शुक्रवार, 6 अगस्त 2010

पृथ्वी कला--ख़्वाबों से मिट्ठी --- ब्लाग4वार्ता -- ललित शर्मा


नमस्कार, बरसात झमाझम हो रही है इस मौसम में हमारे ब्लागर भी घुमने निकले हैं,नवीन प्रकाश हरिद्वार में हैं, संजीव तिवारी दिल्ली की गर्मी देख आये हैं, तो कल उदय पहुंचे रायपुर, वैसे भी बरसात के मौसम में घुमना परेशान होना ही है। कब बारिश हो जाए और कहां फ़ंस जाए, कौन सा नदी-नाला चढ जाए और मार्ग अवरुद्ध हो जाए,कहां रुकना पड़ जाए? उनके लिए घुमना ठीक है जो बरसात में रपटने से नहीं डरते। अब हमारे चाचा भी भतीजे को बुला रहे हैं फ़्लाईट से,लेकिन भतीजा भी सोच रहा है कि कहीं फ़्लाईट रपट गयी बरसात में तो क्या होगा? वैसे भी काका-काकी का रोल सही नही रहा है इतिहास में। का का और का की, याने किसका? किसकी? ये किसी के सगे नहीं हुए तो हमारे कहां से होगें? सगे तो अपने माँ-बाप ही होते हैं। अब चलते हैं आज की वार्ता पर---
ताऊ जी कई दिनों के बाद आए हैं,इनकी टीवी कम्पनी के कर्मचारी हड़ताल पे थे,क्योंकि तनखा कम थी और काम ज्यादा था।ताऊ टीवी का "पति पीटो रियलिटी शो"नमस्कार बहनों और भाईयों! मैं रमलू सियार ताऊ टीवी का चीफ़ रिपोर्टर सुबह ४:४४ के ताजा तरीन बुलेटिन में आपका हार्दिक स्वागत करता हूं. जैसा की आप जानते हैं कि ताऊ टीवी हमेशा ही अपने अनोखे और नये नये कार्यक्रमो... इधर एक दुसरा मामला चल रहा हैं=कैसी हत्या? – लघु(त्तम) कथा और कविताडॉक्टर का कमरा. महिला अपनी एक साल की बेटी को गोद में और सोनोग्राफी की रिपोर्ट हाथ में लिए होने वाली कन्या का गर्भापात कराना चाहती है. तर्क है छोटी छोटी दो बेटियों को कैसे संभालेगी? डॉक्टर ने सलाह दी ...

द्विवेदी जी कह रहे हैं गोल बनाओ फिर से जाओगोल बनाओ फिर से जाओ* - * दिनेशराय द्विवेदी* *जेठ तपी धरती पर बरखा की ये पहली बूंदें गिरें धरा पर छन् छन् बोलें और हवा में घुलती जाएँ* * **टुकड़े टुकड़े मेघा आएँ, प्यास धरा की बुझा न पाएँ* * **इधर देखिए-सुदूर बैठकर अपने कंप्यूटर को मोबाइल से कंट्रोल या री-स्टार्ट करें...मैंने पहले भी एक पोस्ट लिखी थी जिसमे बताया था कि अपने पीसी को सुदूर बैठकर कैसे ट्विटर शट-डाउन या रि-स्टार्ट कैसे करें | आज मैं यहाँ चर्चा कर रहा हूँ कि यही काम आप अपने मोबाइल से कैसे कर सकते है | एक एप... 

एक हकीकत रुबरु करवा रहे हैं श्यामल सुमन जी-जो रचनाएँ थी प्रायोजित उसे मैं लिख नहीं पाया स्वतः अन्तर से जो फूटा उसे बस प्रेम से गाया थी शब्दों की कभी किल्लत न भावों से वहाँ संगम, दिशाओं और फिजाओं से कई शब्दों को चुन लाया किया कोशिश कि सीखूँ मैं कला ख...काश कोई .....उलझे केशों सी जिंदगी मेरी , कोई अपनी उंगलियों से कंघी कर दे, फिर देखो लहराऊं मैं कैसे ....... सुखी झाड़ी की जड़ों सी मैं कोई इनमे कुछ अपने आंसू रो ले , फिर देखो खिल आऊं मैं कैसे ....... रीती गागर सी पड़ी मै...

रोम का रोमांच -हमें भी भा गया-रोम जाने के लिये हमे उतरना था पोर्ट सिविटाविचिया पर । सुबह सबह पोर्ट पर शिप की डॉकिंग हो गई थी फिर हमें पोर्ट पर उतरने के बाद शिप की तरफ से जो बस ठीक की गई थी हमे सेंट पीटर्स चौक में छोडने वाली थी । वहीं...अतृप्ति को स्वीकार करो - वह मुक्त होकर मांग रही थी तृप्ति खुले आम मंच से एक अतृप्त भटक रहा था आनंद की तलाश में तृप्त होना क्यों चाहती हो तुम अतृप्ति ही तो जीवन है तृप्त होकर ठहर जाना रुक जाना क्यों, जीवन का अंत नहीं है? अगर पड़ाव को ...

हरि के दरवाजे पर दस्तकअजीब लग रहा है तकनीकी ब्लॉग में यात्रा विवरण !! फिर भी शुरू करते हैं । खरोरा से रायपुर बस और रायपुर से दिल्ली के निजामुद्दीन स्टेशन तक छत्तीसगढ़ संपर्क क्रांति से २० घंटों की यात्रा के बाद हरिद्वार जाने के ...यहां पर मिलिए जापानी मौसी से पृथ्वी कला मेलाजहाँ में 3 से 18 वर्ष की आयु तक मैं रहती थी और अब तक मेरा मैका है, तोओकामाचिजापान के एक छोटा शहर है। उस की जनसंख्या सिर्फ 60,000 से कम, उस का मुख्य उद्योग किमोनो था, फिर भी चूंकि अब जापानी किमोनो बहुत कम प...

खोया-खोया चाँद खोये-खोये चाँद की तलाश में, ख्वाबों में क्यूँ खोये चले जाते हो तुम.. नज़रें उठा कर देखो ज़रा तुम आईना, एक चाँद छुपा बैठा हैं उसमें भी.. © जोगेंद्र सिंह Jogendra Singh ( 05 अगस्त 2010 ) . वर्ष की श्रेष्ठ सकारात्मक ब्लोगर (महिला) का सम्मानसंगीता पुरी जी** आज के चर्चित हिंदी चिट्ठाकारों में से एक हैं , इन्होने पोस्‍ट-ग्रेज्‍युएट डिग्री ली है अर्थशास्त्र में .. पर सारा जीवन समर्पित कर दिया ज्योतिष को .. ज्योतिष का गम्भीर अध्ययन-मनन करके उस...

ख़्वाबों से मिट्ठी ......ख़्वाबों से मिट्ठी करके फिर सजा लिया है मैंने उनको अपनी पलकों पर , ख्वाब ना हों तो आँखें पथरा सी जाती हैं......साहित्य सर्जकदेश कीवर्तमान व्यवस्था पर कुछ मुक्तक पत्थर बजी करें सडक पर और पुलिस को पीट रहे जिस में खाते छेड़ उसी में करें देश को लूट रहे फिर भी मौन साध कर चुप हो देख रहे हैं नेता कैसी बेशर्मी क्या ऐसे भाग्य हमारे फू...--

चलते चलते एक व्यंग्य चित्र

 
 

 
 
अब वार्ता को देते हैं विराम -एक पोस्ट आपका इंतजार कर रही है--सबको राम राम

10 टिप्पणियाँ:

अच्‍छी वार्ता ललित जी .. आभार !!

एकदम चकाचक वार्ता :)

बहुत बढ़िया वार्ता ....आभार

काफी अच्छे लिंक्स मिले ..

चका चक जी एक दम से झकास.....................

बहुत बढ़िया ब्लॉग वार्ता दादा ! आभार !

बढ़िया ब्लॉग वार्ता॥

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

बहुत सुंदर और विस्तृत चर्चा. आभार.

रामराम

जी एक दम सटीक चर्चा किये गुरुदेव

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