो इस पुरानी सड़ी - गली व्यवस्था को ले लेता और बद...संख्या का महत्वहमारे जीवन और इस दृश्यमान प्रकृति में संख्याओं का बहुत महत्व है . संख्या के इस चक्कर से कोई भी अछूता नहीं . सृष्टि के प्रारंभ से आज तक हम जो कुछ भी सहेज पाए हैं उसमें सख्या की भूमिका को किसी भी सूरत में न...बचपन छूटता नहीं मुझसे...बहुत लुभाते हैं आइसक्रीम पे लगी लाल हरी चेरी के टुकड़े की सारे रंग मेरे बचपन के सिमट गए हैं इन चंद टुकड़ों में बुढ़िया के गुलाबी बाल लिपटे हुए हैं आज भी उँगलियों पे लार मीठी ह़ो गयी साईकिल पे रखे बर्तन म...

प्राकृतिक संसाधनों का नियंत्रित दोहन जरूरी हैआज समाचार पत्र में दो ख़बरें पढ़ीं .दोनों ही ख़बरें अगर सोचा जाये तो बहुत गंभीर चेतावनी देती हैं नहीं तो सिर्फ ख़बरें हैं. पहली खबर है नॅशनल जियोग्राफिक सोसायटी के एक सर्वे के बारे में है जो बताती है कि ह...अस्तित्वअस्तित्व * मैं स्वयं में '' मैं '' को तलाश रही थी पर मेरा '' मैं '' कब का हम बन चुका था जुड़ चुका था रिश्तों की डोर से बंध चुका था अपनों की ओर से निकलने की तड़प बार-बार उठती फिर दबी रह जाती अपनों क... जीवन के मोड़ , डिफरेंशियल और परिवारसाइकिल के आगे पीछे के दोनों पहिये एक सीध में होने के कारण उसे मोड़ पर घुमाने पर कोई समस्या नहीं होती | परन्तु चार पहिये के किसी भी वाहन को जब सीधी दिशा में चलाना हो तब तो सभी पहियों की गति एक समान होती ...

वार्ता को देते हैं विराम, मिलते हैं ब्रेक के बाद ……… राम राम

बुधवार, 18 जुलाई 2012

निगलने से पहले देख ख़ून से हैं तर-ब-तर रोटियां...ब्लॉग4वार्ता....संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार...एक बार फिर महंगाई आंकड़ों में घट गई है. घटी दर 7 .55  से 7.25  पर आ गई है. अब सवाल यह उठता है कि आंकड़ों में घटी इस दर का असर बाज़ार में कब दिखेगा?  उधर सनातनकाल से भारत कि जीवनदायिनी रही गंगा मैया का जीवन संकट में आ गया है. उद्गम स्थल गोमुख से गंगा कि धारा का बंद हो जाना प्रकृति की नाराजगी का संकेत है, एक अनिष्टकारी कुदरती संकट, गंभीरता से सोचने और उसपर अमल करने का वक़्त आ गया है, वर्ना प्रकृति के कहर से बचना नामुमकिन हो जायेगा... अब चलते हैं ब्लॉग 4  वार्ता पर कुछ चुनिन्दा लिंक्स के साथ... 
खुश्क आँखें अब नम नहीं होतीं मेरी आँखें ज़िंदगी की तपिश ने कर दिया है खुश्क उनको अब तो जब भी झपकती हूँ पलक तो होता है बस एक एहसास चुभन का । ( आँखों में कुछ दिनों से जलन का एहसास हो रहा था ...कैसे होगा ये प्यार प्रिये ? नया बसाएं अपना संसार प्रिये करे प्रेम प्रीत और प्यार प्रिये तुम चिड़िया सी चहक जाना मै भवरे सा गुनगुनाऊंगा तुम चांदनी को आँचल देना मै सूरज की किरने लाऊंगा महक जाएगा घर बार प्रिये करे .. तुम मेरे हो के भी मेरे न हुए *तुम मेरे हो के भी मेरे न हुए* *हम तो बरसों-बरस अन्धेरे में रहे * * * *साथ चलते हुए यूँ भी अक्सर* *अजनबी भी बन जाते अपने * *ये कैसे सफ़र पे हम तुम* *दिन रात के फेरे से रहे * *तुम मेरे हो के भी मेरे न हुए *...

गलतियाँ नयी हों अथवा.. जब से सुनना और सुने हुए को समझना आया , एक बात अक्सर सुनी कि " इंसान गलतियों का पुतला है " ...... अब तो सुनते-सुनते अभ्यासवश इस उक्ति को स्वीकार भी कर लिया है ! अब बस एक बहुत छोटी सी चाहत अक्सर .. जिंदगी सिगरेट का धुंवा ... .मुझे याद है धुंवे के छल्ले फूंक मार के तोड़ना तुम्हें अच्छा लगता था लंबी होती राख झटकना बुझी सिगरेट उंगलियों में दबा लंबे कश भरना फिर खांसने का बहाना और देर तक हंसना कितनी भोली लगतीं थीं ...ख्वाब क्यूँ?……………एक प्रश्नचिन्ह ? ख्वाब क्यूँ? एक प्रश्नचिन्ह ? बात तो सही है क्यूँ देखें ख्वाब? क्या जरूरी है ख्वाब पूरे हों ही मगर फिर भी ख्वाब तो देखे जाते हैं शायद उन्ही के सहारे ज़िन्दगी गुजार जाते हैं आधी अधूरी सी अधखिली सी ज़िन्दगी...

प्राकृतिक संसाधनों का नियंत्रित दोहन जरूरी है. आज समाचार पत्र में दो ख़बरें पढ़ीं .दोनों ही ख़बरें अगर सोचा जाये तो बहुत गंभीर चेतावनी देती हैं नहीं तो सिर्फ ख़बरें हैं. पहली खबर है नॅशनल जियोग्राफिक सोसायटी के एक सर्वे के बारे में है जो बताती है कि...ख़ून से हैं तर-ब-तर अनेक रोटियां ! यार ! निगलने से पहले देख रोटियां ! ख़ून से हैं तर-ब-तर अनेक रोटियां ! बस्तियां हिंदू-मुसलमां , जिसकी भी जलें आग कैसी भी कहीं हो ; सेंक रोटियां ! पाप पुण्य में बदलले ! झूठ सच बना ! चमचमाती-खनखनाती फेंक ... रोटी की कहानी रोटी के लिए तडफते नंगे बच्चे की तस्वीर लाखो में बिक गई ....?? रोटी की कहानी .. *************************** तुम जरा भी अचरज न करना सुनकर एक सच्ची कहानी ... 

आई देश में आंधियाँ.... अब डराने लग गई परछाइयाँ दूर होती जा रही अच्छाइयाँ , लोग कीचड फेकने आते सामने मौन होती है सब किलकारियाँ, तोड़कर दर्पण जो बगलें झांकते बिन बुलाये आती है कठनाइयाँ, दोस्ती के नाम पर जब विष घुले नष्ट हो जाती ... .........आज कुछ बातें कर लें .इस नाटक में ऐसे कई प्रसंग उन गहन अंतर्सत्यों को उद्घटित करते हैं जो रावण के प्रति अब तक की हमारी मान्यताओं और धारणाओं पर प्रश्न चिन्ह लगा, सुधि दर्शकों एवं पाठकों को एक पुनर्विश्लेषण क... .रह गई हो कोई बात दो बेवजह की बातें जो पड़ी रह गई ड्राफ्ट में जैसे किसी को कहते कहते रह गई हो कोई बात दूसरे पैग के बाद खरगोश ने कहा मुझे नहीं मालूम कि तनहा क्यों हूँ. ये भी नहीं पता कि किसी को चाहने से कोई किस तरह ह...

ये इशारे हैं उसी के .ये इशारे हैं उसी के वह जो धुन गहरे तक उतर जाती है कूक कोकिल की रह-रह के सताती है ये जो रातों को झांकते हैं तारे चाँदनी झरोखे से बिछौने पे बिछ जाती है और... झीलों में जो खिलते हैं कमल तिरें फूल... .ये खुदा तू मिला दे.... .*दो छोटी कविता है कुछ पंक्तियों की * *दर्द एक ही है बस शब्द भिन्न है.* *आप ही बताएं की बेहतर कौन सा है ?* *(१)* *काश ये * *ज़ालिम जुदाई ना होती,* *रब तुने दिल * *चीज बनाई ना होती,* *ना हम उनसे * *मिलते ना म..“तुमने क्या क्या है?” इस अजीब सी दिल की पुकार से मैने जो तुम्हारे अतीत को परछाईं की तरह बदल कर सोचा था की तुम सदा हमारे प्यार की निशब्द मिठास को जीवन मे उतार इन जज्बातो को बदल भाव के संगीत मे मंगल यापन करोगी। तुमने हमारे उन्माद....

समग्र गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष ... ज्‍योतिष के बारे में जन सामान्‍य की उत्‍सुकता आरंभ से ही रही है , गणित ज्‍योतिष के क्षेत्र में हमारे ज्‍योतिषियों द्वारा की जाने वाली काल गणना बहुत सटीक है। पर इसके फलित के वास्‍तविक स्‍वरूप के बारे में लो... कुछ बूंदे उम्‍मीद की !!!  कुछ बूंदे उम्‍मीद की बरसी हैं बादलों से झगड़कर आईं हैं धरती पर प्‍यास बुझाने उसकी मिलकर माटी से हो गई हैं माटी सोंधेपन की खुश्‍बु जब लिपट गई गई झूम के बयार से सावन ने हथेली में लिया प्‍यार से उम्‍मीद ...प्यासा मन  प्यासी धरती प्यासा सावन प्यासा पपीहे का तन मन घिर आई काली बदरिया पर वह न आए आज तक आगमन काली घटाओं का नन्हीं जल की बूंदों का हरना चाहता ताप तन मन का पर यह हो नहीं पाता अब है हरियाली ही हरियाली जहाँ ...

ज़ख्मये कौन डूब गया और उभर गया मुझमें  ये कौन साये की सूरत गुज़र गया मुझमें, ये किसके सोग में शोरीदा हाल फिरता हूँ  वो कौन शख्स था ऐसा कि मर गया मुझमें, अजब हवा-ए-बहारां ने चारासाज़ी की वो ज़ख्म जो ..गहूँ - गहूँ पीली - पीली उगूँ - उगूँ सीली - सीली बहूँ - बहूँ चली - चली रुकूँ - रुकूँ कली - कली फिरूँ - फिरूँ मिली - मिली कहूँ - कहूँ खिली -खिली दिखूँ - दिखूँ घड़ी - घड़ी पगूँ -... हरियाली अमावस: टोनही मंत्र शोधने का दिन धरती हरियाली से मस्त सावन का महीना प्रारंभ होते ही चारों तरफ़ हरियाली छा जाती है। नदी-नाले प्रवाहमान हो जाते हैं तो मेंढकों के टर्राने के लिए डबरा-खोचका भर ...
 
मिलते हैं अगली वार्ता में तब तक के लिए नमस्कार ............

मंगलवार, 17 जुलाई 2012

धत् तेरे साहित्य की,हम ब्लोगर हूँ -------- ब्लॉग4वार्ता -------- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, कुछ राज्यों में स्थायीय बोली को राजभाषा का दर्जा एवं संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित करने की मांग चल रही है। लेकिन केन्द्र सरकार के कानों में जूँ तक नहीं रेंग रही। राजस्थान में राजस्थानी बोली को राज-काज की भाषा बनाने की मांग भी अर्से  से  चल रही है,लेकिन इस मांग की ओर राज्य सरकार कोई ध्यान  नहीं है। स्थानीय भाषा को राज-काज की भाषा बनाने की दौड़ में छत्तीसगढ बहुत आगे निकल चुका है। इस प्रयास में एक और अध्याय तब जुड़ गया आज जब विधान सभा के सभाग़ृह में मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक शब्दावली का विमोचन किया। अब छत्तीसगढ की विधान सभा में स्थानीय भाषा में भी प्रश्न किए जा सकते हैं और जवाब भी पाया जा सकता है। राज्य के कार्यालयों में छत्तीसगढी में आवेदन पत्र दिए जा सकते हैं। राज्य सरकार छत्तीसगढी को राज भाषा का दर्जा पहले ही दे चुकी  है। आज इस कार्यक्रम के हम भी साक्षी बने। यह कदम छत्तीसगढी भाषा को केन्द्र की आठवी अनुसूची में दर्ज कराने के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा……… अब चलते हैं आज की वार्ता पर, प्रस्तुत हैं कुछ पोस्ट लिंक्स………

फ़लसफ़ा-ए-ज़िंदगीहोश-ए-ज़िंदगी,यूं सरक गई--- ढूंढते हुए-फ़कत,इस पल के वज़ूद को और वो भी,मुठ्ठी से सरक गया यूं, बे आवाज----- २.किताबे-ज़िंदगी------ वर्क-दर-वर्क, रोज़ पढती हूं अगली सुबह,पहला वर्क ही, पलटती हूं------ ३...क्या सचमुच महान था सिकंदर महान ?सिकंदर एक महान विजेता था- ग्रीस के प्रभाव से लिखी गई पश्चिम के इतिहास की किताबों में यही बताया जाता है। मगर ईरानी इतिहास के नजरिए से देखा जाए तो ये छवि कुछ अलग ही दिखती है। प्राचीन ईरानी अकेमेनिड साम्राज्...बता दो कोई ठौरदेव भूमि ,* *आर्यावर्त ,* *देवता वास करते हैं ,* *अर्थतः* *उपासना स्वरूपा,* *सर्वशक्तिसमन्विता ,* *आर्या,यहाँ पूजी जाती हैं ...../* *वस्तुतः * *दैन्यता में .....* *आशा ,शक्ति, वीरांगना शत्रु -मर्दिन...

आस्था से खिलवाड़ " कहीं पर कुछ भी हम लोग मंदिरों का महत्व समझते है ! यह वह स्थान होता है जहाँ हम लोग अकेले या समूह में भगवान् या अपने इष्ट देव का पूजन करते हैं ! एक आदर्श मंदिर की विशेषता होती ...रंगमंच.करती हूँ अभिनय आती हूँ रंगमंच पर प्रतिदिन भूमिका पूरी नहीं होती हर बार ओढ़ती हूँ नया चरित्र सजाती, संवारती हूँ गढ़ती हूँ खुद को रम जाती हूँ रज कर कि खो जाये "मुझमे" "मैं" कहीं.... अब तो हो गई है आदत किरदा...उल्लसित धूपतम के गहन बादलों के बीच आज निकली है हल्की सी उल्लसित धूप और मैंने अपनी सारी ख्वाहिशें डाल दी हैं मन की अलगनी पर इन सीली सीली सी ख़्वाहिशों को कुछ हवा लगे और कुछ धूप और सीलन की महक हो सके ...

मानसून  मोसम बड़ा बेईमान है ये भी आजकल नेताओ की दुकान है आम आदमी की कही टूटी कही फूटी एक दुकान है ....आज मोसम मानसून आया है ये सरकार की शान है एक दिन से दस दिन का ही तो ये मेहमान है बंगाल में आया बम्बई में आया असाम...  देसी -विदेसी "कॉकटेल ".. हमारे पास रविवार शाम गुजारने के लिए दो विकल्प थे. एक बोल बच्चन और एक > कॉकटेल .अब बोल बच्चन के काफी रिव्यू पढने के बाद भी हॉल पर जाकर जेब खाली > करने की हिम्मत ना जाने क्यों नहीं हुई तो कॉकटेल पर ही... क्या कहिए एइसन लोगन को  ऐसा क्यूं होता है कि समाज के निचले तबके से उठ कर उपर पहुंचने वाला भी यहां आकर अपने खास हो जाने के एहसास में ऐसा जकड जाता है कि फिर उसे किसी आम से कोई लगाव ही नहीं रह जाता। * अभी एक खबर पढने को मिली कि ... 

अंततः  हो जाना है अंत सभी आयुधो का सभी बमवर्षक विमान धराशायी हो जायेंगे बंदूकों की नालियां हो जाएँगी बंद फौजों के बूटों के तलवो में लगी गिट्टियाँ घिस जाएँगी और तोपों के गोले हो जायेंगे फुस्स अंतर की दीव..  काश...  जीवेम शरदः शतम" किसकी तमन्ना है? ..मेरी तो क़तई नहीं! काश मैं तितली होती, भोर की किरण में पैदा. दिन भर उड़ती आज़ाद, खुली हवाओं में ताज़ी. रंग-बिरंगे फूलों से खेलती, छेड़ती, रस उनका पीती. गाँव की होती त...  आखिर कुछ पुरुषों/लड़कों के अंदर ही एक जानवर क्यूँ निवास करता है  गुवाहाटी में जो कुछ भी उस शाम एक बच्ची के साथ हुआ...ऐसी घटनाएं साल दो साल में हमारे महान देश के किसी शहर के किसी सड़क पर घटती ही रहती हैं. बड़े जोरो का उबाल आता है...अखबार..टी.वी...फेसबुक..ब्लॉग पर बड़े ती... 

जिंदगी कुछ इस तरह भी ..  रेल का एक सफर ....जो बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर देता हैं ......सफर तय हैं ..और मंजिल भी ...पर राह में मिलने वाले लोग अनजान ही रहते हैं हमेशा ....सोच का क्या हैं ...कुछ भी देखो ...वो दिमाग में घूमती हैं ....  हम ब्लोगर हूँ.  ब्लोगर बनना आज कल का नया-नया फैशन हो गया है । अगर जे कौनो काम नहीं है आपके पास, तो कौनो  'चींते की बात नहीं', ब्लॉग्गिंग ऐसा परमानेंट काम है, जिसमें रिटायरमेंट का भी चान्स नहीं है,  बस दायें-बायें दो-चार महा...  धत् तेरे साहित्य की  पेंटिंगः मोरन डेनन आप जिसके प्रति जवाबदेह हैं उसी को बताएं, लेकिन बताएं *-रंजीत वर्मा* गुंटर ग्रास की कविता ’’जो कहा जाना चाहिए’’ जब हिंदी में अनुदित होकर आई, तो इसने अपनी तरह से एक बहस खड़ी की। इस कविता के... 

रोग-राई हरे बर हरेली खेती किसानी अउ बनि-भूति म रमे लोगन बर तिज-तिहार एक ठीन खुशी के ओढऱ भर नोहय बल्कि अइसन परब अउ रित रिवाज ह समाज म कोनो न कोनो किसम के संदेसा लानथे। मेहनत मजूरी म लगे लोगन ल वइसे बाहिर के दुनियां ले काहीं ले... प्यारे दलितो, टायलेट साफ़ कर दो न प्लीज साहब अमूमन हमारा मुंह काला होता नही। कारण कि यह शर्म की तरह है, आये तो ठीक, न आये तो ठीक। लेकिन आमिर खान के दलित समस्या के उपर किये कार्यक्रम में जो नंगी सच्चाई सामने आई। उससे मैं नही समझता कि मुंह काला हो... स्वाध्याय एवं चिंतन मनन से सब कुछ संभव है .... स्वाध्याय एवं चिंतन मनन की महत्ता का प्रतिपादन भारतीय ग्रंथों में विस्तारपूर्वक किया गया है . मनुस्मृति ३/७५ में स्पष्ट उल्लेख किया गया है " *स्वाध्याये नित्ययुक्त: स्यात* " इसका अर्थ है स्वाध्याय में नित्...

बढ़िया व्यवसाय  इन्टरनेट पर किये जाने वाले व्यवसायों में मेट्रिमोनियल वेब साईट चलाना बहुत बढ़िया व्यवसाय है| जिसका उदाहरण शादी.कॉम, भारत मेट्रीमोनी आदि वेब साईटस् से देखा जा सकता है| आजकल भागदौड़ भरी व्यस्त जिंदगी में लो... सावन में सवनाही तिहार  सवनाही देवी का स्थान गाँव के सियार में रथयात्रा के बाद सावन माह से छत्तीसगढ अंचल में त्यौहारों की झड़ी लग जाती है। छत्तीसगढ के लगभग सभी त्यौहार कृषि कर्म से जुड़े हुए हैं। सावन के महीने में वर्तमान में कांवर...  हरियाली अमावस: टोनही मंत्र शोधने का दिन  धरती हरियाली से मस्त सावन का महीना प्रारंभ होते ही चारों तरफ़ हरियाली छा जाती है। नदी-नाले प्रवाहमान हो जाते हैं तो मेंढकों के टर्राने के लिए डबरा-खोचका भर जाते हैं। जहाँ तक नजर जाए वहाँ तक हरियाली रहती है.. 

वार्ता को देते हैं विराम, मिलते हैं ब्रेक के बाद………राम राम

बाज़ार पॉर्न बेचता है क्योंकि लोग खरीदते हैं सांप से बतियाते हैं अवध भाई ...

आज आपका परिचय हम कराते हैं सिद्धार्थ जी से जो एक अच्छे एष्ट्रोलाज़र है उन्हीं के शब्दों में
"ज्‍येातिष की दुनिया में वर्ष 1997 से हूं। लेकिन कह सकता हूं कि पैदाइशी ज्‍योतिषी हूं। जोशी कभी जाति नहीं होती। भविष्‍य कथन करने वाले पुरोहितों को ज्‍योतिषी की उपाधि मिलती है। जोशी उसी का अपभ्रंश है। हो सकता 


है मेरे पूर्वजों ने कभी ज्‍योतिष का काम किया हो, लेकिन मेरे दादा महज एक चाय की दुकान करते थे और पिताजी 


चिकित्‍सक थे। दादाजी ने कभी पढ़ाई लिखाई में दिमाग नहीं लगाया लेकिन पिताजी न केवल आयुर्विज्ञान का 


अध्‍ययन किया बल्कि ज्‍योतिष में भी खासी रुचि रखी। जब मैं महज डेढ़ साल का था तब पिताजी का सड़क दुर्घटना 


में निधन हो गया था। उनकी डायरियों में कुण्‍डलियां बनी देखी तो समझता नहीं था कि ऐसे खाने क्‍यों बना रखे हैं। 


पहले सोचता था कोई टाइम मैनेजमेंट की ट्रिक होगी। कब ज्‍योतिष के करीब गया और कब इसे विषय के रूप में 


अध्‍ययन करने लगा पता ही नहीं चला। शुरूआत में यह चोरी छिपे था, लेकिन जिन लोगों के फलादेश सटीक पड़े 


उन्‍होंने घर में आकर राज खोल दिया। बाद में साइंस के पैरोकारों की कुण्‍डलियां भी देखी। एक समय ऐसा भी आया 


कि ज्‍योतिष का कार्यालय खोल दिया, फिर उसे बंद कर दिया। यह सोचकर ब्लॉग में लिखना शुरू किया कि 


चर्चाओं का दौर ज्‍योतिष को अधिक समृद्ध करेगा। अब तक ज्ञान देने वाले सभी गुरूओं को शत-शत नमन्। अब 


कुण्‍डली विश्‍लेषण करने के लिए एक वेबसाइट बनाई है। इसमें कई ज्‍योतिषियों को जोड़ा है। एक निश्चित फीस 


लेकर जातकों की कुण्‍डली का तार्किक विश्‍लेषण किया जाएगा। आप भी आमंत्रित है मेरी नई वेबसाइट पर इसका पता है

http://www.parasharas.org/

इसी वेबसाइट का हिन्‍दी वर्जन भी साथ ही तैयार किया गया है। यहां आपको दैनिक फलोदश नियमित 

रूप से मिलेंगे। मेरा मोबाइल नम्बर: 09413156400 है। सशुल्‍क फलादेश के लिए संपर्क किया जा 

सकता है" 
आगत की आहट को लेकर सोच रहा था- मेरा मन भी इन आहटों को जरूर इन्होने ही बुलाया होगा !.. और हरियाली अमावस से डर सहमा मैं जाने कैसे  मुस्कराना सीख  गया . फ़िर सोचने लगा शब्द तो कुली हैं इन कुलियों को अकारण क्यों परेशान करूं. तभी एक बूढ़ा हँसता हुआ दिखाई दिया. जो हरजाई, हरफ़नमौला, हरकारा था. सच सावन का महीना  कितना मादक होता है.. आज़ समझ सका. पर ऐसे मादक महीने में ये क्या कुछ लोग जैसे अविनाश वाचस्‍पति जैसे लोग नारा लगा रहे हैं  दारू का बोलबाला : आप भी आकर भर लें प्‍याला - .. हम ब्लोगर हूँ..... कछू भी बोलूं तुमसे क्या….? होश आने के बाद करेंगे भूल-सुधार अभी तो बात टायगर की करते हैं.  टाइगर को पता लगी मीडिया की बेबसी,लाचारी को रंगमंच... पर  देखे लेते हैं. खेती में महिलाओं के योगदान का नीति को समझने समझाने की कोशिश में हूं.तब तक आप  सुबीर संवाद सेवा –के ज़रिये गज़ल-वज़ल सुनिये सुनवाईये.
http://www.bamulahija.com/
       अब पाबला जी की उमर क्या है बताएं तो ज़रा……. आप सोच रहे हैं कि बेहूदा सवाल है.. हां है.. क्यों कि पाबला जी का पुनर्ज़न्म हुआ दो बरस पहले ……
सांप से बतियाते हुए डा.अवध तिवारीजबलपुर 
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                          कहानी किस किसकी  सुनाएं भाई.. भारत के प्रेसिडेंट कौन होंगे एल.बी.ए. अपने प्रेसीडेंट को चुन लिया हरदिल अज़ीज़ Dr. Mahfooz Ali  JBA/ABA/BBA/MBA/RBA वाले ब्लागर्स भी अपने अपने प्रेसीडेंट को चुनें.. ताकि सियासती लोग समझें हम ब्लागर कित्ते संज़ीदा और अच्छे हैं..प्रेसीडेंट चुनने में. 
                             जागरण जंक्सन  एवम फ़ेसबुक पर हिंदी-ब्लागर्स समूह को एक झलक देख तो आएं.. फ़िर पता लगाते हैं कि किसे दामाद चाहिये और किसे....लोकपाल........ 
                      





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