शनिवार, 11 दिसंबर 2010

क्या फ़िर से इस भारत को आजाद करवाना होगा ? - कांग्रेसियों ने काटा तिरंगा - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो 
प्रणाम !

आप लोगो ने कभी ना कभी कॉमिकस तो पढ़ी ही होंगी  ...  तो क्या आप लोगो को बहादुर याद है ?? शायद आपका जवाब होगा .... नहीं .... क्यों कि वे दिन गए जब बहादुर और उसकी प्रेमिका लेडी बेला चंबल की घने जंगलों में डकैतों का मुकाबला करते थे। आज आतंकवाद और अपराध के नए रंग-रूप सामने हैं, तो बहादुर और उनकी प्रेमिका लेडी बेला ने इनके खात्मे के लिए खुद कमर कस ली है। देश का पहला कॉमिक हीरो अब लौट आया है वीरान-घने जंगलों से आबाद शहरी इलाकों में। तो तैयार हो जाओ इन्हे ऑनलाइन पढ़ने के लिए। इनसे आप रू-ब-रू हो सकते हो, इस कॉमिक बुक के ऑनलाइन साप्ताहिक एडिशन में। इस कॉमिक बुक के रचनाकार आबिद सुरती के अनुसार, वर्ष 1990 के बाद से यह कॉमिक बुक बंद हो गया था। फिर इसे दोबारा शुरू करने के बारे में सोचा गया। लेकिन बिल्कुल नए अंदाज और कलेवर में। यहां तक कि बाजार और समय के अनुकूल इसकी कहानी को बुना गया है। कुल मिलाकर, यह होगा पुराने बोतल में नई शराब की तरह। वे साथ में जोड़ते हैं-'इस बुक का मकसद होगा कि लोग अपनी सुरक्षा के बारे में खुद सतर्क रहें, किसी के भरोसे न रहें।' सुरती के अनुसार, बहादुर की ड्रेस होगी केसरिया रंग के कुर्ते के साथ जिंस।
इस कॉमिक बुक के रचनाकार ऐसा मानते हैं कि केसरिया रंग देश का प्रतीक है, इसलिए यह रंग बहादुर पर ज्यादा सूट करता है। प्रमोद ब्रšानिया जो इस कॉमिक बुक के इलस्ट्रेटर हैं, उनके अनुसार, कि गांव से निकलकर बहादुर का शहर की ओर आना इस कॉमिक बुक में बड़े बदलाव का संकेत देता है। 

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ब्लॉग 4 वार्ता  के इस मंच पर यह तो हो गई कॉमिकस की बात .... अब चलते है आज की ब्लॉग वार्ता की ओर .... 

सादर आपका

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आशा की अग्निशिखा :- प्रज्वलित रहे !








अविनाश मूर्ख है  :- लगता तो नहीं ... हो तो पता नहीं !


माचिस की तीली के ऊपर बिटिया की से पलती आग :- यौवन की दहलीज़ को पाके बनती संज्ञा जलती आग !!






सर्दी का सुख :- आप भी लीजिये !


कांग्रेसियों ने काटा तिरंगा :- देश में कुछ और बचा कहाँ है काटने को !






वक्त.. :- कैसा चल रहा है ... कोई बताएगा क्या ?




"संस्कार" :- जरुरी है ! 


'उस माँ को हमने क्या जाना' :- ना जान पायेगे !


नोबेल अगर किसी कश्मीरी आतंकवादी को मानवाधिकार के नाम पर मिलेगा तो हम क्या करेंगे ? :- ज़रदारी साहब को मोतीचूर के लड्डू भेजेंगे .... आखिर उनके दत्तक पुत्र का सम्मान हुआ है !


नई ग़ज़ल / अरे यार सब चलता है.... :- मुस्कुराइए कि आप भारत में है !


दो शब्द / वज्रासन :-  लीजिये पेश है एक योग-शृँखला !


सुने न सुने :- हम तो बोलेंगे .... संसद में आजकल यही तो हो रहा है !


लीजिये आज फिर अपनी डफली आप बजाता हूँ .... और अपनी नयी पोस्ट का लिंक दिए जाता हूँ .....


सर्दियों में सावधानी रखें, बीमारी से बचें :- नाक नल ना बन जाए संभालो यारो !!



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आज की ब्लॉग वार्ता बस यहीं तक ..... अगली बार फिर मिलता हूँ एक और ब्लॉग वार्ता के साथ तब तक के लिए ......
जय हिंद !!

20 टिप्पणियाँ:

सुन्दर लिंक्स के साथ उम्दा वार्ता।

बढिया रही वार्ता शिवम भाई । पहले आपकी डफ़ली पर ही पहुंच रहे हैं लिंक पकड के फ़िर सबके यहां पहुंचेंगे

बहुत सुन्दर चर्चा ! आपकी एक-लाईनाओं को हमेशा की तरह एन्जॉय किया ..

बचपन में खूब पढता था बहादुर के कॉमिक्स ... अब फिर से पढूंगा

लगता है शनिवार आपके दिए गए लिंक्स को ही समर्पित होगी!! आभार!!

आपने वार्ता में बहुत बढ़िया लिंक्स का चयन किया है!

शिवम,
ब्लॉगिंग की बीमारी का भी कुछ इलाज बता देते...

जय हिंद...

वार्ता में मेरी रचना सम्मलित करने के लिए आभार...!
सुन्दर लिंक्स..

हर बार की तरह आप की एक लाइन की टिप्पणी मजेदार कुछ लिंक देख आई अच्छे थे | वार्ता में मेरी पोस्ट शामिल करने के लिए धन्यवाद |

जा कर देखता हूँ सभी लिंक्स पे.
वैसे मेरे पोस्ट को शामिल करने के लिए आभार :)

शुक्रिया शिवम भाई

बहुत अच्छे लिंक है भैया... अभी पढ़ रहा हूँ ! शुभकामनायें !

सुंदर अति सुंदर चर्चा जी धन्यवाद

आप सब का बहुत बहुत आभार !

Hey what a nice post you have and I really agree with you!
thepriselive

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