शुक्रवार, 26 नवंबर 2010

कहीं आप का जिस्म आपके दिमाग से दूर तो नहीं भाग रहा

अवचेतन में कभी कोई बात चुहिया सी चिन्तन के तंतुओं को कुतर कुतर के काती है तब हम चुहिया को मारने दौड़ जाते हैं. कुंठा का डंडा लेकर. जी ऐसा करना गलत है ?
तो क्या चिंतन के तागों को सैंत में टूटने दिया जाए, ?
न उस चुहिया यानी दिल को चुभती बात को सर्जना का पथ दिखाईये.
जी हां , उर्ज़ा इस लिये नहीं मिली कि उसे लड़ने-झगड़ने में खर्च करें हम लोग. जिस्म को किसी भी स्थिति में दिमाग से दूर न जाने दीजिये  ये था आज़ का विचार जो सच सनातन है आप चाहे जो समझें पर आज़ अमन्यस्क भाव से चर्चा लिख रहा हूं. कुछ लिंक जो आज़ दिन भर छाए रहे थे  उनको आप देख लीजिये मुझे जो कहना था कह दिया


1 लाली देखन मै भी चली...  
2 दुनिया की १० सबसे खतरनाक और जटिल सडकें  
3 दिल्ली में मिले दिल वालों से..१३ नवम्बर, २०१०  
4 विचार-७५ :: आज महिला हिंसा विरोधी दिवस है  
5 धर्म-संस्कृति-ज्ञान (पहेली संख्या-43)  
6 हमारे वतन में सदा ही भाईचारा-शान्ति बनी रहे, रज़िया मिर्ज़ा का आदाब ..रज़िया राज़  
7 जबलपुर के ब्लागर्स जुड़ेंगे एक तारीख को होटल सत्य अशोका में  
8 कितनी अज़ीब रिवाज़ें हैं यहाँ पर -- [21]  
9 सचित्र वर्णन: ओबामा पर चढ़ा भारतीय रंग ------------------ शाहनवाज़ [19]  
10 शुरुआत नई जिंदगी की  
11 चल उठ, ज़िन्दगी, चलते हैं! -2  
12 पुराने स्वेटर  
13 तुम्हे मुबारक़ रश्मि दूधिया चकाचौंध वाली  
14 सुशासन का कोई विकल्प नहीं है ....  
15 किसानों के लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं कुशलपाल सिरोही  
16 कुछ फुटकर हास्य-कविताएँ  
17 जिंदगीनामा  
18 आदमी से छाँव होता जा रहा है  
19 हर फिकरा कस की एक औक़ात होती है....!!  
20 नवगीत :: गीत मेरे अर्पित हैं  
21 माँ की बाँहों में  
22 एक और चिट्ठाकार चिट्ठाजगत में, आईये उत्साहित कीजिये (Bubbles)  
23 बुझावन के प्रश्न बतावन का जवाब-१२  
24 सहायक योग्यता  
25 आश,नई भोर की !  
26 ... क्या नेता होना गुनाह हो गया है !!!  
27 अलबेला जी की हास्य-व्यंग्य प्रतियोगिता में भाग लें!  
28 तिलयार ब्लागर मीट और तल्ख़ मन - सतीश सक्सेना  
29 आहों मे असर हो तो……………  
30 सुबह की शुरूआत -माँ शारदे की वन्दना से  

गुरुवार, 25 नवंबर 2010

कुल 5.14 प्रतिशत लोग ही पोस्ट लिखते हैं :

छुटकी ने के क्या गज़ब लिखा है
हादसा आज अचानक वही फिर याद आया
कितनी मुश्किल से जिसे दिल से भुलाया हमने( फ़िरदौस की डायरी से ) 
वीर-बहूटी पर भी "मन-मंथन"भी मथ  देने वाली बात थी.सोचा कि क्यों न मन मथ दूं अपना और सभी ब्लागर्स का.
आज़ जब चिट्ठा जगत के आंकड़े देखे तो पता चला कि :- सेहत मंदी के बारे में 250 पोस्ट आईं,हैं. घरबार-श्रेणी से 51, जबकि समाचार श्रेणी वाले 309,चिट्ठे थे. विज्ञान पर केन्द्रित 54 आलेख,धंधा 56 खरीदी को लेके 10 पोस्ट थीं और संदर्भ श्रेणी में 104 को रखा गया है.   यानी कुल 16235 चिट्ठों में से लिखने वालों की संख्या मात्र 834 ब्लॉग सक्रीय हैं जो पजीयत का 5.137 यानि 5.14 ही है. और हम हैं कि नीचे दर्शाई स्थित को लेकर खुशी  का अनुभव करते हैं.कि आज मुझे अधिक टिप्पणी मिली या अधिक पसंद किया वाहवाही मिली. चिट्ठों के पठन में भी  कोई प्रभाव शीलता नहीं है. जिसे ज्यादा पढ़ा गया वो आंकड़ा आप खुद ही देखिये. हो सकता है एग्रीगेटर तक पठन का अपडेट विलम्ब से पहुंचा हो तो आप मानिए सर्वाधिक आंकड़ा अधिकतम 250 से अधिक न होगा. यहाँ  कोई धनात्मक सन्देश  नहीं दे रहा एग्रीगेटर बल्कि एक आइना दिखा रहा है कि हम हिन्दी के ब्लॉगर किस बात में आगे हैं और वो सब जानते हैं ? हालिया दिनों में जो सठिया उभर रहीं हैं उससे मुक्त होकर "मुदिता-भरी-ब्लागिंग" का होना समाज उपयोगी विषय पर आलेखन का किया जाना बहुत ज़रूरी है. कुछेक चिट्ठे हैं जो इस गरिमा को बरकरार रखते हैं उनका ज़िक्र करने में भी आज भयभीत हूं कि कोई आरोप न लगा दे कि अंधा रेवड़ी बाँट रहा है.  
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टिपियाये प्रभू आज़
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जस पाए प्रभू आज 
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पठियाये प्रभू आज़
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 आज मन बहुत उदास है शायद इससे ज़्यादा न मथ पाउंगा ?
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बुधवार, 24 नवंबर 2010

क्या ऊपर वाला 'सुपर प्रोग्रामर' हैलो टेस्टिंग़-टेस्टिंग कहते मेरा इम्तिहान ले रहा? - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो 
प्रणाम !

मालामाल बनाने वाले टीवी शो 'कौन बनेगा करोड़पति' में पहली बार एक ऐसी महिला करोड़पति बनी है, जिसने जिंदगी भर किसी बैंक में खाता नहीं खोला।
यह है, झारखंड के गिरीडीह की राहत तस्लीम। कार्यक्रम के प्रस्तोता अमिताभ बच्चन ने तस्लीम का यह राज अपने ब्लॉग में खोला है। वह शो के चौथे संस्करण में एक करोड़ रुपये जीतने वाली पहली प्रतिभागी हैं।
बिग बी ने लिखा है कि वह अब भी सामाजिक और परंपरागत तकाजे के चलते 'पर्दे' में रहती है। बकौल अमिताभ, 'वह साधारण महिला हैं, जो घर में सिलाई का काम करके घर चलाने के लिए महीने के 2,000-3,000 रुपये कमाती हैं। अपनी सीमित कमाई के चलते उन्होंने जीवन में कभी बैंक खाता नहीं खोला। न कभी लाख रुपये देखे और न ही कभी सोचा कि वह एक दिन हॉट सीट तक पहुंचेंगी, लेकिन उन्होंने ऐसा कर दिखाया।'
अमिताभ ने लिखा है, 'उनके पति कोच्चि [केरल] में रह कर काम करते हैं। राहत ने अपने स्तर पर केबीसी के लिए आवेदन किया। जब चयन प्रक्रिया शुरू हुई, तो खुद बस, ट्रेन और संभवत: शायद पहली बार हवाईजहाज में बैठ कर मुंबई आई।'
अमिताभ के मुताबिक, 'राहत बिल्कुल मंजे हुए खिलाड़ी की तरह खेलीं, 50 लाख रुपये तक के लगभग सभी सवालों के जवाब वह जानतीं थीं और उसके बाद उन्होंने करोड़ रुपये का सवाल भी बूझ डाला। उनके चेहरे पर कहीं चिंता की लकीरें नहीं आई। पूरे आत्मविश्वास से उन्होंने खेला।'
अमिताभ ने लिखा है, 'वह हमारे देश की महिलाओं के लिए अद्भुत पल था, जो दिखा सकती हैं, कि आप उन्हें मौका दीजिए, जिसमें वह दिखा देंगी कि उनमें आसमान में रोशन होने की काबिलियत है।'
मेगास्टार ने लिखा है कि उन्होंने यह भी दिखा दिया है कि भारत का दिल गांवों और कस्बों में ही बसता है। बहुत बढि़या राहत, आप एक ऐतिहासिक क्षण की गवाह बनीं।

राहत तसलीम ने दस दिनों तक अपने रिश्तेदारों से पहली महिला करोड़पति बनने की उपलब्धि को छिपाए रखा। दस दिनों के इंतजार के बाद शुक्रवार को वह पल आया जब राहत ने कौन बनेगा करोड़पति की पहली महिला विजेता बनने की जानकारी अपने परिवारजनों को दी। कौन बनेगा करोड़पति के इतिहास की पहली महिला करोड़पति बनने का सौभाग्य प्राप्त कर चुकी राहत बताती हैं, 'करोड़पति बनने की खबर मैंने किसी को नहीं बताई थी। बहुत मुश्किल था छिपाना। सबसे मुझे झूठ बोलना पड़ रहा था। मेरे पति तो इतने एक्साइटेड थे कि उन्होंने शूटिंग के दूसरे दिन ही कॉल करके गिरिडीह में एक रिश्तेदार को बता दिया। जब मैं गिरिडीह पहुंची तो मुझे पता चला कि यह खबर पूरे गिरिडीह में आग की तरह फैल गई है। बता नहीं सकती कि मुझे कितनी मुश्किल हुई। लोगों को मैंने कन्फ्यूज करा दिया। मैंने कहा कि मैं तो तीन लाख ही जीत पाई। मैंने पूरे दस दिन इतनी बड़ी खुशी मन में दबा कर रखी थी।' गौरतलब है कि सोमवार को दिखाए जाने वाले 'कौन बनेगा करोड़पति' के जिस एपीसोड में दर्शक राहत को करोड़पति बनते हुए देखेंगे उसकी शूटिंग 9 नवंबर को हुई थी।
'कौन बनेगा करोड़पति' में एक करोड़ के प्रश्न के सफर को बयां करते हुए राहत कहती हैं,' मैंने 16 अक्टूबर को पहली बार एसएमएस किया था। कंप्यूटर द्वारा मेरा रैंडमली सेलेक्शन हो गया। 17 अक्टूबर को मुझे कॉल आया और कहा गया कि आपसे तीन प्रश्न पूछे जाएंगे। आपको सही जवाब देना होगा। तीन सवाल मुझसे किए गए। हर सवाल के जवाब के लिए मुझे चार सेकेंड के समय दिया गया। तीनों सवाल के मैंने सही जवाब दिए। मुझे कहा गया कि आपको दोबारा कॉल किया जाएगा। उसके बाद 18 अक्टूबर को मुझे कॉल आया कि आप सेलेक्ट हो गई हैं। अगर, आप मुंबई आकर केबीसी का हिस्सा बनना चाहती हैं तो बताएं, आपका रजिस्ट्रेशन कर दिया जाएगा। मैंने कहा कि हम आ रहे हैं, मेरा रजिस्ट्रेशन कर दें। मैंने कह तो दिया था, पर मुझे पता नहीं था कि मैं मुंबई कैसे पहुंचूंगी? मेरे पति कोच्चि में जॉब करते हैं। संभव नहीं था कि वे गिरिडीह आते, फिर मुझे मुंबई ले जाते। फिर भी मैंने हिम्मत नहीं हारी। मैं इस मौके को मिस नहीं करना चाहती थी।'
एक करोड़ का प्रश्न राहत ने एकाग्रता के साथ दिया। राहत स्वयं बताती हैं, 'जब मैं एक करोड़ के सवाल का जवाब दे रही थी, तो उस समय मुझे कुछ याद नहीं था। मेरा ध्यान सिर्फ कंप्यूटर स्क्रीन पर और अमिताभ बच्चन पर था। मैं भूल चुकी थी कि मेरे पीछे दर्शक भी है। ऐसा लग रहा था कि मैं परीक्षा हॉल में बैठी हूं और मुझे सही जवाब देना है। उस सवाल के लिए मैंने डबल डिप लाइफलाइन यूज की थी। मुझे कन्फ्यूजन था लेकिन मैं श्योर थी कि दो विकल्पों में से कोई एक सही है। अमिताभ जी ने मुझसे पूछा कि आपको लगता है कि आपने जो जवाब दिया है सही है.तो मैंने कहा कि अगर मेरी किस्मत में होगा, तो मैं जरूर जीतूंगी। मैं बता नहीं सकती कि वो लम्हा कैसा था?
इस एपीसोड की शूटिंग 9 नवंबर को हुई थी। उसके बाद मैं रांची गई। रांची से बस का सफर तय कर गिरिडीह पहुंची।' एक करोड़ की राशि राहत के लिए बेहद मायने रखती है। वे कहती हैं, 'एक करोड़ बहुत मायने रखते हैं। मैं बस इतना चाहती थी कि मेरे पास इतना हो जाए कि मैं अपने बच्चों की परवरिश अच्छी तरह से कर सकूं। मेरे पति हमसे दूर रहते हैं। उनकी सैलरी कम है जिससे दो जगह का खर्च अच्छी तरह नहीं चल पाता। वे बार-बार गिरिडीह भी नहीं आ सकते। मैं अकेली घर का काम भी करती हूं, बच्चों को भी देखती हूं, सिलाई सेंटर भी चलाती हूं। मैंने सोचा है कि एक करोड़ रुपये से मैं बुटिक खोलूंगी। अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दूंगी। जो मैं नहीं बन पाई, उन्हें बनाऊंगी।'
शिक्षा को महत्व देते हुए राहत कहती हैं, 'मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। सोचा था कि कोई जॉब करूंगी,पर मेरे पति मेरे बाहर जॉब करने के खिलाफ थे। रात दिन मुझे सिलाई करना पड़ता था। कोई भी आदमी मेहनत-मजदूरी कब तक कर सकता है? चालीस साल तक सिलाई का काम कर सकती हूं उसके बाद क्या? मैं एकदम निराशा हो चुकी थी। कभी-कभी मुझे लगता था कि अपने सारे सर्टिफिकेट फाड़ कर जला दूं। क्या फायदा उसका? लेकिन जब केबीसी में मौका मिला,तब मुझे पता चला कि जो लोग शिक्षा ग्रहण करते हैं, वे हमेशा फायदे में रहते हैं। शिक्षा कहीं-न-कहीं काम आ ही जाती है।'

ब्लॉग 4 वार्ता  के पूरे वार्ता दल की ओर से राहत तस्लीम जी और उनके पूरे परिवार को बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !

अब चलते है आज की ब्लॉग वार्ता की ओर .....

सादर आपका 


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कर्म बड़ा है या भाग्य ? :- दोनों जरूरी है !






सर्किट हाउस भाग:-एक :- कमरा तैयार है ना ... साहब आने को है !










बस इंतज़ार ! :- किस का ?




अहिंसक शाकाहारी पोषण - कल और आज :- और आने वाले कल का क्या हुआ ?


उग्रता बनाम दृढ़ता ...! :- जंग जारी है !





हंसिये भाई... कोई पईसा नहीं लगता ही ही..... :-देव :- क्या सच में .... तो यह लो हे हे हे हे !!




टिप्पणियों का प्रणामवादी युग :- इस आलेख के लिए आपको भी प्रणाम !







नन्हे मेले के मुन्ने दुकानदार.. :- नेताओ से ज्यादा इमानदार ! 





ओबामा और हाथी घोड़े :- एक ही जगह रहते सारे !



हिंदी पोस्टों/ ब्लॉगर्स के प्रति केवल एक नॉन ब्लॉगर ही निष्पक्ष रह सकता है ...दिल्ली से तिलियार ..एक कार सफ़र विमर्श ..रिपोर्ट नं १ :- बात में दम है महाराज !



खबर पर शक बिल्कुल न करें :- अरे साहब बिलकुल शक नहीं है !



चिट्ठा चर्चा ब्लोगिंग को एक नयी दिशा देने में सफल हुआ है :- जी बिलकुल ! 


एक बहुत पुरानी "वो" :- ''वो'' बोले तो ??


मैं किस्से में बीती हूं... :- और ज़िन्दगी में ??



कुछ दिल की बातें ...सीधे दिल से ... दिल तक :- 




और 




२ खास पोस्टे पर एक ही ब्लॉग से :- 




और 



अपनी डफली आप बजाता हूँ .... अपनी पोस्ट का लिंक दिए जाता हूँ :- 





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आज की ब्लॉग वार्ता बस यहीं तक ..... अगली बार फिर मिलता हूँ एक और ब्लॉग वार्ता के साथ तब तक के लिए ......

जय हिंद !!

मंगलवार, 23 नवंबर 2010

शिवराम ..... दृढ़ संकल्पों और जन-जागरण की मशाल... ब्लॉग 4 वार्ता - देव कुमार झा

पूरे ब्लॉग जगत को देव बाबा की राम राम....

जबसे कामनवेल्थ गेम्स ख़त्म हुआ है, हिन्दुस्तान की मीडिया को एक के बाद एक मसाला मिल रहा है | सत्ता को या विपक्ष हर पार्टी प्लेट में सजा कर मुद्दे दे रही है.... हरेक चैनल खुश है... चैनल के मालिक सोच रहे हैं की भैया यह महिना तो बड़ा अच्छा गया, एक के बाद एक नया नया घोटाला मिला... ब्रेकिंग न्यूज़ पे ब्रेकिंग न्यूज़ बनी... वाह बस भगवान् से यही दुआ करो की दो चार महीने ऐसे ही खुश-हाली में कट जाये फिर पूरे स्टाफ को दुगना बोनस और स्पेसल अलाउंस भी | अब का कहै भाई, ज़माना ही अईसा आ गया है, कोई फ़र्क नहीं पडता भैया... हम सब त मैंगो जनता है ना.... आम आदमी... बूझै की नाहीं...

तो भैया लीजिए आज की वार्ता एक अलग अंदाज़ और अलग तेवर के साथ.... मगर सबसे पहले आज बात करें शिवराम के बारे में... स्वतंत्र भारत में नुक्कड नाटकों के जनक... एक विराट व्यक्तित्व और सबसे बढकर एक महान इंसान...


शिवराम के कुछ चमत्कार ब्लोगिंग के माध्यम से रवि भैया और दिनेश राय जी ने हम सब तक पहुचाएं हैं.... शिवराम के नुक्कड़ नाटकों की झाकियां और शिवराम के नाटकों की एक आत्मीय प्रस्तुति


आज शिवराम जी को पूरे ब्लॉग जगत की ओर से श्रद्धांजलि....



जीवन चलने का नाम और उसी बात को शिरोधार्य करते हुए अपनी वार्ता को आगे बढाया जाए... लीजिए भाई अपने खुशदीप भैया की रिपोर्ट तस्वीरें बताती है कल क्या था आलम...रोहतक रिपोर्टिंग...खुशदीप और संजय भैया ले आये तिलयार में छाया ब्लॉगरों का जादू .............संजय भास्कर... संजय भाई अगर सभी के नाम भी दे दिए होते तो मजा आ गया होता... मुम्बई वाले भी सभी को पहचान लिए होते.... खैर कोई ना... कम से कम भैया फ़ोटुआ तो दिखाई दिया सभी का।

झा जी लाए पूरी रपट.... जब तिलियार में मिल बैठे यार ....रोहतक ब्लॉगर्स बैठक ..some photos cliked by jhaji

गजब भैया गजब.....

लीजिए कुछ अन्य पोस्टों का भी आनन्द लीजिए....

तेरी बिंदिया रे!!! :- दद्दा की जय हो... गूढ रहस्य की बात...

तिलयार झील पर ब्लोगर भोज - सतीश सक्सेना:- लगा जईसे हमरी भी उपस्थिति हुई....

भाटिया और अलबेला में युद्ध--ब्लोगर मिलन के बाद------ललित शर्मा :- मगर ढिशुम ढिशुम करना तो पेप्सोडेंट का काम है...

शाकाहार या माँसाहार veg vs non veg [समय निकालो पढ़ डालो ]:- पढो पढो....

मेरी ब्लाग पर कमाई शुरु :- गजब भैया गजब.....

इत्तेफाको के रिचार्ज कूपन नहीं होते दोस्त :- अईसा है क्या

यह हैं देश के सच्चे सपूत और आप इन्हें ही नहीं पहचान पाए :- भैया आंखे खोल दी सच्ची....

भ्रष्टाचार कि सजा मृत्युदंड या फिर मात्र इस्तीफ़ा ? :- गंभीर मसला है भाई...

दिल्ली दिलवालों की नहीं मनचलों की हो गई| ई का हो रहा है भैया…. दिलवालों की दिल्ली पर अईसा वार…. सुधरेगी भाई दिल्ली की जनता भी सुधरेगी…


लीजिए भाई आज की वार्ता यहीं तक…. चलते चलते बनारस के घाटों पर देव दीपावली की कुछ तस्वीरें….





(गूगल से साभार)

आज की ब्लॉग वार्ता बस यहीं तक ..... अगली बार फिर मिलता हूँ एक और ब्लॉग वार्ता के साथ

जय हिन्द

सोमवार, 22 नवंबर 2010

आप भी कहिये "तेरी माँ की..." संस्कृति की रक्षा तो कोई भी कर लेगा - पॉलिटिकली करेक्ट दिखने की मजबूरी - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो ,
प्रणाम !

घोटाला..घोटाला.. घोटाला. होते, सुनते और देखते शायद भारतीय जनमानस अकुला गया है। भ्रष्टाचार को लेकर अब इनका गुस्सा फूट पड़ा है। संसद से लेकर सड़क तक जनता के इस आक्रोश को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। अब इसके विरोध में आनलाइन भी मोर्चा खुल चुका है। आइ पेड अ ब्राइब डाट काम नामक वेबसाइट पर जाकर कोई भी व्यक्ति खुद से घूस मांगे जाने या भ्रष्टाचार से जुड़े किसी अनुभव को साझा कर सकता है। हजारों लोग अब तक इस वेबसाइट से जुड़कर अपने अनुभव साझा कर चुके हैं। इनके संदेशों से भ्रष्टाचार के प्रति अवाम में खीझ और इस समस्या की गहराई का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
राष्ट्रमंडल खेल घोटाला, आदर्श सोसायटी घोटाला, 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाला और न जाने कितने। यह तो हालिया मामले हैं। देश में घोटालों की फेहरिस्त बहुत लंबी है। आलम यह है कि अब भ्रष्टाचार लोगों के रोजाना की जिंदगी में महसूस किया जा सकता है चाहे वह बिजली-पानी कनेक्शन लेने की बात हो या बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र हासिल करना हो। इस समस्या को मुंहतोड़ जवाब देने का बेंगलूर की एक गैर लाभकारी संस्था 'जनाग्रह' ने बीड़ा उठाया। इस साल अगस्त में इस संस्था ने आइ पेड अ ब्राइब [आइपीएबी] नाम से एक वेबसाइट शुरू की। इस वेबसाइट पर भ्रष्टाचार से संबंधित लोगों के कड़वे अनुभवों को साझा करने की भी व्यवस्था है। इस वेबसाइट से जुड़े दो हजार से ज्यादा लोगों के अनुभव इस समस्या की गहराई का सहज आभास कराते हैं। एक व्यक्ति ने अपनी व्यथा में लिखा है कि आयकर विभाग का एक अधिकारी उनसे तीस हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा है। रिश्वत न देने की स्थिति में अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न की धमकी दे रहा है। एक रेस्टोरेंट के मालिक ने शराब के लाइसेंस के लिए दो लाख नब्बे हजार रुपये रिश्वत की बात लिखी है। हालांकि सबसे चौंकाने वाला मामला एक डॉक्टर से जुड़ा है। कार्डियो शल्य चिकित्सक यह डॉक्टर एक सार्वजनिक वित्त पोषित अस्पताल से जुड़े हैं। एक मरीज के ऑपरेशन के लिए ये दस हजार रुपये रिश्वत मांग रहे हैं।
इसी साल फरवरी में पांचवां खंबा नामक एक समूह ने शून्य रुपये की कीमत के नोटों को छापकर लोगों में वितरित किया। साथ में यह सलाह भी दी कि जब कभी किसी भ्रष्ट बाबू से उनका पाला पड़े तो यह बतौर रिश्वत उसे दे दें। गुजरात में भारतीय प्रबंध संस्थान, अहमदाबाद के छात्रों ने तो भ्रष्टाचार के खिलाफ एक खास तरकीब निकाल ली है। दफ्तरों में होने वाले भ्रष्टाचार से पीड़ित नागरिकों के लिए इन छात्रों ने एक टोल फ्री हेल्पलाइन का गठन कर डाला है।

ब्लॉग 4 वार्ता  के इस मंच पर यह तो हो गई साहब जानकारी की बात अब चलते है आज की ब्लॉग वार्ता की ओर ....


सादर आपका

शिवम् मिश्रा 

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ब्लागर्स से......मनुज प्रकृति से शाकाहारी (संडे ज्ञान) :- या अंडे ज्ञान ?


अब जांच-पड़ताल की चूहेदानी :- जिस में दोनों ओर से रास्ता खुला है !


मैंने आजतक कितनी रिश्वत दी उसका हिसाब (जितना याद आया) :- थोडा और सोच लो महाराज !


गुमशुदा कैडेट :- ड्यूटी पर हाज़िर श्रीमान !


व्यंग्य - "कवि सम्मलेन का जायजा " और "कविता बनाने की रेसिपी".... :- वाह !!


....और विवाह हो गया मेरीवाली ‘इस लड़की’ का :-  पर हुआ किस से !!


और जय शादी-शुदा मर्दों की..... -देव :- जय हो !!


मीडिया की मौत पर शोक :- कौन मनायेगा ?


तिनका ही था कमज़ोर सा, उसका मुक़द्दर, देखना ... :- हम्म !


आप भी कहिये "तेरी माँ की..." संस्कृति की रक्षा तो कोई भी कर लेगा :- सही है !


आओ लिखो--- बढ़िया...लाजवाब....खूबसूरत ....पंक्तियाँ....(हा हा हा..) :- आप लिखो हम पढेगे !


पॉलिटिकली करेक्ट दिखने की मजबूरी...खुशदीप :- हम सब की है !


शोध का सोच और आत्मनिर्भरता पर प्रभाव - भाग ३ :- क्या होता है ?


मां तेरे जाने के बाद ......फ़िर अगले जनम का इंतज़ार है मुझे ... :- पर माँ तो अब भी आपके साथ है !


भारत में प्रथम महिला (First Woman in India) :- कौन कहाँ कैसे ?


एक मुलाक़ात प्रसिद्ध गीतकार सोम ठाकुर से - हरि शर्मा :- आभार !





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प्राप्त सूचनाओ के अनुसार आज दिनांक २१ / ११/ २०१० की शाम अचानक ही हाई बी पी के कारण तबियत ख़राब होने की वजह से हम सब के चहेते पाबला जी को हॉस्पिटल में दाखिल करवाना पड़ा !  उपचार के लगभग २ घंटो के बाद डाक्टर ने उनको घर जाने की इज़ाज़त दे दी  !!

हम तो बस यही कह सकते है .......

PABALA JI ..... GET WELL SOON .....WE LOVE YOU !!!

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आज की ब्लॉग वार्ता बस यहीं तक ..... अगली बार फिर मिलता हूँ एक और ब्लॉग वार्ता के साथ तब तक के लिए ......

जय हिंद !!

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