सोमवार, 6 दिसंबर 2010

टॉल्सटॉय,गोर्की और बदला-बदला सा लखनऊ -- ब्लॉग4वार्ता --- ललित शर्मा

नमस्कार, मध्य से उत्तर दक्षिण तक चक्कर लगा कर फ़िर पहुंच गए अपने ठिकाने पर, लिख रहे हैं वार्ता। यात्राओं से हमेशा नए अनुभव मिलते हैं जो जीवन के किसी मोड़ पर अवश्य ही काम आते हैं। नए लोगों से बहुत कुछ सीखने मिलता है। इंसान ताऊम्र तालीब बना रहता है, तालीम के मामले में। इस दरमयान मैने भी बहुत कुछ सीखा। कदम कदम पर नसीहतें देने वाले मिले। कुल मिलाकर खट्टे मीठे अनुभवों के साथ यात्रा शानदार रही। अब चलते हैं आज की ब्लॉग4वार्ता पर.....................।

वार्ता की शुरुवात करते हैं दिनेश राय द्विवेदी जी के ब्लॉग से, वे कहते हैं जरूरी गैरहाजरी विवाह योग्य उम्र प्राप्त अविवाहित स्त्री-पुरुष चाहें तो दो साक्षियों के साथ विवाह पंजीयक के समक्ष उपस्थित हो कर विवाह कर सकते हैं और उसे पंजीकृत करवा सकते हैं। इस का समाचार वे किसी को दें या न दें, वह जंगल...तेरे इस बेजान बाबू की नौकरीरोज बात बात पर,नई फाइल,पुरानी को कोसती है,पुरानी फाइल जिसकी,गुम हुई पहचान,अलमारी में भी,मन ही मन,अपना कसूर तलाशती है,नयी रौब से कहती,मैं, "रीक्र्यूट्मेंट" फाइल,"सैलरी फाइल" की साली हूँ,मुजसे डर क्योंकि,मैं, ...

उदय जी की कविता क्यों, क्योंकि मैं एक ईमानदार भ्रष्टाचारी हूँ ! भाई साहब मैं मर जाऊंगा मेरी धड़कनें रुक जायेंगी सांस लेना मुश्किल हो जाएगा मेरी बीवी घर से निकाल देगी शान-सौकत सब चली जायेगी किसी को मुंह दिखाने के लायक नहीं रहूँगा मुझे करने दो, थोड़ा-बहुत ही सही पर मुझे भ्...जयदीप शेखर नाज-ए-हिन्द पर बता रहे हैं तीनों जाँच आयोगों के बारे में देश आजाद होने के बाद संसद में कई बार माँग उठती है कि कथित विमान-दुर्घटना में नेताजी की मृत्यु के रहस्य पर से पर्दा उठाने के लिए सरकार कोशिश करे। मगर प्रधानमंत्री नेहरूजी इस माँग को प्रायः दस वर्षों तक टाल...

अख्तर खान अकेला कोटा से लिख रहे  हैं कि यह कातिल अदाएं तेरी यह कातिल अदाएं तेरी कभी हाँ कभी ना जान ही ले लेगी मेरी बस यूँ खिल खिलाकर बात उनसे जब तुम करती हो क्यूँ जलन मुझे होती हे तू न मेरी थी , ना मेरी हे फिर भी क्यूँ मेरी ऑंखें रोती हें-----  इसके साथ साथ स्वराज्य करुन लिख रहे हैं शिकारी की नजर अब नज़र आती नहीं कोई चिड़िया डाल पर , शिकारी की नज़र है बिछे हुए जाल पर  !जाने कहाँ चली गयी आंगन की गौरैया , बेहद मायूस है  जीवन की गौरैया, नाविक के गीत नहीं झील, नदी , ताल पर ,शिकारी की नज़र है बिछे हुए  जाल पर !

फ़िल्मी भांड कहीं ज़्यादा महान हैं इन तथाकथित धर्म के ठेकेदारों से जन्म से मैं हिन्दू हूँ और अपने कुल देवता से ले कर इष्टदेव तक सभी को नमन करता हूँ । अपने आराध्य सतगुरू के बताये आन्तरिक मार्ग पर चलने की कोशिश भी कभी कभी कर लेता हूँ । मेरे स्वर्गवासी पिताजी ने श्री गु...जबलपुर ब्लॉगर सम्मलेन : एक स्नेह भरा अनुभवदोस्तों, नमस्कार . जबलपुर ब्लॉगर सम्मलेन मेरे लिए मात्र एक सम्मलेन ही नहीं बल्कि और भी बहुत कुछ रहा ..मित्रता और प्रेम और आत्मीयता और स्नेह से भरे हुए दो दिन कैसे गुजरे , पता ही नहीं चल पाया. इसकी शु...

शेखावाटी में होने वाली शादीयों के विचित्र रिवाजसबसे पहले काफी दिनों बाद आप सभी पाठकों ब्लॉग मित्रों गुरूजनों को मेरा सादर प्रणाम आपको बता दूं कि मैं पिछले काफी दिनों से शादीयों में व्यस्त था इसलिए कुछ नया लिख नहीं पाया और और पढ भी नहीं पाया शादीयों म...बदला-बदला सा लखनऊआज यूं ही शहर के मुआयने का मन हो आया. गाड़ी निकाली और निकल पड़े लखनऊ भ्रमण पर. अपना ही शहर ऐसे देख रहे थे मानो पहली बार देख रहे हों. मायावती ने शहर की शक्लो-सूरत कुछ इस कदर बदली है कि देखना बनता है. कल बा...

लिख नहीं पाया कुछ तुम्हारे लिएप्रिये आज दूर हो तुम लेकिन लिख नहीं पाया तुम्हारे लिए कुछ भी हर पल/ हर क्षण लगा साथ बैठी हो तुम मेरे कंधे पर रख लिया है तुमने अपना सिर तुम्हारे केश मेरे शर्ट की बटन से उलझ गए हैं दिन भर मैं सुलझाता रह...मेरी सूरत तेरी आँखेंश्रेष्ठता और चुनौतियों का कोई मापदण्ड नहीं होता। बेहतर और उत्कृष्ट काम सर्वव्यापी हो, सबके मन का हो और सभी की सुरुचि का विषय बने यह भी जरूरी नहीं होता। इसके बावजूद ऐसे काम हुआ करते हैं। सृजनात्मक क्षेत्रों...

टॉल्सटॉय,गोर्की और यह नन्हा दिमाग :(जैसा कि आपने जाना कि अब जीविकोपार्जन के लिए हमने एक छोटी सी कंपनी में ऑफिस एडमिनिस्ट्रेटर /इन्टरप्रेटर की नौकरी कर ली थी .क्योंकि अब क्लासेज़ में जाना उतना जरुरी नहीं रह गया था.अब बारी थी स्वध्ययन की ,...क्या हम अपने अतीत से शिक्षा लेते हैं?सन् 712 में मोहम्मद-बिन-कासिम बिलोचिस्तान की विस्तृत मरुभूमि को पार करके सिन्ध तक चला आया। केवल बीस वर्ष आयु वाले उस लुटेरे के मात्र छः हजार घुड़सवारों के समक्ष सिन्ध के राजा दाहिर के दस हजार अश्वारोही और ब...

राम को राज दिलाकर देखोकैकयी को समझाकर देखो । राम को राज दिलाकर देखो ॥ फासले बीच के मिट जायेंगे । हाथ से हाथ मिलाकर देखो ॥ छोड़के बात समझदारी की । जोश में होश गवांकर देखो ॥ खेल में और मज़ा आएगा । हार या जीत भुलाकर देखो ॥ प्रीत की ...विश्व विकलांगता दिवस …कल 3 नवंबर को सर्व शिक्षा अभियान के तत्वाधान में समेकित शिक्षा अभियान के अंतर्गत मरियम नगर गाज़ियाबाद के आनंद ट्रेनिंग सेंटर में विश्व विकलांगता दिवस का भव्य आयोजन किया गया. मानसिक और शारीरिक रूप से अक्षम ...

चलते चलते यहां भी मिलें ब्लागर्स से.......राम राम.................

रविवार, 5 दिसंबर 2010

मीरा के गिरिधर ...कहानी डेविड की ... ब्‍लॉग4 वार्ता .. संगीता पुरी

आप सभी पाठकों को संगीता पुरी का नमस्‍कार , पूरे नवंबर भर के गुलाबी ठंड के बाद 6 और 7 के खास ग्रहीय योग के कारण जनवरी के पहले सप्‍ताह में देशभर के मौसम के खराब होने और ठंड के बढने की चर्चा मैने 29 अक्‍तूबर 2010 के आलेख में ही कर दी थी। दो तीन दिनों से ही मौसम में ठंडक आयी है।  अभी अभी दैनिक भास्‍कर में खबर छपी है ...
.पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर के पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बर्फबारी ने पंजाब के पारे को गिराना शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि पहाड़ी क्षेत्रों में इसी तरह बर्फबारी होती रही तो आने वाले दिनों में तापमान और भी गिरने की संभावना है। मौसम के जानकारों की मानें तो आने वाले एक दो दिनों में सुबह के समय कोहरा पड़ सकता है।इससे विजिबिलिटी पर असर पड़ सकता है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल ठंडी हवाएं चल रही हैं। अरब सागर से लगातार ठंडी हवाएं चल रही हैं जो कि पश्चिमी तट से होकर उत्तर की तरफ आ रही हैं। ठंडी हवाओं के आने से तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। इसके बाद रूख करते हैं कुछ नए चिट्ठों की ओर , बहुत अच्‍छा लिख रहे हैं नए नए हिंदी चिट्ठाकार ....


आज फूल खिल उठे, भंवरों ने है गीत गाया,
शरमा गई है, उपवन कि कलियाँ, महबूब है मेरा आया....
उसकी चंचल, शोख अदाएं, जैसे सागर का पानी,
पानी में भी जो आग लगादे, ऐसी उसकी जवानी,
आन बसे हैं, मन में मेरे, मन को है भरमाया.......
शरमा गई है, उपवन कि कलियाँ, महबूब है मेरा आया...

बेईमानी गुण्डागर्दी का जहर घुला परिवेश मे
कैसे जीवन रहे  सुरक्षित  गांधी तेरे देश में

एक एक के नाम पे मिलते अरबों के घोटाले
घूस खोर मक्कार बंने अब भारत के रखवाले
भूख पे भाषण देने वाले भोग लगाते छप्पन
इनमें से है कोई तेलगी और  कोई वीरप्पन
धन जनता का लूट लूट कर भेज रहे प्रदेश में
कैसे जीवन रहे  सुरक्षित  गांधी तेरे देश में

यह भी कोई सवाल हुआ? अरे भाई, बेहतर स्कूल वही है जो अच्छा स्कूल होता है. जहाँ अच्छी पढाई होती है, बच्चे और शिक्षक और माँ-बाप सब स्कूल से खुश हैं - यही तो हुआ ना बेहतर स्कूल?


दुर्भाग्य से इस मासूम परिभाषा के दिन पूरे हो चुके हैं. 'मासूम' इसलिए क्योंकि बिना ख़ास सोचे समझे कुछ बातें कह दी गयीं - इनके पीछे की गहराइयों को नहीं समझा गया. साथ ही, यह परिभाषा ऐसी है कि इसे पढ़ कर कोई समझ नहीं सकता कि आखिर करना क्या है? आप समझ पाए? मैं तो नहीं समझ पाया! नहीं, ऐसी परिभाषा चाहिए है जो केवल शब्दों में न रहे, बल्कि जिसे ठोस कदमों में बदला जा सके. और अब शिक्षा के अधिकार कानून आने के बाद तो यह और भी out-dated (पुरानी) हो चुकी है.

शादी के दो सबसे अहम पहलू हैं ‘प्यार और विश्वास.’ शादी सिर्फ दो लोगों का मेल नहीं होता यह दो आत्माओं का मिलन होता है. शादी एक अटूट बंधन है, यह दो जोड़ों की मिलन बेला है. शादी के बंधन का तात्पर्य ‘जिंदगी भर साथ निभाने से होता है.’


असल मायनों में शादी केवल दो लोगों का मिलन नहीं होता यह दो परिवारों का भी मिलन होता है. शादी के बाद स्त्री अपने पिता का घर छोड़ अपने पति के घर आती है, जिसके बाद पति का परिवार ही उसका परिवार हो जाता है. अतः शादी के बाद परिवार के हर सदस्यर की भूमिका अहम होती है.


आशाओं से लदा-फदा
और नए मौज के चक्के पर आ ही गया है!
आज भी सूरज ने कमोबेश
उतनी ही रोशनी छोड़ी है निर्वात की सुरंगों में.
हवा कुछ तेज़ी है और बादल कहीं-कहीं
गढ़बंधन की जैसी कोशिशों  में मशगूल हैं.
लतीफ़ों के  क्रमांक बदले से तो लग रहे हैं,
ठहाकों का लगभग-लगभग वही है.
खेतों से विदा ले कर आज भी उतनी हीसब्जिया
झूलती मटकती झोलों में सवार होकर
अलग-अलग गंतव्यों की ओर चल चुकीं हैं.
फूलों की खुशबू हालाँकि अब थोड़ी दूर निकल तो गयी हैं


मनुष्य के जीवन में इतना दुख है, इतनी पीड़ा, इतना तनाव कि ऐसा मालूम पड़ता है कि शायद पशु भी हमसे ज्यादा आनंद में होंगे, ज्यादा शांति में होंगे। समुद्र और पृथ्वी भी शायद हमसे ज्यादा प्रफुल्लित हैं। रद्दी से रद्दी जमीन में भी फूल खिलते हैं। गंदे से गंदे सागर में भी लहरें आती हैं--खुशी की, आनंद की। लेकिन मनुष्य के जीवन में न फूल खिलते हैं, न आनंद की कोई लहरें आती हैं। 


मनुष्य के जीवन को क्या हो गया है? यह मनुष्य की इतनी अशांति और दुख की दशा क्यों है? कहीं ऐसा तो नहीं है कि मनुष्य जो होने को पैदा हुआ है वही नहीं हो पाता है, जो पाने को पैदा हुआ है वही नहीं उपलब्ध कर पाता है, इसीलिए मनुष्य इतना दुखी है? अगर कोई बीज वृक्ष न बन पाए तो दुखी होगा। अगर कोई सरिता सागर से न मिल पाए तो दुखी होगी।
लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।


नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है।
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है।
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।

उदास मन को कुछ ऐसे बहलाते है,

रेत के घर बना बना के गिरते है.
तन्हा बैठ जब बंद करते आँखे,
कोसों मील पीछे निकल जाते है.
दिल का दर्द फिर भी नही मिटता,
पैमाना ऐ अश्क तो छलकाते है.
मुझ गरीब के घर वो नही आते,
उनकी राहों में पलकें बिछाते है.
मै खुली किताब वो अक्सर पढ़ते,
मगर हमसे वो राजे दिल छुपाते है.

बच्चों से ज़रूरी कुछ भी नहीं हो सकता। वे हमारे परिवारों का भविष्य ही नहीं - हमारा संसार हैं। वे कैसे विकसित होते हैं यह केवल इस बात पर निर्भर नहीं करता है कि उन्हें माता - पिता से कितना प्यार मिलता है या उन पर कितना पैसा खर्च किया जाता है। यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि रोज़मर्रा के जीवन में बच्चों की समस्या को माता पिता कैसे सुलझाते हैं और माता पिता बच्चों के लालन - पालन के बारे में कितने सजग हैं और कितना जानते हैं।जीवन के तनाव, व्यस्तताएं, व अन्य दबाव साधारण सी परिस्थिति को कठिन बना देते हैं। और वयस्क लोग अपना बचपन अकसर भूल जाया करते हैं - अपने बचपन की मज़ेदार भूलें और उसका आनन्द।

कोई भी टिप्पणीकार जब अपना बहुमूल्य समय निकाल कर किसी ब्लॉगर को टिप्पणी करता है तो उसे कुछेक ब्लॉग पर वर्ड वेरिफिकेसन की समस्या से दो चार होना पड़ता है। जिसके कारण टिप्पणीकार भविष्य में उस ब्लॉग पर टिप्पणी करने से बचता है जिसमे वर्ड वेरिफिकेसन लगा हो। कोई भी नया ब्लॉग बनाने पर वर्ड वेरिफिकेसन स्वत: लगा हुआ मिलता है। इसको ब्लॉग बनाते समय ही निष्क्रिय कर देना चाहिए। आईये सीखते हैं कि कैसे वर्ड वेरिफिकेसन को हटाया जाये।
  

दूर कहीं से एक आवाज आती है ,
दिल में एक कसक छोड़ जाती है |
नहीं भुला पाता उस मंजर को ,
जब छेड़ा था तुमने इस दिल के तार को |

क्यों में मजबूर हो चला था ,
खुद से ही दूर हो चला था |
चाहत थी बहुत जिसे छुपाये रखा था ,
तुम्हारी मदहोश नैनो से बचाए रखा था |

बहुत सुंदर भजन है
अपराधी कौन डेविड या सिस्टम ?                                     

 1992 की बात है।
 कनॉट प्लेस की मर्केनटाईल हाऊस बिल्डिंग में मेरा दफ्तर था। 
मैं संडे मेल साप्ताहिक  और समाचार मेल दैनिक में नगर संवाददाता थी। 
गर्मियों के दिन थे। मैं रिपोर्टिंग से लौट कर अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही थी कि सिक्योरिटी गार्ड मेरे पास आया और बोला मैडम आपसे मिलने एक आदमी आया है, शायद गांव से आया है कुछ गठरियां बांध कर लाया है । जितनी हैरानी के भाव उसके चेहरे पर थे उतनी ही हैरान मैं भी  हो गयी । कोई तो आने वाला नहीं था फिर कौन ? मैं बाहर गयी तो देखा ऑफिस के गेट से बाहर डेविड दो तीन गठरियां लेकर बैठा था। 
तुम इतनी गर्मी में ? हां दीदी नमस्ते आपके लिए तरबूज , खरबूजा ककड़ी और खीरे लाया हूं । बहुत मीठे हैं। मैं डेविड को कोई जवाब नहीं दे पायी , मेरा गला भर आया। अपने प्रति उसके निस्वार्थ और अगाध स्नेह को देख कर। तब तक मेरे सभी सहयोगी भी बाहर आ गए सब हंसने लगे। 

आजकल खुश रहने की दवा खा रहा हूं
और असर दिखने लगा है
बस चंद रोज पहले से 
बदल गया है सबकुछ
अब मैं ज्यादा नहीं सोचता
मन में कोई अपराधबोध नहीं रखता
भूल चुका हूं कल की बातें
कल का कोई हिसाब नहीं रखता
आजकल खुश रहने की दवा खा रहा हूं
और असर दिखने लगा है


जो चल रहा है, सब ठीक है
अब कहां कोई गम है
हर रोज हंस रहा हूं
यही क्या कम है
कुछ पाने की जल्दी में
अब बिल्कुल नहीं रहता
आजकल बेफिक्र होने की दवा खा रहा हूं
और असर दिखने लगा है
मै शंकर का वह क्रोधानल कर सकता जगती क्षार क्षार
डमरू की वह प्रलयध्वनि हूं जिसमे नचता भीषण संहार
रणचंडी की अतृप्त प्यास मै दुर्गा का उन्मत्त हास

मै यम की प्रलयंकर पुकार जलते मरघट का धुँवाधार
फिर अंतरतम की ज्वाला से जगती मे आग लगा दूं मै
यदि धधक उठे जल थल अंबर जड चेतन तो कैसा विस्मय
हिन्दु तन मन हिन्दु जीवन रग रग हिन्दु मेरा परिचय॥



मै आज पुरुष निर्भयता का वरदान लिये आया भूपर
पय पीकर सब मरते आए मै अमर हुवा लो विष पीकर
अधरोंकी प्यास बुझाई है मैने पीकर वह आग प्रखर
हो जाती दुनिया भस्मसात जिसको पल भर मे ही छूकर
भय से व्याकुल फिर दुनिया ने प्रारंभ किया मेरा पूजन
मै नर नारायण नीलकण्ठ बन गया न इसमे कुछ संशय
हिन्दु तन मन हिन्दु जीवन रग रग हिन्दु मेरा परिचय॥

ब्रिटेन में इन दिनों इराक़ युद्ध के बारे में एक जाँच आयोग की सुनवाई में ये बात एक बार फिर स्पष्ट हो रही है कि 11 सितंबर 2001 के हमलों से कई महीने पहले से ही अमरीका इराक़ पर हमले की योजना बना रहा था.


ज़ाहिर है अमरीकी सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा या ईरान को घेरने जैसे बड़े सामरिक लक्ष्यों पर विचार कर इराक़ पर हमले की योजना बनाई होगी. बड़े सामरिक लक्ष्य दीर्घावधि के होते हैं जो कि कई बार पूरे होते भी नहीं. लेकिन हमले का शिकार बने किसी देश को लूटे जाने का सिलसिला पहले ही दिन से शुरू हो जाता है. इराक़ में भी यही हो रहा है. इस लूट में मुख्य रूप से अमरीका और ब्रिटेन की सुरक्षा कंपनियाँ भाग ले रही हैं.
देर  से  ही सही भारतीय समाज के विभिन्न क्षेत्रों में जानी मानी हस्तियों ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध अभियान शुरू करते हुए देश के भ्रष्टाचार निरोधक तंत्र में कमियों को दूर करने के वास्ते लोकपाल बिल का मजमून तैयार किया है और इसे कानून का रूप देने के अनुरोध के साथ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भेजा है। प्रधानमंत्री को लोकपाल बिल के मजमून के साथ भेजे गए पत्र में समाज के विभिन्न क्षेत्रों के दिग्गजों के हस्ताक्षर हैं। इसमें योग गुरु स्वामी रामदेव, आर्ट ऑफ लीविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर, कलक त्ता उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति तेवतिया, सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश, पूर्व पुलिस अधिकारी किरण बेदी, सीबीआई के पूर्व संयुक्त निदेशक बीआर लाल, जानीमानी नृत्यांगना एवं सामाजिक कार्यकर्ता मल्लिका साराभाई, आरटीआई कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल, अन्ना हजारे, सुनीता गोदारा, देवेंद्र शर्मा, क मल जसवाल, मौलाना मुफ्ती शमून काशमी आदि शामिल हैं।



उल्लुओं की एक प्रजाति आदमजात मे भी पायी जाती है ।इसके नमूने बिजली विभाग मे ज्यादादिखायी देते है ।फर्क सिर्फ इतना है कि बिजली रात को नही दिखती उल्लू दिन को नही देखते ।अगर आपके घर रातों को बिजली नही हो तो आप पूरी दुनिया को उल्लुओं की तरह देख सकते है ।उल्लू महान पक्षी है ।इसकी पीठ पर लक्स्मी विबिजली विभाग की मेहरवानीराजती है ।पता नहीइसे राष्ट्रीय पक्षी का दर्जा क्यो नही मिला ।बिजली विभाग आपकी भी पीठ पर विराज सकती है
पंचायतों के चुनाव का अंतिम मुकाम अभी एक माह दूर है
,शर्त यह है कि रात को आप भी अन्धेरे मे रहिये ।मै पिछले दस दिनो से अन्धेरे मे रहकर अपनीपीठपर लक्ष्मी जी के अवतरण का इंतजार कर रहा हू।विश्वास है आज न कल वह जरूर मेरी पीठ कोयह सौभाग्य प्राप्त करने का अवसर देंगे ।बिजली विभाग की मेहरवानी बनी रहनी चाहिये ।आप भीयह अवसर चाह्ते है तो बिजली विभाग को शुक्रिया अदा करिये ।

आदमी के बहुत से रूप हैं। जितने रूप असली दुनिया में हैं उतने ही इस छलावे की दुनिया में भी हैं। लोग दुखी हैं। वे दिल बहलाने की खातिर इस सच्ची झूठी दुनिया की सैर पर आते हैं और यहां भी उनकी मुठभेड़ असली दुनिया की परेशानियों से हो जाती है। झगड़े-टंटे उन्हें परेशान करते हैं, मुझे भी परेशान करते हैं। यही कारण है कि ब्लाग बनाकर भी मैं कुछ करने से बचता रहा परंतु यही तो समय है जबकि मैं कुछ सेवा कर सकता हूं। सो मैं थोड़े समय में से बहुत थोड़ा सा निकाल कर आपके जहां में कदम धर रहा हूं। मेरा स्वागत जरा ढंग से कर लीजो।


पतंजलि योग पीठ दिवंगत राजीव दीक्षित जी की स्मृति में हर साल तीस नवंबर को स्वदेशी दिवस मनाएगी। राजीव दीक्षित जी ने अपने संघर्ष के बलबूते जीवन की विषम से विषम परिस्थितियों पर जीत हासिल की। अब पतंजलि योग पीठ ने राजीव जी के अधूरे सपनों को मूर्त देने का संकल्प लिया है।

कनखल स्थित श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार के बाद आयोजित श्रद्धांजलि सभा में योग पीठ ने राजीव दीक्षित जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सैकड़ों लोगों ने दो मिनट का मौन धारण कर उनकी आत्मा की शांति के लिए भगवान से प्रार्थना की। स्वामी रामदेव जी की राजीव दीक्षित से पहली मुलाकात कनखल में ही हुई थी, तो अंतिम विदाई की जगह भी कनखल ही बनी। 

एक ही दिन,

एक ही नक्षत्र में ,

एक ही मंडप के तले,


सामान मन्त्रों के उच्चारण के साथ,



वरा था हम दोनों ने ,



एक दूसरे को ,



जन्मजन्मान्तर के लिए,



और की थी प्रतिज्ञा ,



दुःख सुख में सदा साथ निभाने की,



मिलजुल कर जीने की,



एक दूसरे से कभी कुछ ना छिपाने की,



मैं ..


अब मिलती हूं अगले सप्‍ताह .. पुन: कुछ नए चिट्ठों के साथ .....

शनिवार, 4 दिसंबर 2010

एक रुका हुआ फैसला - भ्रष्ट नेताओं की ऐसी पिटाई करनी होगी जनता को - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो,
प्रणाम !

क्या आप भी अपना अधिकांश समय इंटरनेट के सर्च इंजन बेवसाइट पर बिताते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक जो इंटरनेट पर नियमित तौर पर सर्च इंजन का प्रयोग करते हैं उनके कंप्यूटर जल्द वायरस ग्रस्त होते है और कंप्यूटर हैकरों की गिरफ्त में आने की संभावना भी बढ़ जाती है। कंप्यूटर विशेषज्ञों की मानें तो न केवल संदिग्ध ऑनलाइन विज्ञापन या आकर्षक डाउनलोड पेशकश, बल्कि नियमित तौर पर ज्ञान पिपासा को शांत करने के लिए सर्च इंजन का प्रयोग कंप्यूटर को साइबर अपराधियों के जंजाल में फंसा सकता है। एक अग्रणी नेटवर्क एंटीवायरस एवं सुरक्षा साफ्टवेयर उपलब्ध कराने वाली ‘ट्रेंड माइक्रो’ ने एक अध्ययन में पाया कि उत्तर एवं दक्षिण कोरिया के बीच गोलाबारी की खबरों को जानने के लिए जब कुछ लोगों ने सर्च इंजन पर यह विषय डाला तो उनके कंप्यूटर हैकरों का निशाना बन गए। 

तो अब नयी नयी पोस्ट पढने के लिए सर्च इंजन का सहारा लेना छोड़ दीजिये ..... ब्लॉग 4 वार्ता  है ना !!! ;~)

तो आइये चलते है आज की ब्लॉग वार्ता की ओर ...

सादर आपका 


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एक रुका हुआ फैसला :- ध्यान से देखिये एक नहीं काफी सारे है !




















ये कुत्ते - सतीश सक्सेना :- 'वो' कुत्ते नहीं है !




क्या प्रेम-विवाह करना गुनाह है ? -- Love marriage :- लगता तो नहीं हो तो पता नहीं !




































फ़ेसबुक की दीवार से अंतरिक्ष दर्शन :- खिड़की बड़ी वाली होगी ?



नई ग़ज़ल/ पास मेरे जंतर-मंतर है..... :- मेरे पास नहीं है .... :-(















"खुशबू" उनकी :- किन की ?



उस युग से इस युग तक......... :- लम्बा सफ़र तै करना है !



आवश्यकता है एक ब्लाग गुरु की .......................... :- किस को ??




कुन्नु सिँह,प्राँपर्टी संसार,ताऊ डाँट इन,ललित डाँट काँम,ब्लाँग बुखार, को ब्लाँग आँफ द मंथ का पुरस्कार :- बधाइयाँ जी बधाइयाँ !!



तथाकथित "देशभक्त" मीडिया :- हर जगह है !



लीजिये फिर अपनी डफली आप बजाता हूँ ... अपनी पोस्ट का लिंक दिए जाता हूँ !!


बीमा कराइए, बेफिक्र हो शादी रचाइए :- शादी इतनी खतरनाक होती है क्या ??


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आज की ब्लॉग वार्ता बस यहीं तक ..... अगली बार फिर मिलता हूँ एक और ब्लॉग वार्ता के साथ तब तक के लिए ......

जय हिंद !!

शुक्रवार, 3 दिसंबर 2010

अगली वार्ता लेकर प्रस्तुत हूँ - ब्लॉग 4 वार्ता - रुद्राक्ष पाठक

प्रिय ब्लॉगर मित्रो,
प्रणाम !


माफ़ कीजियेगा काफी लम्बे समय से पारिवारिक कामो से बाहर रहने के कारण मैं लिख नहीं पाया और अब मुझे मौका मिला है तो मै अपनी अगली पोस्ट लेकर आपके सामने प्रस्तुत हूँ आशा करता हूँ आपको मेरा काम पसंद आयेगा|
आज की ब्लॉग वार्ता के रूप में लीजिये आपके लिए कुछ पोस्ट की लिंक्स प्रस्तुत है ....


1. चोरी हुआ आखरी सलाम 


2. दुनिया जाये तो जाये भाड़ मे 

3.निदक नियरे राखिये, आंगन कुटी छवाय 

4. कौन सा पैगाम ........ और किसके नाम 

5. वीर बहूटी

6. वर्षा २००८ के अग्रणी ब्लोगर

7. तब की शादी, अब की शादी 

8. बिखराव एक स्वप्न का  

9. ईमानदारी की मार्केटिंग, प्रधानमंत्री और नमक का दरोगा 

10. बारात लेकर सड़क पर न निकले वर्ना पुलिस बजाएगी बैंड

11. हैप्पी बर्थडे जोनी.....!

12. जबलपुर कार्यशाला पहली रपट

13. "आंसू"

14. कील.........ख्यालों की

15. मंत्री कहते हैं- छेड़छाड़ मालूमी बात...




आज के लिए इतना ही धन्यवाद !

गुरुवार, 2 दिसंबर 2010

भ्रष्टाचार का विरोध सब कर रहे हैं, आइये हम सफाया करें - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो,
प्रणाम !

पिछले ७ दिनों की भागम भाग के बाद आज फिर हाज़िर हूँ ब्लॉग 4 वार्ता  के इस मंच पर एक और ब्लॉग वार्ता ले कर.... सो बिना समय बर्बाद किये चलते है आज की ब्लॉग वार्ता की ओर.....

सादर आपका


शिवम् मिश्रा

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न्यू ज़ीलैंड को लिटा दिया पूरी तरह से लैंड पर :- गम्भीर, विराट और श्रीसंत ने कमाल कर दिया इण्डिया की टीम ने जयपुर में धमाल कर दिया न्यू ज़ीलैंड को लिटा दिया पूरी तरह से लैंड पर इत्ता ज़ोर से मारा कि पिछवाड़ा लाल कर दिया जय हो ! इण्डिया जय हो !

भ्रष्टाचार का विरोध सब कर रहे हैं, आइये हम सफाया करें :- भ्रष्टाचार...........भ्रष्टाचार.............भ्रष्टाचार!!! अब हर जगह इसी की चर्चा हो रही है। ब्लॉग पर तो इसकी चर्चा बहुत जोरों से और बहुत ही पहले से होती आ रही है। हमने भी कई बार अपने ब्लॉग पर इसको समाप्त ...

Those Rains Were Special (बरसात के वो दिन) :- आज एक कविता देखिये, जिसे मैंने अंग्रेजी में लिखा था और पोस्ट किया था अपने दूसरे ब्लॉग "एहसास प्यार का" पे..फिर उसे किस खूबसूरती से चचा जी(सलिल वर्मा) ने हिन्दी में अनुवाद किया..हिन्दी वाले कविता को पढ़िए, ...

थ्री टी से टी थ्री तक :- -चौं रे चम्पू! एक हफ़्ता में बनारस, पटना, रांची, मुंबई, रायपुर, आगरा, अरे घर में टिकै कै नायं? -चचा, पाँव में चक्कर है। आपके चम्पू का नाम ही ऐसा है। सभी जगह हवाई जहाज से गया। आगरा बाई रोड, और सिर्फ बनारस ...

“उग रहे भवन भारी..” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक") :- सब्जी, चावल और गेँहू की, सिमट रही खेती सारी। शस्यश्यामला धरती पर, उग रहे भवन भारी-भारी।। बाग आम के-पेड़ नीम के आँगन से कटते जाते हैं, जीवन देने वाले वन भी, दिन-प्रतिदिन घटते जाते है, लगी फूलने आज वतन...

राजस्थानी भाषा में पति और पत्नी के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले कुछ शब्द :- कल रात अपने एक राजस्थानी मित्र के चिरंजीव की शादी में जाना हुआ था। बातों ही बातों में पता चला कि राजस्थानी भाषा में पति और पत्नी के लिए अलग-अलग करीब २५० शब्दों का प्रयोग होता है। मित्र के पिताजी ने कुछ पर्...

वर्ष-२००८ के अग्रणी ब्लोगर :- *........गतांक से आगे .... * *हिंदी ब्लोगिंग के समूचे परिदृश्य के बिहंगावलोकन के क्रम में मैंने वर्ष-२००३ से वर्ष-२००८ तक के सक्रिय और महत्वपूर्ण ब्लॉग का उल्लेख कर चुके हैं , संभव है कुछ और महत्वपूर्ण ...

 क्षणिकाएं....केवल राम :- १. अंतिम बार जब तुमने अंतिम बार मेरे कमरे की दहलीज से बहार जाते वक़्त मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए कहा था .... कि तुम सिर्फ मेरे लिए और मैं सिर्फ ... तुम्हारे लिए तब मुझे लगा था मोहब्बत किसी , इबादत से कम नहीं ।...

अनाथ से शादी क्यों? :- कल की पोस्ट पर यह सवाल सबसे महत्त्वपूर्ण है। मैं ना तो मित्र के सम्बन्धी विवाह के इच्छुक नरेन्द्र टक्कर को मिला हूँ और ना ही उनको जानता हूँ। चूंकि मेरे मित्र ने जब मुझसे अनाथालय से शादी की जानकारी प्राप्त ...

हमारी देसी आदतें - सतीश सक्सेना :- खुशदीप सहगल के द्वारा अपनाए जा रहे देसी ट्रेफिक नियमों की लिस्ट देख , हमारा भी, देसियों के द्वारा अपनाए जा रहे कुछ और नियम, बताने का दिल कर गया ! सो हमारे कुछ देसी रूल देखिये ! विश्वस्तरीय मेट्रो की सफाई देख...

 डायेनासोर्स अलाइव....! :- * कुछ दिन पहले ममा पापा मुझे जू लेकर गए | वहां सभी तरह के जानवर थे पर खास बात यह थी की वहां बहुत सारे डायेनासोर्स भी थे | वो भी अलाइव | मुझे तो इनके पास जाकर भी डर लग रहा था | फिर धीरे धीरे हिम्मत जुटाई |...

पर्दे पर भारत :- . चैनल फ्लिप करते हुए एक जगह "इंडिया" देखा तो रुक गया। माथे पर लाल टीके लगाये और गले में दोशाला डाले हुए दो पुरुष एक दूसरे से पुर्तगाली भाषा में बात कर रहे थे। जब तक कुछ समझ पाता, ब्रेक हो गया और रिओ की ...

 जब हनुमान जी घर मेरे आए ....पंजाब यात्रा संस्मरण -५..jha ji on ride :- ** * * * * * * * * * * इससे पहले आप मेरी पंजाब यात्रा में इन पोस्टों पर पढ चुके हैं कि मैं कहां कहां कैसे कैसे घूमा । आज मैं आपको मिलवाता हूं हनुमान जी से ..अरे नहीं नहीं यूं तो भारत में हनुमान जी से ...

जबलपुर-ब्लागर्स एसोसिएशन की कार्यशाला रिपोर्ट : हिंदी ब्लागिंग : विकास एवम संभावनाएं :- रिपोर्ट और चित्र कहां गएहै न कितना विचित्र जबलपुर का बलशाली ब्‍लॉगिंग आयोजन 6.30 बजे शाम से सूर्या होटल में संपन्‍न हुआ भव्‍य हुआ होगा दिव्‍य भी उसमें समीर लाल जी ललित शर्मा जी जी के अवधिया जी गिरीश ...

निदक नियरे राखिये , आँगन कुटी छवाय -- Beware of क्रिटिक्स :- निंदक नियरे राखिये, आगन कुटी छवाए , बिन पानी साबुन बिना , निर्मल करे सुभाय । अरे भाई हम क्या ख़ाक कुटी छावायेंगे, ये तो स्वयं ही यत्र-तत्र अपनी कुटिया डाले कालोनी बसाये मिल जायेंगे। एक ढूंढो चार मिलेंगे। ...

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आज की ब्लॉग वार्ता बस यहीं तक ..... अगली बार फिर मिलता हूँ एक और ब्लॉग वार्ता के साथ तब तक के लिए ......

जय हिंद !!

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