रविवार, 4 जुलाई 2010

न्याय मिलने में देर क्या अन्याय नहीं है - कार्यपालिका का आईना है हमारी न्यायपालिका - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो
प्रणाम !

लीजिये आज की ब्लॉग वार्ता ले कर मैं फिर हाज़िर हूँ ! जिस तरह आप लोग मेरा हौसला बड़ा रहे है उस से तो पता चलता है कि मेरी दुकान ठीक चल रही है ! तो ज्यादा बाते ना करते हुए सीधे धंधे की बात करता हूँ ! आशा है बढ़िया कमाई होगी ..........आप सब के पसंद का ही स्टॉक लाया हूँ ................ इस ब्लॉग 4 वार्ता रुपी अपनी दुकान में...............एक दम ताज़ा माल है !

आपका
शिवम् मिश्रा

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न्याय मिलने में देर क्या अन्याय नहीं है ? :- जी बिलकुल है !

लो क सं घ र्ष !: कार्यपालिका का आईना है हमारी न्यायपालिका :- सुमन जी दिखा रहे है यह आईना !

“पाँव वन्दना” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक") :- आइये हम भी करें !

पगडण्डी :- आइये हम भी साथ चले "सैल" के साथ !

क्या आप अरुंधती राय को जानते हैं? :- नाम तो कुछ सुना सुना सा है !!

रविवारीय जोग - छुट्टी का दिन हँसने का दिन... :- ही ही ही ही ..............बस या और ??

पहली फुहार के संग सुनिए राग मियां मल्हार :- मीनू दी सुनाये और हम ना सुने ऐसे तो हालात नहीं !!

मरने की आरजू में जीता ही चला आया हूँ :- तो हम कौन सा पीछे है लो जी हम भी आगये !

यही तो है असली ब्लॉगिंग… :- रवि रतलामी जी बता रहे है !

१० ये पियानो बजता क्यों नहीं है :- पहले ठीक से बजाओ तो महाराज !

११ भारती वन्दना कविता सूर्यकान्त त्रिपाठी ’निराला’ रचित “कविश्री” से :- क्या बात है !

१२ मेरी मेट्रो का टाइम हो गया है...खुशदीप :- अरे, तो जा कर पकड़ तो लो !

१३ भारत बन्द ... बन्द कीजिए फालतू की नौटंकी ! :- सही बात है !

१४ सलाम नमस्ते हसते हसते :- अरे........... ज़रा देखिये तो सही कौन कह रहा है सलाम नमस्ते ??

१५ ग़ज़ल, / ऊपर वाले ऐसा कर दे .... :- कर भी दे यार .................अब मान भी जा !

१६ थ्री साइड ओप्पन ! पानी २४ घंटे ! फुल्ली ऐ.सी.! है कोई पार्टनर ....? :- हाँ भाई कौन जा रहा है ?

१७ सुरेन्द्र अग्निहोत्री की कविता – मत बोलो अभी! :- अब आगे क्या बताएं !

१८ पीढ़ी बिगड़ गई :- ले हम को तो पता ही नहीं चला !!

१९ धोनी की शादी और मीडिया :- बेगानी शादी में अब्दुल्ला .......... !!

२० "शहीद कब वतन से आदाब मांगता है" :- सवाल यह है कि किसी भी शहीद को मांगना ही क्यों पड़े !

२१ आइये आपको एक नई ब्‍लॉगवाणी से मिलवाएं :- चलिए जरूर मिलेगे !

२२ मिश्रा जी का नया ब्लाँग एग्रीगेटर भूतवाणी डाँट काँम(bhootvani.com) :- यह हम नहीं है भाई !

२३ आज का विचार :: चरित्र
:- आइये जाने यह भी !

२४ और फन फैलाए फुफकारता नाग रास्ता रोक कर खड़ा हो गया ....! :- बाप रे बाप ....कमाल है आप !

२५ बी हैप्पी...बी पोजिटिव... :- ठीक कहा भाई !

और अंत में २ कार्टून ...............

२६ कार्टून:- नौकरी का पहला फ़ण्डा ये है... :- सीख लो भाई !!

२७ कार्टून : जीतना है तो ........ अकेले दौड़ो !! :- व्हाट एन आईडिया सर जी !


अब स्टॉक खत्म ........अगला स्टॉक आने तक ........

जय हिंद !!


13 टिप्पणियाँ:

वाह वाह ..
क्‍या बात है !!

वाह बहुत बढ़िया.

वाह वाह जी,बहुत बढ़िया चर्चा रही आज की

sundar-sundar link mile hai bhai...badhai.

बढिया स्टाईल में लिखा है भैया....
वाह वाह हमें तो नया माल मिलेगा रोजाना.... बोले तो एकदम फ़्रेस.

छूटा न कोइर् पर्चा इतनी है सटीक चर्चा

शिवम, बढ़िया चर्चा रही ...जारी रखो प्रयास :)

वाह बहुत बढ़िया.

वाह काफी समेट लिया है !

तलाश जिन्दा लोगों की ! मर्जी आपकी, आग्रह हमारा!!
काले अंग्रेजों के विरुद्ध जारी संघर्ष को आगे बढाने के लिये, यह टिप्पणी प्रदर्शित होती रहे, आपका इतना सहयोग मिल सके तो भी कम नहीं होगा।
=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=

सागर की तलाश में हम सिर्फ बूंद मात्र हैं, लेकिन सागर बूंद को नकार नहीं सकता। बूंद के बिना सागर को कोई फर्क नहीं पडता हो, लेकिन बूंद का सागर के बिना कोई अस्तित्व नहीं है। सागर में मिलन की दुरूह राह में आप सहित प्रत्येक संवेदनशील व्यक्ति का सहयोग जरूरी है। यदि यह टिप्पणी प्रदर्शित होगी तो विचार की यात्रा में आप भी सारथी बन जायेंगे।

ऐसे जिन्दा लोगों की तलाश हैं, जिनके दिल में भगत सिंह जैसा जज्बा तो हो। गौरे अंग्रेजों के खिलाफ भगत सिंह, सुभाष चन्द्र बोस, असफाकउल्लाह खाँ, चन्द्र शेखर आजाद जैसे असंख्य आजादी के दीवानों की भांति अलख जगाने वाले समर्पित और जिन्दादिल लोगों की आज के काले अंग्रेजों के आतंक के खिलाफ बुद्धिमतापूर्ण तरीके से लडने हेतु तलाश है।

इस देश में कानून का संरक्षण प्राप्त गुण्डों का राज कायम हो चुका है। सरकार द्वारा देश का विकास एवं उत्थान करने व जवाबदेह प्रशासनिक ढांचा खडा करने के लिये, हमसे हजारों तरीकों से टेक्स वूसला जाता है, लेकिन राजनेताओं के साथ-साथ अफसरशाही ने इस देश को खोखला और लोकतन्त्र को पंगु बना दिया गया है।

अफसर, जिन्हें संविधान में लोक सेवक (जनता के नौकर) कहा गया है, हकीकत में जनता के स्वामी बन बैठे हैं। सरकारी धन को डकारना और जनता पर अत्याचार करना इन्होंने कानूनी अधिकार समझ लिया है। कुछ स्वार्थी लोग इनका साथ देकर देश की अस्सी प्रतिशत जनता का कदम-कदम पर शोषण एवं तिरस्कार कर रहे हैं।

आज देश में भूख, चोरी, डकैती, मिलावट, जासूसी, नक्सलवाद, कालाबाजारी, मंहगाई आदि जो कुछ भी गैर-कानूनी ताण्डव हो रहा है, उसका सबसे बडा कारण है, भ्रष्ट एवं बेलगाम अफसरशाही द्वारा सत्ता का मनमाना दुरुपयोग करके भी कानून के शिकंजे बच निकलना।

शहीद-ए-आजम भगत सिंह के आदर्शों को सामने रखकर 1993 में स्थापित-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)-के 17 राज्यों में सेवारत 4300 से अधिक रजिस्टर्ड आजीवन सदस्यों की ओर से दूसरा सवाल-

सरकारी कुर्सी पर बैठकर, भेदभाव, मनमानी, भ्रष्टाचार, अत्याचार, शोषण और गैर-कानूनी काम करने वाले लोक सेवकों को भारतीय दण्ड विधानों के तहत कठोर सजा नहीं मिलने के कारण आम व्यक्ति की प्रगति में रुकावट एवं देश की एकता, शान्ति, सम्प्रभुता और धर्म-निरपेक्षता को लगातार खतरा पैदा हो रहा है! अब हम स्वयं से पूछें कि-हम हमारे इन नौकरों (लोक सेवकों) को यों हीं कब तक सहते रहेंगे?

जो भी व्यक्ति इस जनान्दोलन से जुडना चाहें, उसका स्वागत है और निःशुल्क सदस्यता फार्म प्राप्ति हेतु लिखें :-

(सीधे नहीं जुड़ सकने वाले मित्रजन भ्रष्टाचार एवं अत्याचार से बचाव तथा निवारण हेतु उपयोगी कानूनी जानकारी/सुझाव भेज कर सहयोग कर सकते हैं)

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)
राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यालय
7, तँवर कॉलोनी, खातीपुरा रोड, जयपुर-302006 (राजस्थान)
फोन : 0141-2222225 (सायं : 7 से 8) मो. 098285-02666
E-mail : dr.purushottammeena@yahoo.in

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