शनिवार, 7 अगस्त 2010

छिनाल का जन्म और ईव्हीएम की विश्वसनीयता---ब्लॉग4वार्ता--ललित शर्मा

नमस्कार, नानापाटेकर का एक संवाद याद आ रहा है-"एक मच्छर आदमी को हिजड़ा बना देता है।" मच्छर में इतनी ताकत होती है कि बड़े-बड़ों की खाट खड़ी कर देता है, वाट लगा देता है, एक गैंगस्टर जिससे लोग डरते हैं, उसे मच्छरों से डर लग रहा है, उसके वकील ने टाड़ा कोर्ट में याचिका दायर की है कि उसे मलेरिया होने का खतरा है इस लिए अन्यत्र स्थानान्तरित किया जाए। इससे मच्छर की ताकत का पता चलता है। अब चलते हैं आज की ब्लाग वार्ता पर--

आज सुनीता शानु जी का जन्मदिन था-वे एक बहुत बड़ा केक ब्लाग जगत के लिए लाई थी-गुगल की दुकान से, लेकिन खाया नहीं जा सकता, इसलिए उन्होने भाई साहब को अल्टिमेटम दे दिया है  कि" मै मायके चली जाऊँगी, अगर असली केक ब्लाग जगत के लिए नहीं भेजा।" हो सकता है उनकी धमकी काम कर जाए और हमें भी केक खाने मिल जाए। थोड़ी सी इनकी कविता की झलकी भी देखिए--

पत्नी बोली पतिदेव जी तुम पर भारी पड़ जाँऊगी,
अगर न मानी बात मेरी तो मायके चली जाऊँगी।

दफ़्तर की खींचा तानी से जब थककर घर को आओगे,
एक चाय की प्याली भी तुम अपने हाथ बनाओगे।
कौन पिलायेगा फ़िर तुमको चाय वो अदरक वाली,
एक हाथ से प्यारे मोहन नही बजती है ताली।
चुन्नू,मुन्नू बंटी को भी सौप तुम्हे ही जाँऊगी,
अगर न मानी बात मेरी तो मायके चली जाँऊगी।

बाजार वाद और उपभोक्ता वाद ने किसी को नहीं छोड़ा, बेटियों की आड़ में धंधा चला रहे है, जहां भी जो भी मिले उसे भंजा लिया जाए। ऐसा ही एक झोला राजकुमार सोनी को मिला, जिस पर ब्रा पेंटी बेचने के लिए एक कविता लिखी हुई थी। अब ये तो राजकुमार ठहरे, झोला मिला और दुकानवाले सिंधी को गरियाना शुरु कर दिया, बड़ी मुस्किल से उसने जान बचाई लेकिन जान बचेगी कहाँ? जब राजकुमार सोनी पीछे हो----

एक प्रश्न पूछा जा रहा है कि क्या आप सेलफोन सही पकड़ते हैं --पकड़ते तो हैं भाई, अब क्या सही है और क्या गलत है,इसका पता नहीं, लेकिन आपने फ़ोटो ऐसी लगा दी है कि डर लगता ही कि सेलफ़ोन पकड़-पकड़कर हम भी इसी गति को प्राप्त न हो जाएं। कम्पनी ने भी नहीं बताया है कि कैसे पकड़ना है? अब फ़ोन पकड़ना सीखना भी जरुरी है,नहीं तो फ़ोटो देखिए--चुनाव आयोग और ई. व्ही.एम. की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लग रहे हैं,प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए जनप्रतिनिधि और अधिकारी भारत में निर्वाचन आयोग की हीरक जयंती पर रायपुर के टाउन हाल में एक प्रदर्शनी लगी हैं । प्रदर्शनी में चुनाव आयोग की गतिविधियों को दर्शाने वाले विहंगम---

भारतीय लोकतंत्र के पांच खतरेभारतीय लोकतंत्र के जो पांच बड़े खतरे हैं, उनमें से प्रत्येक उसे पंगु बनाने के लिए काफी हैं। लोकतंत्र केवल जनता के मनोबल के कारण---क्या आप कुछ सोचने को तैयार हैं मेरे साथ …?
आज मैं आपका ध्यान एक छोटी सी बात की ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ । क्या आप बता सकते हैं कि एक आदमी अपनी पूरी जिंदगी में कितना जल,फ़ल,फ़ूल और कितने पेड़ों की लकड़ी का उपयोग करता है ? शायद नहीं । जल,फ़ल और फ...

छिनाल का जन्मछिन्न का आमतौर पर इस्तेमाल *छिन्न-भिन्न *के अर्थ में होता है। ... हि न्दी में कुलटा, दुश्चरित्रा, व्यभिचारिणी या वेश्या के लिए एक शब्द है*छिनाल *। आमतौर पर हिन्दी की सभी बोलियों में यह शब्द है और इसी अर...आज विनय शर्मा का जनमदिन हैआज, 6 अगस्त को मेरे ब्लोग तथा स्नेह परिवार वाले विनय शर्मा का जनमदिन है। बधाई व शुभकामनाएँ *आने वाले **जनमदिन आदि की जानकारी, अपने ईमेल में प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें**।* *अपने मोबाईल फोन पर *...

हम वो हैं जो हम है नहीं ---हम हम वो हैं, जो खेल करवा सकते हैं, खेल कर सकते हैं, पर खेल सकते नहीं। दे सकते हैं पर मेडल, ले सकते नहीं। बन सकते हैं किरायेदार, पर खरीदार हो सकते नहीं। हम वो हैं, जो हम हैं नहीं, और हो सकते नहीं। मुश्किल का दूधदिनांक - 6 अगस्त 2010, प्रातः 5:15,* अभी-अभी दूध ले कर लौटे हैं। यूँ, छह माह पहले तक दूध घर पर आ जाया करता था। आधा किलोमीटर के दायरे में सात आठ दूध डेयरियाँ हैं। जिन में सरस दूध डेयरी के आउटलेट भी हैं, जि...

अपने कंप्यूटर में मिडिया विकी स्क्रिप्ट कैसे इन्स्टाल करें ?कल ही एक ब्लोगर मित्र ने फ़ोन पर एक साईट का नाम बताकर उसके जैसी साईट बनाने की इच्छा जाहिर कर जानना चाहा कि ऐसी साईट कैसे बनाई जा सकती है | उनके द्वारा बताई गयी साईट देखने पर पता चला कि वह वेब साईट मिडिया व..जाने कितनी यादों को जाने कितनी यादों को, अपने दिल के आंगन में , सजा रखा है , जब तुम छोटी सी परी थीं , प्रथम कदम उठाया था , आगे बढ़ना चाहा था , अपने नन्हें हाथों से तुमने , मेरी उंगली थामी थी , हल्का सा भय लिए हंसी थी , तुम्हारे ...

वर्ष के चर्चित उदीयमान ब्लोगर का सम्मान एक ऐसा चिट्ठाकार जिसके द्वारा एक वर्ष पूर्व एक चिटठा देशनामा…शुरू किया गया इस आशय के साथ कि देश का कोई धर्म नहीं, कोई जात नहीं, कोई नस्ल नहीं तो फिर यहां रहने वाले किसी पहचान के दायरे में क्यों बांधे जाए ...माँ के हाथों बने खाने का स्वाद ।रश्मि जी ने अपने ब्लॉग 'अपनी उनकी सबकी बातें' पर जब कहा कि " काश रोहन के द्वारा पढ़ी गई कविता की पंक्तियाँ मुझे याद रह जातीं " तो मुझे अपने हॉस्टल के दिनों में लिखी कवितायें याद आ गईं…और पढ़ाई के दिनों की ...

इतने निकट रहते हुए भी हमें मालूम न था .. बोकारो में मकान की इतनी किल्‍लत है !!पिछले अंक में आपने पढा कि कितनी माथापच्‍ची के बाद हमने आखिरकार बच्‍चों का बोकारो में एडमिशन करवा ही लिया। 1998 के फरवरी के अंत में बच्‍चों के दाखिले से लेकर स्‍कूल के लिए अन्‍य आवश्‍यक सामानों की खरीदारी ,...अगला पड़ाव ऋषिकेश ...........सुबह हरिद्वार में बारिश से भीगते हुए गंगा स्नान करने के बाद अगला पड़ाव था ऋषिकेश, गाड़ियों कि कमी थी बारिश कि वजह से दो ऑटो बदलकर ऋषिकेश पहुंचे । वहां पहुंचकर सबसे पहले जो आवाज़ सुनाई दी वो थी सेब बेचने वाल...

पहली बरसी पर विशेष - गीतकार गुलशन बावरामेरे देश की धरती जैसे लोकप्रिय गीतों के रचयिता और जाने माने गीतकार गुलशन बावरा का ०७/०८/२००९ को दिल का दौरा पड़ने के बाद निधन हो गया था । गीतकार की पड़ोसी मोनिका खन्ना ने बताया कि गुलशन बावरा की इच्छा थी...चले बाबा की नगरिया-हम पहुंच गए कलकत्ता--यात्रा 2ट्रेन आ चुकी थी, हमने अपनी-अपनी सीटें संभाल ली, देवी भैया इटली लेकर आए थे। बैठते ही सब की इच्छा से उनकी इटली पर हाथ साफ़ किया। क्योंकि इटली को ज्यादा देर रखना ठीक नहीं था। खराब हो सकती थी,आपस में हंसी मजाक.

अब देते हैं वार्ता को विराम-सभी को हमारा राम राम

शुक्रवार, 6 अगस्त 2010

पृथ्वी कला--ख़्वाबों से मिट्ठी --- ब्लाग4वार्ता -- ललित शर्मा


नमस्कार, बरसात झमाझम हो रही है इस मौसम में हमारे ब्लागर भी घुमने निकले हैं,नवीन प्रकाश हरिद्वार में हैं, संजीव तिवारी दिल्ली की गर्मी देख आये हैं, तो कल उदय पहुंचे रायपुर, वैसे भी बरसात के मौसम में घुमना परेशान होना ही है। कब बारिश हो जाए और कहां फ़ंस जाए, कौन सा नदी-नाला चढ जाए और मार्ग अवरुद्ध हो जाए,कहां रुकना पड़ जाए? उनके लिए घुमना ठीक है जो बरसात में रपटने से नहीं डरते। अब हमारे चाचा भी भतीजे को बुला रहे हैं फ़्लाईट से,लेकिन भतीजा भी सोच रहा है कि कहीं फ़्लाईट रपट गयी बरसात में तो क्या होगा? वैसे भी काका-काकी का रोल सही नही रहा है इतिहास में। का का और का की, याने किसका? किसकी? ये किसी के सगे नहीं हुए तो हमारे कहां से होगें? सगे तो अपने माँ-बाप ही होते हैं। अब चलते हैं आज की वार्ता पर---
ताऊ जी कई दिनों के बाद आए हैं,इनकी टीवी कम्पनी के कर्मचारी हड़ताल पे थे,क्योंकि तनखा कम थी और काम ज्यादा था।ताऊ टीवी का "पति पीटो रियलिटी शो"नमस्कार बहनों और भाईयों! मैं रमलू सियार ताऊ टीवी का चीफ़ रिपोर्टर सुबह ४:४४ के ताजा तरीन बुलेटिन में आपका हार्दिक स्वागत करता हूं. जैसा की आप जानते हैं कि ताऊ टीवी हमेशा ही अपने अनोखे और नये नये कार्यक्रमो... इधर एक दुसरा मामला चल रहा हैं=कैसी हत्या? – लघु(त्तम) कथा और कविताडॉक्टर का कमरा. महिला अपनी एक साल की बेटी को गोद में और सोनोग्राफी की रिपोर्ट हाथ में लिए होने वाली कन्या का गर्भापात कराना चाहती है. तर्क है छोटी छोटी दो बेटियों को कैसे संभालेगी? डॉक्टर ने सलाह दी ...

द्विवेदी जी कह रहे हैं गोल बनाओ फिर से जाओगोल बनाओ फिर से जाओ* - * दिनेशराय द्विवेदी* *जेठ तपी धरती पर बरखा की ये पहली बूंदें गिरें धरा पर छन् छन् बोलें और हवा में घुलती जाएँ* * **टुकड़े टुकड़े मेघा आएँ, प्यास धरा की बुझा न पाएँ* * **इधर देखिए-सुदूर बैठकर अपने कंप्यूटर को मोबाइल से कंट्रोल या री-स्टार्ट करें...मैंने पहले भी एक पोस्ट लिखी थी जिसमे बताया था कि अपने पीसी को सुदूर बैठकर कैसे ट्विटर शट-डाउन या रि-स्टार्ट कैसे करें | आज मैं यहाँ चर्चा कर रहा हूँ कि यही काम आप अपने मोबाइल से कैसे कर सकते है | एक एप... 

एक हकीकत रुबरु करवा रहे हैं श्यामल सुमन जी-जो रचनाएँ थी प्रायोजित उसे मैं लिख नहीं पाया स्वतः अन्तर से जो फूटा उसे बस प्रेम से गाया थी शब्दों की कभी किल्लत न भावों से वहाँ संगम, दिशाओं और फिजाओं से कई शब्दों को चुन लाया किया कोशिश कि सीखूँ मैं कला ख...काश कोई .....उलझे केशों सी जिंदगी मेरी , कोई अपनी उंगलियों से कंघी कर दे, फिर देखो लहराऊं मैं कैसे ....... सुखी झाड़ी की जड़ों सी मैं कोई इनमे कुछ अपने आंसू रो ले , फिर देखो खिल आऊं मैं कैसे ....... रीती गागर सी पड़ी मै...

रोम का रोमांच -हमें भी भा गया-रोम जाने के लिये हमे उतरना था पोर्ट सिविटाविचिया पर । सुबह सबह पोर्ट पर शिप की डॉकिंग हो गई थी फिर हमें पोर्ट पर उतरने के बाद शिप की तरफ से जो बस ठीक की गई थी हमे सेंट पीटर्स चौक में छोडने वाली थी । वहीं...अतृप्ति को स्वीकार करो - वह मुक्त होकर मांग रही थी तृप्ति खुले आम मंच से एक अतृप्त भटक रहा था आनंद की तलाश में तृप्त होना क्यों चाहती हो तुम अतृप्ति ही तो जीवन है तृप्त होकर ठहर जाना रुक जाना क्यों, जीवन का अंत नहीं है? अगर पड़ाव को ...

हरि के दरवाजे पर दस्तकअजीब लग रहा है तकनीकी ब्लॉग में यात्रा विवरण !! फिर भी शुरू करते हैं । खरोरा से रायपुर बस और रायपुर से दिल्ली के निजामुद्दीन स्टेशन तक छत्तीसगढ़ संपर्क क्रांति से २० घंटों की यात्रा के बाद हरिद्वार जाने के ...यहां पर मिलिए जापानी मौसी से पृथ्वी कला मेलाजहाँ में 3 से 18 वर्ष की आयु तक मैं रहती थी और अब तक मेरा मैका है, तोओकामाचिजापान के एक छोटा शहर है। उस की जनसंख्या सिर्फ 60,000 से कम, उस का मुख्य उद्योग किमोनो था, फिर भी चूंकि अब जापानी किमोनो बहुत कम प...

खोया-खोया चाँद खोये-खोये चाँद की तलाश में, ख्वाबों में क्यूँ खोये चले जाते हो तुम.. नज़रें उठा कर देखो ज़रा तुम आईना, एक चाँद छुपा बैठा हैं उसमें भी.. © जोगेंद्र सिंह Jogendra Singh ( 05 अगस्त 2010 ) . वर्ष की श्रेष्ठ सकारात्मक ब्लोगर (महिला) का सम्मानसंगीता पुरी जी** आज के चर्चित हिंदी चिट्ठाकारों में से एक हैं , इन्होने पोस्‍ट-ग्रेज्‍युएट डिग्री ली है अर्थशास्त्र में .. पर सारा जीवन समर्पित कर दिया ज्योतिष को .. ज्योतिष का गम्भीर अध्ययन-मनन करके उस...

ख़्वाबों से मिट्ठी ......ख़्वाबों से मिट्ठी करके फिर सजा लिया है मैंने उनको अपनी पलकों पर , ख्वाब ना हों तो आँखें पथरा सी जाती हैं......साहित्य सर्जकदेश कीवर्तमान व्यवस्था पर कुछ मुक्तक पत्थर बजी करें सडक पर और पुलिस को पीट रहे जिस में खाते छेड़ उसी में करें देश को लूट रहे फिर भी मौन साध कर चुप हो देख रहे हैं नेता कैसी बेशर्मी क्या ऐसे भाग्य हमारे फू...--

चलते चलते एक व्यंग्य चित्र

 
 

 
 
अब वार्ता को देते हैं विराम -एक पोस्ट आपका इंतजार कर रही है--सबको राम राम

गुरुवार, 5 अगस्त 2010

जनता के कुछ और सत्य हैं, शासन के कुछ और - कब सुधरेंगे हमारे माननीय...? - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो 
प्रणाम !

आज जब यह ब्लॉग वार्ता लिख रहा हूँ तब बिलकुल भीगा हुआ हूँ .....................आप सब के स्नेह की बारिश में ! 

जिस दिन पहली बार ब्लॉग 4 वार्ता  के मंच से अपनी पहली ब्लॉग वार्ता लगाई थी उस दिन ज़रा भी अंदाज़ नहीं था कि आप सब का प्यार यूँ बेशुमार मिलेगा !

आप सब से यह वादा है कि जब तक इस ब्लॉग जगत पर हूँ .................या इस जगत में हूँ आप लोगो को कभी भी शिकायत का मौका नहीं दूंगा !

अब और ज्यादा सेंटी नहीं होना चाहता .........मेंटल हो जाने का खतरा रहता है !!

आइये अब  चलते है ब्लॉग जगत का एक चक्कर लगाने !

सादर आपका 

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मैं धार्मिक हूँ :- हम भी है जी !

ज़िन्दगी :- इम्तहान लेती है !


फ़ूंकनी-चिमटा बिना यार-देखो मुहब्बत है बेकार------ललित शर्मा :- आज ही ले कर आये है ............परिवार का सवाल है भाई ! 

सचमुच काली बन जाऊँगी...! :- हाँ नहीं तो ...........जय माँ काली !!

मेरी कलम! :- बढ़िया लिखती है ! 


तुम्हारी बात में दम तो है :- तो मान काहे नहीं लेते ? 



एक हस्ताक्षर उसका एक मेरा ..... :- पर हस्ताक्षर किये कहाँ  है ??



मॉल और माइक्रोसॉफ्ट :-  अब भाई, माइक्रोसॉफ्ट होगा तो........ माल तो होगा ही !!



निर्विकार :- उम्दा सोच !





करेगा फिर पाप पर कुठाराघात परशुराम :- पाप का नाश होना ही चाहिए !

वैलकम ! :- इमानदार आदमी की तो कोई कद्र ही नहीं है !

कश्मीर राज्यपाल शासन की ओर? :- नज़र मेरी जमीन को ......लगी है आसमान की !!

चमन को अचरज भारी :- होना ही चाहिए !

कैसे कह दूं यार .....कि कोई फ़र्क नहीं पडता .....अजय कुमार झा :- फर्क तो पड़ता है भाई !!

घूमती है दुनिया घुमाने वाला चाहिए-राजीव तनेजा :- तुना....... तुना....... ता....... ता....... तुना !!

मेरा सपना मेरी डायरी मेरी जिंदगी :- एक मिनट................ इन सब में हम कहाँ है ??

भारत को पदक क्यों नहीं मिलते? :- किस खेल में ..........खुल कर बोलो भाई जी !!

कालसर्प योग की भयावहता पर स्‍वयमेव ही प्रश्‍नचिन्‍ह लग जाता है!! :- पर क्यों भला ?

एक झलक (एलोरा केव्स की) :- घर बैठे बैठ देशाटन ...........धन्यवाद !

जय श्री शाह को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं :-  अंदाज़ निराला है ..............अरे तभी तो लिंक यहाँ डाला है !!

अमीर खुसरो :- शत शत नमन उनको !

कान खोल कर इस पोस्ट को पढ़ें...खुशदीप :- आँखों का क्या आचार डालना है ??

छपते छपते  :- 

एक दुखद सूचना :- सलिल वर्मा जी कि पोस्ट के मार्फ़त पता चला कि स्वप्न मेरे................ ब्लॉग वाले श्री दिगम्बर नासवा जी के बड़े भाई साहब का २८ जुलाई को फरीदाबाद में अचानक ह्रदय गति रुक जाने से देहांत हो गया |

इस दुःख की घडी में  ब्लॉग 4 वार्ता   का पूरा वार्ता दल आपके साथ है |

दिगम्बर नासवा जी को भ्रातृ शोक :- बेहद दुखद .............हम सब आपके साथ है !

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आज की ब्लॉग वार्ता बस यहीं तक .............ईश्वर से यही विनती है कि श्री दिगम्बर नासवा जी और उनके पूरे परिवार को इस सदमे से उबरने की शक्ति और मृतात्मा को शांति प्रदान करें |

ॐ शांति शांति शांति !

जय हिंद !!

बुधवार, 4 अगस्त 2010

भगदड़ - ब्लॉगर ही ब्लॉगर हैं - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो ,
प्रणाम !

बिना आपका समय बर्बाद किये हुए सीधे मुद्दे की बात करता हूँ और आपके लिए  ब्लॉग 4 वार्ता   के इस मंच से एक और ब्लॉग वार्ता पेश करता हूँ !

आशा है आपको आज की ब्लॉग वार्ता पसंद आएगी |

सादर आपका 


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बाज़ार जनित बीमारियाँ :- हम सब को लग गयी है !

हाय !ये मैंने क्या किया? :- क्यों क्या हुआ ?



मानसून का आना और नहीं आना :- क्या चाहते हो शर्त लगाना ?


हमरा ब्लॉग परिवार – अंतिम भाग :- गलत बोले ...........पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त !! 






झुलसता बचपन .... :- कहाँ है देश के नेता ??









अभी तो मुजरा शुरू हुआ है ! :- तभी तो सब आ गए है !

बुरुंश के फूल :- कैसे होते है ?

अब अपना मुह बंद रखे इस वृहत लोकतंत्र के तंग दिल सनम ! :- रखना ही पड़ेगा !

ब्लॉगर ही ब्लॉगर हैं ! :-  कहाँ ?

उफ़!!... तुम भी न. :- ???????????????

भगदड़..... :- मच गयी !

आज हमारा जन्‍मदिवस है - आशीर्वाद दें । :-  बधाइयाँ जी बधाइयाँ !

'तुझे तुझ से मांग लूं' :- क्या बात है !

दिल तो बच्चा है जी... :- थोडा कच्चा है जी ..........पोस्ट नहीं दिल की बात कर रहा हूँ !

लहर :- आ गयी क्या ?

मै इधर जाऊं या उधर जाऊं!!!  :- सोचना पड़ेगा !


आपका जीमेल अकाउंट सेफ है..? :- पता नहीं ...... देखना होगा  !

क्या आप दुनिया के सबसे असुरक्षित तरीके से इंटरनेट पर जाते हैं!? :- जी मालूम नहीं ....आप बताओ !

दे जाती है दग़ा.... :- कौन ??

मैं प्रवासी हूं :- अच्छा !!

ये रिश्ते ....... :- कितने अजीब होते है !

दर्द.. :- अब  कैसा है ?

आओ खेलें माफी का ड्रामा :- पर कहाँ ?

बारिश का मौसम और भुट्टे की सोंधी खुशबू :- भाई वाह !

...शाबास उपेन्द्र कुमार :- मैनपुरी का चार्टेड एकाउंटटेंट पुलिस कप्तान !

क्यूँ यह दुनियां ? :- ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है ! शुभकामनाएं !

चाँद और मेरी गाँठ :- बहुत याराना लगता है !!

अब तक जो कुछ भी लिखा था :-  था वह अपने लिए या सब के लिए ??

ऊपर वाला देता है तो छप्पर फाड़ कर देता है... :- शुभकामनाएं !

बाज़ार में हिन्दी पत्रकारिता :- अफ़सोस........... पर बिक रही है !!

काफ़ी दूर … :- चले आये है हम !

कमी क्यूँ हे :- कुछ कमी हम  में ही होगी !

मन मयूरा :- नाच रहा है क्या ?

किशोर दा की याद में ...  :- शत शत नमन !

वो फिर ना आएगा कभी .... :- कसक दिल की !

अब मच्छर के बहाने ... :- इंसान मारे जायेगे !

हां ! तो कौन कहता है हिंदी ब्लॉगिंग से कमाई नहीं होती बे........ :- हम नहीं बोले , भईया जी !!

जय हिन्दुस्तानी रेल और जय रेल यात्री... :- जय हो !

इनका सीधापन फिर भी बरकरार है, आवारा तो लड़के ही हैं :- अब क्या कहे ?

आप बच्चों को ज़हर तो नहीं दे रहे...खुशदीप :- आपका सवाल जरुरी है ............. तभी एक ही वार्ता में दोबारा जगह बनाई है !

विभूति नारायण जी अपनी लेखिका पत्नि के बारे में विचार कर लेते तो शायद ऐसा अश्लील शब्द मुंह से न उगल पाते :- ह्म्म्म !

छेड़छाड़ हमारा अधिकार, हम इसे हासिल करके ही रहेंगे! :- करे रहो !

बरसात, बचपन,वजीफ़ा और मित्रता दिवस :- सब फायेदे की बाते है !


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आज की ब्लॉग वार्ता बस यहीं तक .............अगली बार फिर मिलुगा एक और ब्लॉग वार्ता के साथ तब तक के लिए ...........

जय हिंद !!

मंगलवार, 3 अगस्त 2010

हाय..हाय.. राहुल--शाबास,नारी शक्ति की जय हो---ब्लॉग4वार्ता--ललित शर्मा

नमस्कार, मीडिया के माध्यम राजनेता की बिगड़ैल औलाद राहुल महाजन की फ़ितरत से सभी वाकिफ़ हो चुके हैं, फ़िर ये लड़कियाँ क्यों उसके चंगुल में फ़ंसती है। अभी दो महीने पहले स्वयंवर रचाने वाली अपने शरीर के जख्म मीडिया को दिखा रही है। अरे जब स्वयंवर ही किया है तो भुगतो उसको। दुसरी तरफ़ एक महानुभाव महिला लेखकों को "छिनाल" कह रहे हैं,अब इन्होने साहित्य जगत में "छिनाल" होने के लिए कौन से मापदंड विकसित किये, उसे तो वे ही जाने, लेकिन मातृशक्ति का अपमान करने के लिए इनकी घोर भर्तसना करनी चाहिए, अब चलिए ललित शर्मा के साथ आज की ब्लॉग4वार्ता पर-----

वाह! वाह! राखी.... हाय..हाय.. राहुल..मैंने तो पहले ही कहा था....जोड़ियाँ आसमान में बनती है | फिर स्वयंवर के नाम पर दूसरे लोगों और अपने आप से मज़ाक किये जाने का क्या मतलब...?? राखी....क्या कहूँ इनके बारे में, पहले तो शादी के नाम पर क्या सीधी..बहुत पहले से उन कदमों की आहट.... आप सभी का जन्म दिन पर दी गई शुभकामनाओं एवं स्नेह के लिए बहुत बहुत आभार. * *सूचना* [image: HC_July2010 copy] नए तेवर और नए कलेवर के साथ..*''हिन्दी चेतना''* का जुलाई-सितम्बर, २०१० अंक प्रिन्...

उल्टा चोर कोतवाल को डांटे---ये भी खूब रहीदिल्ली का ट्रैफिक । साठ लाख वाहन । जिंदगी की भाग दौड़ । सुबह सुबह सब भागने में व्यस्त। ऐसे में क्या क्या दृश्य देखने को मिलते हैं । ज़रा आप भी देखिये । द्रश्य १ : एक चौराहे पर एक गाड़ी वाले ने तीन स्कूटर्...कपडे सुखाती औरतेंबरसात के दिनों में कपडे सुखाती औरतें औरतें नहीं होती प्रबंधक होती हैं बाहर जब धूप नहीं होती कई दिनों तक वे घर के भीतर खिडकियों और दरवाजे के बीच बनती हैं पुल पुराने बिजली के तार या फिर पुरानी नारियल या जूट क...

गुलज़ार को भी कोई नापसंद कैसे कर सकता है भलापकिस्तान के दीना शहर में जन्मे गुलज़ार का वास्तविक नाम समपूरन सिंह कालरा है... बेहतरीन गीतों , नज्मों , गजलों और कहानियों की सौगात देने वाले गुलज़ार ने बच्चों केशाबास,नारी शक्ति की जय हो लिए भी सीधे सादे शब्दों में आसानी से जुबान प...औरंगाबाद से मुम्बई की ट्रिपमित्रों, देव बाबू विवाह के उपरान्त ससुराल के दो ट्रिप लगाए, यकीन मानिये ससुराल के अपनें ही मजे हैं। दामाद की खातिरदारी अपने हिन्दुस्तान में कुछ अजीब तरीके से होती है। एक किस्सा सुनिये... हमारे दुबे जी प...

शाबास,नारी शक्ति की जय हो.एक बार फिर नारी शक्ति ने साबित कर दिया कि उनका कोई मुकाबला नहीं.टिकरापारा कि महिलाओ ने शराब ठेकेदारों को भागने मजबूर कर दिया .आज इसी तरह कि कार्रवाई कि जरुरत है हिन्दी ब्लोगिंग की महत्वपूर्ण बातेंकिसी भी नये ब्लोगर को उसके पहले ही पोस्ट पर इतना स्वागत् और इतनी वाहवाही मिलती है जितनी कि उसे अपने जीवन में पहले कभी न मिली हो! - ब्लोगरों की हर वो रचना जो कि समस्त पत्र-पत्रिकाओं से 'खे...

वर्ष के श्रेष्ठ ब्लॉग.विचारक का सम्मानहिंदी चिट्ठाजगत के एक ऐसे व्यक्तित्व को समर्पित है आज का यह सम्मान जो अपने सदविचारों के लिए जाने जाते हैं ...हिंदी चिट्ठाकारी के उन्नयन की दिशा में सक्रिय चिट्ठाकारों में जिनका नाम पूरे सम्मान के साथ लिया..फ़्रेंडशिप डे पर पिटाई - हंगामा. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कल शाम बूढ़ा तालाब स्थित विवेकानंद उद्यान में बजरंगियों ने एक प्रेमी युगल के मुंह पर न केवल कालिख पोती वरन युवक और युवती दोनो को पीटा भी , हमेशा की ही तरह यहाँ तैनात पुलिस मु...

चेहरे पे चेहरा चढ़ाया है मैंनेहर सुबह आईने से मुखातिब होता हूँ किसी रोज़ तो सही सूरत दिखलायेगा चेहरे पे चेहरा चढ़ाया है मैंने एक रोज़ तो ये उतर जाएगा जो कहता है मुझसे मैं सबसे भला हूँ उसी का बुरा अक्सर मैंने किया है ...लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान में छत्तीसगढ़ के कोहिनूरअभी तक घोषित परिणाम - श्रीमती अल्पना देशपांडे - वर्ष की श्रेष्ठ चित्रकार - संजीव तिवारी - वर्ष के श्रेष्ठ क्षेत्रीय लेखक - ललित शर्मा - वर्ष के श्रेष्ठ गीतकार आंचलिक - गिरीश पंकज ...

बाढ की आशा-"हल्लो...नमस्ते बाबूजी." "हां बेटा, कईसे हो?" "बहुत बढियां बाबूजी." "नोकरिया मिली ?" "नहीं बाबूजी, पर चिन्ता के कोनो बात नाहीं. इस बार हम पूरा तैयारी में है.अतना पैसा कमायेंगे कि कोनो जरुरते नहीं रहेगी." "व...सचिन के अलोचक जरा ध्यान देंसचिन तेंदुलकर की महानता को नकारने वाले लोगों के लिए एक और पोस्ट। इस बारे में पहले ही दो पोस्ट डाल चुका हूं। इस बार सिर्फ आंकड़ों का आइना उठाकर लाया हूं। चलिए, अब आपको आंकड़ों की दुनिया में ले चलते हैं। शायद

नंगई के साथ फ्रैंडशिप-डे का विरोध.*धर्म सेना *और बजरंग दल के उत्पातियों ने *फ्रेंडशिप डे* के दिन रविवार को *रायपुर *पार्कों में जा कर प्रेमियों के साथ जो करतूत की उससे भारतीय समाज का एक नया और ऐसा कुरूप चेहरा सामने आया है जिसकी मजम्मत के .अगस्त यानि क्रांतिकारी महीनाअगस्त यानि क्रांतिकारी महीना* अगस्त का महिना क्रांति का महीना माना जाता है विशेषकर भारत के लिए तो यह "क्रांतिकारी"महीना है। वैसे तो देश का इतिहास ही त्याग और बलिदान से भरा पड़ा है लेकिन अगस्त का महीना अन...

बनो.बनो बींदराजा जद सांबेळा अर तोरण पर पधारे जद बनड़ी रे घर री अर गांव गुवाड़ी री सगळी जणियां उंची मेड़ी मातै चढ र घणे चाव सूं ओ बनो गाया करे बींद ने अणुंतो फुटरो अर बनड़ी रे जोड़ी रो बतावतां जस देवतां। बना सीवा...ये रिश्ते ....मेरे तसव्वुर की आँखें भर आतीं , जब याद आती है शब घूँघट वाली मैं कैसे कहूँ ये रिश्ते मोहब्बत बांटते हें ,जब रही अपनी झोली खाली कल अचानक दूरदर्शन से कबीर जी (गुवाहाटी दूरदर्शन के न्यूज़ रीडर व ऍफ़ एम रेडियो...

अब चलते हैं एक लाइना पर 

ललित भाई आपने मेरा पिटना यद दिला दिलाया-अभी याद दिलाने को और भी बाकी है।

कबूतर! तुम कब सुधरोगे ? जब आब-ओ-दाना बंद हो जाएगा

पिन कोड 273010, एक अधूरा प्रेमपत्र4 --इसे जल्दी पूरा करें-समीकरण हल करें


मैं तेरा दोस्त , तू मेरा हमदम--खाइए दोनो मिलके चमचम 

ग्लोबल होता राजस्थानी साफा--पश्चिमी करण पर पड़ा है लाफ़ा


अब देते हैं वार्ता को विराम -- आपको ललित शर्मा का राम राम--

सोमवार, 2 अगस्त 2010

नेता और कुत्ता-रिश्तों के तार कभी नहीं टूटते-ब्लाग4वार्ता-शिवम मिश्रा


प्रिय ब्लॉगर मित्रो ,
प्रणाम !

ब्लॉग जगत का एक चक्कर हो जाए ? 
लीजिये हाज़िर हूँ एक और ब्लॉग वार्ता ले कर इस ब्लॉग 4 वार्ता  के मंच से ! आशा है हर बार की ही तरह आप को यह ब्लॉग वार्ता भी पसंद आएगी !  

सादर आपका 


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फ्रेंडशिप डे :- मुबारक हो







तेरे चाहने वाले, तमाम बढ़ गए है| :- यह तो बढ़िया खबर है !

वाह रे बेरोजगारी… :- तू जो ना कराए कम !



नेता और कुत्ता :- एक जैसे नहीं लगते .............कभी कभी !!??


हिंदी सबके लिए :- बिलकुल सब के लिए !





रविवार भोर ६ बजे :-  क्या हुआ था ??


सांप्रदायिक सौहार्द ............ इसे कहते है :- आज के दौर में शायद....... हाँ !

रिश्तों के तार कभी नहीं टूटते..... :- टूटने भी नहीं चाहियें !

सूखे फूल  :- या ख्वाब ??

टिप्पणियां स्वतः आ आकर व्यंग्य करती है!! :- इस लिए तो उन का इंतज़ार रहता है !


आदमी को भी मयस्सर नहीं इनसां होना :- NICE !

दीवारों पर पेंट की जा सकने वाली बैटरी! :- कमाल की जानकारी !

यह कौन सी भाषा है विभूति जी? :- शर्मनाक !!

गड्ढे में हाथी :-  क्या सच में ?

दोस्ती दिवस :-  की शुभकामनाएं !

खाओ मनभाता, पहनो जगभाता और लिखो....... :- इस का जवाब कहाँ मिलेगा ??

वो सारे ज़ख़्म पुराने, बदन में लौट आए :- पर कैसे ??

द डे व्हेन एवरीथिंग वेंट रॉंग.....वेल..नॉट एवरीथिंग :) :- गनीमत है !

सावन की बरसात :- बरसी कहाँ कहाँ ??

कलमाड़ी और कौमन्वेल्थ! :- एक दूजे के लिए !

ललित भाई आपने मुझे मेरा पिटना याद दिला दिलाया..!! :-  सही किया या गलत ?

सर्वत जमाल का कहना है : आप सुन-समझ रहे हैं न ? :- सुन तो रहे है ......समझ कुछ नहीं आ रहा !!

अपने गुलाम होने का एहसास मरने न दीजिये --- इसे जिन्दा रखना ही चाहिए :- ऐसा क्यों ?

सिलसिला :- चलने दिया जाए !

तस्वीरें बोलती हैं शब्दों से ज्यादा :- सही कहा !

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बस आज की ब्लॉग वार्ता यहीं तक ........अगली बार फिर मिलुगा एक और ब्लॉग वार्ता के साथ तब तक के लिए ..........

जय हिंद !!

रविवार, 1 अगस्त 2010

गुस्ताखी और नशा--मन का एक्स रे--जला अंगीठियाँ--ब्लॉग 4 वार्ता--शिवम मिश्रा


प्रिय ब्लॉगर मित्रो 
प्रणाम !
'स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है, और हम इसे लेकर रहेंगे' का नारा देकर देश में स्वराज की अलख जगाने वाले बाल गंगाधर तिलक उदारवादी हिन्दुत्व के पैरोकार होने के बावजूद कट्टरपंथी माने जाने वाले लोगों के भी आदर्श थे। धार्मिक परम्पराओं को एक स्थान विशेष से उठाकर राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने की अनोखी कोशिश करने वाले तिलक सही मायने में 'लोकमान्य' थे।
एक स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, शिक्षक और विचारक के रूप में देश को आजादी की दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले तिलक ने कांग्रेस को सभाओं और सम्मेलनों के कमरों से निकाल कर जनता तक पहुंचाया था। 
स्वतंत्र भारत में एक संघीय सरकार के गठन की हसरत लिए तिलक का एक अगस्त 1920 को निधन हो गया।

भारत माँ के इस सच्चे सपूत को ब्लॉग 4 वार्ता   के पूरे वार्ता दल का शत शत नमन |

आइये अब चलते है आज की ब्लॉग वार्ता की ओर !

सादर आपका 


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शून्य :- आगे लगाना है या पीछे ?

चार लाइन! :- और बाकी ना पढ़े क्या ? 


यार जुलाहे...... गुलज़ार ! :- कोई तरकीब बता !



इटेलियानो पास्ता सचित्र (Iteliano Pasta with Pictures) :- भाई हमे भी बुला लिया होता !

हमरा ब्लॉग परिवारः भाग दो :- एक आदर्श परिवार !


 पहचान पायेंगे क्या? :-  कोशिश तो कीजिये !

 भैया जरा बच के , जाना दिल्ली में, -तारकेश्वर गिरी :- सुझाव तो बढ़िया है !

 उदासी मन का एक्स रे होती है :- हमे तो पता ही नहीं था !

 लफंगा परिंदा ----छिछोरा.--- एक सच्ची कहानी :- दुखद ! 

 भारत-पाक का मैच छत्तीसगढ़ में संभव :- सच ??

 माँ कहती थी :- क्या कहती थी ?

प्रेमचन्‍द की 130 वीं जयन्ति :- शत शत नमन !

भगवान परेशान हैं… :- पर क्यों भला ??

फिजाओं में गूँज रही है पंडित रफी की आवाज  :-रफ़ी जैसा दूसरा नहीं

 

 उदासी मन का एक्स रे होती है:- फ़िर तो पूरा पैसा बचाओ 

 

नहीं मना सका मैं, मुंशी प्रेमचंद जी का जन्मदिन :-महाजनी सभ्यता अगले जन्मदिन पर पढ लेंगे 

 

जुलाई माह में छूट गए इन साथियों को भी बधाई दें :- ढेर सारी बधाई

 

तू उठा कर आग सूरज से जला अंगीठियाँ..:- फ़िर खाना बना

 

चाशनी के टुकड़े बनाती जिनगी.. गोमती वाला चित्र..और हम...सतीश पंचम :-बढिया है

 

गुस्ताखी और नशा :-साथ-साथ चलते हैं।

 

आज हमारा जगराता है .:- आपसे हमारा भी कुछ नाता है

 

फिर मृत्यु से भय कैसा :- जब आत्मा अजर अमर है

 

बोल बम का नारा है--बाबा एक सहारा है

 

अब चलते-चले यहां भी पढ लिजिए-और नमन कीजिये | अगली बार फिर मिलुगा एक और ब्लॉग वार्ता के साथ तब तक के लिए .........

 

जय हिंद !!

 

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