रविवार, 17 अक्तूबर 2010

कामन वेल्थ खत्म : दशहरा पर्व चरम पर .....

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मै रावण हूं अमर हूं हा हा !
कामन वेल्थ खत्म अब खम्बा नौचने की बारी है और आज  है "दशहरा" देखिये मेरा मन खिन्न है .  हिंदी ब्लागिंग एक ऐसा मंच निकला जिसे अंतर्जालीय खोमचा बाज़ी कहा जावे तो कम है. मेरे एक नान-ब्लागर मित्र का कथन मुझे टीस दे रहा है. क्योंकि मैने उससे बढ़चढ़ हिन्दी ब्लागिंग की तारीफ़ की थी. तारीफ़ की ज़रूर किंतु जब उसने हमें  ब्लाग्स के ज़रिये देखा तो इस सच का खुलासा किया. करे भी क्यों न हो भी तो यही रहा है होना भी चाहिये विविधताओं को खोमचे बाज़ी नहीं कहा जा सकता . हिन्दी ब्लागिंग में सनसनाहट का तत्व नहीं है. मेरा मित्र इस बात से सहमत हुआ और मुझे लगा आज़ फ़िर मैं तीस बरस पुरानी स्थिति में हूं एक डिबेटर की हैसियत से डिबेट जीत गया हूं.आज जब ब्लाग  खंगाली में लगा था कि आराधना चतुर्वेदी मुक्ति का ब्लाग नज़र आया वे कर रहीं हैं पश्चिम और पूरब के नारीवाद की. :-आमतौर पर नारीवाद की बात चलने पर यह प्रश्न सभी के मन में उठता है कि नारीवाद की पाश्चात्य अवधारणा का भारत में क्या उपयोग है? और ये प्रश्न कुछ हद तक वाजिब भी है. खासकर के तब जब नारीवाद पर खुद पश्चिम में ही कई सवाल उठने लगे हों.(आगे यहां से )लिंक दो दिन पुराना है किंतु आज चर्चा इस कारण की जा रही है क्यों कि हम चाहते हैं अब "शक्ति-पूजा सामान्य जीवन की पृष्ठ्भूमि पर क जावे " वास्तव में नवरात्री के ये नौ दिन वास्तव में नारी शक्ति के प्रति कृतज्ञता के दिन हैं . भारतीय सांस्कृतिक विरासत में नारी के स्तर को समान रखा गया है. नारी जितना शोषण पाश्चात्य व्यवस्था से प्रभावित होकर भारतीय समाज में हो रहा है कदाचित उतना मध्य युग में भी न हुआ होगा. भ्रूण-हत्या,बालिका भेद भाव, घरेलू-हिंसा, आज़ ZEAL पर उठे इस सवाल तक बात पहुंच रही है. मेरा अनुरोध है कि कृपया इस तरह के विचारों को मन में स्थान न दें। ये स्वयं में एक पूर्वाग्रह है और महिला ब्लोगर्स के लिए निराशाजनक है।(आगे यहां से ):-सच ही कहा उससे आगे  मेरी राय में जो कोई भी (दो पाया  ) घर-बाहर नारी का सम्मान न कर सके उसे चाहिये कि वो दुर्गा-पूजा पंडाल में प्रवेश न ले.वो चाहे नारी स्वयम क्यों न हो ? सब जानते हैं जिसने नारी को अपमानित किया उसका अंत ही हुआ है चाहे वो रावण था या दुर्योधन .
 हमारे मित्र महाशक्ति ने पेशेवर वक़ील सा’ब का गाउन इसी पूजा पर्व के प्रथम दिन पहना . हार्दिक बधाईयां प्रमेंद्र भाई. खैर ओशो से मेरा अनदेखा किंतु क़रीबी रिश्ता है जबलपुरिया होने के नाते पर ओशो से सदा सहमत रहूं सम्भावना कम ही है. किंतु इस पोस्ट से सहमत हूं जहां ओशो ने कहा कि "वे मसीहा नहीं हैं...!" मसीहा बनने का दम्भ किसी को भी न हो  राम कृष्ण गौतम की कविता मेरे मर्म तक पहुंच गई आप भी देखिये . इस युवा ब्लागर को सराहिये अवश्य मेल आई डी ये रहा :- vgautam45@gmail.com .  रावेन्द्र रवि जी ने भी सरस पायस में नव दुर्गा की आराधना अपने तरह से की है. एक  कल्पना भड़ास पर  मार्क्सवाद की वापसी ज़रूर देखिये . रही बात रामलीला में आज के लखन भैया की तो समयचक्र पर  मिश्रा जी ने रामलीला का वाक़या लिखा है मज़ेदार ! नवरात्री के अंतिम दिन शरद जी ने जया मित्र की कविता लिख कर अपना अनुष्ठान पूर्ण किया.
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ब्लाग4वार्ता मंडली गिरीश  बिल्लोरे / राजकुमार / ललित शर्मा / राजीव तनेजा / संगीता पुरी / सूर्यकांत गुप्ता /शिवम मिश्रा/ यशवंत मेहता / ताऊ जी _ की ओर से :-दशहरे की हार्दिक शुभ कामनायें 
निशुम्भ शुम्भ गर्जनी , प्रचण्ड मुण्ड खण्डिनी !
बनेरनै प्रकाशिनी , भजामि विन्ध्य वासिनी !!
त्रिशुल मुण्ड धारिणी , धरा विधात हारिणी !
गृहे -गृहे निवासिनी , भजामि विन्ध्यवासिनी !!
दरिद्र दुख हारिणी , सदा विभूति कारिणी !
वियोग शोक हारिणी , भजामि विन्ध्य वासिनी !!
लसत्सुलोल लोचनम लतास न वर् प्रदम !
कपाल शूल धारिणीम, भजामि विन्ध्यवासिनी !!
कराब्जदानदाधराम ,शिवशिवां प्रदायनी !
वरा- वराननां शुभाम , भजामि विन्ध्यवासिनी !!
कपिन्द्र जामनी प्रदाम, त्रिधा स्वरूप धारिणी !
जले स्थले निवासिनी , भजामि विन्ध्यवासिनी !!
विशिष्ट शिष्ट कारिणी , विशाल रुप धारिणी !
महोदरे विलासिनी , भजामि विन्ध्यवासिनी !!
पुरंदरादि सेविताम , पुरादिवंश खण्डिताम !
विशुद्ध बुद्धिकारिणीम ,भजामि विन्ध्यवासिनिम !!  

साभार : बज्ज पर  चंकिया शर्मा जी से 






19 टिप्पणियाँ:


वाह दादा कमाल कर दिया आज तो वार्ता में
यादगार वार्ता की है।
विजयादशमी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

दशहरा में चलें गाँव की ओर

आदरणीय बिल्लोरे जी को नमस्कार! बहुत ही संक्षिप्त मे सभी को सम्मिलित करते हुए ब्लॉग-वार्ता मे आपने चर्चा रखी है। बहुत बहुत धन्यवाद्। विजयादशमी की बहुत बहुत बधाई।

अहा आज की चर्चा में मेरा कार्टून भी ! बहुत बहुत धन्यवाद :)
चर्चाएं बर्थडे रिमांइडर की तरह होती हैं जो पहले की रचना की याद दिलाती हैं ...

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गिरीश दादा, इस बेहद उम्दा और रंग भरी वार्ता में मेरी पोस्ट को शामिल कर सम्मानित करने के लिए आपका बहुत बहुत आभार !

आपको और परिवार में सभी को दशहरे की बहुत बहुत हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएं !

विजय दशमी की हार्दिक शुभकामनाएं

निशुम्भ शुम्भ गर्जनी , प्रचण्ड मुण्ड खण्डिनी !
बनेरनै प्रकाशिनी , भजामि विन्ध्य वासिनी !!
त्रिशुल मुण्ड धारिणी , धरा विधात हारिणी !
गृहे -गृहे निवासिनी , भजामि विन्ध्यवासिनी !!
दरिद्र दुख हारिणी , सदा विभूति कारिणी !
वियोग शोक हारिणी , भजामि विन्ध्य वासिनी !!
लसत्सुलोल लोचनम लतास न वर् प्रदम !
कपाल शूल धारिणीम, भजामि विन्ध्यवासिनी !!
कराब्जदानदाधराम ,शिवशिवां प्रदायनी !
वरा- वराननां शुभाम , भजामि विन्ध्यवासिनी !!
कपिन्द्र जामनी प्रदाम, त्रिधा स्वरूप धारिणी !
जले स्थले निवासिनी , भजामि विन्ध्यवासिनी !!
विशिष्ट शिष्ट कारिणी , विशाल रुप धारिणी !
महोदरे विलासिनी , भजामि विन्ध्यवासिनी !!
पुरंदरादि सेविताम , पुरादिवंश खण्डिताम !
विशुद्ध बुद्धिकारिणीम ,भजामि विन्ध्यवासिनिम !!

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सुन्दर वार्ता एवं आभार आपका।

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विजय दशमी के शुभ अवसर पर शुभ कामनाएं | अच्छी लिंक्स के लिए बडाई |
आशा

असत्य पर सत्य की विजय के प्रतीक
विजयादशमी पर्व की शुभकामनाएँ!

आप सभी का हार्दिक धन्‍यवाद व अभारी हूँ, आपके सहयोग और मार्गदर्शन से कठिन राहों मशाल की भातिं उजाला कर मार्गदर्शन करता रहेगा।

विजयादशमी की बहुत बहुत बधाई

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते।
भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोsस्तु ते॥
विजयादशमी के पावन अवसर पर आपको और आपके परिवार के सभी सदस्यों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई!

काव्यशास्त्र

हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई!

बहुत सही वार्ता..


विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनायें।

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