शुक्रवार, 20 अगस्त 2010

ब्लॉग गुरु की पाठशाला - पाठकों और टिप्पणियों के लिये क्या ये तरीका सही है - ब्‍लॉग4वार्ता - शिवम् मिश्रा


प्रिय ब्लॉगर मित्रो 
प्रणाम !

रुपये के प्रतीक चिन्ह के इस्तेमाल को लेकर उत्साह चरम पर है। मीडिया में तो इसका इस्तेमाल खूब हो ही रहा है, अब इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण बनाने वाली कंपनियां भी इस मामले में पीछे नहीं रहना चाहतीं। उनके लिए तो रुपये का प्रतीक चिन्ह फैशन सिंबल बन गया है। यही वजह है कि कंप्यूटर का कीबोर्ड हो या मोबाइल फोन का कीपैड, कंपनियों ने रुपये के प्रतीक चिन्ह को अलग जगह देने की कोशिशें तेज कर दी हैं।
देश की प्रमुख आईटी हार्डवेयर निर्माता टीवीएस इलेक्ट्रॉनिक्स ने 15 अगस्त को 'टीवीएस गोल्ड भारत' नाम से एक की बोर्ड लांच किया। इसमें पारंपरिक क्वेर्टी कीबोर्ड में दिए जाने वाले टैब बटन के ऊपर रुपये का प्रतीक चिन्ह दिया गया है। चेन्नई की इस कंपनी ने नए कीबोर्ड की कीमत 1,495 रुपये रखी है।
15 जुलाई को सरकार ने जब रुपये के प्रतीक चिन्ह को मंजूरी दी थी, तब विशेषज्ञों ने कहा था कि इसे कंप्यूटर में शामिल करना मुश्किल होगा। कंपनियों ने इस कठिन काम को एक महीने के भीतर ही कर दिखाया है। रुपये के प्रतीक चिन्ह का इस्तेमाल अब तक एक फॉन्ट को डाउनलोड कर किया जाता है। इसे फोरैडियन टेक्नोलॉजी ने लांच किया है, लेकिन यह पहली बार है जब कीबोर्ड में इसके लिए अलग जगह बनाई गई है।
रुपये के प्रतीक चिन्ह के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए लावा मोबाइल्स ने भी ऐसे ही प्रयास किए हैं। मोबाइल बनाने वाली इस देसी कंपनी ने अपने कीपैड में रुपये के प्रतीक चिन्ह के लिए अलग 'की' बनाई है। कंपनी ने इस मोबाइल फोन को 'बी5' नाम दिया है। बाजार में यह 4 हजार 400 रुपये में उपलब्ध है।
आप सब को एक काम की जानकारी तो दे दी ......................अब आप को सीधे लिए चलता हूँ आज की ब्लॉग वार्ता की ओर !  

ब्लॉग 4 वार्ता  मंच की यह १५९ वी ब्लॉग वार्ता होगी .........आशा है आप सब को यह वार्ता पसंद आएगी !

सादर आपका 

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कुम्भ के बिछड़े भाई-बहिनों का मिलन..-----दीपक मशाल :- मनमोहन देसाई की कोई नयी फिल्म है क्या ?



भला काहे देखें पीपली लाइव :- आइना देखने के लिए !





लघुकथा - धूलकण और बादल .... :- दोनों है अपनी पहेचान की खोज में ! 



न्यूयार्क : संवेदना उबाल पर हैं - एक मस्जिद यहाँ भी विवाद में है! :- बधाइयाँ जी बधाइयाँ ......वैसे खून कब बहेगा ?




पीपली [लाइव] :-  बिलकुल लाइव !




साकार सरासर और सरेआम :- बहुत कुछ हो गया !


धर्म में इतने अंधे कैसे हो जाते हैं माँ-बाप??? :- यहीं तो समझ के बाहर है !

अनाज सड़ने में यमराज का हाथ :- यमराज को भी सरकार ने मंत्री मंडल में शामिल कर लिया ??

आंत्रशोध पर शोध का परिणाम ---ओ आर एस --दस्तों की रामबाण दवा -- :- आभार जानकारी का !

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आज की ब्लॉग वार्ता बस यहीं तक .........अगली बार फिर मिलुगा एक और ब्लॉग वार्ता के साथ तब तक के लिए ......

जय हिंद !!

गुरुवार, 19 अगस्त 2010

मैं परेशान हूँ--बोलो, बोलो, कौन है वो--टर्निंग पॉइंट--ब्लाग4वार्ता---ललित शर्मा

नमस्कार, क्या हमारे देश के नेता इतने असुरक्षित हैं कि इनसे मिलने आने वाले मेहमानों को अपनी इज्जत उतार कर सुरक्षा जांच करानी पड़े। एक खबर है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एक कार्यक्रम में गए थे तो वहां के सुरक्षा अधिकारियों ने महिलाओं के जुड़े खुलवा दिए और बालों की चेकिंग की। जब इन्हे अपनी जान का इतना ही खतरा है तो जनता की क्या सुरक्षा कर पाएगें। इन्हे अपनी कुर्सी छोड़ देनी चाहिए। शर्म आनी चाहिए इन्हें, जांच करने के और भी बहुत आधुनिक साधन आ गए हैं। आखिर उन महिलाओं को सबके सामने शर्मिंदा होना पड़ा। अब चलते हैं आज की ब्लॉग4वार्ता पर....

आज ब्लॉग वार्ता गरम चाय की प्याली के साथ प्रारन्भ करते हैं। क्योंकि चाय पीना भी जरुरी है ऐसा कुछ लोग मानते हैं, लेकिन मैं नहीं मानता, अगर चाय मिले तो ठीक नहीं मिले तो ठीक, लेकिन आजकल लगने लगा है शाम होते ही जैसे कुछ छूट रहा है, इसलिए चाय की याद आ जाती है। जब लत ही लग गयी है तो उसे सुधारने के लिए आचार्य श्रीराम शर्मा की सूक्तियाँ कारगर साबित होंगी। इसक पठन अवश्य करें जीवन में शांति और क्रांति आएगी। ओ पूछ रहे हैं बोलो, बोलो, कौन है वो तो ये कह रहे हैं--ये तो साला निकला पक्का हिंदूवाला  अब आप ही देखिए क्या जवाब सही  है।

पूंजी का अनियोजित निवेश विकास को अवरुद्ध करता है द्विवेदी जी ने सही कहा है, गलत जगह लगाया गया रुपया दुख ही देता है।दुनिया वाकई गोल है और एक विश्वग्राम के रूप में स्थापित है इंटरनेट से तो ऐसा ही लगता है कि दुनिया गोल है और एक क्लिक से हम भी गोल (अदृश्य) हो सकते हैं।अब इन्हें भी चाहिए ज्यादा तनख्वाह !!! जब इन्हे पूरा देश ही दे दिया गया है तो अब तनख्वाह की भी कसर रह गयी है।दही के धोखे में कपास खा ही जाते हैं मुरख लोग, क्या किजिएगा इनका सबक मिलने पर पूरा खानदान और 33 कोटि देवता भी याद आ जाते हैं पढिए क्या राज है इसमें।

इस्लामिक आतंक-पाक भी डरा मिसल है ना कबर खोदने वाले कबर में ही गिरके मरते हैं। यही कहावत चरितार्थ हो रही है।हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग में स्‍वर्णिम पल आ गए हैं : जापान से न्‍यौता आया है जरुर जाईए और ब्लागिंग समुराई का प्रशिक्षण लेकर आईए, जिससे ब्लागिगं स्वर्णिम काल में निर्विघ्न चले।देश और दुनियाँ के गरीब देशों में .बच्चों ने बेचे गुब्बारे... पेट भरने के लिए कुछ तो करना ही पड़ेगा, लेकिन ये बीट के पुलिस वाले इन्हे भी नहीं छोड़ते, सौ रुपए गुब्बारे बेचने के ले ही लेते हैं। अहफ़ाज रशीद कह रहे है कि नत्था को आगे काम न मिला तो मैं बनाऊंगा पीपली डी- लाइव बनाइए स्वागत है।

देखिए न्युयार्क में तिरंगा लहरा रहा है कुसुम जी बता रही है--न्यू यॉर्क में स्वतन्त्रता दिवस और तिरंगा की शान.बधाई हो। "दिन कुछ ऐसे गुजारता है कोई बैठे ढाले दिन गुजारना पड़ता ही है, अंतर सोहिल जी ने कहा है कि कब तक रहोगे, मुंह को छुपाये नकाब में आँख से आँख मिलाओ, नुक्कड़ पर सुभाष राय ने चेताया है गोली से न डराएं किसानों को राजीव तनेजा की मुस्कान में फ़ंसे हैं तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो क्या करें भैया दांत तो निपोरना ही पड़ता है, नहीं तो लोग घमंडी राम नाम धर देते हैं। इस लिए मुस्कुराते रहो

देब बाबु की जब से शादी हुई है तब से उन्होने नेहरु जी के घोष मंत्र को धारण कर लिया है आराम हराम है.... ही ही....जप रहे हैं, चलिए किसी दिन आराम सुधा की जरुरत पड़ेगी,आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए संविधान में परिवर्तन की ज़रूरत है.कानून कड़ाई से लागु होना चाहिए, जिससे आतंकवाद का सर कुचला जा सके, गुलजार साहब का जन्मदिन है जन्मदिन मुबारक गुलजार साब! हम भी दे रहे हैं बधाई,आखिरी ख्वाहिश  हमारी सरपंच बनने की है, पिछले चुनाव में खड़े हुए थे तो 22 उम्मीद्वार हो गए थे, सभी ने छिछालेदर करवा दी। इसलिए आने वाले चुनाव में जुगत लगाएंगे।

मैं परेशान हूँ.... उपदेश भाई परेशान न होईए अबकी बार जमना पार से सरपंची का चुनाव लड़ ही लिजिए, सारी परेशानियां दूर हो जाएगीं।भगवान् से भी बड़ा बनने की कामना सरपंच बनने के बाद एक यही इच्छा रह जाती है, वैसे भी जब पंच परमेश्वर होता है तो सरपंच भगवान से बड़ा अपने आप ही हो गया।पीपल के पत्ते पर पेंटिंग ले आई हैं अल्पना जी, देखिए बढिया है चित्र। उपदेश भाई की सरपंची से विधान में जरुर ही टर्निंग पॉइंट आएगा, शिखा जी ने एक पोस्ट लगाई है, अवश्य पढिए, देश की बड़ी पंचायत में पंचों की तनखा बढाने का मामला गरमाया है तारकेश्वर गिरी पूछ रहे हैं आपकी सैलेरी तो बढ़ जाएगी , हमारी कौन बढ़ाएगा

चलते चलते व्यंग्य चित्र



वार्ता को देते हैं विराम-आप सभी को ललित शर्मा का राम राम--पढिए यहां एक पोस्ट नेताजी पर


-: ब्लाग4वार्ता,

बुधवार, 18 अगस्त 2010

नेताजी की मृत्यु १८ अगस्त १९४५ के दिन किसी विमान दुर्घटना में नहीं हुई थी - नेहरूजी के पार्थिव शरीर के पास खड़ा यह भिक्षुक कौन है? - ब्‍लॉग4वार्ता - शिवम् मिश्रा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो 
प्रणाम !

आज १८ अगस्त है .........आपका सवाल होगा तो क्या ख़ास है इस दिन में ........तो साहब आज के ही दिन एक बहुत एक बहुत बड़ी पहेली शुरू हुयी थी .........जिस का आजतक कोई भी जवाब नहीं मिल पाया है !
बताया जाता रहा है कि आज के ही दिन यानि के १८ अगस्त १९४५ के दिन नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु एक विमान दुर्घटना में हुई थी। 

वैसे आज तक यह एक पहेली ही है !

जो भी हो इस से नेता जी के भारत देश की आज़ादी के लिए किये गए योगदान पर कोई फर्क नहीं पड़ता ! 

मैं उन लोगो में से हूँ जो यह मानते है कि आज़ादी केवल किसी ' एक ' के कारण नहीं मिली और ना ही अहिंसा से मिली है बल्कि पूरे भारत की जनता की कोशिशो और खुनी बलिदानों का नतीजा है !

ब्लॉग 4 वार्ता  के पूरे वार्ता दल की ओर से नेता जी सुभाष चन्द्र बोस को शत शत नमन !

चलिए आप सब को आज की ब्लॉग वार्ता की ओर ले चलता हूँ  |

सादर आपका


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अदरक बुला रही है, सीटी नहीं बजा रही है :- सीटी तो आप बजाओगे उसकी............. चाय में ड़ाल कर !! 


क्या लिखू ? :- भारत का संविधान .......दोबारा से .......आईडिया कैसा लगा ??

सीबीआई ने पप्पू यादव के आगे गाना गाया..क्या?..देखें! :- अब गाना भी गाने लगे यह लोग ..... सही है जांच तो करने देता नहीं कोई  !



बरसाती चुटकुले.....हा हा हा हा :- आप तो खुद ही हंस दिए !

लघु-शंका :- यहाँ करना सख्त मना है !

चोर - कहानी [भाग 3] :- आगे की कहानी कब आएगी ? 


कुछ और चाँद!! :- एक काफी नहीं था क्या ?

काले अंग्रेजों से मुक्त होने में कितना समय लगेगा :- ना मैं जानू .........ना मेरा अल्लाह जाने !!


ये धोखा है प्यार नहीं :- गनीमत है कि मालुम है ! 

अरे, हम भी सम्बेदनसील हो गए! :- यह कौन सी नयी बात है !?

एक अदद तिरंगे की खोज :- जारी है नेताओ के बंगले में ............ नोट तो बहुत मिले................... तिरंगा एक भी नहीं !

कुछ दिन न्यूयार्क में … :- बिताने हम आ जाये क्या ?


दिस प्रोग्राम इज स्पोन्सर्ड बाय...........! :- मज़ा तो तब आता जब होता .............दिस ब्लॉग इज स्पोन्सर्ड बाय...........!

वो सारी चीजें जो तुमको रुलाएं भेजी हैं। :- कहाँ और क्यों ?

आराम हराम है.... ही ही.... :-देव :- " तेरी दो टकिया दी नौकरी ते मेरा लाखों का सावन जाए! "

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आज की ब्लॉग वार्ता बस यहीं तक ...........अगली बार फिर मिलुगा एक और ब्लॉग वार्ता के साथ .......तब तक के लिए .........

जय हिंद !! 

मंगलवार, 17 अगस्त 2010

है बड़ा भूखा सभी को एक दिन यह खाएगा----ब्लॉग4वार्ता----ललित शर्मा

नमस्कार, आजादी की एक और वर्षगाँठ हमने मना ली, आशा है कि जो सपने हमने संजोए है  वे पूरे होगें, विश्व के विशाल लोकतंत्र में जनता जागेगी, अपने अधिकारों का उचित उपयोग करेगी। आज की वार्ता में मैं कुछ चुनिंदा चिट्ठों के लिंक दे रहा हूँ समय कम है,अब चलते हैं ब्लाग4वार्ता पर...

देशनामा को एक वर्ष पूर्ण हो चुके हैं खुशदीप भाई को देशनामा के जन्मदिवस पर ढेर सारी शुभकामनाएं, ब्लॉगिंग का एक साल और आपका साथ (1)...खुशदीप..ब्लॉगिंग का मेरा एक साल पूरा होने पर आप सब के साथ यादों का एक झरोखा...लेकिन सबसे पहले बात '*ब्लॉगिंग के सरदार'* *बी एस पाबला* जी की...कल पाबला जी का ये कमेंट मिला... *इस ब्लॉग जगत में आपके ब्लॉग को एक व. शिवम मिश्रा जी ने भी अपने ब्लाग की..५०० वी पोस्ट पूरी कर ली है :- ब्लॉगिंग ने पूरे किए ११ साल पुरे कर लिए|यदि अंग्रेजी, हिंदी और अन्य भाषाओं में ऑनलाइन अभिव्यक्ति के माध्यमों की बात की जाए तो जिस एक शब्द पर सबकी निगाहें रुकती है, वह ब्लॉग है। वर्ष 1999 में पीटर मर्होल्ज नाम के एक व्यक्ति ने इस शब्द का इजाद कि...

ताऊ पहेली - 87 (कांगड़ा दुर्ग, कांगड़ा ,हिमाचल प्रदेश) विजेता : श्री प्रकाश गोविंद प्रिय भाईयो और बहणों, भतीजों और भतीजियों आप सबको घणी रामराम ! हम आपकी सेवा में हाजिर हैं ताऊ पहेली 87 का जवाब लेकर. कल की ताऊ पहेली का सही उत्तर है Kangra fort-kangra-Himachal Pradesh और इसके बारे मे संक्...आकर्षक ब्लागर टेम्प्लेट , रुपये 5000/- मुल्य के , मुफ्त आपके लिये!आकर्षक ब्लागर टेम्प्लेट , रुपये 5000/- मुल्य के , आपके लिये! मैं बहुत दिनों तक ब्लाग पर सक्रिय रहा। और पत्रकारिता के अलावां मुझे अंतरजाल Continue Reading »

उड़न तश्तरी पर मुद्दतों बाद….स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आप एवं आपके परिवार का हार्दिक अभिनन्दन एवं शुभकामनाएँ.* आज एक गज़ल, जो चंद रोज पहले महावीर ब्लॉग पर छपी थी. महवीर ब्लॉग से अपनी गज़ल का छपना एक गौरव की अनुभूति देता है, बहुत आ...सच-झूठ, दोस्त और दुश्मनक्या आपको नहीं लगता कि हमें उन लोगों का शुक्रगुजार होना चाहिए जो लगातार झूठ बोलते हैं। यदि झूठ बोलने वाले नहीं होते तो शायद हमें सच की कीमत का अन्दाजा भी नहीं होता। इसी तरह हमें धोखा देने वालों का भी शुक्र...

टिप्पणी और पठन के खेल निराले मेरे भैया .....आज दिनांक 16-08-10 को सुबह लगभग 9.15 बजे चिट्ठाजगत के *धड़ाधड़ टिप्पणियाँ* और *धड़ाधड़ पठन* हॉट लिस्टः *क्र.**धड़ाधड़ टिप्पणियाँ**धड़ाधड़ पठन* 1.जिसे सर झुकाती है हिंन्द सारी .......स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनओं ...ब्रिटनी मर्फी और ये याद का टीलापानी के बह जाने के बाद रेत पर जानवरों के खुरों के निशान बन आये हैं. उन्हीं के साथ चलता हुआ एक छोर पर पहुँच कर बैठ जाता हूँ. सामने एक मैदान है. थोड़ा भूरा थोड़ा हरा. शाम ढलने में वक़्त है. ये विक्रमादित्य क...

प्रेसियस चाइल्ड की देखभाल ज्यादा करनी पड़ती है  आजकल सचिन तेंदुलकर के बाल बहुत सुर्ख़ियों में हैं । घुंघराले बालों को सीधा कराकर जैल से सैट कर, विश्व कप फुटबाल मैच देखते हुए ज़नाब किसी हॉलीवुड हीरो से कम नहीं लग रहे थे । सुना है अब सब युवा उनकी हेयर स्टा...मर्यादा का पालन !राजनीति में मर्यादा का भी पालन होना चाहिए : मनमोहन सिंह * एक और !! *रहम करो माई बाप !* *माया-ममता का पालन करते-करते* *तो हम सड़क पर आ गए और आप है* *कि.......!!!! *.

ये धोखा है प्यार नहींएक कच्ची सी नज़्म लिखी जो पकने को तैयार नहीं मैं शमा बनी वो परवाना वो जलने को तैयार नहीं आहें भी भरी आंसू भी बहे दिल मिलने को तैयार नहीं आज़ादी दी और पंख दिए वो उड़ने को तैयार नहीं सब जग छोड़ा ज...ईटानगर मे स्वतंत्रता दिवस समारोहकल १५ अगस्त को सारे भारत वर्ष की तरह ईटानगर मे भी स्वतंत्रता दिवस काफी जोश से मनाया गया। हालाँकि यहां एक दिन पहले बारिश हुई थी जिसकी वजह से १५ अगस्त को मौसम काफी सुहावना था । हाँ थोड़ी-थोड़ी बूंदा-बादी हो रह.

पूरे २१ दिन और कुछ घंटे लग गए यहाँ वापस आने मेंआखिर पूरे 21 दिन और कुछ घंटों के पश्चात सरकारी फोन में जान आ ही गयी। बड़ी गरीब सी चीज हो गया है यह बेचारा। हो क्या गया है बना दिया गया है इसे। नहीं तो सारी कंपनियों को मिलाने के बाद भी जिसके, चाहे मजबूरी मे...सूनापन:शेखावत हिम्मत की पहली रचनाबॉलीवुड में फेशन फोटोग्राफी करने वाले हिम्मत सिंह शेखावत में आज हिंदी ब्लॉग जगत में अपना पहला कदम रखते हुए ज्ञान दर्पण पर एक शानदार रचना प्रस्तुत की | जो आप यहाँ चटका लगाकर पढ़िए व हिम्मत सिंह शेखावत का हिं...

 है बड़ा भूखा सभी को एक दिन यह खाएगा...जीवन के उतार-चढ़ाव को लेकर कई बार कुछ लोगों को निराशा होती है, लेकिन जो सच है, उसका सामनाकरना ही चाहिए. सफलता-असफलता आगे-पीछे होती रहती है. कभी कोई जीवन के केंद्र मे रहता है तो कभी हाशिये पर भी चला जात... जीवन के रंग...(एक कहानी)हे भगवान् !..आज फिर देर हो जायेगी ..ओ भईया ज़रा जल्दी करना ...मैंने रिक्शे वाले से कहा ..वो भी बुदबुदाया ..रिक्शा है मैडम हवाई जहाज नहीं...और मैं मन ही मन सोचे जा रही थी...ये भी न ! एक कप चाय भी नहीं बन...

"रेड-फोर्ट" से सुना रहा है, कथा तरक्की का बन्दा"देशभक्ति का ज्वार उठा कल, लहराया था बाहों में। * *गया ज्वार अब देख पड़ा हूँ, खारों के संग राहों में।* *हम दुनिया में सबसे अच्छे, दुनिया के सिरमौर हैं हम।* *कितनी जल्दी आ जाता हूँ, मैं ऐसी अफवाहों में। *...यूँ बदली है दुनियाखामोशी भी सरगम गाए करे तन्हाई अब चहल पहल पंख हजारों मिले सपनों को अरमानो ने भरी उड़ान खिले मन की बगीया में कई फूल अचानक उमंगों के भँवरें गुन गुनाए तन मन महक उठा चन्दन सा बरखा भी गीत ख़ुशी के गाए इन्द्रधनुष स..

मजदूर औरतों की पीठमजदूर औरतों की पीठ अक्सर दिख जाती है पाथते हुए उपले गढ़ते हुए ईट उठाते हुए धान की बोरियां हांकते हुए बैल , गाय चराते हुए बकरी एक्सपोर्ट हाउस में काटते हुए कपडे सिलते हुए सपने या फिर गहराती रात में स्ट्रीट ला...यू.के. में एक मजदूर भी काफी चैन का जीवन बिता सकता है,मगर आज़ाद भारत में ?अभी तक आप सभी इस परिचर्चा (आपके लिए आज़ादी के क्या मायने है?) के अंतर्गत श्री समीर लाल जी, रश्मि प्रभा जी और दिगंबर नासवा जी के विचारों से रूबरू हुए हैं ! इसी क्रम में आईये अब वर्ष के श्रेष्ठ परिचर्चा लेख...

चलते चलते एक व्यंग्य चित्र



वार्ता को देते हैं विराम-आप सभी को ललित शर्मा का राम राम.............

सोमवार, 16 अगस्त 2010

स्‍वतंत्रता दिवस विशेषांक :-२ - ब्‍लॉग4वार्ता - शिवम् मिश्रा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो 
प्रणाम !

सब से पहले आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं ! 

आज का दिन वैसे तो हर भारत वासी के लिए बहुत खास रहता है पर धीरे धीरे इस दिन से जुडी हुयी भावनाएं ख़त्म होती जा रही है ! कारण बहुत से है .......पर सब से बड़ा कारण हमारे राजनेताओ का हम लोगो के प्रति रवैया है.............यह लोग हम लोगो को सिर्फ़ अपना वोट बैंक मान कर चलते है ! हमारी दुःख तकलीफों की इन को कोई परवाह नहीं ! 

आशा है कि इन लोगो का यह रवैया बदलेगा और अपना देश फिर सोने की चिड़िया बनेगा !
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आइये अब चलते है ब्लॉग जगत की सैर को ......ज़रा देखें आज के दिन कौन क्या कर रहा है !

ब्लॉग 4 वार्ता  के मंच से पेश है आज की ब्लॉग वार्ता !

सादर आपका 

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भारत वर्ष हमारा है...... :- बिलकुल है .......इसमें क्या शक है !!

उसने कलमाड़ी को छू लिया था! :- तो क्या करेंट लगा गया ??

जश्न ए आज़ादी :- हम भी मनाएंगे !


माँ को मेरा नमन है ! :- वन्दे मातरम !

अंग्रेजी मानसिकता का तिरस्कार ही सही मायने में आजादी के पर्व को मनाना है :- गोरे साहबो को भगा दिया अब भूरे साहबो को भगाना है ! 

हमें नाज़ है आप सब पर !! :- होना भी चाहियें !


छोटू सपेरे की मोनी :- को क्या हुआ ?





यह क्या सिखा दिया मैंने ;-) - सतीश सक्सेना :- यह क्या कम है कि कुछ सिखाया तो सही...........आज कल तो लोग मुफ्त में गाली भी नहीं देते !


स्वतंत्रता दिवस के पावन पर्व पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाये ... :- धन्यवाद..............इसको पावन पर्व कहने के लिए .......आज कल तो लोग कुछ और ही कहते नज़र आते है !

क्या सोचकर इस जश्न मे शरीक होये? :- अपना फ़र्ज़ समझ कर यह क़र्ज़ चूका दीजिये !


आजाद रहकर नौकरी करेंगे :- कोशिश कर लीजिये ........." दिल के खुश रखने को ' ग़ालिब ' यह ख्याल अच्छा है " !

अभी तो देश को आजाद कराना है -- :- हम भी आपके साथ है !


ये आजादी भी कोई आजादी है लल्लू! :- हम तो यही समझते आये आज तक !


वन्दे मातरम्... :- माँ तुझे सलाम !

चार चित्र आज़ादी के… :- बेहद  उम्दा !


तिरंगा उन्हीं की सुनाता कहानी :-  वतन के लिए जो फ़ना हो गए हैं ! 



पीपल का पेड़, दद्दू लोग और हमारा मिडास टच :- भाई वाह...... क्या कहने आपके !


आज़ादी :-  कुछ को मिलनी बाकी है !

जीवन के चार पहिये :- कभी तो साथ चलते है............ कभी नहीं !


सोते वक्त आखिर छींक क्यों नहीं आतीं हैं ? :- शायद उसको भी नींद आ जाती है !

बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे :-  बोल ये थोड़ा वक़्त बहोत है !

स्वाधीनता दिवस पर … क्या यही है स्वतंत्रता! :- क्यों नहीं है क्या ?

चिंदि-चिंदी बीनती, फिर भी नहीं हताश :- क्युकी इन के मन में एक नए भारत की है आस !

नया सफ़र ........एक नए चेहरे के साथ :- अरे .........अब समझे .......common wealth games के चक्कर में डेंटिंग पेंटिंग हुआ है !!

करते है साक्षर ही अधिक भ्रूण हत्या ...............! :- शर्म क्यों उनको उम्र भर नहीं आती !

परिभाषाये - आज के युग की :- रोज़ बदलती है !

बस लूंट हुई स्वाधीन :- हमारे देश में !

स्वतंत्रता दिवस पर विशेष : सौगंध तुम्हे सत्ताधीशों, सच बतलाओ यह लोकतंत्र है :-  यहाँ कौन है जो जवाब दे ..........कोई नहीं !

स्वतंत्रता दिवस विशेष - रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा :- बहुत खूब !

हिन्दुस्तान है हमारा, हम है इसकी शान :- जय जवान, जय किसान और जय विज्ञानं !

सड़क मार्ग से महाराष्ट्र: 'पाकिस्तान' व उत्तरप्रदेश की सैर, सट्टीपिकेट का झमेला, एक बे-सहारा, नालायक, लाचार और कुछ कहने की कोशिश करती 'वो'  :- यात्रा जारी है !

“अपनी आजादी” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”) :- को हम हरगिज मिटा सकते नहीं !

प्रेम प्रदर्शन, पत्नी की शिकायत और मेरा नजरिया :- यह क्या खिचड़ी पका रहे हो भईया ?

पीपली लाइव का इतना पोस्टमॉर्टम क्यों...? :- आदत से मजबूर है भाई ....क्या करें !!

हिंदी फिल्मों के निराले कवि प्रदीप :- शत शत नमन उनको !

ब्लॉगिंग का एक साल और आपका साथ (1)...खुशदीप :- कैसा रहा ?

बहुत दिनों से नहीं बजाई थी सो आज बजाता हूँ अपनी डफली अपने हाथ क्यों कि पूरे ५०० पोस्टो का हो गया है आपका और मेरा साथ ! 

जी हाँ  आज मेरे ब्लॉग बुरा भला  पर ५०० पोस्टे पूरी हो गयी है ! साथ साथ यह भी बता देता हूँ कि ब्लॉगिंग को भी ११ साल पूरे हो गए है !

५०० वी पोस्ट :- ब्लॉगिंग ने पूरे किए ११ साल | :- मुबारक हो सब को !

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आज की ब्लॉग वार्ता बस यहीं तक ........अगली बार फिर मिलुगा एक और ब्लॉग वार्ता के साथ तब तक के लिए ...........

जय हिंद !!

रविवार, 15 अगस्त 2010

स्‍वतंत्रता दिवस विशेषांक ... ब्‍लॉग4वार्ता ... संगीता पुरी

आप सभी पाठकों को संगीता पुरी का नमस्‍कार , साथ ही स्‍वत्तंत्रता दिवस की बहुत बधाई और शुभकामनाएं भी। वार्ता करने का मेरा दिन सोमवार का है , पर आज शिवम जी ने बिजली की समस्‍या की चर्चा करते हुए मुझे वार्ता लगाने को कहा। स्‍वतंत्रता दिवस पर इतने अच्‍छे अच्‍छे पोस्‍ट थे ,कुछ की चर्चा आवश्‍यक थी। आज पंद्रह अगस्‍त है  , भारतवासियों के लिए बहुत ही महत्‍वपूर्ण दिन , आखिर इसी दिन हमारे गुलाम देश को स्‍वतंत्रता जो मिली थी , पर स्‍वतंत्रता से कुछ वर्ष पहले हम भारतवासियों में जो जुनून था , वह स्‍वतंत्रता के बाद भी क्‍या रह गया है ??  एक यक्ष प्रश्‍न है हमारे सामने , जिसका जबाब 'ना' में ही दिया जा सकता है। यदि इस प्रश्‍न का जबाब 'हां' में दिया जा सकता , तो क्‍या आज आजादी के इतने वर्शों बाद भी हम मूलभूत सुविधाओं से वंचित होते ??  इस खास मौके पर हिंदी ब्‍लॉगरों ने भी बहुत पन्‍ने रंगे, जिनमें से कुछ आपके सामने प्रस्‍तुत हैं .......
 जैसे ही नवोदित नेताजी को खबर मिली कि अबकी बार तहसील प्रांगण में उन्हें झंडावंदन करना है, तत्क्षण उन्होंने मन ही मन राष्ट्रीय गान रटना शुरू कर दिया। खास चमचे ने जब देखा कि नेताजी अपने ललाट की सलवटों का भार उठा नहीं पा रहें हैं, चिन्तामग्न से हुए पड़े हैं, वह भी चिन्ताविभोर होकर नेताजी को कुरेदने लगा।

ललित शर्मा जी की पोस्‍ट नौजवानों की शहादत-पिज्जा बर्गर-बेरोजगारी-भ्रष्टाचार और आजादी की वर्षगाँठ
अंग्रेजों से सत्ता लिए हमको 63 वर्ष पूर्ण हो गए, हम आजादी की 64 वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। जिन उद्देश्यों को लेकर आजादी की लड़ाई हमारे पूर्वजों ने लड़ी थी। अपना खून बहाया था। माताओं ने अपने जवान बेटों का बलिदान दिया था। स्त्रियों ने अपने सुहाग एवं बच्चों ने अपने सरपरस्तों को खोया था। क्या वह उद्देश्य पूरे हो रहे हैं? गरीबों ने अपने राज में जिस सुख की रोटी के सपने देखे थे क्या वह उन्हे मिल रही है? 
 आखिर आ ही गया हमारी स्वतंत्रता का ६४वा वर्ष !चलिए हम जरा विचार करते है की हमने , हमारे भारत के लिए इन ६४ वर्षों  में  कितने महान कार्य और कितने सराहनीय कार्य  किये है, जिनसे हमारा और हमारे मुल्क का विकाश हुआ है!जी हा हम कह रहे है अब ६४ वर्ष जो अब बीत चुके है जो बहुत ज्यादा होते है, आजकल तो एक मनुष्य की उम्र भी नहीं होती इतनी ....फिर भी हम उनसे पीछे क्यों है, क्या हमारे पास संसाधनों की कमी है  ,क्या हमारे पास तकनीक की कमी है ,क्या हमारे पास दिमाग की कमी है ,क्या हमारे पास शक्ति की कमी है???
कुछ दिनों से सोच रहा था की देश की आजादी पर कुछ लिखूं. लेकिन क्या! वह जो हम रोज देख-पढ़ रहे है या ऐसा कुछ जिसको पढ़ कर कुछ सोचा जाये. ऐसा ही कुछ मैंने अपनी इन पोस्टो में लिखा भी था.
आज  रामेश्वर काम्बोज हिमांशु' जी ने भी सुंदर रचना लिखी है ... आजादी है ...  
नाचो गाओ ,खुशी मनाओ- आज़ादी है
लूटो खाओ , पियो-पिलाओ आज़ादी है
भूखी जनता टूक न मिलता आज़ादी है
छीनो -झपटो ,डाँटो डपटो आज़ादी है
दफ़्तर-दफ़्तर ,बैठे अजगर आज़ादी है
जेब गरम है ,बिकी शरम है आज़ादी है। 
कल १५ अगस्त है ,हमारा स्वतंत्रता दिवस है .लोग बहुत दुखी है खास तौर पर समझदार और पढ़े लिखे कहे जाने वाले लोग .उन पर पहाड़ टूट पड़ा है .उनके साथ कितना बुरा हो गया है की यह १५ अगस्त रविवार के दिन पड़ा है ,वैसे भी वे इस दिन कुछ नही करेंगे छुट्टी ही मनायेंगे लेकिन १५ अगस्त किसी और दिन पड़ा होता तों छुट्टी मनाने  को एक दिन और मिलता .इससे बड़ा उनके जीवन का बड़ा संकट क्या हो सकता था .स्वतंत्रता दिवस क्यों मनाये, यह भी कोई मानने की चीज है .मनाना  है तों जातियों का दिवस या केवल अपनी जाती या धर्म में पैदा हुए महापुरुष का दिवस मना कर उसमे अपना गौरव तलाश लेने की कोशिश कर ही लेते है .

 कैसा 15 अगस्त!!!!!
किसका 15 अगस्त!!!!!
जब देश के सामने समस्याएँ....
अनगिनत.
लोगों में निराशा....
और आक्रोश जबरदस्त.  
जनता ग़रीबी,
भुखमरी,
महँगाई,
और बेकारी से  पस्त
 जन्मभूमि जननी और स्वर्ग से महान है। मेरा देश- मेरी धरती मेरी मां है... फिर राष्ट्रपिता और राष्ट्रपति जैसे शब्दों का क्या मायना है? अगर मां कहलाने वाली हमारी मातृभूमि का अस्तित्व प्राकृतिक, भौगोलिक और सामाजिक-सांस्कृतिक रूप से युगों से कायम है तो क्या हर पांच साल में नया पति (राष्ट्रपति) और कथाकथित आजादी के बाद पिता (राष्ट्रपिता) का क्या औचित्य और इसकी क्या जरूरत... वह भी उस स्थिति में जब प्रेसीडेंट के अनुवाद में राष्ट्राध्यक्ष और आधुनिक भारत के संदर्भ में आधुनिक राष्ट्र के मूलाधार, कर्णधार, शिल्पकार जैसे शब्द मौजूद हैं...

जिसका दिल सिर्फ देश के लिए धडकता हो
जिसके खून में देशभक्ति की भावना कूट कूट कर भरी हो 
जो देश के लिए हर कुर्बानी देने का तैयार हो
 जो देश की आन और शान से वाकिफ हो 
जिसका जूनून सातवे आसमान से भी ऊपर हो 
जो अपने देश को दीवानों की तरह प्यार करता हो
वही है भारत का भाग्य विधाता 
ब्रिटेन से 190 साल (1757 से 1947) की लंबी गुलामी के बाद हमारा देश भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद व 26 जनवरी 1950 को गणतंत्र बना। क्षेत्रफल की दृष्टी से विश्व में सातवां, जनसंख्या में दूसरा व जनसंख्या धनत्व के अनुसार विश्व में प्रथम स्थान हमारा है। 28 राज्यों व 7 केंद्र शासित प्रदेशों के साथ हमारा लोकतंत्र विश्व में सबसे बड़ा माना जाता है। हमारा देश संपूर्ण विश्व के केवल 2.4 प्रतिशत क्षेत्रफल के साथ विश्व जनसंख्या के 17 % भाग को शरण प्रदान करता है। 

यही तोहफ़ा है यही नज़राना
मैं जो आवारा नज़र लाया हूँ
रंग में तेरे मिलाने के लिये
क़तरा-ए-ख़ून-ए-जिगर लाया हूँ
ऐ गुलाबों के वतन
पहले कब आया हूँ कुछ याद नहीं
लेकिन आया था क़सम खाता हूँ
फूल तो फूल हैं काँटों पे तेरे
अपने होंटों के निशाँ पाता हूँ
मेरे ख़्वाबों के वतन

स्कूल में बच्चों को
समझाया गया
कल स्वतंत्रता दिवस है
समय से आना
सफ़ेद ड्रेस पहन कर
जूते चमकते हों
लाईन  में चलना
प्रार्थना स्थल पर
शांत रहना
कोई शैतानी नहीं
बच्चे  स्तब्ध हैं
इतनी बंदिशें ?
यह कैसा स्वतंत्रता दिवस है ?
 
आज फिर मैं अपनी सहेली चैंडी द्वारा ली हुयी कुछ तस्वीरें पोस्ट कर रही हूँ… कैप्शन मैंने लिखे हैं. आज़ादी का छोटा सा मतलब…

सुना है! कल 15 अगस्त नाम का कोई ‘त्योहार’ मनाया जाने वाला है!


दिन भर आजादी के,गुणगान गाये जाएंगें
पब्लिक को तरक्की के,नये ढंग बताए जाएंगें
खुशहाली होगी कैसे,ये राग सुनाये जाएंगें 

कल पंद्रह अगस्त है , हमारी आज़ादी का दिन , 
इस मुबारक मौके पर सिर्फ एक ही बात कहूँगा 
उत्तुंग  हिमालय है जिसका मस्तक ऐसा मेरा भारत है

वतन मेरे वतन
क्या करूं मैं अब जतन


सर जमीं से आसमां तक
तुझको है मेरा नमन
वतन मेरे वतन
क्या करूं मैं अब जतन


भूख से, मंहगाई से
जीना हुआ दुश्वार है
वतन मेरे वतन
क्या करूं मैं अब जतन
 

 कहते थे देश लूटे फ़िरंगी,
दर्द से युवा बने थे ज़ंगी।
उन वीरों की औलादों का,
जीना हुआ मुहाल।
लूंट का यह लोकतंत्र है,
पावे सो निहाल॥


जाति से पिछडे थे शोषित,
अगडे रहे है शोषक घोषित।
अब शोषक शोषित एक हुए है,
देश हुआ बदहाल।
लूंट का यह लोकतंत्र है,
पावे सो निहाल॥


आज़ादी एक ऐसा शब्द,एक ऐसा जज़्बा जो किसी भी इंसान के लिए इतना अहम है की उसकी कल्पना मात्र से ही रोम-रोम पुलकित हो उठता है | आज से ठीक ६४ साल पहले जब स्थिति आज के बिलकुल विपरीत थी, जब हम लोग वर्षों की कठोर साधना के फल का इंतज़ार कर रहे थे | सरदार पटेल,सुभाष चंद्र बोस ,खुदीराम बोस, भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद , महात्मा गांधी जैसे भारत के वीर सपूतो का बलिदान हमे आज़ादी का अनमोल तोहफा देने की तैयारी में थे| तब के समय और आज के समय में ज़मीन आसमान का अंतर आ चुका है| आज मैं आज़ाद तो हूँ पर क्या मैं सच में आज़ाद हूँ  ?

साल तरेसठ बीत गये हैं अब भी भ्रम में जीते हैं
कहने को आजाद हुए हैं मन ही मन खुश होते हैं
पर आजादी मिली कहाँ है सत्ता का हस्तान्तर है
बेशक खुश हो कर कहते हम आजादी में जीते हैं


पहले पाकिस्तान बनाया फिर सारी तिब्बत दे दी
दे उन को कश्मीर का हिस्सा सारी ही इज्जत दे दी
फिर समझौता कर शिमला में स्वाभिमान भी दे डाला
लगता है इस कांग्रेस ने फिर से वही आग दे दी

तीन दिन से बेचैनी थी इसे लेकर.. आज छुट्टी के रोज़ सुबह उठते ही सोचा कि कैसे भी हो आज यह फ़िल्म देखनी ही है। कहानी लगभग पूरी पता थी। तनवीर साहब के रंगकर्मियों को आए दिन टीवी पर फ़िल्म का प्रोमोशन करते देखा तो यह भी सहज अनुमान था कि स्टोरी ट्रीटमेंट कैसा होगा। फ़िल्म में मीडिया की जमकर खिंचाई हुई है- प्रोमो देखकर पता चल जाता है। तो फिर नया क्या था? 


कुसुम ठाकुर जी की सुंदर कविता का भी आनंद लें ..शहीदों की बयां करना
देश की आन में जीना,
उसी की शान में मरना 
कहो किस्सा पुराना है,
जज्बा न कम करना 
हम आज़ाद हुए तो क्या ,
कीमत की लाज बस रखना
अब स्वछन्द हम विचरें,
मगर संताप से डरना 
 

 डॉ सुभाष राय जी का मानना है .. होठों में आ रही है जुबां और भी खराब   हिंदुस्तान आजाद हुआ था तो एक बंटवारा झेलना पड़ा था पर आजादी के बार बचा हुआ देश कई टुकड़ों में बंट गया है। देश के दो चेहरे साफ-साफ दिखायी पड़ते हैं। एक अमीर भारत, दूसरा गरीब भारत। कुछ लोगों के पास बेइंतहा धन आ रहा है। वे वैभव और ऐश्वर्य की चमक में जी रहे हैं। उनके पास बड़े उद्योग हैं, कंपनियां हैं, उनकी पीठ पर सरकार का वरद हाथ है। वे धन के बल पर मेधावी दिमाग खरीदते हैं और उनका इस्तेमाल अपना वैभव बढ़ाने में करते हैं। यह चमकता भारत है। दूसरी ओर वे लोग हैं, जो दो वक्त की रोटी के लिए दिन-रात संघर्ष कर रहे हैं। हाड़तोड़ मेहनत के बाद भी कोई गारंटी नहीं कि उनके परिवार को रोटी मिल ही जाये।  

वीरेन्‍द्र कुमार जी के लेख को प्रकाशित किया है प्रदीप शर्मा जी ने .. झंडा फहरा कर ही अन्न ग्रहण करते थे लोग  आजादी के दिन यानी 15 अगस्त 1947 और उसके बाद लगभग डेढ़ दशक तक लाल किले के आसपास स्वतंत्रता का समारोह एक मेले में तब्दील हो जाता था। उन दिनों लाल किले पर यह आयोजन देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ती थी। लोग प्रधानमंत्री के भाषण को बेहद गंभीरता से सुनते और उस पर अमल करने की कोशिश करते थे।


उन्हें इस बात की चिंता रहती थी कि कहीं प्रधानमंत्री का भाषण छूट न जाए। लोग समय से पहले ही वहां पहुंच जाते थे। उन दिनों आज जैसी बसों और ट्रेनों की सुविधा नहीं थी।


 सैयद फैज हसनैन जी कहते हैं .. 'आज़ादी की खुशियों के असली हकदार '     अरे यार सब जानता है की हमारे देश के फौजियों ने देश के लिए हमेशा जान की बजी लगाई है यह आज़ादी उनकी है हम उनके आभारी है ...........हम सब की तरफ से भारत माँ के उन वीर सपूतों को सलाम जिन्होने हमारी भारत माँ की रक्षा करते करते आपनी जन न्योछावर कर दी ...जय भारत -जय जवान

अंकुर जैन जी आजाद भारत की गुलाम तस्‍वीर देख रहे हैं ...आजाद भारत की गुलाम तस्वीर-"पीपली लाइव"  तेजी से बदलती संस्कृति, मिटती रूढ़ियाँ, नयी-नयी खोजें, बड़ी-बड़ी इमारतें, आलिशान मॉल-मल्टी प्लेक्स, सरपट दौड़ती मेट्रो ट्रेन...और जाने क्या-क्या हमने विकसित कर लिया है स्वतंत्रता की इस ६३वी वर्षगाठ तक पहुँचते-पहुँचते...लेकिन बहुत कुछ है जो अब भी नहीं बदला..शाइनिंग इंडिया विकसित हो रहा है पर पिछड़ा भारत जस का तस है। 
रोहित कश्‍यप जी कहते हैं ..बदल गई है छात्र राजनीति की दशा ? बात हो रही है छात्र राजनीति  की | विषय बड़ा गंभीर है, बात भी गंभीरता वाली होनी चाहिए| यह एक ऐसा विषय है जो देश की दशा और दिशा दोनों बड़ा सकता है | आज देश में हर जगह एक अजीब सी स्थिति हो गयी है | और जहाँ तक बात है छात्र राजनीती का तो इसमें बदलाव जरूर आया है | 
वैश्विक उदारीकरण पर दीपक भारतदीप जी का व्‍यंग्‍य पर एक नजर .. वैश्विक उदारीकरण के चलते
बाज़ार एक हो गया है,

सभी को खुश करते सौदागरों ने
सजा दिये हैं बुत
कहीं धर्म के उदारपंथी
पेशेवराना ममता बरसा रहे हैं
कहीं कट्टरपंथी पाकर मदद
मचाते हैं आतंक

शांति के लिए तरसा रहे हैं  

हमारा गणतंत्र फले फूले और हम सब भारत माता की सच्ची सेवा में अपना तन मन धन लगा सकें और मन, वचन, कर्म से सत्य के मार्ग पर चलें। सैनिकों की तरह सीमा पर और भीतर आतंकवादियों का सामना करते हुए जीवनदान न भी कर सकें तो ब्लड बैंक जाकर रक्तदान तो कर ही सकते हैं। सीमा पर लड़ न सकें किंतु इतना ध्यान तो रख ही सकते हैं कि ब्लॉग पर लगाये हुए मानचित्र में देश की सीमायें सही और अधिकारिक हों। आतंकवाद के विभिन्न रूपों से दो-दो हाथ करने का अवसर न भी मिले मगर उनका महिमामंडन तो रोक ही सकते हैं। अपने को कभी भी क्षुद्र न समझें, कवि ने ठीक ही कहा ही है, "जहाँ काम आवै सुई, कहा करै तलवार..."


तो उठिये, देश के नवनिर्माण का व्रत लीजिये और जुट जाइये काम में!


एक बार फिर हार्दिक शुभकामनायें!
वन्दे मातरम! जय भारत!

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