बुधवार, 14 जुलाई 2010

सावधान! खतरनाक जीवों से,विश्वास का पुल बना ---ब्लाग4वार्ता----ललित शर्मा

नमस्कार, कल रथ दूज थी, इस दिन जगन्नाथपूरी में विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा निकाली जाती है।आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को जगन्नाथ अपने ज्येष्ठ भ्राता बलराम एवं बहन सुभद्रा के साथ श्रीमन्दिर से निकलकर अलग-अलग रथों में आरूढ़ होकर अपने जन्मस्थान गुण्डिचा मन्दिर की ओर यात्रा करते हैं। लाल-पीले रंग के अपने ‘तालध्वज’ रथ में पहले बलभद्र जी, काले-पीले रंग के ‘दर्पदलम’ रथ में सुभद्रा जी और अंत में लाल-पीले रंग के ‘नंदिघोष’ रथ में सज-धजकर जगन्नाथ जी यात्रा करते हैं।छत्तीगढ में भी रथयात्रा निकाली जाती है,इस शुभ दिन को एक बड़े त्यौहार के रुप में मनाया जाता है, सभी को रथ दूज की बधाई, मैं ललित शर्मा आपको ले चलता हूँ आज की वार्ता पर........

रथ यात्रा के विषय में पढने के लिए यहां पर जाएं,आपको अच्छी जानकारी मिलेगी..जब से फ़ुटबाल मैच शुरु हुआ था, तब से दिनेश द्विवेदी इस पर बारीकी से निगाह रखे हुए थे, बराबर इस विषय पर अपडेट देते रहते थे आज से उन्हो्ने कह दिया है कि चलो, उतरा बुखार फुटबॉल का., बड़ी अच्छी बात है, अब मुझे एक पोस्ट हाड़ौती में पढने मिल सकती है, बहुत दिन हो गए इन्हे हाड़ौती में लिखे। भविष्यवक्ता पॉल बाबा का बुखार उतर गया है अब चर्चा एक मॉडर्न चुड़ैल की हो रही है, चुड़ैलों के विषय में तो काफ़ी सुना था लेकिन देखा कभी नहीं, अगर कही दिख जाए तो जनम सफ़ल होई जाए। बरसों से भूली याद फ़िर आ गयी।

"दीक्षांत में पगड़ी" पहनाने की पहल गुरुघासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर छग से हो चुकी है, अंग्रेजो के हुड और लबादे को फ़ेंक दिया गया और भारतीय पद्धति की वेशभूषा से कार्यक्रम सम्पन्न किया गया। बाकी कार्यक्रम की रुप रेखा क्या थी मैने तो देखी नहीं लेकिन उम्मीद है समारोह भव्य रहा होगा.। इसरो ने सफलता पाई है पांच उपग्रह कक्षा में सफ़लता पूर्वक स्थापित किए, कल ही मैं शरद जोशी का व्यंग्य प्रतिदिन शुंईं, फ़ुस्स, बिझुंग पढ रहा था जो कि अंतरिक्ष कार्यक्रमों की विफ़लता पर करारी चोट करता है। फ़िर बाद में सरकार की जगह बोल रही है विज्ञप्तियां 

धन्य हुआ है ये प्रजा तन्त्र आपसे मेरे लाल फ़ीताशाहों, जब से संविधान का निर्माण हुआ है तभी से लालफ़ीताशाह धन्य करते रहे हैं और स्वयं भी धन धान्य से सबल होते रहें हैं, सब बाबुलाली महिमा है, इनके चहुं ओर लाली ही लाली, गरीब के घर में खाली थाली, गरीब आज तक अमी्र क्यों नहीं हुआ? बरसात की झड़ी आज लगी हुयी थी, पानी में भीगी.... मेरी आज की सुबह इसलिए कहीं जा नहीं पाए, गवंई गांव की यही मौज है बरसात हुई मतलब छुट्टी मनी, लेकिन दौड़ना तो मुंबई वालों को पड़ता है, कल का आदमी भी दौड़ता था रोजी रोटी के लिए और आज का आदमी भी दौड़ता है पिज्जा बर्गर के चक्कर में, सिर्फ़ नाम बदल गए हैं लेकिन सवाल पापी पेट का ही है,

वर्ष की श्रेष्ठ लेखिका निर्मला जी को हार्दिक बधाई साथ ही साथ वर्ष के श्रेष्ठ विज्ञान कथा लेखक डॉक्टर साहेब  को भी हम दे आए शुभकामनाएं,क्या आप जानते हैं? यहाँ पू्छा जा रहा है,एक रायसीना रोड का आदमी भी मिला मारु थारा देस में इस तरह ये हश्र एक रोज़ होना ही था  लेकिन फ़िर भी लोग विश्वास का पुल बना लोगों को जोड़ते हैं, यह अच्छी बात है और लोगों का विश्वास टूटे नहीं कायम रहना चाहिए,.700 वीं पोस्ट.लि्ख डाली है 11माह में भाई कमाल कर दिया हमारे धुरंधर ब्लागर ने, दिन में दो पोस्ट लिखते हैं इधर इक ब्लागर और आ गए हैं छुट्टी से कमाल दिखाने ब्लागिंग का और कह रहे हैं प्रिय ब्लॉगर मित्रो प्रणाम लीजिये मैं फिर हाज़िर हूँ है न कोई बात ब्लागिंग में जो खींच लाती है।

देखिए आठ राज्यों में अफ़्रीका से अधिक ग़रीब होने के बाद भी हम मेहमान नवाजी में तो कमी नहीं करते, जो कुछ अच्छा से अच्छा होता है उसे से्वा में प्रस्तुत करते हैं और बराबर पूछते हैं कि क्या आप ‘कुछ नहीं लेंगे’....?.क्यों नहीं लेंगे भाई जो तुम लाओगे वह सब लेंगे, हम कोई कृष्ण या दुर्योधन थोड़ी हैं जो कुकुर बिलाई का बैर है धर्मयुद्ध के बहाने बस जल्दी ही आ रहे हैं.सावधान, जरूरी नहीं कि जैसा पहले हुआ था वैसा ही अब भी हो क्योंकि अब खतरा बढ गया है इसलिए सोचना पड़ रहा है कि जोड़ों का दर्द --ओस्टियो आर्थराईटिस---क्या किया जाये बस दो खुराक ली जाए एक उठने से पहले एक सोने के बाद गरम पानी के साथ, प्रमोद वर्मा आलोचना सम्मान हेतु प्रविष्टियाँ आमंत्रित हैं, आप आलोचना करते हैं तो आजमाईए  हाथ।

अंग्रेज चले गए पर रानी का डंडा अभी भी भारत देश में घुम रहा है और जब तक उल्टी नाव वाले रहेंगे तब तक शायद घुमता ही रहेगा,लगता है ब्लॉगर्स अब खतरनाक जीवों से भी दोस्ती करने लगे हैं भैया चाहे कितने ही खतरनाक जीवों से दोस्ती कर लो लेकिन फ़िरंगियों से तो कम ही होगा, कहते थे कि इनके राज में सुर्यास्त नहीं होता,विज्ञान की एक सीमा है, प्रकृति असीमित है. सही है, प्रकृति से मानवीय प्रकृति तक, जिस तरह मनुष्य कब कहां क्या करेगा, उसके दिमाग में क्या चल रहा है? पता नहीं चलता उसी तरह प्रकृति का भी पता नहीं कब कहाँ क्या घट जाए अब चलते हैं वहाँ कुत्ते, बिल्ली, तोता, तौबा-तौबा-तौबा.जहाँ., वार्ता को देते हैं यहीं विराम, सभी को ललित शर्मा का राम-राम, मिलते हैं ब्रेक के बाद--कहीं जाईएगा नहीं। ;-)

21 टिप्पणियाँ:

बहुत उम्दा चर्चा..

वाकई आज की चर्चा में सबसे ज्यादा लिंक नजर आए
इतना सब कुछ कैसे कर लेते हैं आप
और हां अपनी फोटो भी बदलो भाई.. काफी पुरानी लग रही है. मैंने तो आपके कहने और विशेष प्रयासों के चलते बदल दी है.

@ राजकुमार सोनी

लाऊं मै जुगाड़ कहां से फ़ोटो बदलने के लिए
दोस्त बने हैं दुश्मन हमसे निपटने के लिए
एक बार उनका खत हमारे पास भी आ जाए
नया कैमरा खरीदेंगे हम फ़ोटो बदलने के लिए

हम धोती कुरता छोड़कर जींस पे आ जाएगें
पोथी पतरा की जगह तोता मैना कथा लाएगें
बाल काले करके मुंछों पे फ़िक्सर भी लगाएगें
हिकमत सारी करेंगे युं अपने बदलने के लिए

रथ दूज के बारे में जानकारी देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद. साथ ही बेहतरीन लेखों के संकलन पर बधाई!

आज की चर्चा काफी मेहनत से की गयी है .. आपने इतने सारे लिंको को समेट लिया है !!

ललित भाई
यार खुद ही बोलते हो
फोटो बदलो... फोटो बदलो और जब बदल दिया तो कविता भी लिखते हो.. अजब प्रेम की गजब कहानी है रे भइया..
वैसे कविता अच्छी है...

@ राजकुमार सोनी

पूरे घर के बदल डालुगां,
लक्ष्मण सिल्वेनिया- हा हा हा

ज्यादा उम्दा लिंक... आज की चर्चा भी अच्छी है. बेहतरीन है..

बहुत चुने हुए लिंक्स से सजी उम्दा चर्चा

ललित भाई, धाँसू चर्चा है। बधाई स्वीकारें।
और हाँ, तस्लीम पर करैत साँप के सम्बंध में आपका कमेंट भी पसंद आया। अगर करैत के ओरिजनल फोटो भेज सकें, तो उनका उपयोग सर्प संसार में किया जाएगा। वैसे सांपों से आपका इतना पुराना याराना है, जानकर प्रसन्नता हुई। क्यों नहीं आप इन अनुभवों को सर्प संसार पर सबके साथ बाँटते?

दूज से पूर्णिमा तक की कथा हो गई फिर ब्रेक के बाद के लिए क्या बचा ? पॉल बाबा को जोड़ने के लिए धन्यवाद ...........अशोक बजाज

मेहनत से चुने हैं लिंक्स .बहुत अछ्छी लगी चर्चा.

कमाल की चर्चा....जय जोहार

अच्छे लिंक्स दे दिए हैं आपने ।
बढ़िया चर्चा ।

बहुत अच्छी ब्लॉग वार्ता..आपकी वार्ता करने की हर अदा पसंद आई.

बधाई.

@ ललित जी.. धन्यवाद मेरी मॉडर्न चुड़ैल को अपमे ब्लॉग 4 वार्ता में ज़गह देने के लिए.. ज्ञान देने का आपका तरीका और मुद्रा पसंद आया.. इस आग लगाती मंहगाई में कुछ पल ऐसे भी होने चाहिए जो जिंदगी को सर दर्द से मुक्ति दिला सके.. जीवन इसी का नाम है यहाँ तुम और मैं नहीं बल्कि हम मिल कर ऊहापोह ख़त्म करने का काम कर सकते हैं..

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