मंगलवार, 24 अगस्त 2010

आओ बात करें बस हिन्दुस्तान की - रिश्वतखोरी और गुलामी को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त हो चुकी है - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो ,
प्रणाम !

कल्पना कीजिए कि आपके कंप्यूटर मॉनिटर पर वह वेबसाइट अपने आप खुल जाए जिसे आप खोलने की सोच रहे हैं। थोड़ा इंतजार कीजिए, आपकी कल्पना हकीकत बनने वाली है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि वे एक ऐसा कंप्यूटर विकसित कर रहे हैं जो मानव मस्तिष्क को पढ़ सके।
इंटेल कॉरपोरेशन की एक टीम ऐसी ही एक नई प्रौद्योगिकी पर काम कर रही है जो आपकी सोच को पढ़ सके। इस श्रेणी के मौजूदा कंप्यूटर में स्क्रीन पर कर्सर को नियंत्रित करने के लिए शारीरिक हरकत करने जैसा सोचने की जरूरत होती है लेकिन जिस कंप्यूटर को विकसित करने की बात हो रही है वह इससे अलग होगा।
द टेलीग्राफ के अनुसार वास्तव में वैज्ञानिक शब्दों के लिए दिमाग में होने वाली हलचल का विस्तृत मैप तैयार कर रहे हैं जिसे किसी ऐसे व्यक्ति की दिमागी हलचल से मिलान किया जाएगा जो कंप्यूटर का इस्तेमाल कर रहा है। इससे मशीन वह शब्द तय कर लेगी जिसे सोचा जा रहा है।
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि कंप्यूटर समान मस्तिष्क पैटर्न के आधार पर शब्दों को पहचान सकते हैं और उन भेदों को भी समझ सकते हैं जिससे यह पता चल सकेगा कि वस्तुत: वह शब्द क्या है।
इंटेल लेबोरेटरीज के एक वरिष्ट शोधकर्ता डीन पोमेरलो ने बताया कि मौजूदा समय में दिमागी हलचल का विस्तृत ब्योरा लेने के लिए अस्पतालों में प्रयोग होने वाले मैग्नेटिक रेजोनेंस स्कैनर जैसे उपकरणों की जरूरत होती है।
उन्होंने बताया कि कंप्यूटर बीस सवालों के एक रूप का इस्तेमाल करेगा और उसकी मदद से सही शब्द तक पहुंचेगा। उदाहरण के लिए जब कोई ऐसी संज्ञा के बारे में सोचता है जिसका कोई भौतिक आकार है तो दिमाग के मोटर कॉरटेक्स में हलचल होती है। यह दिमाग का वह क्षेत्र है जो भौतिक हलचल को नियंत्रित करता है। खाने-पीने के शब्द जैसे सेब दिमाग के उस हिस्से में हलचल पैदा करते हैं जो भूख से जुड़े होते हैं। लिहाजा, कंप्यूटर सोचे जाने वाले हर शब्द को खास पहचान दे सकेगा और तुरंत उस पर प्रतिक्रिया दे सकेगा।
उन्होंने कहा कि अभी वे उन हलचलों को मैप कर रहे हैं जो अलग-अलग शब्दों को सोचते हुए सामान्य दिमागों में होती हैं। इसका अर्थ यह है कि आप बस सोच कर ही कोई पत्र लिख लेंगे, अपना ई-मेल अकाउंट खोल लेंगे और गुगल पर सर्च कर सकेंगे।
इंटेल लेबोरेटरीज के निदेशक ने साथ में यह भी कहा कि इसमें निजता या गोपनीयता का प्रश्न उठ सकता है लेकिन हम उन्हें सुलझा लेंगे। इतना जरूर है कि लोग की-बोर्ड और माउस के इस्तेमाल तक ही सीमित नहीं रहेंगे।

फिलहाल आप ब्लॉग 4 वार्ता  के इस मंच पर आज की ब्लॉग वार्ता पढने की सोच रहे होंगे .......... है ना ..........तो लीजिये पेश है आज की ब्लॉग वार्ता !

सादर आपका 
शिवम् मिश्रा
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

एक डायरी का दर्द... :- ना जाने कोई !

बैंगलोर, दिल्ली , पटना...राखी :-  और क्या ?

पीपली [लाइव]: भारतीय राजनीति पर एक शोधपत्र :- दाखिल किया कि नहीं ?

रिश्वतखोरी और गुलामी को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त हो चुकी है :- हाँ काफी दिन हो गए इस बात को !

अंग्रेजों ने भारत को जीता नहीं था, भारत तो उन्हें सेंत-मेंत में ही मिल गया था :- किस्मत अच्छी थी सालो की !!

प्याज चौदह रूपये किलो और आलू दस :- अरे साहब, फिर भी गनीमत है ......आगे दिन बहुत बुरे आने वाले है !

वाइपर के साथ खतरनाक मुठभेड़। -पी0 एन0 सुब्रमण्यम :- अरे बाप रे !

आज ३०० वीं पोस्ट और बहिनें राखी पर बाजार से खरीदी पायरोफिलाइट की मिठाइयां अपने भाईओं को खिलाने से बचें ... :- ३०० वी पोस्ट की बधाइयाँ !

भारत से वापसी---मैं जीवित हूँ ! ---दिव्या :- भगवान् का शुक्र है !

अनु शर्मा से मिलने आ रहा हूं : मन मेरा प्रसन्‍न है # कहां जा रहा हूं मैं (अविनाश वाचस्‍पति) :- मेरे घर के आस पास !!

न्यूयार्क – ४ : तुलसी इस संसार में भांति भांति के लोग … :- सत्य वचन महाराज !

एक सफ़हा :- पलट कर हमने ......लाखो बातों की सफाई दी है !!

फिर कहाँ संभव रहा अब गीत कोई गुनगुनाऊँ :- क्यों क्या हुआ ?

वामपंथी सेकुलरिज़्म का पाखण्ड और मीडिया का पक्षपाती रवैया फ़िर उजागर (सन्दर्भ : अब्दुल नासिर मदनी की गिरफ़्तारी) :- यह तो होना ही था !

ई मेल व मोबाइल युग में भी बिछुड़ते सगे सम्बन्धी और आवश्यकता डाक-पते की.......................घुघूती बासूती :- सही कहा आपने !

राह दिखाओ मैनपुरी के युवाओं को.... :- ज़रा मुल्क के रहबरों को बुलाओ !

एसो के सावन मे जम के बरस रे बादर करिया :- सही काहे भईया !

अब तो उल्लू बैठ गया है पेंङ की हर डाल मियां :- डंडा ले कर भागा ना दो !

अलविदा ब्लागिंग ------------------- शाहनवाज़ सिद्दीकी :- अरे,...... पर क्यों भाई जान ??

क्या आपके ब्राउज़र के रिटायर होने का वक्त आ गया है? :- पता नहीं .......देखना पड़ेगा !

हम तो झंडू बाम हुए ... बाबू साहिब तेरे चक्कर में :- तो चक्कर में पड़े ही क्यों ?

शाख से तो ज़र्द पत्ते खुद गिरा करते हैं :-  दोष आंधी को फिर क्यों दिया करते है ?

आओ बात करें बस हिन्दुस्तान की :- जरूर क्यों नहीं !

“मैंने बहुत निभाया उनको” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”) :- जी किन को ?

कुकिंग ऑयल के बारे में जानते हैं? :- ज्यादा तो नहीं.....आप बताइए !

क्‍या टेलीविजन के माध्‍यम से सिर्फ धर्म और ज्‍योतिष ही अंधविश्‍वास फैला रहे हैं ?? :- नहीं जी और भी बहुत लोग है !

कीरो ने देखा मन्त्रों का प्रभाव :- कैसे ?


या फिर बाज़ार में अपने बेटे की कीमत लगाइए ..........! :- १०,००,०००.............. एक ...........दो ........तीन ....!!!

15 अगस्त /  26 जनवरी को झण्डा फहराते समय :- क्या ना करें !

चुप, वरना … :- क्या ??

तोर बिन सजनी नींदे नई आवय, कईसे गुजारंव रात ..... :-  तारे गिन गिन !

यानी जब तक जिएंगे यहीं रहेंगे ! :- कहाँ ?

एक नदी की समुन्द्र को ललकार :-  होने दे अब यलगार !!

मेरे भईया से कहना, बहना याद करे :- आज का दिन ही ऐसा है !

बहिन के प्यार को क्यों भूले ?? - सतीश सक्सेना :-  है कोई जवाब ??

10 करोड़ के मुआवजे पर 6 लाख करोड़ का धंधा :- गन्दा है पर धंधा है यह !

हैं तन्हाँ, तन्हाँ.... :- कौन ......कहाँ ??

राखी पर कुछ प्रेमपत्र - बहनों के :- किस्मत वाले है आप !

रक्षा सूत्र... कैसे-कैसे.... :- कैसे ....... कैसे ?? 


अब फिर वही आदत अनुसार .........अपनी डफली आप बजाता हूँ और अपनी पोस्ट का लिंक दिए जाता हूँ .......

इंटरनेट से लोगों की पहचान कर लेगा यह सॉफ्टवेयर ! :- है ना कमाल !!
 
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

आज की ब्लॉग वार्ता यहीं तक ......अगली बार फिर मिलुगा एक और ब्लॉग वार्ता के साथ तब तक के लिए आज्ञा दीजिये !


 आप सभी को राखी के पावन पर्व पर, पूरे वार्ता दल की ओर से  बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएं !!

जय हिंद !!

19 टिप्पणियाँ:

बहुत बढिया वार्ता लगाई है शिवम जी
अब यहीं से ब्लाग नगरिया की सैर करते हैं।
आभार

लांस नायक वेदराम!---(कहानी)

असली ब्‍लॉगवाणी है यह
बिल्‍कुल सही कह रहे हैं
आपके घर के आस भी और पास भी
दो दिन नजर आऊंगा मैं
मिलूंगा सबसे और मिलवाऊंगा मैं
मन से सबको अपना बनाऊंगा मैं
सपना सच करके दिखलाऊंगा मैं
पर यह मैं कौन है
मन में झांको अपने
हर मैं हर शै हूं मैं।

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।
हिन्दी ही ऐसी भाषा है जिसमें हमारे देश की सभी भाषाओं का समन्वय है।

एक सफ़हा :- पलट कर हमने ......लाखो बातों की सफाई दी है !!

haa haa!! यह एन्गल तो हम देख ही नहीं पाये...


बहुत उम्दा वार्ता!

बढ़िया लिंक्स...
आपका ये आने वाला कम्प्युटर तो बड़ा ही खतरनाक प्रतीत होता है ...दिमाग में तो अपुन को बहुत कुछ चलता रहता है...कल को बीवी के सामने उसका ब्लॉग खोलें और फिर अचानक से दिमाग ने बावला हो...पलटी मार के किसी माशूका की साईट या ब्लॉग को खोल दिया तो लेने के बजाए देने पड़ जाएंगे कि नहीं?... :-(

बहुत बढ़िया चर्चा.... पोस्ट को सम्मिलित करने के लिए आभारी हूँ ... रक्षाबंधन पर पर अनेकों शुभकामनाये और बधाई....

बहुत बढ़िया चर्चा....

शिवम् जी आपने बहुत अच्‍छी वार्ता लगायी है .. आपको रक्षाबंधन की बधाई और शुभकामनाएं !!

बहुत बढिया वार्ता, शिवम जी, रक्षाबंधन की शुभकामनाएं !

बहुत उम्दा वार्ता.....रक्षाबंधन की बधाई और शुभकामनाएं !

बहुत बढ़िया चर्चा....रक्षाबंधन की बधाई

यानी इंसान को अब हाथ भी नही हिलाना पढ़ेगा .... क्या बात है ...
अच्छी ब्लॉग चर्चा है आज ....

आप सब का बहुत बहुत आभार !

आप को राखी की बधाई और शुभ कामनाएं

... और कारवां बढता गया.
बहुत अच्छा... आपकी कोशिश से ब्लागवाणी की कमी पूरी हो जायेगी.
शुभेच्छा.....

एक टिप्पणी भेजें

टिप्पणी में किसी भी तरह का लिंक न लगाएं।
लिंक लगाने पर आपकी टिप्पणी हटा दी जाएगी।

Twitter Delicious Facebook Digg Stumbleupon Favorites More