गुरुवार, 5 अगस्त 2010

जनता के कुछ और सत्य हैं, शासन के कुछ और - कब सुधरेंगे हमारे माननीय...? - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो 
प्रणाम !

आज जब यह ब्लॉग वार्ता लिख रहा हूँ तब बिलकुल भीगा हुआ हूँ .....................आप सब के स्नेह की बारिश में ! 

जिस दिन पहली बार ब्लॉग 4 वार्ता  के मंच से अपनी पहली ब्लॉग वार्ता लगाई थी उस दिन ज़रा भी अंदाज़ नहीं था कि आप सब का प्यार यूँ बेशुमार मिलेगा !

आप सब से यह वादा है कि जब तक इस ब्लॉग जगत पर हूँ .................या इस जगत में हूँ आप लोगो को कभी भी शिकायत का मौका नहीं दूंगा !

अब और ज्यादा सेंटी नहीं होना चाहता .........मेंटल हो जाने का खतरा रहता है !!

आइये अब  चलते है ब्लॉग जगत का एक चक्कर लगाने !

सादर आपका 

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मैं धार्मिक हूँ :- हम भी है जी !

ज़िन्दगी :- इम्तहान लेती है !


फ़ूंकनी-चिमटा बिना यार-देखो मुहब्बत है बेकार------ललित शर्मा :- आज ही ले कर आये है ............परिवार का सवाल है भाई ! 

सचमुच काली बन जाऊँगी...! :- हाँ नहीं तो ...........जय माँ काली !!

मेरी कलम! :- बढ़िया लिखती है ! 


तुम्हारी बात में दम तो है :- तो मान काहे नहीं लेते ? 



एक हस्ताक्षर उसका एक मेरा ..... :- पर हस्ताक्षर किये कहाँ  है ??



मॉल और माइक्रोसॉफ्ट :-  अब भाई, माइक्रोसॉफ्ट होगा तो........ माल तो होगा ही !!



निर्विकार :- उम्दा सोच !





करेगा फिर पाप पर कुठाराघात परशुराम :- पाप का नाश होना ही चाहिए !

वैलकम ! :- इमानदार आदमी की तो कोई कद्र ही नहीं है !

कश्मीर राज्यपाल शासन की ओर? :- नज़र मेरी जमीन को ......लगी है आसमान की !!

चमन को अचरज भारी :- होना ही चाहिए !

कैसे कह दूं यार .....कि कोई फ़र्क नहीं पडता .....अजय कुमार झा :- फर्क तो पड़ता है भाई !!

घूमती है दुनिया घुमाने वाला चाहिए-राजीव तनेजा :- तुना....... तुना....... ता....... ता....... तुना !!

मेरा सपना मेरी डायरी मेरी जिंदगी :- एक मिनट................ इन सब में हम कहाँ है ??

भारत को पदक क्यों नहीं मिलते? :- किस खेल में ..........खुल कर बोलो भाई जी !!

कालसर्प योग की भयावहता पर स्‍वयमेव ही प्रश्‍नचिन्‍ह लग जाता है!! :- पर क्यों भला ?

एक झलक (एलोरा केव्स की) :- घर बैठे बैठ देशाटन ...........धन्यवाद !

जय श्री शाह को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं :-  अंदाज़ निराला है ..............अरे तभी तो लिंक यहाँ डाला है !!

अमीर खुसरो :- शत शत नमन उनको !

कान खोल कर इस पोस्ट को पढ़ें...खुशदीप :- आँखों का क्या आचार डालना है ??

छपते छपते  :- 

एक दुखद सूचना :- सलिल वर्मा जी कि पोस्ट के मार्फ़त पता चला कि स्वप्न मेरे................ ब्लॉग वाले श्री दिगम्बर नासवा जी के बड़े भाई साहब का २८ जुलाई को फरीदाबाद में अचानक ह्रदय गति रुक जाने से देहांत हो गया |

इस दुःख की घडी में  ब्लॉग 4 वार्ता   का पूरा वार्ता दल आपके साथ है |

दिगम्बर नासवा जी को भ्रातृ शोक :- बेहद दुखद .............हम सब आपके साथ है !

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आज की ब्लॉग वार्ता बस यहीं तक .............ईश्वर से यही विनती है कि श्री दिगम्बर नासवा जी और उनके पूरे परिवार को इस सदमे से उबरने की शक्ति और मृतात्मा को शांति प्रदान करें |

ॐ शांति शांति शांति !

जय हिंद !!

बुधवार, 4 अगस्त 2010

भगदड़ - ब्लॉगर ही ब्लॉगर हैं - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो ,
प्रणाम !

बिना आपका समय बर्बाद किये हुए सीधे मुद्दे की बात करता हूँ और आपके लिए  ब्लॉग 4 वार्ता   के इस मंच से एक और ब्लॉग वार्ता पेश करता हूँ !

आशा है आपको आज की ब्लॉग वार्ता पसंद आएगी |

सादर आपका 


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बाज़ार जनित बीमारियाँ :- हम सब को लग गयी है !

हाय !ये मैंने क्या किया? :- क्यों क्या हुआ ?



मानसून का आना और नहीं आना :- क्या चाहते हो शर्त लगाना ?


हमरा ब्लॉग परिवार – अंतिम भाग :- गलत बोले ...........पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त !! 






झुलसता बचपन .... :- कहाँ है देश के नेता ??









अभी तो मुजरा शुरू हुआ है ! :- तभी तो सब आ गए है !

बुरुंश के फूल :- कैसे होते है ?

अब अपना मुह बंद रखे इस वृहत लोकतंत्र के तंग दिल सनम ! :- रखना ही पड़ेगा !

ब्लॉगर ही ब्लॉगर हैं ! :-  कहाँ ?

उफ़!!... तुम भी न. :- ???????????????

भगदड़..... :- मच गयी !

आज हमारा जन्‍मदिवस है - आशीर्वाद दें । :-  बधाइयाँ जी बधाइयाँ !

'तुझे तुझ से मांग लूं' :- क्या बात है !

दिल तो बच्चा है जी... :- थोडा कच्चा है जी ..........पोस्ट नहीं दिल की बात कर रहा हूँ !

लहर :- आ गयी क्या ?

मै इधर जाऊं या उधर जाऊं!!!  :- सोचना पड़ेगा !


आपका जीमेल अकाउंट सेफ है..? :- पता नहीं ...... देखना होगा  !

क्या आप दुनिया के सबसे असुरक्षित तरीके से इंटरनेट पर जाते हैं!? :- जी मालूम नहीं ....आप बताओ !

दे जाती है दग़ा.... :- कौन ??

मैं प्रवासी हूं :- अच्छा !!

ये रिश्ते ....... :- कितने अजीब होते है !

दर्द.. :- अब  कैसा है ?

आओ खेलें माफी का ड्रामा :- पर कहाँ ?

बारिश का मौसम और भुट्टे की सोंधी खुशबू :- भाई वाह !

...शाबास उपेन्द्र कुमार :- मैनपुरी का चार्टेड एकाउंटटेंट पुलिस कप्तान !

क्यूँ यह दुनियां ? :- ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है ! शुभकामनाएं !

चाँद और मेरी गाँठ :- बहुत याराना लगता है !!

अब तक जो कुछ भी लिखा था :-  था वह अपने लिए या सब के लिए ??

ऊपर वाला देता है तो छप्पर फाड़ कर देता है... :- शुभकामनाएं !

बाज़ार में हिन्दी पत्रकारिता :- अफ़सोस........... पर बिक रही है !!

काफ़ी दूर … :- चले आये है हम !

कमी क्यूँ हे :- कुछ कमी हम  में ही होगी !

मन मयूरा :- नाच रहा है क्या ?

किशोर दा की याद में ...  :- शत शत नमन !

वो फिर ना आएगा कभी .... :- कसक दिल की !

अब मच्छर के बहाने ... :- इंसान मारे जायेगे !

हां ! तो कौन कहता है हिंदी ब्लॉगिंग से कमाई नहीं होती बे........ :- हम नहीं बोले , भईया जी !!

जय हिन्दुस्तानी रेल और जय रेल यात्री... :- जय हो !

इनका सीधापन फिर भी बरकरार है, आवारा तो लड़के ही हैं :- अब क्या कहे ?

आप बच्चों को ज़हर तो नहीं दे रहे...खुशदीप :- आपका सवाल जरुरी है ............. तभी एक ही वार्ता में दोबारा जगह बनाई है !

विभूति नारायण जी अपनी लेखिका पत्नि के बारे में विचार कर लेते तो शायद ऐसा अश्लील शब्द मुंह से न उगल पाते :- ह्म्म्म !

छेड़छाड़ हमारा अधिकार, हम इसे हासिल करके ही रहेंगे! :- करे रहो !

बरसात, बचपन,वजीफ़ा और मित्रता दिवस :- सब फायेदे की बाते है !


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आज की ब्लॉग वार्ता बस यहीं तक .............अगली बार फिर मिलुगा एक और ब्लॉग वार्ता के साथ तब तक के लिए ...........

जय हिंद !!

मंगलवार, 3 अगस्त 2010

हाय..हाय.. राहुल--शाबास,नारी शक्ति की जय हो---ब्लॉग4वार्ता--ललित शर्मा

नमस्कार, मीडिया के माध्यम राजनेता की बिगड़ैल औलाद राहुल महाजन की फ़ितरत से सभी वाकिफ़ हो चुके हैं, फ़िर ये लड़कियाँ क्यों उसके चंगुल में फ़ंसती है। अभी दो महीने पहले स्वयंवर रचाने वाली अपने शरीर के जख्म मीडिया को दिखा रही है। अरे जब स्वयंवर ही किया है तो भुगतो उसको। दुसरी तरफ़ एक महानुभाव महिला लेखकों को "छिनाल" कह रहे हैं,अब इन्होने साहित्य जगत में "छिनाल" होने के लिए कौन से मापदंड विकसित किये, उसे तो वे ही जाने, लेकिन मातृशक्ति का अपमान करने के लिए इनकी घोर भर्तसना करनी चाहिए, अब चलिए ललित शर्मा के साथ आज की ब्लॉग4वार्ता पर-----

वाह! वाह! राखी.... हाय..हाय.. राहुल..मैंने तो पहले ही कहा था....जोड़ियाँ आसमान में बनती है | फिर स्वयंवर के नाम पर दूसरे लोगों और अपने आप से मज़ाक किये जाने का क्या मतलब...?? राखी....क्या कहूँ इनके बारे में, पहले तो शादी के नाम पर क्या सीधी..बहुत पहले से उन कदमों की आहट.... आप सभी का जन्म दिन पर दी गई शुभकामनाओं एवं स्नेह के लिए बहुत बहुत आभार. * *सूचना* [image: HC_July2010 copy] नए तेवर और नए कलेवर के साथ..*''हिन्दी चेतना''* का जुलाई-सितम्बर, २०१० अंक प्रिन्...

उल्टा चोर कोतवाल को डांटे---ये भी खूब रहीदिल्ली का ट्रैफिक । साठ लाख वाहन । जिंदगी की भाग दौड़ । सुबह सुबह सब भागने में व्यस्त। ऐसे में क्या क्या दृश्य देखने को मिलते हैं । ज़रा आप भी देखिये । द्रश्य १ : एक चौराहे पर एक गाड़ी वाले ने तीन स्कूटर्...कपडे सुखाती औरतेंबरसात के दिनों में कपडे सुखाती औरतें औरतें नहीं होती प्रबंधक होती हैं बाहर जब धूप नहीं होती कई दिनों तक वे घर के भीतर खिडकियों और दरवाजे के बीच बनती हैं पुल पुराने बिजली के तार या फिर पुरानी नारियल या जूट क...

गुलज़ार को भी कोई नापसंद कैसे कर सकता है भलापकिस्तान के दीना शहर में जन्मे गुलज़ार का वास्तविक नाम समपूरन सिंह कालरा है... बेहतरीन गीतों , नज्मों , गजलों और कहानियों की सौगात देने वाले गुलज़ार ने बच्चों केशाबास,नारी शक्ति की जय हो लिए भी सीधे सादे शब्दों में आसानी से जुबान प...औरंगाबाद से मुम्बई की ट्रिपमित्रों, देव बाबू विवाह के उपरान्त ससुराल के दो ट्रिप लगाए, यकीन मानिये ससुराल के अपनें ही मजे हैं। दामाद की खातिरदारी अपने हिन्दुस्तान में कुछ अजीब तरीके से होती है। एक किस्सा सुनिये... हमारे दुबे जी प...

शाबास,नारी शक्ति की जय हो.एक बार फिर नारी शक्ति ने साबित कर दिया कि उनका कोई मुकाबला नहीं.टिकरापारा कि महिलाओ ने शराब ठेकेदारों को भागने मजबूर कर दिया .आज इसी तरह कि कार्रवाई कि जरुरत है हिन्दी ब्लोगिंग की महत्वपूर्ण बातेंकिसी भी नये ब्लोगर को उसके पहले ही पोस्ट पर इतना स्वागत् और इतनी वाहवाही मिलती है जितनी कि उसे अपने जीवन में पहले कभी न मिली हो! - ब्लोगरों की हर वो रचना जो कि समस्त पत्र-पत्रिकाओं से 'खे...

वर्ष के श्रेष्ठ ब्लॉग.विचारक का सम्मानहिंदी चिट्ठाजगत के एक ऐसे व्यक्तित्व को समर्पित है आज का यह सम्मान जो अपने सदविचारों के लिए जाने जाते हैं ...हिंदी चिट्ठाकारी के उन्नयन की दिशा में सक्रिय चिट्ठाकारों में जिनका नाम पूरे सम्मान के साथ लिया..फ़्रेंडशिप डे पर पिटाई - हंगामा. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कल शाम बूढ़ा तालाब स्थित विवेकानंद उद्यान में बजरंगियों ने एक प्रेमी युगल के मुंह पर न केवल कालिख पोती वरन युवक और युवती दोनो को पीटा भी , हमेशा की ही तरह यहाँ तैनात पुलिस मु...

चेहरे पे चेहरा चढ़ाया है मैंनेहर सुबह आईने से मुखातिब होता हूँ किसी रोज़ तो सही सूरत दिखलायेगा चेहरे पे चेहरा चढ़ाया है मैंने एक रोज़ तो ये उतर जाएगा जो कहता है मुझसे मैं सबसे भला हूँ उसी का बुरा अक्सर मैंने किया है ...लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान में छत्तीसगढ़ के कोहिनूरअभी तक घोषित परिणाम - श्रीमती अल्पना देशपांडे - वर्ष की श्रेष्ठ चित्रकार - संजीव तिवारी - वर्ष के श्रेष्ठ क्षेत्रीय लेखक - ललित शर्मा - वर्ष के श्रेष्ठ गीतकार आंचलिक - गिरीश पंकज ...

बाढ की आशा-"हल्लो...नमस्ते बाबूजी." "हां बेटा, कईसे हो?" "बहुत बढियां बाबूजी." "नोकरिया मिली ?" "नहीं बाबूजी, पर चिन्ता के कोनो बात नाहीं. इस बार हम पूरा तैयारी में है.अतना पैसा कमायेंगे कि कोनो जरुरते नहीं रहेगी." "व...सचिन के अलोचक जरा ध्यान देंसचिन तेंदुलकर की महानता को नकारने वाले लोगों के लिए एक और पोस्ट। इस बारे में पहले ही दो पोस्ट डाल चुका हूं। इस बार सिर्फ आंकड़ों का आइना उठाकर लाया हूं। चलिए, अब आपको आंकड़ों की दुनिया में ले चलते हैं। शायद

नंगई के साथ फ्रैंडशिप-डे का विरोध.*धर्म सेना *और बजरंग दल के उत्पातियों ने *फ्रेंडशिप डे* के दिन रविवार को *रायपुर *पार्कों में जा कर प्रेमियों के साथ जो करतूत की उससे भारतीय समाज का एक नया और ऐसा कुरूप चेहरा सामने आया है जिसकी मजम्मत के .अगस्त यानि क्रांतिकारी महीनाअगस्त यानि क्रांतिकारी महीना* अगस्त का महिना क्रांति का महीना माना जाता है विशेषकर भारत के लिए तो यह "क्रांतिकारी"महीना है। वैसे तो देश का इतिहास ही त्याग और बलिदान से भरा पड़ा है लेकिन अगस्त का महीना अन...

बनो.बनो बींदराजा जद सांबेळा अर तोरण पर पधारे जद बनड़ी रे घर री अर गांव गुवाड़ी री सगळी जणियां उंची मेड़ी मातै चढ र घणे चाव सूं ओ बनो गाया करे बींद ने अणुंतो फुटरो अर बनड़ी रे जोड़ी रो बतावतां जस देवतां। बना सीवा...ये रिश्ते ....मेरे तसव्वुर की आँखें भर आतीं , जब याद आती है शब घूँघट वाली मैं कैसे कहूँ ये रिश्ते मोहब्बत बांटते हें ,जब रही अपनी झोली खाली कल अचानक दूरदर्शन से कबीर जी (गुवाहाटी दूरदर्शन के न्यूज़ रीडर व ऍफ़ एम रेडियो...

अब चलते हैं एक लाइना पर 

ललित भाई आपने मेरा पिटना यद दिला दिलाया-अभी याद दिलाने को और भी बाकी है।

कबूतर! तुम कब सुधरोगे ? जब आब-ओ-दाना बंद हो जाएगा

पिन कोड 273010, एक अधूरा प्रेमपत्र4 --इसे जल्दी पूरा करें-समीकरण हल करें


मैं तेरा दोस्त , तू मेरा हमदम--खाइए दोनो मिलके चमचम 

ग्लोबल होता राजस्थानी साफा--पश्चिमी करण पर पड़ा है लाफ़ा


अब देते हैं वार्ता को विराम -- आपको ललित शर्मा का राम राम--

सोमवार, 2 अगस्त 2010

नेता और कुत्ता-रिश्तों के तार कभी नहीं टूटते-ब्लाग4वार्ता-शिवम मिश्रा


प्रिय ब्लॉगर मित्रो ,
प्रणाम !

ब्लॉग जगत का एक चक्कर हो जाए ? 
लीजिये हाज़िर हूँ एक और ब्लॉग वार्ता ले कर इस ब्लॉग 4 वार्ता  के मंच से ! आशा है हर बार की ही तरह आप को यह ब्लॉग वार्ता भी पसंद आएगी !  

सादर आपका 


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फ्रेंडशिप डे :- मुबारक हो







तेरे चाहने वाले, तमाम बढ़ गए है| :- यह तो बढ़िया खबर है !

वाह रे बेरोजगारी… :- तू जो ना कराए कम !



नेता और कुत्ता :- एक जैसे नहीं लगते .............कभी कभी !!??


हिंदी सबके लिए :- बिलकुल सब के लिए !





रविवार भोर ६ बजे :-  क्या हुआ था ??


सांप्रदायिक सौहार्द ............ इसे कहते है :- आज के दौर में शायद....... हाँ !

रिश्तों के तार कभी नहीं टूटते..... :- टूटने भी नहीं चाहियें !

सूखे फूल  :- या ख्वाब ??

टिप्पणियां स्वतः आ आकर व्यंग्य करती है!! :- इस लिए तो उन का इंतज़ार रहता है !


आदमी को भी मयस्सर नहीं इनसां होना :- NICE !

दीवारों पर पेंट की जा सकने वाली बैटरी! :- कमाल की जानकारी !

यह कौन सी भाषा है विभूति जी? :- शर्मनाक !!

गड्ढे में हाथी :-  क्या सच में ?

दोस्ती दिवस :-  की शुभकामनाएं !

खाओ मनभाता, पहनो जगभाता और लिखो....... :- इस का जवाब कहाँ मिलेगा ??

वो सारे ज़ख़्म पुराने, बदन में लौट आए :- पर कैसे ??

द डे व्हेन एवरीथिंग वेंट रॉंग.....वेल..नॉट एवरीथिंग :) :- गनीमत है !

सावन की बरसात :- बरसी कहाँ कहाँ ??

कलमाड़ी और कौमन्वेल्थ! :- एक दूजे के लिए !

ललित भाई आपने मुझे मेरा पिटना याद दिला दिलाया..!! :-  सही किया या गलत ?

सर्वत जमाल का कहना है : आप सुन-समझ रहे हैं न ? :- सुन तो रहे है ......समझ कुछ नहीं आ रहा !!

अपने गुलाम होने का एहसास मरने न दीजिये --- इसे जिन्दा रखना ही चाहिए :- ऐसा क्यों ?

सिलसिला :- चलने दिया जाए !

तस्वीरें बोलती हैं शब्दों से ज्यादा :- सही कहा !

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बस आज की ब्लॉग वार्ता यहीं तक ........अगली बार फिर मिलुगा एक और ब्लॉग वार्ता के साथ तब तक के लिए ..........

जय हिंद !!

रविवार, 1 अगस्त 2010

गुस्ताखी और नशा--मन का एक्स रे--जला अंगीठियाँ--ब्लॉग 4 वार्ता--शिवम मिश्रा


प्रिय ब्लॉगर मित्रो 
प्रणाम !
'स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है, और हम इसे लेकर रहेंगे' का नारा देकर देश में स्वराज की अलख जगाने वाले बाल गंगाधर तिलक उदारवादी हिन्दुत्व के पैरोकार होने के बावजूद कट्टरपंथी माने जाने वाले लोगों के भी आदर्श थे। धार्मिक परम्पराओं को एक स्थान विशेष से उठाकर राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने की अनोखी कोशिश करने वाले तिलक सही मायने में 'लोकमान्य' थे।
एक स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, शिक्षक और विचारक के रूप में देश को आजादी की दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले तिलक ने कांग्रेस को सभाओं और सम्मेलनों के कमरों से निकाल कर जनता तक पहुंचाया था। 
स्वतंत्र भारत में एक संघीय सरकार के गठन की हसरत लिए तिलक का एक अगस्त 1920 को निधन हो गया।

भारत माँ के इस सच्चे सपूत को ब्लॉग 4 वार्ता   के पूरे वार्ता दल का शत शत नमन |

आइये अब चलते है आज की ब्लॉग वार्ता की ओर !

सादर आपका 


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शून्य :- आगे लगाना है या पीछे ?

चार लाइन! :- और बाकी ना पढ़े क्या ? 


यार जुलाहे...... गुलज़ार ! :- कोई तरकीब बता !



इटेलियानो पास्ता सचित्र (Iteliano Pasta with Pictures) :- भाई हमे भी बुला लिया होता !

हमरा ब्लॉग परिवारः भाग दो :- एक आदर्श परिवार !


 पहचान पायेंगे क्या? :-  कोशिश तो कीजिये !

 भैया जरा बच के , जाना दिल्ली में, -तारकेश्वर गिरी :- सुझाव तो बढ़िया है !

 उदासी मन का एक्स रे होती है :- हमे तो पता ही नहीं था !

 लफंगा परिंदा ----छिछोरा.--- एक सच्ची कहानी :- दुखद ! 

 भारत-पाक का मैच छत्तीसगढ़ में संभव :- सच ??

 माँ कहती थी :- क्या कहती थी ?

प्रेमचन्‍द की 130 वीं जयन्ति :- शत शत नमन !

भगवान परेशान हैं… :- पर क्यों भला ??

फिजाओं में गूँज रही है पंडित रफी की आवाज  :-रफ़ी जैसा दूसरा नहीं

 

 उदासी मन का एक्स रे होती है:- फ़िर तो पूरा पैसा बचाओ 

 

नहीं मना सका मैं, मुंशी प्रेमचंद जी का जन्मदिन :-महाजनी सभ्यता अगले जन्मदिन पर पढ लेंगे 

 

जुलाई माह में छूट गए इन साथियों को भी बधाई दें :- ढेर सारी बधाई

 

तू उठा कर आग सूरज से जला अंगीठियाँ..:- फ़िर खाना बना

 

चाशनी के टुकड़े बनाती जिनगी.. गोमती वाला चित्र..और हम...सतीश पंचम :-बढिया है

 

गुस्ताखी और नशा :-साथ-साथ चलते हैं।

 

आज हमारा जगराता है .:- आपसे हमारा भी कुछ नाता है

 

फिर मृत्यु से भय कैसा :- जब आत्मा अजर अमर है

 

बोल बम का नारा है--बाबा एक सहारा है

 

अब चलते-चले यहां भी पढ लिजिए-और नमन कीजिये | अगली बार फिर मिलुगा एक और ब्लॉग वार्ता के साथ तब तक के लिए .........

 

जय हिंद !!

 

शनिवार, 31 जुलाई 2010

महाप्रलय - मौत के मुँह से बचकर, फिर हाज़िर हूँ आपके बीच - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो 
प्रणाम !

कैसे है आप सब ? लीजिये एक बार फिर हाज़िर हूँ एक और ब्लॉग वार्ता ले कर इस ब्लॉग 4 वार्ता  के मंच से ! आशा है आप सबको यह वार्ता पसंद आएगी !

एक खुशखबरी भी है आप सब के लिए ...............हमारे प्रिय पाबला जी की वापसी हो चुकी है ब्लॉग जगत में ..........एक छोटे से अल्पविराम  के बाद !

सादर आपका 

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 मॉनसून :- कहीं आया और कहीं नहीं !! 

 सिर्फ मना मना है और कुछ मना नहीं :- क्या पता हम ने तो मना किया नहीं ! 






 महाप्रलय... :- अरे बाप रे !

  ब्लॉग में संसद :- चल रही है ये यह भी ठप है ?

 चोरी का माल आप के नाम.... :- पुलिस तो नहीं आएगी ?

 अब तक छ्प्पन- राजीव तनेजा :- बस सिर्फ़ ५६ ??

 …….मेरा प्यारा तकिया……. :- खो गया क्या ??

 छुपके सिरहाने में रोते हैं , लोग दीवाने क्यों होते हैं :- क्या पता ..........अभी हम दीवाने कहाँ हुए है ?

 तप से भगवान बने सचिन तेंदुलकर :- जय हो प्रभु की !!

 लोग जो चिकने घड़े हैं...... :- वह कहाँ खड़े है ??

 छतों पर रेडियम के चाँद तारे टिमटिमाते हैं :- क्या उन्हें देख कर ही आप रातें गुजारते है ?


 अपने बच्‍चों की ही नहीं, अपनी लिखावट भी सु‍धारें :- बात तो ठीक है !

 लघु कथा: अब पापा कौन बनेगा? :- है कोई जवाब ??

 हाल ऐ दिल कभी मैंने ..तमाम ..नहीं लिखा :- पर क्यों ??

 मेरे घर आना ! :- जरूर !

 ये साहब कब आयेंगे समय पर ......... :- खुद साहब भी नहीं जानते !!

 काउच सॉरी.....कोच :- सटीक लिख डाला !

 उत्प्रेरक...Catalyst......जबरही बोली......ओह.....अपना इंडिया.....सतीश पंचम :- हाँ जी इंडिया !

एक रिपोस्ट - ३१ जुलाई'२०१० - अमर शहीद उधम सिंह जी की याद में ! :- शत शत नमन !

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आज की ब्लॉग वार्ता बस यहीं तक ! अगली बार फिर मिलुगा एक और ब्लॉग वार्ता के साथ तब तक के लिए.....

जय हिंद !!

शुक्रवार, 30 जुलाई 2010

सावन आया झुम के-- सावधान हो जाएँ--टमाटर गिफ़्ट करें--ब्लाग4वार्ता

नमस्कार, सरकार अब पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों द्वारा फ़ैलाए जा रहे कचरे के विषय में राज्य सरकारो को आगाह कर रही है और इसके ठोस प्रबंधन के लिए कह रही है। यह एक उचित कदम है,हम जहां भी पर्यटन स्थलों पर जाते हैं वहां कचरे की भरमार हो जाती है। लोग पिकनिक मनाने आते हैं और प्राकृतिक स्थानों में अपने साथ लाया हुआ कचरा फ़ैला जाते हैं। सरका को खाद्य सामग्री की पन्नियों की पैकिंग बंद करा देना चाहिए, यत्र-तत्र पानी की खाली बोतलें, चिप्स की पन्नियां, प्लास्टिक के गिलास फ़ैले रहते हैं, कई जगह लिखा भी है कि "कचरा न फ़ैलाएं"।लेकिन भदेस भारतीय मानते कब हैं, अब चलिए ललित शर्मा के साथ आज की ब्लाग4वार्ता पर...
  
वार्ता का आगाज करते हैं वाणी जी ने कहा कि इनसे सावधान हो जाएँ, सावधानी हटी और दुर्घटना घटी,कल दैनिक भास्कर के इस आलेख को पढ़कर मन में अजीब सी बेचैनी छा गयी ..... इनसे सावधान हो जाएँ ... ऐसे लोगों का अपने आसपास होना जो आपकी निजता , आपकी पहचान चुरा लेते हैं , चिंताजनक है ...मित्रों और परिचितों की ...आज तो म्हारे ताऊ जी ने भी पोस्ट लिख दी सै कई दिनां पाच्छै--"नाचै कुदै बान्दरी और खीर मदारी खाय" .बन्दर* बडी अकड मे चश्मा वश्मा लगाके. और शूट बूट पहन कर, हाथ में छाता लिये हुये बडे तैश मे मदारी के केबिन मे घुस गया. मदारी अपने आफ़िस में बैठा अगला मजमा लगाने की प्लानिंग कर रहा था. डमरू पर घुग्घी कबूतर ...

आज तो भाई समीर भाई का भी जन्मदिन है फिर वही दिन… आ गए याद, समय बीतता जाता है और एक एक दिन करके हम न जाने किस गुणा भाग में लगे जान ही नहीं पाते कि कहाँ आ पहुँचे हैं. फिर एकाएक एक दिन साल में वो दिन आ जाता है, जब आप पैदा हुए थे. खुशी इस बात की होती है कि मित्रों औ...हमारी भी घुमक्कड़ी शरु हो चुकी है 110 कैमरा, नारनौल, जल महल एवं बीरबल का छत्ता--और मैं आप दोनो जरा घुम आएं, चलिए मेरे साथ गाड़ी पर --यात्राएं तो लगातार चलती रहती हैं जीवन ही यात्रा का नाम है,चलते रहना ही जीवन है। अब चलते हैं एक और यात्रा पर। सन् 1985 में मुझे हरियाणा के नारनौल जाने का मौका मिला।बात पुरानी है लेकिन स्मृतियों में ताजा है।...

खुशदी्प भाई ने पूछा है कि स्वर्ग पसंद हैं या नर्क हम तो यहीं कह रहे कि जहां मंहगाई हो कम और लैन लगानी नहीं पड़े, वहीं ले चलो--आज एक दोस्त ने बेहद मज़ेदार ई-मेल भेजा है...अनुवाद करके आपके साथ शेयर कर रहा हूं...उम्मीद करता हूं आपको भी उतना ही आनंद आएगा जितना इसे पढ़ कर मुझे आया... एक मल्टी नेशनल कंपनी (*एमएनसी*) ने भर्ती की निगर..अशोक बजाज ग्राम चौपाल पर.समाचार पत्रों का आभार आभार "मंहगाई एवं नक्सलवाद पर उलझी लोकसभा एवं विधानसभा" शीर्षक से प्रकाशित 27-07-2010 के पोस्ट को दैनिक "छत्तीसगढ़ वाच" ने "स्वतंत्र विचार" स्तम्भ एवं दैनिक "छत्तीसगढ़ समाचार" ने "चौपाल" स्तम्भ में प्रकाशि...

लूका और पीसा के आश्चर्य़ सुबह सुबह हमारा शिप लूका के लिये लिवोर्नो नामक पोर्ट पर डॉक हो गये था ।यहां से हमें बस से आगे जाना था । हमारी बस नंबर थी 16 । लूका और पीसा इटाली के पुराने टस्कैनी प्रदेश के बडे शहर थे और हैं । पुराने जमा...वे गरीब आदमी हैं, मगर इज्जतदार तो हैं असल मुगल खून! मोती के समान रंग! उम्र अस्सी के पार, लम्बे पट्ठे, बगुला के पर जैसे सफेद! बड़ी-बड़ी आँखें - प्यार ‌और शान को निमन्त्रण देती हुईं! कद लम्बा, दाढ़ी खसखसी, मखमली ऊदी कामदार टोपी ..... यह थे मिया खु...

वर्ष के श्रेष्ठ उत्सवी गीतकार का सम्मान कहा गया है कि प्रेम में जीव अभय हो जाता है , वहां तो सिर्फ समर्पण ही रह जाता है ! प्रेम सर्वस्व न्योछावर करके गदगद हो जाता है ! अहंकार सबकुछ पाकर भी खुश नहीं होता है ! प्रेम दूसरों की छाया बनकर अपने को ...शब्दों में जो धार हो तो कलम कम नहीं तलवार सेप्रारब्ध का दुश्चक्र ऐसा चला कि हमें कम्पनी में अपनी फ्री इन्टरनेट वाली सीट से हाथ धोना पड़ गया है......ये बात कोई मायने नहीं रखती कि हमारी कागजो में थोड़ी सी तरक्की हो गयी है......और पता नहीं कैफे वालो को...

नैनीताल की बारिशआजकल मेरा कैमरा खराब हो गया है इसलिये अपना शौक मोबाइल से पूरा कर रही हूं और उसकी के चलते बारिश के कुछ चित्र ले लिये...* बारिश का मौसम है छाते ले लो छाते बारिश में कभी-कभी ऐसा भी हो जाता है बारि...हारा है पहाड़ का अहमदेखा है कभी पर्वत को कितना तनहा होता है नदी के उदगम के बाद । देखा है कभी नदी को कितना उत्सव होता है उसके तट पर उसके रास्ते में उसके बहाव में सागर से मिलने की आस में । देखा है कभी हिमालय को उसका अहम पिघल...

रात अधूरी ....चिंदी चिंदी टुकड़ा टुकड़ा रात को जोड़ा चाँद को पकड़ा रूठा रूठा हाँथ से छूटा वो भूरा बादल का टुकड़ा कुछ बड़े तारे चिपकाए कुछ छोटे यूँही छितराए रात की रानी मांग के लाये काजल भरकर नैन जलाय...टमाटर गिफ़्ट करेंकार्यालय से घर जा रहा था तो सोचा सब्जियां खरीद लूं. जेब मे हाथ डाला तो पांच रुपये का एक सिक्का निकला.वैसे ही मेरा जेब इतना तंग रहता है कि आजकल कपङे सिलवाते समय मेरी धर्मपत्नी छोटा सा एक ही जेब डलवाती है ता...

मैं क्या चाहती हूं ? मुझे अपना ब्याह रचाना है , यह भली भांति जानती हूं , पर मैं कोई गाय नहीं कि , किसी भी खूंटे से बांधी जाऊं ना ही कोई पक्षी हूं , जिसे पिंजरे में रखा जाए , मैं गूंगी गुड़िया भी नहीं , कि चाहे जिसे दे दिया जाए ,...सावन आया झुम केआपने घर में घुसे पानी को बाल्टी से बाहर निकालते हुए आज सावन मास के दूसरे दिन इन्द्र भगवान बगड़ नगरी पर ऐसे मेहरबान हुए कि बगड़ की सड़को गलियों को पानी से सराबोर कर दिया ...

सचिनः कितना महान हुआ भगवान देख हमारे सचिन की ताकत क्या हो गई इंसान कितना महान हुआ भगवान कितना महान हुआ भगवान टेस्ट में जो कर न पाते भगवान वन-डे में भी कर दिखलाते इसलिए ही तो महान और भगवान कहलाते जिसपे सारा देश कुरबान देख हमारे सचिन क.....राजस्थानी !!एक एक नै क्यूं बतानी पड़े क थांरी भासा राजस्थानी ! थे उठो थे जागो अब थांरो फरज राजस्थानी ! निज घर में निज रै थाने क्यूं अणजाणी है राजस्थान? मना मना र बात मनवावां ऐड ी थारै संताना ...

हिन्‍दी ब्‍लॉगरों : टिप्‍पणी दान महादान हैआदमीयत अब है कहां फिर भी सोचा कि चलो इंसान में न सही चूहों में ही तलाश ली जाए कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स के अवसर पर चूहे से चैट तो इंटरनेट ऑन करते ही एक चूहे से चैट शुरू हो गई। उसने कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स का हवाला देत ह...मेरे साईट को कोई संभालने वाला चाहीये मेरे पास एस साईट है जिसका सर्वर Netfirm पर है। सायद आप उस साईट के बारे मे जानते भी होंगे: *Kunnu.NET* (अभी वायरस ईन्फेक्टेड है) मेरे पास २ साईटें हैं और ईनको एक साथ चलाना बहुत मुस्कील पड एहा है। ईसलिय...

नूडल खाने का शिष्टाचारजापान में आजकल खूब गर्मी पड़ती है। गर्मी मौसम में जैसा भारतीय खाना, थाइलैंड के खाना, ऐसा मसालेवाले यानि तीखा खाना अच्छा लगता है। लेकिन ज़्यादा गर्मी से खाने का इच्छा भी खो गया तो हम जापानी ठंडा खाना खाते हैं..लातों के भूत बातों से नहीं मानतेभटनेर का किलाकहानी 1984-85 की चल रही है, अभी तो काफ़ी बदलाव आ गया है,नारनौल से घुम घाम कर हम वापस रिवाड़ी पहुंचे, रिवाड़ी में भी एक दिन आवारागर्दी की। बस युं ही चक्कर काटते हुए, काठ मंडी, गोकलगेट, मुक्तीवाड़ा..

छत्तीसगढ़ में रामछत्तीसगढ़ में राम* भगवान राम ने अपने 14 वर्ष के बनवास काल में 10 वर्ष छत्तीसगढ़ में गुजारे हैं। यह निष्कर्ष “राम वनगमन मार्ग शोध दल” ने अंचल का दौरा कर तथा भगवान राम से सम्बंधित विभिन्न ग्रंथों यथ...एक २ इन १ पोस्ट - २९ जुलाई - एक ख़ास दिन !आज २९ जुलाई है - भारत देश की २ विभूतियों का बहुत गहरा नाता है आज के दिन से ! एक का आज जन्मदिन है तो एक की आज पहली बरसी है ! आइये इस २ इन १ पोस्ट के माध्यम से उन दोनों को ही अपने श्रद्धासुमन अर्पित करें ! ...

नई ग़ज़ल/फ्लैटों, मालों का 'इंडिया' लेकिन अपना देश कहाँ?मैं स्वतन्त्र लेखक-पत्रकार हूँ. संघर्ष मेरे जीवन का पाथेय-सा बन गया है, क्या करुँ. किसी तरह अपना छोटा-सा दफ्तर बनाया है. जिसका मालिक, चपरासी, मैसेंजर सबकुछ मै हूँ. मैंने अपने कार्यालय में प्रख्यात चिन्तक ...जज के पिता और भाई की हत्या - राजस्थान में बिगड़ती कानून और व्यवस्थाराजस्थान में कानून और व्यवस्था की गिरती स्थिति का इस से बेजोड़ नमूना और क्या हो सकता है कि एक पदासीन जज के वकील पिता और वकील भाई की दिन दहाड़े गोली मार कर हत्या कर दी गई। गोली बारी में जज की माँ और उस का ए...

चलते चलते व्यंग्य चित्र

 
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वार्ता को देते हैं विराम---ललित शर्मा का राम-राम.

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