सोमवार, 6 दिसंबर 2010

टॉल्सटॉय,गोर्की और बदला-बदला सा लखनऊ -- ब्लॉग4वार्ता --- ललित शर्मा

नमस्कार, मध्य से उत्तर दक्षिण तक चक्कर लगा कर फ़िर पहुंच गए अपने ठिकाने पर, लिख रहे हैं वार्ता। यात्राओं से हमेशा नए अनुभव मिलते हैं जो जीवन के किसी मोड़ पर अवश्य ही काम आते हैं। नए लोगों से बहुत कुछ सीखने मिलता है। इंसान ताऊम्र तालीब बना रहता है, तालीम के मामले में। इस दरमयान मैने भी बहुत कुछ सीखा। कदम कदम पर नसीहतें देने वाले मिले। कुल मिलाकर खट्टे मीठे अनुभवों के साथ यात्रा शानदार रही। अब चलते हैं आज की ब्लॉग4वार्ता पर.....................।

वार्ता की शुरुवात करते हैं दिनेश राय द्विवेदी जी के ब्लॉग से, वे कहते हैं जरूरी गैरहाजरी विवाह योग्य उम्र प्राप्त अविवाहित स्त्री-पुरुष चाहें तो दो साक्षियों के साथ विवाह पंजीयक के समक्ष उपस्थित हो कर विवाह कर सकते हैं और उसे पंजीकृत करवा सकते हैं। इस का समाचार वे किसी को दें या न दें, वह जंगल...तेरे इस बेजान बाबू की नौकरीरोज बात बात पर,नई फाइल,पुरानी को कोसती है,पुरानी फाइल जिसकी,गुम हुई पहचान,अलमारी में भी,मन ही मन,अपना कसूर तलाशती है,नयी रौब से कहती,मैं, "रीक्र्यूट्मेंट" फाइल,"सैलरी फाइल" की साली हूँ,मुजसे डर क्योंकि,मैं, ...

उदय जी की कविता क्यों, क्योंकि मैं एक ईमानदार भ्रष्टाचारी हूँ ! भाई साहब मैं मर जाऊंगा मेरी धड़कनें रुक जायेंगी सांस लेना मुश्किल हो जाएगा मेरी बीवी घर से निकाल देगी शान-सौकत सब चली जायेगी किसी को मुंह दिखाने के लायक नहीं रहूँगा मुझे करने दो, थोड़ा-बहुत ही सही पर मुझे भ्...जयदीप शेखर नाज-ए-हिन्द पर बता रहे हैं तीनों जाँच आयोगों के बारे में देश आजाद होने के बाद संसद में कई बार माँग उठती है कि कथित विमान-दुर्घटना में नेताजी की मृत्यु के रहस्य पर से पर्दा उठाने के लिए सरकार कोशिश करे। मगर प्रधानमंत्री नेहरूजी इस माँग को प्रायः दस वर्षों तक टाल...

अख्तर खान अकेला कोटा से लिख रहे  हैं कि यह कातिल अदाएं तेरी यह कातिल अदाएं तेरी कभी हाँ कभी ना जान ही ले लेगी मेरी बस यूँ खिल खिलाकर बात उनसे जब तुम करती हो क्यूँ जलन मुझे होती हे तू न मेरी थी , ना मेरी हे फिर भी क्यूँ मेरी ऑंखें रोती हें-----  इसके साथ साथ स्वराज्य करुन लिख रहे हैं शिकारी की नजर अब नज़र आती नहीं कोई चिड़िया डाल पर , शिकारी की नज़र है बिछे हुए जाल पर  !जाने कहाँ चली गयी आंगन की गौरैया , बेहद मायूस है  जीवन की गौरैया, नाविक के गीत नहीं झील, नदी , ताल पर ,शिकारी की नज़र है बिछे हुए  जाल पर !

फ़िल्मी भांड कहीं ज़्यादा महान हैं इन तथाकथित धर्म के ठेकेदारों से जन्म से मैं हिन्दू हूँ और अपने कुल देवता से ले कर इष्टदेव तक सभी को नमन करता हूँ । अपने आराध्य सतगुरू के बताये आन्तरिक मार्ग पर चलने की कोशिश भी कभी कभी कर लेता हूँ । मेरे स्वर्गवासी पिताजी ने श्री गु...जबलपुर ब्लॉगर सम्मलेन : एक स्नेह भरा अनुभवदोस्तों, नमस्कार . जबलपुर ब्लॉगर सम्मलेन मेरे लिए मात्र एक सम्मलेन ही नहीं बल्कि और भी बहुत कुछ रहा ..मित्रता और प्रेम और आत्मीयता और स्नेह से भरे हुए दो दिन कैसे गुजरे , पता ही नहीं चल पाया. इसकी शु...

शेखावाटी में होने वाली शादीयों के विचित्र रिवाजसबसे पहले काफी दिनों बाद आप सभी पाठकों ब्लॉग मित्रों गुरूजनों को मेरा सादर प्रणाम आपको बता दूं कि मैं पिछले काफी दिनों से शादीयों में व्यस्त था इसलिए कुछ नया लिख नहीं पाया और और पढ भी नहीं पाया शादीयों म...बदला-बदला सा लखनऊआज यूं ही शहर के मुआयने का मन हो आया. गाड़ी निकाली और निकल पड़े लखनऊ भ्रमण पर. अपना ही शहर ऐसे देख रहे थे मानो पहली बार देख रहे हों. मायावती ने शहर की शक्लो-सूरत कुछ इस कदर बदली है कि देखना बनता है. कल बा...

लिख नहीं पाया कुछ तुम्हारे लिएप्रिये आज दूर हो तुम लेकिन लिख नहीं पाया तुम्हारे लिए कुछ भी हर पल/ हर क्षण लगा साथ बैठी हो तुम मेरे कंधे पर रख लिया है तुमने अपना सिर तुम्हारे केश मेरे शर्ट की बटन से उलझ गए हैं दिन भर मैं सुलझाता रह...मेरी सूरत तेरी आँखेंश्रेष्ठता और चुनौतियों का कोई मापदण्ड नहीं होता। बेहतर और उत्कृष्ट काम सर्वव्यापी हो, सबके मन का हो और सभी की सुरुचि का विषय बने यह भी जरूरी नहीं होता। इसके बावजूद ऐसे काम हुआ करते हैं। सृजनात्मक क्षेत्रों...

टॉल्सटॉय,गोर्की और यह नन्हा दिमाग :(जैसा कि आपने जाना कि अब जीविकोपार्जन के लिए हमने एक छोटी सी कंपनी में ऑफिस एडमिनिस्ट्रेटर /इन्टरप्रेटर की नौकरी कर ली थी .क्योंकि अब क्लासेज़ में जाना उतना जरुरी नहीं रह गया था.अब बारी थी स्वध्ययन की ,...क्या हम अपने अतीत से शिक्षा लेते हैं?सन् 712 में मोहम्मद-बिन-कासिम बिलोचिस्तान की विस्तृत मरुभूमि को पार करके सिन्ध तक चला आया। केवल बीस वर्ष आयु वाले उस लुटेरे के मात्र छः हजार घुड़सवारों के समक्ष सिन्ध के राजा दाहिर के दस हजार अश्वारोही और ब...

राम को राज दिलाकर देखोकैकयी को समझाकर देखो । राम को राज दिलाकर देखो ॥ फासले बीच के मिट जायेंगे । हाथ से हाथ मिलाकर देखो ॥ छोड़के बात समझदारी की । जोश में होश गवांकर देखो ॥ खेल में और मज़ा आएगा । हार या जीत भुलाकर देखो ॥ प्रीत की ...विश्व विकलांगता दिवस …कल 3 नवंबर को सर्व शिक्षा अभियान के तत्वाधान में समेकित शिक्षा अभियान के अंतर्गत मरियम नगर गाज़ियाबाद के आनंद ट्रेनिंग सेंटर में विश्व विकलांगता दिवस का भव्य आयोजन किया गया. मानसिक और शारीरिक रूप से अक्षम ...

चलते चलते यहां भी मिलें ब्लागर्स से.......राम राम.................

12 टिप्पणियाँ:

बहुत बढ़िया चर्चा ... पोस्ट को स्थान देने के लिए शुक्रिया !

बहुत बढ़िया चर्चा ...शुक्रिया

उम्दा वार्ता लगाई है दादा .... वापसी पर शुभकामनाएं ! !

काय दादा
गज़ब कर दिये भाई

बहुत अच्छी वार्ता .वापसी पर स्वागत है और शुभकामनाये.

बहुत बढ़िया चर्चा .

बहुत बढ़िया वार्ता ....

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