गुरुवार, 31 जनवरी 2013

अपनी तो जय राम जी की.... ब्लॉग 4 वार्ता... संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार.... भारत को उभरती हुई महाशक्ति भले बताया जाता हो, लेकिन भारतीय गांवों में पहुंचते ही ये दावे हवा हो जाते हैं। तमाम गावों में आज भी लोग मध्ययुगीन तौर-तरीकों से जीवन काटते हैं। देहरादून और उत्तरकाशी जनपद की सीमा पर बसी भंखवाड़ पंचायत भी इससे अलग नहीं है। यहां के लोगों को भी आजादी के 65 वर्ष एक अदद पुल नहीं दिला सके। नदी के दोनों किनारों से बंधी 50 मीटर लंबी लोहे के तार के सहारे दर्जनों लोग हर रोज मौत से होड़ लगाते हैं। इस तार से हाथ छूटने या तार के टूटने के साथ ही जीवन की डोर कभी भी टूट सकती है। इस खास खबर के बाद आइये अब चलते हैं आज की वार्ता पर कुछ चुनी हुई लिंक्स के साथ....

दलील उम्र की पेश की - *दलील उम्र की पेश की ** * थी घटना ह्रदय विदारक सहानुभूति थी देश की आई जब कानून की बात दलील 'उम्र' की पेश की वितरक प्रमाण पत्र के कई हैं बना है बड़ा....मासूमयित के मापदंड दिल्ली में हूए वीभत्स सामूहिक दुष्कर्म के एक आरोपी को नाबालिग मान लिया गया है। जिसका सीधा सा अर्थ है कि हिंदुस्तान के कानून को इस कुकृत्य में सबसे ज्यादा बर्बरता दिखाने वाले अमानुष के चेहरे पर मासूमयित नजर आ रही है।...बापू !*(1)* बापू ! राजघाट पर आज लगे जमघट में मुझे तलाश है उन तीन बंदरों की जो हुआ करते थे कभी तुम्हारे हमराही पर आज जो छुपे बैठे हैं फर्जी प्रवचनों और मुखौटों के ढेर में कहीं।...

बहल जायेगा दिल बहलते-बहलते .बिना तेरे दिन हैं जुदाई के खलते, कटे रात तन्हा टहलते - टहलते, समय ने चली चाल ऐसी की प्राणी, बदलता गया है बदलते - बदलते, गिरे जो नज़र से फिसल के जरा भी, उमर जाए फिर तो निकलते-निकलते, किया शक हमेशा मेरी दिल्लगी पे,...कि मैं इक बादल आवारा - १९६१ की फिल्म “छाया” मूल गीत गाया था तलत महमूद  ने. सुनील दत्त और आशा पारेख अभिनीत फिल्म के निर्देशक थे हृषिकेश मुखर्जी. गीत लिखा था राजेन्द्र कृष्ण ने....सब काला हो गया है.. - कुछ नहीं है, कुछ भी तो नहीं है... बस अँधेरा है, छितरा हुआ, यहाँ, वहाँ.. हर जगह... काले कपडे में लिपटी है ये ज़िन्दगी या फिर कोई काला पर्दा गिर गया है ... 

 अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता - इस देश की सरकार के चलते अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता पूरी तरह छीनी जा चुकी है ! शिंदे अगर 100 करोड़ हिन्दुओं को आतंकवादी कह दें तो हिन्दुओं की आत्मा को ठेस ...रावण-कंसऔर दक्ष बनो,ताकि हरी को आना पड़े आपके पास "...!! रोना-धोना छोड़ो ..!! - * प्रिय मित्रो,सादर नमस्कार ! ** हमारे... मृत्यु के निकट - *आत्म प्रशंसा त्याज्य है, पर निंदा भी व्यर्थ,* *दोनों मरण समान हैं, समझें इसका अर्थ।* * एक-एक क्षण आयु का, सौ-सौ रत्न समान,* *जो खोते हैं व्यर्थ ही, वह मनु...भ्रष्टाचार की प्रोफाइल तो यही कहती है - *जगदीश्‍वर चतुर्वेदी*भ्रष्टाचारियों का सामाजिक प्रोफाइल होता है। याद करें 2जी स्पेक्ट्रम में शामिल तमिलनाडु के नेताओं को, मायावतीशासन में हुए भ्रष्टाचार ...  

बहाली के आदेश का स्वागत किया शिक्षा कर्मियों ने - रायपुर, 29 जनवरी 2013/ मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह ने प्रदेश के पंचायत संवर्ग के शिक्षकों (शिक्षा कर्मियों) के व्यापक हित में आज देर रात यहां एक बड़ा और महत्... ऐसे आजादी को अपनी तो जय राम जी की - श्रीगंगानगर- एक बेटी को बेटा कहने पर एतराज है। कहती है, बेटी को बेटी ही मानो ताकि बेटी का महत्व बेटी के ही रूप में हो बेटे के रूप में नहीं। वह इस बात को...........???.प्रश्नों की बौछारलगी है और मैं - इनके बीच खड़ी खोज रहीं हूँउनके जवाब ... ' जो होता हैक्यों होता है'? शायद ईश्वर की मर्ज़ी.. 'क्या ईश्वर इतने निष्ठुरहैं '? नहीं जो होता है, अच्छे के लिएहोता है... शायद यह भीउसी अच्छे होनेकी पहली कड़ी है... 

ये दूरियां - ये दूरियां मै बिस्तर के इस कोने में , तुम सोई उस कोने में कैसे हमको नींद आएगी , दूर दूर यूं... बेचैन हूँ ………जाने क्यों ? - कोई भी आकलन करने की खुद को कटहरे में खडा करने की या दूसरे पर दोषारोपण करने की किसी भी स्थिति से मुक्त करने की कोई जद्दोजहद नहीं कर सकती विश्राम की भी अवस्थ... मुझे दवा देगा- - *हमकदम !* *फ़सानों ने दी है इतनी सोहरत,* *कि चाहता हूँ कुछ बाँट दूँ तुमको......* * * *मुझे दवा देगा-* ***** *दर्द मेरा , मुझे दवा देगा* *... 

Colva beach to Cansaulim beach & Night stay कोलवा बीच से कानसोलिम तक ट्रेकिंग व रात्रि विश्राम - गोवा यात्रा-11 हमें बताया गया था कि गोवा के समुन्द्र तटों पर नहाते समय कई लोग अपनी जान ऐवे ही आलतू-फ़ालतू में पानी में डूब कर गवाँ बैठते है।  ... अंबानी जी, एक तरफ आपका पैसा है दूसरी तरफ देश है - मुकेश अंबानी के नाम अरविंद केजरीवाल का खुला पत्र दिनांक : 22.01.2013 *श्री मुकेश अंबानी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड मेकर्स चैंबर्स – IV, नरीमन पॉइंट, मुम्बई .. धरोहरों को नष्ट करते नादान - प्रारंभ से पढे रामगढ से लौटते हुए कॉलेज के दिनों से ही प्रकृति का सामिप्य एवं सानिध्य पाने, प्राचीन धरोहरों को देखने और उसकी निर्माण तकनीक को समझने की ... 

 कार्टून :- इस फ़ि‍ल्‍म को बैन कर दो .. -

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दीजिये इजाज़त नमस्कार........

7 टिप्पणियाँ:

बड़े ही सुन्दर सूत्र..

बहुत अच्छे लिनक्स ...आभार

बहुत सुन्दर लिंक्स संजोये हैं।

आदरणीया दीदी सुप्रभात बेहद सुन्दर लिंक्स के साथ-साथ बढ़िया वार्ता, मेरी रचना को स्थान दिया तहे दिल से शुक्रिया हार्दिक बधाई स्वीकारें.

सुन्दर ,अति -सुन्दर सेतु आभार .बढ़िया संयोजन .

सुन्दर रचना है सा
http://nimbijodhan.blogspot.in/

बहुत बढ़िया सार्थक चिंतन से भरी ब्लॉग वार्ता प्रस्तुति ..

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