शुक्रवार, 13 अगस्त 2010

कुत्ते- कैसे कैसे?--या इलाही ये माजरा क्या है ?--ब्लाग4वार्ता--ललित शर्मा

नमस्कार, अखबारों मे हिन्दी के स्वरुप को इतना बिगाड़कर लिखा जा रहा है कि पता नहीं चलता हिन्दी का अखबार है या अंग्रेजी का या फ़िर खिचड़ी है, मिली जुली सरकार है।एक बानगी देखिए--"आज हम Independent हैं हम कहीं भी जाकर अपनी education पूरी कर सकते हैं,चाहे वो india हो या abord, हमें वो सारे rights मिले हुए हैं,जो हमारे Indian constitution मैं हैं. जिसका हम फायदा भी उठाते हैं, लेकिन आज देश में एक ऐसा group है जो रुढ़िवादी नियमो का पालन करता है"। इससे इनकी अंग्रेजी दां होने की मानसिकता का पता चलता है। अब चलते हैं आज की ब्लाग4वार्ता पर.......

मित्र अलबेला खत्री जी के भाई साब का इलाज गुड़गांव मे हो रहा है,इस आशय की उनकी एक पोस्ट आई है--अब ईश्वर के बाद डॉ नरेश त्रेहान का ही सहारा है, हो सके तो आप भी प्रार्थना करना कि भैया जल्द स्वस्थ हो जाएँ.प्यारे ब्लोगर बन्धुओ ! आपसे एक ज़रूरी बात कहनी है बहुत दिनों से कुछ लिख नहीं पा रहा हूँ और आपको पढ़ भी नहीं पा रहा हूँ क्योंकि मेरे आदरणीय अग्रज श्री रामलाल खत्री का स्वास्थ्य ठीक नहीं है । उनकी चिकित्...डॉ.कविता वाचक्नवी हिन्दी भारत पर कह रही हैं कि 'गर्म हवा...' : सच्ची घटना पर आधारित.कहानी * 'गर्म हवा...' (एक सच्ची घटना पर आधारित) ललित अहलूवालिया 'आतिश' फिलाडेल्फिया से न्यू योर्क वापसी पर रूट ८३ साउथ से आते हुए, पार्सिपनी से कुछ पहले, बांये हाथ पे एक एक्सिट है; जिसका रैम्प दूर तक ...

रानी विशाल एक बार फ़िर लौट आई हैं ब्लाग की दुनिया में कहती हैं घर आए फिर परदेसी .आप सभी ब्लॉगर साथियों को मेरा सादर नमस्कार .......लगभग चार महीनो के अवकाश के बाद मैं आप सभी के समक्ष पुन: उपस्थित हूँ । पिछले सभी दिनों की ढ़ेर सारी बातें लेकर जिस तरह कविताएँ लिखना एक नशा है उसी तरह ब्लॉग...मनोज पर पढिए ऑंच – 30 :: अरुण राय की कविता 'कील पर टंगी बाबू जी की कमीज'ऑंच – 30 अरुण राय की कविता 'कील पर टंगी बाबू जी की कमीज' **** हरीश प्रकाश गुप्त प्रयोगवाद के अनन्य समर्थक अज्ञेय ने अपने चिंतन से स्वातन्त्रयोत्तरी कविता को नई दिशा दी। उन्होंने परम्परागत प्रतीकों और ...

कुसुम जी परदेश में हैं,ब्लाग पर कम ही दिख रही थी-मैने उनसे कल निवेदन किया कि ब्लाग पर तो दिखिए तो उन्होने एक पोस्ट लिखी है जन्म मरण अज्ञात क्षितिज जन्म मरण अज्ञात क्षितिज" जन्म मरण अज्ञात क्षितिज , जिसे समझ सका न कोई । न इसका कोई मानदंड , और जोड़ न है इसका दूजा । कभी लगे यह चमत्कार सा , लगे कभी मृगमरीचिका । कभी तो लागे दूभर जीवन , कभी सात जन्म लाग..डॉ.आशुतोष शुक्ल की पोस्ट है--झूठे नेता उत्तर प्रदेश विधान परिषद में बिजली की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए सदस्यों को आश्वासन देते हुए ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय ने कहा कि वर्ष २०१४ तक प्रदेश में बिजली का संकट पूरी तरह से समाप्त हो जायेगा. ...

अब देखिए कुत्ते कितने प्यारे होते हैं कि उड़न तश्तरी पर भी आ जाते हैं समीर भाई कह रहे हैं कि कुत्ते- कैसे कैसे? अब दादा आप ही बताईए कैसे-कैसे हैं, हमको 14 इंजेक्शन नहीं लगवाना, वैसे भी इनसे दूर ही रहते हैं, काटे-चाटे स्वान के----अन्तर तो खुली आँखों दिखता ही है हर तरफ. तुलना करने की बात ही नहीं है कनाडा और भारत. मेरा देश भारत मेरा है, उसकी भला क्या तुलना करना और क्यूँ करना? मगर अब रहता तो कनाडा में हूँ, न चाहते हुए भी स्पष्ट अ...संजय भास्कर राम नाम का सुमिरन कर रहे हैं--अंत में राम का नाम याद आया राम ने बनाया काम काम से मिला धन धन से मिली इज्ज़त इज्ज़त से मिला सम्मान | सम्मान से हुआ अभिमान | अभिमान से लगी ठोकर ठोकर से बना जोकर जोकर से हुई बदनामी बदनामी ने बढ़ा दी परेशानी परेशानी से कुछ समझ न आ...
उदय भाई ने फ़िर बाजा फ़ाड़ दिया है--क्या मिला उनको बम फोड़ने से !बोल बम बोल बम गूँज रहा था बाहर कोई बेवजह बम फोड़ रहा था मर गए दो-चार बम फूटने से क्या मिला उनको बम फोड़ने से । अल्लाह-ओ-अकबर के नारे गूँज रहे थे बाहर कोई बेवजह बम फोड़ रहा था मर गए आठ-दस बम फूटने से क्या मि...इधर नुक्कड़ पर अविनाश जी जमे हुए हैं और चेता रहे हैं-- हिन्‍दी ब्‍लॉगजगत में घुस आए हैं आतंकवादी : नाम हमारीवाणी : करतूत ब्‍लॉगों को बंद करने की घिनौनी साजिश यह करतूत गूगल दादा की नहीं, हमारीवाणी की है। उसकी कारगुजारी से बचिए। ब्‍लॉगजगत पर आतंकवादी हमला इस हमले की जद में आने से बचें और सभी को बचाएं। तुरंत इस पोस्‍ट को सबके पास पहुंचाएं। आप सभी जिनके ब्‍लॉग ...

डॉ.दराल भाई साहब ने कल हवन किया था जन्मदिन पर--आखिर क्यों हो गई दिल से लिखी पोस्ट स्वाहाहमारे दादाजी घुड़सवारी के बड़े शौक़ीन थे । एक दिन उन्होंने एक शानदार घोड़ी खरीदी । देखने वालों में से किसी ने कहा --बड़ी किस्मत वाली घोड़ी है । देखना नौ महीने के अन्दर आपको पोता मिलेगा । वैसा ही हुआ --ठीक नौ ...सुधाओम ढिंगरा जी कि ई मेल आई डी हैक हो गयी, उनका ब्लाग पर लिखना बंद हो गया,सुधा ओम ढींगरा मुसीबत में नहीं हैं पर आप अवश्‍य सावधान रहिएगाविश्वास नहीं हो रहा कि यह मेल जाल जगत की मशहूर शख्सियत सुधा ओम ढींगरा की है। मगर ईमेल पता उन्हीं का है। अभी दो दिन पहले ही इसी पते से हिन्दी चेतना का अंग प्राप्त हुआ था अब यह आश्चर्यचकित कर देने वाला मेल।...

अवधिया जी का सर्वकालिक एक सवाल क्या हिन्दी ब्लोग्स कभी व्यावसायिक हो पाएँगे? ब्लोग याने कि वेबलॉग की शुरुवात हुई थी निजी किन्तु सार्वजनिक दैनन्दिनी के रूप में। अंग्रेजी ब्लोग्स की बात करें तो यह कहा जा सकता है बहुत ही तेजी के साथ उनकी की लोकप्रियता बढ़ती चली गई। लोकप्रियता बढ़ने के स...रविन्द्र प्रभात जी कह रहे हैं दो दिन और तीन महत्वपूर्ण सम्मानसबसे पहले तो मैं यह स्पष्ट कर दूं कि *कोई भी अलंकरण श्रेष्ठता की कसौटी नहीं है , वरन श्रेष्ठता का सम्मान है ।* ** *लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान-२०१० *देने के पीछे यह उद्देश्य कतई नहीं है कि हम दूसरे की श्...

आशिक क्यों करता है माशूक का कत्लमहबूबा नहीं मिली तो उसका कत्ल कर दिया। प्रेमिका ने प्यार से इंकार किया तो उसके चेहरे पर तेजाब डाल दिया। प्रेयसी नहीं मिली तो--महाभारत व कुरूक्षेत्र बना बिहार24 नवंबर 2010 के पूर्व बिहार विधानसभा में नई सरकार का पदारोहण होना है। अभी चुनाव कार्यक्रम की अधिकृत घोषणा नहीं हुई है।---हनुमान चालीसा एवं संपूर्ण सुंदर कांडअक्सर शुभ अवसरों पर गोस्वामी तुलसीदास द्वारा लिखी गई रामचरितमानस के सुंदरकांड का पाठ करने का महत्व माना गया है। ज्यादा परेशानी हो, कोई काम नहीं बन रहा हो, आत्मविश्वास की कमी हो या कोई और समस्या कई ज्योतिषी औ...

आज सावन की तीज का त्यौहार है जोर शोर से मनाया जा रहा है राजस्थान के माली गांव से एक पोस्ट आई है हर्ष उल्लास का पर्व तीजसबसे पहले मैं ब्लॉग जगत के सभी पाठको ब्लॉग स्वामियों को आज के त्यौहार तीज की हार्दिक शुभकामनाएं देना चाहूंगा यह त्यौहार सुख व समृद्धि का प्रतीक माना जाता है इसलिए यह खुशी का त्यौहार व हर्ष उल्लास कुंवर जी कह रहे हैं...या फिर...आप सब से जो प्यार मुझे मिल रहा है उसको मै कभी भी स्वयं से दूर नहीं मानता,बस मलाल इस बात का रहता है कि मै आपको यथोचित रूप से यह सूचित नहीं कर पा रहा हूँ!एक अघोषित सी जो दूरी बनी हुई है प्रत्यक्ष में व...

गोदियाल जी आज मनमोहनी मुस्कान में फ़ंस गए लगता है इसलिए कह रहे हैं मनमोहन सिंह जी की जय बोलिए क्योंकि वे भी आज २२७३ दिन के प्रधानमंत्री हो गए !आज जब एक दैनिक अंगरेजी अखबार की वेब-साईट पर उसकी न्यूज हेडिंग पर नजर गई तो पता चला कि मनमोहनसिंह जी इस देश के प्रधानमन्त्री की कुर्सी को लम्बे समय तक सुशोभित करने वाले तीसरे प्रधानमंत्री बन गए है ! नि:संद...कम्पयुटर को हैकर से बचाने के लिए 34 सुत्र लेकर आए हैं पाबला,आईए लाभ उठाईए,आपको हैकर्स से बचाने के लिए, माईक्रोसॉफ़्ट ने जारी किए 34 सुरक्षा अपडेटआम उपयोग में आने वाले कम्प्यूटरों पर *चल रहे माईक्रोसॉफ़्ट के अनेकों सॉफ़्टवेयर्स की खामियों का फायदा उठाकर, हैकर्स द्वारा अक्सर हमला किया जाता है। परिणामस्वरूप आए दिन सायबर हमलों की खबरें मिलती रहती हैं।...

धीरु सिंग जी ने लिखा है यूनाईटेड स्टेट्स आफ़ इण्डियास्वायत्तता सिर्फ कश्मीर को क्यों ? सब राज्यों को क्यों नहीं . कश्मीर से लेकर केरल तक ,गुजरात से बंगाल तक और पूर्वोत्तर के राज्यों को भी स्वायत्तता दे देनी चाहिए . अपने क़ानून बनाये यह राज्य . अपने हिसाब से..अदा जी ने गरियाया है कि.ये अहमकों का दौर है..और हम कितने अनजान हैं.....समलैंगिक विवाह, लिव-इन रिलेशन आज ज्यादा लोकप्रिय और सहज से रास्ते हो गए हैं..इनको मान्यता देकर हमारी सरकार ने इसे और भी सहज बना दिया है...इस तरह की घटनाओं को देख कर यही लगता है कि कुछ मानसिक बीमारियों को...

राजकुमार सोनी डरा रहे हैं एक हारर मुवी की स्टोरी लेकर आए हैं--भागो भूत आया...मैं पिछले कुछ दिनों से लगातार यह सोच रहा था कि आज नहीं तो कल माइक पकड़कर चैनलों में एक ही बात को पचास बार बोलने वाले मीडियाकर्मियों के बारे में लिखूंगा लेकिन चाहकर भी मौका नहीं मिल पा रहा था. दूसरा डर यह...अमरेंद्र त्रिपाठी कह रहे हैं--कविता का दाय ? , या इलाही ये माजरा क्या है ? . ब्लागरी मेरे लिए सामयिकता से सम्पृक्ति है | स्वयं के शब्द-लोक में खोये रहने का माध्यम-मात्र नहीं | इसके लिए तो एक डायरी भी लिखी जा सकती है , जो वर्षों या वर्षों बाद पलटती रहे , यानी नितांत न...
अशोक बजाज जी की पोस्ट--अर्जुन सिंह ने राज को और गहरा दिया ?अर्जुन सिंह ने राज को और गहरा दिया ?* भोपाल गैस त्रासदी के मुख्य आरोपी यूनियन कार्बाईड के प्रमुख वारेन एंडरसन को भारत से सुरक्षित व बाईज्जत भगाने के मामले में ...आज तो बड़े दिनों के बाद शोभना भी ब्लाग पर आई हैं पढिए थोडा-शोभना 'शुभि'थोडा थोडा सा अकेलापन थोडा सा गुमसुम सा पल थोडा सा चुप हो जाना थोडा सा मुस्कुरा जाना ऐसे ही बहुत से थोड़े थोड़े से जिंदगी में खुशियों का शामिल हो जाना दिमाग में बेशक न आ पता हो पर दिल की तह में बस जाता है ...


चलते चलते व्यंग्य चित्र

वार्ता को देते हैं विराम--आपको ललित शर्मा का राम राम--- आतंकवादी वायरस के विषय में जानने लिए यहां से जाएं.....

26 टिप्पणियाँ:

बहुत ही अच्छी प्रस्तुति..
पसंद आई है...
आभार..

आप ने खूब समीक्षा की है.

आज़ादी की वर्षगांठ एक दर्द और गांठ का भी स्मरण कराती है ..आयें अवश्य पढ़ें
विभाजन की ६३ वीं बरसी पर आर्तनाद :कलश से यूँ गुज़रकर जब अज़ान हैं पुकारती
http://hamzabaan.blogspot.com/2010/08/blog-post_12.html

इस पोस्‍ट में बहुत कुछ समेट लिया है .. आभार !!

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

अच्छी चर्चा...अलबेला जी की पोस्ट पर जाते हैं अब..हमें तो पता ही नहीं चला.

बहुत ही अच्छी चर्चा...आभार!!

बहुत ही सुन्दर चर्चा…………काफ़ी लिन्क मिले।

उम्दा वार्ता ....बहुतसे लिंक्स मिले ..आभार

सभी ब्लॉगर को एक साथ लेकर चलने का बहुत अच्छा प्रयास है श्रीमान आपका आपको बहुत बहुत धन्यवाद सभी लिंक पढ़कर बहुत अचछा लगा आप ऐसे ही जारी रखिए हम आपका पूरा पूरा साथ देंगें

http://sbhamboo.blogspot.com
http://saayaorg.blogspot.com/
http://laxya.feedcluster.com/

मैं क्या किसी को डराऊंगा
मैं तो कल आपकी बात से ही डर गया था कि अब मैं कुछ लिख नहीं रहा हूं... मारे डर के लिख दिया और आपको याद करते हुए शीर्षक लगा दिया कि भागो भूत आया
हा.... हा..... हा....
अच्छी चर्चा है
ललित भाई

भूत से मेरा मतलब है जो जमकर काम करता है
और दूसरों को भी शांत नहीं बैठने देता
मेरे एक कथाकार परिचित है... वे खूब लिखते है
जब कोई उनसे पूछता है कि आप इतना क्यों लिखते है तो वे जवाब देते है मैं नहीं भूत लिखता है
पर भूत बड़ा जबरदस्त लिखता है

... तो दूसरों को प्रोत्साहित करने वाले श्रीमान भूतजी
आपका बहुत-बहुत धन्यवाद
मिलते है एक ब्रेक के बाद
आफीस जा रहा हूं
फिर कुछ दूसरा काम भी है आज

बहुत ही अच्छी प्रस्तुति..

कितने श्रम से आप ब्लॉग जगत के मोती चुन-चुन कर लाते हैं। आपकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है।

………….
अभी कब्ज़ा नहीं है उसके तन पर...
साहित्यिक चोरी का निर्ललज्ज कारनामा.....

काफी लिंक्स मिले जो नहीं देखे थे ..अभी जाते हैं.

जबरदस्त ललित जी , आज का वार्ता अंदाज काफी प्रभावी लगा , आभार !

लेकिन आपका ये अपने नाम का सेक्युलर अंदाज चिंताजनक लगा :)

कमाल की ब्लॉग वार्ता ललित भाई ............बहुत बढ़िया!

बहुत सुंदर चर्चा.

रामराम.

उत्तम प्रस्तुति । आभार ।

अच्छी प्रस्तुती के लिये आपका आभार


खुशखबरी

हिन्दी ब्लाँग जगत के लिये ब्लाँग संकलक चिट्ठाप्रहरी को शुरु कर दिया गया है । आप अपने ब्लाँग को चिट्ठाप्रहरी मे जोङकर एक सच्चे प्रहरी बनेँ , कृपया यहाँ एक चटका लगाकर देखेँ>>

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