मंगलवार, 12 अक्तूबर 2010

कदहीन मगर आदमकद भीड़--ब्लॉग4वार्ता--ललित शर्मा

नमस्कार मित्रों, घरेलु कार्यों में व्यस्त होने के कारण ब्लाग4वार्ता पर नहीं आ सका था। आज से निरंतरता बनी रहेगी। अब चलते हैं आज की ब्लॉग4वार्ता पर......

सबसे पहले चिट्ठा लेते हैं अमरेन्द्र त्रिपाठी का इनको ब्लागिंग में एक वर्ष पूर्ण हो गए हैं। आज इन्होने अपने ब्लागिंग के अनुभव लिखे हैं--ये कहते हैं-क वर्ष से कुछ अधिक ही हुए  साथी श्रीश पाठक के सहयोग से मैंने ब्लागरी की दिशा में पहला डग रखा था - 'टिकुई कढ़ाई' के रूप में | तब से आज तक बहुत कुछ बीत गया है | बीतना - रीतना ही तो जीवन है , भूत का , वर्तमान का और भविष्य का ! कुछ विगत-उद्भूत अनुभूतियों को प्रविष्टि का रूप दे रहा हूँ | विश्वास है 'अन्विति' आप प्रबुद्ध जन खोज लेंगे | 

अवधी ब्लागरी की लालसा लेकर अंतर्जालिक दुनिया में आया ! सहयोगी रहे - श्रीश पाठक 'प्रखर' ! आभार-आरम्भ इन्हीं से ! ( वैसे इतने निकट हैं कि इन्हें आभार देना अति औपचारिक लग रहा है ) | सिलसिला बढ़ा और विविध ब्लागों तक पहुंचता रहा | कुछ समय बाद लगा कि हिन्दी ब्लॉग भी बना लूँ | यह भी बन गया | आरम्भ से ज्ञान जी , समीर जी , अनूप जी , ललित जी , अरविन्द जी आदि लोगों के ब्लॉग पर रेगुलर जाता रहा | ज्ञान जी की गंगा तट की ब्लागरी उन्हें भगीरथ ब्लॉगर सिद्ध करने के लिए पर्याप्त रही | इनके यहाँ विषयों का उन्मेष भी ख़ास महत्वपूर्ण है ! पर कभी कभी उपेक्षनीय बातों पर अनकुसा जाते हैं |

रविन्द्र प्रभात जी लौट आए हैं ब्लागर मीट से, पहुंचते ही उन्होने एक पोस्त लिखी है -कई अनुत्तरित प्रश्नों को छोड़ गयी वर्धा में आयोजित संगोष्ठी *महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में आयोजित 'हिंदी ब्लॉगिंग की आचार-संहिता' विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला एवं संगोष्ठी में भाग लेकर आज ही लखनऊ वापस लौटा हूँ , थका हुआ हूँ इसलिए इस विषय पर ज्यादा बक-बक करने के पक्ष में मैं नहीं हूँ । फिर भी जो ख़ास बातें रही इस कार्यशाला और संगोष्ठी की वह मैं प्रस्तुत कर रहा हूँ , शेष बातें विस्तार से मैं एक-दो -दिन के भीतर करूंगा।

शिखा वार्ष्नेय लिख रही हैं कविता पर्दा धूप पे   

गुजरती है जिन्दगी
झडती है पतझड़ सी 
भीगती है बारिश में 
हो जाती है गीली 
फिर कुछ किरणे चमकती हैं सूरज की 
तो हम सुखा लेते हैं जिन्दगी अपनी 
और वो हो जाती है फिर से चलने लायक 
कभी सील भी जाती है
जब कम पड़ जाती है गर्माहट
फिर भी टांगे रहते हैं हम उसे 
कड़ी धूप के इन्तजार में  
आज निकली है छनी सी धूप 
पर फिर से किसी ने सरका दिया है पर्दा 
मेरी जिन्दगी पर पड़ती हुई  धूप पे   .

डॉ टी एस दराल पुछ रहे हैं आज एक सवाल ---लोग पीपल के पेड़ की पूजा क्यों करते हैं ? हमारे अपार्टमेन्ट ब्लॉक के निकट दीवार से लगा एक पीपल का पेड़ है । रोज़ सुबह जब मै गाड़ी निकालता हूँ , तो अक्सर भक्तज़नों को हाथ में लोटा लिए इस पेड़ की पूजा करते हुए देखता हूँ । ध्यान से देखिये --इस पेड़ के तने पर काफी ऊंचाई तक तेल की परत चढ़ी है । तने पर सैंकड़ों धागे लपेटे गए हैं । नीचे ज़मीन पर साईं बाबा की एक मूर्ति रखी है । मूर्ति के पास एक डोंगा रखा है जिसमे खाद्य पदार्थ रखे हैं । आस पास चूहों के कई बिल भी बने दिखाई दे रहे हैं ।शाम को जब मैं आता हूँ तो देखता हूँ कि डोंगे में रखा खाना खाया जा चुका है । ज़ाहिर है बिलों में रहने वाले प्राणियों का ही काम होगा ।

अवधिया जी ने आज कुछ देखा है वह लिखा है मक्खी मार रहे हैं दारू दुकान वालेशाम होते ही जहाँ दारू दुकानों के सामने जो भीड़ इकट्ठी हो जाती थी वह अब देखने को भी नहीं मिल रही है। बार की रौनक भी नज़र नहीं आ रही है। माता दुर्गा जो विराजमान हो गई हैं नौ दिनों के लिए! माता के प्रति लोगों.---वर्मा जी ने भी देखी है--..कदहीन मगर आदमकद भीड़ ..अपना कोई चेहरा *** *नही होता है भीड़ का,* *भीड़ में मगर *** *अनगिन चेहरे होते हैं.*** *भीड़ में *** *जब लोग बोलते हैं,* *तब समवेत स्वर *** *संवाद से परे हो जाता है.* *भीड़ गुनती नहीं है कुछ भी;* *भीड़...

शरद कोकास जी नवरात्रों में नौ कवियत्रियों की कविता लगाते हैं आज उन्होने मराठी भाषा की कविता का अनुवाद लगाया हैदलित कविता में प्रेमी आंदोलन के कार्यकर्ता होते हैं 11 अक्तूबर – नवरात्र कविता उत्सव –चौथा दिन – मराठी कवयित्री ज्योती लांजेवार * * * कल प्रस्तुत *असमिया कवयित्री निर्मला प्रभा बोरदोलोई* की कविता के पाठकों के रूप में फिर कुछ नये लोगों का आगमन हुआ ।...रतन सिंग शेखावत जी बता रहे हैं देवालयों की रक्षार्थ शेखावत वीरों का आत्मोत्सर्ग 8 मार्च 1679 औरंगजेब की विशाल सेना ने जो तोपखाने और हाथी घोड़ो पर सजी थी सेनापति दाराबखां के नेतृत्व में खंडेला को घेर कर वहां के शासक राजा बहादुर सिंह को दण्डित करने के लिए कूच चुकी थी | इस सेना को औरंगजे...

कोई बड़ी बात नहीं है, भारत मेंभैया यह भारत है। यहां कुछ भी असंभव नहीं है। आपने कभी जुगाड़ शब्द सुना है। अगर हां तो हम आपको बता दें की इस काम में हमारा भारत बहुत आगे है। यहां हर काम जुगाड़ से हो जाता है फिर चाहे वह कुछ भी क्यों न हों। ...सुनामी की बाहों में .....आँखों के समंदर में ये कैसा तूफां है खींच ले जाता है साहिल से मेरी हर ख्वाहिश को , दम तोड़ देती है हर चाहत जूझ कर खुद ही सागर की लहरों के हर थपेडे को सह कर । जज्ब कर लेता है सिन्धु अपनी ही गहराई में देखे -विश्व का सबसे बड़ा मानव मुस्कान चेहराये दुनिया भी कितनी रंगबिरंगी , अजीबोगरीब व विचित्र किस्म की है समझ से परे है । अब वो चाहे हमारे देश भारत की बात हो या अन्य किसी देश - विदेश की , लोग आए दिन ऎसे - ऎसे कारनामे कर दिखाते हैं कि उनकी कारगुजार.....

भिलाई में मिले ब्लॉगरसंजीव तिवारी-शरद कोकास-अली साह गत दिवस जब जगदलपुर गया था तो किसी कारणवश जल्दी लौट आया। वापस आने पर संजीव भाई ने फ़ोन पर बताया कि अली साहब जगदलपुर में ही रहते हैं और आपसे मिलने की इच्छा जाहिर की थी। मैने...ताऊ पहेली - 95 Chettinad Palace/Chettinadu mansion,Sivaganga district-Tamilnadu विजेता : श्री उडनतश्तरीप्रिय भाईयो और बहणों, भतीजों और भतीजियों आप सबको घणी रामराम ! हम आपकी सेवा में हाजिर हैं ताऊ पहेली 95 का जवाब लेकर. कल की ताऊ पहेली का सही उत्तर है Chettinad Palace/Chettinadu mansion,Sivaganga district-Ta...
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ब्लॉग4वार्ता को देते हैं विराम- ललित शर्मा का राम राम--मिलते हैं ब्रेक के बाद.................

19 टिप्पणियाँ:

चर्चा तो चर्चा, चित्र भी बहुत भला लगा. धन्यवाद.

मैं दो चार दिनों से ब्‍लॉगर में चित्र अपलोड नही कर पा रही हूं .. आपने चुने हुए लिंक्स के साथ बहुत अच्‍छी वार्ता की है .. आभार !!

अच्छी लिंक्स के लिए बधाई |
आशा

बढिया चर्चा ललित जी , बहुत ही सुंदर संकलन है

अच्छी रही चर्चा । लगाते हैं चक्कर ।

बढिया चर्चा ललित जी ..
आभार..

ललित भाई ...इस बेहद उम्दा ब्लॉग वार्ता के लिए आपका बहुत बहुत आभार !

बढ़िया चर्चा रही....अच्छे लिंक्स मिले....शुक्रिया

सटीक और उम्दा वार्ता .बहुत बहुत आभार.

सार्थक और सराहनीय प्रस्तुती...

बहुत बहुत जियो भाई ... ब्लॉगर मीट के फोतो देखने के बाद से तो हरा हरा सूझ रहा है । बेहतरीन चर्चा ।

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