रविवार, 8 जनवरी 2012

आ ही गया प्रलय की भविष्यवाणियों का साल.... ब्लॉग़4वार्ता --- संध्या शर्मा,

संध्या शर्मा का नमस्कार,

लीजिये आ ही गया प्रलय की भविष्यवाणियों का साल. दुनिया ने ईश्वरीय कणों (god particals )  की झलक भी पा ली. पिछले दो दशकों से पूरी दुनिया में २०१२ को लेकर आशंकित हैं. दरअसल ये सब "माया सभ्यता के केलेंडर" की माया है. काफी हद तक तो वैज्ञानिक सच्चाई का भी दावा किया जा रहा है. लेकिन जिस तरह से तमाम आशंकाए और भविष्यवाणियां झूठी साबित हुई हैं, कुछ महीनो में यह भी साबित हो जायेगा कि दुनिया के लिए यह प्रलय का वर्ष है अथवा नहीं. अब हो चुकी आपसे काफी बातें..          
आइये आप भी पढ़िए हमारी पसंद के कुछ लिंक्स...  प्रस्तुत है आज की वार्ता.... 

मै समय हूँ
मै समय हूँ तुम्हारे आस-पास रहता हूँ तुम्हारे साथ चलता हूँ तुम्ही कभी पीछे रह जाते हो और अपराधबोध से ग्रसित हो जाते हो कभी आगे निकल जाते हो अतिरेक में तब मुझे तलासते हो शून्य में इस सब में मै जिम...

 ..वही कमीशनखोरी है
वही घूंस है , वही कमीशन खोरी है | वही गुंडई कायम सीनाजोरी है | वही पुलिस की लूट वही दादागीरी | वही दलाली छुटभैया नेतागीरी | वही गाँव बदहाल वही झोपड़पट्टी | जहां धधकती है महँगाई की भट्ठी | वोट के सौ...

आधे घंटे में प्यार..!
फोन पर मैसेज आया, “तुझे कभी आठ घंटों में प्यार हुआ है?” प्रिया समझ गई फैसल को फिर किसी से प्यार हो गया है। उसने जवाब भेजा, “नहीं...पर जानती हूं तुझे हुआ है।” प्रिया का मन फिर काम में नहीं लगा। जैसे-तैसे ...

यकीन ना था
तुम आओगे और भींगना होगा इस इसकद्र यकीन ना था धीमी और उल्झी सांसो में आग होगी यकीन ना था दस्तक हुई दरवाजे पर और धडकने होंगी यकीन ना था एहसास के आसमान पर शब्दो के गिरह खुल जायेंगे हौले से यकी...

मेरी दुआओं में कुछ असर तो हो........
मेरी दुआओं में कुछ असर तो हो जिदंगी थोड़ी ही सही बसर तो हो। किसी के रोके कहॉ रूकते है हम रोक ले मुझको ऐसी कोई नजर तो हो। कितनी मुश्किलें हैं मंजिल के सफर में सर छुपाने के लिए कोई शजर ...

लकीरें अपने स्वभाव से चलती हैं 
** *अजय गर्ग से मेरा पहला परिचय उनके एक सशक्त लेख के ज़रिये हुआ था. बाद में उनके पत्रकार होने का पता चला. इसी बीच मधुर भंडारकर ने 'जेल' के लिए 'दाता सुन ले...' लिखवाकर उनके शब्दों को लता जी की आवाज में पि...

समुद्र के अन्दर का जीवन कैसा होता होगा..
 *कभी आपने सोचा है कि समुद्र के अन्दर जीवन कैसा होता होगा. ढेर सारी रंग-बिरंगी मछलियाँ, कोरल्स, सीप, मोलस्क, साँप...और भी बहुत कुछ. और सोचिए वे सब कैसे मस्ती करते होंगें. अब मेरी इमेजिनेशन देखिये इस ड्राइंग...

समय यहाँ कैसे बीते.......
कल्पनायें कहाँ से कहाँ ले जाती हैं.......एक नमूना है,चलिए आप भी इस उड़ान में मेरे साथ.......अगर एक भी पंक्ति आपको अपने आप से जुड़ी हुई लगे तो समझूँगी.......मेरा लिखना सफल हो गया..... "समय यहाँ कैसे बीते य...

जीवन ज्योति
* * ** * * *वो दिन गए जब * *मैं बँधवाया करती थी* *लाल-लाल फीतों में * *अपनी अम्मा से चोटी !* *काजल लगवाती थी* *आँगन में खिले फूलों से * *बालों को सजाती थी* *फिर खिल उठती थी* *मेरे नैनों की ज्योति !* ** ** **...

अंदाज ए मेरा: स्‍कूल के माथे कलंक का टीका.....!!!!!! 
स्‍कूल के माथे कलंक का टीका.....!!!!!!: फोटो साभार: हरिभूमि अमानवीय....... ! शर्मनाक..... ! दुर्भाग्‍यजनक......... ! मानवता को कलंकित करने का काम किया है एक स्‍कूल ने।...

तरंगों में... 
मेरे आशा के अनुरूप सुलझाया तुमने आपस में उलझे मेरे अव्यक्त विचारों को न चाह कर भी उलझ रहे हैं उन्हीं में मेरे अहसास... अब न जाने क्यूँ मौन होकर तुम सुलझाना चाहते हो मुझे जबकि उसे भरते-भरते और भी मैं उलझ ही ...

शिल्पगुरु डॉ जयदेव बघेल :- नाम ही काफ़ी है ------- ललित शर्मा
जयदेव बघेल जी के घर (चित्र राहुल सिह जी के सौजन्य से)बस्तर, भानपुरी से चल कर हम कोण्डा गाँव पहुंचते हैं, नाके के पास गाड़ी रोक कर एक पान वाले से जय देव बघेल जी का घर पूछते हैं। तो वह कहता है कि सीधे हाथ की...

मेरे आँसुओं का सैलाब
*मेरे आँसुओं का सैलाब* ● © ऐ आसमान, तू आज यूँ न बरस, कि तेरे बरसने में, मेरे आँसुओं का सैलाब, छिप न जाये कहीं, आज ही तो आया है, .. वक्त .. मेरे बरसने का, वरना सैलाब तो क्या, यूँ हमने, ...

एक जोड़ी कार्टून 
ताशकंद में होगा 5 वां अंतरराष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन सृजनगाथा डॉट कॉम की पहल रायपुर । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी और हिंदी - संस्कृति को प्रतिष्ठित करने के ल...  

नए साल पर दो अच्छी खबर 
साल 2012 आप सबके लिए दो अच्छी खबर लेकर आया है। दोनों खबरें रेलवे से संबंधित हैं। भागलपुर-दिल्ली के बीच चलने वाली साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन का ठहराव अब सुल्...  

भ्रष्टाचार लाइव  
*यदि यह भ्रष्टाचार है तो आज मैंने ‘भ्रष्टाचार लाइव’ देखा।* *मेरे एक परिचित के परिवार में अचानक ही एक विवाह तय हो गया - आज ही। लड़केवाले आए थे। लड़के के साथ...  

छत्‍तीसगढ़ी गज़ल – जंगल ही जीवन है  
जम्‍मो जंगल ला काटत हन गॉंव सहर सम्‍हराए बर। काटे जंगल किरिया पारत गॉंव सहर जंगलाये बर।। जंगल रहिस ते मंगल रहिस, जंगल बिन मंगल नइये। पौधा...  

सारा जीवन अंधकारमय हो गया नए साल पर 
2011 बस जाने ही वाला था। 2012 आने की खुशी लोगों से छुपाए नहीं छिप रही थी। हिलते मिलते संगी साथी अपने अपने कार्यक्रम बना बता रहे थे। मैं देखते सुनते जा रहा 

फिर में खुदसे ..
सड़कें भरी  है फुटपाथ समानो  से लदे है दुकाने उचक कर आ गयी है बाहिर जेबें  शर्मा कर अंदर हो गयी है ढूंढे  अब क्या हाथ पसीने से भीगे है बेटा कोई जिद न करदे ये ...  

मैं इन्हें छुपा लूंगा…. 
आईने के सामने बैठ खुद को पहचानने की कोशिश में रूबरू हो गए मेरे समस्त अन्तर्निहित और अनाहूत किरदार. मेरे वजूद की धज्जियाँ उड़ाते ...  

कीमत मिट्टी की खुश्बू की दर्द-ए-दिल से ज़्यादा है... 
हमारा दिल बुजदिल हो मरने को आमादा है... वहाँ किसी ने मिट्टी खातिर कफ़न सरों पे बाँधा है... आज सियासत की देखो तो कैसी है ये बिछी बिसात... जिसको सब राज..     
  देखिये हमारी पसंद का एक गीत 
सादर-
संध्या शर्मा
मिलते हैं अगली वार्ता पर... 

शनिवार, 7 जनवरी 2012

फूल बनूँ या धूल बनूँ हँसते - हँसते.... ब्‍लॉग4वार्ता, संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार,
आज फिर आई हूँ, अपनी पसंद के कुछ लिंक्स के साथ.  लीजिये प्रस्तुत है आज की वार्ता....   


फूल बनूँ या धूल बनूँ
यह इच्छा है बहुत युगों से फूल बनूँ या धूल बनूँ , तेरे किसी काम आऊँ मैं अपना जीवन धन्य करूँ ! फूल बनूँ तो देवालय के किसी वृक्ष से जा चिपटूँ , तेरे किसी भक्त द्वारा प्रिय तेरे चरणों से लिपटूँ ! फूल नहीं तो ध...

ख़ुदी
झुकाई क़दमों में तेरे जबसे ख़ुदी मैंने तो पाई जिंदगी में एक नई ख़ुशी मैंने, गम-ए-जहाँ का असर दिल पर अब नहीं होता बदल दिया है अब अहसास-ए-जिंदगी मैंने, दिखाई देते थे मुझे चारों तरफ दुश्मन  रखी थी मुफ्...

घरों की दीवारों पे टंगे बिटको, के केलेंडर्स याद हैं.न.!!
 (गिरीश"मुकुल") at मिसफिट Misfit

बीवी और शौहर
बीवी और शौहर रात भर जागी बीवी दर्द से जो तडपा शौहर ; कभी बीवी के लिए क्यों नहीं जगता शौहर ? करे जो काम बीवी फ़र्ज़ हैं उसको कहते ; अपने हर एक काम को अहसान क्यों कहता शौहर ? रहो हद में ये हुक्म देता...

(कु)खुश-वाह-वाह मानसिकता और आरएसएस !
 अपने इस गौरवशाली महान और प्राचीनतम हिन्दू सनातन धर्म ( जिसका संस्कृत वाक्यांश है 'चिरकालिक आचार' / 'अनंत धर्म' ) का एक प्रबल समर्थक होने के नाते मेरी हमेशा यही कोशिश रहती है कि हर उस बात, स्थान, व्यक्ति और...

बस यूँ ही...!
हम राह देख रहे हैं खुशियों! हमारे द्वार आओ प्रगट हो कर साक्षात् मुस्कानों के बंदरवार सजाओ नमी बहुत देर से अटकी पड़ी है नयनों के कोरों में धूप बन कर खिल आओ किसी रोज़ मेरी धरती के पोरों में सभी बुलाते हैं तुझ...

अनंत यात्रा
प्लेटफार्म पर खड़े इंतजार में सभी, गंतव्य है एक पर गाड़ी अलग अलग. कन्फर्म्ड टिकट नहीं मिलती गंतव्य की पहले से, रखा जाता है सभी को अनिश्चित प्रतीक्षा सूची में. आने पर गाड़ी करता है संचालक टिकट कन्फर्म ...

कोई मुझसे लिखवाता है / वरना मुझको क्या आता है...... -  
*कोई मुझसे लिखवाता है* * वरना मुझको क्या आता है सृजन-कर्म की बात निराली* * भीतर कोई है...गाता है आँसू भी रचते है कविता* *अनुभव तो यह बतलाता है कविता ने जोड़... 

देखते ही देखते 
देखते ही देखते उम्र सारी ढल गयी डोर जिंदगी की यूँ हाथ से फिसल गयी कुछ कहाँ हो सका आह बस निकल गयी क्रांति की हर योजना बार-बार टल गयी हर किसी मोड़ पर कमी कोई खल गयी दर्द आग बन उठा श्वास हर पिघल गयी जो दिखा ...

तुम मुझसे घृणा करो... 
मेरी तो तुम से लगन है मेरी अराधना हो तुम मैं अपनी अविराम प्रीति पर स्वयं से घायल, स्वयं से भूली चली जा रही हूँ. मेरी तो चाहत है कि मैं अपनी आशा की समाधी पर कामनाओं की फुलवारी लगा लूँ . लेकिन मैं तुम्ह...

लाखे की स्मृति में जारी हो डाक टिकट 
*जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित, रायपुर का शताब्दी समारोह* एकीकृत एवं गहन खेती को बढ़ावा दें किसान : राज्यपाल**राज्यपाल श्री शेखर दत्त ने कहा कि किसान विस्तृत खेती से गहन खेती की ओर आगे बढ़े और खाद्यान्...

लोकपाल या लोकपा(ग)ल 
लोकपाल मतलब नेता। चौंकिए मत जो लोक को पाले वह नेता ही होसकता है। अरे भाई इसमें इतनी हैरानी की क्‍या बात है, क्‍योंकि लोक हुआ आम आदमी और आम आदमी को पालता है नेता। चाहेयह नेताओं की गलतफहमी ही क्‍यों न हो, प..

कब...???
 कभी चुपके से सुन तो सही, मेरी सदा... तेरे कई ख़त लिखे हैं इसमें... मैं हर रोज इक ख़त पढता हूँ, खुद से नज़र बचाकर... मगर... हर ख़त के बाद, दिल कुछ पूछ बैठता है... वो कब आएगा....????

नव वर्ष की वेला पर बाहें फ़ैलाए यामिनी --- ललित शर्मा 
चित्रकुट जलप्रपात रात का दृष्य (मेरे मोबाईल से) हम अब चित्रकूट जाना चाहते थे, शाम के 5 बज रहे थे। हमारी मंजिल 66 किलोमीटर दूर थी। सपाटे से चल पड़े क्योंकि थोड़ी देर में अंधेरा होने को था। जगदलपुर से 6 किलोम...

हँसते - हँसते ...............केवल राम 
दिल मेरा लूट गये, हँसते - हँसते पैमाने टूट गये, हँसते -हँसते पीने का शौक है हमें इस कदर मयखाने छूट गये , हँसते - हँसते महफ़िल में छाई रही ख़ामोशी तराने फूट गये , हँसते - हँसते दूरियाँ मंजूर नहीं मोहब्...
 चलते- चलते मेरी पसंद का एक गीत



सादर-
संध्या शर्मा
मिलते हैं अगली वार्ता पर... 

शुक्रवार, 6 जनवरी 2012

तुम गाँव में ही रहो, शहर मत आना पगली ---- ब्लॉग4वार्ता --- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, 2009 में  पढी गोदियाल जी द्वारा रचित एक गीत आ गया। उसके बोल बड़े ही अर्थकारक के, कभी कभी उस गीत के बोल मेरे ख्यालों में आ जाते हैं। आज शाम को वह गीत फ़िर याद आ गया। उसे मैने आपके लिए ढूंढा। एक बार अवश्य पढें। कभी कभी होता है कि कहीं पढी गयी रचना बरसों याद रहती वह जेहन में स्थायी रुप से बस जाती है। बस ऐसा ही मेरे साथ हुआ। भाई गोदियाल जी को आभार उत्कृष्ट रचना के लिए। अब चलते हैं आज की ब्लॉग4वार्ता पर और सैर करते हैं ब्लॉग नगरिया की.........

ध्यान लिंग – एक अभिनव प्रयोग - कोयम्बतूर (तामिलनाडू) से लगभग ३० किलोमीटर दूर वेल्लियांगिरी पर्वत की तलहटी में, वर्षा वनों के मध्य, १५० एकड़ के भूभाग में फैला एक संस्थान है, “ईशा”. एक आध... सरदी,सड़क और कोहरा ! - *दोपहर बीत जाने के बाद * *कोहरा और घना हो चला था* *मैं कब तक सेल में बंद रहता * *थोड़ी ही देर में * *ढके आकाश के नीचे ढका था,* *रास्ते पर चल चुका था !* * *... छत्तीसगढ़िया भाव जगाए मं, काबर लजाथन? - भारत ल मदर इंडिया कइथन, भारत माता मं काबर लजाथन? छत्तीसगढ़ मं हमन रइथन, छत्तीसगढ़-महतारी कहे मं काबर लजाथन? छत्तीसगढ़ के अनाज सबे खाथन, जय छत्तीसगढ़ कहे मं... 

बिना शीर्षक - मेरी एक तमन्ना थी की भाजपा ख़त्म हो जाए लेकिन इस तरह यह तो कभी सोचा ना था . भाजपा का पतन तो उसी समय शुरू हो चुका था जब बंगारू लक्ष्मण को वोटो की खातिर अध्य...अफवाहें - उडाती अफवाहें बेमतलब तुमने शायद नहीं सुनीं जब सामने से निकलीं लोगों ने कुछ सोचा और | मन ही मन कल्पना की कोइ सन्देश दिया होगा तुम मौन थीं तो क्या हुआ आँ... सुरभि अनोखी - सुरभि अनोखी गूंजती हैं जब वेद ऋचाएँ कहीं या हवा के कंधों पर उड़कर आती हैं अजान की आवाजें..ले आती हैं सुगन्धि उसकी... आत्मा के नासापुट ढूँढते रहे हैं जिस सु... 

Parashar Lake पराशर झील ट्रेकिंग - पराशर झील... ह्म्म्म। आखिरकार 7 दिसम्बर को इसे देखने हम निकल ही पडे। ऐसा नहीं है कि यह मेरी पहली कोशिश थी इसे देखने की। इससे पहले भी एक बार नाकाम कोशिश कर ... भय - सदियों से जीता आ रहा हूँ मै एक भय में एक डर जो कभी मेरा साथ नहीं छोड़ता जो मै हूँ क्या वही हूँ मै ? या जो मै नहीं हूँ उसी को लोग मुझे क्यों समझते ह... अंजुरी भर सुख - *तुम जब भी आते हो मुस्कराते हुए आते हो, कौन जान सका है इस मुस्कान के पीछे छिपी कुटिलता को ? * *हर बार तुम दे जाते हो करोड़ों आंखों को दरिया भर आंसू करोड़ो... 

अस्पताल से ............... - आये थे कुछ वादों के साथ ....लौट गए ख़ामोशी से ...इस बार की ये तेरी ख़ामोशी खूब खलेगी वर्ष ..... ऐसा लगता है ये वर्ष जल्द बीत गया ...कई वादे थे ....उम्मीदें थी... सपना और सच्चाई - स्वच्छ नीलाकाश में चिड़ियों का मस्त तिरना, कोमल-रक्ताभ कोपलों पुष्पों के मध्य फिरना, बचपन से मुझे लालसा के झूले में झुलाता है निर्बन्ध-सीमाहीन दुनिया में बुल... खाली शुभकामनाओं से काम नहीं चलेगा, शुभ काम भी करने पड़ेंगे -- - एक और वर्ष भूतकाल की गर्त में चला गया । रह गई तो बस यादें , कुछ खट्टी , कुछ मीठी । अब आशा भरी नज़र से देखते हैं वर्ष २०१२ की ओर । शुभकामनाओं का दौर ज़ारी ... 

बाबा रामदेव को सत्ता सुंदरी का विरह वेदना पत्र - प्यारे बाबा जब से आप रामलीला मैदान में, मंच से कूद सलवार पहन कर जान बचा कर भागे हो। तब से आपके इंतजार में मेरी रातो की नींद खो गयी है। ये मुई मीडिया भी आ... नया साल. - नन्हे ,रफीक, मुन्नी आज सुबह जल्दी ही कचरा बीनने घर से निकल गए. आज उनमे रोज़ जैसी मस्ती नहीं थी.उनकी निगाहें जल्दी जल्दी यहाँ वहां अपने काम की चीज़ें ढूं...राजधानी में सर्दी का प्रकोप - नपुंसक जनता एक बार फिर गिलाफ में गुस गयी - कारवाँ गुजर गया – गुबार देखते रहे .. वो निकल गयी बस से और हम बस देखते रहे. रोड पर साये उस कुहासे को दिमाग में औड लिया, माने, औड ली चुनरिया तेरे नाम की. रोड...

जा रहा है बचपन आ रहा पचपन .... - सुबह सुबह अच्छी खासी नींद लगी थी की बच्चों का शोरगुल सुना तो नींद खुल गई . कमरे से बाहर निकल कर देखा की परिवार के बच्चे कह रहे थे आज इकतीस दिसंबर है और कल ... गयी भैंस पानी में - *ना*टक का पटाक्षेप हो गया. फिर ढांक के तीन पात. चालीस साल हो गये... चले कितना...? अढाई कोस भी नहीं. वाह! जय हो दिल्ली की.... चालीस साल में दसों बार सदन म... सत्य देव दुबे की उपस्थिति फिर भी रंगमंच को स्पंदित करती रहेगी - हिन्दी रंगमंच के जिन नामों ने भारतीय कला फिल्मों के आन्दोलन के लिये मजबूत जमीन तैयार की, और उसे संभावनाओं का पोषण देते रहे , बिलासपुर के पंडित सत्य देव दु... 

वार्ता को देते हैं विराम, मिलते हैं ब्रेक के बाद, राम राम ...............

गुरुवार, 5 जनवरी 2012

ब्लॉगर अल्पना को गृहविज्ञान में पीएचडी -- ब्लॉग4वार्ता -- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, लेट लतीफ़ वार्ता के लिए क्षमा चाहते हुए एक खुशखबरी दे रहा हूँ, ब्लॉगर अल्पना देशपाण्डे को गृह विज्ञान में रविशंकर विश्वविद्यालय से पीएचडी प्रदान की गयी  है। उनके शोध का विषय " किशोर दूरदर्शन दर्शकों के लिंग तथा सुझाव ग्रहणशीलता का षड़यंत्रकारी व्यवहार" था। इस आशय की सूचना समस्त स्थानीय अखबारों में प्रकाशित हुई है, उन्हे ढेर सारी बधाईयाँ एवं शुभकामनाएं। अल्पना देशपाण्डे अब डॉ अल्पना देशपाण्डे कहलाएंगी। साथ ही समाचार है कि पं लोचन प्रसाद पाण्डेय की 125 वीं जयंती पर महंत घासीदास संग्रहालय रायपुर के सभागार में संगोष्ठी का आयोजन 4 जनवरी 2012 को किया गया। संगोष्ठी का शुभारंभ वरिष्ठ पुराविद डॉ विष्णुसिंह ठाकुर, संचालक नरेन्द्र शुक्ला, पुरातत्व सर्वेक्षण के रायपुर मंडल के अधीक्षक प्रवीण मिश्रा जी एवं इतिहासकार डॉ रमेन्द्रनाथ मिश्र ने दीप जला कर किया। अब चलते हैं आज की ब्लॉग4वार्ता पर, प्रस्तुत हैं कुछ उम्दा लिंक.........

संगोष्ठी का शुभारभ करते हुए डॉ विष्णु सिंह

इतना डरते क्यूँ हैं?स्वीकारने से लोग डरते क्यूँ हैं? नकारने में इतना वक्त गंवाते क्यूँ हैं? नहीं जानते,शायद... कि स्वीकारने में मुक्ति है, नकारने में बंधन है . जब प्रेम स्वाभाविक है मूल स्वभाव है मनुष्य का ... तो उसकी स्वी...
हे! जगदीश्वर... हे! कृष्णएक कविता जिसे कुछ कुछ बदल कर प्रार्थनारूप में यहाँ अनुशील पर प्रस्तुत किया था... सितम्बर २०१० में, आज पुनः उसी कविता को उसके मूल रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं... यह प्रार्थना लिखी गयी थी अपने प्रिय भैया के ...
तुरन्त फुरन्त में रची वे फुटकर तुकबन्दियाँतुम गुल बनके आओगे तो गुलाब दूंगा गिन गिन के नहीं दूंगा, बेहिसाब दूंगा तुम ताल में आओ तो मैं सुर बन जाऊं पर सवाल करते रहोगे तो जवाब दूंगा मैं तो चाहता हूँ कि कोई मुझ पर भारी पड़े पर जब भी...मानव कितना विवश है !नये साल में इस आँगन में कुछ भी नया नहीं है , लगता है जैसे साल पुराना अब तक गया नहीं है ! ...दसमेश पिता के वारिश हम ..वाहो !,वाहो ! गोबिंद सिंह जी, आपे गुरु चेला पावन गुरु -पर्व पर समस्त देश- विदेश वासियों को लख-लख वधाईयां ,प्यार ,शुभकामनायें ,मीरी[शक्ति ] और पीरी[ज्ञान ] के सद्द- वाहक बनें ..... ...

'गुप्त' इच्छाओं की 'सुप्त' सामग्री :)दुनिया में तरह तरह के रोग होते हैं लेकिन कुछ रोग गुप्त रोग कहलाते हैं। गुप्त यानि कि जो छिपा हो, आड़ में हो, किसी को नज़र न आये। इस तरह के रोगों के लिये निदान हेतु, जड़ से खत्म करने के दावे वाले वि...कृष्ण की व्यथानहीं कहा था मैंने कि गढ़ दो तुम मुझे मूर्तियों में नहीं चाहता था मैं पत्थर होना अलौकिक रहूँ यह भी नहीं रही चाहना मेरी , पर मानव तुम कितने छद्मवेशी हो एक ओर तो कर देते हो मंदिर में स्थापित ...

अब ‘इसके लिए’ भी ‘चाय-पानी’?अफसरशाही से सारा देश दुखी और परेशान है। इतना और ऐसा कि, आजादी के पैंसठ बरस बाद भी, व्यथित और क्षुब्ध स्वरों में, ‘इससे तो अंग्रेजों का राज ही अच्छा था।’ वाला वाक्य एक-दो दिनों में सुनने को मिल जाता है। यह...मैं कुत्तों के बारे में जो जानता हूँओरहन पामुक नोबेल पुरस्कार से सम्मानित तुर्की के गद्यकार हैं | निजी जिंदगी के बारे में उन्होंने सुन्दर बहते हुए गद्य को माध्यम बनाते हुए लिखा है | प्रस्तुत अंश उनकी किताब 'अदर कलर्स' से लिया है | यह एक म...

माटरा की चटनी और तीरथगढ जलप्रपाततीरथगढ कुटुमसर (गुगल के सौजन्य से) कांगेर घाटी में स्थित तीरथगढ़ दक्षिण पश्चिम दिशा में जगदलपुर से केशलुर 18 किलोमीटर और फ़ारेस्ट नाका 18 किलोमीटर फ़िर तीरथगढ 6 किलोमीटर है। कुटुमसर गुफ़ायहाँ से 12 किलो मीटर ...विशाल वटवृक्ष की छायाजिला सहकारी बैंक रायपुर का शताब्दी वर्ष जिला सहकारी बैंक रायपुर अपनी स्थापना के सौंवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है . इसका विधिवत पंजीयन 2 जनवरी 1913 को हुआ था . इसका पंजीयन क्रमांक भी 1 है .स्व...

अबे कितना सोओगे , का पत्थर हो जाओगेल्यो , अबे उत्तम पिरदेस में अफ़वाह उठी, कि, सोए तो पत्थर हो जाओगे , जियोह्ह क्या उडाए हो , अबे हो ही जाओ , मानुस रहे तो , हथिनी तले पिचाओगे * अबे जागो बे , ई अफ़वाह का माने है कि , अबे और कित्ता सोते रहोग...सागर की अथाह गहराइयो में..आज मैं उतर जाना चाहती हूँ.... * *सागर की अथाह गहराइयो में....* *मैं ढूढ लेना चाहती हूँ.... वो शब्द.....* *जो खुद में समेट ले मेरी तन्हाइयो को........ * * * * * *आज मै...

आ सखी चुगली करें सखियों ये .....एक कल्पना !!! .पुलकित मन की ....... प्रथम समर्पण कैसा होगा , मिलन हमारा कैसा होगा, सबल भुजा वो मेरी होगी , अस्तित्व समर्पित तेरा होगा, स्पर्श प्रथम तेरे अधरों का कपित अधरों से कैसा ह...क्षणिकाएंउडाती अफवाहें बेमतलब तुमने शायद नहीं सुनीं जब सामने से निकलीं लोगों ने कुछ सोचा और | मन ही मन कल्पना की कोइ सन्देश दिया होगा तुम मौन थीं तो क्या हुआ आँखों से व्यक्त किया होगा | कुछ मन चले छिप छिप कर ...

अजब सांपला की गज़ब कहानीयूँ तो हिंदी जगत में ब्लॉगर मिलन अक्सर होते हैं और अक्सर यह चर्चा भी रहती है कि ब्लॉगर मीट सार्थक होती है अथवा नहीं. हालाँकि सार्थकता के मायने हर इक के लिए अलग होते हैं, फिर भी एक सार्थक बात तो हर एक ब्लॉग...स्ट्राबेरीज़ के शहर मेंमुंबई आने से पहले...पंचगनी के विषय में इतना ही पता था कि वहाँ फिल्मो की शूटिंग होती है...फिल्म कलाकारों के बड़े बड़े बंगले हैं...और उनके बच्चे वहाँ के बोर्डिंग स्कूल में पढ़ते हैं. यहाँ आने के बाद पता चला...

आज बस इतना ही, वार्ता को देते हैं विराम, राम राम.......................

बुधवार, 4 जनवरी 2012

नए साल की जयहिन्द डायरेक्ट मैखाने से ------ ब्लॉग़4वार्ता - --- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार,  वाहन मालिकों के सिर पर तलवार फ़िर लटक रही है। दो रुपए पेट्रोल का मुल्य बढाने को लेकर खींचा तान चल रही है। आखिर पैट्रोल का मुल्य बढा कर ही मानेगें। बढाए जाओ बढाए जाओ बस थोड़े दिन और हैं जनता तुम्हे भी बढा देगी। उसे भी समय का इंतजार है। राईट टू रिकाल होता तो अभी  ही बुला लेते। अब समय का इंतजार है। प्रजातंत्र में एक वोट सत्ता बदल देता है। अब चलते हैं आज की वार्ता पर, प्रस्तुत हैं कुछ उम्दा ब्लॉग लिंक............।

नये साल से अपना ब्लाग शुरु.... देव ब्लॉग जगत को नए साल की शुभ-कामनाएं...... वैसे इस साल का हमारा संकल्प थोडा हट के है, हमने अपने इस ब्लॉग को फिर से चालू करने का फैसला किया है.....पिछले ६ महीने से खाली फेसबुक पर ही चालू थे....शिकायत !ठिठुरते मौसम में* जिन्दगी की सांझ की अंगीठी तापते हुए तुम्हारी ये शिकायत वाजिब ही है कि उम्र दोनों की ही तमाम हुई सुलझाने में! ये बात और है कि मैंने जीवन की उलझने सुलझाई और तुमने अपनी सजीली साड़ी...

मन विश्राम यहाँ है पाताबोलों को जब गीत मिले तो जीवन को संगीत मिले तो, कुछ बिछड़े से मीत मिले तो मन विश्राम वहाँ है पाता ! कुछ न सोचें और लिख जाएँ शब्द अनमने से मिल जाएँ, होंठ न खुलें फिर भी गाएं मन विश्राम वहाँ है...भूख अक्सर दौड़ती देखी है मैने..रेल की पटरी, सड़क, फुटपाथ पर भी, भूख अक्सर दौड़ती देखी है मैने... बंदगी, अच्छाइयाँ, ईमान जैसी, नीयतें दम तोड़ती देखी हैं मैने... वो लकीरें जिनके जालों मे कहीं पर, क़ैद है किस्मत बदलते हिंद की, कल.. चाय की ...

अफवाहों का साल 2012नया साल मुबारक कई अफवाहों से उलझा साल आखिरकार दरवाजे पर हर साल की तरह धड़ल्ले से दस्तक देकर घर के अंदर दाखिल हो ही गया। सच मे..... ये बेहद सच्चे मन से मान ही लिया जाये की ये सारी अफवाहें इस साल मे सच हो ...ब्लॉगर्स का सम्मान सांपला सांस्कृतिक मंच सेश्री पद्मसिंह जी स्मृति चिन्ह भेंट करते हुये अन्तर सोहिल इंदु मां को स्मृति चिन्ह भेंट संजय जी (मंजे) द्वारा श्री राजीव तनेजा जी को स्मृति चिन्ह भेंट अश्वनी जी द्वारा श्री राज भाटिया जी को स्मृति चिन्ह भें...

स्वार्थरहित रिश्तों का आकाश.एक पुरानी कविता का यूँ याद आ जाना... कभी कहीं खो जाने के बाद... कुछ याद था... कुछ पुनः लिखा... इससे पहले कि फिर खो जाये... सहेज लें! किसी जन्म का सम्बन्ध रहा होगा तभी तो वह इतना अपना लगा! रिश्तों की परि...बचा रहता है इंतजार...सब कुछ खत्म होने के बाद भी बची रहती है धूप के भीतर की नमी पत्थरों के भीतर की हरारत रेत के भीतर उग ही आता है कोई समंदर आग की आंखों में छलक उठते हैं दो आंसू बंजर धरती पर उगती हैं उम्मीदें सब कुछ खत्म होने...

छत्तीसगढ़ में बढ़ रही है ‘छिछान’ प्रवृत्ति इस तस्‍वीर को देख रहे हैं आप? गौर से देखें, छत्तीसगढ़ में इस पक्षी को ‘छिछान’ कहते हैं। इस पक्षी की यह विशेषता होती है कि प्रशिक्षित होने के बाद यह अन्य पक्षियों को मारकर अपने मालिक को द...छी! कुत्ते के माँस के मोमो कल आपकी *कलम घिस्सी* यानि कि मैं अपनी कलम को घिस रही थी कि तभी मेरे पापा ड्यूटी से आए और बोले, "तुझे मोमो खाना बहुत पसंद है न. आज मैंने दो नार्थ ईस्ट लड़कों को पकड़ा है जो कि कुत्ते, भैंसे और सुअर के माँ...

हिंदी विदेशी भाषा की तरह है हिंदी विदेशी भाषा की तरह है डॉ. वेदप्रताप वैदिक गुजरात उच्च न्यायालय के फैसले पर किसी भी हिंदीभाषी को जबरदस्त गुस्सा आ सकता है। उसने अपने एक निर्णय में कह दिया कि हिंदी तो किसी भी...कम से कम अपने राजनयिक पर हमले के विरोध में ही सही चीनी सामानो का बहिष्कार होना चाहियेचीन में हमारे राजनयिक पर हमला हुआ।हमारे दो भाई वंहा बंधक हैं।चीनी व्यापारी उन्हे रिहा नही होने दे रहे हैं,कोर्ट से रिहाई के आदेश के बावज़ूद्।चीन पहले से हमारी ज़मीन के एक बड़े हिस्से पर कब्ज़ा जमाये बैठा ह...

एक करुण कहानी,एक आईआईटीयन की जुबानी बहुत समय से भारत के प्रसिद्द आई आई टी के किसी छात्र से बातचीत करने की इच्छा थी.मन था कि जानू जिस नाम का दबाब बेचारे भारतीय बच्चे पूरा छात्र जीवन झेलते हैं उस संस्था में पढने वाले बच्चे क्या सोचते हैं.कई ...मुस्कराते - हँसते बीते २०१२ - ब्लॉग बुलेटिनप्रिय ब्लॉगर मित्रो ,* *प्रणाम !* * * * सब से पहले आप सब को नव वर्ष की बहुत बहुत हार्दिक बधाइयाँ औए शुभकामनाएं ! कैसा रहे कि आज के बुलेटिन की शुरआत हँसते मुस्कराते हुए हो ... ???* *मालुम है अप सब यही कह ... 

कभी तुम कुछ कहते हो कभी तुम कुछ कहते हो , कभी तुम चुप रहते हो , पर हमेशा मुझसे ही कुछ , .मौसम हुआ कोंपलकुमार रवीन्द्र नए साल में वरिष्ट विद्वतजन का आशीर्वाद मिले, इस से बड़े सौभाग्य की बात और हो भी क्या सकती है| इस साल की पहली पोस्ट के लिए आदरणीय कुमार रवीन्द्र जी ने अपना नया नवेला नवगीत भेज कर हमें अनुग्र..."अजीब है ना" यह सन्देश अभी-अभी Internet पर मिला इस आशा के साथ कि इसे और लोग भी देखें-पढ़ें। इसीलिए........... एक रोटी नहीं दे सका कोई उस मासूम बच्चे को लेकिन उसकी यह तस्वीर लाखों मे बिक गयी, जिसमें रोटी के लिये वह ब...

पार्टी हैकमान...v/s....रोन्दडू नेता की श्रीमती जी !पार्टी हाईकमान के सामने* - आप को चुनाव का टिकट चाहिये.... ठीक है हम इस पर विचार करेंगे लेकिन क्या आप बता सकते हैं कि आप मंत्री होते हुए भी सरे बाजार क्यों रो रहे थे। - बस रूलाई आ गई थी सर, क्या करता, बह...दस्तखत बैंक में कस्टमर का पहचान दू तरह से होता है. पहिला, आपसी सम्बन्ध अऊर दोसरा हस्ताक्षर यानि सिग्नेचर से. आपसी सम्बन्ध त आदमी के ब्यौहार पर निर्भर करता है. मगर सिग्नेचर असली पहचान होता है. इसमें कोनों तरह के...

नए साल की जयहिन्द लोग-बाग आते हैं जापान , लोग जाते हैं वापस हिन्दुस्तान । किं आश्चर्यम्? लेकिन कम हैं वो ख़ुशक़िस्मत जो नेता जी का स्मृति-लाभ पाते हैं यहाँ आकर । तोक्यो के बीच इस बौद्ध मंदिर में सुरक्षित हैं नेता जी के भस्म...बजरिया में बाजारू बातेंसन्दर्भः नीलाम, विपणन, पण्य, क्रय-विक्रय, गल्ला, हाट, दुकान, पट्टण, पोर्ट, पंसारी * [image: bazar] य ह स्थापित तथ्य है कि वैश्विक स्तर पर भाष विभिन्न भाषाओं में अन्तर्सम्बन्ध की बड़ी वजह मानव समूहों का आ...


वार्ता को देते हैं विराम, मिलते हैं ब्रेक के बाद, राम राम तब तक इधर भी हो आईए...................

मंगलवार, 3 जनवरी 2012

ललित शर्मा चाट उत्पादन प्रायवेट लिमिटेड से फ़्रैंचायजी लीजिये...!!


अनुभूति-अभिव्यक्ति बेशक गौरवशाली अंतर्जालीय प्रकाशन है, क्या आपने  इस में स्थान पाया यदि नहीं तो देर किस बात की भेज दीजिये न अपनी अभिव्यक्तियां और अनुभूतियां ओ के समझ गया आप 
     इस सप्ताह में समकालीन कहानियों में यू.एस.ए. से नीलम जैन की कहानी संस्कार,विनोद विप्लव का व्यंग्य ,कुर्सी में जान डालने की तकनीक श्रीश बेंजवाल शर्मा के साथ २०११ का तकनीकी सफर सुधा अरोड़ा का आलेख सावित्री बाई फुले,पुनर्पाठ में पर्यटक  के साथ- आरामगाह आस्ट्रेलिया
  और अनुभूति में 
  • गीतों में- 
शशिकान्त गीते अंजुमन में-मयंक अवस्थी छंदमुक्त में-विक्रम पुरोहित
घनाक्षरी में- आशुतोष द्विवेदी पुनर्पाठ में-श्रीकृष्ण शर्मा
 इसी क्रम में आपको बता दूं ये जो चेहरे है 

इनने ये कमाल किया है => "इनका कमाल इधर से "ये कमाल किया है 
       का रसास्वादन अवश्य कीजिये बेशक़ नये साल का स्वागत आप सबने अपने अपने तरीक़े से किया होगा होना भी चाहिये अब अपने ललित बाबू को ही लीजिये चाट-पकौड़ी, गोलगप्पे बेचते पाए गये सुना है कि बाक़ायदा वे फ़ैंचाइजी दे रहे हैं ब्लागर्स के लिये विशेष आफ़र है किसी भी प्रकार की सिक्योरिटी जमा नहीं करनी होगी.बस एडसेंस में पार्टनर शिप का कांट्रेक्ट साइन करना होगा. जल्द सम्पर्क कीजिये फ़ैंचाइजी लीजिये गूगल के एडसेंस की कमाई आने में देरी है तो देर किस बात की.  
        उधर पद्म सिंह पिछले पंद्रह दिनों से नहा नहीं पाए उनको "बम्बा सांप लगता है..!!"इधर हम सोच रहे हैं लोग कैसे पंद्रह-पंद्रह दिन नहीं नहा पाते यहां सातवें दिन से अकबका जाता हूं. हा हा हा .. !         मित्रो मित्राणियो ताज़ा खबर ये है कि भाई तरुण जोशी नारद जी   अपने राज दादाजी को सापला में कई ब्लागर भाई टोपी पहना गए इत्ती टोपी है अब उनके कने कि वे पुकार रहे हैं:-" आईये आप को भी टोपी पहना दे..." जे का सायंस ब्लागर्स कछु बता रहे हैं "पृथ्वी की परिधि के परिणाम आये Earth Experiment Results" जाओ भाई लोग देख आएं. जब तक साईंस प्रेमी पाठक उधर गए ग़ज़ल के शौकीन इसे बांचें.."आंख शब भर मेरी लगती नहीं क्यों..!!" अर्र ये क्या रुद्राक्ष पाठक जी छा गए भाई "आखिर ये पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज कब आयेगा" ये वाली पोस्ट लिख के . इस बच्चे यानी रुद्राक्ष पाठक जी के ब्लाग पर अवश्य दुनिया मेरी नज़र से जाएं.मित्रो हिमधारा  पर एक अच्छी पोस्ट है... और चटखारे लेसकतें हैं आप जय हो भ्रष्टाचार प्रभु की ! पढ़कर. रहा बड़े ब्लागर्स का हिसाब किताब सो इधर मिलेगा "ये है बड़े ब्लागरों की सच्चाई" भाई तरुण जोशी नारद जी ने एक बीड़ा उठाया है ब्लागर्स की डायरेक्ट्री बनाने का बस आप उनको अपने बारे में वे कह रहे हैं
इस नव वर्ष के अवसर पर मेरी इच्छा हुई की एक ब्लोगर्स डाइरेक्ट्री का प्रकाशन का प्रयास किया जाए.

जिसमे ब्लॉगर का नाम पता फ़ोन नंबर, ब्लॉग पता जीवन परिचय, फोटो प्रकाशित किया जाये, साथ में कुछ विशेष ब्लोगरों के साक्षात्कार के साथ उनकी विशेष कृतियां
इस हेतु आप सभी से अनुरोध है की मेरा सहयोग करें और उक्त जानकारिय मुझे भेजने का कष्ट करें
नाम
पता
टेलीफोन नम्बर
ई मेल पता
ब्लॉग पता
जीवन परिचय
कृतियां
कृपया ये सूचनाये मुझे मेल से  blogger@naradnetwork.in or 
bloggerdirectory@naradnetwork.in पर या मुझे भेजे मेरे पते पर 
तरुण जोशी नारद
पंचायत समिति के पीछे 
केनपुरा रोड 
रानी (पाली) ३०६११५
mobile  8946890812

खैर जो भी हो छोटी सी वार्ता के बाद मेरी ओर से नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं
अब मुझे भी खुश होना है मनीष मिश्रा जी ने कल्याण से कोरियर भेजा मुझे  जिसमें " हिंदी ब्लाग-भूषण " का मोमेंटो सस्नेह-प्रेषित किया गया

सोमवार, 2 जनवरी 2012

ब्लॉग जगत के मंगल पांडे ---------- ब्लॉग4वार्ता --- ललित शर्मा

नव वर्ष की शुभकामनाओं के साथ ललित शर्मा का नमस्कार, सूचना है कि मधु  कोड़ा ने इतना  कोड़ा कि आयकर विभाग ने 3300 करोड़ का फ़ोड़ा निकाला है। अभी न जाने कितने कोड़ा हैं जो कोड़ रहे हैं दिन रात। चूहे तो सिर्फ़ बिल बनाते हैं, ये कोड़ कोड़ कर सूरंग बना रहे हैं। सुरंग से भाग जाने की जुगत लगा रहे हैं। इन सुरगों को मुँह बंद करना चाहिए। नहीं तो देश की पूरी संपत्ति ही स्विस बैंकों मे इन सुरंगो के माध्यम से चोर पार कर देगें। देश का अंतिम आदमी धोती लंगोटी में रह जाएगा। अब चलते हैं आज की ब्लॉग4वार्ता पर..................।

तोक्यो में रात नए साल की2010 के दिसंबर में तोक्यो आया तो सौजन्य-वश जापान के जन-जीवन से परिचय का ज़िम्मा जिसने लिया वो इत्तेफ़ाक से एक ईसाई कन्या थी । इत्तेफाक़ इसलिए क्योंकि यहाँ आज भी ईसाई धर्मावलंबी काफ़ी सीमित सी तादाद म...रचना रसिक सांपला के युवाओं ने तो मज़ा लिया ही, बहादरगढ़ के वयोवृद्ध लालाजी ने भी रात भर आनन्द लिया रचना का जहाँ तक मेरा अनुभव है, अन्य बातों में देश के लोग भले ही अपने अपने खेमों में बँटे हों, लेकिन मेरी रचना का मज़ा लेने के मामले में पूरा देश एक है . पिछले साल तिलियार ब्लोगर्स मीट के बाद अन्तर सोह

त्रासदी चाँद की !दिल में उसके नूतन वर्ष का * *अपना ही कपोल-कल्पित * *आनंदोल्लास बड़ा था, * *नव-वर्ष के पहले प्रभात का * *दीदार करते हुए चाँद, * *तारों के ठीक नीचे खडा था। * *गूँ..गुटरगूँ…गूँ…गुटरगूँ करते * *तभी कुछ जोड़े ... भाग्य अपना हम गढ़ेंगेकब होगा जागरण बूढी परी ने शाप दिया था उस दिनसो गया सारा देशराजभवन के चारों ओर उग आये बड़े बड़े जंगलथम गया था जीवनगुम हो गए लोग गहरी नींद मेंलेकिन स्वप्न चलते रहे थे भीतरस्वप्न में वे विचरते थे भीतरखुले मैदान...

फिर एक नया साल आएगा और फिर नई उम्मीदें जागेंगींआज से साल भर पहले आज के ही दिन अर्थात् 1 जनवरी 2011 को हमने उमंग और उल्लास के साथ नये साल का स्वागत् किया था। आज उस वाले नये साल का अवसान हो चुका है। आज हम फिर से एक नये साल अर्थात 2012 का उसी उमंग और उल्ल...जिंदगी
जीवन की हर गति बाजार, धन और मुनाफे से नहीं तय होती। रात के बाद नए दिन की सहर आएगी दिन नहीं बदलेगा तारीख़ बदल जाएगी। (प्रेम सागर सिंह) जिस तरह से बालू हाथ से सरक जाता है ठीक देखते ही देखते वर्ष -201। ...

ब्लॉग जगत के मंगल पांडे ठाकुर पद्म सिंहप्रिय मित्रो सादर ब्लॉगस्ते! *अं*ग्रेजी नव वर्ष का आगमन हो चुका है इसलिए अंग्रेजी में ही शुभकामनाएं स्वीकारें। "हैप्पी न्यू इयर टु यू।" वैसे हम हिन्दुस्तानियों का नव वर्ष 22 मार्च, 2012 से आरम...पहली सालगिरह ...*शुक्रियां ! करम ! मेहरबानी ! * *आज मुझे आप लोगों से मिले पूरा एक वर्ष यानी ३६५ दिन हो चुके हैं ! * *आज मेरे ब्लॉग 'मेरे अरमान मेरे सपने'की वर्षगाँठ हैं :-- * * * *आप लोगो का प्यार और सत्कार मेरे...

अंजुरी भर सुखतुम जब भी आते हो मुस्कराते हुए आते हो, कौन जान सका है इस मुस्कान के पीछे छिपी कुटिलता को ? * *हर बार तुम दे जाते हो करोड़ों आंखों को दरिया भर आंसू करोड़ों हृदय को सागर भर संत्रास और कर जाते हो समय की छा...आग लगे ब्लॉगिंग तोहार....!12 तक 11 था अगले ही पल 12 था अब 12 कहे तेरा करूँ दिन गिन गिन के इंतजार आजा प्यारे 13 हमार। रतिया जगायेकम्पूटर हमें भिनसहरे उठायेमोबाइल हमें बाहर जो निकलाकि घूमूं जरा बारिष ने चौचकभिगोया हमें सूरज दिखा न...

मित्रों का अनुराग और पानी की बौछार आख़िरकार वर्ष 2011 बीत गया और वर्ष 2012 आ गया .आईये हम सब मिलकर बीते वर्ष की बिदाई करें तथा नए वर्ष 2012 का स्वागत करें .हालाँकि सब कुछ वही है केवल समय चक्र बदल रहा है . वर्ष 2011 के अंतिम दिन मौसम ने अंगड...शक्ति, जिस से लुटेरे थर्रा उठेंअनवरत के सभी पाठकों और मित्रों को नव वर्ष पर शुभकामनाएँ!!!* *नया वर्ष आप के जीवन में नयी खुशियाँ लाए!!* भारतीय जनगण को इस वर्ष निश्चित रूप से विगत वर्षों की अपेक्षा अधिक शुभकामनाओं की आवश्यकता है। ..

अब वार्ता को देते हैं विराम, राम रा॥ धन पाना है तो इधर जाईए।
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