शनिवार, 5 जनवरी 2013

ना ताई ...इब और ना ……… ब्लॉग4वार्ता ……… ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, फ़ेसबुक को लोकप्रिय करने में दुनिया भर के निठल्लों का बड़ा हाथ है। अब इसे सोशल मीडिया का नाम दिया जा रहा है। सूत न कपास जुलाहों में लट्ठमलट्ठ, बस दिन भर गाल बजाए जाओ, कीबोर्ड खटखटाए जाओ। कौन सा इसमें तेल जलना है। किसी बात पर बहस हो तो समझ आता है कि अपना विचार रखना जरुरी है। बिना बात के बहस हो तो क्या कहा जाए। कई महारथी तो ऐसे हैं जो रात को दो बजे सोते समय  ही अगली बहस का मुद्दा तैयार सोते हैं और सुबह उठते ही बिना मुंह कान धोए काड़ी करने वाली दो लाईन पोस्ट कर चाय का कप हाथ में धरे-धरे प्रयोगशाला में प्रवेश करते हैं अगली पोस्ट के लिए मुद्दा तैयार करने के लिए। अब इनकी मर्जी जो चाहे करें…… हम चलते हैं आज की ब्लॉग4वार्ता पर ……… 


''ना ताई ...इब और ना ताई ने घर में घुसते ही रो रोकर हंगामा खड़ा कर दिया -''हाय ...हाय ...मेरा बबलू ...दूसरी बार भी लौंडिया ही जनी इसकी बहू ने ...क्या भाग ले के आई यो बहू ...हे भगवन !! ...''. बबलू अन्दर कमरे से हँसता हुआ निकलकर आया और आते ही ताई के चरण-स्पर्श किये और आँगन में पड़ी खाट की ओर इशारा करते बोला -''ताई गम न मान मेरी दोनों बच्चियां ही कुल का नाम रोशन करेंगी .ये बता तुझे कोई तकलीफ तो न हुई सफ़र में ?'' ताई कड़कते हुए बोली -''अरे हट मरे ...मेरी तकलीफ की पूछे है !....तकलीफ तो तेरा फून आते ही ... more »


वो न सुधरे तो तुम सुधर जाओ आज की पोस्ट की शुरुआत एक चुटकुले से .......भगवान् ने जब आदमी को बनाया तो बड़ा खुश हुआ .....बहुत देर तक उसे निहारता रहा .....उसे अपने ऊपर गर्व हुआ .........उसने खुद अपनी पीठ ठोक ली ....वाह , क्या नायाब चीज़ बनाई है ........फिर वो आदमी से बोला .....बेटा , मैं तुम्हें धरती पे भज रहा हूँ ......मैंने तुम्हें दो नायाब चीज़ें दी है ......पहला दिमाग ......इस से तुम सारी धरती पे राज करोगे ....रोज़ नए नए आविष्कार करोगे .....और धरती को बदल के रख दोगे ......और दूसरा ये penis .........इस से तुम अपनी सन्ततियां पैदा करोगे और अपने जैसे लाखों smart और ...more »

दामिनी के बहाने.... कहाँ हैं हम ?आज के भारतीय समाज के लिये न तो स्त्री का शोषण, उनकी स्वतंत्र चेतना का दमन कोई नया विषय है और न ही स्त्रियों द्वारा किया जाने वाला यह विरोध जिसे मैं भारत में नवजागरण के रूप में देखता हूँ । यह एक ऐसी लंबी लड़ाई है जो अब धीरे-धीरे अपने निर्णायक दौर की तरफ बढ़ रही है और निर्णायक दौर की तरफ बढ़ने का एक संकेत भी अगर मिल सका है तो उसकी बहुत बड़ी वजह है १६ दिसंबर को दिल्ली में हुआ वह भयानक हादसा जो सिर्फ़ बलात्कार या सिर्फ़ नृशंस हत्या भर कह देने से कहीं ज्यादा स्त्री की अस्मिता पर अब तक का बीभत्सतम हमला है । बहुत से लोगों का यह तर्क कि जो किसी हद तक वाज़िब भी लगता है कि देश के वि...more »


टीवी के भ्रामक विज्ञापनों से सावधान!डॉ. महेश परिमल हाल ही में स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाली और झूठे दावे कर अपना माल बेचने वाली 38 कंपनियों पर कानूनी कार्रवाई की गई है। ये कंपनियां टीवी पर झूठा दावा कर अपने उत्पाद का विज्ञापन करती थीं। आज हमारे मनोरंजन का एक सहारा टेलीविजन ही है। पर इस माध्यम पर आजकल विज्ञापन हावी होने लगे हैं। टीवी पर इतने अधिक विज्ञापन आते हैं कि बच्चे अब यह तय करने लगे हैं कि घर में कोई नई चीज आएगी, तो वह किस तरह की होगी। वह किस कंपनी की होगी। उसका क्या मॉडल होगा। इस तरह से कंपनियां झूठे वादे कर उपभोक्ताओं को भ्रमित करती हैं। इसके सबसे अधिक शिकार होते हैं बच्चे। क्योंकि बच्चों का काफी समय टीवी के ... more »

गाँधी का नाम और गाँधी टोपी पर्याप्त नहीं‘विचार’ का वृत्ति में आना, ‘वैचारिकता’ होता होगा और यही वैचारिकता जब मनुष्य के आचरण में उतर आती है तभी वह आदमी की पहचान होती है। इसीलिए केवल ‘विचार’ या ‘वैचारिकता’ की पर्याप्त नहीं होती। इन दोनों का अन्तरण, आचरण में हुए बिना ये दोनों अमूर्त ही रह जाते हैं। इनकी वास्तविकता का अनुभव या कि इनका परीक्षण एक ही दशा में सम्भव हो पाता है और वह दशा होती है - ‘आचरण।’ आचरण के बिना कोई भी विचार या वैचारिकता खोखले नारे से अधिक नहीं होती। यह अनुभूति मुझे आज सुबह-सुबह, चम्पारण आन्दोलन में गाँधी के व्यवहार को पढ़कर हुई। इसी के समानान्तर मुझे अण्णा जैसे उन तमाम लोगों की विफलताएँ समझ में आई जो गाँ... more »


दिखावा और हम - कब बदलेंगे हम?लो एक साल और निकल लिया सस्ते में और हमें तो माधुरी भी नहीं मिली रस्ते में.. कई लोगों ने सरकार के खिलाफ विरोध में नए साल के जश्नों को एक तरफ कर दिया। काबिल-ए-तारीफ़ है उनका जज्बा और हक़ की लड़ाई। और वहीँ कितने ही लोगों ने हर साल की तरह दारु पी कर हुडदंग मचाया। काबिल-ए-तारीफ़ है उनका ढीठपना और उससे ज़्यादा काबिल-ए-तारीफ़ है पुलिस का उनपर डंडा मारना। ऐसे लोगों को सिर्फ एक ही बार डंडे नहीं पड़ने चाहिए परन्तु इनको हर महीने पुलिस थाने बुलाया जाना चाहिए और डंडे पड़ने चाहिए अगले ६ महीनों तक। जब तक क़ानून सख्त नहीं होंगे ऐसे लोग हर साल अपना जज्बा जाहिर करते रहेंगे। पेड़ को उगने नहीं देने का मतलब ये नही... more »

कांग्रेसियों का 'ब्रह्मचर्य व्रत'कहते हैं जो पकड़ा गया वो चोर बड़ा। जो समय रहते स्‍वीकार कर गया वो सबसे बड़ा महान, जैसे कि मोहनदास कर्म चंद गांधी। मगर अफसोस है कि अब कांग्रेसी नेताओं को स्‍वीकार करने का मौका ही नहीं मिलता या तो लड़कियां आत्‍म हत्‍या कर नेताओं को बेनकाब कर देती हैं या फिर कुछ साल बाद गलतियां पुत्रों का जन्‍म लेकर जग जाहिर हो जाती हैं। शायद महात्‍मा गांधी की परंपरा को कांग्रेसी नेता बरकरार रखने की कोशिश में लगे हुए हैं, भले दूसरी तरफ सत्‍ता में बैठी कांग्रेस महिलाओं की सुरक्षा का पूरा पूरा जिम्‍मा उठाने का भरोसा दिला रही है। कथित तौर पर कुछ महीनों से ब्रह्मचर्य का व्रत, जिससे हम बलात्‍कार भी कह सकते... more »


अनागत / नव वर्षपागल मन सोचने लगा 21 वीं सदी में सूरज पूरब से नहीं पच्छिम से निकल आवेगा हवा का रुख बदल जायेगा नक्षत्र अपना स्थान बदल लेंगे नभ से बादल दूध बरसायेंगे पहाड़ी झरनों से झरेंगे मोती आसमान से बरस पड़ेगा अमृत किसी ने कहा अनहोनी कुछ नहीं जो हुआ अच्छा हुआ जीवन वृत्त पर ही विचरता है जीव अरे आज भी डूब गया सूरज फिर पश्चिम में पंछी चहक उठे शाखाओं पर रवि के ताप से चमक उठे तारे आसमान में चाँद भी कहाँ निकल धरती से कुत्ते की पूंछ आज भी पोंगरी के इंतज़ार में वही गाँव वही शहर आदमी उगलता ज़हर बहती नाली टूटा नहर औरत और बेटी पर टूटता कहर न बदला कल ना ही कल परछाइयों ने कभी साथ छोड़ा कहाँ जला हाथ बरफ से ... more »

ब्लागर मित्रों से निवेदन ,ब्लागर मित्रों , चेत जाइये !पत्रों-पत्रिकाओं में बिना रचयिता की अनुमति के जो रचनाएं ब्लागों से ले कर छाप ली जाती हैं उससे आप उपकृत नहीं ,उन्हें उपकृत होना चाहिये . हमारा लेखन इतना सस्ता नहीं कि कोई भी अपना माल समझ कर बिना पूछे-बताये ,जैसे चाहे उसका उपयोग करता रहे.आपकी पूर्व अनुमति के बिना रचना प्रकाशित करना ,चोरी ही कहलाएगी . अधिकांश पत्रकार पत्रकारिता के मिशन के विपरीत आचरण करनेवाले हैं.अपने कारनामों पर लीपा-पोती करना भी उन्हें खूब आता है.हम सब मिल कर ही इस स्थिति पर काबू पा सकते हैं . *इसके लिये हम सब सावधान हो जाएँ *- *जहाँ किसी पत्र-पत्रिका में किसी ब्लागर की रचना देखें ,तुर... more »


वार्ता को देते हैं विराम ……… मिलते हैं ब्रेक के बाद …… राम राम, चलते चलते पढ़िए विचारणीय पोस्ट 

7 टिप्पणियाँ:

सत्य उजागर करती आज की लिंक्स |वार्ता का अच्छा संयोजन किया है |
आशा

बड़े ही सुन्दर सूत्र..

ब्‍लॉग चयन का यह काम मुझे मिलता तो मैं तो नहीं ही कर सकता था। इसके परिश्रम की कल्‍पना ही कँपा देती है। निश्‍चय ही आप सब साधुवाद के पात्र हैं।

सामयिक और उपयोगी लिंक देने के लिए धन्‍यवाद। ब्‍लॉगों से ली गई सामग्री के, बिना स्‍वीकृती तथा बिना पारिश्रमिक के उपयोग पर केन्द्रित पोस्‍ट अच्‍छी लगी।

मेरे ब्‍लॉग को स्‍थान देकर सम्‍मानित करने के लिए धन्‍यवाद।

बढ़िया लिंक्स... बहुत सुन्दर वार्ता... धन्‍यवाद

सुंदर लिंक्‍स ..
बहुत अच्‍छी वार्ता !!


बहुत सुन्दर वार्ता..

मस्तिष्क को किसी दिशा में विचार करने को प्रेरित करता यह चयन कई मुद्दों पर सावधान करता रहा.
विज्ञपनों की ढपोरशंखी पुकारों की असलियत बहुतों का भ्रम तोड़ेगी .आज के हालातों पर संतुलित
सोच बनाना सचमुच आवश्यक है -चाहे नारी की मर्यादा हो या राज और समाज की बातें.
बिना अनुमति ब्लागों से रचना उठा कर छाप लेने की बात सामने लाने हेतु धन्यवाद!

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