
संध्या शर्मा का नमस्कार.... क्या "स्त्री" होना अपराध है ? दिन भर ताना सुन
कर भी,
कितनी खुश होती है वो...
बिना 'खाने' के
दिन गुजर जाता है
उसका...
बिना 'शिकायत' के
जिंदगी गुजार देती है
'वो'...
फिर भी उस पर ये 'इन्सान'
इतना 'शैतान' क्यों है ?
हैवान क्यों है ?
क्या अपराध किया जो वो "स्त्री" हुयी ?
राते बिता देती है वो
रोटी से बाते करके...
अगर एक दिन 'मै' देर से आया...
घर में अकेले पूरी 'जिंदगी'
बिता देती है 'वो'
सीमा में खड़े 'पति' के लिए....
साथ...