बुधवार, 28 जुलाई 2010

लंडूरा और आलिंगन,सिर्फ तुमसे प्यार है -------ब्लाग4वार्ता-----ललित शर्मा

नमस्कार,एक आम नागरिक होने के नाते कारगिल के शहीदों को नमन करता हूँ, लेकिन जिस प्रकार विजय दिवस पर शहीदों को मीडिया,नेता और अधिकारियों का गठजोड़ भुल गया, इससे लगता है कि जब जान पर बन आए तो उन्हे याद करो। लड़ाई में जाते वक्त खून के तिलक करो। जोश भरे नग्मे गाओ, और जब युद्ध खत्म हो जाए, उन्हे भूल जाओ। लोकसभा में भी दिवंगत सांसदों को श्रद्धांजलि दी गयी। कारगिल के शहीदों को भुला दिया गया। यह ठीक नहीं है। अब चलिए मेरे साथ आज की ब्लाग4वार्ता पर और सैर किजिए ब्लाग नगरिया की.......

संजय  भास्कर प्यार में डुबे हैं मुझे तो सिर्फ तुमसे प्यार है...मरने वालों को जिन्दगी चाहिए* *और जिन्दगी है जिनके पास, * *उन्हें इन्त्जार है मौत का **न मौत से न जिन्दगी से* *मुझे तो सिर्फ तुमसे प्यार है...* मुझे क्या होना चाहिए? मैं दर्द होता तो आपकी आंखों से बहकर अपना अस्तित्व समाप्त करना चाहता उस खारे आंसू की तरह जो देश दुनिया की फिक्र से दूर बच्चों की आंखों से निश्चल बहा करता है। मैं खुशी होता तो आपकी मुस्कुराहट के रूप में ...


जाकिर अली रजनीश को वर्ष का श्रेष्ठ बाल साहित्यकार सम्मान दिया गया है परिकल्पना पर उन्हे ढेर सारी बधाई और शुभकामनाएं,आज का सम्मान एक ऐसे चिट्ठाकार के नाम, जो सक्रियता की मिसाल है और जिसे सदलेखन को प्रोत्साहन देने वाले चिट्ठाजगत के पहले सम्मान को प्रारम्भ करने का श्रेय जाता है। ये ऐसे चिट्ठाकार हैं, जो आम तौर से 'तस्ल....प्यार की परिभाषा मेरे बिस्तर पर गर्म भट्ठी की तरह सांसें छोङना फ़िर कुछ ही पल में मेरी बांहों में पिघलकर सर्द हो जाना. बेशर्म होकर मेरे जिस्म के हिस्सों को अपनी नजरों से शिकार करना फ़िर अपनी ही आंखों पर खुद की हथेली से पर्दा ...

 पर मुझे स्वर्ग सा नहीं लगा !! मुझे अमेरिका आए हुए एक महीने से ज्यादा हो गए, १६ जून को आई थी. एक महिना कैसे बीता, पता ही नहीं चला . वैसे भी बच्चों के साथ रहने पर समय का पता कहाँ चलता है . इस बार तो कुछ ख़ास ही व्यस्तता और ख़ुशी है . बेट...कंदराओं से निकले नायाब 'हीरे' निरंतर बंदूकों से बरसती गोलियों और धमाकों के बीच लाशों को अपनी आँखों से देखने वाले इन जंगली "हीरों" ने अपनी मशक्कत के बूते लक्ष्य पाकर एक उत्तम आदर्श स्थापित किया है। * *शाश्वत शुक्ला* नक्सली इलाकों में ...

नवगीत/ फिर भी जीते रहे ज़िंदगी, कभी न टूटे हम..  कुछ दिनों से ऐसी कुछ अस्त-व्यस्तता थी, कि मैं कुछ पोस्ट ही नहीं कर पाया. आज कुछ समय मिला, तो हाजिर हूँ अपने एक नवगीत के साथ. आशा है, पसंद आएगा.* *नवगीत* *मिली विफलताएँ कुछ ज्यादा,* *उपलब्धि है कम.* *फिर...बाढ़ भीषण गर्मी से त्रस्त थे , आसार वर्षा के नजर ना आते थे , तब पूजा पाठों का दौर चला , हवन और अनुष्ठान हुए , भविष्य बाणी पंडितों की , और सूचनाएं मौसम विभाग की, सभी लगभग गलत निकलीं , पानी की एक बूंद न बरसी , जैसे...

आदमखोर की राह राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी वास्तव में महात्मा थे। तभी तो उनकी कही बात आज भी प्रासंगिक है। गांधी की जय जयकर अब भी होती है और होती रहेगी लेकिन उन्हें मानने वाले भी उनकी बातों पर एक फीसदी भी नहीं चलते ।दे...बिना लकड़ी और लोहे की छत---यात्रा-4अनुसंधान केन्द्र का रास्ता चिखली में रुकने से से हमारा पूरा कार्यक्रम चौपट हो गया और वापस लौटने लगे। चिखली अगर नहीं रुकते तो हम रात तक मुंबई पहुंच चुके होते। लेकिन शायद कुछ ऐसा था जो हमें आगे बढने से रोक...

लंडूरा और आलिंगन… लिं ग हिन्दी का बहुप्रचलित शब्द है जिसका अर्थ भी पहचान, चिह्न, लक्षण, निशान, प्रतीक, बिल्ला आदि होता है। हिन्दी में लिंग शब्द का इस्तेमाल होता है। स्त्रीलिंग-पुल्लिंग के संदर्भ में गौर करें ...अपनी अपनी संतुष्टि - कहानीउसने टेबल से उठते हुए एक बड़ी पैग हलक में उतारी, प्लेट में कुछ शेष बच गए काजू के तुकडों को मुट्ठी में उठाते हुए बार से बाहर निकल गया। लडखडाते कदमों से बाहर खडे बाईक के इग्नीशन में चाबी डालते हुए वह ठिठक गय..

कील पर टँगी बाबूजी की शर्ट आज बहुत याद आ रही है कील पर टंगी बाबूजी की शर्ट शर्ट की जेब होती थी भारी सारा भार सहती थी कील अकेले होती थी राशन की सूची जिसे बाबूजी हफ्तों टाल मटोल करते रहते थे माँ के चीखने चिल्लाने के बाद भी तरह तरह ...मानसिक जुड़ाव किसी को जानने के लिए साथ की ज़रूरत होती है.. सिर्फ साथ ही नहीं उससे मानसिक जुड़ाव की भी आवश्यकता होती है.. कुछ समयोपरांत आप कह ही नहीं सकते की कोई आपको या आप किसी को ठीक से समझ ही नहीं पाए.......

एक फ़ोटो एक पोस्ट रोहित उमराव आजकल चिड़ियों और फूलों की ज़बरदस्त तस्वीरें खींच रहे हैं. इधर वे बरेली से हल्द्वानी आए तो पोस्ट करने के वास्ते कुछ माल जमा करवा गए.पहली तस्वीर देखिये:एक बार देखने पर आप कहेंगे कि चमेली का फूल पर ...पांच रुपये के सिक्कों ने बचाई थी जान - परमवीर चक्र विजेता जोगेंद्र सिंह यादव टाइगर हिल की वह रात आज भी मुझे पूरी तरह से याद है, जब दुश्मनों ने मुझ पर गोलियां चलाईं तो मेरी जेब में पड़े पांच रुपये के सिक्कों ने मेरी जान बचाई थी। दुश्मनों द्वारा फेंके गए हैंड ग्रेनेड से मेरा बायां ...

 मैं कवि नहीं आग की लपटें हूँ - रायपुर के शहीद स्मारक सभागार में सोमवार की रात देश के ख्यातिनाम कवियों को सुनने के लिए एकत्र हुए श्रोता बाहर बरसात और सभागार के भीतर गीतों और कविताओं में रससिक्त रहे| जिस कार्यक्रम में *हरिओम पंवार *आएं और...महंगाई व नक्सलवाद मुद्दे पर उलझी लोकसभा व विधानसभा महंगाई व नक्सलवाद मुद्दे पर उलझी लोकसभा व विधानसभा देश की दो बड़ी राजनीतिक पार्टियां कांग्रेस व भारतीय जनता पार्टी,दो बड़ी पंचायते लोकसभा व छत्तीसगढ़ की विधानसभा देश के दो बड़े मुद्दे महंगाई और नक्सलव...

11 टिप्पणियाँ:

कारगिल के शहीदों को नमन

उम्दा चर्चा.

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

सार्थक शब्दों के साथ अच्छी चर्चा, अभिनंदन।

अच्छे लेखों की एक बेहतरीन चर्चा.... बहुत खूब!

बहुत बढ़िया वार्ता ............ यह हमारे देश का दुर्भाग्य है कि हमारे देश में उनका सम्मान होता है जिनका कि उनकी हरकतों की वजह से हर कदम पर अपमान होना चाहिए - आज के नेताओ को शर्म भी नहीं आती अपनी हरकतों पर !
कारगिल युद्ध के अमर शहीदों को शत शत नमन !

आपने कड़ी मेहनत करके बहुत ही सुन्दरता से चर्चा किया है और बहुत सारे लिंक मिले! इस उम्दा चर्चा के लिए बहुत बहुत बधाई!

कारगिल के शहीदों को नमन.सार्थक शब्दों के साथ अच्छी चर्चा.बहुत बहुत बधाई!

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