रविवार, 10 अप्रैल 2011

.भ्रष्टाचारी मारीच , सूर्पणखा और अन्ना विश्वामित्र----ब्लॉग4वार्ता-----ललित शर्मा

नमस्कार मित्रों, दो वर्षों से लगातार ब्लोगिंग कर ली, सोचा की कुछ आराम कर लिया जाये. अन्ना हजारे की मुहीम के कारण लिखना ही पड़ गया. अन्ना हजारे के समर्थन में लगभग पूरा देश ही खड़ा हो गया. इससे जाहिर होता है कि देश का आम आदमी भ्रष्ट्राचार से आजिज आ गया है. ऊपर से लेकर नीचे के स्तर तक भ्रष्ट्राचार का गन्दा नाला बह रहा है. इसकी सड़ांध में जीना मुस्किल हो गया. अब गंदे नाले की सफाई जरुरी है. इस नासूर का आपरेशन करना ही पड़ेगा. सरकार ने अन्ना हजारे की बात मान ली "जन लोकपाल बिल" का मसौदा तैयार करने में आम आदमी की भी भागीदारी होगी. लेकिन "जन लोकपाल बिल" लागु होने पर भ्रष्ट्राचार समाप्त हो जायेगा? यह एक यक्ष प्रश्न है. अब चलते हैं आज की ब्लॉग4वार्ता पर........कोशिश रहेगी की ब्लॉग४वार्ता नित्य हो....

दिनेश राय द्विवेदी जी कह रहे हैं कि जीत का जश्न मनाएँ! अपनी एकता और संघर्ष को जीवित रखें और आगे बढ़ाएँ!!भ्रष्टाचार के विरुद्ध जन लोकपाल बिल अब सपना नहीं रहा है। सरकार को अण्णा हजारे के अनशन को लगातार मिल रहे और बढ़ रहे जन समर्थन के सामने झुकना पड़ा है। अण्णा हजारे द्वारा जन लोकपाल बिल को कानून की शक्ल देने ... अन्ना ये जीत नहीं, शुरुआत है...खुशदीपअन्ना के लिए ये आंदोलन है...आम आदमी के लिए जीने-मरने का सवाल...और खाए-अघायों के लिए बौद्धिक जुगाली का उत्सव...दिल्ली के जंतर-मंतर पर आज अन्ना अपना अनशन तोड़ देंगे...बशर्ते कि सरकारी आदेश जारी होने में स..

कुमार विश्वास का सच..!! : यहाँ मामला गंभीर है.....तथाकथित बड़े कवि की ओछी हरकत का जिक्र है.. शर्म आनी चाहिए इन्हें.....कवि होने पर.... कुमार विश्वास ने जबलपुर में जो हरक़त की वो ओछी थी इसमें कोई दो मत नहीं. पहली पोस्ट के के बाद जिस तरह सुधि जन सामने आए वो एक अलग अनुभव है. ब्लागजगत ने क्या कहा देखिये आप स्वयंपद्मसिंह:-एक पगली लड़की को लेक...दुर्भावनाओं से ग्रसित नामी-गिरामी कलमकार हालांकि यह सवाल खडा करना कि कलमकार दुर्भावनाओं से ग्रसित होते हैं, खुद को सवालों के कठघरे में खडा करने जैसा है ! सवाल के उठने के सांथ ही आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ सकता है किन्तु आलोचनाओं से बचने या भागन...

ध्रुवतारा और धरा ध्रुवतारा और धरा --------------------- धरा घूमती है सूर्य के चारो ओर और अपने अक्ष पर भी तभी तो मौसम बदलते हैं दिन- रात होते हैं ... गुलाबी सर्दियों की गुनगुनी दोपहर तपती गर्मियों की शीतल शामें मिट्टी की...टिक टिक, टप टपजूझना, औरों के लिये रात आधी बीतने को है, चिन्तन पर विचारों के ज्वार ने अधिकार कर लिया है, ऐसी परवशता देखकर निद्रा भी रूठ कर चली गयी है, आँख गड़ गयी है छत पर लटके हुये पंखे पर, जिसके एक ब्लेड पर सतत चलते र...

बचपन और हमारा पर्यावरण---डा श्याम गुप्त परिचय-- नाम-- ---डा श्याम गुप्त जन्म---१० नवम्बर, १९४४ ई. पिता—स्व.श्री जगन्नाथ प्रसाद गुप्ता, . जन्म स्थान—मिढाकुर, जि. आगरा, उ.प्र...सांप चालाक हैं दूरबीन लिये बैठे हैं.....अन्ना संभलना!!यूँ तो किसी का बैठ जाना या खड़े हो जाना कोई बातचीत का विषय नहीं होता जब तक कि शेयर बाजार न बैठ जाये, सरकार न बैठ जाये या इन्कम टैक्स वाले आपके दरवाजे पर न आ कर खड़े हो जायें. वैसे मौत का आपके दर पर आकर ख...चैत्र नवरात्रि कविता उत्सव 2011 - छठवाँ दिन - अंजुम हसन की कविताइस चैत्र नवरात्र कविता उत्सव में आप सभी पाठकों का स्वागत है । आज छठवें दिन हम प्रस्तुत कर रहे हैं बंगलोर की कवयित्री *अंजुम हसन* की एक कविता जो हमने पत्रिका " *प्रतिलिपि* " से साभार ली है । .

जन-लोकपाल : खाने-दिखाने के दांत अलग -अलग तो नहीं होंगे ?नदियाँ पहाड़ों से निकलती हैं और उनका पानी ढलानों से होकर  ऊपर से नीचे की ओर बहता है . उसी तरह भ्रष्टाचार  की नदियाँ भी ऊपर से नीचे की तरफ प्रवाहित हो रही हैं .ऊपर के लोग जब नोटों के जादुई  निवेश के ज़रिये हर तरह के ऊंचे-ऊंचे ओहदे हासिल करते हैं और उन ओहदों को अपने निवेश  की पूंजी  वसूलने  का ज़रिया बना लेते हैं , तब उनसे निचले ओहदे वाले उन्हें अपना ' आदर्श ' मान कर उनका अनुकरण करने लगते हैं .भ्रष्‍टाचार का मंदिर बनायेंगे जसपाल भट्टी : हम भट्टी में भ्रष्‍टाचार को जलायेंगेसब उल्‍टा पुल्‍टा कर दूंगा आप इलाज करवाने अस्‍पताल जाते हैं। रास्‍ते भर मैं मिलता हूं। कंडक्‍टर आधे पैसे लेता है और टिकट नहीं देता है, आप खुश हो जाते हैं, पर मेरी मौजूदगी नहीं समझ पाते हैं। अस्‍पताल में ला...

भ्रष्टाचार के खिलाफ़ पहली जीत हुई दर्ज … बधाईनन्ही बच्ची के हाँथों नींबू का रस पीकर अन्ना ने तोड़ा अनशनभ्रष्‍टाचार के खिलाफ अन्‍ना हजारे का 97 घंटे से अधिक का उपवास खत्‍म हो गया है। जन लोकपाल बिल को लेकर सरकार की ओर से सभी मांगें माने जाने के बाद अन्.झुकती है सरकार झुकाने वाला चाहिएआखिर सरकार झुक गई, जनतंत्र की विजय हुई। समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर सरकार इतनी जल्दी कैसे हार मान गई? अब तो यह तय हो गया कि सरकार से अपनी बात मनवाना हो, तो आमरण अनशन का सहारा लिया जा स...
शत्-शत् नमन वंदन: अन्ना हजारेदूसरो पर पथ्थर फेंकने से पहले जरा अपने भी झांक कर देखो यारों।* * * 'भारत' क्रांति और क्रांतिकारियों का देश रहा है वर्ष 1857 में देश में प्रथम क्रांति का आगाज हुआ था जो गदर आंदोलन के नाम से जाना गया। तत्पश...

जन-सपनों का आगाज़ हमारी पीढ़ी ने जिन्होंने गांधी जी को नहीं देखा...स्वतंत्रता आन्दोलन में उमड़ते जन सैलाब की कहानियाँ ही सुनी हैं....या फिर क्रिकेट विश्व कप के जीत के जुनून में युवा लोगो को सड़कों पर अपनी ख़ुशी जाहिर करते ह...भ्रष्टाचार-नेता का, नेता के लिए, नेता के द्वारामेरे बेटे ने कई साल पहले एक सवाल मुझसे किया था जिसका जवाब मैं आज तक ढूंढ रहा हूँ. उसने पूछा था कि क्या यही लोकतंत्र है जिसमें आम मतदाता ज़मीन पर बैठे और उसी जनता का वोट पाकर नेता बना व्यक्ति सिंहासन पर?यह ..

चार दिन बनाम चालीस सालअन्ना हजारे का चार दिन का आमरण अनशन नक्सलियों के चालीस साल के हिंसक संघर्ष पर भारी पड़ा. इन चार दिनों के अंदर देस के हर हिस्से में समाज के हर तबके से समर्थन की जो सुनामी उठी उसकी मिसाल महात्मा गांधी या लो...भ्रष्टाचारी मारीच  , सूर्पणखा और अन्ना विश्वामित्रएक बार फ़िर हिलने लगा था इंद्र का सिंहासन ।  भला कि जय  मेनका ने सिखलाया समझौते का आसन ॥ बढ़ी विश्वामित्र के गौरव की जद । स्वीकार हुआ ब्रह्म ऋषि का पद ।।  शरद रितु का पवार बन गया सूर्पणखा । कर न सका क...


अब देता हूँ वार्ता को विराम, सभी को राम राम ........ललित शर्मा 
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15 टिप्पणियाँ:

हमेशा की तरह चर्चा अच्छी है

मैं राजकुमार ग्वालानी जी से पूरी तरह से सहमत हूं कि हमेशा की तरह चर्चा अच्छी है।

ललित भाई, ये वनवे ट्रैफिक है...यहा आपको वापस मुड़ने कौन देगा...अभी दो साल तो क्या, इसके आगे ज़ीरो लगते ही जाना है...क्योकि ब्लॉगर हर जन्म में ब्लॉगर ही रहेगा....

जय हिंद...

बढ़िया लिंक्स दिए दादा ... आभार !

भ्रष्टाचारियों के मुंह पर तमाचा, जन लोकपाल बिल पास हुआ हमारा.

बजा दिया क्रांति बिगुल, दे दी अपनी आहुति अब देश और श्री अन्ना हजारे की जीत पर योगदान करें आज बगैर ध्रूमपान और शराब का सेवन करें ही हर घर में खुशियाँ मनाये, अपने-अपने घर में तेल,घी का दीपक जलाकर या एक मोमबती जलाकर जीत का जश्न मनाये. जो भी व्यक्ति समर्थ हो वो कम से कम 11 व्यक्तिओं को भोजन करवाएं या कुछ व्यक्ति एकत्रित होकर देश की जीत में योगदान करने के उद्देश्य से प्रसाद रूपी अन्न का वितरण करें.

महत्वपूर्ण सूचना:-अब भी समाजसेवी श्री अन्ना हजारे का समर्थन करने हेतु 022-61550789 पर स्वंय भी मिस्ड कॉल करें और अपने दोस्तों को भी करने के लिए कहे. पत्रकार-रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना हैं ज़ोर कितना बाजू-ऐ-कातिल में है.

लिंक्स तो बढ़िया हैं ही...लेख ग़ज़ब का है....

आभार इस जानकारी के लिये।

बहुत हो गया आराम अब वार्ता नित्य करनी होगी :).
बहुत बढ़िया वार्ता.हमेशा की तरह.

bahut din baad aaj fir is choupal me aana hua

achha laga

न जाने कितनी जगह यही टीपा, लीजिए यहां भी- स्‍वागतेय ताजी वैचारिक बयार. (आंधी, तूफान, सुनामी क्‍यों नहीं कहा, ऐतराज न हो.)

एक चोरी के मामले की सूचना :- दीप्ति नवाल जैसी उम्दा अदाकारा और रचनाकार की अनेको कविताएं कुछ बेहया और बेशर्म लोगों ने खुले आम चोरी की हैं। इनमे एक महाकवि चोर शिरोमणी हैं शेखर सुमन । दीप्ति नवाल की यह कविता यहां उनके ब्लाग पर देखिये और इसी कविता को महाकवि चोर शिरोमणी शेखर सुमन ने अपनी बताते हुये वटवृक्ष ब्लाग पर हुबहू छपवाया है और बेशर्मी की हद देखिये कि वहीं पर चोर शिरोमणी शेखर सुमन ने टिप्पणी करके पाठकों और वटवृक्ष ब्लाग मालिकों का आभार माना है. इसी कविता के साथ कवि के रूप में उनका परिचय भी छपा है. इस तरह दूसरों की रचनाओं को उठाकर अपने नाम से छपवाना क्या मानसिक दिवालिये पन और दूसरों को बेवकूफ़ समझने के अलावा क्या है? सजग पाठक जानता है कि किसकी क्या औकात है और रचना कहां से मारी गई है? क्या इस महा चोर कवि की लानत मलामत ब्लाग जगत करेगा? या यूं ही वाहवाही करके और चोरीयां करवाने के लिये उत्साहित करेगा?

उत्तम लिंक चयन । आभार...

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