मंगलवार, 7 दिसंबर 2010

पांचवा खंबा ब्लॉगर जन पत्रकार -- ब्लॉगर सम्मेलन ---- ललित शर्मा

नमस्कार, आज गिरीश दादा ने आह्वान किया है भ्रष्टाचार के खिलाफ़ लड़ाई का ब्लागरों से। भ्रष्टाचार के खिलाफ़ ब्लागर ही लड़ाई लड़ सकते हैं। जब पत्रकारिता पीत हो गयी है और पत्रकारों के नाम दलाली में आने लगे हैं तो लोगों का विश्वास इस पेशे याने चौथे खम्बे से उठने लगा है। ऐसी संकट की घड़ी में ब्लागर ही जन पत्रकार का काम कर सकते हैं और भ्रष्टाचार का ईमानदारी से पर्दाफ़ाश कर सकते हैं। इस समय पाँचवा खम्बा ही काम आ सकता है लोकतंत्र को बचाने के लिए। ब्लागर  अवश्य ही इस ओर ध्यान दें और ब्लॉग की ताकत को पहचाने। अब चलते हैं आज की ब्लॉग4वार्ता पर.........

 पर्यावरण पर लेख भेजने का अंतिम मौका 15 दिसम्बर 2010 -- ध्यान रहे कहीं चूक न जाएं।समस्त लेखकों को सूचना दी जाती है कि "बचपन और पर्यावरण" विषय पर लेख अपेक्षित संख्या में नहीं पहुंचे हैं। इसलिए एक मौका और देकर लेख भेजने की अंतिम तिथि को बढाकर 15 दिसम्बर 2010 किया जा रहा है।भ्रष्टाचार मिटाने ब्लागर्स आगे आयॆं. भ्रष्टाचार किस स्तर से समाप्त हो आज़ य सबसे बड़ा सवाल है ..? इसे कैसे समाप्त किया जावे यह दूसरा अहम सवाल है जबकि तीसरा सवाल न कह कर मैं कहूंगा कि :- भारत में-व्याप्त, भ्रष्टाचार न तो नीचे स्तर  चपरासी या बाबू करता है न ही शीर्ष पर बैठा कॊई भी व्यक्ति, बल्कि हम जो आम आदमी हैं वो उससे भ्रष्टाचार कराते हैं या हम वो जो व्यवसाई हैं. ऐसे लोग ही शेषनाग की तरह "सदाचार" को सर पर बैठा कर रखे हुए हैं,वरना  दुनियां से यह सदाचार भी रसातल में चला जाता. ऐसे ही लोगों को मदद कर सकते हैं. ब्लागर के रूप में सचाई को सामने लाएं. एक बार जब सब कुछ सामने आने लगेगा तो साथियो पक्का है पांचवां-स्तम्भ सबसे आगे होगा. पर पवित्रता होना इसकी प्राथमिक शर्त है.सही बात तथ्य आधारित कही जावे

आज आ गई फिर तुम यादहो गया दिल का गुलशन आबाद।। छा गई खूशियां दिल के आंगन में महकने लगी कलियां मन मधुबन में।। चाहत के अरमान मचलने लगे दिल में दिल करने लगा मिलने की फरियाद।। आज आ गई फिर तुम याद हो गया दिल का गुलशन आबाद।। दूरिय...कडकडाती ठण्ड ! क्या है ..... शायद ! प्रेम कहानी !कल रात बेचैनी थी नींद खुल गई बिस्तर पर पड़े पड़े करवट बदलता रहा दस से पंद्रह मिनट फिर उठकर बैठ गया ! थोड़ी देर बाद ही खिड़की के पास खडा हो ताजी हवा के झोंके लेते लेते नीचे सड़क के पार नजर जा टिकी ! एक लड़की खड...

चांदनी रात : कुछ एहसासस्वराज्य करुण * .उदास नदी और यादनीचे वीरान से मंदिर के बगल में बहती है उदास नदी गर्गा इस पर बने पुल से गुज़र कर जाती हूँ मै घर बनाने की सामग्री जुटाने उस पार . लहक-लहक ख़रीदकर सुन्दर पत्थर,शीशे लौटते हुए इसी रास्ते हो जाती हूँ… फिर नदी की...जीयो जी भर के!
जिंदगी है तो ख्वाहिशें हैं और ख्वाहिशें होती हैं हजार. कुछ होती है पूरी और कुछ रह जाते हैं ख्वाब. काश ये होता, काश वो होता. काश, ऐसा हमारे जमाने में होता. जिंदगी के उजाले में जीने के बाद कौन देखना चाहता ह...

खबर-असरखबरदार, आपके आस-पास खबरी हैं तो आप, आपकी हरकत या ना-हरकत भी खबर बन सकती है, क्योंकि खबरें वहां बनती हैं जहां खबरी हों जैसे पोस्ट वहां बन सकती है जहां ब्लॉगर हो। खबरों के लिए घटना से अधिक जरूरी खबरी हैं और ...नीला आसमान सो गया-सिलसिला १९८१सिलसिला एक प्रेम त्रिकोण पर आधारित कहानी है। इसमें अमिताभ बच्चन, जाया भादुड़ी और रेखा ने अभिनय किया है। यश चोपड़ा जो कि त्रिकोण से खासा लगाव रखते हैं उन्होंने ये एक विश्वसनीय सी फिल्म बनाई, मगर समय से थोडा आग...

पेंसिलें आज के बाद स्कूल ले जाने के लिए तुम्हें आधी पेन्सिल मिला करेगी. पापा ने ऐसा कहा तब मैं बहुत डर गया था. मैं इंतज़ार करने लगा कि अब वे कहें स्कूल जाओ. उस सुबह मैंने बताया था कि मेरी पेन्सिल खो गई है. ऐसा एक ही...नव गीतिकाइस तरह तू हवा की वकालत न कर देख , दुनिया की ऐसे अदावत न कर आसमाँ से तेरी दोस्ती क्या हुई सोच अपनों की ऐसे खिलाफत न कर चाँद तारों की ऐसे खिलाफत न कर धूप सूरज की ऐसे खिलाफत न कर ठीक है तेरी दौलत की गिनती...

धुंधली लकीरें ...लोग कहते हैं कि हथेली की लकीरों में किस्मत लिखी होती है . मेरी किस्मत भी स्याह स्याही से लिखी थी . फिर भी लकीरें धुंधली हो गयीं . और अब मेरी किस्मत कोई पढ़ नही पाता . धुंधली होती लकीरें एक जल...अ-योद्धालावारिस लाशों के वारिस* * राजीव यादव* सभी ताल ठोकतें हैं कि अयोध्या हमारी है। यही वह दावा है जिसने अयोध्या की ऊर्जा को सोख लिया है। पिछले दो दशक से मंदिर-मस्जिद के नाम पर हुई सियासत ने जीवन की तमाम खूबस...

ब्लॉगर सम्मेलनजहाँ तहाँ हो रहे ब्लॉगर सम्मेलन की खबरें पढ़ कर हम भी पूरी तरह बगुलाए हुए थे कि कब मौका मिले और चोंच मारें, तभी श्री अरविंद मिश्र जी का फो...कंस की जगह अगर अपना कोई बुद्धिजीवी ब्लोगर होता ?अविनाश वाचस्पति ने कर ली आंखें लाल चैट पे आते ही कल मुझ से किया सवाल "वाद-विवाद" क्यों ? "संवाद" क्यों नहीं ? मैंने कहा, "अब बेवकूफों के सर पे सींग तो होते नहीं, वरना मेरे भी होते" और मुझसे भी पह...भाई ललित जी का राम राम कोटा के लियेंश्मशान और कब्रिस्तान तक, लगे हैं जिन्दगी के मेले ---- ललित शर्मा ललित शर्मा, सोमवार, ६ दिसम्बर २०१० जहां से हम चलते हैं वहीं फ़िर पहुंच जाते हैं घूम घाम कर, धरती गोल है। ईश्वर की सारी सृष्टि ही गोल है,

 चलते चलते व्यंग्य चित्र


अब देते है ब्लाग वार्ता को विराम, सभी को ललित शर्मा का राम राम .........................

21 टिप्पणियाँ:

वाह वाह बहुत अच्छे और बहुतायत में लिंक दिए...धन्यवाद !

संक्षिप्त मगर बढ़िया चर्चा ! अच्छे लिंक्स के आभार

आप जहां कहां भी मिलते हो अपने से लगते हो। विचार भी अच्छे होते हैं। मेरे पोस्ट पर अपका इंतजार रहेगा।

बहुत बढिया वार्ता .. अच्‍छे अच्‍छे लिंक्स उपलब्‍ध कराने का आभार !!

बहुत बढ़िया वार्ता ..कई नए लिंक्स मिले ...आभार

आज तो लिंक्स की बहुत जरुरत थी...चिट्ठाजगत चल नहीं रहा..आभार.

प्रतियोगिता में लेख
अच्‍छा याद दिलाया
और समय भी बढ़ाया
चर्चा का महाप्रसाद
खूब रास आया
छिपकलियां छिनाल नहीं होतीं, छिपती नहीं हैं, छिड़ती नहीं हैं छिपकलियां

बढ़िया चर्चा ! अच्छे, नए लिंक्स लिंक्स के आभार!

चिट्ठों की चर्चा - चिट्ठाकारों के लिए..

बढिया लगी.

चिटठा जगत नहीं चल रहा है ऐसे में आपकी वार्ता और ज्यादा उपयोगी हो गई .
बेहतरीन वार्ता.आभार.

ललित दादा ... बहुत बहुत आभार इन उम्दा लिंक्स के लिए ! बहुत ही उपयोगी वार्ता !

बहुत अच्छे और बहुतायत में लिंक दिए...धन्यवाद !

बहुत ही उपयोगी रही यह चर्चा...बहुत-बहुत धन्यवाद ललित भाई!

चिट्ठाजगत बंद है तो ऐसे में ब्लॉग वार्ता का सहारा बहुत काम आ रहा है...अच्छे लिंक्स :)

ललित जी का आभार लिंक्स वाली इस प्रस्तुति के लिए।
कार्टून बढ़िया ढूंढ के लाये हैं आप।

जय हो लिंक्स की.

रामराम.

बहुत अच्छी प्रस्तुति. आभार.

bhai lalit ji bahut hardik pyar diya hai kin shbdon me aabhar vykt kroon
hridy se aabhar swikar kren
sneh v smvad bnaye rhen yhi mee liye sb kuchh hai

जय हो महाराज
ठण्ड में बड़ी कड़ कडाती जबरजस्त बढ़िया चर्चा ....
अब मैं छटवां खंबा बनाने जा रहा हूँ .... हा हा हा

जय हो महाराज
ठण्ड में बड़ी कड़ कडाती जबरजस्त बढ़िया चर्चा ....
अब मैं छटवां खंबा बनाने जा रहा हूँ .... हा हा हा

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