शनिवार, 3 जुलाई 2010

गुम होते संपादक--मयखाने में--जीने-खाने दो--ब्लाग4वार्ता-------ललित शर्मा


नमस्कार, कल फ़ारगेटर्स डे मनाया गया, परसों डॉक्टर्स डे मनाया गया था। मतलब भुलक्कड़ों के लिए भी एक दिन तय कर दिया गया। इनकी चर्चा भी इसी दिन की जाएगी। वैसे तो हर आदमी भुलक्कड़ है। कुछ न कुछ भूल ही जाता है। मैं भी अपनी गाड़ी की चाबी भूल जाता हूँ। सबसे ज्यादा चितां मुझे गाड़ी की चाबी भूलने की रहती है। अगर धोती कुर्ता पहनते तो कोई चिंता नहीं थी। जनेऊ में टांग लेते, लेकिन पतलुन बुश्शर्ट पहनने का एक नुकसान यह भी है और भोगना भी पड़ेगा। अब चलते हैं आज की वार्ता की ओर कहीं भुलक्कड़ दिवस के कारण वार्ता ही न भूल जाऊं.......एक बार बिजली जा चुकी है आधी पोस्ट गायब हो चुकी है, मेहनत पानी में मिल चुकी है--इसलिए मैं कुछ लिंक फ़टाफ़ट दे रहा हूँ...............

सबसे पहले बधाई देते हैं पंकज मिश्रा जी (चर्चा हिन्दी चिट्ठों की) को, वे पिता बन गए हैं। उनके घर में पुत्र रत्न ने जन्म लिया है। बालक के जन्म लेते ही कथरी का भी इंतजाम हो गया है। बिना शब्दों की पोस्ट प्यार...* *मासूमियत...* ** *विदाई...* *दोस्ती...* अलौकिक... फैशन बन गया है "धार्मिक विचारों का विरोध"आजकल धर्म के खिलाफ बोलना फैशन समझा जाने लगा है। चाहे बात तर्कसंगत हो अथवा ना हो, लेकिन ऐसे विचारों के सर्मथन में हज़ारों लोग कूद पढ़ते हैं। ऐसे विचारकों को "सुधारवादी" जैसी उपाधियों से अलंकरित किया जाता है...

पोस्टकार्ड का जन्मदिन और गुम होते संपादक के नाम पत्र आज महज संयोग है कि जब मैं संपादक के नाम पत्र और पोस्टकार्ड की महत्ता पर लेख लिखने बैठा तभी पता चला कि आज एक जुलाई को पोस्टकार्ड का न केवल जन्म हुआ था बल्कि उसने अपने जन्म के सौ साल पूरे कर लि...सच बोलूँगा तो माँ मारेगी और झूठ बोलूँगा तो बाप कुत्ता खायेगा एक फिल्म आई थी "साधू और शैतान" और उस फिल्म के कामेडियन हीरो नायक ने उसमें एक डॉयलाग बोला था *"सच बोलूँगा तो माँ मारेगी और झूठ बोलूँगा तो बाप कुत्ता खायेगा"*। मेरे साथ गाहे-बगाहे ऐसी परिस्थितियाँ आती रहती ...

मयखाने में कुछ 'लस्ट' ,कुछ 'हीट' , कुछ 'डस्ट'मानसून में देरी के चलते दिमाग़ भन्नाया हुआ है ! आजकल दिल्ली में 'हीट एंड डस्ट' के साथ 'स्वेट' यानि पसीना भी भरा है । पिछले साल जब मैंने ये पोस्ट लगाई थी तो बारिश हो गयी थी , देखें अबके क्या होताहै ! * सा...घर तुम्हारा है , मैदान में जाकर लड़ो , नायक बन कर दिखाओ , झोंक दो पूरी ताकत और जीत कर आओदेश में पांच राज्य नक्सली हिंसा से बुरी कदर प्रभावित हैं । सर्वाधिक खराब हालात छत्तीसागढ़ में देखे जा सकते हैं ।क्या इस खराब हालात के लिए अकेले नक्सली दोषी हैं ? क्या वे लोग भी दोषी नहीं हैं , जिन पर...

आजाद हिन्द फौज अगले दिन 5 जुलाई (1943) को ‘इण्डियन नेशनल आर्मी’ की कमान थामकर नेताजी इसका नामकरण करते हैं- ‘आजाद हिन्द फौज’। मनीला से स्वयं तोजो समय पर पहुँचते हैं- परेड देखने। परेड की सलामी लेने के बाद नेताजी जो कुछ क...सावित्री की ईज्जतसहेली के साथ खेलते-खेलते शाम हो चला था. दस साल की सावित्री जैसे ही घर पहुंची उसकी मां ने उसे बाल पकङकर खींचा और जोरदार थप्पर लगाया- --"कितनी बार समझाया है कि शाम ढलने से पहले घर आ जाया कर. दिन की रोशनी में ...

काल सलामआमतौर पर अपनी विचारधारा के लिए सराहे और बुद्धिजीवी वर्ग में भी "हमारे अपने भटके हुए लोग" मान कर पुचकारे जाने वाले नक्सली मानवता को कलंकित कर रहे हैं और सभ्यता से तो उनको कभी कोई लेना-देना नहीं था, हैवानिय...आज इन बाहों में रक्तिम लाली आज सूर्य की यूं तन मेरा आरक्त किये है. तिमिर निशा का होले होले मन से ज्यूँ निकास लिए है. उजास सुबह का फैला ऐसा जैसे उमंग कोई जीवन की आज समर्पित मेरे मन ने सारे निरर्थक भाव किये हैं लो फैला द...

ताऊ पहेली - 81 प्रिय बहणों और भाईयों, भतिजो और भतीजियों सबको शनीवार सबेरे की घणी राम राम. ताऊ पहेली *अंक 81 *में मैं ताऊ रामपुरिया, सह आयोजक सु. अल्पना वर्मा के साथ आपका हार्दिक स्वागत करता हूं. जैसा कि आप जानते ही हैं क...तेरे मेरे बीच दीवार क्यूँ है ....कौन है जो आवाज़ देता है* *हौसलों को परवाज़ देता है* *तेरे मेरे बीच दीवार क्यूँ है * *इश्क नया आगाज़ देता हैकल है ग्रहों का खास गत्‍यात्‍मक योग .. क्‍या पडेगा आप पर प्रभाव ??गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिषीय दृष्टि से कल यानि 3 जुलाई का दिन खास है, क्‍यूंकि बृ‍हस्‍पति और चंद्र को केन्‍द्रगत करते हुए आसमान में बाकी ग्रहों की स्थिति के संयोग से एक खास प्रकार का योग तैयार हो रहा है। यह योग ...

कुल्लू-मनाली जाएं तो "मलाणा" का चक्कर भी लगाएंहमारा देश विचित्रताओं से भरा पड़ा है। अनोखे लोग, अनोखे रीति-रिवाज, अनोखे स्थल। ऐसी ही एक अनोखी जगह है, हिमाचल की पार्वती घाटी या रूपी घाटी मे 2770मी की ऊंचाई पर बसा गावं "मलाणा"। विद्वानों के अनुसार यह विश...दर्द से रिश्ता (एक अनुभूति ,मेरे जीवन की)दर्द से रिश्ता (एक अनुभूति ,मेरे जीवन की) मैंने सुख दुःख के, तानों ,बानो से, एक गुल है बनाया, सुख को छोड़ , मैंने दुःख को , अपना बनाया. मैंने ऐसा जाल बुना, ना जाने क्यों ? मैंने दुःख को चुना. जीवन में मि...

इसको जीने-खाने दो...जीवन दुःख की कथा है. हर व्यक्ति के जीवन में एक व्यथा है. लेकिन समझदार उसे पार कर लेता है. दुःख को साथी बनाने के लिये कवि प्रेरित करते रहे है. सुख-दुःख और संघर्ष के विभिन्न रूपों को सोचते हुए कुछ शेर बन गए...ये कैसा अहसास है...दिन-रात महसूस होता है जो... ये कैसा अहसास है??? है तो मुझसे दूर... पर... फ़िर भी मेरे सबसे पास है... मेरी मंजिल, मेरा साहिल और मेरी जीने की जुस्तज़ू जानती हूँ मुश्किल है ये सोचना... पर फ़िर भी हर आरज़ू के प...एक आतंकवाद ऐसा भी - अनचाहे संदेशों का आतंककंप्यूटर से जिनका नाता है और जो ई-मेल करते हैं, वे सभी स्पैम से अच्छी तरह वाकिफ होंगे। दरअसल, इनबाक्स में आने वाले अनचाहे संदेशों को ही स्पैम कहा जाता है। वैसे इसका इतिहास 30 साल पुराना है। दो मई 1978 को ...

मां दुआ करती हुई ख़्वाब में आ जाती है -सतीश सक्सेनाआज डैशबोर्ड पर नज़र पड़ते ही, अपने नाम समर्पित यह पोस्ट देख चौंक गया मैं , पता नहीं आपको क्या अच्छा लगा जो इतनी खूबसूरत ग़ज़ल भेंट दी है मुझे ! जहाँ तक मुझे याद आता है, शायद ही कभी आपक... वो भारतिया जिसे वक्त ने हम से दुर कर दिया, ओर उन के अपने उन्हे भुल गयेकहते है आदमी को गुलामी बहुत कुछ करने पर मजबूर कर देती है, ओर इस पोस्ट के साथ ही मै यह भी बता दुं कि विदेशी भाषा हमेशा गुलाम ही बोलते है, जेसे कि हम अग्रेजी को बोल कर साहब बन जाते है??? लेकिन सिर्फ़ अपनी नजर...

कल जो टूटे थे रिश्ते आज वो लगते झूठे हैं .... ये फोटो ओट्टावा में टूलिप फेस्टिवल का है.... कल जो टूटे थे रिश्ते आज वो लगते झूठे हैं प्रीत डगर के काँटों से मेरे पाँव के छाले फूटे हैं शिकवों का दस्तूर नहीं ना है गिलों का कोई रिवाज़ नेह की वो सारी क...क्या 100 -200 रुपये महीना फ़ीस ज़्यादा दे कर अपना और अपने बच्चे का समय बचाना ज़्यादा उचित नहीं ?एक मुसीबत खड़ी हो गई है भाई ! अगर आप में से कोई सज्जन इस मुसीबत से बचने का कोई उपाय जानते हों तो कृपया मुझे अवश्य बताएं . जिस स्कूल में मेरा बेटा पढता है, उसने कुछ फ़ीस वगैरह बढ़ा दी है जिसके ...

जोधपुर के मिर्ची बड़े और सेव बेरहर शहर में खाने पीने के उत्पादों में कुछ खास होता है और वे उत्पाद उस शहर के नाम से जुड़ जाते है जैसे आगरा का पैठा, रेवाडी की रेवडी आदि, ठीक इसी तरह जोधपुर में भी खाने पीने के कई उत्पाद है जो जोधपुर की पहचान है जैसे मिर्ची बड़ा,मावे और प्याज की कचोरी,माखानियाँ लस्स.......मैं एक पार्टी बनाने की सोच रहा हूँमैंने हाल ही में देश की चमकती और नाजुक दोनों हालत को देखकर एक पार्टी बनाने की बात सोची है,  अब क्यूंकि पार्टी को सफल बनाना है, इसलिए कुछ बातों पर विशेष ध्यान दिया गया है| निम्नलिखित विशेष योग्यताएं आप रखते है तो तुरंत संपर्क करें : पत्रकारों के लिए हमेशा रेड

कार्टून:- हिन्दी ब्लागरों की कमाई का रास्ता खुल गया



अब चर्चा को देते हैं विराम --- आपको ललित शर्मा का राम राम ........

19 टिप्पणियाँ:

बढ़िया कई बेहतरीन पोस्टें मिली...सुंदर चिट्ठा चर्चा के लिए आभार ललित जी!!!

बेहतरीन चर्चा!

सुन्दर चर्चा के लिए बधाई...!!

कार्टून सबसे बेस्ट दिखा :) मेरी रचना शामिल करने के लिए शुक्रिया ललित जी !! आप हलुआ दल के जो ठहरे :-)

ब्लागर्स मीट का सत्य क्या है बताने का शुक्रिया
मज़ेदार

@गिरीश बिल्लोरे

समझ गए गुरु-अन्तर्यामी निकले

बेहतरीन चर्चा!

बहुत खूब ललित भाई बहुत खूब।

आपने आज बहुत विस्‍तार से चर्चा की है .. अच्‍छे अच्‍छे लिंक्स भी दिए हैं .. बहुत अच्‍छा रहा !!

बहुत सुंदर चरचा किये हो जी

बेहद उम्दा वार्ता ! मेरी पोस्ट को शामिल करने के लिए आपको धन्यवाद !

मेरा कार्टून भी शामिल करने के लिए आभार. आह कई अछि पोस्टों के लिंक भी मिले उनके लिए भी धन्यवाद

बहुत अच्छी चर्चा धन्यवाद

बेहतरीन चर्चा धन्यवाद

itni sundar chaacha mei mujhey shamil karne k liye bahut-bahut dhanyawaad... parantu saare lekh aur bloggers ka yatharth to cartoon ne samjha diya... :-)

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