मंगलवार, 13 जुलाई 2010

ओह!…श्श…शिट ट…ट…निकल गई - लोजी लग गई वाट अपनी तो - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो
प्रणाम !

कैसे है आप सब ? लीजिये मैं फिर हाज़िर हूँ आप सब के लिए एक और ब्लॉग वार्ता ले कर इस ब्लॉग ४ वार्ता के मंच से ! आशा है आप सब को यह वार्ता पसंद आएगी !

आपका
शिवम् मिश्रा

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१ ओह!…श्श…शिट ट…ट…निकल गई…. :- क्या, कौन, कैसे ??

२ यही है ना.... अपनी ज़िन्दगी... :- क्या मालुम पता करना पड़ेगा !!

३ ये शहर है क़ामयाब यहाँ क़ामयाब हैं लोग............ये ज़नाब तो बस कमाल ही कर रहे हैं :- १००% सहमत है आपसे !!

४ ब्लाँग के डिफाँल्ट कमेँट बाँक्स को कैसे बदलेँ :- आइये जाने !

५ जातीय जनगणना में ‘फंसी’ सरकार :- यह तो होना ही था !

६ मैनपुरी को बरबाद होने से रोक सकता है प्रशासन :- बर्बादी रोकना कौन चाहता है !

७ क्वीन बेटन को कामन मैन बेटन क्यों नहीं कहते -वसीम बरेलवी :- है कोई जवाब ??

८
नरेंदर सिंह नेगी जी का एक गढ़वाली गीत. :- आइये सुनते है !

९ ग़ज़ल का सफ़र - १ ( मास्टर मदन ) :- बड़ा ही हसीं सफ़र है जी !

१० मेरी यादों का एक शहर , लखनऊ .........अजय कुमार झा :- एक नज़र आप भी देख लीजिये !

११ ब्लागिंग सुधारोन्माद :) :- यह क्या है भाई ?

१२ क्या करें क्या न करें...ये कैसी मुश्किल हाय ... :- कोई तो बताये इस का हल ...मेरे भाई !

१३ गणपतिं प्रणमाम्यहं :- संगम तीरे !

१४ अब तो ब्लोगिंग में मज़ा आने लगा है :- यह तो अपने मन की भी बात है !!

१५ चिट्ठी न कोई संदेश..... :- डाकिया आया था क्या ??

१६ हसीन उदासी :- सच में हसीन है !

१७ अरे डरें नहीं, सिर्फ़ पहचान कर नाम बतायें! :- कौन हम ??

१८ केवल वयस्कों के लिए.... :- ज्यादा दिमाग ना लगायें बस एक बार पोस्ट देख आयें !

१९ मक्खन को ऑक्टोपस बना देता...खुशदीप :- पर क्यों भाई ?

२० गांवों के उपभोक्ताओं को ठग रही है मोबाईल कम्पनियाँ और TRI सोयी हुयी है और संचार मंत्री दलाली खाने में व्यस्त हैं ...... :- घोर कलयुग है भाई !

२१ “.. .. .बदल जायेगा!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”) :- पर क्या क्या ?

२२ नई ग़ज़ल/ जब अपना ही छलता है :- बड़ा दुःख होता है !

२३ लोजी लग गई वाट अपनी तो............. :- पर हुआ क्या ??

२४ जय हिंद और जय माता दी ........... :- यह तो nice नहीं है !

२५ धर्म :- एक लघु कथा !

२६ मौका देख चौका मारने की फिराक में मौकापरस्तों के तुक्के :- लगे कि नहीं ??

२७ शीला दीक्षित के नाम पत्र :- इन लड़कियों से बैर क्यों .....पढना है इन्हें....!!

२८
मख्खन और गणपत के बरसाती चुटकुले ---- :- हा हा हा !

२९
कार्टून : देखिये वर्ल्डकप का असली विजेता :- क्या स्पेन नहीं है...........विजेता ??


३० मेरी प्रेम कहानी----जो आज तक सीने में दफ़्न थी---- ललित शर्मा :- अजब प्रेम की गजब कहानी !

३१ मेरा सजन चॉकलेटी... :- खा मत लेना !

३२ क्या आपको हिन्दी वर्णमाला आती है ? [ Do you know Hindi Alphabets] :- बोलो बोलो ?

३३
धन्यवाद !...डॉ अरविन्द मिश्रा ! :- धन्यवाद आपको भी !

३४ बड़ी बुरी लत है ब्लोगिंग की :- सच कहा जी आपने !

३५ नितीश को डर कहीं आज फिर फोटो न खिंच गया हो! :- रात को नींद आई ?

३६ बीहड़ की शादी(अंतिम भाग)-दीपक मशाल :- मैं तो जा नहीं सकता, काम है.........आप हो आओ !

३७ अमरनाथ जा रहा हूं :- बम बम भोले ! शुभ यात्रा !

३८ बृहस्‍पति को एक एक राशि पार करने में एक वर्ष लगते हैं !! :- अच्छा जी !

३९ आज तक चैनल के अधनंगी पत्रकारों से शर्मशार होती दिल्ली . :- यह हो क्या रहा है !


४० बिटिया से बाजी लगा ली है नीदरलैंड्स जीतेगा! :- आप तो हार गए !


लो जी चालीसा पूरा हो गया !!

और अब अंत में अपनी डफली आप बजता हूँ ............अपनी पोस्ट का लिंक नीचे लगता हूँ !

४१ अपना ब्लड ग्रुप देख कर खाना खाने का .........क्या ?? :- एक बार यह भी आज़मा कर देखिये !

आज के लिए बस इतना ही .......फिर मिलुगा एक और वार्ता के साथ तब तक के लिए ....

जय हिंद

सोमवार, 12 जुलाई 2010

आपकी शुभ यात्रा के लिए जीतेश छाबडा जी भी लिख रहे हैं .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी



आप सबों को संगीता पुरी का नमस्‍कार , इस सप्‍ताह के नए चिट्ठों की चर्चा को लेकर मैं फिर हाजिर हूं , चिट्ठाजगत द्वारा स्‍वागत के लिए भेजे गए इतने सारे चिट्ठे , सब एक से बढकर एक , इनमें से सबकी चर्चा तो की नहीं जा सकती .. प्रसतुत हैं आपके समक्ष कुछ चिट्ठे .......

पूजा पाठ से संबंधित जानकारी दे रहे हैं गोपाल भट्ट ललित महाराज जी ...

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नरेश बोहरा 'नाशाद- जी का कडवा सच पढिए ..... 


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इकबाल सिंह 'राशा' के विचारों का प्रतिबिंब देखिए उनके दर्पण में ....

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खबरों की दुनियां में चलिए आशुतोष मिश्र जी के साथ .....

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फोरेक्‍स ट्रेडिंग की खबर लेकर आ गए हैं .. अभिषेक कुमार जी .....

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किताबघर में किताबों की चर्चा संजीव सलिल जी के द्वारा ...

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अनिल कुमार राठौर जी से जानिए चिकित्‍सा के नए आयामों के बारे में ....

स्‍वर्ण लता शर्मा जी का नया ब्‍लॉग स्‍वाद का आनंद लें .....



गौरव गुप्‍ता जी लिखते हैं डायरेक्‍ट दिल से .....

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पर्यावरण के बारे में जानकारी प्रदान कर रहे हैं नितिन देसाई जी ....

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अब इजाजत दीजिए , मिलते हैं फिर से सोमवार को पुन: कुछ नए चिट्ठों के साथ ........

रविवार, 11 जुलाई 2010

इश्क कभी किया नहीं---करने का अंतिम अवसर--ब्लाग4वार्ता----ललित शर्मा

ज्योतिषियों की तो अब रोजी रोटी पर बन आई है, अब तो आक्टोपस भी भविष्य बताने लगे हैं, उनका तुक्का सही लग रहा है और सही बताएं भी क्युं ना! जब आठ हाथ पैर हैं तो दिमाग भी चार होगें और चारों दिमाग से कैलकुलेशन करते होगें। फ़िर सटीक भविष्य फ़ल बताते हो्गें। हमने भी सोचा है यदि फ़ुटबाल के फ़ायनल तक आक्टोपस की भविष्यवाणी सच हो जाती है तो फ़िर एक आक्टोपस ही लेकर आएंगे और ब्लाग नगरिया में एक ज्योतिष की दुकान खोलेंगे। अब ये तो बात हो गयी नए भविष्यवक्ता प्राणी की। अब चलिए ललित शर्मा के साथ ब्लाग नगरिया की सैर पर और पढते हैं कुछ उम्दा पोस्ट..........

डॉ.दराल साब ने कहा है कि इश्क कभी किया नहीं ,हुस्न की तारीफ करनी कभी आई नहीं ये कैसे हो गया भाई साहब, क्या पूरी जिन्दगी युं ही बिताई है, शायद संसार का पहला आश्चर्य हो।:) की तो होगी तारीफ़ लेकिन मन ही मन में। किसी को कहा नहीं होगा, इधर पवन धीमान जी के ब्लाग पर विरह वेदना छाई है, वतन से दूर होने पर प्रियतम की याद आई है, कभी हमने भी लिखे थे कसीदे तेरे हुश्न की तारीफ़ में, लगता वह वेला फ़िर चली आई है।लिखते रहिए विरह के गीत तुम्हारा बलिदान निरर्थक नहीं जाएगा जमाना सदियों तक तुम्हे भुला न पाएगा।

शॉर्ट में देश का सच जानिए दे रहे हैं खुशदीप दुहाई--लम्बे रस्ते जाना मंहगा पड़ जाता है भाई। दिनेशराय द्विवेदी जी कह रहे हैं खुद को साबित करने का अंतिम अवसर है- आगे पेशी की तारीख नहीं मि्लने की खबर है, प्रधानमन्त्री जी ! और कितनों की जान लेनी बाकी है अभी. जितनी चाहे दे दो कभी भी --, एम वर्मा जी बांच रहे हैं मुर्दाखोर : धर्मेन्द्र कुशवाहा की संवेदनशील लघुकथा .. आप सुनिएगा जरुर भूल न जाईएगा बहुत मजेदार है कथा।  धुन्धलाया सूरज हंसी लगता है जरुर, वाणी जी ने एक संस्मरण लिखा है पढके आइयेगा हुजुर.

राहुल प्रताप सिंग कई दिनों से गायब थे, हम ढुंढ रहे थे कहां अंतर्ध्यान हो गए, कहीं ब्लागवाणी की खोज में तो नहीं निकल लिए लेकिन अब पता चला कि गांव से वापस आया हूँ, सोचा कुछ तस्वीरें लाया हूँ. आइए देखिए तश्वीरें गांव की। सतीश पंचम जी भी गांव की कहानी पर चल रहे हैं पूरी फ़िल्म के एक एक सीन लिखे जा रहे हैं, यदि किसी प्रोड्युसर डायरेक्टर की निगाह इनके ब्लाग पर पड़ गयी तो ग्रामीण परिवेश की एक हिट फ़िल्म बन सकती है नील गोदाम.....सलामी......पत्रकार-फत्रकार.....भंभ ररती कोठी.... ललकारता देहात आप भी पढिए । 

शनिवार की सुबह.... उ आ........... ह्म्म्म देवबाबा की सुबह कुछ इस तरह से हुई है ईमान से। लगा है सर्कस आए हैं शेर देखना न भुलिए केवल दो दिन शेष .....देखना न भूलें याद रखें। गर्मी बढ गयी है पहले तो हमने मुर्गे भुनते देखा था अब भुन रहा है लन्दन .. शिखा जी बता रही हैं, देखिए कहीं मुफ़्त में ही सही केंटुकी फ़्रायड चिकन हाथ लग जाए। बुढापे में भी जवानी के मजे ले रहे हैं जी रहे है तेरी यादों के सहारे, जालिम तु न आई, आया है मुझे फिर याद वो जालिम  . अवधिया को याद आ रहा है वो जमाना।

शरद भाई आज फ़ार्म में हैं क्यों मेरी आदत बिगाड़ना चाहती हो ? अब और कौन सी आदत बच गयी बिगाड़ने को, हम यही सोच रहे हैं। गगन शर्मा जी को गुस्सा आ गया जब पचीस किलो का आदमी भी मोटे होने के गुर बताने लगा तब  कुछ लोग कहीं भी सलाह दे डालते हैं गुस्सा तो आना ही है। पढिए एक नया ब्लाग विषहरी पूजा मंगलवार को छतहार बिहार में, रवि स्वर्णकार जी लिख रहे हैं रावत भाटा से हिंदुस्तान जैसे देश में – मुक्तिबोध उवाच....


चलते चलते आज का व्यंग्यचित्र


 
वार्ता को देते हैं विराम - आपको ललित शर्मा का राम राम.... सोमवार की वार्ता संगीता जी के हवाले से

शनिवार, 10 जुलाई 2010

सुनिए डीजीपी साहब मैं बिफल हूं---ब्लाग4वार्ता---ललित शर्मा

इस हफ़्ते ब्लाग4वार्ता शिवम भाई और संगीता जी ने लगाई, हमारी तबियत कुछ मौसमी उत्पातों के कारण नासाज हैं। लेकिन आज कुछ लिखा भी गया, अभी तबियत में कुछ सुधार हुआ तो वार्ता लिख रहे हैं। कुछ ही ब्लाग पढ पाया था, बिना सायकिल के ब्लाग नगरी का चक्कर लगाना मुस्किल है क्योंकि अब नए ब्लाग भी बढ गए हैं। मैं ललित शर्मा आपको ले चलता हूँ ब्लाग4वार्ता पर............

सबसे पहले चिट्ठा लेते हैं याज्ञवल्‍क्‍य का अपनी बात अपनों से.वे कहते हैं सुनिए डीजीपी साहब मैं बिफल हूं---हाथ जोडे इस शख्‍स का नाम है बिफल। हिंदूस्‍तान के कई गरीब गांवों की तरह सरगुजा के एक गांव बनियाटीकरी का बाशिंदा है बिफल। किस्‍मत से जुझते किसानों की तरह जमीन के नन्‍हे से टूकडे में अपनी जिंदगी को सम्‍...राजकुमार सोनी जी पहली बार प्रेम करने वाली लड़की के विषय में लिख रहे हैं, कि उस समय लड़की के क्या मनोभाव होते हैं--नींद में तैयार करती है खुद को* *जागती है नींद में** * * और नींद में ही* * अम्मा.. अभी आई कहकर निकल जाती है घर से * *चटख लाल रंग लाने वाली मेहन्दी इत्र, नेलपालिश की शीशियां और चमकदार कागजों की तलाश के ब...

सुप्रसिद्ध साहित्यकार गजानन माधव मुक्तिबोध की पत्नी श्रीमती शांता मुक्तिबोध का निधन माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल में जनसंचार विभाग में रीडर एवं विभागाध्यक्ष संजय द्विवेदी जी नें अपने ब्‍लॉग चिंतन-शिविर में अभी कुछ समय पूर्व ही यह दुखद समाचार दिया है...शांता मुक्तिबोध का निधन रायपुर. 9 जुलाई सुप्रसिद्ध साहित्यकार गजानन माधव मुक्तिबोध की पत्नी श्रीमती शांता मुक्तिबोध का गुरुवार की रात रायपुर में निधन हो गया. 88 वर्ष की शांता मुक्तिबोध लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं. 1939 में ...

कोई जीते, कोई हारे, हमें निर्वस्त्र दौड़ने का सिर्फ बहाना चाहिए पराग्वे की महशहूर मॉडल लारिसा रिक्वेल्म ने अपने देश की फुटबॉल टीम के विश्वकप में जीतने पर शरीर को रंग कर सड़क पर नग्न दौड़ने की घोषणा की थी। लेकिन उन के मंसूबे उस समय धक्का लगा जब पराग्वे की टीम को क्वार...बुलंद छत्तीसगढ में रतनसिंग शेखावत का ज्ञान दर्पण.बुलंद छत्तीसगढ के साप्ताहिक स्तंभ ब्लाग4वार्ता में इस हफ़्ते रतनसिंग शेखावत जी के ब्लाग ज्ञान दर्पण की चर्चा की गयी है। इसे यहां से पढ सकते हैं।कौन कहता है नक्सलवाद एक विचारधारा है !.कौन कहता है नक्सलवाद समस्या नहीं एक विचारधारा है, वो कौनसा बुद्धिजीवी वर्ग है या वे कौन से मानव अधिकार समर्थक हैं जो यह कहते हैं कि नक्सलवाद विचारधारा है .... क्या वे इसे प्रमाणित कर सकेंगे ? किसी भी लोक...

चिन्नी- मंत्री पद की दावेदारी एक बार आपको बताया था कि कैसे चिन्नी गिलहरी मुझसे घूल मिल गई है. बुलाता हूँ तो चली आती है. खिड़की के बाजू में बैठकर मूँगफली और अखरोट मांगती है. जब दे दो तो एक खायेगी बाकी सारे बैक यार्ड में छिपायेगी बर्फील...हुकुमत-ए-आजाद हिन्द नेताजी की अगली योजना है- अन्तरिम भारत सरकार के गठन की। इसके लिए पूर्वी तथा दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों का, और वहाँ रहने वाले भारतीयों का समर्थन आवश्यक है। और हाँ, सरकार गठन के लिए कुछ और धन चाहिए। तो नेता...

लिजिये हम आप को उस ओक्टोपुस के दर्शन करवा दे, जो दुनिया भर मै चर्चा का विषय बन गया है फ़ुट्बाल मेच अब अपने अंतिम दॊर पर पहुच गया है, बस दो मेच बाकी रह गये है एक शनि वार को होगा, दुसरा रवि वार को, जब यह मेच युरोप मे हो, ओर दो युरोप की टीमे आमने सामने हो तो उस देश मै जहां मेच हो रहा हौ उस नगर ...कुछ अटपटे कुछ चटपटे दोहे (१)* *ब्लॉग लेखन से क्या जुड़े, नित उमड़त रहत विचार* *जब तब फुरसत पाइके, लिख डारत आखर चार* *(२)* *ड्यूटी के लिये निकल पड़े, पहुंचे रेल्वे स्टेशन * *गाड़ी की लेट लतीफ़ी, लावे दिमाग मे टेंशन* *(३)* *प्लेट फ़...

सेना क्यों ना...*मेरे* ही एक साथी ने दिल्ली से अपनी टिप्पणी में छत्तीसगढ़ के प्रति स्वाभाविक जुडाव और यहाँ की चिर शान्ति पर लगे नक्सली ग्रहण को लेकर एक सवाल पूछा है कि क्या दंतेवाडा, बीजापुर और नारायणपुर में बद से बदतर हो...आक्टोपस, हमारे भविष्यवक्ताओं के लिए खतरे की घंटी जय हो पाल बाबा की। सारे संसार में फ़ुटबाल का जादू जितना सर चढ का बोल रहा है उससे इस पाल बाबा की चर्चा कम नहीं है। जिन्हें इस खेल से कोई मतलब नहीं है उनके कानों में भी इससे जुड़ी खबरें "गोल" बनाती जा रही हैं...
 
कौन कहता है कि दफनाने के बाद जलाया नहीं जाता.वो आते है* *कब्र पर मेरी* *अपने हमसफ़र के साथ....* *कौन कहता है* *कि* *दफनाने के बाद* *जलाया नहीं जाता....* *(एक सन्देश आया था मोबाईल पर.....बहुत अच्छा लगा तो सोचा आप तक भी पहुंचा दूं.....)* *जय हिन्द,...विकास रुका तो नक्सली मजबूत होंगे सुरेंद्र किशोर नक्सलपीड़ित जिलों के त्वरित विकास के लिए प्रधान मंत्री और योजना आयोग की चिंता से शांतिप्रिय लोगों में खुशी हैं। पर बिहार के ही जिन जिलों में नक्सली अभी सरकारी विकास कार्यों में बाधक बनने क...
 
लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान की उद्घोषणा १२ जुलाई से *हिंदी चिट्ठाजगत में कुछ ऐसे चिट्ठाकार हैं जिनके तेवर का अंदाजा उन्हें गहराई से पढ़े और महसूस किये बगैर नहीं लगा सकते ....जो अपने मस्तिस्क की आग को समूची दुनिया के हृदय तक पहुंचाने को बेताब है और पूरी दुनि...खबर या कॉमेडीटीवी के न्यूज़ चैनलों पर दिखाई जाने वाली ख़बरों को कई बार कॉमेडी की श्रेणी में रखा जाने लायक होता है. पिछले दिनों मैं कुछ न्यूज़ चैनल देख रहा था, उन पर ख़बरों के साथ निचले हिस्से में कई तर...

एलोवेरा (ग्वार पाठे) के नाम पर आज से कोई तीन साल पहले जोधपुर के सोजती गेट पर स्थित दूध मंदिर में एक एलोवेरा रस के विज्ञापन का बेनर लगा देखा जिसमे एलोवेरा रस के फायदे सहित विभिन्न बिमारियों की सूची लिखी हुई थी जिनमे ये चमत्कारी रस फायदा ...(खुराफाती) ब्लॉगर का शिशु-गीत... ब्लॉग की दुनिया एक महान दुनिया का नवसृजन-सा है. यह वैश्विक-लोकतंत्र का जीवंत उदाहरण भी है. हर कोई अपना **ब्लॉग ** बनाकर मन की बात लिख सकता है. लेकिन इस सहज-अधिकारवाद के चलते क्या लोग कुछ भी लिखने के लिये ...

चलते चलते आज का कार्टुन


अब देते हैं वार्ता को विराम--सभी को ललित शर्मा का राम-राम........

शुक्रवार, 9 जुलाई 2010

कहीं आप किसी धोखेबाज़ की मदद तो नहीं कर रहे - फ़रक़ तो पड़ता है भाई - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा


प्रिय ब्लॉगर मित्रो
प्रणाम !

आज ८ जुलाई है ! ठीक एक साल पहले आज ही के दिन जिंदगी से संघर्ष कर रहे मशहूर हास्य कवि ओम व्यास का ०८ जुलाई'०९ की सुबह दिल्ली में निधन हो गया था ।

ज्ञात हो ओम व्यास ०८ जून'०९ को एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनका दिल्ली के अपोलो अस्पताल में इलाज चल रहा था। उल्लेखनीय है कि विदिशा में आयोजित बेतवा महोत्सव से भोपाल लौट रहे कवियों का वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।

इस हादसे में हास्य कवि ओम प्रकाश आदित्य, लाड सिंह और नीरज पुरी की मौके पर ही मौत हो गई थी जबकि ओम व्यास गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सभी उनके जल्द ठीक होने की आस लगाये बैठे थे पर ..................होनी को कुछ और ही मंजूर था |

आज ठीक एक साल बीत जाने के बाद भी हिंदी साहित्य प्रेमी इस सदमे से उबार नहीं पाए है |

ब्लॉग 4 वार्ता के इस मंच से आज पूरे ब्लॉग जगत की ओर से स्वर्गीय श्री ओम व्यास जी को विनम्र श्रद्धांजलि |


आपका

शिवम् मिश्रा

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१ कहीं आप किसी धोखेबाज़ की मदद तो नहीं कर रहे - सतीश सक्सेना :- लगता तो नहीं हो तो पता नहीं !!



२ "फ़रक़ तो पड़ता है भाई" :- जी बिलकुल पड़ता है !!



३ तब और अब...(कार्टून धमाका) :- बहुत फर्क आ गया है !!



४ हॉलीवुड अगर नहीं होता तो बॉलीवुड का क्या होता .....? :- वही होता जो मंजूरे खुदा होता !



५ फिर भी दिल मिलने की दुआ करता है.... :- तो मिलिए ना कौन रोका करता है ??



६ सच मेरे यार हैं - कहानी भाग 2 :- बाकी भाग कब आ रहे है ..... क्यों हम को सता रहे है !!



७ राजकुमार ग्वालानी के नाम से ठगी का प्रयास :- हद हो गयी भाई यह तो !!



८ सुनिए--“कविता क्या, कविता क्यों ?” विषय पर व्याख्यान :- जरूर !



९ ब्लॉग अपडेट रखने के लिए कुछ न कुछ तो लिखना ही पड़ता है :- सही बात है !



१० इक समुन्दर ने आवाज दी मुझको पानी पिला दीजिये :- बिन पानी सब सून !



११ ब्लॉगिंग सृजनात्मकता को खा रही है। (आगरा के ब्लॉगर्स के दिलों से निकली आवाज़) :- आपको क्या लगता है ?



१२ डॉ० कुमार विश्वास, गुरू जी और कवि सम्मेलन, नवोन्मेष महोत्सव भाग-२ :- बधाइयाँ आपको !



१३ "पंक में खिला कमल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक") :- अरे वाह !



१४ धधकते कश्मीर में सेना की ‘झप्पी’! :- बहुत जरूरत है इसकी !!



१५ लो क सं घ र्ष !: दोनो हाथ बटोरिये यही सयानो काम :- nice !!



१६ ”गीतालेख”./ अबला गैया हाय तुम्हारी है यह दुखद कहानी.. :- हे राम !!



१७ शरद जी, शुक्र मनाइये न्यूज चैनल पटरी पर नहीं हैं :- होते तो ..............!!



१८ ऐसा भी एक आज्ञाकारी पुत्र :- सब ke घर हो !



१९ दिल रो पड़ा इस फोटो को देख कर :- एक नज़र आप भी देखिये !



२० ९वीं कक्षा में चुंबन, 7 वर्ष के भतीजे के दोस्त की गर्लफ़्रेंड :- वाह भाई वाह!



२१ बरसात में सेहत :- कैसे बने ?



२२ क्या अब आपका नंबर है? :- महफूज़ भाई क्या आप सुन रहे है ??



२३ शहीद भगतसिंह :- नमन आपको !



२४ प्रकाश झा की राजनीति यानी हिप-हिप हुर्रे! :- कौन सी वाली असली या फ़िल्मी ??



२५ ऐ खुदा तुझपे एहसान कर रहा हूँ :- क्या कहने !!



२६ बाल विधवा :- मार्मिक !



२७ मैं पिता बन गया... :-बधाइयाँ बहुत बहुत बधाइयाँ !!



२८ क्या सच मे हम आज़ाद देश मे रह रहे हैं? :- लगता तो यही है !



२९ हो गए 1000 विजिटर्स :- बहुत खूब !! बधाइयाँ !



३० पाखी का लालीपॉप :- मज़ा आया ?



३१ लिजिये हम आप को उस ओक्टोपुस के दर्शन करवा दे, जो दुनिया भर मै चर्चा का विषय बन गया है :- जरूर कहाँ है, दिखाइए ?



अंत में एक बार फिर स्वर्गीय श्री ओम व्यास जी को विनम्र श्रद्धांजलि देते हुए उनके ब्लॉग का लिंक दे रहा हूँ |



३२ हास्य मेव जयते :- स्व. ओम व्यास ‘ओम’ जी की कवितायेँ .......प्रस्तुति संजय व्यास |



आशा है यह ब्लॉग वार्ता आप सब को पसंद आएगी ! अगली बार फिर मिलुगा कुछ और नए लिंक्स के साथ तब तक के लिए ........



जय हिंद !!


नोट :- यह पोस्ट ८ जुलाई'२०१० की शाम को लिखी गयी थी पर नेट की समस्याओ के कारण अब छापी जा रही है !!

गुरुवार, 8 जुलाई 2010

शायद उलझन में है इंद्रदेव .. ब्‍लॉग 4 वार्ता ... संगीता पुरी

आप सबों को संगीता पुरी का नमस्‍कार, कछ महत्‍वपूर्ण चिटठों के साथ मैं आज की वार्ता शुरू कर रही हूं ......


स्वामीजी की पुण्यतिथि पर विशेष





स्वामी विवेकानंद के बचपन का नाम नरेंद्रनाथ था। उनका जन्म 12 मई, 1863 को कोलकाता के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता विश्वनाथ दत्त बहुत ही उदार एवं प्रगतिशील विचारों के व्यक्ति थे। उनकी माता भुवनेश्वरी देवी धार्मिक विचारों वाली महिला थीं। स्वामी विवेकानंद पर अपने पिता के तर्कसंगत विचारों तथा माता की धार्मिक प्रवृति का असर था।



  1. मेरी किताब आ गई है: कहीं कोई पढ न डाले
  2. एक सलाह या एक जान कारी चाहिये आप से.....:वक़्त आने पर बता देंगे तुझे ए आसमाँ हम अभी से क्या बताएँ क्या हमारे दिल में है.
  3. सृजनगाथा के चौथे आयोजन में ब्‍लॉगर संजीत त्रिपाठी सम्मानित : रिपोर्ट भी कर दी भाई लोगों ने
  4. कार्टून:- हिन्दी समर्थकों के लिए.. :का हिन्दी अनुवाद चाहिये
  5. कैरम और 'क्वीन' ... ,,, और , लगे हाथ सस्ती लोकप्रियता के प्रति 'सोच' का आग्रह , कुमार विश्वास के बहाने ... :पोस्ट लिख डाली
“आम” आज आम आदमी का फल नहीं रहा, लेकिन फिर भी “आम” आम है। गरीब अमीर हर कोई आम का मुरीद है। 


आम की तारीफ में मलीहाबाद में जन्मे क्रान्तिकारी शायर जोश मलीहाबादी हिन्दुस्तान छोड़ते समय मलीहाबाद के आमों को याद करते हुए कहा था। 


आम के बागों में जब बरसात होगी पुरखरोश 


मेरी फुरकत में लहू रोएगी चश्मे मय फरामोश
रस की बूदें जब उड़ा देंगी गुलिस्तानों के होश
कुंज-ए-रंगी में पुकारेंगी हवांए जोश-जोश
सुन के मेरा नाम मौसम गम जदा हो जाएगा 
एक महशर सा महफिल में गुलिस्तांये बयां हो जाएगा 
ए मलीहाबाद के रंगीं गुलिस्तां अलविदा। 






अलख निरंजन ! बुढ़ारी (बुढ़ापा) में गींजन !! हें...हें....हें....हें.... ! अलख निरंजन तो बहुते सुने होंगे मगर बुढ़ारी में गींजन परोरिया वाली काकी का जोरल मिसरा है। परोरिया वाली काकी याद हैं न.... उ रमलील्ला वाला झपसी कक्का के गाम पर.... ! हाँ वही, जो हाथ चमका-चमका के फकरा जोरे में इस्पात (एक्सपर्ट) थी।

झपसी कक्का रमलील्ला में विश्वामित्र के पाठ लेते थे। उ इस्टेज पर जो गरज के "अलख-निरंजन" बोलते थे कि बिना माइको-लाउडिसपीकर के टोला हिल जाए। गाँव-घर के धिया-पुता से लेकर बढ़-बुजरुग भी कक्का को देखते ही बोल पड़ते थे'अलख-निरंजन'। 


यकीन मानिये मैं जब भी यश चोपड़ा  की कोई फिल्म देखती थी उसके मनोरम दृश्यों को देख यही ख्याल आता था "अरे क्या है ऐसा स्विट्ज़रलैंड में जो हमारे यहाँ नहीं मिलता इन्हें ..क्या भारत में बर्फ नहीं पड़ती? या यहाँ हसीं वादियाँ और पहाड़ नहीं हैं ?..गायों और झरनों की कोई कमी है क्या भारत में? और वो बैल की घंटी ?.....जितनी चाहो मिल जाये फिर क्यों ये  दौड़े  छूटे बस पहुँच जाते हैं वहीँ ?

एक बहुत छोटी सी पोस्ट जिसमे बहुत बड़ी बात छीपी हुई है।ये बात मेरा अपना अनुभव नही है मगर मुझे मिले इस एसएमएस ने मुझे भी सोचने पर मज़बूर कर दिया है।मुझे जो एसएमएस मिला उसके अनुसार दिन भर जी तोड़ मेहनत करके घर लौटने के बाद पिता का सवाल-कितना कमाया?पत्नी का सवाल-कितना बचाया?बच्चों का सवाल-क्या लाये?और मां का सवाल -बेटा कुछ खाया या नही?सच मां तो मां है,जय माता दी।






आज राजकुमार सोनी जी के मौत का पैगाम की आखिरी किश्‍त है ...
पाठकों मैं जानता हूं कि आपको लगातार कष्ट हो रहा है. एक तो मैं आपको रूक बाबा रूक जैसा गाना सुना रहा हूं तो दूसरा कष्ट यह भी है कि आप विभिन्न ब्लागों पर जाकर जो टिप्पणी कर रहे हैं वह नजर नहीं आ रही है. शायद किसी तकनीकी दिक्कत की वजह से ऐसा हुआ है. धान के देश को संचालित करने वाले ब्लागर जीके अवधिया जी से जब मेरी इस बारे में बातचीत हुई तो पता चला कि कुछ साल पहले कुछ घंटों के लिए ऐसी घटना हो चुकी है. आरंभ वाले भाई संजीव तिवारी ने भी माना कि कोई तकनीकी दिक्कत सामने आई है. ललित डाट के ललित शर्माजी भी इस घटना पर आश्चर्यचकित है.



‘‘यह ठीक रहेगा। मैं आज ही से उसका पीछा करना शुरू कर देता हूं। किन्तु समस्या ये है कि जब मैं उसका पीछा करूंगा तो वह मुझे तुरंत पहचान जायेगी। और फिर मैं लल्लू को पहचानूंगा कैसे?’’
‘‘अरे मेरे होते हुए तुम्हें किस बात की चिन्ता! मैं करूंगा उसका पीछा तुम्हारी तरफ से। मैं पकड़ूंगा उन्हें रंगे हाथों।’’

‘‘तुम! किन्तु तुम कैसे पकड़ोगे उन्हें। तुम तो यहां बन्द हो।’’
‘‘अब इतना तो तुम्हें करना ही पड़ेगा। मैं एक तरकीब बताता हूं। तुम चुपके से इस कोठरी का ताला खोल दो। मैं जाकर तुम्हारा काम कर दूंगा फिर वापस आकर कोठरी मैं बैठ जाऊंगा और तुम ताला लगा देना।’’
‘‘और अगर तुम वापस न आये तो? मेरी नौकरी नहीं चली जायेगी?’’

 जब वो मल्हार राग में शिव स्तुति गाती है तो इंद्रदेव इतने खुश होते हैं कि पूरे क्षेत्र को जलमग्न कर देते हैं। उसका जन्म गजियाबाद के एक अमीर परिवार में हुआ था और उसका ब्याह भी एक अमीर घर में, लेकिन वो सादगी भरा जीवन जीने में विश्वास करती थी, वो आज जिन्दा है या नहीं पता नहीं, लेकिन जब इंद्रदेव को खुश करना होता तो लोग उसके द्वार जाते थे। कुछ ऐसा ही किस्सा बता रहा था संकट मोचन मंदिर के निकट एक बिजली की दुकान पर एक भद्र पुरुष। आज से पहले तानसेन के बारे में तो सुना था कि वो दीपक राग गाकर दीए जला देते थे, लेकिन उक्त किस्सा पहली दफा सुनने में आया, हो सकता है सच भी हो और काल्पनिक भी। 

.जब मैं मां की गोद को

जहां अपना समझता था


वक्त वह बड़ा ही अच्छा था


जब मैं छोटा बच्चा था।



50 पैसे का सिक्का पाने को
कविता शौक से सुनाता था
धूल के बीच सुबह से शाम तक
गुल्ली-डंडा खेला करता था।


मेहनत का फल आजकल कहाँ मिलता है?!! बैंक से मिला धन, चाहे वो काला हो, पीला हो, या फिर सफेद… उसी से पेट भरता है…


अब इलाहाबाद में ही पेट भरेगा… अपने मन पसन्द……भुट्टे खाकर :( :(


दस बार चिल्लाना होगा… कितने का है? वो बोलेगा… ये 5 रूपये, वो 7 रूपये… ये स्पेशल 10 रूपये… और जो नीचे पड़ा है मात्र 2 रूपये…


हम दस वाला दस तरफ से निहार कर देखेंगे… आखिर शाही नवाब जो ठहरे…आपको पता ही होगा कि नवाब साहब हफ्ते में 4 दिन खाली पेट दौड़ते हैं… मैंगी ठूँस कर…







परसो भारत बंद था इसलिए जाम के चलते पापा ऑफिस नहीं जा पाए .मैंने इस बंद का भरपूर लाभ उठाया , पापा के साथ खूब खेला .जब घर में खेल कर बोर हो गया तो बाहर जाने की जिद की . पापा नहीं माने तो रोने लगा , फिर मम्मी ने कहा की आज "भारत बंद" है "माधव बंद" नहीं है . सुबह से ही दिल्ले में बादल छाए हुवे थे और हल्की बारिस भी हुई थी ,बारिस होने के बाद की धुप बहुत कड़ी होती है , उसी कड़ी धुप में पापा मुझे लेकर बाहर गए . एक घंटे में पार्क में खेला फिर वापस घर आया .










बुधवार, 7 जुलाई 2010

अब वायरस क्‍या उसका बाप भी रहेगा आपके कंप्‍यूटर से दूर .. ब्‍लॉग 4 वार्ता .. संगीता पुरी

आप सबों को संगीता पुरी का नमस्‍कार , हिंदी ब्‍लॉग जगत में प्रतिदिन आ रहे इतने सारे चिट्ठाकार और सबकी एक से बढकर एक रचनाएं , वार्ता के लिए समय कम होती है , हमारे कई मित्र बहुत ही अच्‍छी चिट्ठा चर्चा करते हैं ,फिर भी कुछ लिंक्स आपके लिए लेकर मैं आ ही गयी हूं ...




आप ime setup से हिन्‍दी में लिखते हैं तो डॉ अजीत गुप्‍ता जी की सहायता करे














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अब विदा लेती हूं .. मिलते हैं सोमवार को नयी चर्चा के साथ ..

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