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| समीर यादव जिनका ब्लाग है : मनोरथ चेहरों वाली किताब पर समीर |
युवा डी एस पी समीर यादव के दिल में एक कवि एक सृजन कर्ता का दिल धड़कता है. मेरे मित्र दीपेंद्र बिसेन ने काफ़ी कुछ बताया समीर भाई के बारे में. साथ साथ ट्रेनिंग पर थे अकादमी में दौनों साथ जो थे. खुशदीप की तरह ब्लॉगिंग के दिलीप कुमार..., तो नहीं हैं पर सदाबहार तो अवश्य है सुकवि बुध रामजी के चिंतन का गहरा असर है इन पर .
सबले गुरतुर गोठियाले तैं गोठ ला आनी बानी के
अंधरा ला कह सूरदास अउ नाव सुघर धर कानी के
बिना दाम के अमरित कस ये
मधुरस भाखा पाए
दू आखर कभू हिरदे के
नई बोले गोठियाये
अंधरा ला कह सूरदास अउ नाव सुघर धर कानी के
बिना दाम के अमरित कस ये
मधुरस भाखा पाए
दू आखर कभू हिरदे के
नई बोले गोठियाये
थोरको नई सोचे अतको के दू दिन के जिनगानी हे
सबले गुरतुर गोठियाले तैं गोठ ला आनी बानी के
सबले गुरतुर गोठियाले तैं गोठ ला आनी बानी के
एक आखर दुरपती के बौरब
जब्बर घात कराइस
पापी दुर्योधन जिद करके
महभारत सिरजाइस
जब्बर घात कराइस
पापी दुर्योधन जिद करके
महभारत सिरजाइस
सुकवि की पूरी कविता इधर देखिये
मौन साधक को मेरी और चर्चाकार मंडली की और से हार्दिक शुभ कामनाएं
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गोल गोल रानी कित्ता कित्ता पानी, एक दो तीन चार, अटकन-चटकन दही चटाकन जैसे बाल गीत युक्त खेल किधर और कब गुम हुए पता नहीं. बच्चे wwf,मारपीट युक्त कार्टून फ़िल्मों में मशरूफ़, या फ़िर प्ले स्टेशन के सामने , यानि कुल मिला के सब कुछ बदल गया. अब तो मुहल्ले से अक्कड़-बक्कड़ बम्बे बों की सामूहिक मधुर आवाज़ भी नहीं सुनाई दे रही बुद्धू बक्से के सामने बैठी आर्ची एक दिन अचानक बोल पड़ी :- "अंकल, है न उसका मडर किया था खुद से नहीं मरा " मर्डर, खुद से मरना जैसे शब्द से परिचित कराता बुद्धू बक्से से ज़्यादा मूर्ख मुझे वो अभिभावक लगे जो बच्चों को क्रियेटिविटि से दूर रखते हैं.
भगवान ऐसे अभिभावकों को सद बुद्धि दे .
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