बुधवार, 24 नवंबर 2010

क्या ऊपर वाला 'सुपर प्रोग्रामर' हैलो टेस्टिंग़-टेस्टिंग कहते मेरा इम्तिहान ले रहा? - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो 
प्रणाम !

मालामाल बनाने वाले टीवी शो 'कौन बनेगा करोड़पति' में पहली बार एक ऐसी महिला करोड़पति बनी है, जिसने जिंदगी भर किसी बैंक में खाता नहीं खोला।
यह है, झारखंड के गिरीडीह की राहत तस्लीम। कार्यक्रम के प्रस्तोता अमिताभ बच्चन ने तस्लीम का यह राज अपने ब्लॉग में खोला है। वह शो के चौथे संस्करण में एक करोड़ रुपये जीतने वाली पहली प्रतिभागी हैं।
बिग बी ने लिखा है कि वह अब भी सामाजिक और परंपरागत तकाजे के चलते 'पर्दे' में रहती है। बकौल अमिताभ, 'वह साधारण महिला हैं, जो घर में सिलाई का काम करके घर चलाने के लिए महीने के 2,000-3,000 रुपये कमाती हैं। अपनी सीमित कमाई के चलते उन्होंने जीवन में कभी बैंक खाता नहीं खोला। न कभी लाख रुपये देखे और न ही कभी सोचा कि वह एक दिन हॉट सीट तक पहुंचेंगी, लेकिन उन्होंने ऐसा कर दिखाया।'
अमिताभ ने लिखा है, 'उनके पति कोच्चि [केरल] में रह कर काम करते हैं। राहत ने अपने स्तर पर केबीसी के लिए आवेदन किया। जब चयन प्रक्रिया शुरू हुई, तो खुद बस, ट्रेन और संभवत: शायद पहली बार हवाईजहाज में बैठ कर मुंबई आई।'
अमिताभ के मुताबिक, 'राहत बिल्कुल मंजे हुए खिलाड़ी की तरह खेलीं, 50 लाख रुपये तक के लगभग सभी सवालों के जवाब वह जानतीं थीं और उसके बाद उन्होंने करोड़ रुपये का सवाल भी बूझ डाला। उनके चेहरे पर कहीं चिंता की लकीरें नहीं आई। पूरे आत्मविश्वास से उन्होंने खेला।'
अमिताभ ने लिखा है, 'वह हमारे देश की महिलाओं के लिए अद्भुत पल था, जो दिखा सकती हैं, कि आप उन्हें मौका दीजिए, जिसमें वह दिखा देंगी कि उनमें आसमान में रोशन होने की काबिलियत है।'
मेगास्टार ने लिखा है कि उन्होंने यह भी दिखा दिया है कि भारत का दिल गांवों और कस्बों में ही बसता है। बहुत बढि़या राहत, आप एक ऐतिहासिक क्षण की गवाह बनीं।

राहत तसलीम ने दस दिनों तक अपने रिश्तेदारों से पहली महिला करोड़पति बनने की उपलब्धि को छिपाए रखा। दस दिनों के इंतजार के बाद शुक्रवार को वह पल आया जब राहत ने कौन बनेगा करोड़पति की पहली महिला विजेता बनने की जानकारी अपने परिवारजनों को दी। कौन बनेगा करोड़पति के इतिहास की पहली महिला करोड़पति बनने का सौभाग्य प्राप्त कर चुकी राहत बताती हैं, 'करोड़पति बनने की खबर मैंने किसी को नहीं बताई थी। बहुत मुश्किल था छिपाना। सबसे मुझे झूठ बोलना पड़ रहा था। मेरे पति तो इतने एक्साइटेड थे कि उन्होंने शूटिंग के दूसरे दिन ही कॉल करके गिरिडीह में एक रिश्तेदार को बता दिया। जब मैं गिरिडीह पहुंची तो मुझे पता चला कि यह खबर पूरे गिरिडीह में आग की तरह फैल गई है। बता नहीं सकती कि मुझे कितनी मुश्किल हुई। लोगों को मैंने कन्फ्यूज करा दिया। मैंने कहा कि मैं तो तीन लाख ही जीत पाई। मैंने पूरे दस दिन इतनी बड़ी खुशी मन में दबा कर रखी थी।' गौरतलब है कि सोमवार को दिखाए जाने वाले 'कौन बनेगा करोड़पति' के जिस एपीसोड में दर्शक राहत को करोड़पति बनते हुए देखेंगे उसकी शूटिंग 9 नवंबर को हुई थी।
'कौन बनेगा करोड़पति' में एक करोड़ के प्रश्न के सफर को बयां करते हुए राहत कहती हैं,' मैंने 16 अक्टूबर को पहली बार एसएमएस किया था। कंप्यूटर द्वारा मेरा रैंडमली सेलेक्शन हो गया। 17 अक्टूबर को मुझे कॉल आया और कहा गया कि आपसे तीन प्रश्न पूछे जाएंगे। आपको सही जवाब देना होगा। तीन सवाल मुझसे किए गए। हर सवाल के जवाब के लिए मुझे चार सेकेंड के समय दिया गया। तीनों सवाल के मैंने सही जवाब दिए। मुझे कहा गया कि आपको दोबारा कॉल किया जाएगा। उसके बाद 18 अक्टूबर को मुझे कॉल आया कि आप सेलेक्ट हो गई हैं। अगर, आप मुंबई आकर केबीसी का हिस्सा बनना चाहती हैं तो बताएं, आपका रजिस्ट्रेशन कर दिया जाएगा। मैंने कहा कि हम आ रहे हैं, मेरा रजिस्ट्रेशन कर दें। मैंने कह तो दिया था, पर मुझे पता नहीं था कि मैं मुंबई कैसे पहुंचूंगी? मेरे पति कोच्चि में जॉब करते हैं। संभव नहीं था कि वे गिरिडीह आते, फिर मुझे मुंबई ले जाते। फिर भी मैंने हिम्मत नहीं हारी। मैं इस मौके को मिस नहीं करना चाहती थी।'
एक करोड़ का प्रश्न राहत ने एकाग्रता के साथ दिया। राहत स्वयं बताती हैं, 'जब मैं एक करोड़ के सवाल का जवाब दे रही थी, तो उस समय मुझे कुछ याद नहीं था। मेरा ध्यान सिर्फ कंप्यूटर स्क्रीन पर और अमिताभ बच्चन पर था। मैं भूल चुकी थी कि मेरे पीछे दर्शक भी है। ऐसा लग रहा था कि मैं परीक्षा हॉल में बैठी हूं और मुझे सही जवाब देना है। उस सवाल के लिए मैंने डबल डिप लाइफलाइन यूज की थी। मुझे कन्फ्यूजन था लेकिन मैं श्योर थी कि दो विकल्पों में से कोई एक सही है। अमिताभ जी ने मुझसे पूछा कि आपको लगता है कि आपने जो जवाब दिया है सही है.तो मैंने कहा कि अगर मेरी किस्मत में होगा, तो मैं जरूर जीतूंगी। मैं बता नहीं सकती कि वो लम्हा कैसा था?
इस एपीसोड की शूटिंग 9 नवंबर को हुई थी। उसके बाद मैं रांची गई। रांची से बस का सफर तय कर गिरिडीह पहुंची।' एक करोड़ की राशि राहत के लिए बेहद मायने रखती है। वे कहती हैं, 'एक करोड़ बहुत मायने रखते हैं। मैं बस इतना चाहती थी कि मेरे पास इतना हो जाए कि मैं अपने बच्चों की परवरिश अच्छी तरह से कर सकूं। मेरे पति हमसे दूर रहते हैं। उनकी सैलरी कम है जिससे दो जगह का खर्च अच्छी तरह नहीं चल पाता। वे बार-बार गिरिडीह भी नहीं आ सकते। मैं अकेली घर का काम भी करती हूं, बच्चों को भी देखती हूं, सिलाई सेंटर भी चलाती हूं। मैंने सोचा है कि एक करोड़ रुपये से मैं बुटिक खोलूंगी। अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दूंगी। जो मैं नहीं बन पाई, उन्हें बनाऊंगी।'
शिक्षा को महत्व देते हुए राहत कहती हैं, 'मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। सोचा था कि कोई जॉब करूंगी,पर मेरे पति मेरे बाहर जॉब करने के खिलाफ थे। रात दिन मुझे सिलाई करना पड़ता था। कोई भी आदमी मेहनत-मजदूरी कब तक कर सकता है? चालीस साल तक सिलाई का काम कर सकती हूं उसके बाद क्या? मैं एकदम निराशा हो चुकी थी। कभी-कभी मुझे लगता था कि अपने सारे सर्टिफिकेट फाड़ कर जला दूं। क्या फायदा उसका? लेकिन जब केबीसी में मौका मिला,तब मुझे पता चला कि जो लोग शिक्षा ग्रहण करते हैं, वे हमेशा फायदे में रहते हैं। शिक्षा कहीं-न-कहीं काम आ ही जाती है।'

ब्लॉग 4 वार्ता  के पूरे वार्ता दल की ओर से राहत तस्लीम जी और उनके पूरे परिवार को बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !

अब चलते है आज की ब्लॉग वार्ता की ओर .....

सादर आपका 


-------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------



कर्म बड़ा है या भाग्य ? :- दोनों जरूरी है !






सर्किट हाउस भाग:-एक :- कमरा तैयार है ना ... साहब आने को है !










बस इंतज़ार ! :- किस का ?




अहिंसक शाकाहारी पोषण - कल और आज :- और आने वाले कल का क्या हुआ ?


उग्रता बनाम दृढ़ता ...! :- जंग जारी है !





हंसिये भाई... कोई पईसा नहीं लगता ही ही..... :-देव :- क्या सच में .... तो यह लो हे हे हे हे !!




टिप्पणियों का प्रणामवादी युग :- इस आलेख के लिए आपको भी प्रणाम !







नन्हे मेले के मुन्ने दुकानदार.. :- नेताओ से ज्यादा इमानदार ! 





ओबामा और हाथी घोड़े :- एक ही जगह रहते सारे !



हिंदी पोस्टों/ ब्लॉगर्स के प्रति केवल एक नॉन ब्लॉगर ही निष्पक्ष रह सकता है ...दिल्ली से तिलियार ..एक कार सफ़र विमर्श ..रिपोर्ट नं १ :- बात में दम है महाराज !



खबर पर शक बिल्कुल न करें :- अरे साहब बिलकुल शक नहीं है !



चिट्ठा चर्चा ब्लोगिंग को एक नयी दिशा देने में सफल हुआ है :- जी बिलकुल ! 


एक बहुत पुरानी "वो" :- ''वो'' बोले तो ??


मैं किस्से में बीती हूं... :- और ज़िन्दगी में ??



कुछ दिल की बातें ...सीधे दिल से ... दिल तक :- 




और 




२ खास पोस्टे पर एक ही ब्लॉग से :- 




और 



अपनी डफली आप बजाता हूँ .... अपनी पोस्ट का लिंक दिए जाता हूँ :- 





-------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
आज की ब्लॉग वार्ता बस यहीं तक ..... अगली बार फिर मिलता हूँ एक और ब्लॉग वार्ता के साथ तब तक के लिए ......

जय हिंद !!

9 टिप्पणियाँ:

बहुत अच्छी वार्ता शिवम भैया।
अच्छी कही...

बहुत अच्छी वार्ता ..बहुत सारे अच्छे लिंक्स मिले

शिवम भाई ्नकारात्मक चिंतन दौर में बेहतर लिंक तलाश लिये शुक्रिया उम्दा चर्चा रही

आप सब का बहुत बहुत आभार !

आपके दिए हुए हर लिंक पर बेहतरीन लेख है धन्यवाद
dabirnews.blogspot.com

एक टिप्पणी भेजें

टिप्पणी में किसी भी तरह का लिंक न लगाएं।
लिंक लगाने पर आपकी टिप्पणी हटा दी जाएगी।

Twitter Delicious Facebook Digg Stumbleupon Favorites More