बुधवार, 8 अगस्त 2012

अधूरी क्रांति परिवर्तन अभी बाकी है... ब्लॉग4वार्ता....संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार...अजय झा जी ने फेस बुक पर लिखा है..."अब सांसदों से सीधे सीधे पूछा जाना चाहिए कि जनलोकपाल , काले धन के मुद्दे पर तो आप एकदम गंभीर हैं , ईमानदार तो हईए हैं , भगबान जी की कृपा देखिए कि सब के सब मालदार असामी हैं , आ मिज़ाज़ से केतना हुलहुल हैं ई पिछला दु दिन में त कमाल बुझाया है अभी कुछ समय पहिले ही झारखंड के एक एम एल ए साहब बहुत मैले निकले तो एक ठो महिला दिन दहाडे पेट में डैगर घुसेड दिहिस थी ..इनसे सिर्फ़ इत्ता भर वादा लिया जाए कि आगामी संसद सत्र में वो हमारे करोडों रुपए का समय नहीं बर्बाद करेंगे और करेंगे तो फ़िर अपनी अपनी तनख्वाह वेतन भत्ते आदि नहीं लेंगे , एक सरकारी मुलाजिम होने के नाते उनसे इतनी अपेक्षा तो की ही जा सकती है न..." प्रस्तुत है आज की ब्लॉग वार्ता पर इन चुनिन्दा लिंक्स के साथ ...

मंगलसूत्र और नारी - काले मोतियों में पिरोये , अनगिनत विश्वास और शंकाओं को पाले, डाले रहती है गले में जान से भी बढ़कर सहेजती है इस काले मोती के धागे को | खोने का कभी बिखरने... यही फ़िज़ा की मोहब्बत का हश्र है दुनिया - सुहाग बनके तुझे ही फ़िज़ूल बेच गया गुलाबी फूल दिखाकर बबूल बेच गया यकीन था तुझे जिस शख़्स के उसूलों पर सर ए बाज़ार वो सारे उसूल बेच गया ये कैसा सौदा किया है ... दरोगा साहब ... - दरोगा साहब आप भी कमाल करते हैं इज्जत का लुटेरा घूम रहा है खुल्लम-खुल्ला ... सांड की तरह और आप हैं कि - जिसकी लुटी है इज्जत, उसी से - बार बार, नए ... 

अधूरी क्रांति ....पूरा स्वप्न - रात को अपने सब काम निपटाने के बाद मन किया थोडा सा नेट पर देखा जाये क्या चल रहा है , इसलिए जीमेल खोल दिया , यहाँ कोई नहीं दिखाई दिया , ठीक है फेसबुक की तर.....झील होना भी एक त्रासदी है! - कुछ घंटों की *अजमेर* यात्रा में कुछ देर *आना सागार झील* के किनारे भी खड़े रहने का मौका मिला . उमस भरी गर्मी में प्राकृतिक दृश्यों के साथ झील स..प्रकृति को नमस्कार है - कभी किसी पहाड, समुद्र, रेगिस्तान या बीहड वनों में सूर्योदय या सूर्यास्त देखें। उन्मुक्त विचरते जीव-जंतुओं को निहारें, कल-कल करती नदियों, ऊंचाई से गिरते झ..

IIT Kanpur– अधूरे सपने के सफर नया ठिकाना - आज कुछ तस्वीरों के साथ गीतों भरी कहानी कहने का मन है. गीत को आप यहाँ से शुरू सकते हैं, कहानी समझने में सुविधा रहेगी. तो पेश है पहली तस्वीर!! हमारा नया ठि...  कहीं देर ना हो जाए- - गर्मी की उमस बढती ही जा रही थी. इस उमस से निजात पाना आसान नहीं था.पंखों की हवा उमस का साथ दे रही थी,कूलर भी कोयले के इंजन की तरह,भाप उगल रहे थे—अब रह गए ... कन्हैया - गोकुल के रचैया अरु गोकुल के बसैया हरि , माखन के लुटैया पर माखन के रखैया तुम ! गोधन के कन्हैया अरु गोवर्धन उठैया नाथ , बृज के बसैया श्याम बृज के बचैय... 

राजनैतिक महत्वाकांक्षा - गुलामी की बेड़ियों में जकड़ी जनता अब जागरूक हो गयी है। शायद कुछ ज्यादा ही जागरूक हो गयी है। जिसे देखो वही अपनी पार्टी बनाना चाहता है। अन्ना और केजरीवाल की मह... तब........ - तब........ मुठ्ठी में था आकाश, कभी निकलकर आँखों में रहता था, कभी आस-पास. फिर...... मुठ्ठी बड़ी हो गई, आकाश फैलता गया, मुठ्ठी छोटी पड़ गई, आँखें,ख्वाबों से ...सकारात्मक परिवर्तन अभी बाकी है मेरे दोस्त - 21वीं सदी में भी एक दशक से अधिक का समय गुजारने के बाद भी सामाजिक स्थिति में बहुत सकारात्मक परिवर्तन देखने को नहीं मिले हैं। यह कहना गलत होगा कि परिवर्तन ... 

ख्वाहिशें.....कभी मरती नहीं. - *ख्वाहिशों के कभी कोई नाम नहीं होते ... **ये हैं दिल में फडफडाते हुए,**कुछ परकटे तोते.....* *कभी ऐसी ही जाने कितनी ख्वाहिशें दिल में पला करती थीं...* *इतन... आसमान के सितारों को मैंने रोते देखा -- - आप सभी ब्लॉगर साथियों को मेरा सादर नमस्कार काफी दिनों से व्यस्त होने के कारण ब्लॉगजगत को समय नहीं दे पा रहा हूँ पर अब आप सभी के समक्ष पुन: उपस्थित हूँ अप..भाषा नहीं भाव प्रवल हैं नयनों नयनों में बातें करना बोलो किससे सीख लिया जो सोचा हंस कर जता दिया मन सब का मोह लिया तुमने इस भोली भाली सूरत में कितने राज छुपाए हैं मनमोहनी मुस्कान से अपने भाव जताए हैं हो तुम इतनी प्यारी सफ...

गांधीगिरी की आड़ में नेतागिरी ....*गां*धीगिरी से नेतागिरी में कदम रखते ही अन्ना सियासी चाल चलने लगे हैं। अन्ना को पता है कि यहां अपनी चालों से ही शह-मात का खेल खेला जा सकता है। बस फिर क्या आज उन्होंने पहला झटका अपनी ही टीम को दिया, और मंज....आदत आँखों के दरीचों में वक्त की सुनामी और गहन तीव्रता से आये भूकंप के बाद भी एक नन्हा सा, नाज़ुक सा ख्वाब पलकों की ओट में कहीं अटका रह गया है ! डरती हूँ तुम्हारी उपेक्षा की आँच कहीं इसे झुलसा कर नष्ट ना...न जले नागासाकी फिर कोई ..* * *न जले,* *नागासाकी* *फिर कोई ......* *सिने में ,समंदर * *रखना ,* *आग इतनी है **कि,* *कम पड़ जायेगा......./* *हजारों एटम बमों की* *प्रचंड अग्नि कम है,* *कुछ खौफजदा दिलों की,* *आग से ..* *जलाकर दूसरों क...
    
आज के लिए बस इतना ही फिर भेंट होगी तब तक के लिए नमस्कार....

मंगलवार, 7 अगस्त 2012

लेखक पार्लियामेंट होता है...ब्लॉग4वार्ता....संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार...मंगल ग्रह पर जीवन की खोज करने के लिए नासा का "क्यूरोसिटी" आज सुबह मंगल ग्रह की सतह पर सुरक्षित उतर गया, उसने वहां की तस्वीरें भेजना आरम्भ कर दी है. भारतीय इंजीनियरों ने भी इस योजना में सहयोग किया है. भारत भी मंगल की तैयारी में है  ... आइये अब चलते हैं, आज की ब्लॉग वार्ता पर इन चुनिन्दा लिंक्स के साथ ...

उदयप्रकाश: लेखक पार्लियामेंट होता है उदय प्रकाश की कहानी से मेरा परिचय लगभग 20 वर्ष पूर्व हुआ था। इंडिया टूटे के कहानीकार विशेषांक में "वारेन हेस्टिंग्स का सांड" पढी थी। उसके बाद उन्हे कुछ और पढा। फ़िर भिलाई रंग शिल्पी के नाट्य समारोह....पता न था वक्त ऐसे बदल जाएगा एक आग सी जलती थी मुझ में आज राख का एक ढ़ेर हूँ मैं मत छेड़ना इसे तुम वरना सब कुछ बिखर जाएगा पता न था वक्त ऐसे बदल जाएगा अलमस्त सा उड़ता था गगन में आज पंखहीन सा लाचार हूँ मैं मत पूछना कुछ मुझे तुम वरना द.... एक लायक आदमी इश्क के लायक नहीं बचता....इश्क को उसने उठाकर जिन्दगी के सबसे ऊंचे वाले आले में रख दिया था. उस आले तक पहुँचने के लिए पहले उसने खुद को पंजों पर उठाया. अपने हाथों को खींचकर लम्बा करना चाहे. इतनी मशक्कत मानो अचानक उसके पैरों की लम्ब...

श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद (२५वीं-कड़ी) अनासक्त हो कर्म फलों से कर्तव्य समझ कर्म जो करता. वह ही सच्चा योगी सन्यासी, न वह जो यज्ञ कर्म को तजता. (१) कहते हैं सन्यास जिसे सब, उसे योग ही जानो...भूल गया क्यों तुम को? *लगभग साल भर से यह पंक्तियाँ ड्राफ्ट में सुरक्षित थीं। पूर्व में अन्यत्र प्रकाशित अपनी इन पंक्तियों को अपने ब्लॉग पर आज प्रकाशित कर रहा हूँ-* उस क्षण ! मैंने तुमको किया था याद बहुत जब गहरे अंधेरों में खुद...टूटे न ख्वाबों की लड़ी मुझे तुम्हारी आहट सुनाई पड़ी थी पर मैं नींद में था मैंने सोंचा भी कि आये हो तो ख़्वाब तक तो आओगे ही और मैं निश्चिन्त था पर तुम कम थोड़े हो, बाहर से ही लौट गए न चलो अच्छा हुआ वर्ना तुम जान लेते कि किसी की...

तब आता है बसंत  पिछली पोस्ट से आगे  तब आता है बसंत में मौसम और प्रेम एक दूसरे पर किस तरह आश्रित हैं, इसका परिचय मिलता है. प्रकृति में होते बदलाव जहाँ एक ओर ऋतु परिवर्तन का संदेश देते हैं, वहीं प्रिय से मिलने की प्रेरणा .. .बदलती भावनाएं भावनाएं हर समय एक सी नहीं होती,कभी पेम भरी होती हैं कभी नफरत भरी कभी क्रांति विचार आते हैं कभी विद्रोह विचार और कभी समर्पण...अगर हम इन सब भावनाओं से अछूते रहकर सिर्फ अच्छा और बस अच्छा दिखने वाला जीकर चल... पहाड़ और क़ानून पहाड़, पत्थरों पर जिनका था अधिकार वे कानून की किताब से हैं बाहर उन्हें पढनी नहीं आई क़ानून की भाषा और जो भाषा जानते हैं वे उस भाषा में नहीं लिखा जाता है क़ानून पेड़ नहीं जानते हैं कैसे वे कटने के बाद बदल ...

मानवता का दुश्मन परमाणु बम !  *हिरोशिमा -नागासाकी में विनाशकारी परमाणु बादल * *(६ अगस्त और ९ अगस्त १९४५ ) * दोस्तों ! माचिस से चूल्हा ...इंतज़ार में....अक्सर अपने घर के अकेलेपन में महसूस होते हो तुम . मैंने देखे हैं तुम्हारे होंठों के निशाँ अपनी चाय की प्याली पे . गीला तौलिया बिस्तर पे पडा मुझको चिढाता हुआ. सुनाई देती हैं मुझे मेरी आवाज़ जब दिखती हैं ,..चलिए गंगा जी चलें.... पिछली पोस्ट एक शाम गंगा के नाम में आपने देखा था कि गंगा जी बढ़ रही हैं। मैने लिखा था कि अब एक घाट से दूसरे घाट की ओर जाना संभव नहीं। अब शायद मैं आपको गंगा की तश्वीरें न दिखा पाऊँ। मन नहीं माना तो आज शाम फि...

क्‍या करें क्‍या न करें 6 और 7 अगस्‍त 2012 को ??. मेष लग्नवालों के लिए 6 और 7 अगस्त 2012 को भाग्य , भगवान , धर्म . ये सब चिंतन के विषय बने रहेंगे। किसी धार्मिक क्रियाकलाप में व्यस्तता रहेगी। कोई बडा खर्च उपस्थित होगा, बाह़य संबंध मजबूत होंगे , पर बाहरी ...जिन्दगी,,,, जिन्दगी... जिंदगी तुझसे बहुत प्यार है, कितना हंसी तेरा ये साथ है ! मगर तेरे तो दुनिया में रंग हजार, जी चाहता है हर रंग से करू प्यार ! मन में होता है न जाने क्यों अहसास, कम दिनों का बचा है तेरा-मेरा साथ !..  जब सारा आलम सो गया * * *जब सारा आलम सो गया । (गीत ।)* * * * * *जब सारा आलम सो गया, दर्द मेरा ये जाग रहा ।* * * *इश्क - ए - गुनाह का हिसाब मुझ से ये माँग रहा ।* * * * * *अंतरा-१.* * * * * *रात अमा, घना अंधेरा,...

परछाईयों से ...... * अपनी , परछाईयों से डरने लगे हैं हम ,* * अपनी लगायी आग में, जलने लगे हैं हम -* * * * ...गूगल के नाम पर गोरखधंधा ** *एक फ़ोन आता है मैं महिंद्रा सत्यम से बोल रहा हूँ आपका टेलीफोनिक इंटरव्यू है और इंटरव्यू लेने वाला बात करके कहता है १-२ दिन में आपसे हमारी HR बात करेंगी.२-३ दिन बाद HR का फ़ोन आता है कहती हैं आप सेलेक्ट... कैसी है तेरी सरहद ...कविताओं के दौर से निकल के पेश है आज एक गज़ल ... आशा है पसंद आएगी ... चाहे मेरा जितना कद पर बापू तू है बरगद बंटवारे का खेल हुवा खींची अपनी अपनी हद बेटे ने बस पूछ लिया अम्मा है कितनी...

 "चल भ्रम उड़ जा " अब शोर बीच यूँ कुछ तो बोलो इस चुप्पी को कुछ तो खोलो / ढूंढ रहा यूँ कब से तुमको धुंध हटा अब देख उजाला इस जग में मत रह मतवाला आँख नशीली खोल , बोल अब / यही रहस्य तो यही सौंदर्य ...चमका क्या? कविता के कोड में भी कमबखत ऑन और ऑफ है या तो चमकती है या फिर नहीं चमकती चमका क्या? नहीं चमका ....? चमकाता हूँ जरा रूको और फिर से पढो इन्तजार कर रहा हूँ....! चमका क्या? नहीं चमका ....? मेरी अमरीका यात्रा  न्‍यूयॉर्क का जे.एफ.के. हवाई अड्डा एकदम साधारण सा है बल्‍कि‍ हमारे रेलवे स्‍टेशनों का सा लगता है. यह बहुत व्‍यस्‍त हवाई अड्डों में से एक है, इसके कई टर्मिनल हैं...

एक व्यंग ..



आज के लिए बस इतना ही फिर भेंट होगी तब तक के लिए नमस्कार....

सोमवार, 6 अगस्त 2012

दोस्‍ती करो तो ऐसी करो ......ब्‍लॉग4वाता्र .. संगीता पुरी

सभी पाठकों को संगीता पुरी का नमस्‍कार , आज फ्रेंडशिप डे है  , इस दिवस के महात्‍म्‍य पर बहुत कुछ लिखा है ब्‍लॉगरों ने , बिना देर किए आज उनमें से ही कुछ महत्‍वपूर्ण लिंकों पर आपको लिए चलते हैं .....
मित्र दिन का भारतीय संस्कृति में कितना महत्व है ,यह मैं नहीं जान पाया मगर इतना जानता हूँ कि मित्रता को जीया जाता है ,हर पल महसूस किया जाता है,सिर्फ एक दिन नहीं ,जीवन पर्यंत ........मित्रता निस्वार्थ भावनाओं से शुरू होती है ,त्याग से पोषित होती है ,प्रिय व्यवहार से उत्कृष्टता पर पहुँचती है और निजी स्वार्थ पर ख़त्म हो जाती है .एक दुसरे से स्वार्थ कि पूर्ति करने वाले लोग मित्र नहीं समान विचारों वाले व्यक्तियों का समूह होता है जो समय,स्थान और परिस्थिति  के अनुसार बदलता रहता है .
"दोस्ती का अर्थ"
आज दोस्ती का पर्व है, अंग्रेजी में कहें तो "Friendship Day" है, लेकिन अब दोस्ती बची ही कहाँ है दोस्तों के बीच; हाँ कुछ हद तक स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थी ज़रूर दोस्ती का मतलब समझते हैं और मेरे ख़्याल से तो हर बच्चे के माता-पिता को बच्चे कि पढ़ाई से ज़्यादा चिंता इस बात की होती है कि हमारा बेटा या बेटी दोस्तों के लिए सब-कुछ करता है लेकिन उसके दोस्त उसके लिए कुछ नहीं करते और शायद यही वो पहला सोपान होता है ज़िन्दगी का, जब एक बच्चा ये समझने कि कोशिश करने लगता है कि उसे भी दोस्त से बदले में कुछ मिलना चाहिए।
मित्रता किसे नहीं भाती। यह अनोखा रिश्ता ही ऐसा है जो जाति, धर्म, लिंग, हैसियत कुछ नहीं देखता, बस देखता है तो आपसी समझदारी और भावों का अटूट बन्धन। कृष्ण-सुदामा की मित्रता को कौन नहीं जानता। ऐसे ही तमाम उदाहरण हमारे सामने हैं जहाँ मित्रता ने हार जीत के अर्थ तक बदल दिये। सिकन्दर-पोरस का संवाद इसका जीवंत उदाहरण है।
 श्री कृष्ण द्वारकापुरी में अपनी आठ पटरानियों के साथ अपने महल के ऊपरी तल पर झूले पर झूल रहे थे। उस समय दूर से आते हुए सुदामा को देख वे पैदल चल कर उनके स्वागत के लिए आगे आये और अपने बाल सखा के साथ गाढ़ालिंगन किया तथा महल में लाकर अपने सिंहासन पर बिठाया।
दोस्तों अजीब बात है हमारा देश जहां की पोराणिक कथाये ..धार्मिक मान्यताएं मित्रता की मिसाल रही है वही आज हम अंग्रेजी संस्क्रती से प्रभावित होकर केवल एक विशिष्ठ दिन पर ही मित्रता की बात करते है ..मित्रता यानी दोस्ती यानी खुद की जिंदगी खुद की आत्मा संवारने और शुद्धिकरण का फार्मूला है ...आप सभी जानते है के क्रष्ण ने सुदामा से जो दोस्ती की थी उसकी मिसाल कोई अँगरेज़ कोई देश नहीं तोड़ सका है ...करण और दुर्योधन की मित्रता सभी को पता है ...इस्लाम की दुनिया में भी दोस्ती के बेशुमार किस्से है दोस्ती निभाने के की बेशुमार हिदायते है और फिर क्रष्ण सुदामा का जो सीन है वोह आज देखने को कहाँ मिलता है 
तुम्हारा मेल दोस्ती की हद को छू गया
दोस्ती मोहब्बत की हद तक गई
मोहब्बत इश्क की हद तक
और इश्क जनून को हद तक ॥
अमृता इमरोज़ की दोस्ती पर कही यह पंक्तियाँ दोस्ती की परिभाषा को और भी अधिक गहरा रिश्ता बना देती है ...दोस्ती लफ्ज़ ही ऐसा है जो दिल के अन्दर तक अपना वजूद कायम कर लेता है यदि दोस्ती सच्ची और गहरी है तो .... वैसे तो सभी रिश्ते अपना अपना स्थान ज़िन्दगी में बनाए रखते हैं ...पर दोस्ती का रिश्ता सबसे अलग होता है।
 महंगाई में सस्ती दोस्त की वफा-हास्य कविता
  आशिक ने अपने दोस्त से कहा
‘‘यार, महंगाई बढ़ गयी है,
माशुका की मांगें पूरी करते करते
जेब कंगाली की सीढ़िया चढ़ रही है,
अब पेट्रोल होता जा रहा है महंगा,
होटलों में बैरे पेश करते हैं महंगे बिल
तब हो जाता है उनसे पंगा,
यह महंगाई तो मोहब्बत को मार डालेगी,
इस संसार में केवल नफरत को ही पालेगी।
प्यार और दोस्ती जीवन से जुड़े ऐसे सरोकार हैं जिनको निभाने के लिए हमारी आपकी फिक्रमंदी भले कम हुई हो पर इसे उत्सव की तरह मनाने वाली सोच बकायदा संगठित उद्योग का रूप ले चुका है। दिलचस्प यह भी है कि कल तक लक्ष्मी के जिन उल्लुओं की चोंच और आंखें सबसे ज्यादा परिवार और परंपरा का दूध पीकर बलिष्ठ हो रहे संबंधों पर भिंची रहतीं थी, अब वही कलाई पर दोस्ती और प्यार का धागा बांधने का पोस्टमार्डन फंडा हिट कराने में लगे हैं। फ्रेंड और फ्रेंडशिप का जो जश्न पूरी दुनिया में अगस्त के पहले रविवार से शुरू होगा उसके पीछे का अतीत मानवीय संवेदनाओं को खुरचने वाली कई क्रूर सचाइयों पर से भी परदा उठाता है। 
"मैं कभी बतलाता नहीं.....पर अँधेरे से डरता हूँ, मैं माँ...मेरी माँ .."..फिल्म 'तारे ज़मीन पर ' का यह गीत, पाषाण ह्रदय को भी द्रवित कर देता है. किसी प्रोग्राम में टी.वी.पर. ..स्टेज पर या पारिवारिक महफ़िल में ही किसी ने भी डूब कर गाया इस गीत को तो सुनने वालों की आँखें छलक उठती हैं. फिल्म में तो इसका फिल्मांकन और भी मर्मस्पर्शी है. एक छोटा सा बच्चा हॉस्टल में अकेला अपनी माँ को याद कर उदास है...रो रहा है और बैकग्राउंड में यह गीत बज रहा है. पर मैं जब भी इस गीत का फिल्मांकन देखती हूँ...मन तो भीगता है..पर कुछ जोर का खटक भी जाता है.
 
मगरमच्छ अब भी वही ,सुन बंदर नादान
जामुन देना छोड़ दे , मगरमच्छ शैतान
मगरमच्छ शैतान , कलेजा खाने आतुर
मैडम का वह दास, छलेगा तुझको निष्ठुर
नहीं मित्रता इसकी, तुझको रास आयेगी
चालाकी इक रोज, तुझे ही खा जाएगी ||
मित्रता का भाव मानव के लिए वरदान है ;
जो नहीं ये जानता वो मूर्ख है ;नादान है .
देखकर दुःख मित्र का जिसका ह्रदय होता विकल ;
त्याग देता मित्र हित पल में सदा जो सुख सकल ,
है वही सच्चा सखा धरती पे वो भगवान है .
मित्रता का भाव ..................................

सारे रिश्ते देह के, मन का केवल यार
यारी जब से हो गई , जीवन है गुलज़ार
मन ने मन से कर लिया आजीवन अनुबन्ध
तेरी मेरी मित्रता स्नेहसिक्त सम्बन्ध
मित्र सरीखा कौन है, इस दुनिया में मर्द
बाँट सके जो दर्द को बन कर के हमदर्द
दोस्‍त .. जब कहता है
मेरे रहते तुम्‍हारा कोई कुछ नहीं कर पाएगा ...
टूटती हुई उम्‍मीद छूटता हुआ हौसला
मानो वापस लौट आता है
दोस्‍त के इन शब्‍दों में
मन का कोई कोना दोस्‍ती के इस ज़ज्‍बे पर
अपना सब कुछ कुर्बान करना चाहता है
एक कोई होता है जो बहुत खास होता है
कितनी भी दूर हो वो
सदा दिल के पास होता है
....
रिवाज दिवसो का,
मां, पिता, शिक्षक, प्रेमी -
और अब आज मित्रता दिवस,
मित्रता की रश्म अदायगी,
मित्रता जतानी की जरुरत-
मित्र को मित्र कहने की जरुरत,
मित्रता की शर्ते, लक्षण, अभिव्यक्ति -
त्योहार की तरह,
याद किये जाते मित्र,
मिसाल, प्रसंग-
आदर्श की कसौटी पर परखे जाते -
मित्रता के सबूत,
मित्रता दिवस पर कुछ हाइकू ...

सुन ओ मीत।
कृष्‍ण-सुदामा जैसी
निभाना प्रीत ।
2
रूठे नसीब
तुम ना जाना रूठ
ए मेरे मीत!
3
परछाईं-सा
नहीं छोड़ता साथ
दोस्त का प्यार।

 दोस्ती करो तो 
जल सी निर्मल करो
दूर होकर भी
पल-पल याद आये
ऐसी करो

दोस्ती करो तो
चाँद - तारों सी अटूट करो
अंजली में भरकर भी
आकाश में ना समाये
ऐसी करो

दोस्‍ती के नाम....

आंसू में
मुस्‍कराहट में
तन्‍हाई में
महफि‍ल में
जिसकी जरूरत हर वक्‍त महसूस हो....
वह तो बस
एक दोस्‍त ही हो सकता है
क्या होता शमा ये क्या बताऊँ यारों,
भगवान न होते और ये बंदगी न होती;
दोस्तों के बिना शायद कुछ भी न होता,
ये सांसें भी न होती, ये जिंदगी न होती |
 आँखों में छिपे दर्द को पहचान ले...
अनकही बातों का मतलब जान ले...
कर गुज़रे जो एक बार ठान ले...
टूटे हुए शीशे को जोड़ दे...
वो दोस्ती है...
एक को चोट लगे, खून दूजे का बहे...
जिस्म दूर हो भले, रूह साथ रहे...
जुबान खींच ले उसकी, बुरा जो कहे...
एक उंगली उठे और हाथ तोड़ दे...
वो दोस्ती है.
दोस्ती का दम भरने वालो ....
जरा कदम मिला कर देखो ..
इल्जाम लगाने से पहले, दोस्त पर
अपने गिरेबान में झांक कर देखो .

वो तो द्वापर युग ..का सच है ,
जो आज भी मिसाल है दोस्ती की ..
नंगे पाँव दौड़े चले आये कान्हा ..
गरीब सुदामा से दोस्ती निभाने ..
रश्मिरथी में दिनकर जी ने लिखा है"मित्रता बड़ा अनमोल रतन ,कब इसे तोल सकता है धन "पर दुर्भाग्य बस आज मित्रता धन के तराजू में तौली जाति है ..इस रिश्ते में उच्च नीच का कोई स्थान नहीं है ..भगवान राम ने निषादराज से दोस्ती कर इसका उदहारण पेश किया है ..सच में इस दुनिया में जिनको भी सचे दोस्त मिले हैं जो अपने दोस्त को हमेशा गलत रास्तों से दूर रखते हैं ..वे बहुत भाग्यशाली हैं .....उन सभी दोस्तों को यह दिन मुबारक ...

रविवार, 5 अगस्त 2012

स्नानाबाद से चिठियाना-टिपियाना...ब्लॉग4वार्ता...संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार...चलो आखिरकार भारत के खाते में तीसरा मैडल आ ही गया और इस दूसरे काँस्य मैडल के साथ एक और रिकार्ड बन गया वह यह कि ओलम्पिक के इतिहास में भारत का यह पहला बैडमिंटन पदक है. भले ही काँस्य ही क्यों ना हो पर है तो महत्त्वपूर्ण ही जो अब तक ओलम्पिक में भारत को एक भी बैडमिंटन में किसी भी तरह का कोई पदक नहीं मिला था, सो यह काँस्य ही गोल्डन मैडल कि ही तरह है... बधाई हो साइना इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए और बधाई हो सभी भारतवासियों को साइना के इस उपलब्धि के लिए....प्रस्तुत है, आज की ब्लॉग वार्ता कुछ खास शानदार लिंक्स के साथ ...

त्रासदी ...(बादल फटने की ) त्रासदी ...(बादल फटने की ) आज फिर बादल फटा आज फिर किसी की दुनिया उजड गई होगी आज भी कई मासूम अनाथ हों गए होंगे .. और कई माँ बाप ...इस दुनिया में अकेले रह गए होंगे ... किसी का घर बह गया तो ... प्रायश्चित प्रातः से संध्या तक *** *क्या गलत क्या सही आचरण *** *उस पर चिंतन मनन और आकलन *** *सरल तो नहीं *** *यदि स्थिर मन हो कर सोचें *** *आत्मावलोकन करें *** *कुछ तो परिवर्तन होगा *** *स्वनियंत्रण भी होगा |.अँधेरा *कदम खुद ही चलते हैं अँधेरे के निशा ढूंढ़ने ! रोक न पायें जब खुद को,* *हम अँधेरे को क्यों दोष दें ! उजाला हर किसी की ओढ़नी हम अँधेरे को ही ओढ ले ! उजालों ने थकाया हमें निगाहों ने लुटाया हमें ! कदमो ने भी पक...

नजर का असर ..... अतिथि पोस्‍ट .... श्री विद्या सागर महथाकुणाल की आंखों पर उसकी सौतेली मां की नजर थी , कारण यह था कि उसकी आंखें बहुत ही खूबसूरत थी और उसकी तथाकथित मां उन आंखों पर मोहित थी। लाख कोशिश के बाद भी जब वह उन आंखों को हासिल न कर सकी तो अपने पति से उसकी .."स्पेस" "स्पेस" ये शब्द सुनते ही सबसे पहले आँखों के सामने अन्तरिक्ष की ही याद आती है ,जबकि बातें हम अक्सर दूसरी स्पेस की करते हैं | कभी अपने लिए स्पेस चाहते हैं , तो कभी दूसरों को स्पेस देना चाहते हैं ... भ्रम एक सच है एक झूठ है एक मुखौटा है एक असली चेहरा है एक शतरंज है एक मोहरा है एक साँप है एक सपेरा है एक अंधेरा है एक सवेरा है एक प्रश्न बहुत टेढ़ा है किसका साथ दूँ ? जब सब कुछ साफ है है पट्टी बंधी आँखों पे पर क्या...

कुदरत के नज़ारे प्रिय ब्लॉगर साथियों, आज आपके साथ अपने द्वारा लिए गए कुछ प्राकृतिक फोटो बाँट रहा हूँ जिसमे कुछ प्राकृतिक दृश्य हैं, कुछ फूल है, कुछ परिंदे और कुछ जानवर.......सभी फूलों के नाम मुझे पता नहीं हैं जो मुझे अच्... अख़बारhours ago *ब्लॉग्गिंग के शुरुआत के समय की ये रचना..... पिछले पोस्टस देख रहा था, तो एक दम से अच्छा लगा... बेशक तुकबंदी है ... पर मुझे खुद को अच्छी लगी... तो शेयर कर रहा हूँ....!!!* दिन था रविवार ..उम्मीद से है दरख़्त अब ठहरा हुआ आसमान गहराती हुई पृथ्वी सबकुछ बिखरता हुआ पिघलता हुआ बर्फ हम कहाँ और कैसे ठहरे सवाल ही रहा ऐसी उफान नदियों में कि सूखती रही उम्मीद लहरों के संग जंग में सियासत या सियासत में जंग बदल रहा... 

काफी है ... तम हो घनेरा और जाना हो मंज़िल तक तो जुगनू का एक दिया ही काफी है मंज़िल पाने को तपिश हो मन की और चाहते हो ठंडक तो अश्क की एक बूंद ही काफी है अदना सा झोंका ही भर देता है प्राणवायु जीवित रहने ... मेरी आहूति ………शब्दों के अरण्य में "शब्दों के अरण्य" में रश्मि प्रभा द्वारा सम्पादित और हिंद युग्म द्वारा प्रकाशित काव्य पुष्प है जिसकी भीनी सुगंध में ना जाने कौन- कौन से सुमन अपनी महक से योगदान दे रहे हैं और इस अरण्य को सुवासित कर रहे... काले बर्तन या काला ज़हर टेफलोन शीट तो याद होगी सबको कैसे याद नहीं होगी आजकल दिन की शुरुवात ही उससे होती है चाय बनानी है तो नॉन स्टिक तपेली (पतीली) ,तवा,फ्राई पेन ,ना जाने कितने ही बर्तन हमारे घर में है जो टेफलोन कोटिंग वा...

जीवित मुर्दों की लाशों को कफ़न कौन ओढाये? - कोलाहलों का वटवृक्ष नीर का क्षीरसागर जीवन्तता की अचेतावस्था जैसे कूंडों में दही जमी हो और खाने वाला कोई ना हो फिर कौन तो तवे पर रोटी बनाये और कौन किसे लोरी...बड़ा अनूठा खेला है - किसी काम को करूँ, ना करूँ, कानाफूसी चलती है, बुद्धि कहे यदि, कर भी डालो, मन की राय बदलती है, सुबह आँख खुलती, मन कहता, सो जाओ तुम थके बहुत, शुभ विचार के स...तलाश एक मोड़ की - (१) चुभने लगती जब आँखों में सुदूर सितारों की रोशनी भी, हर सीधी राह भी जगा देती एक डर भटक जाने का, रिश्तों की हर डोर जब हो जाती कमज़ोर बार ब...

बचपन अधूरा सही...बेचारा नही.... - *अपने अतीत को सम्भाल कर रखो * *आप के भविष्य में काम आऐगा....* *....अकेला* *अशोक'अकेला'* आज फिर देखो नारी उदास है !! - आज फिर देखो नारी उदास है !! उसकी कोख में सभ्यता का बीज है!! ये न समझो केवल भोग्या चीज है !! नारी न होगी तो नर भी न होंगे !! बिना नारी संत पैगम्बर न होंगे !! ...   फ़ुरसत में ... चिठियाना-टिपियाना चैट - *फ़ुरसत में ...108 * *चिठियाना-टिपियाना चैट* **** चिठियाना नमस्कार! तबियत ठीक है न ? टिपियाना नमस्कार ! क्यूं तबियत के बारे में प्रश्न ..? चिठ... 

स्नानाबाद से सीधा प्रसारण --- ओ3म नम: शिवाय, नम: शिवाय, नम: शिवाय, हर हर गंगे, हर गंगे। स्नान हो रहा है, एक लोटा पानी डालते ही विचार उमड़ने-घुमड़ने लगते हैं। बरसाती बादल की तरह बस फ़ट पड़न... यारब मुझे महफ़ूज़ रख उस बुत के सितम से - दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार1 नहीं हूँ बाज़ार से गुज़रा हूँ, ख़रीददार नहीं हूँ ज़िन्दा हूँ मगर ज़ीस्त2 की लज़्ज़त3 नहीं बाक़ी हर चंद कि हूँ होश में, होश... कैद मे गांधी ... अनशन पर अन्ना ... और मैं - *साल भर पहले यह 'कविता' लिखी थी ... एक बार फिर यहाँ आपको यह पढ़वा रहा हूँ ... इस बार चित्र के साथ ! * * * *यहाँ खुदा ... वहाँ खुदा ... कहाँ कहाँ नहीं खुदा ...


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अब देते हैं आज की वार्ता को विराम आपसे फिर भेंट होगी तब तक के लिए नमस्कार...

शुक्रवार, 3 अगस्त 2012

सुना था आज उड़ेगें पुर्जे गालिब के ---------- ब्लॉग4वार्ता ------ ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, गालिब ने कहा - सुना था  आज उड़ेगें पुर्जे गालिब के, देखने हम भी गए पर तमाशा न हुआ। कुछ ऐसा ही  हुआ, आज अन्ना का अनशन खत्म हो गया। बाबा सलवार से बाहर ही नहीं निकल पाए। भ्रष्टाचार के विरुद्ध आन्दोलन की भ्रूण हत्या हो गयी। लोकपाल शायद ही बन पाए, काला धन शायद ही वापस आए। लेकिन एक आस तो हिन्दुस्तानियों में पैदा हो गयी। आज नहीं तो कल, सफ़लता मिलनी है। भले ही रास्ता कंटक भरा हो। अब चलते हैं आज की वार्ता पर प्रस्तुत हैं कुछ उम्दा लिंक्स ……………

माँ को राखी जरूरत है कि आज (भारत) माँ को राखी बांधी जाये । वचन देने के लिये कि यह राखी उसकी रक्षा के लिये है, जो दर असल हमारी ही रक्षा है । मां जिसके गोद में कांधों पर खेल कर हम बडे हुए । मां जिसने हमें पाल पोस कर बडा...वो अनजाना सा व्यक्ति जब आप किसी शादी में जाते हैं .. अक्सर एक व्यक्ति से टकरा जाते हैं .. वो आपको देख कर मुस्कुराता है .. आप बिना पहचाने ही मुस्कुराते है .. वो सबसे ...मेरी मुट्ठी में सूखे हुए फूल हैं बदहवास दौड़ती हुई ज़िन्दगी को कभी कोई अचानक रोक ले तो कितना अच्छा हो. हासिल के लिए भागते हुए, नाकामी का मातम झोली में भरते जाना और फिर ज़रा रुके नहीं कि दौड़ पड़ना. याद के वे खाने सब खाली. जिनमें रखी ह...

बात एक अनकही सी-प्यारा सा-एक घर हमारा प्यारा सा-एक घर हमाराआइये मकान को घर बनायें------- *"**घर” **और "मका**न**”**शब्द दो हैं पर अर्थ एक ही है अर्थात ' **रहने की जगह'. **और **दोनों शब्दों में एक मूलभूत अंतर है.'**मकान' **ईंट, **रेत, **सीमेंट ...भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक. रक्षा-बंधन इस पर्व ने जात-पात, धर्म-अधर्म, ऊंच-नीच से सदा अपने को अलग रखा। इसीलिए आज भी यह उतने ही उत्साह, प्रेम, स्नेह से याद रखा जाता है और अनेकानेक झंझावतों के बावजूद मनता चला आ रहा है। * रक्षा-बंधन यानि रा... काव्य वाटिकामन का पंछी चाँद का तन्हा सफ़र कैसे देखूँ अक्स उसकी बेचारगी का कैसे झेलूँ कोई तो रंग बिखेर दे अमा की रात निराकाश में छेड़ दे प्रेम की बात । प्यार नहीं बंधा है रिश्तों की रेखाओं में नर्म ...
बहन-रक्षा का प्रण लेने की जरुरत नहीं अभी पिछले हीं दिन अखबार में छपी एक खबर में पढ़ा था बारहवीं की एक छात्रा के साथ हुए सामूहिक बलात्कार के मुख्य नामजद अपराधी प्रशांत कुमार झा तीन बहनों का भाई है, उसकी बहन के बयान से शर्मिंदगी साफ़ झलक रही थ...राखी हो, कलाई हो,पर जब बांधने वाला कोई नहीं न होरक्षाबंधन एक ऐसा त्यौहार है, जिस दिन दफ्तर और अस्पताल सभी खाली पड़े होते हैं , लेकिन बसें और मेट्रो भरी होती हैं . ज़ाहिर है , महिलाएं राखी बांधने के लिए और पुरुष राखी बंधवाने के लिए छुट्टी कर लेते हैं . ...खिल उठे पलाश / पुस्तक परिचय / सारिका मुकेशगर्भनाल पत्रिका के अगस्त अंक में प्रकाशित पुस्तक परिचय --- खिल उठे पलाश " खिल उठे पलाश " काव्य संग्रह है कवयित्रि सारिका मुकेश जी का जो इस समय वी॰ आई॰ टी॰ यूनिवर्सिटी वैल्लोर ( तमिलनाडु) में ...
हमारा राष्ट्रीय फूल -कितना काम का यह कमल का फूल है ,देवी लक्ष्मी को बहुत प्रिय है ,पूजन सामग्री में इसका होना बहुत शुभ माना जाता है।इसका वैज्ञानिक नाम होता है- Nelumbium speciosum , इसे अम्बुज, पंकज, पद्म,पुण्डरीक, कलंग, सामरा, अम्बल,नी... बंधन..... ऐसे ही होते है .
बंधन कुछ ऐसे होते हैं साथ जुडें तो बने हिमालय टूटें तो सदियों रोते है बंधन बस ऐसे होते हैं पक्के हों या निर्मल कच्चे धवल दुग्ध से मोती सच्चे शिशु से पालित स्नेह तिरोहित गहरी जड़े जमीन बोत...राखी याद ही होगा तुम्हें भी जब साथ होने की कोई अहमियत न थी . राखी ...आती थी और ले आती थी अपने साथ शर्तें,फरमाइशें यह देना वो देना .. इतने रुपयों से कम दोगे तो राखी नहीं बांधेंगे . वक़्त बदलता है एक सा कब रहता...
अभी नहीं, तो कभी नहीं अभी नहीं, तो कभी नहीं ? इसलिए छोडो मनाना जन्मदिन ... श्रद्धांजलि ... वर्षगाँठ ... बगैरह-बगैरह ... किसी दिन, फिर मना लेंगे ?? आओ ... जागो ... उठो ... चलो ... बढ़ो ... लड़ो ... जीतो ... भदेश मेरा फिर दहल गया देश मेरा फिर दहल गया । किसी के लिए चार धमाके हुए ।। किसी के लिए ब्रेकिंग न्यूज़ बनी । किसी के लिए रियलटी शो शुरू होगया ।। किसी के लिए फेसबुक का स्टेटस हुआ । किसी के लिए ट्विट हुआ । किसी के लिए व्यपार होग...आज कुछ तूफानी करते हैं 'वेरी सिम्पल ' कितना सरल है कहना और कितना कठिन है करना. जिसे देखो जुटा है कुछ तूफानी करने में. आखिर ये तूफानी कहां से आया? सिम्पल..ये तो ऐड का स्लोगन है. ऐसे ही कुछ दूसरे स्लोगन भी याद हैं...ठंडा मतलब.....
यह अनुपम त्योहार आस लिए मन में बहुत, बहन मिलेगी आज। मिला पत्र न आऊँगी, उसे बहुत हैं काज।। बहन सामने हो अगर, तब राखी अनमोल। सुन्दर टीका भाल पे, और प्यार के बोल।। ईश्वर के इन्साफ पर, कभी कभी है क्रोध। बहन सहोदर न मिली, यह जब...पड़ता है सा’ब! फरक पड़ता है पहली चूक - कुछ अनुचित करना। दूसरी चूक - अनुचित घटित होते हुए, चुपचाप, बिना बोले देखते रहना। तीसरी - चूक - अनुचित घटित हो जाने के बाद हल्ला मचाना कि यह अनुचित हो गया जो नहीं होना चाहिए था। चौथी चूक - ऐसा...रेशम की डोरमैं तुझसे लड़ती भी हूँ, झगड़ती भी.. मैं तुझसे बड़ी भी हूँ छोटी भी.. बाँधा है मैंने तुझको शब्दों के बन्धन से... महकता है ये रिश्ता बिना ही चन्दन के डोर ये ऐसी नहीं कि टूट जाए झट से.. चलो अब मुँह ख...
वार्ता को देते हैं विराम, मिलते हैं ब्रेक के बाद………… राम राम

गुरुवार, 2 अगस्त 2012

श्रावणी पर्व एवं रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं ……ब्लॉग4वार्ता ……… ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, वार्ता के सभी पाठकों को श्रावणी पर्व एवं रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं। वैदिक काल में श्रावणी पर्व का महत्व अत्यधिक था। इसी दिन गुरुकुल में विद्यार्थियों का विद्यारंभ संस्कार होता था, आचार्य विद्यारंभ दिवस के दिन ब्रह्मचारियों को रक्षा सूत्र के रुप में विद्याध्ययन पूर्ण करने का संकल्प सूत्र बांधते थे तथा  पुराना यज्ञोपवीत उतार कर नवीन धारण किया जाता था। बदलते जमाने के साथ पुराने संस्कार  विस्मृत होते जा रहे हैं। आज आवश्यकता है संस्कृति को बचाए रखने की। अब चलते हैं आज की वार्ता पर …………प्रस्तुत हैं कुछ लिंक……।  

सावन में नैहर की यादें - सावन में नैहर की यादें पाँव में जैसे पायल बांधे झूले सखियाँ हंसी ठिठोली मेहँदी राखी चन्दन रोली देह धरी है पिया के घर में मन मैके की देहरी फांदे नभ स...रक्षा का बंधन,,,, - रक्षा का बंधन बचपन से लेकर आज तक मुझको मायके से लेकर ससुराल तक तुमको हरदम राखी मै तेरा इन्तजार करू भईया, दिल से जुड़े ये प्रेम के धागे रक्षा का बंधन सि...भाई - बहन का रिश्ता खट्टा- मीठा , प्यारा -प्यारा - भाई - बहन का रिश्ता खट्टा- मीठा , प्यारा -प्यारा कभी लड़ते, तो कभी झगड़ते .. एक - दूजे की चीजे भी छुपा देते है.. मम्मी - पापा की नाराजगी से बचने के ल... 

राखी का दिन - भैया राखी का दिन आया ये खुशियाँ बहुत सी है लाया लाया कुछ हंसी फिर से कुछ के लिए गम लाया!! आज कुछ आँखें नम हैं दिल में छिपाए कितने गम हैं !! बहने रोती राखी ... गीत-राखी के राखी लेबे लाज - बंधना म बांध डारेवं भाई, राखी के राखी लेबे लाज। सुघ्घर कलाई तुहर सोहे, माथे के टीका सोहे आज।। किंजर-किंजर के देवता धामी, बदेंव मैं तुहर बर नरियर। लाख बछर ल... "दी", "दीदी" या "दिदिया" .... रेशम की डोरी अगर बांधा हो बहना ने तो खुद ब खुद बन जाता है रिश्ता एक अटूट रिश्ता प्यारे से "भाई व बहन" के बीच का जिसमे सिर्फ होती है एक दुसरे के लिए दुआएं | एक अदद डोरी की यही है ताकत | यही है ...

अनशन ... - पहले तुम - अपना पेट ठूंस-ठूंस के भर लो ! हमें तो - आदत है भूखे रहने की ? अनशन की ... हम मरेंगे नहीं, आठ-दस दिनों में !! पर हाँ, डर है कि - कहीं त... स्मृति-कलश - असमय ही छलक पड़ता है स्मृति कलश, गिरती है बूँदें आरक्त कपोलों पर। कभी तप्त था जो तुम्हारे स्पर्श से, अब तुम्हारी स्मृति से शीतल।  नर की अग्नि - व्यवहारिक जीवन में अग्नि के कई उपयोग हैं, पर जब यह मानवीय स्वरूप धरती है तब इसके गुण और विशिष्ट हो जाते हैं। शीतमनाओं को यह ऊष्मा देती है, धारक को जलाकर ह..

तन्हाई - संख्या का महत्व ..इस श्रृंखला की अगली कड़ी फिर कभी ......क्योँकि आजकल हम हैं तन्हा और यह हाल है हमारा ....लीजये प्रस्तुत है आज बहत दिनों बाद आपके लिए यह कवि... धुंधलके में ... - साँझ के धुंधलके में हम तुम जब मिलते हैं कोई गद्गद गीत उभरता है ... गा-गा कर अक्षत अम्बर को थिरकाता है तर्षित तारों को झिलमिलाता है बातुल बिजुरी को मचलाता है.. और मैं आस में इन्कलाब लिए बैठा हूँ - *"*लोग लाशों में भी इश्क तलाश लेते हैं, और मैं आस में इन्कलाब लिए बैठा हूँ.*"* --

सावन की मस्ती - कब आया सावन ,कब बीता सावन जरा भी ना हुआ इसका गुमां कहीं भी ना दिखी नवयौवना बढाती झूले की पींगे ,गाती कजरी बनती अद्भुत समां बरसते ,लरजते कारे -कारे बदरा भी ... गज़ल - इस कदर भी ना सताएं किसी को - इस कदर भी ना सताएं किसी को, कि बोझ लगने लगें वफाएं किसी को, नाराज़ हो किसी से और फिर बात भी ना हो, यूँ भी ना भूल जायें किसी को, दिल और ज़िंदगी खाली है आप... प्रेम का अवसाद - प्रेम के अवसाद का कुहासा जब घना होता है मेरी आंखों में डरी हुई बिल्ली का स्वरूप उतर आता है देखता हूं कटीली झाड़ियों के बीच फंसी हिरन की असहाय-भयाक्रांत आंखो... 

चौराहा - जिंदगी का ये चौराहा , अपने दम पर गर्वित हाथ फैलाये खड़ा ,कुछ इठलाकर , सोचे कि मंजिल दिखता है सबको राह बताता है । जिंदगी के इस चौराहे पर कितनी ही गाड़िया आती ... हानि-लाभ .... - "जुताई करते करते एक जगह उसका हल जमीन में अटक गया| आसपास खोदने पर पता चला कि कोई कलश गड़ा हुआ है| स्वाभाविक है कि उस कलश में स्वर्ण मुद्राएँ ही थीं| कुछ दिनों... मोहन भागवत अनशन पर क्यो नही ? - देखिये साहब वैसे तो इस देश में लोकतंत्र है, न कोई किसी को अनशनियाने से रोक सकता है और न ही जबरदस्ती करवा सकता है। पर इस सवाल का कारण यह है कि सोशल मीडिय... 

ओलिम्पिक हॉकी - आज भारत का मुकाबला न्यूजीलैंड से - लंदन ओलिम्पिक पुरुष हॉकी स्पर्धा में आज भारत का मुकाबला न्यूजीलैंड से होना है। नीदरलैंड्‌स के हाथों अपना पहला मैच गँवाने के बाद प्रतिस्पर्धा में .....पोखरा- फेवा ताल और डेविस फाल - इस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक करें। 12 जुलाई 2012 की शाम पांच बजे तक मैं पोखरा पहुंच गया। मुझे पोखरा के बारे में बस इतना ही मालूम थ...2012 में कुछ नहीं होगा: दबंग दुनिया में ‘चौडगरा’ - 1 अगस्त 2012 को दबंग दुनिया के नियमित स्तंभ ‘ब्लॉग’ में चौडगरा नहीं होगा 

उड़ चला पंछी - उड़ चला पंछी कटी पतंग सा अपनी यादें छोड **** समस्त बंधनों से हो मुक्त उस अनंत आकाश में छोड़ा सब कुछ यहीं यूँ ही इसी लोक में बंद मुट्ठी ले कर आया था ...  ये हम गुनाहगार औरतें हैं - ये हम गुनाहगार औरतें हैं जो अहले जुब्बा की तमकनत से न रौब खाएं न जान बेचें न सर झुकाएं, न हाथ जोडें ये हम गुनाहगार औरतें हैं, के : जिनके जिस्मों की फसल बेच..वृक्ष बोला... - अपना सारा फल देकर वृक्ष मुस्कुराया और उमंग में भरकर उसने कोमल टहनियों को ऊपर उठाया; जैसे अपने हाथ उठाकर सिरजनहार को धन्यवाद दे रहा हो, कृतज्ञता ज्ञापित कर...  

वार्ता को देते हैं विराम, साथ ही समाचार है कि शायर सर्वत जमाल ढूंढ लिए गए हैं।........

बुधवार, 1 अगस्त 2012

भाई तू जरूर आना... ब्लॉग4वार्ता....संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार...कल भाई-बहन के पवित्र स्नेह का पर्व है, रक्षा बंधन. मुझे सबसे अधिक प्रिय है यह त्यौहार. कल से ही हमारे घर इकट्ठे हो जायेंगे हमारी दोनों छोटी बहने और भाई. बहुत इंतजार रहता है हमें इस दिन का. कम से कम २ या ३ दिन सबकुछ भूलकर दिन भर होंगी बातें, खूब सारी मस्ती और अच्छा-अच्छा खाना. आप सब भी अपनी - अपनी तरह से बाँटिये इस ख़ुशी को अपने परिवार के साथ...  आप सभी को रक्षा बन्धन की अग्रिम शुभकामनायें... प्रस्तुत है,  आज की ब्लॉग वार्ता...

आन्दोलन में शामिल होने वाली भारतीय जनता को टीम अन्ना द्वारा "भीड़" कहना, बहुत ही निंदनीय और अशोभनीय है क्या हम भीड़ हैं  ... क्यों प्रीति की बेल बढ़ाई तब , क्यों विरह की आग लगाई अब , कहें कौन हुआ अपराध है कब , जब साथ रहीं हम उनके तब ? बेचैन करें ये नयन बने कारे बादर ..शब्द मूलतः अरबी भाषा के ‘मौसिम’ से बना है, जिसका अर्थ मोटे तौर पर मौसम या ऋतु निकाला जा सकता है.मानसून ..

एक साँझ सूरज ,अपनी स्वणिम किरणों को समेटे पूरव दिशा की ओर धीरे- धीरे ढलता उम्मीदों का सूर्ख रंग नभ में बिखेरे मानो कह रहा हो … “कल मैं फिर आऊँगा” चौंच में दाना दबाए,घोंसले की ओर उड़ते पंछी दूर से आती मेरे जीवन की एक साँझ ...कुछ असभ्‍य चेहरों ने लगा लिया है नक़ाब सभ्‍यता का हर चेहरे पर है चेहरा कई रूपों में मिलता है यह नक़ाब कुछ की कीमत चुकानी होती है कुछ को छीन लिया जाता है कुछ विरासत में पा लेते हैं कुछ की फितरत होती है ... जो हैं ... "खुद " को जीते हैं . मनाते हैं जश्न हरेक बात का तेरे मेरे साथ का . होते हैं मदहोश खोते हैं होश कर लेते हैं वो सब जो यूँ नहीं मुमकिनजी भर के जी लेते हैं ...

महाकालेश्‍वर के उद्भव के बारे में मान्‍यता है कि भगवान शिव के परम भक्त उज्‍जयिनी के राजा चंद्रसेन को एक बार उनके शिवगणों में प्रमुख मणिभद्र ने तेजोमय 'चिंतामणि' प्रदान की भगवान महाकाल के ये रूप आपने नहीं देखे होंगे  अनासक्त जब बाह्य वस्तु में, तब आत्मिक आनन्द है होता. अक्षय सुख वह प्राप्त है करता, स्वयं ब्रह्म में युक्त जो होता. (२१) स्पर्शजनित भोग दुःख कर्ता, आदि अंत उनका श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद...राधा से तो प्रीत पुरानी थी अगले दिन राधा दधि बेचने जब गयी नन्द के मकान के इर्द गिर्द डोलने लगी बावरी बन सबसे मोहन का पता पूछने लगी किसी ने देखा है कृष्ण लीला...

ये कहानी मैंने रचनाकार.ऑर्ग "कहानी लेखन प्रतियोगिता" के लिए लिखी है.ये मेरी पहली कहानी है इसलिए कमियां लाजमी हैं मेरी पहली कहानी... बहुत से लोगों के मत में अन्ना टीम तानाशाही कर रही है, और बाबा रामदेव के आन्दोलन में विघ्न भी उत्पन्न करती है और भारत स्वाभिमान के प्रयासों का लाभ स्वयं ले निंदा करना ज़रूरी है क्या ? ...  जीने की चाहत ना मरने की फुर्सत, गुजरेगी कैसे ज़िन्दगानी हमारी. अदावत किसी से ना कोई गिला, है बस यही एक खासियत हमारी. भला न किया तो बुरा भी ना करना खासियत हमारी...

ये कैसे अपने कि अब तक रू-ब-रू भी न हुए, लेकिन अब तो बहुतेरे अपने जाने-पहचाने नाम, लिखे-उचारे शब्‍दों और चित्र के परोक्ष-यथार्थ से ही 'मूर्तमान' होते हैं। '.ब्‍लागजीन ...स्वलिखित रचनाओं को नियमितरूप से अपने हिन्दी ब्लॉग, ‘जाले’ में डालते हुए एक वर्ष पूरा हो गया है. इसके पीछे प्रेरणा मेरी बेटी गिरिबाला जोशी रही हैमेरे ब्लॉगिंग का एक वर्ष ...  प्यार के गहनतम क्षणों में तुम्हारे और मेरे बीच कुछ शब्द होते हैं जो एक सेतु बनाते है मुझे तुम तक और तुम्हे मुझ तक पहुँचाने के लिए फिर सेतु विलीन हो जाता सार्थक -निरर्थक ...

तू किस सोच मे डूबी है माँ ! मुझको शरण दे या मरण दे ! यही ना ! कितने युगो से निर्वासन की मार, मैं सहती रही, और.... अपने अंत तक फिर भी तेरा वंदन  तू किस सोच मे डूबी है माँ ! ... छोटी छोटी बातों से बनती हैं बड़ी खुशियाँ खुशियों का दामन थामे ही चलती है ये दुनिया वक़्त के समंदर में डूबकर कुछ नहीं मिलता डूबकर, उभरने से बनी है कई कहानियाँ नियति ... पहले बारिश की छीटें खटखटाती... तो हवा खोल दिया करती थी खिड़कियाँ... सब चाल थी तुम्हें खिड़की तक लाने की....अब ये खिड़कियाँ बंद रहती हैं ... है तड़पना मेरी मिल्कियत, तुझे छोड़ना है शराफ़त ।* * * *चाहता था की बनी रहे, दरमियाँ हमारी ये उलफ़त मेरी मिल्कियत ...

जब भी रक्षा -बंधन पास आता जाता है मन भीगा सा , भारी सा होता जाता है ...... राखी के बाज़ार में आवाजें कानो को नहीं दिल को लगती है ....... बहने कितनी प्यार से राखी लेती है , देख कर उनके लिए ख़ुशी और भाई ... भाई बहन का ये पवित्र त्यौहार पुरे भारत वर्ष में बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है |बहने अपने भाई की कलाई पर राखी (रक्षा कवच )बाँधती हैं | ये कवच है भाई बहन का पवित्र बंधन ... बचपन में कहती थी,चंदा है वीर मेरा,नहीं समझती थी तब...चाँद दिखता तो रोज है, पर होता दूर है, अब समझती हूँ...कोई पास होकर भी दूर कैसे होता है, तू कभी इस चाँद सा मत होना तू जरूर आना....

एक व्यंग चित्र 

यहाँ मिलेगा खज़ाना ढूंढिए तो जरा... मुझे दीजिये इज़ाजत  मिलते हैं अगली वार्ता में तब तक के लिए  नमस्कार .....
चलते-चलते मेरी पसंद का एक गीत 

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