सोमवार, 7 फ़रवरी 2011

सुबह की शांति के देश में .. स्‍वास्‍थ्‍य और देशी नुस्‍खे .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

आप सबों को संगीता पुरी का नमसकार, मैं प्रति सप्‍ताह नए चिट्ठों का सवागत करते हुए ही वार्ता लिखा करती थी , पर चिट्ठाजगत बंद होने के बाद नए चिट्ठों की सूचि नहीं मिल पाने से कुछ दिनों से यह संभव नहीं हो सका था। इतने दिनों से बंद चिट्ठा जगत दो तीन दिन पूर्व भले ही एक दिन खुलकर फिर बंद भी हो गया , पर झटके में ही एक साथ 49 नए चिट्ठे स्‍वागत करने के लिए छोड गया। मेरा नेट भी गडबड चल रहा है , अभी अचानक ठीक हुआ है तो जल्‍दी से उन्‍हीं में से कुछ चिट्ठे छांटकर आज आपके लिए ब्‍लॉग4वार्ता लेकर प्रसतुत हूं .....


इसमें सबसे पहला चिट्ठा सतीश्‍ चंद्र सत्‍यार्थी जी का सुबह की शांति के देश में है ,  इन्‍होने अपनी पहली पोस्‍ट 17 दिसंबर को ही लिखा था .. ब्‍लॉगिंग : यह रोग बडा है जालिम , जब मैं समझ भी नहीं सकी थी कि उन्‍होने पहली पोसट लिखी है , क्‍यूंकि मुझे याद था कि मैं पहले भी इनके पोस्‍ट पढ चुकी हूं , इसलिए उसपर मेरी टिप्‍पणी थी ..



संगीता पुरी said...
सारे ब्‍लॉगर की तरह आप भी गलतफहमी में हैं .. ब्‍लॉगिंग तो एक ऐसा रोग है .. जो कई रोगों का इलाज करता है !!
और जब ब्‍लॉग जगत के माध्‍यम से 18 दिसंबर की इनकी पोस्‍ट का लिंक मिला तो मैने इनका इस नए चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में स्‍वागत भी किया और यहां के स्‍वागत पोस्‍ट में चर्चा भी कर रही हूं। अब ऐसे में कभी कभी गलतफहमी हो जाती है कि मैं बिना पढे ही स्‍वागत करती हूं तो इस विषय में कोई सफाई देना व्‍यर्थ है। दिल्‍ली से कोरिया तक और राष्‍ट्रीय अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्दों पर अपनी राय इन्‍होने बखूबी रखी है , आप लोग जरूर पढें। 

स्‍वागत के लिए आए चिट्ठों में दूसरे से लेकर दसवें नंबर तक किसी रौनक सैनी जी का चिट्ठा है , जिन्‍होने इतने चिट्ठे बनाकर हर जगह एक ही सामग्री पोसट की है , पहले चिट्ठे खानापूर्ति का  लिंक मैं दे देती हूं , बाकी की कोई आवश्‍यकता नहीं। इसके अलावे कुछ और चिट्ठों को देखिए ..

स्‍वास्‍थ्‍य और देशी नुस्‍खे लेकर आयी हैं मीनाक्षी जी .. लिंक दिया है शहद के गुण , दोष और प्रभाव का।
कमल शर्मा जी अघोर उपनिषद में लेकर आए हैं ... अपनी बात:गुरू कृपा केवलम।
कप्‍तान जी जानकारी दे रहे हैं .. अल्‍लाह की याद का माह है मुहर्रम ।
कुछ गम कुछ अल्‍फाज में अनुज पव्‍वार जी लिखते हैं .. मेरी ख्‍वाहिश है कि फिर से मैं फरिश्‍ता हो जाऊं।
सुनीता जी की रचना में पढिए ... तुम कब आओगे मैत्रिये ।
मनोज कुमार के दुआर में ... दो कविताएं बू और मेरा समय।
देहदान के बारे में जानकारी दे रहे हैं .. पीयूष बत्रा जी लायन्‍स क्‍लब मे।
जगदीश भागवत जी की एक सोंच ये भी ... कारपोरेट की रेस में खेल का मैदान।
अली सोहराब में लिखते हैं दीपक कुमार जी .. ऐसे तो ध्‍वस्‍त हो जाएगा गोलघर।
सर्वर फिर डाउन हो जाए , उससे पहले विदा लेती हूं .. मिलती हूं अगले सप्‍ताह फिर से कुछ नए चिट्ठों के साथ ..

रविवार, 6 फ़रवरी 2011

भारतीय गरीब है लेकिन भारत देश कभी गरीब नहीं रहा... ज़रा सोचिए.... - ब्लॉग4वार्ता - देव कुमार झा

मित्रों आप सभी को देव बाबू की राम राम,

आज बस स्टाप पर दो लोगों की बात सुनी... सुन कर मन हैरान हो गया... और हिन्दुस्तानियों की सोच पर दांतों तले ऊँगली दबाने का मन हुआ... बोले तो मेरा भारत महान वाली फीलिंग उमड़ उमड़ कर आ रही थी....  दोनों लोग शक्ल से मजदूर कटेगरी के प्रतीत हो रहे थे.... उनमे से एक एकदम मरियल और मर-सिड्डे सा लग रहा था... तम्बाकू और बीडी पीने से उसकी हालत टी बी के मरीज जैसी लग रही थी.... वैसे उनकी बात चीत का मुद्दा था काला-पैसा....  दोनों ही लोग अखबार पढ़ रहे थे और साथ ही साथ सरकार को भी गरिया रहे थे.... उनमे से जो थोडा ठीक ठाक लग रहा था,  उसने कहा की सारा वित्तीय लेन देन एकाउंट से एकाउंट होना चाहिए... वैसे तो दो मिनट की उनकी बातचीत (जो मैं सुन पाया) से मेरे मन में एक ही बात आ रही थी की मजदूर वर्ग भी आज कल जागरूक है... त्रस्त है.... काला पैसा.... काला धन....  वापस लाओ... इस काले पैसे को हिंदुस्तान के विकास में लगाओ.... मगर क्या आपको नहीं लगता की इसके पीछे होने वाली सरकारी कोशिशें नाकाफी हैं... "भारतीय गरीब है लेकिन भारत देश कभी गरीब नहीं रहा" ये कहना है स्विस बैंक के डाइरेक्टर का.... कम से कम इस दिशा में आज कल जो जागरूकता आई है उसके लिए मीडिया और सूचना तंत्र बहुत हद तक बधाई के पात्र हैं |  


वैसे कहने को तो कुछ सरकारी कोशिशें भी हैं... जो केवल मीडिया की वजह से बाहर आयीं है.... अभी तक स्विस बैंक में काला धन रखनेवाले 18 में से 17 को नोटिस, एक तो भैया निपट लिया.... तो आशा है कानून अपना काम करेगा... और इस मामले में लीपापोती के आगे भी कुछ कार्यवाही होगी.... 

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चलिए आगे बढ़ते हैं और आज की वार्ता से आपको रूबरू करते हैं.... 

घर पर पॉपकार्न केवल कैटल कॉर्न :- शुरुआत ही भोजन से... 


कि ऐसे ज़ख्म से रिसता क्या है :- भावनाओं की उहापोह...

एयरटेल की नयी सुविधा एयरटेल मनी :- सही है भाई, अब मोबाईल शापिंग माल बन जाएगा.. देखते जाईए..



कभी-कभी विषय बदलकर पोस्ट लिखा करें :- बिलकुल सही जी... कुछ ऐसे ब्लोग्स को भी जानिए जो लम्बे समय से अप-डेटेड नहीं हैं... 

पैसा रिश्तों में दरार नहीं डालता। पैसा तो असली रिश्तों की पहचान कराता है। अगर कोई आपके पैसे खा जाए तो समझ लीजिए कि वह आपका असली दोस्त कभी नहीं था। बस हेलो- हाय, बाय-बाय था।  वैसे कहा बिलकुल सही है.... अपनी अपनी सोच है... मगर मेरा अनुभव तो बिलकुल ऐसा ही है भाई....

प्रायश्चित :- बहुत अच्छी लघु-कथा... 


और चलते चलते कुछ बातें कविता के बारे में – पहला भाग :- शिवराम :- रवि भैया, भाग-२ का इंतज़ार रहेगा... 

तो फिर आज की वार्ता यही तक...  फिर मिलेंगे... 

जय हिंद
देव कुमार झा 

शनिवार, 5 फ़रवरी 2011

मेरे लिए उपहार - फिर से मिल जाये संयुक्त परिवार - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो ,
प्रणाम !

आज आप सब के लिए इतिहास के पन्नों से कुछ रोचक जानकारी ले कर आया हूँ ... लीजिये देखिये किस तरह हम भारत वासियों के अनमोल रत्न बर्बाद किये गए ... अंग्रेजो के शासन काल में ... पर वह लोग यह भूल गए ...

है बात कुछ कि हस्ती मिटती नहीं हमारी ... 
सदियों रहा है दुश्मन अहेले जहाँ हमारा !!


और जिस जानकारी की बात मैं कर रहा था वो यह है ...

ताजमहल के शिखर पर लगा स्वर्ण कलश ठीक दो सौ वर्ष पूर्व 1810 में उतारा गया था। ठीक दो सदी पहले की यह घटना अपने समय का सबसे चर्चित और ऐसा वाकया थी जिसे अंग्रेज पूरी तरह गुपचुप रखना चाहते थे। बाद में 1811 में इस कलश की जगह तांबे का कलश लगवाया गया जिस पर सोने का पानी चढ़ा था।
हटाए गए सोने का कलश चालीस हजार तोले यानि लगभग चार सौ किलो सोने का था। यह कलश तीस फुट छह इंच ऊंचा था। इसके हटाए जाने का मुख्य कारण ईस्ट इंडिया कंपनी के खजाने के लिए धन जुटाया जाना था। हालांकि ईस्ट इंडियाकंपनी के रिकार्ड में इस आय का कोई साक्ष्य नहीं मिलता।
इतिहासकार प्रो.रामनाथ के अनुसार उतारे गए स्वर्ण कलश का सोना लुट गया। स्वर्ण कलश को हटाये जाने के बाद लगाये गये कलश को अब तक 1876 और 1940 में दो बार और बदला गया। इस प्रकार वर्तमान में ताजमहल के गुंबद पर लगा हुआ कलश बदले जाने के क्रम में चौथा है। जो भी कलश ताजमहल की शोभा बना वह मूल कलश की ही प्रतिकृति है।
कलश की ऊंचाई और आकार के बारे में अक्सर होने वाली पूछताछ के चलते 1888 में ताजमहल के बायीं ओर बने मेहमान खाने के चबूतरे पर काला पत्थर इस्तेमाल कर मूल कलश की अनुकृति बनवा दी गई जो अब भी मौजूद है।
मध्यकालीन इतिहास के जानकार राज किशोर राजे के अनुसार मूल गुंबद से कलश उतरवाने का कार्य आर्थिक लोभ से जरूर किया गया किंतु ईस्ट इंडिया कंपनी के खजाने को इससे कोई लाभ नहीं हुआ। यह बात लोगों से गुंबद की मरम्मत के नाम पर छुपाई गई। राजे के मुताबिक दो सौ साल पहले सोने के कलश को उतरवाने का काम जहां कंपनी सेना में कार्यरत जोजेफ नाम के अधिकारी ने किया था वहीं इसकी काले पत्थर की अनुकृति आगरा के कलाकार नाथू राम ने बनाई।

चलिए अब बात करते है आज की ... 

सुबह सुबह देखा तो पाया चिट्ठाजगत लौट आया है ... पर शाम होते होते फिर चला गया ... पर प्राप्त जानकारियों के अनुसार बहुत जल्द ही वापसी होने को है फिलहाल टेस्टिंग चल रही है ! आशा है हम सब का इंतज़ार जल्द ख़त्म होगा ! वैसे तब तक आपकी सेवा के वार्ता दल है ना ... आपको रोज़ पोस्टो के लिंक्स मिलते रहेंगे ... यह वादा है !

ब्लॉग 4 वार्ता  के इस मंच पर प्रस्तुत है आज की ब्लॉग वार्ता ...

सादर आपका 


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अविनाश जी बता रहे है कि एक बड़ी खबर आ रही है : आज महफूज भाई दिल्‍ली में हिन्‍दी ब्‍लॉगरों से मिले हैं  :- वैसे इसमें इतना हल्ला मचाने जैसा क्या है यह वो ब्रेक के बाद बतायेगे !

कुमार राधारमण जी हमेशा की तरह हमारे लिए चिंतित है और बता रहे है कि कम उम्र में सेक्स और हार्मोनल दवाओं से कैंसर हो सकता है !

आज डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" जी का जन्मदिन है और वो "मेरे लिए उपहार" में अपने उपहारों के बारे में बता रहे है !

गीताश्री जी ने एक बेहद अहेम मुद्दे को अपने ब्लॉग पर उठाया है और बताया है कि यौन उत्पीडऩ विधेयक उम्मीदों पर खरा नहीं !

रश्मि रविजा जी आज उस चिंगारी से मिलवा रही है जो आज एक दहकती हुयी ज्वाला बन चुकी है और पूछ रही है मिस्र की क्रांति की आग को क्या 'आसमा महफूज़' के वीडियो ने चिंगारी दिखाई??

गगन शर्मा जी भी कुछ जरुरी तथ्य रखते हुए बता रहे है कि क्षीण होती जाती है स्पर्श शक्ति भी धूम्रपान से ! 

जब ब्लॉग जगत में इतनी हलचल हो तो अपने 'असरदार' सरदार पाबला जी भी कहाँ पीछे रहते ... बातों बातों में डरा दिया और बतया कि टिप्पणियों में लिंक देने वाले हो जाएं सावधान !!

आजकल हमारे कुछ भाइयों पर '१४ फरवरी' वाला भूत चढ़ा हुआ है ... उनमे से एक है हमारे छोटे भाई देव बाबु ... बहुत ही आशिकाना हो रहे है आजकल ... ब्लॉग पर तो जोड़े से मिलते है ही आज अन्दर की बातें भी बताने लगे ... बोले कि मिसेज कहती है कि ओह ! तुम कितनी अच्छी बातें करते हो!!! :-देव 

अब इनको कौन समझाए कि यह सब बातें सब के सामने नहीं की जाती ... है कि नहीं ... लीजिये एक शेर मुलाहेज़ा फरमाइए दिल ले के चले हो तो लिए जाओ नजर भी- जिगर मुरादाबादी या पूरी नज़्म ही पढ़ लीजिये आप भी क्या याद करेंगे !

रुद्राक्ष पाठक कल तक कह रहे थे पढाई के मारे टाइम नहीं मिलता ... आज कह रहे है गेम खेलो और दुआएं लो !

जब कोई चाहने वाला मिलता है तो दिल खुश हो जाता है पर चलिए उपदेश सक्सेना जी से पूछते है कि अगर कुछ ब्लॉगर मिलें तो ब्‍लॉगर से ब्‍लॉगर मिले : शाम हो गई हसीन ! 

जब मिलने मिलाने की बात चल रही हो तो कुछ शेरो - शायरी जरुरी हो जाती है ... तो मैं दावत देता हूँ हरकीरत ' हीर' जी को कि वो आयें और अपनी रचनाएँ पत्थर हुई बूंद ....बैसाखियाँ.....और फफोला .... पेश करें ! 

जब इतना सब अच्छा अच्छा हो रहा हो तो दिल से यही दुआ निकलती है जो अन्तर सोहिल जी के दिल से निकली कि फिर से मिल जाये संयुक्त परिवार !

और जब ऐसी बात सुनने को मिले तो क्या हम क्या चीज़ है साहब बड़े बड़े कह उठे ... व्हाट एन आइडिया सर जी...खुशदीप 

लीजिये यह देखिये रवि रतलामी साहब अपना जीवन सुधार रहे है और धार्मिक टीवी चैनलों के साथ एक दिन बिता रहे है !

'अदा' जी भी कब पीछे है ... गाना भी सुनवा रही हैं और बता रही हैं कि ये लो यादों का सहारा हाथों से फिसल गया......गीत ..तुम्हीं मेरे मंदिर..

संगीता दीदी ने भी सितारों से लम्बी बातें की है और सब को बता रही हैं कि कैसा रहेगा आपके लिए 4 , 5 और 6 फरवरी का दिन ?? 

अपने सतीश भाई साहब भी कभी कभी हद करते है ... पर जब करते है अपनी ही बात करते है ... और अपनेपन से करते है लीजिये आप भी देख लीजिये आज क्या कह रहे है नज़रिए हो गए छोटे हमारे -सतीश सक्सेना

अच्छा एक जरुरी बात ... मुफ्त एंटीवायरस तो नहीं चाहिए आप में से किसी को ... क्या कहा हाँ ... अरे तो यहाँ जाइये ना AntiVir Personal का नया संस्करण नवीन प्रकाश जी से ले लीजिये ! 

पहली कविता , जैसे कोई सीख | 

कुलवंत हैप्पी साहब भी काफी लम्बे समय तक ब्लॉग जगत से दूर रहे पर अब जब आये है तो देखिये 'मिस्त्र में जनाक्रोश जिम्मेदार कौन' विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित करवा दिए !

जब कहीं दूर देश में ऐसी घटना हो रही हो और अपना कोई वहाँ हो तो बहुत चिंता हो जाती है ... आजकल तो हाल हम लोग फोन कर लेते है पर पहले तो सिर्फ़ खतो से ही एक दुसरे के हाल चाल मिला करते थे ... क्या दिन थे वह भी ... है ना ! वैसे ख़त लिखते है आप आजकल ... अगर लिखते है तो जिसको लिखा उसको मिला या नहीं इसकी चिंता भी रहती होगी तो लीजिये फिर यह खबर खास आपके लिए ही है ... अब लीजिये अपने खतों की खबर - यूआईएडीआई से जुड़ा डाक विभाग |


जुगाड़,इंतज़ाम,व्यवस्था, कानून की ज़द में न हो तो भी क़ानून की ज़द में लाकर करो यही है सरकारी चाकरी का सूत्र हैं ...इन सूत्रों का प्रयोग करते जाइये नौकरी करते जाइये ... अब यह ज्ञान भरी बातें हम तो कर नहीं सकते ... यह तो वोही जाने जो सरकारी मुलाजिम हो या रहा हो ... तो सही समझे आप यह ज्ञान दे रहे है अपने गिरीश दादा जो कि निकल पड़े है ... खुली सड़क पर अपना सीना ताने एक पद-जात्रा पर !


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आज की ब्लॉग वार्ता बस यहीं तक ..... अगली बार फिर मिलता हूँ एक और ब्लॉग वार्ता के साथ तब तक के लिए ......
जय हिंद !!

शुक्रवार, 4 फ़रवरी 2011

वार्ता लेकर फिर हाजिर हूँ - ब्लॉग 4 वार्ता - रुद्राक्ष पाठक

मेरे सभी बड़ो और  सभी मित्रो को मेरा प्रणाम !

लम्बे समय से वार्ता ना कर पाने के लिए माफ़ी चाहूँगा | स्कूल की पढाई की वजह से ब्लॉगिंग को बिलकुल भी समय नहीं दे पता हूँ लेकिन कोई बात नहीं मैं फिर से अपनी वार्ता लेकर प्रस्तुत हूँ आशा है कि आपको ये पसंद आयेगी |

अपनी वार्ता शुरू करने से पहले आपको एक चुटकुला सुनना चाहूँगा 


नर्सरी-क्लास में बैठी टीचर बच्चों की कापिया जाच रही थीं। बच्चे अपना काम खत्म करके बतिया रहे थे। इतने में बाहर से एक चुनावी जुलूस निकला। नगर पालिका के चुनाव थे। उनके नारे सुन कर एक बच्चा गौरव भी नारे लगाने लगा- ''जीतेगा भई, जीतेगा- दीपक शर्मा जीतेगा।'' अन्य बच्चे भी उसी के स्वर में स्वर मिलाते हुए बोलने लगे। टीचर ने विशेष रूप से गौरव को डाटते हुए सबको चुप रहने को कहा। गौरव एक बार तो सहम गया, फिर बड़ी मासूमियत से बोला- ''मैम, मेरे पापा है दीपक शर्मा। आप भी उनको वोट डालना। मैम, प्लीज डालोगी न?''
''हा भई, हा'' कह कर मैम ने पीछा छुड़ाया। थोड़ी देर तो वे चुप रहे, फिर शोर करने लगे। टीचर ने चिल्लाते हुए कहा, ''देखो गौरव! चुप हो जाओ। नहीं तो मैं तुम्हारे पापा को वोट नहीं डालूंगी।'' इसके बाद न गौरव बोला, न अपने साथियों को बोलने दिया।


तो लीजिये लिंक्स प्रस्तुत है :

गुरुवार, 3 फ़रवरी 2011

बस ये मत पूछना कि क्यूँ लिखा? -- ब्लॉग4वार्ता -- ललित शर्मा

नमस्कार, अखबार के एक समाचार ने आज झकझोर डाला। नैतिक पतन की पराकाष्ठा नजर आई। केन्द्र सरकार ने एक घटिया प्रस्ताव राज्य सरकारों को भेजा था। जिसमें बच्चों के लिये सेक्स की कानूनन न्यूनतम उम्र को घटाकर मात्र 12 साल करने का उल्लेख था। अब यह तो पता नहीं किस घिनौने अफ़सर की करतूत प्रस्ताव के रुप में राज्य सरकारों के पास भेजी गयी। लेकिन इस प्रस्ताव से केन्द्रीय सचिवालयों  में बैठे विकृत मानसिकता के लोग होने का पता चल गया। यह दीमागी दिवालिएपन की इंतिहा है। इस तरह के लोगों की पहचान कर उन्हे पद मुक्त करना चाहिए। जिस मंत्रालय ने यह प्रस्ताव भेजा था उसके  मंत्री को जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफ़ा देना चाहिए। अब चलिए ललित शर्मा के साथ आज की ब्लॉग4वार्ता पर...

इस मुद्दे पर अनिल पुसदकर कहते हैं कि अफ़सोस की बात तो ये है कि सड़ी-सड़ी बातों के लिये हंगामा कर देने वाले सभी राजनैतिक दल खामोश बैठे है।ऐसा घटिया प्रस्ताव बनाने वाले के खिलाफ़ तो जांच कर  कड़ी कार्रवाई होनी चाहिये।सिर्फ़ ज़ल्दी बड़े होने के नाम पर बच्चों को सेक्सूयल रिलेशनशीप के लिये इतनी कम उम्र में ही अनुमति दे देना इस देश के साथ सांस्कृतिक और धार्मिक अपराध है।कहने को ये ज़रूर कहा गया है कि 12 साल की उम्र मे सेक्स के दौरान इंटरकोर्स की अनुमति नही होगी या बिना इंटरकोर्स के वे अपनी उम्र के बच्चों के साथ सेक्स कर सकेंगे।पता नही कौन सा विद्वान अफ़सर य नेता था जो सेक्सूअल संबंधो के बीच इतनी बारीक लकीर खींच कर दिखा रहा है।

इसी मुद्दे पर एक खरी खरी पोस्ट पर के आर बारस्कर भी लिखते हैं कि जिस महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से यह बिल भेजने की बात चल रही है उसके मुखिया का नाम मैंने ढूँढना चाह तो श्रीमती कृष्णा तीरथ का नाम सामने आया.. सोचकर हैरानी होती है कि एक महिला होकर वो इस प्रकार कि कलुषित सोच रखती है ... क्या यह कांग्रेसी संस्कृति का असर है? या वे पागल हो गयी है? या वे भी इटली या अमेरिका की अगेंट बन गयी है? इनके इस तरह के पागलपन को जनता कभी स्वीकार नहीं करने वाली है।

आगे कहते हैं -- सबसे पहले वे अपने १२-१३ साल के बच्चो-नाती, पोतो को इस बात की जानकारी दे और उन्हें सेक्स करने की छूट दे दे.. उनके लिए सेक्स पार्टनर तलासने में उनकी मदद करे.. जब मिल जाये तो उनसे अपने सामने सेक्स कराये.. उनकी मानसीकता जांचे, उनसे उनके अनुभव के बारे में पूछे.. अगर संभव हो तो सेक्स के समय वहा उपस्थित रहे.. अगर उनका अनुभव ठीक रहा तो ही इस कानून को देश पर धोपा जाये..

दिव्या जी का यहाँ सौ टका सही कहना है -- ये खबर तो समाचार में नहीं सुनाई दी । आपके ब्लॉग से ही पता लगा। पढने के बाद लगा की वास्तव में विकृत मानसिकता वाले ही सत्ता में बैठे हैं। जिसने भी ये योजना बनायी है पागल रोगी तो है ही साथ ही किसी आतंकवादी जैसा शातिर दिमाग भी रखता है । ऐसे पागलों के टुकड़े करके चील-कव्वों कों खिला देना चाहिए।

मीनाक्षी पन्त जी का कहना है -- वेसे तो समाज मै हर कोई अपने पैमाने से हर बात को आंकता है पर मेरे ख्याल से इस मुद्दे को रखने से पहले किसी ने भी सोचना वाजिब नहीं समझा जबकि ये बहुत ही गहन मुद्दा है जब देश के एसे बच्चों की बात हो रही हो जो अभी कुछ सीख ही रहें हों और जिन्हें अच्छे और बुरे का ठीक से ज्ञान भी न हो तो उनके हाथ मैं इतना बड़ा निर्णय सिर्फ प्रयोग करने के माध्यम से छोड़ दिया जाये मेरे ख्याल से बहुत गलत हो सकता है क्युकी इस उम्र मै तो उन्हें सहारे की और कुछ बेहतर कर सकने के लिए निर्णय देने की जरूरत होती है न की इतनी बड़ी जिम्मेदारी डाल देने की जिससे की वो सही और गलत का फ़ेसला ही न कर पाए ! इससे से तो साफ़ जाहिर है की जिसने भी ये निर्णय लिया है वो अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से निभा ही नहीं पा रहा है ? 

केवल कृ्ष्ण एक अच्छे लेखक और रिपोर्टर हैं वर्तमान में नेशनल लुक रायपुर में सह सम्पादक के पद पर कार्यरत हैं वे मनोज ब्यास के आलेख जंगल का भगवान प्रकाशित करते हुए लिखते हैं --बार नवापारा से लगे देवपुर के जंगल का एक हिस्सा सागौन की खास किस्मों के लिए जाना जाता है। अंग्रेजी हुकूमत के दौरान मनीराम नाम के एक बीटगार्ड ने सागौन का यह जंगल तैयार किया था, जिसकी उसे सजा दी गई। मध्यप्रदेश सरकार ने तो मनीराम के पोते को सम्मानित कर अपना हक अदा कर दिया पर छत्तीसगढ़ सरकार ने पूछा भी नहीं। मनीराम प्लांटेशन की अब इतनी दुर्गति हो गई कि कुछ साल में नामोनिशान खत्म हो जाएगा।पौने तीन मीटर की मोटाई और 28 मीटर तक ऊंचे मनीराम के सागौन देखकर लोग दांतों तले ऊंगली दबा लेते हैं। आज से 110 साल पहले मनीराम ने देवपुर के जंगल में सागौन के पौधे रोपे थे।

आगे लिखते हैं --पिथौरा ब्लाक के कुम्हारीमुड़ा निवासी मनीराम बीटगार्ड था, गिधपुरी गांव के लोगों का कहना है कि नौकरी से निकाले जाने के बाद मनीराम पागलों की तरह भटकने लगा था, फिर उसकी मौत हो गई। मरने के बाद उसकी आत्मा जंगल और गांव में भटकती थी, जिसे बैगाओं ने मिलकर मनीराम प्लांटेशन के बीच ही एक बरगद के पेड़ में स्थापित किया। इसके बाद उसकी आत्मा शांत हुई और भटकना बंद किया। होली, दिवाली, हरेली सभी  त्योहारों में उसकी पूजा की जाती है।

"बस ये मत पूछना कि क्यूँ लिखा"जाने वाला तो चला गया वो किसी ने नही पूछा क्यूँ चला गया, क्या हुआ ऐसा! हाँ कई कविताएँ जरूर लिख दी अपनी अपनी समझ के साथ कोई कहता कि गाँधी जी के बाद भी देश चल रहा हे कोई न जाने कहा से किसी कि लिखी ह...कुतर्कियों के सिर पर चढा प्रोटीन का भूत इन्सान पर हावी होने वाले भूत-प्रेतों को उतारने के लिए तो ओझाओं-गुनियों, तान्त्रिक, पीर-फकीरों, बाबाओं वगैरह को बुलाना पडता है. लेकिन आज के इस वैज्ञानिक युग में कईं भूत ऎसे भी हैं जिनका किसी के पास कोई इलाज...

गलती मीडिया की नहीं है, गलती जनता की हैआज शेखर सुमन जी के ब्लॉग में यह पढकर आया कि किस तरह भारत के नेता, जो हजारों रुपये तनख्वाह पाते हैं, सस्ता खाना खाते हैं, और दूसरी तरफ हमारे देश में लाखों गरीब भूखे मर रहे हैं... पढकर दिमाग में कहीं कुछ जो...सपनों को दिखा दो सूरजस्वप्न सदियों से तुम्हारी आँखों में जो पल रहे हैं इतिहास होने से पहले उन्हें एक बार सूरज दिखा दो सपनो का होता है अपना भूगोल अपनी दिशाएं अपने मौसम जो निर्भर होते हैं मन के भीतर बहने वाली हवाओं पर धूप ...सजाखता जो तुमने की, सजा क्यूँ हमको दी... चुप से सह लेते हम सजा भी। फिर क्यूं तुमने शिकायत की , सह लेंगे सभी शिकवे भी पर जो सजा तुमने खुद को दी सह न सकेंगे ........ 

 अरे सब गुफायें कहाँ हैं ?एक पुरातत्ववेत्ता की डायरी – ग्यारहवाँ दिन – एक * * *सुबह आर्य साहब ने कहा “ क्या बात है कल तुम लोग काफी देर तक जागते रहे ? “ रवीन्द्र ने कहा “ हाँ सर , कल शरद अपनी टूर डायरी पढ़कर सु...बोस जीने नहीं देता गहलोत पीने नहीं देता ...दोस्तों मेने शराब माफिया के मटके में से ८१ लाकह रूपये बरामद होने की खबर सुबह अपने ब्लॉग पर लिखी थी कुछ ने पढ़ी कुछ ने तवज्जो नहीं दी लेकिन मेरे एक मित्र भाई अतुल श्रीवास्तव ने छत्तीस गढ़ में बेठे ही बेठे ए...

वो खौफ का मंजर, वो खतरों का सफर. न जाने क्यों लोग प्याज और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को लेकर इतना परेशान रहते हैं. जबकि इस देश में इंसान की जान की कीमत दो कौड़ी की नहीं है. बरेली से लौट रही हूं. ओह, बरेली पहुंच ही कहां पाई. शाहजहांपुर के ...असाधारणता को सदा अपने हाथ क्यों कटाने पड़ते हैं ?इंसान की एक सनातन इच्छा है कि वह अमर हो जाए। सशरीर ऐसा होना नामुमकिन होने की वजह से वह अपने नाम को ही ज्यादा से ज्यादा समय तक दुनिया में कायम रखने की जुगत करता रहता आया है। सदियों से राजा, महाराजा, बादशाह,...

चलते-चलते  एक व्यंग्य चित्र और यहाँ ब्लेक ऑउट



वार्ता को देते हैं विराम -- आप सभी को ललित शर्मा का राम राम - मिलते हैं ब्रेक के बाद

ब्रेकिंग न्यूज --  बच्चों के लिये सेक्स की कानूनन न्यूनतम उम्र को घटाकर मात्र 12 साल करने पर केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ का बयान आ गया है।

बुधवार, 2 फ़रवरी 2011

ठन-ठन गोपाल - क्या हमारे सांसद इतने गरीब हैं - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो ,
प्रणाम !

वैज्ञानिकों ने दुनिया का पहला हैक फ्री सॉफ्टवेयर विकसित करने का दावा किया है। यह आपके कंप्यूटर सिस्टम को ठप होने और साइबर हमलों से बचाने में मददगार होगा।
ऑस्ट्रेलियाई कंपनी ओपेन केरनेल लैब [ओके लैब्स] के वैज्ञानिकों के मुताबिक, 'एसइएल4' माइक्रोकेरनेल नामक यह सॉफ्टवेयर कंप्यूटर के हार्डवेयर तक पहुंचने वाले रास्ते को नियंत्रित करती है। वैज्ञानिकों के इस दल का नेतृत्व करने वाले जर्विन क्लेन ने कहा, 'यह सॉफ्टवेयर इकलौती संचालन प्रणाली है जो गणितीय रूप से सही साबित पाई गई है। साथ ही यह सिस्टम को ठप होने और साइबर हमलों से बचाता है।'
भविष्य में यह सॉफ्टवेयर भरोसेमंद वित्तीय लेनदेन को सुनिश्चित कर सकता है। इस सॉफ्टवेयर की मदद से बैंक या शेयर बाजार के काम ग्राहक के मोबाइल फोन पर सुरक्षित तरीके से संचालित हो सकते हैं।

अब उम्मीद है हमारे ब्लॉग भी बचे रहेंगे ... ;-) ... आइये चलते आज की ब्लॉग वार्ता की ओर ... 

सादर आपका 

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और डोमेन नेम के विजेता हैं .......... :- बधाइयाँ जी बधाइयाँ












पागलों की तलाश :- जारी है 




समीर-सागर के मोती...खुशदीप :- आप ले आये या नहीं 






आखिर ये मंहगाई क्यों ? :- जवाब मालुम होता ...तो क्या यहाँ होते






एक रूप यह भी नारी का :- आप बताये कैसा 




लखनऊ यात्रा - गाइड माहात्म्य. :- मुस्कुराइए कि आप लखनऊ में है




सम्राट चन्द्रगुप्त :- एक और ऐतिहासिक पुस्तक ... आपके लिए







आलोकिता :- की एक सुन्दर कविता 






याद की चादरें कुछ नई फिर बुनें :-  छेड़ दें आस्था की नई रुनझनें


ठन-ठन गोपाल ..(कार्टून धमाका) :- और आमदनी


सूनी गली का नाम कहकशां लिखूँ ... :- क्यूँ न मेरे सफ़र की दास्ताँ लिखूँ   


कुत्ते की दुम :- टेढ़ी की टेढ़ी 






४०० पोस्ट और सात लाख आवेदन... बीस मौतें !!!! :- बेहद दुखद


हमारीवाणी ई-पत्रिका का शुभारम्भ! :- बधाइयाँ और शुभकामनाएं


नई ग़ज़ल/ तुम्हारे नैन में तो प्यार की गंगा समाई है..... :- संभालना ... बाढ़ ना आ जाए


बहुत कुछ कहते हैं दिल तो बच्चा है के महिला किरदार :- अब महिला है तो बातें तो होगी ही








हमारी खुशकिस्मती कि अभी भी दो विकल्प मौजूद है हमारे पास ! :- गनीमत है 










 आप क्या हैं- गाजर, अंडा या कॉफ़ी...खुशदीप :- हम तो एक आम इंसान है ... आप अपनी कहो ...


उम्र 12 साल और सेक्स के लिए परिपक्व :- सरकार का नया शगूफा


वायरलेस ब्रॉडबैंड भी है एक विकल्प :- काम की जानकारी


लो जी सरकार हो गई ५१ पोस्टो के लिंक्स की वार्ता तैयार ... आप मज़े से पढ़िए ... हम चलते है ... 
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आज की ब्लॉग वार्ता बस यहीं तक ..... अगली बार फिर मिलता हूँ एक और ब्लॉग वार्ता के साथ तब तक के लिए ......
जय हिंद !!

मंगलवार, 1 फ़रवरी 2011

आधी रात का सच

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भोपाल को हिला गया था वो हादसा . हम सबको रुला गया वो समाचार जो चार दिन बाद बाबूजी को मिला तबसे अब तक कोरें भर आतीं हैं बूढ़े बाबूजी की आंखें भी नम हो जातीं है बरसों से हम तिल तिल मरते देख रहे हैं बुआ को यूं लगता है कि कि क्यों मेरी बुआ से ज़्यादा ज़रूरी तो न था यूनियन कार्बाईट का कर्ता धर्ता क्रोध से भर जाता हं  जब भी बुआ को देखता हूं बुआ वाला भोपाल
को देखता हूं आज़ फ़िर एक बार वो रात याद आ गई बारास्त अजित भैया के ब्लाग जहां ये लिका है:-सत्ता के शिखरों पर चलनेवाली धोखेबाजी, सौदेबाजी, साजिशो और बईमानी की अंतहीन कहानी का यह एक नमूना भर है। इसमें एक हाईप्रोफाइल सनसनीखेज धारावाहिक का पूरा पक्का मसाल है। गैस त्रासदी आज़ाद भारत का अकेला ऐसा मामला है, जिसने लोकतंत्र के तीनो स्तंभों को सरे बाज़ार नंगा किया है। विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के कई अहम ओहदेदार एक ही हमाम के निर्लज्ज नंगों की क़तार में खड़े साफ़ नज़र आए।" 

भ्रष्टाचार के खिलाफ जनयुद्ध,  

बना के तस्वीर मिटाते हैं वो,ख़त लिख कर फाड़ते हैं वो 

वृष लग्‍नवालों के विभिन्‍न संदर्भों का आपस मे संबंध .. 

.चलो गंगा में फिर मुझको बहा दो ।

You are my lost but regained delight

क्या सुनाऊं ,,,

 लिमिटी  खरे का के रोजनामचा पे 900 वीं पोस्ट आ गई बधाई .दो पाटन के बीच में ब्लाग परओह, आखिरी उघन भी टूट गयादेखिये . अमीर धरती: गरीब लोग दूसरों को न्याय दिलाने के लिये लड़ने-झग़ड़ने वाले पत्रकारों को अपनी मांगो के लिये धरना देना पड़ा!

• डॉ श्याम गुप्त की कहानी...बारात कौन लाये .......

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