रविवार, 12 दिसंबर 2010

'मूर्ख' को भारत सरकार सम्मानित करेगी - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो ,
प्रणाम !!

आज एक खुशखबरी मिली है ... खुशदीप भाई के माध्यम से ... लीजिये आप भी जान लीजिये ...

भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने 29 नवंबर 2010 को अपने पत्र के ज़रिए ऐसी सूचना दी है जिसे जान कर पूरा हिंदी ब्लॉग जगत खुद को गौरान्वित समझेगा...हिंदी के उत्थान में विशिष्ट योगदान के लिए अविनाश वाचस्पति भाई को वर्ष 2008-09 के हिंदी साहित्य सम्मान के लिए चुना गया है...अविनाश भाई ये पुरस्कार 15 दिसंबर 2010 को अपराह्न साढ़े तीन बजे सूचना और प्रसारण सचिव के हाथों ग्रहण करेंगे...पुरस्कार समारोह दिल्ली में शास्त्री भवन के प्रथम तल पर स्थित सूचना कार्यालय के सम्मेलन हॉल में होगा...राजभाषा विभाग की निदेशक प्रियम्वदा ने अविनाश जी को सम्मान दिए जाने की सूचना दी है...
 ब्लॉग 4 वार्ता  मंच के पूरे वार्ता दल और पूरे हिंदी ब्लॉग जगत की ओर से अविनाश वाचस्पति जी को बहुत बहुत हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
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आइये अब चलते है आज की ब्लॉग वार्ता की ओर ....

सादर आपका 

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नाज़-ए-हिन्द सुभाष: परिशिष्ट :- कुछ जरूरी लिंक्स !


चलो मयखाने में.....केवल राम :- कसम से दिल की बात कह दी !




बेचारा ! :- आम आदमी !


"इन्द्र धनुष" :- सा खिले देश मेरा !




एक जरुरी सुचना :- आप भी सुने !










सिल्क सिटी सूरत के MMP SCHOOL में हास्य की बौछार :- इस ठण्ड में बौछार ... बाप रे !














ताऊ पहेली - १०४ :- बूझो जी बूझो ! 


मखमल की चुभन :- कांटे सी !






हेलन का कुत्ता :- भाग्यशाली है !






हम पी भी गए छलका भी गए... :- फिर भी होश में गए ! 






नहीं जवाब है जिसका, उसी सवाल में हूँ मैं .... :- लो जी यह भी कोई बात हुयी ?


दिल्ली ब्लॉगर्स करेंगे धमाल ...वो भी इसी वर्षांत पर .....कैसे .....jha ji end note :-  धूम मचा दे धूम !!


पहली दो कवितायें :- बहुत खूब !


असफल फिल्मों के सफल फिल्मकार :- फिर फिल्मे असफल क्यों रही ..यार !


अश्वथामा ने कहा था :- यह संसार एक दिन अवश्य सुन्दर बनेगा !



अकबर इलाहाबादी - एक श्रद्धांजलि :- तुमको खबर नहीं जमाना बदल गया !


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आज की ब्लॉग वार्ता बस यहीं तक ..... अगली बार फिर मिलता हूँ एक और ब्लॉग वार्ता के साथ तब तक के लिए ......
जय हिंद !!

शनिवार, 11 दिसंबर 2010

क्या फ़िर से इस भारत को आजाद करवाना होगा ? - कांग्रेसियों ने काटा तिरंगा - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो 
प्रणाम !

आप लोगो ने कभी ना कभी कॉमिकस तो पढ़ी ही होंगी  ...  तो क्या आप लोगो को बहादुर याद है ?? शायद आपका जवाब होगा .... नहीं .... क्यों कि वे दिन गए जब बहादुर और उसकी प्रेमिका लेडी बेला चंबल की घने जंगलों में डकैतों का मुकाबला करते थे। आज आतंकवाद और अपराध के नए रंग-रूप सामने हैं, तो बहादुर और उनकी प्रेमिका लेडी बेला ने इनके खात्मे के लिए खुद कमर कस ली है। देश का पहला कॉमिक हीरो अब लौट आया है वीरान-घने जंगलों से आबाद शहरी इलाकों में। तो तैयार हो जाओ इन्हे ऑनलाइन पढ़ने के लिए। इनसे आप रू-ब-रू हो सकते हो, इस कॉमिक बुक के ऑनलाइन साप्ताहिक एडिशन में। इस कॉमिक बुक के रचनाकार आबिद सुरती के अनुसार, वर्ष 1990 के बाद से यह कॉमिक बुक बंद हो गया था। फिर इसे दोबारा शुरू करने के बारे में सोचा गया। लेकिन बिल्कुल नए अंदाज और कलेवर में। यहां तक कि बाजार और समय के अनुकूल इसकी कहानी को बुना गया है। कुल मिलाकर, यह होगा पुराने बोतल में नई शराब की तरह। वे साथ में जोड़ते हैं-'इस बुक का मकसद होगा कि लोग अपनी सुरक्षा के बारे में खुद सतर्क रहें, किसी के भरोसे न रहें।' सुरती के अनुसार, बहादुर की ड्रेस होगी केसरिया रंग के कुर्ते के साथ जिंस।
इस कॉमिक बुक के रचनाकार ऐसा मानते हैं कि केसरिया रंग देश का प्रतीक है, इसलिए यह रंग बहादुर पर ज्यादा सूट करता है। प्रमोद ब्रšानिया जो इस कॉमिक बुक के इलस्ट्रेटर हैं, उनके अनुसार, कि गांव से निकलकर बहादुर का शहर की ओर आना इस कॉमिक बुक में बड़े बदलाव का संकेत देता है। 

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ब्लॉग 4 वार्ता  के इस मंच पर यह तो हो गई कॉमिकस की बात .... अब चलते है आज की ब्लॉग वार्ता की ओर .... 

सादर आपका

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आशा की अग्निशिखा :- प्रज्वलित रहे !








अविनाश मूर्ख है  :- लगता तो नहीं ... हो तो पता नहीं !


माचिस की तीली के ऊपर बिटिया की से पलती आग :- यौवन की दहलीज़ को पाके बनती संज्ञा जलती आग !!






सर्दी का सुख :- आप भी लीजिये !


कांग्रेसियों ने काटा तिरंगा :- देश में कुछ और बचा कहाँ है काटने को !






वक्त.. :- कैसा चल रहा है ... कोई बताएगा क्या ?




"संस्कार" :- जरुरी है ! 


'उस माँ को हमने क्या जाना' :- ना जान पायेगे !


नोबेल अगर किसी कश्मीरी आतंकवादी को मानवाधिकार के नाम पर मिलेगा तो हम क्या करेंगे ? :- ज़रदारी साहब को मोतीचूर के लड्डू भेजेंगे .... आखिर उनके दत्तक पुत्र का सम्मान हुआ है !


नई ग़ज़ल / अरे यार सब चलता है.... :- मुस्कुराइए कि आप भारत में है !


दो शब्द / वज्रासन :-  लीजिये पेश है एक योग-शृँखला !


सुने न सुने :- हम तो बोलेंगे .... संसद में आजकल यही तो हो रहा है !


लीजिये आज फिर अपनी डफली आप बजाता हूँ .... और अपनी नयी पोस्ट का लिंक दिए जाता हूँ .....


सर्दियों में सावधानी रखें, बीमारी से बचें :- नाक नल ना बन जाए संभालो यारो !!



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आज की ब्लॉग वार्ता बस यहीं तक ..... अगली बार फिर मिलता हूँ एक और ब्लॉग वार्ता के साथ तब तक के लिए ......
जय हिंद !!

शुक्रवार, 10 दिसंबर 2010

धारावाहिकों का सफरनामा - क्या सन्देश दे रही हैं आज के टीव्ही कार्यक्रम हमें? - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा


प्रिय ब्लॉगर मित्रो ,
प्रणाम !

बांकेबिहारी का विहार

( आलेख :- डॉ. अतुल टण्डन )

वृंदावन श्यामा जू और श्रीकुंजविहारी का निज धाम है। यहां राधा-कृष्ण की प्रेमरस-धारा बहती रहती है। मान्यता है कि चिरयुवा प्रिय-प्रियतम श्रीधाम वृंदावन में सदैव विहार में संलग्न रहते है। यहां निधिवन को समस्त वनों का राजा माना गया है, इसलिए इनको 'श्रीनिधि वनराज' कहा जाता है। पंद्रहवीं शताब्दी में सखी-संप्रदाय के प्रवर्तक संगीत सम्राट तानसेन के गुरु स्वामी हरिदास जब वृंदावन आए, तब उन्होंने निधिवन को अपनी साधनास्थली बनाया।
किंवदंती है कि स्वामी हरिदास निधिवन में कुंजबिहारी को अपने संगीत से रिझाते हुए जब तानपूरे पर राग छेड़ते थे, तब राधा-कृष्ण प्रसन्न होकर रास रचाने लग जाते थे। यह रास-लीला उनके शिष्यों को नहीं दिखती थी। विहार पंचमी को लेकर कथा है कि अपने भतीजे और परमप्रिय शिष्य वीठल विपुलजी के अनुरोध पर उनके जन्मदिवस मार्गशीर्ष-शुक्ल-पंचमी के दिन स्वामी जी ने जैसे ही तान छेड़ी, वैसे ही श्यामा-श्याम अवतरित हो गए। स्वामीजी ने राधा जी से प्रार्थना की वे कुंजविहारी में ऐसे समा जाएं, जैसे बादल में बिजली। स्वामी जी के आग्रह पर प्रियाजी अपने प्रियतम में समाहित हो गई। इस प्रकार युगल सरकार की सम्मिलित छवि बांकेबिहारी के रूप में मूर्तिमान हो गई और अगहन सुदी पंचमी 'विहार पंचमी' के नाम से प्रसिद्ध हो गई।  

इस बार यह 10 दिसंबर को है यानी कि आज !

कहा जाता है कि स्वामी हरिदास ने अपने जीवनकाल में ही अपने भाई स्वामी जगन्नाथजी को दीक्षा देकर श्रीविहारीजी की सेवा सौंप दी थी। ये श्रीनिधिवनराज में ही रहते थे, लेकिन उनके वंशजों ने वर्तमान बिहारीपुरा नामक स्थान पर एक मंदिर बनाकर उसमें श्रीबांकेबिहारी को स्थानांतरित किया। ऐसा सुना जाता है कि विक्रम संवत् 1779 (सन् 1722 ई.) के लगभग उसका पुनर्निर्माण किया गया। मंदिर का वर्तमान स्वरूप सन् 1864 ई. में तैयार हुआ था।
निधिवन में श्यामा-श्यामसुंदर के नित्य विहार के विषय में स्वामी हरिदासजी द्वारा रचित काव्य ग्रंथ 'केलिमाल' पर्याप्त प्रकाश डालता है। 110 पदों वाला यह काव्य वस्तुत: स्वामीजी के द्वारा समय-समय पर गाये गए ध्रुपदों का संकलन है, जिनमें कुंजबिहारी के नित्य विहार का अतिसूक्ष्म एवं गूढ़ भावांकन है। 
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ब्लॉग 4 वार्ता  के इस मंच से अब हम सब राधे राधे जपते हुए चलते है आज की ब्लॉग वार्ता की ओर ....  

सादर आपका 

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ऋतु परिवर्तन ..... :- हो रहा है जोरो से !

मेरे बैचैन दिल में दर्द की एक लहर मचल जाती है..... :- दवा तो पता है ना ... ऐसे में कौन सी ली जाती है ?

कपोत पलटदास ब्लॉग अवतारी :- हमको लगी पोस्ट यह भारी !

धारावाहिकों का सफरनामा :- कहाँ से कहाँ तक ?

क्या सन्देश दे रही हैं आज के टीव्ही कार्यक्रम हमें? :- आपकी तमीज मेरी तमीज से बेहतर कैसे ?

अब सदायें आसमां के पार नहीं जातीं :- नेटवर्क की समस्या होगी !

पहाड़ी ओहदे.. :- पर कौन है ??

दिल्‍ली मेट्रो: स्वर्ग भी, नरक भी :- एक के साथ एक मुफ्त ... मुफ्त ... मुफ्त !!

अनुरागी मन - कहानी भाग ८ :- कहानी अभी बाकी है मेरे दोस्त !

अहसास ! :- किस को ....किस बात का ?

माटी का मोल । :- अनमोल !!

है आज समय जागने का, सो रहे हो आज क्यूँ? :- आदत जो पड़ गई है !

कोइ तो मदद करेगा ही... :- अरे क्या हो गया ?

परावाणी:The Eternal Poetry: जब जब शासक,खल के समक्ष झुकता है -- :- तो क्या होता है ?

स्पर्धा क्रमांक 4 के विजेता कवि अनिल मानधनिया संग दमण में रमण का आनन्द ले कर लौट आया हूँ :- गनीमत है !

लीजिये अब एक बेहद जरूरी और काम की पोस्ट की ओर लिए चलता हूँ ...

ब्‍लॉग गायब हो रहे हैं, सावधानी बरतें : फिर मत कहियेगा खबर न हुई :- आभार खबर के लिए !

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आज की ब्लॉग वार्ता बस यहीं तक ..... अगली बार फिर मिलता हूँ एक और ब्लॉग वार्ता के साथ तब तक के लिए ......
जय हिंद !!

गुरुवार, 9 दिसंबर 2010

सुना है -समीर लाल ने ब्लागिंग छोड़ी !! एग्रीगेटर बिना कसमसाहट क्यों..?


https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhgJKd0P-sNWPKE-1yPTsnTaA6mB7VXTKTKACB97pRp4nvUzoLhneOWqnCkvUuoVGu_xrj_0kV0b376no8vj-MvYSImoC_xGNom03DSryvbM5wnsS2N1njdZ1uhaxPbgWS3etkbzs55Q0A/s1600/25pf-1.JPG बकौल ललित तथा कल प्रकाशित  यात्रा विवरण अनुसार इन्दु जी के बेटे की शादी में ऐसेईच्च कई  सारे फ़ोटू बने थे लगे "वहां और भी ब्लागर्स का इंतजार था, जिनके चित्रों के साथ कमरे बुक थे। समीर  दादा, महफ़ूज, सतीश सक्सेना, इत्यादि के लिए भी। एक फ़्लैट ब्लागर हाऊस ही  बना रखा था और सजावट देख कर तो कई रिश्तेदारों के सीने पर सांप लोट गए  होगें। उन्होने भी सोचा होगा कि ये ब्लागर क्या बला है भाई, क्या  रिश्ते-नातेदारों से भी बढकर हो गए? हा हा हा ऐसा ही कुछ था, जो मुझे महसूस  हुआ। लेकिन हमारी तो चूल्हे तक पहुंच थी। इसलिए नो टेंशन। शादी के घर में  11 बजे तक तो यूं ही गप्पें मारते रहे जैसे कि किसी को कोई चिंता ही नही है  और शाम को शादी है। बस बिंदास बोल हा हा हा। ठहाके ब्लॉगर हाऊस की छत से  टकरा कर फ़र्श पर गिरते रहे। ढेर लग गया ठहाकों का। सिर्फ़ ठहाके ही ठहाके  गुंजते रहे। शादी के बाद सभी को सीख में ठहाकों का वितरण किया जाएगा ऐसा लग  गया था। हा हा हा(आगे इधर से )"
                   कुछ दिनों तक थके मांदे एग्रीगेटर पर उठ रहे सवालात होंगे  फ़िर सब खत्म, सिर्फ बातें ही रह जाएगी. हम वाकई केवल बैसाखियों पर चलने के आदी न  रहें यदि एग्रीगेटर न हो भी आप को कोई समस्या पेश न आयेगी यदी आप दमदार  लेखक है कवि हैं. साहित्यकार हैं. तुलसी,कबीर,नानक,मीरा, ग़ालिब,मीर,किसे  एग्रीगेटर्स ने आगे बढ़ाया. एक कहानी हीर रांझा वाली पंजाब से आती है विश्व  भर में छा जाती है. सूरा तो दफ़न हो जाता, अगर एग्रीगेटर न होते तो..? फ़िर  भी विकास से जनित सुविधाओं ने हमको अपाहिज बना दिया है -मित्रो, यह सोच ही  गलत है- बस हमेशा विकल्पों पर ध्यान दीजिये.  विकल्प क्या हैं देखिये एक ये  ज्ञानदत्त पांडे जी ने हिंट दिया. वैसे  हम लोग मै समीर जी, ललित जी सब इस बारे में चर्चा कर चुके थे. खैर आपको  रफ़्तार के बारे में पता है न तो देखिये हम कितने लिंक ले आये है आज़ उधर से  ही अविनाश जी का अभिमत देखिये  नुक्कड़ पे तो हैलू मिथला मुझे मिल ही गया, उधर महाशक्ति ने एक शक्तिप्रदर्शन कर ही दिया, वंदना गुप्ता जी भी उम्दा कविता लें आईं एक प्रयास पर  कहीं खुशदीप भी अमीर-गरीब की बात बता रहे हैं. बकौल फ़िरदौस दर्द तो मर्दों को भी होता है...फ़िरदौस ख़ान केवल राम जी चलते-चलते पर लिख रहे हैं :-एक दिन जिन्दगी हमसे यूँ ही रूठ जाएगी. मुन्नी के बाद शीला को दिन भर सुना जाता है भड़ास पर पठन योग्य आलेख है. जबकि दिव्या जी शिक्षा प्रणाली में बदलाव चाहतीं हैं.
रफ़्तार
सुना है :- समीर लाल ने पोस्ट लिखनी बंद कर दी ?
 "अंय किसने कहा ?"
  "कोई कह रहा था..?"
 किधर ? पान की दुकान पर और कहां ?
    आप ही देखिये "पूर्णविराम" 
                                                                                                                                                                                                                                                                                 
रफ़्तार   से साभार
                                   
1सीता की दुविधा रामकथा का नया रूप
2जाऊं तो जाऊं कहाँ समापन
3भारतीय की हुई ईस्ट इंडिया कंपनी
4एक श्रद्धांजलि उस वीर वीरांगना मर्दानी को-रानी लक्ष्मीबाई
5जूनियर ब्लॉगर एसोशिएशन की ब्लॉग निगरानी समिति का गठन
6एक साथ कई काम कहीं आप बीमार तो नहीं
7कब तक खून चूसेंगे परदेसी और परजीवी
8दोस्तों के बारे में
9जय बोलो बाबा केदारनाथ और बद्री विशाल की
10जनगणना में धर्म शामिल करने की माँग साम्प्रदायिकता
11ऐसे नचनियाये पिल्‍लाये समय में
12तेरा ख्याल और फ़िर वही सवाल
13आज मेरी शादी की सालगिरह है .बधाइयां स्वीकार की जायेंगी
14मैं अकेला हो गया हूँ
15पंजाब के बच्चों के बालों में यूरेनियम
16रचना भी एक साधना
17कार्टून शुक्र है अर्जुनसिंह और राजीव गाँधी ने २०-२५
18अभी और होंगे बहुत से भोपाल
19दाम्पत्य जीवन में दरार और मनोग्रंथियाँ
20पुरुषनिर्मित सौन्दर्यकसौटी पर ही खुद को तोलती है औरतें
21आमची कुठेही शाखा नाही
22घर मेरा इतिहास होगा
23धूप कणी मुक्तक शशि पाधा
24बूढ़ा जीवन रीता रीता पर न जाने कब मैं मुक्ति पाऊंगा
25राजेंद्र जी का हीर को तोहफा
26महारानी के महा बलिदान दिवस पर विशेष
27ऐटीत जावे आय.टी सी
28शामरंगी रंगली ती शुद्ध हे किटाळ आहे
29पानी में डूबे वेनिस को महसूस करें सतीश सक्सेना
30निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों ने की करोड़ों रुपए की घोटाला
31अमिता कौंडल की कविता औद्योगीकरण का दानव
32दो जून की रोटी को मोहताज सांस्कृतिक दूत ये सपेरे
33किसने रोका अखबारों में खबर छपने से
कुल पन्ने : 1  2  3  4  5  6  7  8  9  10  11  12  13  14  15  16  17  18  19  20  तक

बुधवार, 8 दिसंबर 2010

चिट्टाजगत अस्वस्थ्य है ठीक होने तक , हम है ... - लीजिये पेश है 63 लिंक्स की ब्लॉग वार्ता - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो,
प्रणाम !

मंगलवार की शाम साढ़े छह बजे वाराणसी का गंगा आरती स्थल शीतला घाट जबरदस्त बम विस्फोट से दहल गया। इस बम विस्फोट में लगभग दो दर्जन लोग घायल हुए हैं, जबकि अस्पताल में उपचार के दौरान एक बच्ची की मौत हो गई। घायलों में आधा दर्जन विदेशी नागरिकों के होने की सूचना है। मंडलीय अस्पताल पहुंचे 13 घायलों में से इटली के एक नागरिक को गंभीर स्थिति में बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल रेफर कर दिया गया। विस्फोट तब हुआ जब गंगा आरती चल रही थी। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि घाट की रेलिंग और सीढि़यों के पत्थर तक उखड़ गये।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विस्फोट आरती स्थल से लगभग 20 मीटर दूरी पर हुआ। उस दौरान आरती देखने के लिए मौके पर हजारों लोग जमा थे। विस्फोट की चपेट में आने से आधा दर्जन वहीं लहूलुहान होकर गिर पड़े, जबकि दो दर्जन लोगों को गहरी चोट आयी। घाट समेत आसपास के इलाकों में भगदड़ मच गयी।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बम दूध के कंटेनर में रखा गया था। छह दिसंबर के अगले दिन हुए इस धमाके को पूर्व नियोजित माना जा रहा है। अयोध्या के विवादित ढांचा ध्वंस की बरसी का दिन सुकून से गुजरा था। पुलिस फोर्स थोड़ा बेफिक्र थी। इसका फायदा भी आतंकियों ने उठाया। पुलिस का अनुमान है कि बम को टाइमर सिस्टम से कंट्रोल किया गया था। इसमें आईईडी या आरडीएक्स के प्रयोग की संभावना को भी पुलिस खंगाल रही है। फिलहाल पूरे इलाके को अ‌र्द्ध सैनिक बलों के हवाले करने के बाद सील कर दिया गया है।
सूचना मिलते ही पुलिस व प्रशासन के आला अधिकारी मौके पहुंच गये। घायलों में इटली निवासी 52 वर्षीय मनतरली व सुल्तानपुर निवासी जरायू को कबीरचौरा स्थित मंडलीय अस्पताल पहुंचाया गया। शेष घायलों को विभिन्न अस्पतालों में ले जाया गया। इनमें टेढ़ी नीम निवासी एक वर्षीय बच्ची बेबी भी शामिल थी। उसकी नानी उसे लेकर गंगा आरती देखने गयी थी। इसी दौरान विस्फोट की जद में आकर बेबी घायल हो गयी। उपचार के लिए उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया। उसकी 45 वर्षीय नानी उर्मिला भी गंभीर रूप से घायल है।
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ब्लॉग 4 वार्ता  के पूरे वार्ता दल की ओर से हम इस धमाके की घोर भात्सना करते है और सरकार से यह अपील करते है कि जल्द से जल्द जांच पूरी करवा दोषियों को कड़ी सजा दी जाए ! 

अब सिर्फ़ बातों से काम नहीं चलेगा कुछ तो ठोस करवाई होनी ही चाहिए !

साथ साथ इस धमाके में घायल हुए और मारे गए लोगो के परिवार के साथ हमारी हार्दिक संवेदनाएं जुडी हुयी है ! इस समय हम सब को एक जुट हो कर रहना है और इन आतंकियों के नापाक मंसूबो को नाकामियाब करना है !


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अब चलते है इस मंच की २७० वी ब्लॉग वार्ता की ओर ....

सादर आपका 


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खेलें हम जी जान से - मेरी नज़र से :- आपकी नज़र से हम क्यों खेले जी .... कोई 'दोस्ताना' थोड़े ही है !




इंतजार के युग :- कब ख़त्म होंगे ?






खिदमतेख़ल्क ही तो इन्सानियत का सरमाया है :- ज़रा समझिए तो सही यह क्या फ़रमाया है !






रंग बिरंगी तितलियाँ ...! :- उड़ जाती है ...फिर आ जाती है !









छोटी सी ये दुनिया...पहचाने रास्ते हैं... :- तुम कभी तो मिलोगे तो पूछेंगे हाल !


ब्लॉगर पंच लक्षणं :- कौन कौन से ?






भारत में आज 'बकासुर' ही 'बकासुर', 'भीम' एक भी नहीं...खुशदीप :- कुंती ही नहीं है तो भीम कहाँ होंगे !


कि दिल अभी भरा नहीं! :- मियाँ बीबी राज़ी तो क्या करेगा काज़ी?


६ दिसंबर ९२ कुछ ख़ास था मेरे लिए :- बहुत से और लोगो के लिए भी था जी !


जान लेना अपने आप को :- बड़ी बात है !


मेरे दिल की बात :- आप तक पहुँची क्या ??










नीला पुलोवर :- किस ने पहना ?


एक दिन जिन्दगी .......केवल राम :-  चलते चलते चली जाएगी !


कितनी नीरा, कितने राजा? :- अनगिनत है जी !


ये जो मेरा चेहरा है :- सबसे अलहदा है !


लघुकथा :: अपराध :- मार्मिक !


उनके कपड़ों में जेब क्यों नहीं ? :- बात में दम तो है  !!


देश के सालाना बजट जितने बड़े घोटाले में अब तक़ गिरफ़्तारी न होना, जेलों में बंद सैकड़ो गरीबो के साथ मज़ाक नही तो क्या है? :- राजा का राज !


शीला या मुन्नी :- हम बोले कि दोनों या दोनों नहीं तो .....???


वन्दे मातरम :- वन्दे मातरम, बन्धु !


सुगंधा मिश्रा और उनका गाया वो यादगार पंजाबी टप्पा..  :- वाह भाई वाह !!


मध्‍य दिसंबर 2010 से लोगों पर स्‍वक्षेत्री बृहस्‍पति का प्रभाव आंशिक हो जाएगा !! :- अच्छा जी !


मेरा वार्षिकोत्सव :) :- आप भी आइये ना !!


6 दिसंबर, डा.आम्बेडकर जी और बावरी मस्जिद :- क्या मतलब ??


छलिया प्रेमी :- कौन .... कहाँ ...कैसे ???


विद्रोही का ब्रह्मज्ञान और कविता :- सकल पदार्थ इ जग माहि – कर्महीन पावत नाहीं


हाईकु :- पन काई कु ??




जूँ :- कहाँ रेंग रही है ?




पेंसिलें :- कितनी है .... मुझे भी चाहिए !!




बनारस की एक हस्ती और -------- :- चले मिलने ?




रोज़ दलाली करने जाता दफ्तर कौन... :- हम आप और कौन ??




मेरे लेपटोप को डेंगू हो गया था.... :- किसे दिखाया ?


आई टेस्टिंग :- कितना नंबर है भाई ??


बार बार मुम्बई से बनारस तक चीख चीख के उभरती आवाज़ों से ना वाक़िफ़ तुम!! :- कब जागोगे ?


आप लोंगो से बिछड़े हुए ३ महीने हो गये :- अब तो वापस आ गए ना ??


लाफ्टर का चौक्का...खुशदीप :- मारा देख के मौका !


चिट्ठाजगत क्‍यों खफा है आजकल, दर्शन नहीं हो रहे हैं कई दिनों से :- क्या खबर, क्या पता !!


मां की जयकार, ख्वाजा का दरवार और अंडों का व्यापार :- हर सु रहे मोहब्बत ... यही वक़्त की दरकार !


"ये कैसी तरक्की" :- जैसी आप समझो वैसी !


"गांधी जी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक") :- या बोलो महात्मा जी !



ऋषी अरविन्द की वाणी :- सुनी आप ने ?


निकम्‍मी नहीं, लुटेरी है सरकार :- सटीक बताये आप !


जय झारखण्ड (कार्टून धमाका) :- धमाको को कार्टून में ही रहने दो !


कोन है असली कोन है नकली .. ई तो राम जाने... :- या आप जाने !!


सड़क मार्ग से महाराष्ट्र यात्रा: वर्षों पुरानी तमन्ना पूरी हुई, गुरूद्वारों के शहर नांदेड़ में :- जो बोले सो निहाल ....


"अखिल भारतीय ब्लागर्स एसोसिएशन" का चुनाव :- आ जाओ भईया लाइन में !!


और यह लीजिये हो गई तैयार ६३ पोस्टो की लिंक्स से सजी हुयी आज की ब्लॉग वार्ता ..... अब मत बोलियेगा कि ब्लॉग जगत की कोई खबर नहीं मिल रही !!


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आज की ब्लॉग वार्ता बस यहीं तक ..... अगली बार फिर मिलता हूँ एक और ब्लॉग वार्ता के साथ तब तक के लिए ......

जय हिंद !!

मंगलवार, 7 दिसंबर 2010

पांचवा खंबा ब्लॉगर जन पत्रकार -- ब्लॉगर सम्मेलन ---- ललित शर्मा

नमस्कार, आज गिरीश दादा ने आह्वान किया है भ्रष्टाचार के खिलाफ़ लड़ाई का ब्लागरों से। भ्रष्टाचार के खिलाफ़ ब्लागर ही लड़ाई लड़ सकते हैं। जब पत्रकारिता पीत हो गयी है और पत्रकारों के नाम दलाली में आने लगे हैं तो लोगों का विश्वास इस पेशे याने चौथे खम्बे से उठने लगा है। ऐसी संकट की घड़ी में ब्लागर ही जन पत्रकार का काम कर सकते हैं और भ्रष्टाचार का ईमानदारी से पर्दाफ़ाश कर सकते हैं। इस समय पाँचवा खम्बा ही काम आ सकता है लोकतंत्र को बचाने के लिए। ब्लागर  अवश्य ही इस ओर ध्यान दें और ब्लॉग की ताकत को पहचाने। अब चलते हैं आज की ब्लॉग4वार्ता पर.........

 पर्यावरण पर लेख भेजने का अंतिम मौका 15 दिसम्बर 2010 -- ध्यान रहे कहीं चूक न जाएं।समस्त लेखकों को सूचना दी जाती है कि "बचपन और पर्यावरण" विषय पर लेख अपेक्षित संख्या में नहीं पहुंचे हैं। इसलिए एक मौका और देकर लेख भेजने की अंतिम तिथि को बढाकर 15 दिसम्बर 2010 किया जा रहा है।भ्रष्टाचार मिटाने ब्लागर्स आगे आयॆं. भ्रष्टाचार किस स्तर से समाप्त हो आज़ य सबसे बड़ा सवाल है ..? इसे कैसे समाप्त किया जावे यह दूसरा अहम सवाल है जबकि तीसरा सवाल न कह कर मैं कहूंगा कि :- भारत में-व्याप्त, भ्रष्टाचार न तो नीचे स्तर  चपरासी या बाबू करता है न ही शीर्ष पर बैठा कॊई भी व्यक्ति, बल्कि हम जो आम आदमी हैं वो उससे भ्रष्टाचार कराते हैं या हम वो जो व्यवसाई हैं. ऐसे लोग ही शेषनाग की तरह "सदाचार" को सर पर बैठा कर रखे हुए हैं,वरना  दुनियां से यह सदाचार भी रसातल में चला जाता. ऐसे ही लोगों को मदद कर सकते हैं. ब्लागर के रूप में सचाई को सामने लाएं. एक बार जब सब कुछ सामने आने लगेगा तो साथियो पक्का है पांचवां-स्तम्भ सबसे आगे होगा. पर पवित्रता होना इसकी प्राथमिक शर्त है.सही बात तथ्य आधारित कही जावे

आज आ गई फिर तुम यादहो गया दिल का गुलशन आबाद।। छा गई खूशियां दिल के आंगन में महकने लगी कलियां मन मधुबन में।। चाहत के अरमान मचलने लगे दिल में दिल करने लगा मिलने की फरियाद।। आज आ गई फिर तुम याद हो गया दिल का गुलशन आबाद।। दूरिय...कडकडाती ठण्ड ! क्या है ..... शायद ! प्रेम कहानी !कल रात बेचैनी थी नींद खुल गई बिस्तर पर पड़े पड़े करवट बदलता रहा दस से पंद्रह मिनट फिर उठकर बैठ गया ! थोड़ी देर बाद ही खिड़की के पास खडा हो ताजी हवा के झोंके लेते लेते नीचे सड़क के पार नजर जा टिकी ! एक लड़की खड...

चांदनी रात : कुछ एहसासस्वराज्य करुण * .उदास नदी और यादनीचे वीरान से मंदिर के बगल में बहती है उदास नदी गर्गा इस पर बने पुल से गुज़र कर जाती हूँ मै घर बनाने की सामग्री जुटाने उस पार . लहक-लहक ख़रीदकर सुन्दर पत्थर,शीशे लौटते हुए इसी रास्ते हो जाती हूँ… फिर नदी की...जीयो जी भर के!
जिंदगी है तो ख्वाहिशें हैं और ख्वाहिशें होती हैं हजार. कुछ होती है पूरी और कुछ रह जाते हैं ख्वाब. काश ये होता, काश वो होता. काश, ऐसा हमारे जमाने में होता. जिंदगी के उजाले में जीने के बाद कौन देखना चाहता ह...

खबर-असरखबरदार, आपके आस-पास खबरी हैं तो आप, आपकी हरकत या ना-हरकत भी खबर बन सकती है, क्योंकि खबरें वहां बनती हैं जहां खबरी हों जैसे पोस्ट वहां बन सकती है जहां ब्लॉगर हो। खबरों के लिए घटना से अधिक जरूरी खबरी हैं और ...नीला आसमान सो गया-सिलसिला १९८१सिलसिला एक प्रेम त्रिकोण पर आधारित कहानी है। इसमें अमिताभ बच्चन, जाया भादुड़ी और रेखा ने अभिनय किया है। यश चोपड़ा जो कि त्रिकोण से खासा लगाव रखते हैं उन्होंने ये एक विश्वसनीय सी फिल्म बनाई, मगर समय से थोडा आग...

पेंसिलें आज के बाद स्कूल ले जाने के लिए तुम्हें आधी पेन्सिल मिला करेगी. पापा ने ऐसा कहा तब मैं बहुत डर गया था. मैं इंतज़ार करने लगा कि अब वे कहें स्कूल जाओ. उस सुबह मैंने बताया था कि मेरी पेन्सिल खो गई है. ऐसा एक ही...नव गीतिकाइस तरह तू हवा की वकालत न कर देख , दुनिया की ऐसे अदावत न कर आसमाँ से तेरी दोस्ती क्या हुई सोच अपनों की ऐसे खिलाफत न कर चाँद तारों की ऐसे खिलाफत न कर धूप सूरज की ऐसे खिलाफत न कर ठीक है तेरी दौलत की गिनती...

धुंधली लकीरें ...लोग कहते हैं कि हथेली की लकीरों में किस्मत लिखी होती है . मेरी किस्मत भी स्याह स्याही से लिखी थी . फिर भी लकीरें धुंधली हो गयीं . और अब मेरी किस्मत कोई पढ़ नही पाता . धुंधली होती लकीरें एक जल...अ-योद्धालावारिस लाशों के वारिस* * राजीव यादव* सभी ताल ठोकतें हैं कि अयोध्या हमारी है। यही वह दावा है जिसने अयोध्या की ऊर्जा को सोख लिया है। पिछले दो दशक से मंदिर-मस्जिद के नाम पर हुई सियासत ने जीवन की तमाम खूबस...

ब्लॉगर सम्मेलनजहाँ तहाँ हो रहे ब्लॉगर सम्मेलन की खबरें पढ़ कर हम भी पूरी तरह बगुलाए हुए थे कि कब मौका मिले और चोंच मारें, तभी श्री अरविंद मिश्र जी का फो...कंस की जगह अगर अपना कोई बुद्धिजीवी ब्लोगर होता ?अविनाश वाचस्पति ने कर ली आंखें लाल चैट पे आते ही कल मुझ से किया सवाल "वाद-विवाद" क्यों ? "संवाद" क्यों नहीं ? मैंने कहा, "अब बेवकूफों के सर पे सींग तो होते नहीं, वरना मेरे भी होते" और मुझसे भी पह...भाई ललित जी का राम राम कोटा के लियेंश्मशान और कब्रिस्तान तक, लगे हैं जिन्दगी के मेले ---- ललित शर्मा ललित शर्मा, सोमवार, ६ दिसम्बर २०१० जहां से हम चलते हैं वहीं फ़िर पहुंच जाते हैं घूम घाम कर, धरती गोल है। ईश्वर की सारी सृष्टि ही गोल है,

 चलते चलते व्यंग्य चित्र


अब देते है ब्लाग वार्ता को विराम, सभी को ललित शर्मा का राम राम .........................

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