गुरुवार, 14 जनवरी 2016

मकर संक्रांति 'तीळ गुळ घ्या आणि गोड गोड बोला' ब्लॉग4वार्ता....संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार.........तिल और गुड की मिठास आप सभी के जीवन को मिठास और आनंद से भर दे और मकर संक्रांति के सूर्योदय के साथ एक नए सवेरे का शुभारम्भ हो इसी कामना के साथ आप सभी को ब्लॉग वार्ता परिवार की ओर से  मकरसंक्रांति, लोहड़ी एवं पोंगल की  हार्दिक शुभकामनायें.... लीजिये प्रस्तुत है, लम्बे अंतराल के बाद एक लेट लतीफ़ वार्ता ................ सूर्योपासना का पर्व है मकर संक्रांति -हमारे भारतवर्ष में मकर संक्रांति,...

सोमवार, 2 जून 2014

क्या "स्त्री" होना अपराध है ??? ब्लॉग 4 वार्ता....संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार.... क्या "स्त्री" होना अपराध है ? दिन भर ताना सुन कर भी, कितनी खुश होती है वो... बिना 'खाने' के दिन गुजर जाता है उसका... बिना 'शिकायत' के जिंदगी गुजार देती है 'वो'... फिर भी उस पर ये 'इन्सान' इतना 'शैतान' क्यों है ? हैवान क्यों है ? क्या अपराध किया जो वो "स्त्री" हुयी ? राते बिता देती है वो रोटी से बाते करके... अगर एक दिन 'मै' देर से आया... घर में अकेले पूरी 'जिंदगी' बिता देती है 'वो' सीमा में खड़े 'पति' के लिए.... साथ...

सोमवार, 13 जनवरी 2014

मकरसंक्रांति- तिल गुड़ खाओ पतंग उड़ाओ... ब्लॉग4वार्ता....संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार...."तिल और गुड घ्या गोड-गोड बोला"   त्यौहार की उमंग और आकाश में लहराती, हिचकोले खाती रंग - बिरंगी पतंग आप सभी के जीवन को नए उत्साह और आनंद से भर दे और मकर संक्रांति के सूर्योदय के साथ एक नए सवेरे का शुभारम्भ हो इसी कामना के साथ आप सभी को ब्लॉग वार्ता परिवार की ओर से  मकरसंक्रांति, लोहड़ी एवं पोंगल की  हार्दिक शुभकामनायें....  आइये अब चलें ब्लॉग  4 वार्ता की ओर कुछ उम्दा लिंक्स के साथ...    ...

रविवार, 3 नवंबर 2013

रंगोली सजाएं, दीप जलाएं... ब्लॉग4वार्ता....संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार....... किसी देहरी आज अँधेरा न रहने दें आओ बस्ती झोपड़ियों में दीप जलाएं। अपनों के तो लिये सजाये कितने सपने, सोचा नहीं कभी उनका जिनके न अपने, भूखे पेट गुज़र जाती हर रातें जिनकी, चल कर के उनमें भी एक आस जगाएं। बना रहे हैं जो दीपक औरों की खातिर, उनके घर में आज अँधेरा कितना गहरा, बिजली की जगमग में दीपक पड़े किनारे, इंतज़ार सूनी आँखों में, दीपक बिक जाएँ। महलों की जगमग चुभने लगती आँखों में, अगर अँधेरा रहे एक भी घर में बस्ती...

मंगलवार, 22 अक्टूबर 2013

आ जाना चाँद ...ब्लॉग4वार्ता....संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार.... 'पूर्णस्य पूर्णमादाय ' कहने से तात्पर्य यह है की यदि तुम स्वयं इस सत्य की अनुभूति कर सको कि वही ' पूर्ण ' तुम्हारे साथ साथ इस विश्व ब्रह्माण्ड के कण कण में भी प्रविष्ट है तो फिर उस ' पूर्ण ' के बाहर शेष बचा क्या ? इसी को कहा गया - ' पूर्णमेवावशिष्यते '.... ! 'करवा चौथ' के मंगल पावनपर्व पर हार्दिक शुभकामनायें ....आइये अब चलें ब्लॉग  4 वार्ता की ओर कुछ उम्दा लिंक्स के साथ... पिया का घर-रानी मैं ...

मंगलवार, 3 सितंबर 2013

बाबा बि‍ज़ी..अच्छे दिन के साईड-इफैक्ट....ब्लॉग 4 वार्ता... संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार... जब-जब ओस की बूँदें बेचैन होंगी घास के मुरझाये पत्तों पर ढरकने को धीरे से धरती भी छलक कर उड़ेल देगी भींगा-भींगा सा अपना आशीर्वाद और बूँदों के रोम-रोम से घास का पोर-पोर रच जाएगा हरियाली की कविता से तब-तब मैं पढ़ ली जाऊँगी उन तृप्ति की तारों में जब-जब आखिरी किरणों से सफ़ेद बदलियों पर बुना जाएगा रंग-बिरंगा ताना-बाना उसमें घुलकर फ़ैल जाएगा कुछ और , कुछ और रंग हौले से आकाश भी उतरकर मिला देगा अपनी सुगंध उन रंगों की कविता में...

सोमवार, 12 अगस्त 2013

सुनो भाई गप्प-सुनो भाई सप्प... ब्लॉग 4 वार्ता... संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार... रात की झील पर.....तैरती उदास कि‍श्‍ती हर सुबह आ लगती है कि‍नारे मगर न जाने क्‍यों ये जि‍या बहुत होता है उदास ..... ऐ मेरे मौला कहां ले जाउं अब अपने इश्‍क के सफ़ीने को तेरी ही उठाई आंधि‍यां हैं है तेरे दि‍ए पतवार.... कहती हूं तुझसे अब सुन ले हाल जिंदगी की झील पर उग आए हैं कमल बेशुमार उठा एक भंवर मुझको तो डूबा दे या मेरे मौला अब पार तू लगा दे....लीजिये प्रस्तुत है, आज की वार्ता ........... एक ऐतिहासिक दिन ... ...

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