बुधवार, 2 जनवरी 2013

हर वर्ष नया ही होता है ... ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

नमस्‍कार , रोजाना अरबों लोगों द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले क्रांतिकारी संचार माध्यम इंटरनेट ने मंगलवार एक जनवरी 2013 को तीस वर्ष पूरे कर लिए। समाचार पत्र टेलीग्राफ के मुताबिक पुरानी नेटवर्किंग प्रणाली को पूरी तरह से हटाकर कंप्यूटर नेटवर्क ने औपचारिक रूप से एक जनवरी 1983 को काम करना शुरू किया था। उस दिन अमेरिका के रक्षा विभाग द्वारा संचालित अर्पानेट नेटवर्क की जगह संपूर्ण तौर पर इंटरनेट प्रोटोकॉल सूट (आईपीएस) संचार प्रणाली के उपयोग को अपना लिया गया। इसी से आगे चलकर वर्ल्ड वाइड वेव (डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू) मार्ग प्रशस्त हुआ। अब चलते हैं आज के खास ब्‍लॉग पोस्‍टों की ओर .......

मेरी डायरी -गुज़रते वक्त का ध्यान कौन रखता है, बस ये घड़ी, और मेरी ये डायरी, एक एक दिन गिनती है, और ३६५ दिन पूरे होते ही कह देती है कि मेरा समय पूरा हुआ, तुम्हारा भी हो...- नववर्ष में आओ हाथ मिलाये साथ मिलकर चल पड़े नव उमंग की चाह में हम बढ़ चले हम चल पड़े । सूरज की रौशनी सा प्रेम भाव ले चले कदम से कदम मिला हम बढ़ चले ह...कहने से कुछ ना होगा अब- मैंनें तुमको शब्‍द दिये, समवेत स्‍वरों में गाना है। कहने से कुछ ना होगा अब, अमली जामा पहनाना है। सुन चुके बहुत, सह चुके बहुत, फि‍र ऐसे वक्‍़त न आने हैं...अइसन बहुरिया चटपट, खटिया ले उठे लटपट - इस छत्‍तीसगढ़ी लोकोक्ति का भावार्थ है आलसी व्‍यक्ति से तत्‍परता की उम्‍मीद नहीं की जा सकती. आइये अब इस लोकोक्ति में प्रयुक्‍त छत्‍तीसगढ़ी शब्‍दों का विश्‍...नारी - *मैं किसी बंधन में बंधना नहीं जानती*** *नदी के बहाव सी रुकना नहीं जानती*** *तेज हवा सी गुजर जाये जो सर्र से*** *मैं हूं वो मन जो ठहरना नहीं जानती।*** *वो स...


- *सु -स्वागतम* * **देखो* *कैसे आ गया* *हौले से* *बिना आहट के..* *ना कोई नानुकुर* *ना कोई नखरा.* *कोई बुलाए ना बुलाए...* *चाहे न चाहे,* *चला आता है* *बिना दस्त...रविकर की कामना, चतुर्दिक प्रेम हर्ष हो-...!!! - रविकर की कामना, चतुर्दिक प्रेम हर्ष हो- नववर्ष की अनन्त शुभकामनाएं : चर्चामंच-1111 ** ** * मंगलमय नव वर्ष हो, फैले धवल उजास ।* *आस पूर्ण होवें सभी, बढ़े ...ज़िंदा कातिल पर भारी पड़ता है एक मुर्दा सन्नाटा - *"ज़िंदा कातिल पर भारी पड़ता है एक मुर्दा सन्नाटा काँप जाता है ज़िंदा आदमी तुम सूली पर चढ़ा सकते हो तो चढ़ा दो उसे ठोक दो कीलें उसके दिल दिमाग हाथ और पैरों पर क़त्...मीठा भी गप्प,कड़वा भी गप्प: क्या दुआ करूँ..... - मीठा भी गप्प,कड़वा भी गप्प: क्या दुआ करूँ.....: नए का आना , पुराने का जाना फ़िर वही तराना , फ़िर वही तराना कुछ सुन लूँ..... कुछ सुना लूँ गीत वही फ़िर स...वो बिटिया ! आज के दौर की रानी लक्ष्मीबाई...खुशदीप - *'बुंदेले हर बोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी, * *खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी...* कवियत्री सुभद्रा कुमारी चौहान की ये पंक्तियां आज के हालात ...


सवारी अपने सामान की आप जिम्मेवार है......अथ रेप पुराण ....भाग 4 - एक मेंडक था ....frog .....वो एक कुए में रहता था ....well में .....यू नो वेल .....एक बड़ा सा गड्ढा होता है ....उसमे... *नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें अश्रुपूरित भी और संस्कारित होने के लिए भी * कविता के कापीराइट के लिये सम्पर्क करें (kushwansh@gmail.com)और शारदा महाराज खच्च खच्च खचा खच बाल काटने लगे बिना पानी मारे.... -भावना को रूप देती प्रकृती ...... -जीवन यात्रा अनवरत ...चलता चल ॥...रे मन ....!! आँख मूँद लेने से निशा नहीं होती ... न ही पलक खोलने से प्रात का दिव्य स्पर्श होता है .... समय के साथ ही हर रा...इस देश में अब कोई दामिनी ना हो ..... - जाते हुए पुराने वर्ष ने इस देश के माथे पर इंसानियत को शर्मसार करने वाला ऐसा बदनुमा दाग लगा दिया , जिसकी टीस वर्षों सालेगी . दादी की बात बार -बार याद आती...हलकट जवानी चिपकाले फ़ेवीकोल से …………ललित शर्मा - ऊंSSS अंSSSSअ अंSSSSअ अंSSSSअ अंगड़ाईयां लेती हूँ मैं जब जोर-जोर से, ऊ आह की आवाज आती है हरोर से, मैं तो चलुं इस कदर, मच जाए रे गदर, होश वाले भी मदहोश आए ...

सारी घड़ियाँ बीत गई -- संजय भास्कर -सारी घड़ियाँ बीत गई अब हर रोज होगी मुलाकातें कुछ तुम कहना कुछ हम कहेंगे अपने दिल की बातें कैसे कैसे सपने देखे कैसे बीती रातें बीता वर्ष 2012 चला गया ...मैं फिर जी उठी हूँ - उम्मीदों की पुडिया हर बार बाँधी मैंने और रख दी आस की टोकरी में ये सोच अब की बार जरूर एक नया रंग भरेगी मगर आस की टोकरी हमेशा सूखती रही और मुझमे एक चेतन...शुभकामना से शुभकर्म की ओर -भारतीय जन जीवन को जब देखते हैं तो यहाँ पर शुभकामनाओं की बड़ी महता नजर आती है । सोने से लेकर जागने तक, शाम से सुबह तक, मृत्यु से जीवन तक, जड़ से चेतन तक, युद...नये साल पर शुभ का मनाये ? - "बच्चन" जी कहते है कि जो* बीत गयी सो बात गयी *मै इससे ज्यादा इत्तेफाक नही रखता बीती बाते इतनी आसानी से भुला नही पाता या यो कहिये कि जेहन से जाती ही नही...हर वर्ष नया ही होता है - हर वर्ष नया ही होता है, नव आशा लेकर आता है. जो भी सोचा न कर पाया, होकर निराश वह जाता है. दे दिया कलंक जाते जाते, वहशी हत्यारों ने तुमको. अब यही सोच वह जाता...


हृदय के सितार पर - रात का दूसरा पहर, अंधकार भरे सन्नाटे के बीच अभिशप्त नारी क्रंदन मनको बोझिल बना देता है कोई कैसे दूर करे चारो ओर छाया यह कहर रात का दूसरा पहर सपनों के पर्वत ...…there was no one left to speak for me. - सच कहूँ तो इस मुद्दे पर मैंने कहीं कुछ नहीं लिखा, कोई पसंद नहीं, कोई टिप्पणी भी नहीं। इससे जुड़ी खबरें भी ठीक से नहीं पढ़ पाया। लोगों ने मुझसे कुछ कहना ...अहंकार - बंजर जमीन है (उत्सव समापन) - *अहंकार - एक बंजर जमीन के समान है . वह प्रकृति से सामंजस्य बैठने में पूर्णतया असफल होता है, प्रकृति भी अहंकार से दूर होती है . प्रकृति सत्य है शिव है सुन...अनायास मिली खुशी - यदि केलेण्डर बदलने के पहले दिन को नव वर्ष की शुरुआत मानी जाए तो मुझे वर्ष 2013 के पहले ही दिन अत्यधिक आह्लादकारी, सारस्वत भेंट मिली है। इस क्षण, दुनिया...इन्साफ का तराजू - अगर *गिरिजेश राव जी* का आह्वान नहीं होता त सायद हम ई पोस्ट नहीं लिख रहे होते. अभी साल २०१२ के जाते-जाते जउन घटना घटा है, उसके बाद नया साल का बधाई अऊर सुभक...

4 टिप्पणियाँ:

बहुत अच्छे लिंक मिले...बढ़िया वार्ता के लिए आभार आपका

बहुत सुन्दर लिंक संजोये हैं।

सुन्दर और पठनीय सूत्र..

बहुत सुन्दर ,........................

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