शुक्रवार, 4 जनवरी 2013

दानव का किरदार क़िस्त दर क़िस्त.. ब्लॉग 4 वार्ता... संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार.... दिल्ली में पिछले दिनों हुए सार्वजनिक बलात्कार मामले में चार्जशीट दायर हो गई है.पांच अभियुक्तों के ख़िलाफ़ हत्या, अपहरण और बलात्कार के आरोप लगाए गए हैं. हड़ताल बन रही है शिक्षकों की मौत की वजह। हड़ताली शिक्षकों का जल सत्याग्रह.छत्तीसगढ़ में पिछले एक महीने से चल रही शिक्षाकर्मियों की हड़ताल के बीच अब तक 15 शिक्षकों और उनके तीन परिजनों की विभिन्न कारणों से मौत हो चुकी है. हड़ताल बन रही है शिक्षकों की मौत की वजह हड़ताली शिक्षकों का जल सत्याग्रह.छत्तीसगढ़ में पिछले एक महीने से चल रही शिक्षाकर्मियों की हड़ताल के बीच अब तक 15 शिक्षकों और उनके तीन परिजनों की विभिन्न कारणों से मौत हो चुकी है. उधर ठिठुर रहा है उत्तर भारत! उत्तर भारत में शीत लहर कड़ाके की ठंड के बीच... आइये अब चलते हैं आज की वार्ता पर ..........

क्या तुम्हारी आँखों ने कभी जाना है धरती एक है बस - अदूनिस की कविता - २ - धरती कितनी दफ़ा कह चुके हो तुम : “एक दूसरी मातृभूमि है मेरे पास,” और आंसुओं से तर हो जाती हैं तुम्हारी आँखें, और तुम्हारी हथेलियाँ उसके नज़दीकी इलाक़ों... है ना अचरज ........... - मेरे पास कुरान की आयतें नहीं जो बांच सकूँ गीता का ज्ञान नहीं जो बाँट सकूँ शबरी के बेर नहीं जो खिला सकूँ मीरा का प्रेम नहीं जो रिझा सकूँ राधा सा ...क्या यह एक जरूरी काम नहीं है? - मेरा कमरा - अल्पना मिश्र स्त्री का कोई अपना कमरा हो सकता है क्या, जहॉ बैठ कर वह अपने आप को जी सके? ऐसा कोई एकांत कोना ही, जहॉ वह अपनी तरह से दुनिया जहान पर ... 

छत्तीसगढ मित्र का पुन: प्रकाशन - पं माधवराव सप्रे विगत दिनों एक कार्यक्रम के दौरान मुझे "छत्तीसगढ़ मित्र" पत्रिका मिली। इसका प्रकाशन माधवराव सप्रे जी 111 वर्ष पूर्व करते थे। किसी पत्रिका ... परिवर्तन के स्वर को धरातल पर लाने का संकल्प--- - अन्ना का आन्दोलन, रामदेव का तामझामए प्रमुख राजनैतिक दल कांगेे्रस-भाजपा की करतूतों, उद्योगों की चालबाजी और छत्तीसगढ़ की रमन सरकार के कालिख पूते चेहरे, ... कोया (बस्तर के अनावृत सौंदर्य के कामपिपासु ख्यातिलब्धों की कहानी) - 'विधुर हूँ, उम्रदराज भी हूँ किन्तु इंद्रियों में प्यास अब तक बाकी है, देख लेना.' चित्रकोट जल प्रपात की प्रकृतिक छटाओं का आनंद लेकर जगदलपुर के विलासितापूर्ण ...

राजनीति?... माफ़ किजीये। - लगभग दो पीढीयों से, मध्यम वर्ग, हिन्दुस्तान का विशाल समूह ’पगार’, ’बोनस’ , घर, गाड़ी, ए/सी के पीछे ही भाग रहा है। यहाँ अपने देश में नहीं तो ’अम्रीका’ में और ... तुम्हारी ख़ामोशी.......!!! - बहुत कुछ लिखवा लेती है, तुम्हारी ख़ामोशी....... तुम कुछ कहते भी नही, न जाने क्या समझा देती है.... तुम्हारी ख़ामोशी... अब तक जो कुछ लिखा, जो ...क़िस्त दर क़िस्त… - हि न्दी के बहुप्रयुक्त शब्दों में* क़िस्त* का भी शुमार है हालाँकि अक्सर ज्यादातर लोग *‘क़िस्त’* को ‘*किश्त*’ लिखने और बोलने के आदी हैं । ‘..    

न जाने तुमने ऊपर वाले से क्या क्या कहा होगा ... - * ** ** *न जाने क्या हुआ है हादसा गमगीन मंज़र है * *शहर मे खौफ़ का पसरा हुआ एक मौन बंजर है * *फिजाँ मे घुट रहा...चीख लेने दो मुझे ... - "चीख लेने दो मुझे रात लम्बी है और सर्द बेहद सबेरा होगा --लोग कहते हैं यकीन नहीं होता यूं भी दिनमान पर कोहरे का कहर जारी है ओस खामोश है फूलों के रुखसारों...इतनी मजबूर तो नहीं जिंदगी.... *क्यूँ घुट रहे हो पल-पल,* *कोई क़सूर तो नही जिंदगी!* *खोलो पलके हाथ बढाओ,* *इतनी भी दूर तो नहीं ज़िन्दगी!* *माना ज़ख्म है कई तो  ....

मुक्ति...  मुक्त करती हूँ तुम्हे हर उस बंधन से जो बुने थे सिर्फ और सिर्फ मैंने शायद उसमे ना तुम बंध सके ना मैं बाँध सकी निकल जाना है अलग राह पर लेकर  ...आदित्य की प्रथम किरण - आदित्य की प्रथम किरण सा कितना सुखद सानिध्य और तुम्हारा स्नेहिल स्पर्श कर जाता अभिमंत्रित मन मयूर को\ व्योम में सूर्य बिम्ब से अरुणिम अधर प्रमुदित.. अनागत / नव वर्ष पागल मन सोचने लगा 21 वीं सदी में सूरज पूरब से नहीं पच्छिम से निकल आवेगा हवा का रुख बदल जायेगा नक्षत्र अपना स्थान बदल लेंगे नभ से बादल दूध बरसायेंगे पहाड़ी झरनों से झरेंगे मोती आसमान से बरस पड़ेगा अमृत किसी ने कहा अनहोनी कुछ नहीं जो हुआ अच्छा हुआ. ...
 
दानव का किरदार ले गए जीने के आसार ले गए, जीवन का आधार ले गए, भूखों की पतवार ले गए, लूटपाट घरबार ले गए, छीनछान व्यापार ले गए, दौलत देश के पार ले गए, खुशियों के बाज़ार ले गए, औषधि और उपचार ले गए, सारा आदर सत्कार ले गए, प्रेम भाव त्यौहार ले गए, पेट्रोल बढ़ाया कार ले गए, गाड़ी मेरी मार ले गए, खुद्दारी खुद्दार ले गए, दानव का किरदार ले गए ... क्षणिकाएं (१) एक अनजाना चेहरा - एक अज्ञात नाम - लेकिन कमाल का जज़्बा- फिर यह शिकायत क्यूं , की इंसानियत मर चुकी है ......! (२) मौन से बढ़िया साथी आज तक नहीं मिला वह न रोकता है ... नया साल आया तो खड़ा है*नया साल आया तो खड़ा है * *उम्मीद जश्न की करता हमसे * *खुशियों पे अपनी पानी पड़ा है * * **गुजरे साल में ज़ख़्मी हुए हम * *जार जार रोई मानवता * *काँधे पे अपने , लिए ज़मीर की , लाश खड़ा है * * **सूख गये विष्वास के मानी * *मर गया आँख में शर्म का पानी * ...

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अगली वार्ता तक के लिए दीजिये इजाज़त नमस्कार........

गुरुवार, 3 जनवरी 2013

घोंघा बसंत: बूड़ मरे नहकउनी दै …… ब्लॉग4वार्ता …… ललित शर्मा

ललित शर्मा का  नमस्कार, हिन्दुओं का धार्मिक पर कुंभ प्रारंभ होने को है, प्रशासन एवं धार्मिक गुरुओं में रस्साकसी के चलते कुंभ प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। कुंभ में मेला प्रशासन की अव्यवस्था से क्षुब्ध होकर शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती जी मेला क्षेत्र छोड़ कर वाराणासी प्रस्थान कर गए हैं। कुंभ के प्रति सरकार कतई गंभीर नजर नहीं आ रही है। प्रयाग में लगने वाला कुंभ मेला दुनिया का सबसे बड़ा आयोजन होता है। करोड़ों हिन्दुओं की धार्मिक आस्था से जुड़े हुए कुंभ पर्व की अनदेखी से श्रद्धलुओं में रोष व्याप्त है। सरकार को श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था करनी चाहिए। अब चलते हैं आज की वार्ता पर, प्रस्तुत हैं कुछ उम्दा चिट्ठों के लिंक्स …………।

कर्नल नाथू सिंह शेखावत : शख्सियत परिचयकर्नल नाथूसिंह शेखावत कर्नल नाथूसिंह शेखावत का जन्म 7 मार्च सन 1946 में राजस्थान के शेखावाटी आँचल में झुंझुनू जिले के गांव “ढाणी-बाढान” के ठाकुर श्री शाहजादसिंह के घर हुआ| ठाकुर शाहजादसिंह जी पंजाब रेजिमेंट के बहादुर सैनिक थे वे द्वितीय विश्व युद्ध में फ़्रांस, इटली व यूरोपीय क्षेत्र में बहादुरी के लिए अलंकरित किये गए थे| सन 1952 में दुर्भाग्यवश ठाकुर शाहजादसिंह काल-चक्र जनित मारक आपदाओं से घिर गए और उनकी आर्थिक सम्पन्नता विपन्नता में परिणित हो गयी| घर की आर्थिक स्थिति लड़खड़ाने के बावजूद कर्नल नाथूसिंह की माता जी श्रीमती शिवताज कुंवरी निरवाण अपने पुत्र की शिक्षा के लिए सजग रही| उन्हो... more »

बूड़ मरे नहकउनी दै इस छत्‍तीसगढ़ी लोकोकित का भावार्थ है दुहरी नुकसानी. इस लोकोक्ति में प्रयुक्‍त छत्‍तीसगढ़ी शब्‍द 'बूड़' और 'नहकउनी' का अर्थ जानने का प्रयास करते हैं. छत्‍तीसगढ़ी शब्‍द 'बूड़' से 'बुड़ना' बना है जिसका अर्थ है डूबना, अस्‍त होना. चांद, तारे, सूर्य आदि के अस्‍त होने को भी 'बुड़ना' कहा जाता है. सूर्य के अस्‍त होने संबंधी एक और शब्‍द छत्‍तीसगढ़ में प्रचलित है 'बुड़ती'. सूर्य के उदय की दिशा (पूर्व) को 'उत्‍ती' एवं सूर्य के अस्‍त होने की दिशा (पश्चिम) को 'बुड़ती' कहा जाता है. पानी या किसी दव्‍य में पदार्थ का अंदर चले जाने के भाव को भी 'बूड़ना' कहा जाता है. निर्धारित तिथि के उपरांत गिरवी रखी ... more »
हाउसवाइफ से वर्किंग वूमैन तक *मेरे घर में पिछली पीढ़ी में (मां-मौसी-चाची-मामी-बुआ) 99 % स्त्रियां हाउसवाइफ थीं। अगली जनरेशन में 99 लड़कियां वर्किंग हैं। उन्‍हें एजूकेशन मिली और घर से निकलकर नौकरी करने का मौका भी। लेकिन इन दो पीढि़यों की जिंदगी में आखिर बदला क्‍या?* 1- मेरी हाउसवाइफ मौसी सुबह सबसे पहले उठती थीं। मेरी नौकरीपेशा बहन सुबह सबसे पहले उठती है। 2- मेरी हाउसवाइफ मौसी उठते ही सबसे पहले किचन में घुसती थीं। मेरी नौकरीपेशा बहन उठते ही सबसे पहले किचन में घुसती है। 3- मेरी हाउसवाइफ मौसी चाय-नाश्‍ता बनाकर पति के हाथ में पकड़ाती थीं, मेरी नौकरीपेशा बहन चाय-नाश्‍ता बनाकर पति के हाथ में पकड़ाती है। 4- मेरी हाउसव... more »
दहशत, आक्रोश और एक जायज माँगदिल्ली गैंग रेप केस- इस घटना ने बहुत अन्दर तक डर बैठा दिया है- हम जैसों के मन में ,जो लम्बे समय से अपने जीवन में संघर्ष ही करते आए हैं। एक हादसा या दुर्घटना पूरे परिवार को तोड़ देती है ,ये वही जान सकता है ,जिसने उस दर्द या पीड़ा को जिया है.... न्यायमूर्ति वर्मा जी की समिती से हमारा निवेदन है कि इस और ऐसे अपराध के अपराधी/अपराधियों को तुरन्त सजा देने के निर्णय लिए जाएं जबकि सब कुछ साफ़ है/हो ... मैंने बलात्कार की इस घटना को लेकर अपने आसपास के लोगों से अपने मन में उठे विचार लिखने को कहा था,आज वही यहाँ प्रस्तुत कर रही हूँ--- 1) अस्मिता बचाने की लाचारी ने अस्तित्व को संकट में डाल दिया,... more »
घोंघा बसंत: आदर्श घुमक्कड़ घोंघा बसंत! हाँ गुरुजी यही कहते थे। पढाने के बाद भी अगर कोई विद्याथी उनके प्रश्न का जवाब नहीं दे या फ़िर सवाल हल करने में अक्षम रहे तो गुरुजी उसे सार्वजनिक रुप से घोंघा बसंत की उपाधि से नवाजकर सम्मानित करते थे। कक्षा में प्रतिवर्ष 2-4 घोंघा बसंत विरासत के तौर मिल जाते थे। हमारे सहपाठी घोंघा बसंत पिछली कक्षा में छूट जाते और अगली कक्षा में छूटे हुए मिल जाते। तब हमें यह न मालूम था कि गुरुजी ठस बुद्धि विद्याथियों को घोंघा बसंत क्यों कहते हैं। शंख जैसे छोटे से खोल में रहने वाला लिजलिजा प्राणी घोंघा कहलाता है यह हम जानते थे। हम आगे की कक्षाओं में बढते बढते इतने आगे बढ गए कि आज तक मुड़कर... more 
2012 यानी भ्रष्टाचार और बलात्कार का वर्ष - वर्ष 2012 विदा हो चुका है। 2013 अपनी पूरी मस्ती के साथ आ चुका है। यह साल कैसा होगा, यह अभी तो नहीं कहा जा सकता? पर इतना तय है कि पिछले वर्ष का अंत जिस तरह से हमारे सामने आया, उससे यही लगता है कि यह साल हम सबके लिए चुनौतीपूर्ण है? क्योंकि देश कई समस्याओं से जूझ रहा है। केंद्रीय सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हो रही है। भ्रष्टाचार बेलगाम है, अब बलात्कार की घटनाओं में अप्रत्याशित रूप से तेजी आ गई है। महंगाई अपना खेल खेल रही है। डीजल के दाम बढ़ने वाले हैं। कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि 2013 कोई खुश खबरी लेकर नहीं आ रहा है। उसे तो आना ही है, वह आएगा भी। पर क्या हम उसका... more »
न जाने तुमने ऊपर वाले से क्या क्या कहा होगा *न जाने क्या हुआ है हादसा गमगीन मंज़र है * *शहर मे खौफ़ का पसरा हुआ एक मौन बंजर है * *फिजाँ मे घुट रहा ये मोमबत्ती का धुआँ कैसा * *बड़ा बेबस बहुत कातर सिसकता कौन अन्दर है* *सहम कर छुप गयी है शाम की रौनक घरोंदों मे * *चहकती क्यूँ नहीं बुलबुल ये कैसा डर परिंदों मे * *कुहासा शाम ढलते ही शहर को घेर लेता है * *समय से कुछ अगर पूछो तो नज़रें फेर लेता है * *चिराग अपनी ही परछाई से डर कर चौंक जाता है * *न जाने जहर से भीगी हवाएँ कौन लाता है* *ये सन्नाटा अचानक भभक कर क्यूँ जल उठा ऐसे* *ये किसकी सिसकियों ने आग भर दी है मशालों मे * *सड़क पर चल रह... more »
घातक शस्त्र को कवच में बदल दिया यह प्रसंग भाषा के चमत्कार का तो नहीं, भाषा के सुन्दर उपयोग का अवश्य है। सूझ-समझ हो तो, जो भाषा, धारादार और घातक औजार के रूप में आपके विरुद्ध प्रयुक्त की जा रही है, उसे ही आप अपना कवच कैसे बना सकते हैं, यह भी इस प्रसंग से समझा जा सकता है। भाषा तो वही होती है, बस! आवश्यकता होती है, उसे प्रयुक्त करने के कौशल की। यही कौशल, सामनेवाले द्वारा प्रयुक्त किए गए घातक-शस्त्र को बूमरेंग बनाकर, आक्रामक को लौटा सकता है, जिस पर वार किया गया है, वही इसे अपना कवच बना लेता है। कुछ इस अन्दाज में कि ‘कैसे तीरन्दाज हो? सीधा तो कर लो तीर को!’ बात 1980 की है। दादा मध्य प्रदेश सरकार में, स्वतन... more »

दोष नहीं दे सकता कल को क्षुब्ध मनस का भार सहन है, दोष नहीं दे सकता कल को, गहरे जल के तल में बैठा, देख रहा हूँ बहते जल को। क्या आशायें, क्या इच्छायें, क्या जीवन की अभिलाषायें, अनुचित, उचित विचार निरन्तर, रच क्यों डाली परिभाषायें, सबने जकड़ जकड़ कर बाँधा, नहीं जिलाया व्यक्ति विकल को, दोष नहीं दे सकता कल को। यह सच है, जिसने जीवन को देखा, परखा, समझा है, आहुति बनकर स्वयं जलाया, यज्ञ उद्गमित रचना है, कैसे नहीं निर्णयों में वह लायेगा व्यक्तित्व सकल को, दोष नहीं दे सकता कल को। मैने जीवन की गति को अब स्थिर मन से देखा है, महाचित्र पर खिंचती जाती, कर्मक्षेत्र की रेखा है, ये रेखायें सतत बनातीं, योगदान फिर ... more »


वार्ता को देते हैं विराम ……… मिलते हैं अगली वार्ता में, राम राम

बुधवार, 2 जनवरी 2013

हर वर्ष नया ही होता है ... ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

नमस्‍कार , रोजाना अरबों लोगों द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले क्रांतिकारी संचार माध्यम इंटरनेट ने मंगलवार एक जनवरी 2013 को तीस वर्ष पूरे कर लिए। समाचार पत्र टेलीग्राफ के मुताबिक पुरानी नेटवर्किंग प्रणाली को पूरी तरह से हटाकर कंप्यूटर नेटवर्क ने औपचारिक रूप से एक जनवरी 1983 को काम करना शुरू किया था। उस दिन अमेरिका के रक्षा विभाग द्वारा संचालित अर्पानेट नेटवर्क की जगह संपूर्ण तौर पर इंटरनेट प्रोटोकॉल सूट (आईपीएस) संचार प्रणाली के उपयोग को अपना लिया गया। इसी से आगे चलकर वर्ल्ड वाइड वेव (डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू) मार्ग प्रशस्त हुआ। अब चलते हैं आज के खास ब्‍लॉग पोस्‍टों की ओर .......

मेरी डायरी -गुज़रते वक्त का ध्यान कौन रखता है, बस ये घड़ी, और मेरी ये डायरी, एक एक दिन गिनती है, और ३६५ दिन पूरे होते ही कह देती है कि मेरा समय पूरा हुआ, तुम्हारा भी हो...- नववर्ष में आओ हाथ मिलाये साथ मिलकर चल पड़े नव उमंग की चाह में हम बढ़ चले हम चल पड़े । सूरज की रौशनी सा प्रेम भाव ले चले कदम से कदम मिला हम बढ़ चले ह...कहने से कुछ ना होगा अब- मैंनें तुमको शब्‍द दिये, समवेत स्‍वरों में गाना है। कहने से कुछ ना होगा अब, अमली जामा पहनाना है। सुन चुके बहुत, सह चुके बहुत, फि‍र ऐसे वक्‍़त न आने हैं...अइसन बहुरिया चटपट, खटिया ले उठे लटपट - इस छत्‍तीसगढ़ी लोकोक्ति का भावार्थ है आलसी व्‍यक्ति से तत्‍परता की उम्‍मीद नहीं की जा सकती. आइये अब इस लोकोक्ति में प्रयुक्‍त छत्‍तीसगढ़ी शब्‍दों का विश्‍...नारी - *मैं किसी बंधन में बंधना नहीं जानती*** *नदी के बहाव सी रुकना नहीं जानती*** *तेज हवा सी गुजर जाये जो सर्र से*** *मैं हूं वो मन जो ठहरना नहीं जानती।*** *वो स...


- *सु -स्वागतम* * **देखो* *कैसे आ गया* *हौले से* *बिना आहट के..* *ना कोई नानुकुर* *ना कोई नखरा.* *कोई बुलाए ना बुलाए...* *चाहे न चाहे,* *चला आता है* *बिना दस्त...रविकर की कामना, चतुर्दिक प्रेम हर्ष हो-...!!! - रविकर की कामना, चतुर्दिक प्रेम हर्ष हो- नववर्ष की अनन्त शुभकामनाएं : चर्चामंच-1111 ** ** * मंगलमय नव वर्ष हो, फैले धवल उजास ।* *आस पूर्ण होवें सभी, बढ़े ...ज़िंदा कातिल पर भारी पड़ता है एक मुर्दा सन्नाटा - *"ज़िंदा कातिल पर भारी पड़ता है एक मुर्दा सन्नाटा काँप जाता है ज़िंदा आदमी तुम सूली पर चढ़ा सकते हो तो चढ़ा दो उसे ठोक दो कीलें उसके दिल दिमाग हाथ और पैरों पर क़त्...मीठा भी गप्प,कड़वा भी गप्प: क्या दुआ करूँ..... - मीठा भी गप्प,कड़वा भी गप्प: क्या दुआ करूँ.....: नए का आना , पुराने का जाना फ़िर वही तराना , फ़िर वही तराना कुछ सुन लूँ..... कुछ सुना लूँ गीत वही फ़िर स...वो बिटिया ! आज के दौर की रानी लक्ष्मीबाई...खुशदीप - *'बुंदेले हर बोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी, * *खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी...* कवियत्री सुभद्रा कुमारी चौहान की ये पंक्तियां आज के हालात ...


सवारी अपने सामान की आप जिम्मेवार है......अथ रेप पुराण ....भाग 4 - एक मेंडक था ....frog .....वो एक कुए में रहता था ....well में .....यू नो वेल .....एक बड़ा सा गड्ढा होता है ....उसमे... *नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें अश्रुपूरित भी और संस्कारित होने के लिए भी * कविता के कापीराइट के लिये सम्पर्क करें (kushwansh@gmail.com)और शारदा महाराज खच्च खच्च खचा खच बाल काटने लगे बिना पानी मारे.... -भावना को रूप देती प्रकृती ...... -जीवन यात्रा अनवरत ...चलता चल ॥...रे मन ....!! आँख मूँद लेने से निशा नहीं होती ... न ही पलक खोलने से प्रात का दिव्य स्पर्श होता है .... समय के साथ ही हर रा...इस देश में अब कोई दामिनी ना हो ..... - जाते हुए पुराने वर्ष ने इस देश के माथे पर इंसानियत को शर्मसार करने वाला ऐसा बदनुमा दाग लगा दिया , जिसकी टीस वर्षों सालेगी . दादी की बात बार -बार याद आती...हलकट जवानी चिपकाले फ़ेवीकोल से …………ललित शर्मा - ऊंSSS अंSSSSअ अंSSSSअ अंSSSSअ अंगड़ाईयां लेती हूँ मैं जब जोर-जोर से, ऊ आह की आवाज आती है हरोर से, मैं तो चलुं इस कदर, मच जाए रे गदर, होश वाले भी मदहोश आए ...

सारी घड़ियाँ बीत गई -- संजय भास्कर -सारी घड़ियाँ बीत गई अब हर रोज होगी मुलाकातें कुछ तुम कहना कुछ हम कहेंगे अपने दिल की बातें कैसे कैसे सपने देखे कैसे बीती रातें बीता वर्ष 2012 चला गया ...मैं फिर जी उठी हूँ - उम्मीदों की पुडिया हर बार बाँधी मैंने और रख दी आस की टोकरी में ये सोच अब की बार जरूर एक नया रंग भरेगी मगर आस की टोकरी हमेशा सूखती रही और मुझमे एक चेतन...शुभकामना से शुभकर्म की ओर -भारतीय जन जीवन को जब देखते हैं तो यहाँ पर शुभकामनाओं की बड़ी महता नजर आती है । सोने से लेकर जागने तक, शाम से सुबह तक, मृत्यु से जीवन तक, जड़ से चेतन तक, युद...नये साल पर शुभ का मनाये ? - "बच्चन" जी कहते है कि जो* बीत गयी सो बात गयी *मै इससे ज्यादा इत्तेफाक नही रखता बीती बाते इतनी आसानी से भुला नही पाता या यो कहिये कि जेहन से जाती ही नही...हर वर्ष नया ही होता है - हर वर्ष नया ही होता है, नव आशा लेकर आता है. जो भी सोचा न कर पाया, होकर निराश वह जाता है. दे दिया कलंक जाते जाते, वहशी हत्यारों ने तुमको. अब यही सोच वह जाता...


हृदय के सितार पर - रात का दूसरा पहर, अंधकार भरे सन्नाटे के बीच अभिशप्त नारी क्रंदन मनको बोझिल बना देता है कोई कैसे दूर करे चारो ओर छाया यह कहर रात का दूसरा पहर सपनों के पर्वत ...…there was no one left to speak for me. - सच कहूँ तो इस मुद्दे पर मैंने कहीं कुछ नहीं लिखा, कोई पसंद नहीं, कोई टिप्पणी भी नहीं। इससे जुड़ी खबरें भी ठीक से नहीं पढ़ पाया। लोगों ने मुझसे कुछ कहना ...अहंकार - बंजर जमीन है (उत्सव समापन) - *अहंकार - एक बंजर जमीन के समान है . वह प्रकृति से सामंजस्य बैठने में पूर्णतया असफल होता है, प्रकृति भी अहंकार से दूर होती है . प्रकृति सत्य है शिव है सुन...अनायास मिली खुशी - यदि केलेण्डर बदलने के पहले दिन को नव वर्ष की शुरुआत मानी जाए तो मुझे वर्ष 2013 के पहले ही दिन अत्यधिक आह्लादकारी, सारस्वत भेंट मिली है। इस क्षण, दुनिया...इन्साफ का तराजू - अगर *गिरिजेश राव जी* का आह्वान नहीं होता त सायद हम ई पोस्ट नहीं लिख रहे होते. अभी साल २०१२ के जाते-जाते जउन घटना घटा है, उसके बाद नया साल का बधाई अऊर सुभक...

मंगलवार, 1 जनवरी 2013

डायलौग डिलीवरी मत कीजिये 2013 आया...ब्लॉग 4 वार्ता...ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, लो जी 2013 आ ही गया। 2012 के अनुभव बहुत ही कड़ुवे रहे। मंहगाई सुरसा मुख की तरह बढती रही। लेकिन डीजल और पैट्रोल के दाम के साथ गैस सिलेंडर की मुल्य वृद्धि एवं कोटा सिस्टम ने गृहणियों को सरकार के प्रति अपना गुस्सा निकालने हेतु मजबूर कर दिया। 3 सिलेंडरों का कोटा लेने के बाद 4 था सिलेंडर 900 से अधिक मूल्य का लोगों की रसोई में पहुंच चुका है। 2012 ने जाते-जाते जनमानस को झकझोर कर रख दिया। दामिनी के बलात्कार के कारण युवाओं के स्वस्फ़ूर्त आन्दोलन ने सरकार को चिंतन करने के लिए मजबूर कर दिया। इस कड़ुवे घूंट को पीने के बाद 2013 आ ही गया। आशा है कि यह वर्ष सभी के लिए शुभ होगा। सभी जन स्वास्थ्य, समृद्धि एवं शांति के साथ जीवन यापन कर सकेगें। ब्लॉग4वार्ता के सभी पाठकों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं ……… प्रस्तुत हैं कुछ उम्दा चिट्ठों के लिंक …

नव-वर्ष में उगते सूरज की सुनहरी रश्मियाँ - *नव-वर्ष में उगते सूरज की * *सुनहरी रश्मियाँ * * समाहित हो जन-मानस के * *रग रग में * *कर दे समूल नष्ट * *शारीरिक व्याधियों को, * *मानसिक विकृतियो... कुछ न कह कर सब कुछ कह जाना - कुछ कहूँ, उससे पहले यह वीडियो अंश देखिए। यदि पहले देख चुके हैं तो एक बार फिर देखिए, ध्यान से। यह वीडियो अंश मैंने फेस बुक पर, एक ‘फेस बुक मि...शुभकामनाएँ... - *शुभ वंदन करे हम हे गणराज ...* *शुभता ही शुभता ले आओ * *आप हम सबके द्वार...* *मंगलमय हो नववर्ष सभी का* *दो ऐसा वरदान....* *तन मन शुद्ध हो सभी का* *रोगों... 

नया साल मुबारक 2013 - सीजी रेडियो पर सुनिए नववर्ष के आगमन कविताएं पॉडकास्ट में सम्मिलित कवि 1. अटल विहारी बाजपेयी - एक बरस बीत गया 2. हरिवंश राय बच्चन - नव वर्...  रतियावन की चेली … - बेटा! मेरा परिवार बहुत बड़ा है, हम 3 भाई हैं, मंझला भाई के पास खेती -किसानी के साथ ट्रैक्टर भी है। छोटा भाई भी गाँव में खेती किसानी करता है। .2013 - दो हजार बारह गया "तेरह" का  आगाज। मनोकामना पूर्ण हों बनें सभी के काज।। बनें सभी के काज द्वेष ना उपजे उर में। बढ़े प्रेम-सौहार्द ख़ुशी महके घर-घर में।। जनहित की... 

नववर्षागमन - नववर्षागमन आओ खाएं सौगंध, करें तैय्यारी. तैय्यारी नववर्षागमन की. आन पड़ी है आवश्यकता अब तो नव बीज वपन की बदले आचारण अपना, छोड़ दें आदत स्वस्तवन की करें लहू... मिट्टी - मिट्टी है तो मिट्टी होगी सूखी होगी गीली होगी ठंडी होगी तपती होगी कुछ खट्टी कुछ मीठी होगी मिट्टी है तो मिट्टी होगी। मिट्टी को आकार दिया तो रंगों का संसार..नव वर्ष कैसा हो - आप सब को नव वर्ष के लिए हार्दिक शुभकामनाएं | प्रस्तुत है एक रचना :- उडती चिंगारी ,सुलगती आग बढता जन आक्रोश फिर भी मतलब के लिए अपने हाथ सेकते लोग सा... 

नए वर्ष की दास्तान - नए वर्ष की दास्तान कैसे कहें शुभ हो नव वर्ष जब की बिछी है सामने जाते हुए वर्ष की खून से लथपथ देह पिछले वर्ष भी तो यही कहा था पर नहीं थमा आतंक रुक...  .नूतन वर्ष की वधाईयां ! - *सच कहूं तो इस बार इस नववर्ष की बेला पर मन में कोई ख़ास उत्साह नहीं है, फिर भी जीवन रूपी कारवां उम्मीदों के सहारे ही आगे बढ़ता है इसलिए आप सभी को नूत...नव-वर्ष संकल्प - चलो एक साल और चल बसा. जाते जाते बहुत कड़वी यादें छोड़ गया. पूरे साल भर आंदोलनों, अव्यवस्थाओं व अनाचारों का घुन्ध छाया रहा. इसमें इस बेचारे साल का क्या कसू...

रोज़मर्रा की छोटी-छोटी बातों में...... - रोज़मर्रा की छोटी-छोटी बातों में जब ढूँढने लगी खुशियाँ तो लगा...... खुशियों की कोई कीमत नहीं होती, रद्दी से मिले एक सौ अस्सी रूपये में खुशी होती है, मटर पच्...  ओस में शब्द भी कुछ नम से हो जाते हैं - "नींद थक जाती है मेरी पलकों पर जगते -जगते, ओस में शब्द भी कुछ नम से हो जाते हैं धूप महकती है मेरी क्यारी के फूलों की फुनगी पर सुबह की चाय जब पीता हूँ मैं तो ...डायलौग डिलीवरी मत कीजिये प्रधानमन्त्री जी - "गैंगरेप पीडिता की मौत व्यर्थ नहीं जाने देंगे" --मनमोहन सिंह -------------------------------------------- अब क्या इसको भी कैश करेंगे ? सियासत करेंगे मौत पर भ... 

या साल मनाने का एक तरीका यह भी - हमारे मित्र मिश्रा जी, जो कि धार्मिक प्रवृति के व्यक्ति हैं, ने हमसे पूछा, "बताइये तो सही कि आप नया साल कैसे मनायेंगे?" हमने कहा, "मिश्रा जी, जीवन में ऐसे ..नरभक्षी जिस वाहन में थे वही उनकी चलती फिरती टेरिटरी थी! - किसी एक की पीड़ा जब पूरी कायनात की पीड़ा बन जाय ,करोड़ों आँखें नम हो उठें ,लगे कि कोई अपना ही बीच से उठ चला गया हो,जन जन के मन संवेदित हो उठे हों और ह्र... सन दो हज़ार तेरह में ........ - *सन दो हज़ार तेरह में ........ **सजा मिले ........ गुंडों को, मवाली को, काली पट्टी वाली गाड़ी को, अफज़ल गुरु को, कांडा को, कलमाड़ी को, जिसमें तिनका मिले हर उस... 

 

वार्ता को देते हैं विराम ……… पुन: सभी मित्रों को नव वर्ष की बधाईयाँ। 

सोमवार, 31 दिसंबर 2012

चला-चली की वेला में कुछ यादें ...........ब्लॉग4वार्ता ....... ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, वर्ष 2012 का अंतिम दिन आ चुका है और दरवाजे पर 2013 ताल ठोंक रहा है। बीते वर्ष की खट्टी-मिट्ठी यादें साथ थी पर जाते-जाते यह कड़ुवी यादें भी दे गया। दिल्ली की दुर्घटना इसी के खाते में गिनी जाएगी। मीठी यादें मित्र मिलन की, खट्टी यादें बिछड़न की। बस यही चलता रहता है दुनिया में। ब्लॉग जगत में बहुत कुछ लिखा गया इस वर्ष। कुछ ब्लॉगर साथियों को हमने खोया भी तो कुछ नए साथियों ने भी ब्लॉग जगत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस वर्ष का परिकल्पना सम्मान भी यादगार रहा। खास कर ब्लॉग जगत में वह रौनक नहीं रही जो दो वर्ष पूर्व रहती थी। धुंरधर कहाने वालों के टेंट उखड़ गए और कैंप फ़ेसबुक पर शिफ़्ट हो गए। इस वर्ष ब्लॉग4वार्ता पर 319 पोस्ट प्रकाशित हुई। अर्थात कुछ दिनों को छोड़ दें तो वार्ता की  निरंतरता बनी रही। 10 हजार टिप्पणियों का आंकड़ा भी वार्ता ने पार किया।
भूली बिसरी यादें (पहचान लीजिये)

जब चिट्ठों की चर्चा करने में मेरे पास समय एवं साधन की कभी थी तब निरंतर वार्ता लिखने का उल्लेखनीय कार्य संध्या शर्मा जी ने किया, वे साधुवाद की पात्र हैं, एवं वार्तादल के सभी मित्रों का हार्दिक अभिनंदन है। वार्ता के प्रारंभ से जुड़ी हुई संगीतापुरी जी एकमात्र ऐसी साथी हैं जो मेरे साथ वार्ता पर अभी तक कायम हैं। उनका साथ एवं संबंल नहीं होता तो शायद वार्ता को बीच में विराम लेना पड़ता। संगीता स्वरुप जी की उपरस्थिति भी वार्ता पर लगातार बनी हुई है चर्चाकार एवं पाठक के रुप में। गिरिश बिल्लौरे जी दंडक अरण्य में होने के कारण वार्ता से विमुख हैं और केवल राम जी का शोध प्रबंध वार्ता में बाधा है। विश्वास है कि वार्ता अहर्निश जारी रहेगी। यहाँ जितने वार्ताकार हैं सभी सक्षम है। तभी हम 2012 में 319 पोस्ट के आंकड़े तक पहुचने में सफ़ल हुए। सभी पाठकों को ढेर सारी शुभकामनाएं।
ललित शर्मा,  आदित्य सिंह, सत्येन्द्र शर्मा, संध्या शर्मा 

अकलतरा में बाबुसाहब(रमाकांत सिंह) से मुलाकात के पश्चात नागपुर में आयोजित सम्मान समारोह में अंजु चौधरी जी एवं डॉ अनिता कपुर से मुलाकात हुई। इसके पश्चात भोपाल सेमिनार में अगस्त में ब्लॉग जगत के धुंरधरों से मुलाकात हुई, सुरेश चिपलुनकर, शिखा वार्ष्नेय, चंडीदत्त शुक्ला, अनिल सौमित्र, लोकेन्द्र सिंह, लखेश चंद्रवंशी, संजीव सिन्हा, जयराम विपल्व, डॉ महेश परिमल, संजय बेगानी, पंकज झा, हर्षवर्धन त्रिपाठी, रवि रतलामी जी सहित अन्य ब्लॉगर एवं पत्रकार मित्रों से भेंट हुई। इस अवसर पर शिखा ने स्मृतियों में रुस की एक प्रति भेंट की। वर्ष भर दिल्ली दूर रही, लेकिन वर्षांत तक रतनसिंह जी के साथ भानगढ की यात्रा के पश्चात दिल्ली पहुंच ही गए जहाँ पीके शर्मा जी से ही भेंट हुई।
डॉ अनीता कपूर, संध्या शर्मा, ललित शर्मा, अंजू चौधरी नागपुर में 

2012 में हमारे साथ एक उपलब्धि भी जुड़ी। संज्ञा टंडन जी के साथ हमने सीजी रेडियो प्रारंभ किया। अभी यह प्रारंभिक अवस्था में है। कुछ दिनों के पश्चात इसे वास्तविक स्वरुप प्राप्त होगा तथा कार्यक्रम 24x7 दिन चला करेंगे। ओनलाईन रेडियो चलाना भी श्रम साध्य कार्य है। इसके कार्यक्रम की उम्र भी ब्लॉग पोस्ट के इतनी ही है। अधिक से 24 घंटे और फ़िर इसके पश्चात अगले कार्यक्रम की आवश्यकता हो जाती है। सीजी रेडियो से वैश्विक तौर पर हिन्दी प्रेमी जुड़ रहे हैं। हम इसे छत्तीसगढ से संचालित कर रहे हैं इसलिए सीजी रेडियो नाम का चयन किया गया। मांग होने पर अन्य भाषाओं के कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए जा सकते हैं। प्रथमत: छत्तीसगढी के साथ बुंदेलखंडी को जोड़ने की मांग आ रही है। शीघ्र ही देशज भाषाओं के कार्यक्रमों को महत्व दिया जाएगा।
जाट देवता, जाट राम, संगीता पूरी, केवल राम, ललित शर्मा, अल्पना 

वर्षांत आते-आते जबलैपुर में फ़ुरसतिया संग मुलाकात हुई। गिरीश बिल्लौरे ब्लॉगर संकलन कर्ता थे, विजय तिवारी, बवाल भाई, विजय श्रीवास्तव जी, संध्या शर्मा जी, सत्येन्द्र शर्मा जी, बबलु संग जबलैपुर का आनंद लिया। त्रिपुर सुंदरी माता के दर्शन कर धन्य हुए। जबलपुर से लौटने के पश्चात कुछ फ़ेसबुक मित्रों से सरगुजा में भेंट हुई। इस तरह वर्ष 2012 बीत गया। जिन मित्रों ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रुप से सहयोग दिया और अपनी संवेदनाएं  हमारे साथ रखी। उनका हम हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं एवं धन्यवाद देते हैं। आगे भी इसी तरह के सहयोग की अपेक्षा करते हैं। साथ ही निवेदन है कि अपनी रचनाएं सीजी रेडियो के लिए भेजें। सीजी रेडियो के योग्य पाए जाने पर उनका प्रसारण किया जाएगा। 

रविवार, 30 दिसंबर 2012

काला शनिवार .. हम रहे इंसान कितना .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

आप सबों को संगीता पुरी का नमस्‍कार ,सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में दम तोड़ने वाली दिल्ली दुष्कर्म पीड़िता के शव को लेकर विशेष विमान भारत के लिए रवाना हो चुका है। शव वाहन से उसके शव को हवाई अड्डा लाया गया, जहां से एयर इंडिया के एक चार्टर्ड विमान से शव को भारत लाया जा रहा है। इलाज के लिए 23 साल की लड़की को भारत से यहां लाया गया था। डॉक्टरों की कड़ी मेहनत के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका और शनिवार तड़के 2 बजकर 15 मिनट पर उसकी मौत हो गई। इस घटना से पूरे भारतवर्ष में शोक की लहर है , ब्‍लोगरों ने आज भी इस विषय पर लिखना जारी रखा है .....

काला शनिवार - आज इस साल ने जाते जाते, मुँह पे कालिख सी पोत डाली है. सर झुकाए हैं, शर्मसार हैं हम!! मुझे माफ़ करना कि मैं खुश हूँ तुम्हारे चले जाने से... - *पिछले बारह दिन अजीब से थे, दुःख अफ़सोस, गुस्सा... बस यूँ ही लिखता रहा फेसबुक पर, कुछ शब्दों को यहाँ सहेज कर रख ले रहा हूँ ताकि ताउम्र याद रहे ये आज का काल...ख़ामोशी की गूँज ऐसी होनी चाहिए - क्या कहूं सत्ता बीमार है या मानसिकता इंसानियत मर गयी या शर्मसार है मौत तो आनी है इक दिन मगर मौत से पहले हुयी मौत से कौन कौन शर्मसार है ? क्योंकि न इ...' नारी ' होने की सजा - [image: nasreen_victim_honor_killing.jpg] वेदना की सीमाओं से परे एक दबी चीख सुनी क्या ' निर्भया ' खामोश है अब क्या कहे ? कह चुकी सब यातनाओं से परे ...

बस ये आक्रोश....ये संवेदनशीलता जाया न होने पाए - हमारा देश आक्रोश, अविश्वास, बेबसी की आंच से सुलग रहा है। व्यवस्था के प्रति ये क्रोध हर तबके के लोगों में है पर युवाओं में ज्यादा मुखर है। सही भी है, द...दामिनी कि मौत समाज और सरकारों को शर्मसार करने के लिए काफी होनी चाहिए !! - कई दिनों से मौत से लड़ाई लड़ने के बाद आखिर जीने की इच्छा दिल में लिए दामिनी इस दुनिया से रुखसत हो गयी लेकिन उसकी मौत समाज और सरकारों के सामने सवाल छोड़ गयी...एक बेटी के जाने के बाद - साहसी बेटी के जाने के बाद अब सरकार की आलोचना करना वक्त बर्बाद करना है। वैसे भी आलोचना उसकी की जाती है जिसमें सुधरने की संभावना हो। सरकारें आसमान से नहीं आत...वधाई तुम्हे देशवासियों ! - *देखने में आया है कि * * दामिनी पर हुए जुल्म * *और उसकी मौत पर * *आंसू बहाने ही सही * *किन्तु शर्म इस देश में * *पुन: लौट आई है। * *बस, अब इतनी सी * * गुजा...'दामिनी' - 'दामिनी' 'तुम' चली गयी, जाना ही था तुम्हे, रुक भी जाती तो क्या? कहाँ जी पाती 'तुम' अपनी जिंदगी 'फिर से' , कहाँ से लाती जीने की वही चाह, वही उमंग, और...

# चिता की आग # - तुझको अग्नि के हवाले कर के .... मैं जड़- सी हो गई हूँ ..... कभी अपनी छाती का लहू पिलाया था मैने .. तेरी वो नटखट आँखें .. वो चेहरे का भोलापन . वो प्या...प्रीतनिया.... संध्या शर्मा -गीत नया क्या गाऊं साथी छेड़ूँ क्या वीणा पर तान क्रंदन उर की हर धडकन में पीड़ा होती प्रबल महान छूटी लय,ताल बिखरी है बिसरा सकल सुरों का भान मेरे मन के राग...मोमबत्तियाँ न जलाएं..खुद बने मशाल - 13 दिनों के कष्ट को सहने के बाद अन्ततः उस पीड़ित लड़की को सभी कष्टों से मुक्ति मिल गई। आज इस दुखद समाचार को सुनकर देशव्यापी शोक की लहर है। राजनेत...देश के ‘‘लोकतंत्र’’ में क्या ‘‘राजनीतिक तंत्र’’ ‘‘अप्रासंगिक’’ हो गया है? -*राजीव खण्डेलवाल:* Photo from:freethoughtblogs.com हमारा देश भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है जहां लोकतंत्र को मजबू...

दामिनी के नाम - दामिनी ! तुम नेपथ्य में चली गयी, करोड़ों आँखों को नम कर गयी. देखो, मरना तो एक दिन सभी को है मगर जिस तरह तुमको जाना पड़ा उस पर पूरा देश शर्मिन्दा और घायल..." रह गयीं अब दुनिया में " नाम " की खुशियाँ , तेरे मेरे किस " काम " की खुशियाँ.....?? - * प्यारे दोस्तों,नमस्कार! आज मैं बहुत उदास हूँ !! जिंदगी साथ छोड़ गयी, मौत ने गले लगा लिया उसको , जो " जीना " चाहती थी !! लेकिन प्रश्न ये उठता है कि...खुद को आज़माने का... -हमारे दामनों पर खून के छींटे बहुत से हैं... है आया वक़्त अब अपने ज़मीरों को जगाने का... ये माँ का दूध, राखी हर बहन की हो नहीं ज़ाया... ये मौका है खुदी से आज...हम रहे इन्सान कितना......- हम रहे इन्सान कितना, कह नहीं सकते- गिर सकता है इन्सान कितना, कह नहीं सकते- मिट गयी है लक्षमण रेखा कायम कबूल थी बिक सकता है ईमान कितना, कह नह...

स्विफ्टकी ऍण्ड्रॉइड कीबोर्ड ३.१ में हिन्दी, हिंग्लिश समर्थन शामिल - स्विफ्टकी ऍण्ड्रॉइड स्मार्टफोन तथा टैबलेट के लिये एक प्रसिद्ध और लोकप्रिय कीबोर्ड ऍप्लिकेशन है। जैसे-जैसे आप टाइप करते जाते हैं यह सीखती जाती है ताकि आपको ...यार्ड में लेखन - वरिष्ठ अधिकारी का निरीक्षण है, यार्ड में नयी पिट लाइनों का निर्माण कार्य चल रहा है, पिट लाइनों का उपयोग यात्री ट्रेनों के नियमित रख रखाव के लिये किया जात...गाँव-शहर हर जगह ठण्डो रे ठण्डो! - सुदूर पहाड़ों पर बर्फवारी के चलते वहाँ से आने वाली सर्द हवाओं से जब देश के अधिकांश हिस्से ठिठुर रहे हों, ऐसे में वे अपनी हिमपूरित पहाड़ी हवाएं अपने शहर मे...अड़हा बईद परान घाती - यह कहावत हिन्दी कहावत नीम हकीम खतरे जान का समानार्थी है, जिसका अभिप्राय है : अनुभवहीन व्यक्ति के हाथों काम बिगड़ सकता है. अब आईये इस छत्तीसगढ़ी मुहावरे में..लवकुश का गर्भ-ज्ञान - माता, रोओ मत, इस सुनसान जंगल में तुम्हारे असहाय-क्रन्दन की आवाज सुनकर न मेरे पिता राम, नाही चाचा लक्ष्मण आएंगे देखो माता देखो कैसे बदल गए राजधर्म के अर्थ कुछ...




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शनिवार, 29 दिसंबर 2012

क्या करोगे नहीं लिखेंगे रिपोर्ट...ब्लॉग 4 वार्ता... संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार....कैसी सर्दी आई है ? .धुंध कोहरे की जमी दिन भर धूप छुपी शरमायी है मफ़लर, टोपी, शॉल और स्वेटर निकला कंबल, रज़ाई है देखो सर्दी आई है .... हीटर, गीजर दौढ़ता मीटर सुस्ती मे अब चलता फ्रीजर हाट मे सस्ती मिलती गाज़र हलवे की रुत आई है देखो सर्दी आई है ..... मूँगफली के दाने टूटते रेवड़ी- गज़क के पैकेट खुलते चाय -कॉफी की चुस्की लेते गुड़ देख चीनी लजाई है देखो सर्दी आई है ...... सिर से पैर तक खुद को ढ़क कर मौसम के अमृत को चख कर बाहर जब नज़र घुमाई है नंगे जिस्मों पर ओस की बूंदें मुझे कभी समझ न आई है कैसी सर्दी आई है ? प्रस्तुत है आज की वार्ता...

तुझे कैसे भूल गई ! - भुला दिया ! रात भर करवटें बदलने का फैसला मैंने खुद किया था, तो किसी का क्या कुसूर :-( गूगल में मिति का नाम ढूँढा ... फेसबुक पर खोज की यहाँ तक ऑरकुट ... घर - बहुत कमज़ोर दीवारें इस घर की, दबा लेता अन्दर दर्द की सिसकियाँ, कहीं आवाज़ से भरभरा कर गिर न जायें...आतुर हैं---भरने को ड्योढी पर मेरे - जाते हुए वक्त को(हर रोज)पीछे छोड कर उन, असीमित--- घाटिओं के उस पार चलती रहती हूं------- कल के सिंदूरी-सूरज का, थामने हाथ एक सूरज नहीं ह... 

तिरे मयखाने में ....... वह जानेगा क्या मजा है पीने पिलाने में, जो हो आया है इक बार तिरे मयखाने में। दुश्मनों को भी गले मिलते देखा हमने, दीवानों की महफ़िल लगी तिरे मयखाने में। ...नजरबन्द ... - आजकल शब्दों की हिम्मत भी हवा देखकर बढ़ सी गयी है ... न जाने क्यूँ वे अपना आक्रोश मुझपर ही अजीब तरह से व्यक्त कर रहे हैं मैं निकल जाने को भी कहूँ तो कुछ बुदब... चाहत - हम चाहते हैं तू जाड़े में चाय के गर्म कुल्हड़ की तरह मिले होठों को छुए पीते रहें तुझे चुस्कियों में, गर्मी में बर्फ के गोले की तरह नाचती रहे हमारे ...

क्या करोगे नहीं लिखेंगे रिपोर्ट... - वर्दी वाला गुण्डा, पुलिस को कोई यूं ही नहीं कहता ! छत्तीसगढ़ में तो कम से कम हर वर्दी वाला अपनी मर्जी का मालिक है । उसे लगेगा कि रिपोर्ट लिखी जाय तो लिखा जाय... पहले नए साल की शुभकामनाएँ देंगे और फिर खूब गालियाँ........Happy New Year.........!!???? - उस रात मैं बहुत व्याकुल था। वैसे यहाँ व्याकुल शब्द मुझे कुछ जम नहीं रहा है क्योंकि इसका प्रयोग अक्सर कृष्ण के वियोग में गोप गोपियों के लिए किया जाता है कि... नए साल में फिर से करेंगे मिलकर नए घोटाले----- हम भारत वाले----हम भारत वाले-------! - साल ख़त्म होने को आया, दुनिया बहुत बोल चुकी। यूं समझिये कि साल भर बोलती रही इसलिए अब मैं क्या बोलू, और सिर्फ मेरे बोलने भर से होगा भी क्या ? वैसे भी मुहंफ...   
  
बलात्कारियों को सरकारी प्रस्ताव - आदरणीय बलात्कारियों पहले तो आप हैरान मत होना कि हम कैसे आपको आदरणीय कह रहे हैं। बलात्कार की घटना पर चहुंओर कड़े कदम की मांग पर घिरी उपीए सरकार के मुखिया...अब बलात्‍कारी भी होंगे ऑन लाइन ! - *#उलटी चप्‍पल* अगर आप बलात्‍कारियों से नरफत करते हैं, और आप उनकी सुपारी देना चाहते हैं, तो आपके लिए एक अच्‍छी ख़बर है कि सरकार बहुत जल्‍द बलात्‍कारियों की ...बलात्‍कारियों की गुप्‍त मीटिंग - *//व्‍यंग्‍य-प्रमोद ताम्‍बट//* अभी-अभी खबर मिली है कि दिल्‍ली में वरिष्‍ठ बलात्‍कारियों की एक गुप्‍त मीटिंग हुई है। इस क्‍लोज़ मीटिंग में बड़ी संख्‍या में ... 

ईश्वर - अस्तित्व - यदि यह सच है कि ईश्वर ही सर्वत्र, प्रत्येक स्थिति में, कर्म में, अकर्म में, महाशक्तिमान बन आनन्द-सुख, दुःख-व्यवथा, अन्तस्-मर्म में कण-कण में व्याप्त है फिर ह...निरमोहिया राम की सीता-कथा - चन्द्रिका प्रसाद चन्द्र लोक की कसौटी पर राम की मर्यादा भारतीय लोकमानस, देवत्व से अधिक मनुष्यत्व को महत्व देता है। लोक कथाओं, लोक गीतों में राम, कृष्ण, शिव ... शिरड़ी : बाबा के वीआईपी ... - *बात* बड़े दिन यानि इसी 25 दिसंबर की है। बच्चों के स्कूल की छुट्टी थी, मुझे भी आफिस से छुट्टी मिल गई, सोचा चलो बड़े दिन पर कुछ बड़ा करते हैं, शिरड़ी चल क...

 लेजा अपना चाँद- - *लेजा अपना चाँद, * *दे जा मेरा अँधेरा .....* *कम से कम नजर* *नहीं आएगा **वो चेहरा ...* *जो हमसाया * *मेरीदुनियां का * *सरमाया था...| * *जिसमें लगे दाग* *म...तुम्हारा साथ .....तुम्हारे साथ चला नहीं जाता नहीं सहन होती अब मुझसे तुम्हारी बेरुखी ....... ये बेरुखी मुझे लहुलुहान किये दे रही है , कब तक पुकारूँ तुम्हें , जब हो मेरी हर पुकार ही अनसुनी ... नहीं पुकारुगी तुम्हे ना ही मुड़ ,थाम कर कदम देखूंगी , तुम्हारी तरफ कातर निगाहों से ....चाहत हम चाहते हैं तू जाड़े में चाय के गर्म कुल्हड़ की तरह मिले होठों को छुए पीते रहें तुझे चुस्कियों में, गर्मी में बर्फ के गोले की तरह नाचती रहे हमारे लपलपाते जीभ के चारों ओर लट्टू की तरह, सावन में बारिष के बूदों की तरह झमाझम बरसे भीगते रहें देर तक और तू चाहती है...

दीजिये इजाज़त नमस्कार........

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