सोमवार, 5 जुलाई 2010

मैं भी नेता बनूँगा - सबको अपनी जान प्यारी है, देश बचाने कोई नहीं आएगा - ब्लॉग4वार्ता - शिवम् मिश्रा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो
प्रणाम !

वैसे तो जीवन का हर एक दिन अपने आप में एक नया दिन, एक नया अनुभव होता है पर फिर भी हमारे जीवन में कुछ दिन ऐसे आते है जो अपनेआप में बेहद महेत्वपूर्ण होते है |

आज का दिन मेरे और कार्तिक ( मेरे बेटे ) के जीवन का एक ऐसा ही बहुत बड़ा दिन है ! आज कार्तिक पहली बार स्कूल गया |

आशा है कि मैं उसको सही शिक्षा दे पाउगा ताकि वो इस महान भारत देश का एक आदर्श नागरिक बन सके ! आप सब का आशीर्वाद भी चाहिए होगा हम दोनों को ही !

आज समय का थोडा आभाव रहा सो आज की वार्ता आपको थोड़ी छोटी लगेगी ! पहले ही आपसे माफ़ी मांगता हूँ पर यह वादा भी करता हूँ कि अगली वार्ता में आपको कोई शिकायत नहीं होगी !

तो लीजिये साहब पेश है ब्लॉग 4 वार्ता के मंच पर मेरी एक और वार्ता !

आपका
शिवम् मिश्रा
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१ वो एक मायावी कुमार विश्वास और वो एक अविस्मरणीय संध्या... :- सब माया है !!


२ संसाधन सीमित हैं, कृपया ध्यान रखें :- समीर भाई सही कह रहे है आप !

३ विवाह पुराण:- द्विरागमन के दिन हवाई अडवेंचर :- देव बाबा ...........माफ़ कीजियेगा देव बाबा नहीं अब यह है देव बाबु !

४ मसला स्वतंत्रता का, कोशिश अंग दिखाने की और विवाद समानता का :- बात में दम है !

५ मानवता के लिए प्रकृति की एक महान भेंट होमिओपैथी -सतीश सक्सेना :- मान गए भाई साहब !

६ कहना भूला नही हूँ और तुम मुझे भुला न देना.... :- हो नहीं सकता मिश्र जी !

७ नक्सलियों की हताशा :- सरकार की विफलता कहिये !

८ सिर्फ जटिलताएं ही जटिलताएं, सरलता कुछ भी नहीं....... :- अब क्या करें हम खुद जटिल जो हो गए है !

९ सबको अपनी जान प्यारी है, देश बचाने कोई नहीं आएगा :- इसको बदलना होगा !

१० भारत बंद करने से क्या होगा ? जिम्मेदार लोगों को बंद करो ! मैं इसका विरोध करता हूँ !! :- हम भी करते है !

११ गाँव की शादी के बारे में एक पोस्ट(एक कविता मुफ्त में) :- एक पर एक मुफ्त मुफ्त मुफ्त !!

१२ हल स्थाई हो, अस्थाई नहीं :- सहमत है हम भी आपसे !

१३ व्यथा- चालू चिड़िया की :- अरे बेचारी !

१४ ये देखिए...धोनी की शादी के जूठे पत्तल :- राम राम राम !! हद कर दी !

१५ माफ़ कीजियेगा... मगर! :- सही समझाइश !

१६ मैं भी नेता बनूँगा ......... :- खतरनाक इरादे है भाई !

१७ बारिश का मौसम और बचपन के वे दिन :- हमे भी याद आ रहे है !

१८ बातों ही बातों में :- क्या बात कर दी आपने !

१९ कार्टून:- दोस्त हैं कि मानते ही नहीं... :- क्या करें दिल ही नहीं मानता !!

२० नरेंद्र मोदी के लश्कर ए तैयब्बा से सम्बन्ध उजागर :- ब्रेअकिंग न्यूज़ है क्या ??

और अंत में अपनी डफली आप बजता हूँ अपनी आज की पोस्ट का लिंक दिए जाता हूँ

२१ मेरा बेटा बड़ा हो गया है !! :- आपका आशीर्वाद चाहिए होगा !

फिर मिलूगा एक और ब्लॉग वार्ता के साथ , तब तक के लिए.....

जय हिंद !!

अमृतवाणी और रामचरित मानस से लेकर सलाम नमस्‍ते और पहल तक .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

आप सबों को संगीता पुरी का नमस्‍कार , आज सोमवार मेरी वार्ता का दिन है , पुराने ब्‍लोगरों और उनकी रचनाओं की चर्चा तो सब करते हैं .. पर नए ब्‍लोगों की चर्चा अधिक आवश्‍यक है , यह सोंचते हुए मैने इस सप्‍ताह चिट्ठाजगत में शामिल सभी चिट्ठों को पढा , जिनमें से कुछ आपके सामने प्रस्‍तुत हैं .. 

मेरा फोटो


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शरद वायंगणकर

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रविवार, 4 जुलाई 2010

न्याय मिलने में देर क्या अन्याय नहीं है - कार्यपालिका का आईना है हमारी न्यायपालिका - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो
प्रणाम !

लीजिये आज की ब्लॉग वार्ता ले कर मैं फिर हाज़िर हूँ ! जिस तरह आप लोग मेरा हौसला बड़ा रहे है उस से तो पता चलता है कि मेरी दुकान ठीक चल रही है ! तो ज्यादा बाते ना करते हुए सीधे धंधे की बात करता हूँ ! आशा है बढ़िया कमाई होगी ..........आप सब के पसंद का ही स्टॉक लाया हूँ ................ इस ब्लॉग 4 वार्ता रुपी अपनी दुकान में...............एक दम ताज़ा माल है !

आपका
शिवम् मिश्रा

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१ न्याय मिलने में देर क्या अन्याय नहीं है ? :- जी बिलकुल है !

२ लो क सं घ र्ष !: कार्यपालिका का आईना है हमारी न्यायपालिका :- सुमन जी दिखा रहे है यह आईना !

३ “पाँव वन्दना” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक") :- आइये हम भी करें !

४ पगडण्डी :- आइये हम भी साथ चले "सैल" के साथ !

५ क्या आप अरुंधती राय को जानते हैं? :- नाम तो कुछ सुना सुना सा है !!

६ रविवारीय जोग - छुट्टी का दिन हँसने का दिन... :- ही ही ही ही ..............बस या और ??

७ पहली फुहार के संग सुनिए राग मियां मल्हार :- मीनू दी सुनाये और हम ना सुने ऐसे तो हालात नहीं !!

८ मरने की आरजू में जीता ही चला आया हूँ :- तो हम कौन सा पीछे है लो जी हम भी आगये !

९ यही तो है असली ब्लॉगिंग… :- रवि रतलामी जी बता रहे है !

१० ये पियानो बजता क्यों नहीं है :- पहले ठीक से बजाओ तो महाराज !

११ भारती वन्दना कविता सूर्यकान्त त्रिपाठी ’निराला’ रचित “कविश्री” से :- क्या बात है !

१२ मेरी मेट्रो का टाइम हो गया है...खुशदीप :- अरे, तो जा कर पकड़ तो लो !

१३ भारत बन्द ... बन्द कीजिए फालतू की नौटंकी ! :- सही बात है !

१४ सलाम नमस्ते हसते हसते :- अरे........... ज़रा देखिये तो सही कौन कह रहा है सलाम नमस्ते ??

१५ ग़ज़ल, / ऊपर वाले ऐसा कर दे .... :- कर भी दे यार .................अब मान भी जा !

१६ थ्री साइड ओप्पन ! पानी २४ घंटे ! फुल्ली ऐ.सी.! है कोई पार्टनर ....? :- हाँ भाई कौन जा रहा है ?

१७ सुरेन्द्र अग्निहोत्री की कविता – मत बोलो अभी! :- अब आगे क्या बताएं !

१८ पीढ़ी बिगड़ गई :- ले हम को तो पता ही नहीं चला !!

१९ धोनी की शादी और मीडिया :- बेगानी शादी में अब्दुल्ला .......... !!

२० "शहीद कब वतन से आदाब मांगता है" :- सवाल यह है कि किसी भी शहीद को मांगना ही क्यों पड़े !

२१ आइये आपको एक नई ब्‍लॉगवाणी से मिलवाएं :- चलिए जरूर मिलेगे !

२२ मिश्रा जी का नया ब्लाँग एग्रीगेटर भूतवाणी डाँट काँम(bhootvani.com) :- यह हम नहीं है भाई !

२३ आज का विचार :: चरित्र
:- आइये जाने यह भी !

२४ और फन फैलाए फुफकारता नाग रास्ता रोक कर खड़ा हो गया ....! :- बाप रे बाप ....कमाल है आप !

२५ बी हैप्पी...बी पोजिटिव... :- ठीक कहा भाई !

और अंत में २ कार्टून ...............

२६ कार्टून:- नौकरी का पहला फ़ण्डा ये है... :- सीख लो भाई !!

२७ कार्टून : जीतना है तो ........ अकेले दौड़ो !! :- व्हाट एन आईडिया सर जी !


अब स्टॉक खत्म ........अगला स्टॉक आने तक ........

जय हिंद !!


शनिवार, 3 जुलाई 2010

कैसी लड़ी जाए ये लड़ाई - क्या गुलामी हमारे जींस में है - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो
प्रणाम !

आज एक बार फिर आप सब से सामने हाज़िर हूँ एक नयी ब्लॉग वार्ता ले कर अपने इस ब्लॉग 4 वार्ता के मंच से !
उम्मीद है इस बार भी आप सब को यह वार्ता पसंद आएगी !

आपका
शिवम् मिश्रा


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१ ब्लांगबाणी!!!! तेरे नाम से :- राज भाई बता रहे है कुछ आइये सुनते है !

२ क्या गुलामी हमारे जींस में है...खुशदीप :- खुशदीप भाई ने उठाये है कुछ सवाल !

३ हमारी जान लेने के नए-नए तरीके -भाग दो :- संजीव शर्मा आगे बताते है .......!

४ हैरान हूँ ब्राज़ील की हार से :- चन्दन अपनी सुनते है !

५ अपने ब्लॉग पर 8-10 विजिटर्स ऑनलाईन देखना किसे अच्छा नहीं लगेगा? :- बात तो सही है ...आप क्या कहते है ?

६ “.. ..कुछ-कुछ होता है!” (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’) :- फिल्म नहीं है जी......... कविता है !

७ हम लोगों ने निर्गुण- निराकार शब्दों को हाउ बना डाला है ---- अमित शर्मा :- कुछ ज्ञान की बाते !

८ देशहित में आतंकवाद से निपटने हेतु उदारवादी नीतियों में परिवर्तन करना अब जरुरी हो गया है ... :- महेन्द्र मिश्र जी के विचार !

९ ऐसे सीखा बूढ़े तोते ने राम राम कहना! :- काश कि हम भी कुछ सीख लेते !

१० वो हमारे पीछे खड़े मुस्कुराते रहे :- राजकुमार जी बताते है कि वह मुस्कुराते है !

११ स्वास्थ्य के लिये शुल्क बिना सोचे समझे और वित्तीय प्रबंधन के लिये सोच समझकर ? [ Fees for Health and Wealth] :- विवेक जी की भी सुन लीजिये !

१२ बरखा की ऋतु :- आइये हम भी भीगें !

१३ Delhi Metro करें एक रोजाना का सफ़र....Rohit :- बोले तो एकदम बिंदास !

१४ कैसी लड़ी जाए ये लड़ाई, कैसी देखी जाए प्रहार? :- गजेंद्र सिंह भाटी बता रहे है

अपने पदचिन्हों को मुझे अपने हृदय में रखने दो



बिखरे सितारे ! ५) और दिन गुज़रते रहे... :- जो जीवन अनगिनत घटनाओं से भरा हुआ हो...उन लम्हों को कैसे चुनूँ?? है कोई जवाब ?

१८ विवाह के चित्र जयन्ती-कृष्ण जी :- बहन को दीजिये आशीष !

१९ भारतीय वास्तु शास्त्र तथा इसके विज्ञान आधारित मूल नियम :- पंडित जी बतायेगे और हम लाभ उठायेगे !

२० मान गए मम्‍मी की एस्‍ट्रोलोजी को !! :- देर आमद दुरुस्त आमद !


२१ आक्टोपस महाराज की जय :- आप भी जयकारा लगाइए दरबार में !

२२ जर्मनी एक अजेय टीम की तरह खेला, माराडोना का निर्वस्त्र प्रदर्शन का सपना चकनाचूर :- अब क्या कहे !?

२३ ''बहुरूपिया'' ब्लॉगर :- राजीव ओझा जी बता रहे है ब्लॉग और ब्लॉगर के बारे में !

२४ बरसात :- अब जब बरसात होगी तो मन तो बावरा होगा ही ना !

और अंत में एक कार्टून

२५ कार्टून : अब उत्तरप्रदेश का नाम क्या होगा?



अगली बार फिर मुलाकात होगी कुछ और ब्लोगों की वार्ता के साथ .............तब तक के लिए .....

जय हिंद !

गुम होते संपादक--मयखाने में--जीने-खाने दो--ब्लाग4वार्ता-------ललित शर्मा


नमस्कार, कल फ़ारगेटर्स डे मनाया गया, परसों डॉक्टर्स डे मनाया गया था। मतलब भुलक्कड़ों के लिए भी एक दिन तय कर दिया गया। इनकी चर्चा भी इसी दिन की जाएगी। वैसे तो हर आदमी भुलक्कड़ है। कुछ न कुछ भूल ही जाता है। मैं भी अपनी गाड़ी की चाबी भूल जाता हूँ। सबसे ज्यादा चितां मुझे गाड़ी की चाबी भूलने की रहती है। अगर धोती कुर्ता पहनते तो कोई चिंता नहीं थी। जनेऊ में टांग लेते, लेकिन पतलुन बुश्शर्ट पहनने का एक नुकसान यह भी है और भोगना भी पड़ेगा। अब चलते हैं आज की वार्ता की ओर कहीं भुलक्कड़ दिवस के कारण वार्ता ही न भूल जाऊं.......एक बार बिजली जा चुकी है आधी पोस्ट गायब हो चुकी है, मेहनत पानी में मिल चुकी है--इसलिए मैं कुछ लिंक फ़टाफ़ट दे रहा हूँ...............

सबसे पहले बधाई देते हैं पंकज मिश्रा जी (चर्चा हिन्दी चिट्ठों की) को, वे पिता बन गए हैं। उनके घर में पुत्र रत्न ने जन्म लिया है। बालक के जन्म लेते ही कथरी का भी इंतजाम हो गया है। बिना शब्दों की पोस्ट प्यार...* *मासूमियत...* ** *विदाई...* *दोस्ती...* अलौकिक... फैशन बन गया है "धार्मिक विचारों का विरोध"आजकल धर्म के खिलाफ बोलना फैशन समझा जाने लगा है। चाहे बात तर्कसंगत हो अथवा ना हो, लेकिन ऐसे विचारों के सर्मथन में हज़ारों लोग कूद पढ़ते हैं। ऐसे विचारकों को "सुधारवादी" जैसी उपाधियों से अलंकरित किया जाता है...

पोस्टकार्ड का जन्मदिन और गुम होते संपादक के नाम पत्र आज महज संयोग है कि जब मैं संपादक के नाम पत्र और पोस्टकार्ड की महत्ता पर लेख लिखने बैठा तभी पता चला कि आज एक जुलाई को पोस्टकार्ड का न केवल जन्म हुआ था बल्कि उसने अपने जन्म के सौ साल पूरे कर लि...सच बोलूँगा तो माँ मारेगी और झूठ बोलूँगा तो बाप कुत्ता खायेगा एक फिल्म आई थी "साधू और शैतान" और उस फिल्म के कामेडियन हीरो नायक ने उसमें एक डॉयलाग बोला था *"सच बोलूँगा तो माँ मारेगी और झूठ बोलूँगा तो बाप कुत्ता खायेगा"*। मेरे साथ गाहे-बगाहे ऐसी परिस्थितियाँ आती रहती ...

मयखाने में कुछ 'लस्ट' ,कुछ 'हीट' , कुछ 'डस्ट'मानसून में देरी के चलते दिमाग़ भन्नाया हुआ है ! आजकल दिल्ली में 'हीट एंड डस्ट' के साथ 'स्वेट' यानि पसीना भी भरा है । पिछले साल जब मैंने ये पोस्ट लगाई थी तो बारिश हो गयी थी , देखें अबके क्या होताहै ! * सा...घर तुम्हारा है , मैदान में जाकर लड़ो , नायक बन कर दिखाओ , झोंक दो पूरी ताकत और जीत कर आओदेश में पांच राज्य नक्सली हिंसा से बुरी कदर प्रभावित हैं । सर्वाधिक खराब हालात छत्तीसागढ़ में देखे जा सकते हैं ।क्या इस खराब हालात के लिए अकेले नक्सली दोषी हैं ? क्या वे लोग भी दोषी नहीं हैं , जिन पर...

आजाद हिन्द फौज अगले दिन 5 जुलाई (1943) को ‘इण्डियन नेशनल आर्मी’ की कमान थामकर नेताजी इसका नामकरण करते हैं- ‘आजाद हिन्द फौज’। मनीला से स्वयं तोजो समय पर पहुँचते हैं- परेड देखने। परेड की सलामी लेने के बाद नेताजी जो कुछ क...सावित्री की ईज्जतसहेली के साथ खेलते-खेलते शाम हो चला था. दस साल की सावित्री जैसे ही घर पहुंची उसकी मां ने उसे बाल पकङकर खींचा और जोरदार थप्पर लगाया- --"कितनी बार समझाया है कि शाम ढलने से पहले घर आ जाया कर. दिन की रोशनी में ...

काल सलामआमतौर पर अपनी विचारधारा के लिए सराहे और बुद्धिजीवी वर्ग में भी "हमारे अपने भटके हुए लोग" मान कर पुचकारे जाने वाले नक्सली मानवता को कलंकित कर रहे हैं और सभ्यता से तो उनको कभी कोई लेना-देना नहीं था, हैवानिय...आज इन बाहों में रक्तिम लाली आज सूर्य की यूं तन मेरा आरक्त किये है. तिमिर निशा का होले होले मन से ज्यूँ निकास लिए है. उजास सुबह का फैला ऐसा जैसे उमंग कोई जीवन की आज समर्पित मेरे मन ने सारे निरर्थक भाव किये हैं लो फैला द...

ताऊ पहेली - 81 प्रिय बहणों और भाईयों, भतिजो और भतीजियों सबको शनीवार सबेरे की घणी राम राम. ताऊ पहेली *अंक 81 *में मैं ताऊ रामपुरिया, सह आयोजक सु. अल्पना वर्मा के साथ आपका हार्दिक स्वागत करता हूं. जैसा कि आप जानते ही हैं क...तेरे मेरे बीच दीवार क्यूँ है ....कौन है जो आवाज़ देता है* *हौसलों को परवाज़ देता है* *तेरे मेरे बीच दीवार क्यूँ है * *इश्क नया आगाज़ देता हैकल है ग्रहों का खास गत्‍यात्‍मक योग .. क्‍या पडेगा आप पर प्रभाव ??गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिषीय दृष्टि से कल यानि 3 जुलाई का दिन खास है, क्‍यूंकि बृ‍हस्‍पति और चंद्र को केन्‍द्रगत करते हुए आसमान में बाकी ग्रहों की स्थिति के संयोग से एक खास प्रकार का योग तैयार हो रहा है। यह योग ...

कुल्लू-मनाली जाएं तो "मलाणा" का चक्कर भी लगाएंहमारा देश विचित्रताओं से भरा पड़ा है। अनोखे लोग, अनोखे रीति-रिवाज, अनोखे स्थल। ऐसी ही एक अनोखी जगह है, हिमाचल की पार्वती घाटी या रूपी घाटी मे 2770मी की ऊंचाई पर बसा गावं "मलाणा"। विद्वानों के अनुसार यह विश...दर्द से रिश्ता (एक अनुभूति ,मेरे जीवन की)दर्द से रिश्ता (एक अनुभूति ,मेरे जीवन की) मैंने सुख दुःख के, तानों ,बानो से, एक गुल है बनाया, सुख को छोड़ , मैंने दुःख को , अपना बनाया. मैंने ऐसा जाल बुना, ना जाने क्यों ? मैंने दुःख को चुना. जीवन में मि...

इसको जीने-खाने दो...जीवन दुःख की कथा है. हर व्यक्ति के जीवन में एक व्यथा है. लेकिन समझदार उसे पार कर लेता है. दुःख को साथी बनाने के लिये कवि प्रेरित करते रहे है. सुख-दुःख और संघर्ष के विभिन्न रूपों को सोचते हुए कुछ शेर बन गए...ये कैसा अहसास है...दिन-रात महसूस होता है जो... ये कैसा अहसास है??? है तो मुझसे दूर... पर... फ़िर भी मेरे सबसे पास है... मेरी मंजिल, मेरा साहिल और मेरी जीने की जुस्तज़ू जानती हूँ मुश्किल है ये सोचना... पर फ़िर भी हर आरज़ू के प...एक आतंकवाद ऐसा भी - अनचाहे संदेशों का आतंककंप्यूटर से जिनका नाता है और जो ई-मेल करते हैं, वे सभी स्पैम से अच्छी तरह वाकिफ होंगे। दरअसल, इनबाक्स में आने वाले अनचाहे संदेशों को ही स्पैम कहा जाता है। वैसे इसका इतिहास 30 साल पुराना है। दो मई 1978 को ...

मां दुआ करती हुई ख़्वाब में आ जाती है -सतीश सक्सेनाआज डैशबोर्ड पर नज़र पड़ते ही, अपने नाम समर्पित यह पोस्ट देख चौंक गया मैं , पता नहीं आपको क्या अच्छा लगा जो इतनी खूबसूरत ग़ज़ल भेंट दी है मुझे ! जहाँ तक मुझे याद आता है, शायद ही कभी आपक... वो भारतिया जिसे वक्त ने हम से दुर कर दिया, ओर उन के अपने उन्हे भुल गयेकहते है आदमी को गुलामी बहुत कुछ करने पर मजबूर कर देती है, ओर इस पोस्ट के साथ ही मै यह भी बता दुं कि विदेशी भाषा हमेशा गुलाम ही बोलते है, जेसे कि हम अग्रेजी को बोल कर साहब बन जाते है??? लेकिन सिर्फ़ अपनी नजर...

कल जो टूटे थे रिश्ते आज वो लगते झूठे हैं .... ये फोटो ओट्टावा में टूलिप फेस्टिवल का है.... कल जो टूटे थे रिश्ते आज वो लगते झूठे हैं प्रीत डगर के काँटों से मेरे पाँव के छाले फूटे हैं शिकवों का दस्तूर नहीं ना है गिलों का कोई रिवाज़ नेह की वो सारी क...क्या 100 -200 रुपये महीना फ़ीस ज़्यादा दे कर अपना और अपने बच्चे का समय बचाना ज़्यादा उचित नहीं ?एक मुसीबत खड़ी हो गई है भाई ! अगर आप में से कोई सज्जन इस मुसीबत से बचने का कोई उपाय जानते हों तो कृपया मुझे अवश्य बताएं . जिस स्कूल में मेरा बेटा पढता है, उसने कुछ फ़ीस वगैरह बढ़ा दी है जिसके ...

जोधपुर के मिर्ची बड़े और सेव बेरहर शहर में खाने पीने के उत्पादों में कुछ खास होता है और वे उत्पाद उस शहर के नाम से जुड़ जाते है जैसे आगरा का पैठा, रेवाडी की रेवडी आदि, ठीक इसी तरह जोधपुर में भी खाने पीने के कई उत्पाद है जो जोधपुर की पहचान है जैसे मिर्ची बड़ा,मावे और प्याज की कचोरी,माखानियाँ लस्स.......मैं एक पार्टी बनाने की सोच रहा हूँमैंने हाल ही में देश की चमकती और नाजुक दोनों हालत को देखकर एक पार्टी बनाने की बात सोची है,  अब क्यूंकि पार्टी को सफल बनाना है, इसलिए कुछ बातों पर विशेष ध्यान दिया गया है| निम्नलिखित विशेष योग्यताएं आप रखते है तो तुरंत संपर्क करें : पत्रकारों के लिए हमेशा रेड

कार्टून:- हिन्दी ब्लागरों की कमाई का रास्ता खुल गया



अब चर्चा को देते हैं विराम --- आपको ललित शर्मा का राम राम ........

शुक्रवार, 2 जुलाई 2010

काश तुम हिजङे होते-विशेष पैकेज दिये जाते----ब्लाग4वार्ता----ललित शर्मा

सत्ता परिवर्तन के बाद अच्छे-अच्छों को धक्के खाने पड़ते हैं। इसका उदाहरण कल देखने मिला। कभी जार्ज साहब के घर से अपनी सत्ता चलाने वाली जया जेटली को उसी घर में घुसने की इजाजत नहीं मिली। समय बदलते देर नहीं लगती। कल जया जेटली अपना कुछ सामान लेने जार्ज साहब के घर आई थी। लेकिन वहां के कर्मचारियों ने उन्हे अंदर घुसने नहीं दिया और पुलिस बुला ली। जार्ज साहब अल्जाईमर (भूलने की बिमारी) से ग्रस्त हैं और 3कृष्णमेनन मार्ग की कोठी से उनकी पत्नी उन्हे आकर अपने घर ले गयी। तब जार्ज साहब वहीं हैं। अब मै ललित शर्मा आपको ले चलता हूँ आज की ब्लाग वार्ता पर.....

अब चलते हैं ब्लाग क्रांतिदूत पर जहां अरविंद झा एक लघु कथा कह रहे हैं कोठा (भाग-एक)----काश तुम हिजङे होते. आज बाप और बेटा दोनो एक साथ कोठे पर आया. पुतलीबाई से लङकी देने को कहा. किसी एक के साथ बेटा एक कमरे में चला गया. पुतलीबाई ने उसके बाप से कहा--" बेटा को तो सही जगह पे पहुंचा ही दिया. अब तुम यहां क्या कर रहे ह...सुप्रसिद्ध साहित्यकार और ब्लागर गिरीश पंकज का इंटरव्यू पढेँ-1साहित्यिक पत्रिका "सदभावना दर्पण" के संपादक और "साहित्य अकादमी,नई दिल्ली" के सदस्य व साहित्यकार,गजलकार,व्यंगकार तथा अब ब्लागर बन चुके गिरीश पंकज जी के साथ इटिप्स ब्लाग टीम ने बातचीत की । उनका यह इंटरव्यू ह...

जा रै प्यारे, देखे थारे, झूठे सैं ये रिश्ते सारे यह रचना (हरियाणवी रागिनी) मेरे मित्र "कृष्ण टाया" जी की है। पसन्द आये तो साधुवाद जरूर दीजियेगा। *कवि ने पुराने समय और आज के जमाने की तुलना की है। बीते समय में रिश्तों की क्या अहमियत होती थी और आज के रिश्ते...जब अखबार को माफी मांगनी पड़ी जनसंपर्क विभाग की दादागिरी कोई असमान्य बात नहीं है और यदि सचिव स्तर का अधिकारी बात बात पर अखबारों की जमीन नपवाने या फिर विज्ञापन बंद करने की धमकी दे तो गले तक गफलत में डूबे अखबार मालिकों का चूहा बनना स्वाभाव...

१ जुलाई , १ साल,१०० वी पोस्ट "राँझा राँझा ना कर हीर " सौवी पोस्ट लिखने जा रही हूँ ये तो पता था पर आज १ जुलाई को मेरे ब्लॉग का साल पूरा हो रहा है ये अनायास पता चला .... बीज तो अंकुरित हो गया कुछ नन्ही -नन्ही कोंपलें भी दीख रही है ...मन खुश है ..अरे दोहरी ख़ुश...मैं तो एक शमा हूं , मैं जलती हुई शमा हूं , यह कैसे समझाऊं उन परवानों को , तरह तरह की भाषा जिनकी , और जाति भी जुदा जुदा | बिना बुलाये आते हैं , जब तक कुछ कहना चाहूं, जल कर राख हो जाते हैं , बदनाम मुझे कर जाते है | मैं जलती हूं र...

लौटा दो मेरा बस्तर बस्तर तुमने मुझे शर्मशार कर दिया तुम्हारे नाम से डरते हैं मेरे बच्चे पत्नी कभी लौट कर आने को नहीं कहती सुना है पत्ते काले पड़ गए हैं और हवा में जलते हुए मांस के बदबू आती है मेरे बस्तर ऐसे तो ना थे तुम ना ही ऐ...कहीं अपनी अपनी हाँकने का नाम ही तो जीवन नहीं ??? मेरे साथ ये अक्सर ऎसा होता है, कि, जब भी कभी जीवन जी नहीं रहा होता हूँ तो यूँ ही इस के बारे में सोचने लगता हूँ और जब यह सोच के बाहर होने लगता है बैठे ठाले इसे पकडने की नाकाम सी कौशिश में कुछ लिखने लगता हूं...

कैटल क्लास और लगेज क्लास हमारी नियति जब भी कभी हवाई यात्रा करनी हो तो मनाएं कि "पैसेज" की तरफ की सीट मिले। रेल यात्रा में चाहे ए सी 3टियर हो या स्लीपर भूल कर भी साईड वाली दो बर्थों का ना सोचें। ऐसा ना हो कि सफर, Suffer बन कर रह जाए। शशि थुरू...गफलत की ताक में गुरिल्ले ज़रा सी* गफलत और लाशों के ढेर ... ज़रा सी चूक और गोलियों की बौछार ... ज़रा सा बोझिल हुए और जंगल के घने झुरमुट में अचूक निशाने पर झांकती कातिल निगाहें स्वचालित हथियारों से लाशें गिनना शुरू कर देती हैं| नक्सल...

अगेहा तितली पिछले साल एक दोस्त से ' *संशो* ' ... तेजफल क पेड़ मिला। उस पत्ते के ख़ास अपना सुगंध और स्वाद है। एक पत्ते सजाने से सब्जी काफ़ी अच्छी हो जाती है। हम भी वसंत में नए नए तेजफल के पत्ते कभी कभी खाते थे। करीर, ...जोक डे पर विशेष - अनोखी ABCD !! आइये एक नयी तरह की ABCD सीखते है ! आप सभी को हैप्पी जोके डे !! लीजिये साहब आप सब की शिकायत दूर किये देते है ................जोके डे पर आइये सीखते एक नयी तरह की ABCD !! 

और वह फाँसी चढ़ गया ............ आखिर उसे अपनी करनी की सज़ा मिलीवह पूरी जेल में लोकप्रिय था . पूजा पाठी ,कर्मकांडी सब से हँस के ही मिलता था . लोग चकित होते थे वह जेल में क्यों है .कोई नहीं मानता था वह अपराधी हो भी सकता है . उसे क़त्ल के जुर्म में फाँसी की सज़ा हो चुक...इस सब के लिये ही देशवासियों से जमा टैक्स से कश्मीर के लिये विशेष पैकेज दिये जाते हैं..इस चित्र को देखिये (साभार आईबीएन). किस तरह से सुरक्षाबल के जवान के पीछे मुंह पर नकाब बांधे हुये *"भटके हुये नौजवान (जिन्हें विशेष पुनर्वासन योजना देने की बात की जा रही है)"* हाथ में लकड़ी के मोटे डण्डे, पत...

इसी को नसीब कहते हैं… कर्म करो, फल की चिन्ता मत करो”* महाभारत शुरू होने से पहले श्री कृष्ण ने अर्जुन से यही कहा था। *“नौकरी करो, पहली तारीख को तनख्वाह की आशा मत करो”* उत्तर प्रदेश सरकार अपने कर्मचारियों से वर्षों से...
पालने से पालकी तक बेटियों के लिये गिरीश बिल्लोरे मिसफिट:सीधीबात - पर पंडवानी के नायक भीम और महाभारत के नायक अर्जुन यह सर्वविदित तथ्य है कि छत्तीसगढ़ की लोकगाथा पंडवानी महाभारत कथाओं का लोक स्वरूप है। वैदिक महाभारत के नायक अर्जुन रहे हैं जबकि पंडवानी के नायक भीम हैं। पिछले पोस्ट में पंडवानी की तथाकथित शाखा और शैली के स...

थैंक्यू ब्लागवाणी !! वैरी, वैरी मच थैंक्यू !!!नयी रामकथा की सीता दुविधा में अभी तक अटकी पड़ी है। ब्लागवाणी चालू है लेकिन नए फीड नहीं ले रही है। जिस तरह की बातें सामने आ रही हैं उस से लगता है यदि ब्लागवाणी को वापस लौटना है तो भी कुछ समय तो इंतजार करना ...हमें मालूम था कि वो बेवफ़ा ही निकलेगी उसने अपने हाथों में मेहंदी लगा रखी थी हमने उसकी डोली कन्धे पे उठा रखी थी मालूम तो था ही कि वो बेवफ़ा निकलनी है इसलिए बहन उसकी पहले से पटा रखी थी 

चलते-चलते आज का कार्टून


वार्ता को देते हैं विराम--आप सभी को ललित शर्मा का राम-राम

गुरुवार, 1 जुलाई 2010

लहू से तर रहे बस्तर-सब्र का इम्तिहान न लो--ब्लाग4वार्ता----ललित शर्मा

नक्सलियों फ़िर कायराना हरकत की है, सुरक्षा बलों पर घात लगा कर हमला किया और 26 जवान शहीद हो गए। दंतेवाड़ा की घटना के बाद से केन्द्र सरकार से सेना भेजने की मांग की जा रही है,लेकिन गृहमंत्री चिदम्बरम इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं जिसका परिणाम सुरक्षा बल भोग रहे हैं। लगता है नक्सलियों की पहुंच भी उपर तक है जो इनके फ़ैसलों को प्रभावित कर रही है। अन्यथा इतने लोग मारे नहीं जाते। अब मैं ललित शर्मा आपको ले चलता हूँ आज की ब्लाग वार्ता पर.............

पहला चिट्ठा लेते हैं अहफ़ाज रसीद का, इन्होने नक्सलियों को वेल डन कहा है अब क्यों कहा है ये आप स्वयं पढिए well done नक्सलियों...good job? ( लहू- लुहान घटना स्थल पर जवानों के रक्त और जूते..) ( घटना -स्थल से ट्रैक्टर और बाद में सेना के विमान से भेजे गये शव) ( इसी रास्ते के उपयोग से जवानों को मदद मिली) ...अगला चिट्ठा लेते हैं भाई सूर्यकांत गुप्ता का वे बहुत गुस्से में है नक्सली वारदात के लिए कहते हैं सब्र का इम्तिहान न लो, (1) हे नक्सली, असली है या नकली! साक्षात तू नर पिशाच है कौन है तेरा उपासक "कायराना हरकत" कह करते इति श्री, तुम्हे देते सह, तभी तंदूरी बना रहा तू मानव की बेशक (2) क्या उसूल है, क्यों करता तू यह सब, इस...

पहले जिंदगी सरकती थी , अब दौड़ लगाती है. पिछली पोस्ट के वादानुसार, प्रस्तुत है एक कविता अस्पताल में लिखी गई , आँखों देखी , सत्य घटनाओं पर आधारित । शहर के बड़े अस्पताल में ,खाते पीते लोग भारी भरकम रोग का उपचार कराते हैं । तीन दिन बाद रोगी हृष्..वे तुम्हारी पकड़ में नहीं आएँगी जब तुम बाहरी चीजों को देखोगे और उन्हें पाना व रखना चाहोगे, वे तुम्हारी पकड़ में नहीं आएँगी, दूर भागेंगी मगर जिस वक्त तुम उनसे मुँह फेर लोगे और ज्योतिस्वरूप अपनी अन्तरात्मा के रूबरू होंगे, उसी क्षण अ...

व्यंग्य: धर्मपत्नी की महिमा *भय्या पत्नी की भी अजीब ही महिमा है। पता है कि आप कार्यालय में हैं, अब रोज़ ही जाते हैं तो वहीं होंगे। लेकिन श्रीमती जी का फोन पर एक ही सवाल होता है ‘कहां हो?’।* अब बन्दा परेशान! हम भी चुटकी लेने के लिए बो...आंखों में बेशरमी और जीवन का सच... छत्तीसगढ में बैठी भाजपा सरकार जिस तरह से कार्य कर रही है वह आने वाले दिनों के लिए कहीं से शुभ संकेत नहीं है। अधिकारी और नेताओं के बीच तालमेल से विकास तो हो नहीं रहा है केवल छत्तीसगढ़ को लूटने की साजिश चल रही ...

अपने मोहल्ले की लड़कियों के बारे में लगता है कि मैं एक बार फिर कविताओं की ओर लौटने लगा हूं। यह सही हो रहा है या गलत मैं नहीं जानता, बस इतना कह सकता हूं कि एक छटपटाहट ने घेर रखा है जिससे मुक्त होना थोड़ा कठिन लग रहा है। पिछले कुछ समय से मैं लग...चिर-प्रतीक्षा कब तक अवगुंठित रहूँ जीवन या जीवन-क्षरण में? मैंने तो न देर की प्रिय! आपके शुभ संवरण में...... प्रेम वर्षा से प्रिय तुम आज अंतस सिक्त कर दो, संग रहना तुम सदा ही प्रेम के इस आचरण में....... मैंने तो न देर की...

चश्मदीद मैं भी हूं. राक्षस बाप के हाथों लक्ष्मी बिटिया के गर्दन कटने का, राखी पहनानेवाली हाथों को भरोसे की अंगुली पकङाकर कोठे तक पहुंचाने का चश्मदीद मैं भी हूं. मजहब की आग में गाजर-मूली की तरह इंसानों के कटने का, मासूमों पर बो.हम ऐसा क्यों करते हैं ? बचपन में हम बहनें बहुत लड़ा करती थीं ..सभी भाई बहन का ये जन्म सिद्ध अधिकार है ..और लड़ते हुए गुस्से में एक दूसरे को ना जाने क्या क्या कह दिया करते थे .तब मम्मी बहुत डाँटती थीं , कि शुभ शुभ बोला करो, ना ज...

एक अदृश्य सूली हर सुबह समेटती हूँ ऊर्जाओं के बण्डल और हर शाम होने से पहले छितरा दिया जाता है उन्हें कभी परायों के तो कभी तथाकथित अपनों के हाथों.. कई बार तो.. कई-कई बार तो भरनी चाही उड़ान 'हम परों से नहीं हौसलों से उड़ते...लहू से तर रहे बस्तर हमें अच्छा नहीं लगता बस्तर फिर लहूलुहान हो गया; लगता है हम छत्तीसगढ़ के लोग केवल लाशें गिनाते जायेंगे. आज हम गिन रहे हैं, पता नहीं कल हमें भी कोई गिनने बैठ जाए.सरकार असफल होती जा रही है और उधर नक्सलियों के हौसले बुलंद होते जा ...

कुतुबमीनार को नीचा दिखाने की कोशिश भी हुई थी. दिल्ली की कुतुबमीनार तो खैर दिल्ली की पहचान ही बन गयी है। परन्तु इसको भी पीछे छोड़ने की कोशिश की गयी थी बीते जमाने मे। जहां कुतुबमीनार खड़ी हो आकाश से बातें कर रही है उसी प्रांगण मे और भी बहुत से बने-अधबने अ...क्या आप भी बनाना चाहते है इन्डली व ब्लोगिरी जैसा ब्लॉग एग्रीगेटर ?जब से सबका चहेता और लोकप्रिय हिंदी ब्लॉग एग्रीगेटर ब्लॉगवाणी की सांसे अटकी पड़ी है तब से हर किसी के मन में हलचल मच रही है कि काश हिंदी ब्लॉग एग्रीगेटर्स की संख्या ज्यादा हो ताकि कोई एक या दो एग्रीगेटर पर नि...

समझदार या नासमझ??? कभी-कभी कुछ बातें बिलकुल ही समझ से परे होती हैं... समझ नहीं आता कि हम किस पाले में हैं, या वो हमें क्या समझते हैं... कभी हम उनके लिए दुनिया में सबसे ज़्यादा समझदार इंसान होते हैं और फ़िर कभी अचानक से पूरे ब...नागा बाबा मरा नहीं है ........ यादवचंद्र पाण्डेय की बाबा नागार्जुन को समर्पित एक कविताआज बाबा नागार्जुन का 100 वाँ जन्‍मदिन है। आज से उन का जन्मशती वर्ष आरंभ हो गया है। बाबा के बारे में कुछ भी लिख कर सूरज को दिया नहीं दिखाना चाहता। उन के जीवन, कृतित्व को कौन नहीं जानता? यादवचंद्र पाण्डेय उ...

"मैंने देखा है सब कुछ सितारों भरी रातें, प्यार की बातें...अरे..अरे..अरे...इतनी तेज सीढिय़ां मत चढ़ो, गिर जाओगी.रुक जाओ...रुक जाओ...अरे रुको भी. लड़का पीछे से चिल्लाता रहा. लेकिन लड़की के कान आज मानो सुनने के लिए थे ही नहीं. सिर्फ बालियां पहनने के लिए थे. गोल-गोल ...दिन है सुहाना आज पहली तारीख है किशोर कुमार का गाया यह गीत आज भी उतना ही प्रासंगिक लगता है जैसे ही अभी अभी घडी के कांटे नें पहेली तारीख का संकेत दिया बरबस ही यह गाना याद आ गया शायद आप को भी पसंद आये* ** *दिन है सुहाना आज पहली तारीख है*...

पति, पत्नी और वो...खुशदीप क्या लिखूं आज...मुद्दों की तो इस देश में कोई कमी नहीं...लेकिन आज किसी भी मुद्दे पर लिखने का मूड नहीं है...होता है जनाब कभी कुछ नहीं लिखने का मूड भी होता है...लेकिन फिर भी लिखना है...चलो आज ऐसा ही करके देखत...भारत की जनगणना 2011 : एक गाँव से सीधा प्रसारण सुबह 5:48, 27 जून 2010 दिन रविवार* आसमान में घुँघराले बादल छाये थे, जिनसे रह रह कर एकाध बूँद टपक पड़ती थी। पूरब से आने वाली ठंडी हवायें अपनी मस्तानी चाल से बहती हुई, पेड़ क...

आज प्रियंकर, राजकुमार ग्वालानी, राजेश त्रिपाठी तथा विनोद पाराशर का जनमदिन हैआज 1 जुलाई को - अनहद नाद वाले प्रियंकर, - राजतन्त्र व खेलगढ़ वाले राजकुमार ग्वालानी, - राजेश त्रिपाठी - नया घर वाले विनोद पाराशर का जनमदिन है बधाई व शुभकामनाएँ आने वाले जनमदिन आदि की जानकार...पहली जुलाई है--स्कूल चलो--स्कूल चलोआज जुलाई की पहली तारीख है, स्कूल जाने का दिन। जब पहली बार स्कूल में नाम लिखाने गए दादा जी के साथ तो इतना भय नहीं था। लेकिन जब एक साल बाद दूसरी क्लास की पढाई शुरु होने को थी तो स्कूल जाने का मन ही नहीं था।...

ये गाँव है गाँव.....अमरीका नहीं.....खड़खड़ीया दुपहरी.....लूची वाली आँच.....जनसंख्या वाली संख्या..........सतीश पंचमजब गर्मी के मौसम में तपिश के साथ पछिवहीं लूची वाली आँच चेहरे पर पड़ती है तो लगता है जैसे चेहरे पर किसी वेल्डिंग नोजल का मुंह खोल दिया गया है। एकदम आग। रस्ता चलना दूभर ....... बाहर निकलने में ज...“ग़ज़ल में प्रार्थना” कोई फूलों का प्रेमी है, * * * *कोई कलियों का दीवाना! * * मगर हम उसके आशिक हैं, वतन का हो जो परवाना!! जवाँमर्दी उसी की है, जो रक्खे आग को दिल मे, हमारी शान का परचम था, ऊधम सिंह वो मरदाना! म...
 
चलते चलते आज का कार्टून
सुरेश शर्मा (कार्टूनिस्ट)  द्वारा CARTOON DHAMAKA -पर

अब चर्चा को देता हूँ विराम---आप सभी को ललित शर्मा का राम राम--मिलते हैं एक ब्रेक के बाद.....................

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