गुरुवार, 7 मार्च 2013

सिंवई को भूलकर नूडल्स को दिल दे बैठे...ब्लॉग 4 वार्ता... संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार.... सुप्रभात... सूरज की सिन्दूरी आभा और पलाश के खूबसूरत फूलों के साथ प्रस्तुत है, आज की वार्ता...  *जब पड़ा था * *पहला कदम तुम्हारा * *मेरे आँगन में ,* *तब -* *वो फूल ही तो थे * *पलाश के ,* *जो बिखरे थे * *मेरे आँचल में ......!!!!!* *पलाश के फूल .....* * *


प्रतीक्षा आपकी…..चैत्र माह की बसंत ॠतु जीवन में एक विशेष समय है, जिसका अनुभव लेना है तो संवेदना से परिपूर्ण होना होगा। पूर्णमासी में नभ के क्षितिज पर रात के प्रथम प्रहर में सम्‍पूर्ण चन्‍द्रमा निकल आया है।.. तेरा भी शुकराना.... तमाम रि‍श्‍ते-नाते बेशकीमती हैं तुम्‍हारे लि‍ए सि‍वा एक मेरे * * * फरेब से बारि‍श के मुरझाते हैं नन्‍हें तरू पर आ ही जाता है उन्‍हें भी धरती के सीने से जीवन शक्‍ति लेना * * * * कि एक ठोकर देती है आगे संभलकर चलने का हौसला * * * नए सब़क और पहली ठोकर के लि‍ए जिंदगी के साथ तेरा भी शुकराना..तेरी आदत ... तेरी चीज़ें सब आपस में बाँट रहे थे किसी ने साड़ी उठाई किसी ने सूट किसी ने बुँदे, किसी ने चूड़ी किसी ने रूमाल, किसी ने चेन तेरी छोटी छोटी चीज़ों का भण्डार मानो खत्म ही नहीं होना चाहता था तुमसे बेहतर कौन जानता है ये चीज़ों की चाह से ज़्यादा तुझे अपने पास रखने की होड़ थी माँ तू चुपचाप दूर खड़ी मुस्कुरा रही थी फिर धीरे से पास आकार कान में बोली तू कुछ नहीं लेगा ...

....बोझ अपने दर्द, अपनी तकलीफें छिपाने की तुम्हारी हर कोशिश नाकाम हो जाती है - जब सोते हुए - तुम्हारे धूप से झुलसे माथे की सिलवटों के बीच छिपी श्वेत गहरायी लकीरें पढ़ती हूँ ...जाने कैसे अपाहिज़ हो गया ????? उसे पोलियो हो गया ! हर बार दिये मैने उसे विश्‍वास की उंगलियों से दो बूँद जिंदगी की तरह संस्‍कार समय-समय पर फिर भी जाने कैसे ?? अपाहिज़ हो गया उसका मस्तिष्‍क !!!!!!! ...अहसास - अहसासों की दुनिया लगती सब से भिन्न जीवन का है हिस्सा अभिन्न मन में भरती कई रंग जब भी मनोभाव टकराते जोर का शोर होता अधिकाधिक कम्पन होता अस्तित्व समूचा हिलता..

मुझे चाहिए अपनी मौत ...उस पर हक़ है मेरा - *"*मेरी हथेली पर पता नहीं किसने कुछ रेखाएं खींच दी थीं मेरे जन्म से शुरू हो कर मेरी उम्र बताती जीवन रेखा जिन्दगी के तमाम पर्वतों को लांघ कर मृत्यु तक जाती ... सुनवाई चल रही है ... - अर्थ है तब तो अनर्थ है जिसपर व्याख्याओं की परतें हैं और उन परतों की कितनी ही व्याख्याएं हैं ... कहीं शून्य डिग्री पर उबलता-खौलता पानी है तो कहीं बर्फ की जिद.. रुखसत होती जिंदगी - ** * ** ** ** ** ** ** ** ** ** ** **रुखसत होती जिंदगी* *रात की मानिन्द* *और गहराती जा रही ....* *मौत के साये * *छू लेने को आमद * *बिल्कुल वैसे * *ज्यूँ एक... 

 अलग अलग कीबोर्ड - मेरी प्रतीक्षा को निराशा मिली। यद्यपि मैं लगभग डेढ़ वर्ष पहले से ही आईफ़ोन में हिन्दी कीबोर्ड का उपयोग कर रहा हूँ पर विण्डो व एण्ड्रायड फ़ोनों में हिन्दी ...बुजुर्गों, महिलाओं के लिए एक बढ़िया मोबाईल हैंडसेट - तेजी से बदलते सामाजिक ढाँचे और एकल परिवार के प्रचलन के बीच किसी भी समस्या के निदान के लिए अब तकनीक का मुंह ताका जाना सामान्य बात हो चली है... लालसा ... - सच ! गर तेरी खामोशियों को पढ़ना, हमने सीखा नहीं होता तो शायद, तेरी चाहतों से अब तलक,..हम अंजान ही रहते ? ... आज, जिसे देखो वही जल्दी में है तनिक जल... 

विचारों की मनमानी.... - सुना है, लिखने वाले रोज नियम से २- ४ घंटे बैठते हैं। लिखना शुरू करते हैं तो लिखते ही चले जाते हैं। मैं आजतक नहीं समझ पाई कि उनके विचारों पर उनका इतना ...रंग, - * *रंग धीरे-धीरे शांत रहकर अपना प्रभाव छोड़ते है, वे नही, चीखते / चिल्लाते ज़रा भी रंगों को बिखरा हुआ देखकर हमे, लगता जरूर है ऐसा! कि इनके बीच मचा हुआ है ..सिंवई को भूलकर नूडल्स को दिल दे बैठे हम - गाँव की चिंता सबको है आखिर भारत गाँवों का देश है पर क्या सचमुच गाँव तो जिन्दा हैं पर गाँव की संस्कृति मर रही है गाँव शहर जा रहा है और शहर का बाजार गाँव... 

मुझे गले से लगा लो बहुत उदास हूँ मैं - मुझे गले से लगा लो बहुत उदास हूँ मैं कौन सुनेगा और समझेगा क्यों उदास हूँ मैं ना जाने कौन सी बर्फ़ जमी है जो ना पिघली है ना रिसी है कोई धधकता अलाव जला लो ..तुम आज भी जीवित हो वैसी ही ....हृदय में मेरे ....!! - निष्प्राण .....निस्तेज .... यूँ ज़मीन पर क्यों पड़ी हो ....??? तुम पत्थर सी क्यों हुईं ....? बोलो न माँ ... पत्थर बनी ...ईश्वर स्वरूप ...... अब तुम ही ...दिमाग है आपके पास? तो सोचो! सोचो... - अभी तो कुछ लिखा ही नहीं है इस लड़के ने ...कहता है फिर कभी लिखेगा ... जाने कब लिखेगा और क्या लिखेगा भगवान ही जाने ! ... :-) मैं तो सोच रही हूँ ये जब लिखेगा -...

गुलगुल खरगोश और नशे के सौदागर - गुलगुल खरगोश, चुटपुटवन का जाना-माना व्यापारी था। वन की रौनक फुटफुटबाजार में उसकी मेवों की बड़ी सी दुकान थी। उसकी दुकान के मेवे अपनी गुणवत्ता और ताजगी के...  श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद (४६वीं कड़ी) - मेरी प्रकाशित पुस्तक 'श्रीमद्भगवद्गीता (भाव पद्यानुवाद)' के कुछ अंश: ग्यारहवाँ अध्याय (विश्वरूपदर्शन-योग-११.२६-३४) सब धृतराष्ट्र पुत्र व राजा भी...कुण्डलिया भारत की सरकार में , शकुनी जैसे लोग, आम आदमी के लिए , नित्य परोसें रोग नित्य परोसें रोग , नहीं मिलता छुटकारा, ढूँढे कौन उपाय अंत्योदय अधारित विकास: शिवराज सिंह चौहान आलेख महेश, नई दिल्लीभाजपा की राष्ट्रीय परिषद के दूसरे दिन अंत्योदय और सुशासन के नाम रहा। अंत्योदय आधारित योजनाओं का उदाहरण दिया गया जो पूरे देश में लागू किया जाना चाहिये। ...

कार्टून :- धंधा ये भी ठीक है -

 

दीजिये इजाज़त नमस्कार.......

9 टिप्पणियाँ:

शानदार उम्दा लिंक्स,ब्लॉग वार्ता में मेरी रचना को शामिल करने के लिए आभार,,,,संध्या जी,,

बेहद शानदार उम्दा लिंक्स संयोजन मेरी रचना को शामिल करने हेतु धन्यवाद दी.

बेहतरीन लिंक्‍स संयोजन ...

वाह !! कहां राजा भोज (सिंवई) कहां गंगू तेली (नूडल्स)
सुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्तासुन्दर वार्ता

खूबसूरत लिंक संयोजन

बहुत ही सुन्दर सूत्र..

बढ़िया वार्ता |मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |
आशा

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