बुधवार, 25 अगस्त 2010

"पांगी घाटी" लांस नायक वेदराम! मेरे भैया--'राखी की लाज'---ब्लाग4वार्ता----ललित शर्मा

नमस्कार, सभी पाठकों को श्रावणी पर्व की शुभकामनाएं, आज हमने रक्षा बंधन का त्योहार मनाया। यह एक भावनाओं से जुड़ा त्यौहार है। बिछुड़े भाई और बहन मिलते हैं तो आंसु गिरते हैं और मिल कर बिछुड़ते हैं तो आंसु गिरते हैं कि कब फ़िर मिलेंगे? अनुठा त्यौहार है रक्षा बंधन। श्रावण पुर्णिमा के दिन को वैदिक काल में विद्यारंभ का दिन माना जाता था। इसदिन यज्ञोपवीतसंस्कार होते थे और ब्रह्मचारियों का अध्ययन हेतु गुरुकुल प्रवेश होता था। आचार्य उन्हे अपने गुरुकुल में प्रवेश देते थे। अन्य द्विजातियां इस दिन यज्ञोपवीत बदलती थी और आज भी हम पुराने यज्ञोपवीत को बदल कर नया धारण करते हैं। कालांतर में इसे रक्षा बंधन के नाम से जाना गया। इसका बदलता हुआ रुप आपके सामने हैं, अब चलते हैं आज की ब्लाग4वार्ता पर देखते हैं कुछ रक्षा बंधन के चुनिंदा ब्लाग....

आज ब्लाग जगत में रक्षा बंधन के साथ-साथ जन्मदिन की भी धूम रही। 24 अगस्त को अदा "सैल मंजुषा" उनकी बिटिया प्रज्ञा हमारी बिटिया श्रुतिप्रिया एवं श्रीमति अजीत गुप्ता जी की बिटिया कनुप्रिया का जन्म दिवस समवेत रुप से मनाया गया।

आज स्वप्न मंजूषा शैल 'अदा' का जनमदिन हैआज, 24 अगस्त को काव्य मंजूषा वालीं स्वप्न मंजूषा शैल 'अदा' का जनमदिन है। उनकी बिटिया प्रज्ञा का जनमदिन भी आज ही है। बधाई व शुभकामनाएँ आने वाले जनमदिन आदि की जानकारी, अपने ईमेल में प्राप्त करने के लिए ...श्रुतिप्रिया के जन्म दिन एवं रक्षा बंधन की हार्दिक बधाई----आर्ट गैलरी सेश्रुतिप्रिया के जन्म दिन, एवं रक्षा बंधन की हार्दिक बधाई, ये ललित शर्मा जीकी यशस्वी पुत्री हैं, तथा छत्तीसगढ राज्य की जुनियर निशाने बाज हैं। श्रुतिप्रिया के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।* * * *स्वर्ण ए..श्रीमति अजीत गुप्ता जी की बिटिया कनुप्रिया का जन्म दिवस भी मनाया गया।

त्यौहार की आड़ में लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों की पौ बारह हो जाती है, त्यौहार में जिस वस्तु की मांग बढती है उसके नकली संस्करण भी बाजार में धड़ल्ले से बिकने लगते हैं। त्यौहारों में नकली खोवे की मिठाई धड़ल्ले से बिकती है और प्रशासन  के अधिकारी आंखे मूंद कर नोट चबाते रहते हैं। दिनेश राय द्विवेदी जी ने इस पर एक पोस्ट लिख कर चेताया है। कविता वर्मा जी ने अपने ब्लाग पर एक जीजी को एक संदेश दिया  है।
सिंथेटिक मावा/खोया और उस की मिठाइयों का बहिष्कार करें ....बस कुछ देर में तारीख बदलने वाली है। हो सकता है यह आलेख प्रकाशित होते होते ही बदल जाए। नई तारीख रक्षा बंधन के त्यौहार की है। यूँ हमारे यहाँ तिथियाँ सूर्योदय से आरंभ होती हैं। इस कारण कल का सूर्योदय होती ही...जीजी तूने चिठ्ठी नहीं लिखीरक्षाबंधन, ये शब्द ही मन में हलचल मचा देता है हर दिल में चाहे वो भाई हो या बहन अपनो की यादे उनके साथ बिताये बचपन के अनगिनत खट्टे -मीठे पल आँखों के आगे कौंध जाते हैं। बात बात पर वो भाइयों से लड़ना,दादी का उला..

अशोक बजाज जी ने रक्षा बंधन की बधाई दी है शाहनवाज भी रक्षा बंधन के भावनात्मक पक्ष को उजागर कर रहे हैं। रक्षा बंधन त्यौहार ही ऐसा है कि सब इससे भावनात्मक रुप से जुड़ जाते हैं। भाई बहन के प्रेम का जो त्यौहार है।
रक्षाबंधन की बधाईक्षाबंधन के पावन पर्व पर सभी बहनों एवं भाइयों को हार्दिक बधाई* बधाई के साथ यह भी और भी ................... लेकिन शर्त है इसे बचाएं ............. हम बेटियाँ ईश्वर की वरदान होती है .. ...राखी तो बहन भाई की जज़्बात-ए-निशानी हैराखी तो बहन भाई की जज़्बात-ए-निशानी है फूलों सी महकती हुई प्यारी सी कहानी है भाई-बहन का प्रेम है कुदरत की एक नज़्म धारा सी अविकल है यह, गीतों सी रवानी है क़यामत तक ताउम्र ही चलता रहे यह प्यार इंसान की ...

बड़ा भिखारीयह एक और शनिवार की रात थी, हमेशा की तरह, राहुल देर रात को आया था. अपने दोस्तों उसे उसकी बस्ती के कोने पर छोड़ दिया! उसने मोबाइल में देखा, ३.३० बज रहे थे! राहुल ने दरवाजा खटखटाया. उसके पिता ने दरवाजा खोला!...मेरी बिटिया...आज का ही दिन था मुझे मिली थी .. मुट्ठी में गुनगुनी धूप, चाँदनी में नहाई, सोंधी ख़ुशबू में लिपटी नूर की नमी लिए एक नयी आशा, और एक नया रिश्ता, मेरे अपने से चेहरे पर, ठहरी हुई आखों का अहसास, कितना तिलस्मी ...

राखी पर्व पर शुभकामनाएं..-------->>>दीपक मशाल आज राखी के पावन पर्व पर अपनी प्यारी छोटी बहिन रानी(गार्गी) और सृष्टि के अलावा सारी बड़ी बहिनों(दीदियों) अदा दी, रश्मि रवीजा दी, लता हया दी और शिखा वार्ष्णेय दी का सादर चरण वंदन.. और आप सबको भी प्रेम के...आज़ादी तो तब ही होगी जब हम देश के, समाज के ग़लत तत्वों के उत्पीडन से आज़ाद न हो जाएँ,आज परिचर्चा का दसवां दिन है, कल मैंने कई महत्वपूर्ण चिट्ठाकारों के विचार से रूबरू हुए थे ......इसी कड़ी में आज के दिन की शुरुआत हम करने जा रहे हैं हिंदी के वहुचर्चित युवा चिट्ठाकार श्री सलीम खान से !* 

सुअरा की विदाई!विश्व स्वास्थ्य संगठन* का कहना है कि सुअरा ,अरे वही स्वाईंन फ़्लू H1N1 के दिन लद गए ..अब यह विश्व व्यापी नहीं रहा .निदेशक मार्गरेट चैन का कहना है कि अब पूरी दुनिया *' पोस्ट पैन्ड़ेमिक पीरियड '* से गुजर रह...रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाएंप्रेम का बंधन है राखी, दिलों में धड़कन है राखी प्रेम-स्नेह का पर्व है राखी, रक्षा का बंधन है राखी। तुम क्यूं चले आते हो…..तुम क्यूं चले आते हो….. तुम क्यूं चले आते हो दबे पांव मेरे खयालों में ? अचानक ही अनमनी सी हो जाती हूँ मैं । किसी चीज का रहता नही होश, जागती आँखों से सपने में खो जाती हूँ मै । किसी के पूछने पर कि क्या हुआ .

रक्षाबंधन विशेष: वृन्दावनलाल वर्मा का नाटक - 'राखी की लाज'राखी की लाज' वृन्दावनलाल वर्मा का एक प्रसिद्ध नाटक है।आवारा मेघराज की गाँठ में राखी बँधने के समय पैसे न थे, अथवा वह राखी बाँधने वाली अपनी बहन को पैसों से बढ़कर कुछ और देना चाहता था-और उसने दिया।विंध्यखंड मे...मेरे भैया .....रानीविशालआज जब देश के हर घर में बहनें भाइयों की कलाई पर अपने प्यार और विश्वास को रेशम के खुबसूरत धागे में संजो कर बाँध रही हैं और भाई भी पुरे आत्मप्रेम और निष्ठा के साथ आस्था के इस अटूट बंधन को अपनी कलाइयों पर सजा ...

आज पहली वर्षगाँठ है आपके इस ब्लॉग की आज आपके ब्लॉग की पहली वर्षगाँठ है । पिछले साल 24 अगस्त को पहली पोस्ट आई थी इस ब्लॉग की और अब 740 से ज्यादा पोस्ट है अब इस ब्लॉग में । आंकड़ें नहीं गिनाना चाहता आपके सहयोग को कोई अंक व्यक्त नहीं कर पायेगा ..."दुनिया भी वार दूं, तेरे प्यार की सच्चाई पर.... "सुधि मित्रों, सदर नमस्कार और भाई बहन के प्यार भरे रिश्तों को स्थापित करने वाले अद्भुत त्यौहार रक्षा बंधन की दिली बधाइयां.... प्यारे प्यारे स्मृतियों के उमड़ते- घुमड़ते, बदलियों संग विचरते, मेरा यह पोस्ट दु...

जो कष्ट से मरे वह कस्टमर !अंग्रेज़ी के कस्टमर (customer) शब्द का अगर हम हिन्दी वाले ज़रा तोड़- फोड़ कर अर्थ निकालें , तो आज के समय में सौ करोड़ से भी ज्यादा आबादी वाले हमारे देश की आम जनता पर वह बिल्कुल फिट बैठता दिखेगा . अंग्रेज...रक्षा बन्धन भाई-बहन का त्यौहार या पुरोहित-यजमान का?हमें आज भी याद है कि बचपन में प्रतिवर्ष रक्षा बन्धन अर्थात् श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के दिन हमारे पिता जी सुबह से ही पुरोहित जी की प्रतीक्षा करने लगते थे। उस रोज पुरोहित जी हमारे घर आकर सबसे पहले पिताजी के हा...

"मन्दिर में खून की होली" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")बग्वाल मेला बग्वाल मेला साल में रक्षा-बन्धन के दिन आता है। आज के दिन बहने अपने भाईयों को राखी बाँधती हैं।परन्तु उत्तराखण्ड के कुमाऊँ मण्डल के चम्पावत जिले में एक स्थान ऐसा है, जहाँ यह अनोखा त्योहार मनाया जा...रक्षा बंधन रक्षा बंधन बधाई हो! सुना है कि रक्षा बंधन भाइयों-बहनों क त्योहार है। बहन अपने भाइयों को राखी देती हैं और भाई बहनों की रक्षा करने को प्रतिज्ञा करते हैं। यह जाने के बाद, मैं हर साल भारतीय मित्रों को राखी भे...

"पांगी घाटी" जहां आज भी लड़की को भगा कर शादी करने का चलन है।हमारा हिमालय दुर्गम घाटियों और ऊचाईयों का अद्भुत संगम है। आश्चर्य होता है ऐसी-ऐसी जगहों को देख कर कि वहां मनुष्य रह कैसे लेता है। क्या है ऐसा उस जगह में जो आठ-आठ महीने मुख्य धरा से कट कर भी इंसान खुश है अप...स्टीविया चबाओ, मधुमेह भगाओविश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार देश में लगभग दो करोड़ दस लाख लोग मधुमेह की बीमारी से पीड़ित हैं। संगठन का यह भी अनुमान है कि वर्ष 2020 में भारत का हर पांचवां व्यक्ति मधुमेह से पीड़ित होगा। जम्मू-क...

इंटरनेट से लोगों की पहचान कर लेगा यह सॉफ्टवेयर ! जल्द ही एक ऐसा सॉफ्टवेयर आने वाला है जो इंटरनेट पर व्यक्तियों की तस्वीर से उन्हें पहचान सकेगा और इसे बनाने वाली कंपनी का दावा है कि वह एक ऐसी क्रांतिकारी तकनीक पर काम कर रही है, जिससे इंटरनेट की हर तस्वीर ...दो वर्षों तक स्‍कूल में होनेवाली छुट्टियों का हमलोगों ने जमकर फायदा उठाया था !!अभी तक आपने पढा ....... हर प्रकार के सुख सुविधायुक्‍त वातावरण होने के कारण हमलोग कुछ ही दिनों में आसानी से बोकारो में और बच्‍चे अपने नए स्‍कूल में एडजस्‍ट करने लगे थे। पर यहां रिश्‍तेदारों या परिचितों की ..

या फिर बाज़ार में अपने बेटे की कीमत लगाइए ..........!हमने अखबार में पढ़ा एक '*Advertisement* ' लिखा था नो दहेज़ ,'*No Requirement* ' दहेज़ लेना और देना दोनों ही पाप है , लिकिन बेटी को सुखी न रखना भी अभिशाप है | खैर लड़के का '*Bio-Data* ' हमे पसंद आया, जवाब ...उसका पता मिलता नहींअपना पता भूलती नहीं उसका पता मिलता नहीं नगरी नगरी , द्वारे द्वारे खोजती फिरूँ प्यारे को पर उसका ठिकाना मिलता नहीं कमली बन कर डोलूँ मन के वृन्दावन में खोजूँ सांझ सकारे प्रीतम प्यारे दर्शन को तरसे नैना...



चलते चलते व्यंग्यचित्र.

 

 




अब वार्ता को देते हैं  विराम--सभी को ललित शर्मा का राम राम---यहां पर मिलिए लांस नायक वेदराम! से

मंगलवार, 24 अगस्त 2010

आओ बात करें बस हिन्दुस्तान की - रिश्वतखोरी और गुलामी को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त हो चुकी है - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो ,
प्रणाम !

कल्पना कीजिए कि आपके कंप्यूटर मॉनिटर पर वह वेबसाइट अपने आप खुल जाए जिसे आप खोलने की सोच रहे हैं। थोड़ा इंतजार कीजिए, आपकी कल्पना हकीकत बनने वाली है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि वे एक ऐसा कंप्यूटर विकसित कर रहे हैं जो मानव मस्तिष्क को पढ़ सके।
इंटेल कॉरपोरेशन की एक टीम ऐसी ही एक नई प्रौद्योगिकी पर काम कर रही है जो आपकी सोच को पढ़ सके। इस श्रेणी के मौजूदा कंप्यूटर में स्क्रीन पर कर्सर को नियंत्रित करने के लिए शारीरिक हरकत करने जैसा सोचने की जरूरत होती है लेकिन जिस कंप्यूटर को विकसित करने की बात हो रही है वह इससे अलग होगा।
द टेलीग्राफ के अनुसार वास्तव में वैज्ञानिक शब्दों के लिए दिमाग में होने वाली हलचल का विस्तृत मैप तैयार कर रहे हैं जिसे किसी ऐसे व्यक्ति की दिमागी हलचल से मिलान किया जाएगा जो कंप्यूटर का इस्तेमाल कर रहा है। इससे मशीन वह शब्द तय कर लेगी जिसे सोचा जा रहा है।
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि कंप्यूटर समान मस्तिष्क पैटर्न के आधार पर शब्दों को पहचान सकते हैं और उन भेदों को भी समझ सकते हैं जिससे यह पता चल सकेगा कि वस्तुत: वह शब्द क्या है।
इंटेल लेबोरेटरीज के एक वरिष्ट शोधकर्ता डीन पोमेरलो ने बताया कि मौजूदा समय में दिमागी हलचल का विस्तृत ब्योरा लेने के लिए अस्पतालों में प्रयोग होने वाले मैग्नेटिक रेजोनेंस स्कैनर जैसे उपकरणों की जरूरत होती है।
उन्होंने बताया कि कंप्यूटर बीस सवालों के एक रूप का इस्तेमाल करेगा और उसकी मदद से सही शब्द तक पहुंचेगा। उदाहरण के लिए जब कोई ऐसी संज्ञा के बारे में सोचता है जिसका कोई भौतिक आकार है तो दिमाग के मोटर कॉरटेक्स में हलचल होती है। यह दिमाग का वह क्षेत्र है जो भौतिक हलचल को नियंत्रित करता है। खाने-पीने के शब्द जैसे सेब दिमाग के उस हिस्से में हलचल पैदा करते हैं जो भूख से जुड़े होते हैं। लिहाजा, कंप्यूटर सोचे जाने वाले हर शब्द को खास पहचान दे सकेगा और तुरंत उस पर प्रतिक्रिया दे सकेगा।
उन्होंने कहा कि अभी वे उन हलचलों को मैप कर रहे हैं जो अलग-अलग शब्दों को सोचते हुए सामान्य दिमागों में होती हैं। इसका अर्थ यह है कि आप बस सोच कर ही कोई पत्र लिख लेंगे, अपना ई-मेल अकाउंट खोल लेंगे और गुगल पर सर्च कर सकेंगे।
इंटेल लेबोरेटरीज के निदेशक ने साथ में यह भी कहा कि इसमें निजता या गोपनीयता का प्रश्न उठ सकता है लेकिन हम उन्हें सुलझा लेंगे। इतना जरूर है कि लोग की-बोर्ड और माउस के इस्तेमाल तक ही सीमित नहीं रहेंगे।

फिलहाल आप ब्लॉग 4 वार्ता  के इस मंच पर आज की ब्लॉग वार्ता पढने की सोच रहे होंगे .......... है ना ..........तो लीजिये पेश है आज की ब्लॉग वार्ता !

सादर आपका 
शिवम् मिश्रा
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एक डायरी का दर्द... :- ना जाने कोई !

बैंगलोर, दिल्ली , पटना...राखी :-  और क्या ?

पीपली [लाइव]: भारतीय राजनीति पर एक शोधपत्र :- दाखिल किया कि नहीं ?

रिश्वतखोरी और गुलामी को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त हो चुकी है :- हाँ काफी दिन हो गए इस बात को !

अंग्रेजों ने भारत को जीता नहीं था, भारत तो उन्हें सेंत-मेंत में ही मिल गया था :- किस्मत अच्छी थी सालो की !!

प्याज चौदह रूपये किलो और आलू दस :- अरे साहब, फिर भी गनीमत है ......आगे दिन बहुत बुरे आने वाले है !

वाइपर के साथ खतरनाक मुठभेड़। -पी0 एन0 सुब्रमण्यम :- अरे बाप रे !

आज ३०० वीं पोस्ट और बहिनें राखी पर बाजार से खरीदी पायरोफिलाइट की मिठाइयां अपने भाईओं को खिलाने से बचें ... :- ३०० वी पोस्ट की बधाइयाँ !

भारत से वापसी---मैं जीवित हूँ ! ---दिव्या :- भगवान् का शुक्र है !

अनु शर्मा से मिलने आ रहा हूं : मन मेरा प्रसन्‍न है # कहां जा रहा हूं मैं (अविनाश वाचस्‍पति) :- मेरे घर के आस पास !!

न्यूयार्क – ४ : तुलसी इस संसार में भांति भांति के लोग … :- सत्य वचन महाराज !

एक सफ़हा :- पलट कर हमने ......लाखो बातों की सफाई दी है !!

फिर कहाँ संभव रहा अब गीत कोई गुनगुनाऊँ :- क्यों क्या हुआ ?

वामपंथी सेकुलरिज़्म का पाखण्ड और मीडिया का पक्षपाती रवैया फ़िर उजागर (सन्दर्भ : अब्दुल नासिर मदनी की गिरफ़्तारी) :- यह तो होना ही था !

ई मेल व मोबाइल युग में भी बिछुड़ते सगे सम्बन्धी और आवश्यकता डाक-पते की.......................घुघूती बासूती :- सही कहा आपने !

राह दिखाओ मैनपुरी के युवाओं को.... :- ज़रा मुल्क के रहबरों को बुलाओ !

एसो के सावन मे जम के बरस रे बादर करिया :- सही काहे भईया !

अब तो उल्लू बैठ गया है पेंङ की हर डाल मियां :- डंडा ले कर भागा ना दो !

अलविदा ब्लागिंग ------------------- शाहनवाज़ सिद्दीकी :- अरे,...... पर क्यों भाई जान ??

क्या आपके ब्राउज़र के रिटायर होने का वक्त आ गया है? :- पता नहीं .......देखना पड़ेगा !

हम तो झंडू बाम हुए ... बाबू साहिब तेरे चक्कर में :- तो चक्कर में पड़े ही क्यों ?

शाख से तो ज़र्द पत्ते खुद गिरा करते हैं :-  दोष आंधी को फिर क्यों दिया करते है ?

आओ बात करें बस हिन्दुस्तान की :- जरूर क्यों नहीं !

“मैंने बहुत निभाया उनको” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”) :- जी किन को ?

कुकिंग ऑयल के बारे में जानते हैं? :- ज्यादा तो नहीं.....आप बताइए !

क्‍या टेलीविजन के माध्‍यम से सिर्फ धर्म और ज्‍योतिष ही अंधविश्‍वास फैला रहे हैं ?? :- नहीं जी और भी बहुत लोग है !

कीरो ने देखा मन्त्रों का प्रभाव :- कैसे ?


या फिर बाज़ार में अपने बेटे की कीमत लगाइए ..........! :- १०,००,०००.............. एक ...........दो ........तीन ....!!!

15 अगस्त /  26 जनवरी को झण्डा फहराते समय :- क्या ना करें !

चुप, वरना … :- क्या ??

तोर बिन सजनी नींदे नई आवय, कईसे गुजारंव रात ..... :-  तारे गिन गिन !

यानी जब तक जिएंगे यहीं रहेंगे ! :- कहाँ ?

एक नदी की समुन्द्र को ललकार :-  होने दे अब यलगार !!

मेरे भईया से कहना, बहना याद करे :- आज का दिन ही ऐसा है !

बहिन के प्यार को क्यों भूले ?? - सतीश सक्सेना :-  है कोई जवाब ??

10 करोड़ के मुआवजे पर 6 लाख करोड़ का धंधा :- गन्दा है पर धंधा है यह !

हैं तन्हाँ, तन्हाँ.... :- कौन ......कहाँ ??

राखी पर कुछ प्रेमपत्र - बहनों के :- किस्मत वाले है आप !

रक्षा सूत्र... कैसे-कैसे.... :- कैसे ....... कैसे ?? 


अब फिर वही आदत अनुसार .........अपनी डफली आप बजाता हूँ और अपनी पोस्ट का लिंक दिए जाता हूँ .......

इंटरनेट से लोगों की पहचान कर लेगा यह सॉफ्टवेयर ! :- है ना कमाल !!
 
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आज की ब्लॉग वार्ता यहीं तक ......अगली बार फिर मिलुगा एक और ब्लॉग वार्ता के साथ तब तक के लिए आज्ञा दीजिये !


 आप सभी को राखी के पावन पर्व पर, पूरे वार्ता दल की ओर से  बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएं !!

जय हिंद !!

सोमवार, 23 अगस्त 2010

एक चौंकाने वाली खबर-फटा सुथन्ना---ब्लॉग4वार्ता-----ललित शर्मा

नमस्कार, राखी का पावन त्यौहार आ चुका है और बाजार में एक बार फ़िर से सब चाईना-सब चाईना का माल छाया हुआ है। अब बहने भी भाईयों की कलाई पर चीन की बनी राखियाँ बांधेगीं। बाजारवाद ने भारतीय बाजार पर खुले आम हमला कर रखा है। जहां भारत में 60 करोड़ बेरोजगार हैं,वहीं विदेशों का माल भारत के बाजारों पर हमला करके बेरोजगारों की संख्या में वृद्धि कर रहा है। भारतीय माल से कम कीमत पर चीन का माल बिक रहा है। हमें भी मुक्त व्यापार संधि का फ़ायदा उठाने की ओर ध्यान देना चाहिए। अब चलते हैं आज की ब्लॉग4वार्ता पर, सैर करते हैं ब्लॉग नगरिया की और पढते हैं कुछ उम्दा चिट्ठे......

वार्ता प्रारंभ करते हैं स्मिता जी के ब्लाग अस्मिता से जहां वे कह रही हैं कि टप टप बरसा पानी और ,करते रहे हम कमेंट्री ,,वाह वाह.आज इंदिरा गाँधी स्टेडियम में जिम्नास्टिक का टेस्ट इवेंट शुरू हुआ.हम बहुत तैयारी के साथ बैठे टीवी कमेंट्री करने ..सुरक्षा जांच वालो ने हमें पानी की बोतल नहीं लाने दी.हमारा सेब भी वापिस करवा दिया ,हमने ...राजु बिंदास गजब कह रहे हैं ‘लफंगे’ परिन्दे ब्लॉगरी के बाजीगरों के करतब देख ये कहावत याद आती है- गए थे हरिभजन को ओटन लगे कपास. ब्लॉगर की प्रोफाइल में झांकना ही पड़ता है कि आखिर इस मदारी की असलियत क्या है. कई टॉप हिन्दी ब्लॉगरों की प्रोफाइल देखी तो..

स्वराज्य करुण दिल की बात से एक एक चौंकाने वाली खबर दे रहे हैं पढिए आप भी छोटे परदे की चकाचौंध से चकित कुछ लोगों के लिए यह एक चौंकाने वाली खबर हो सकती है कि दर्शकों को श्रोताओं में बदलने के लिए रेडियो फिर आ धमका है . दूरदर्शन के सादगीपूर्ण ,लेकिन संवेदनशील कार्यक्रमों से परे अ...अब आगे चलते हैं वाणी जी के दुआरे यहां देखिए सर्कस की कलाबाजियांअभी कुछ दिनों पहले स्कूल से लौटी बेटी बड़ी मायूसी से बैग पटकती हुई बोली ," आपको पता है स्कूल की ओर से हमें कहाँ लेकर जाया जा रहा है ...सर्कस में ..." "अच्छा !" ...मेरे आश्चर्य और ख़ुशी को नजरंदाज़ करते हुए...

पद्मसिंग एक नया आईडिया लेकर आए हैं, आपने कविता सुनी, गजल सुनी अब रोना हज़ार रोते हैं (व्यंहज़ल) सुनिए--लिखते लिखते सोच रहा था ये क्या लिख रहा हूँ मै ? गज़ल का शिल्प, हास्य का रस, और व्यंग्य की तासीर का मिलाजुला स्वरुप देख कर मन मे आया कि इसे क्या कहूँ .. और फिर शायद एक नयी विधा या शब्द का जन्म हुआ ऐसा लगत...हमारे राजकुमार भाई बेनामियों से हैं हलाकान परेशान ये पतित पावन है या रावण ... लेकिन ये बेनामी भी बड़े बेशर्म हैं  कि इतनी फ़जीहत के बाद भी नहीं मानते--हमारे ब्लाग में कोई बंदा काफी समय से पतित पावन के नाम से फर्जी आईडी बनाकर कुछ भी अनाप-शनाप टिप्पणियां कर रहा है। इनकी टिप्पणियों से ही परेशान होकर हमें मॉडरेशन का सहारा लेना पड़ा। इसके पहले भी कई ऐसे बेशर्...

इधर एक राजकुमार कह रहे हैं अखबार लाइन की कुछ मजेदार बातेंमित्रों आज मैं आपको अखबार लाइन की कुछ मजेदार बातों के बारे में बताने जा रहा हूं। इन मजेदार बातों से आप अपना मनोरंजन तो कर सकते हैं लेकिन यह सोचने के लिए भी स्वतंत्र है कि पीपली लाइव में जो कुछ दिखाया गया ...स्वतन्त्रता का मतलब हरचरना का फटा सुथन्नाआईये इस परिचर्चा को आगे बढाते हैं और हिंदी के वेहद सक्रीय चिट्ठाकार लोक्संघर्ष सुमन जी पूछते हैं क्या है उनके लिए आज़ादी के मायने ?* 

पता नहीं बेटा...पता नहीं बेटा... बेटा- संगठन चुनाव में मोती लाल वोरा ने बाकी कांग्रेसियों को चारोखाने चित कर दिया। पिताजी- हां बेटा। वोरा जी के सामने बाकी कोई लगते कहां है। सालों से उन्हीं का कब्जा है बेटा- तो क्या छत्तीसग...बेलगाम लोकशाही पर अंकुश ज़रूरी?अरविन्द-टीनू जोशी: कुल संपत्ति- 300 करोड से अधिक,* *उप्र के पूर्व सीएस अखंडप्रताप सिंह: संपत्ति-120 करोड़,* *उप्र के सैंकडों आईएएस भ्रष्ट, सीवीसी ने जारी की महाभ्रष्ट आईएएस की सूची.....यह ...

चाहिए आशीर्वाद बेटी के लिएश्री आत्मवल्ल्भ जैन कन्या महाविद्यालय के छात्र संघ चुनाव में स्वाति गोयल को महासचिव चुना गया है। दस साल पहले स्थापित इस कॉलेज में १४०० से अधिक छात्राएं हैं। कॉलेज में चुनाव पहली बार हुए। स्वाति गोयल पुत्र...चल रहें दे !बच्चों की छुट्टियाँ ख़त्म होने को आ गईं हैं और उनका सब्र भी ...ऐलान कर दिया है उन्होंने कि आपलोगों को हमारी कोई परवाह नहीं बस अपने काम से काम है. हम सड़ रहे हैं घर पर .बात सच्ची थी तो गहरा असर कर गई .इसलिए....

गामा के साथ दिव्य आत्माएं कुश्ती लड़ती थीं विश्व विजेता गामा एक ऐसा नाम जो किसी परिचय का मोहताज नहीं है जो जीतेजी किंवदन्ती बन गया था। इतना बड़ा पहलवान होने के बावजूद वह एक सीधा-साधा, सरल ह्रदय, सादगी पंसद, घमंड से कोसों दूर रहने वाला तथा नियमों का ...बोकारो में भयमुक्‍त होकर जीने में मुझे बहुत समय लग गए !!अभी तक आपने पढा .... वैसे तो बोकारो बहुत ही शांत जगह है और यहां आपराधिक माहौल भी न के बराबर , कभी कभार चोरी वगैरह की घटनाएं अवश्‍य हुआ करती हैं , जिसके लिए आवश्‍यक सावधानी बरतना आवश्‍यक है। यहां किसी क्‍वा...

आजकल तो ब्लागजगत में हास्य रस की ही धूम है......(बस यूँ ही)आजकल ब्लागजगत में जिस रस की पोस्टें सबसे अधिक लिखी जा रही हैं, वह है हास्य-रस . अब यह बात दूसरी है कि लिखने वाला स्वयं उसे करूण या वीर रस समझता हो. लेकिन जब उनकी शैली हास्यास्पद लगे तो तब इन्हे हास्य रस के...यह मुसीबते अकेले क्यो नही आती .यह मुसीबते एक साथ ही क्यों आती है अकेले क्यों नहीं . पिछले कई दिनों से कई मुसीबते एक साथ सामने आ गयी . अभी कुछ नए और पुराने व्यापार के सिलसले में बिजी हूँ . तभी अचानक मेरे जीजा जी के पिताजी को हार्ट अटैक ह...

तन्हाई, रात, बिस्तर, चादर और कुछ चेहरे,....(आज कुछ लिखना संभव नहीं हुआ, कोशिश की लेकिन बात बनी नहीं..इसलिए आज पेश-ए-खिदमत है एक पुरानी कविता...) तन्हाई, रात, बिस्तर, चादर और कुछ चेहरे, खींच कर चादर अपनी आँखों पर ख़ुद को बुला लेती हूँ ख़्वाबों से...यह मुसीबते अकेले क्यो नही आती .यह मुसीबते एक साथ ही क्यों आती है अकेले क्यों नहीं . पिछले कई दिनों से कई मुसीबते एक साथ सामने आ गयी . अभी कुछ नए और पुराने व्यापार के सिलसले में बिजी हूँ . तभी अचानक मेरे जीजा जी के पिताजी को हार्ट अटैक ह...

सड़क मार्ग से महाराष्ट्र: शिरड़ी वाले साईं बाबा के दर से लौटा मैं एक सवालीभोर की पहली किरण फूटने के साथ ही मैंने एक अँगड़ाई ली, इग्नीशन घुमाया और चल पड़ा भुसावल, जलगाँव होते हुए धुलिया की ओर। *हम रास्ता भटक गए *थे. जाना था बुलढाना से दक्षिण-पश्चिम होते हुए अजंता-औरंगाबाद लेकिन आ..गीली चीनीमाँ की रसोई में चीनी गीली रहती थी और कह जाती थी बहुत कुछ चीनी का गीला होना ए़क अर्थशास्त्र की ओर करता है इशारा जहाँ मित्व्ययिता से गुजारी है पीढ़िया जिसकी मिसाल होती हैं माएं वर्षो से नहीं बदल सक...

वार्ता को देते हैं विराम--आप सभी को ललित शर्मा का राम-राम..........

रविवार, 22 अगस्त 2010

"अहेसान मेरे दिल पे तुम्हारा है दोस्तों ...... यह दिल तुम्हारे प्यार का मारा है दोस्तों !!" -

प्रिय ब्लॉगर मित्रो,
प्रणाम !

आज सप्ताहांत पर सुबह-सुबह सोचा कि इतने दिनों से ब्लॉग 4वार्ता  के इस मंच पर ब्लॉग वार्ता लिख रहे हैं, इसका अलेक्सा ट्रैफ़िक रैंक कैसा है, देख लिया जाए।

जब ब्लॉग4वार्ता  का अलेक्सा रैंकिंग देखा तो अपने ब्लॉग जगत के अन्य ब्लॉग चर्चा के मंचों की अलेक्सा रैंकिंग देखने की भी इच्छा हुई, सो उनकी भी अलेक्सा रैंकिग देख ली।

अलेक्सा रैंकिग देखने का समय दिनांक 22/08/2010 भारतीय समयानुसार प्रात: 9.10 से 9.22 था, अलेक्सा रैंकिग में सबसे कम संख्या को उम्दा माना जाता है। इसके मैने स्क्रीनशाट लिए...... जो कि आपके लिए प्रस्तुत हैं।

इसमें ब्लाग4वार्ता  का रैंक सबसे अच्छा है अर्थात चर्चाओं में सबसे टॉप पर है। 

(चित्र पर चटका लगा कर देखें।)

ब्लॉग4वार्ता --448,142  इंडिया रैंक 39,831 


चिट्ठा चर्चा--490,768 इंडिया रैंक 62,049 


चर्चा मंच--635,912 इंडिया रैंक 100,546


ब्लॉग चौपाल--1,447,150 इंडिया रैंक-123,88०


 अलेक्सा रैंकिग पाठकों की आमद पर ही तय होती है। जो कि आपके (पाठकों) के बिना संभव नहीं था। 5 माह के सबसे कम समय मेंब्लॉग 4 वार्ता   को आपका (पाठकों का) जो अपार स्नेह प्राप्त हुआ है, उसके लिए हमारा पूरा ब्लॉग वार्ता दल आप सब पाठकों का आभार व्यक्त करता हैं और आशा करता हैं कि भविष्य में भी ब्लॉग 4 वार्ता  को आप सब का इसी तरह से सहयोग एवं स्नेह प्राप्त होता रहेगा।

रफ़ी साहब के गाये हुए एक गाने के कुछ बोल याद आ रहे है............"अहेसान मेरे दिल पे तुम्हारा है दोस्तों  ...... यह दिल तुम्हारे प्यार का मारा है दोस्तों ...........यारो ने मेरे वास्ते क्या कुछ नहीं किया .........सौ बार शुक्रिया ...... अरे सौ बार शुक्रिया !! "
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एक बार फिर इस प्यार के लिए आप सब का बहुत बहुत आभार और धन्यवाद !

सादर आपका

शिवम् मिश्रा 

वेद सार और जिंदगी के सबक से गांव छोडब नाहिं तक .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

आप सबों को संगीता पुरी का नमस्‍कार ... हिंन्‍दी चिट्ठा जगत में चिट्ठों की संख्‍या 15,000 तक पहंचनेवाली है , प्रतिदिन 10 से 20 चिट्ठे इसमें जुटते जाते हैं , एक से एक धुरंधर लिक्‍खाडों द्वारा , सप्‍ताह भर में नए जुडे चिट्ठों में से कुछ , जो मुझे अच्‍छे लगें , आपके सम्‍मुख प्रस्‍तुत है ......
 
तुम जीवन के आधार प्रभो !
तुम सत्त चित्त आनंदरूप
शत शत करते आभार प्रभो !
तुम निर्माता इस सृष्टि के
सूरज के तुम , तुम वृष्टि के
तुम शीतल हो ,तुम तेज प्रखर
कण कण में हो साकार प्रभो !

जिंदगी के सबक सिखा रहे हैं आचार्य केशव जी ....
एक बार मगध के महामंत्री चाणक्य राजकाज संबंधी परामर्श के लिए सम्राट चंद्रगुप्त से मिलने जा रहे थे।रास्ते में उनके पांव में कांटा चुभ गयाऔर उनके मुंह से जोर से चीख निकल गई।उन्होने झुककर उस    कंटीले पौधे को देखा ,फिर कुल्हाडी मंगवाई और अपने हाथेों से इस पौधे को उखाड कर फोंक दिया।उखाड कर फेंकने के बाद उन्होने उस पौधे की जड़ों को भी जमीन से निकाला औऱ उन्हें जला दिया ।
मुझे घर जाने से लगता डर,
थोडा सा ही सही ज़हर दे दो.
बाबा की काठी बूढी हुई...
वो दर्द छुपायें...खुश होकर.
माँ की आँखों मे सपने दिखें...
उन सपनो से बचता मै छुप-छुप कर.
मुझे घर जाने से लगता डर...
गुड़ की डली- सा मीठा बचपन
चला गया
पर अपनी कच्ची मिटटी के
गुल्लक से
कुछ मीठी यादों के सिक्के
डाल गया
मेरी जवानी के खजाने में ।
वो प्यारा बचपन ,
जब चाकलेट , टाफी ,मिठाई ,
और खिलौनों का ढेर था ,
माँ की गोद ,
राजा- रानी और परियों की कहानी में
मेरी दुनिया बसती थी तब ,
मगर अब बड़ा होने पर
मेरी दुनिया ही बदल गई है ।
आज देश चाहे जितनी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है....
क्या दुनिया में ऐसा भी कोई देश है जहां इतना गेहूं सड़ रहा है
मै आपसे और अपने आप से पूछता हूं ये सवाल, खेलों के नाम पर छली गई आम जनता की खाल
कॊमनवेल्थ के नाम पर जितना उड़ाया गया सरकारी माल, तो गेहूं छुपाने में क्यों रहे हम कंगाल

भीखा सिंह भिखारी के भेष में वही कर रहा है जो आम लोग भिखारी करते हैं। मतलब भीखा सड़कों पर कभी भगवान के नाम पर, तो कभी अल्लाह के नाम पर, या आम लोगों के पूज्य...(जैसे कि लोगों का भेष दिखता है) के नाम पर कुछ रुपए मांग रहा है। लेकिन बड़ी बात ये है कि भीखा भीख क्यों मांग रहा है?

1. हमारे वचन चाहे कितने भी श्रेष्ठ क्यों न हो, परन्तु दुनिया हमे हमारे कर्मो के द्वारा पहचानती है.
2. यदि आप मरने का डर है तो इसका यही अर्थ है की आप जीवन के महत्व को ही नहीं समझते.
3. अधिक सांसारिक ज्ञान अर्जित करने से अंहकार आ सकता है, परन्तु आध्यात्मिक ज्ञान जितना अधिक अर्जित करते है उतनी ही नम्रता आती है.
4 .वही सबसे तेज चलता है, जो अकेला चलता है।
5. प्रत्येक अच्छा कार्य पहले असम्भव नजर आता है।
व्याकुल मन, अश्रु भरे नयन,
किनारे पर बैठा देख रहा दुर्दशा,
पथ में रेत, टीले में झीण किनार,
बेसहारा पुत्र, स्पर्श को दर्शन दुर्लभ,
मृत श्वांस, शहर श्मसान।

 दिव्‍यांशु भारद्वाज की पगडंडी ........
कहते हैं कि शादी-ब्याह कोई गुड्डे-गुड़ियों का खेल नहीं होता है। लेकिन आज कल तो यह खेल-तमाशा ही बनता जा रहा है। कुछ लोगों ने इसे खेल बना दिया है। इनके लिए शादी और खेल में ज्यादा अंतर नहीं है। खेल की तरह ही इसमें पैसा है, मनोरंजन है और ग्लैमर भी है। इसमें भी मीडिया कवरेज है और खेलों की तरह मैच फिक्सिंग का खतरा भी। 

मनीष मेहता जी के साथ .... आओ लडें .....
मित्रों एक बार आज़ादी आई और मेरे जेहन में कईं सवालात छोड़ गई.....कितने आज़ाद है हम ..??  क्या वाकई में आज़ाद है हम..??
 कल घर से ज्यूँ ही बाहर निकला चंद कदम चलने के बाद सड़क पै पहुचा तो ... तो एक लगभग १०-१२ साल का लड़का मिला .तन पै एक फटा सा कपडा...हाथ पै तिरंगा लिए....बोल रहा था "साहब ले लो .ले लो न साहब..." देख कर सोचने को मजबूर हो गया कि क्या वाकई में हमें आज़ाद हुए ६४ वर्ष हो गये है..?? क्या ये बच्चा भी आज़ाद है...??
कुछ हुआ और शायरी हो गई


"हम गर जीते नही आप की खतीर
पर एक बार मर तो सकते हैं
बातें ना हो आपसे गम नही
आपको याद कर तो सकते हैं "
आज स्वतंत्रता दिवस की ६४ वी वर्षगांठ पे मै तरुण आप सभी मित्रों को हार्दिक बधाइयाँ देता हुए कुछ सवाल आप सब से पूछना चाहता हू जो मेरे जेहन में काफी दिनों से कौंध रहे है.
मित्रों क्या हम सही मायने में आजाद हो गए है? क्या है आज कल की युवा पीढ़ी के लिए आजादी के मायने? बस एक दिन का अवकाश या और कुछ?
मीडिया के लोकलाइजेशन के नुकसान : पत्रकारिता के क्षेत्र में तेजी से आए बदलाव हतप्रभ करते हैं. पिछले 20-25 सालों में काफी कुछ बदल गया है. खबरों का अंदाज, तेवर, परिदृश्य, फलक... सब बदला है. बानगी देखिए. नीचे दो खबरें दे रहा हूं. एक वर्ष 1974 में प्रकाशित है तो एक इसी महीने. दोनों के फर्क को महसूस करिए....

डॉ चंद्र प्रकाश जी की पहचान .....
जयप्रकाश जयप्रकाश रट रट के लोग   यहाँ देश के प्रधान और मंत्री बन आये  थे
साथ साथ चीखते थे क्रांति क्रांति उनके वे चौहत्तर में क्रांति का शंख जो बजाये थे
समझी थी जानता कुछ भला करे देश का ये इसीलिए वोट उनको ही दाल आये थे
पर पता चला की एक सत्ता को हटा के यारो सत्तालोलुपो  की पूरी फ़ौज ले आये थे

लोकतंत्र लोकतंत्र की तों बात सब करे पर लोकतंत्र का मतलब ना कोई जानता

लोकतंत्र नही ये तों भीडतंत्र है यारो डंडे गोली बिना  यहाँ कोई बात नही मानता
समझे है अर्थ  सब जो चाहे सो  करे चाहे  कोई मारे और  चाहे  कोई  मर जाये
लोकतंत्र वहा नही चल सकता है  देश जो अधिकार   और कर्त्तव्य ना पहचानता
देश की राजकुमारी का स्वयंवर था रचा
नौजवां देश के कवियों में था कुछ शोर मचा
ये शर्त थी की जो कविता को वो पसंद करे
उसी कविता के रचयिता से वो शादी भी करे
और तारीफ जो पसंद उसे आई नहीं
कवि समझे की कभी ज़िन्दगी थी पायी नहीं
“किसन !—” बड़े साहब ने चपरासी को घूरते हुए पूछा, “तुम मेरे कक्ष से क्या चुराकर ले जा रहे थे?”
“ कुछ नहीं साहब।”
“झूठ मत बको!—” बड़े साहब चिल्लाए, “चौकीदार ने मुझे रिपोर्ट किया है, तुम डिब्बे में कुछ छिपाकर ले जा रहे थे—क्या था उसमें? सच-सच बता दो नहीं तो मैं पुलिस में तुम्हारे खिलाफ—”
“नहीं—नहीं साहब! आप मुझे गलत समझ रहे हैं—” किसन गिड़गिड़ाया, “मैं आपको सब कुछ सच-सच बताता हूँ—मेरे घर के पास सड़क विभाग के बड़े बाबू रहते हैं, उनको दीमक की जरूरत थी, आपके कक्ष में बहुत बड़े हिस्से में दीमक लगी हुई है । बस—उसी से थोड़ी-सी दीमक मैं बड़े बाबू के लिए ले गया था। इकलौते बेटे की कसम !—मैं सच कह रहा हूँ ।”

हमारे यहां छात्र राजनीति की दो धाराएं रही हैं। आजादी से पहले वाली और आजादी के बाद वाली। आजादी से पहले हमारे देश में छात्र राजनीति की महत्वपूर्ण शुरूआत होती है 1921 में, जब महात्मा गांधी ने छात्रों से कहा, 'स्कूल और कॉलेज का बहिष्कार करो।' उस समय असामान्य परिस्थिति थी और आजादी की लडाई चल रही थी। ज्यादातर लोगों ने गांधीजी के आह्वान को सही माना, लेकिन तब भी एनी बेसेंट ने इसका विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि छात्रों को सक्रिय राजनीति में शामिल न करके हमें कोशिश करनी चाहिए कि वे राजनीति के बारे में रूचि रखें और अपनी जानकारी बढाएं।
और ये हैं
सरकार के द्वारा बनाये हुए पानी के हैण्ड पम्प
हर सड़क पर १००- २०० मीटर की दूरी पर बनाये गए हैं ...
जो की खुसी की बात है .....
गृह मंत्री महोदय ने घोसदा की है किअगेर कोई नाक्स्सल्वाडियो का समर्थन करता पाया जायेगा तो उसे गर्कनुनी गतिविधि निरोधक कानून १९६७ के अनतेरगत १० साल कि सजा हो सकती है.चिदुम्बेरुम जी ने जनता को यह भी सूचित किया है कि देश के २२० जिलो यानि ४०%हिस्से में विकास के अभाव के लिए आदिवासी जिम्मेदार है.अगेर यह दावा वास्तव में सही है तो सर्कार के दमन या ओप्रतिओं ग्रीन हंट का औओच्त्य समझ में अत है। -अज हालत यह है कि चानेल वालो ने अभिनेताओ और श्र्ळीटीश्र जैसे लोगो द्वारा बहस को सतही तरह से सिर्फ हिंसा और अहिंसा का मुद्दा बना दिया है और इन सबके बीच आदिवासियो और हसिया के लोगो के विरुध सरकार द्वारा पिचले ६ दशक से जरी हिंसा,जर जबर्दस्ती लूट के मुद्दों को ओझल केर दिया गया है.
वो देख कर मुस्कराये नहीं,
कोई बात नहीं

नाव मंझधार मैं फँसी है,

कोई बात नहीं है

दिल उनको दे दिया,वो लौटा दे,

कोई बात नहीं

मैं उनको चाहता हूँ,वो ना चाहे,

कोई बात नहीं
बहुराष्टïरीय कंपनियों द्वारा विकसित दवा के मरीजों पर प्रयोग (ड्रग ट्रायल) से राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 51 रोगियों पर साइड इफेक्ट हुए हैं। ये मरीज पिछले पांच वर्ष में कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों में इलाज के लिए गए थे।
यह जानकारी विधानसभा से जारी एक दस्तावेज में उपलब्ध है। चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री महेंद्र हार्डिया ने विधानसभा में यह जानकारी दी थी। उन्होंने यह भी बताया था कि पांच वर्ष में 2365 रोगियों पर ट्रायल हुआ। इसमें 1644 बच्चे और 721 वयस्क हैं। 
सदियों से कृषि प्रधान देश के तौर पर जाने-जाते रहे देश की सबसे बड़ी विडंबना यही रही है कि जब वोटों की बात आती है तो पूरी की पूरी राजनीति किसानों और गरीबों के नाम पर की जाती है, लेकिन जब नीतिया बनाकर उसे लागू करने का वक्त आता है तो जनता के जरिए चुनी गई अपनी लोकतात्रिक सरकारें भी किसानों के हितों की अनदेखी करने लगती हैं।
मिलते हैं अब अगले सप्‍ताह .. तबतक के लिए शुभ विदा .. 


शनिवार, 21 अगस्त 2010

कामवालियां बनाम घरवालियाँ - बीमा कब कर रहे हैं - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो ,
प्रणाम !

आप सब को बहुत बहुत बधाइयाँ ..............हो गए हैरान ...........मालुम था मुझे ..............अभी बताता हूँ कि बधाइयाँ किस बात की दे रहा हूँ  |

लीजिये आप खुद ही पढ़ लीजिये :- 

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सांसदों के मूल वेतन में तीन गुना वृद्धि करते हुए उसे 16 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये करने के साथ अन्य भत्तों को भी दोगुना करने को अपनी मंजूरी दे दी।
इस मुद्दे पर मंत्रियों के बीच मतभेदों को लेकर ऐसी अटकलें लगाई जा रही थी कि सांसदों के वेतन में वृद्धि संबंधी फैसला आने में देर होगी लेकिन आज कैबिनेट ने सांसदों का मूल वेतन 16 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये प्रति माह करने को अपनी मंजूरी दे दी।
हालांकि यह वृद्धि संसदीय समिति की सिफारिशों से काफी कम है जिसने कहा था कि सांसदों को सरकारी सचिवों से अधिक वेतन मिलना चाहिए क्योंकि वे वरीयता क्रम में उनसे ऊपर हैं। समिति ने इसे बढ़ाकर 80001 रुपये करने की सिफारिश की थी।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि सांसदों को प्रति माह मिलने वाले कार्यालय खर्च की सीमा को भी बढ़ाकर 20 हजार रुपये से 40 हजार रुपये कर दिया है और साथ ही निर्वाचन क्षेत्र भत्ते को भी 20 हजार से बढ़ाकर 40 हजार रुपये कर दिया गया है।
निजी वाहन खरीदने के लिए सांसदों को मिलने वाले ब्याज मुक्त ऋण की सीमा को भी चार गुणा बढ़ाते हुए एक लाख से चार लाख रुपये कर दिया गया है।
सरकार ने सांसदों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों की रोड माइलेज रेट को भी 13 रुपये प्रति किलोमीटर से बढ़ाकर 16 रुपये प्रति किलोमीटर कर दिया है।
सूत्रों ने बताया कि सांसद या उनकी पत्नी अब चाहे जितनी बार प्रथम श्रेणी या एग्जीक्यूटिव श्रेणी में यात्रा कर सकेंगे। पेंशन लाभ को भी मौजूदा आठ हजार रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रति माह कर दिया गया है।

अब आप बोलेगे इस में हमारा क्या फायेदा है ............ज़रा बताइए फायेदा कैसे नहीं है ?? 

रोज़ रोज़ १० से ५ तक की नौकरी कर कितना कम रहे है आप ? आज की मौजूदा कीमतों के हिसाब से आपकी कमाई पूरी पड़ती होगी ऐसा मैं नहीं सोचता ( अगर मैं गलत हूँ तो आप को एक बार और बधाइयाँ | ) सो क्यों ना राजनीती में अपनी किस्मत आजमाई जाए !!  

एक बार अगर हम में कोई भी सांसद बन गया तो फिर तो भईया पांचो उँगलियाँ घी में .......सिर्फ़ अपनी ही नहीं आने वाली पुश्तो की भी ! क्यों गलत कह रहा हूँ ! सो मेरी मानिए आज से ही लग जाइये ............आईडिया बुरा नहीं है !!

चलिए जब तक आप इस आईडिया पर विचार करते है ........तब तक आपको इस ब्लॉग 4 वार्ता  मंच से आज की ब्लॉग वार्ता पढवा देता हूँ !

सादर आपका 


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हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग के आसाराम बापू कौन हैं ? :- बाई गौड़ की कसम हम नहीं है जी ! 



कामवालियां बनाम घरवालियाँ ... :- युद्ध हो रहा है क्या .........मतलब खाना गया !!




आज राष्ट्रिय रेडिओ दिवस -- समय ने इसका स्वरुप ही बदल डाला :- समय ने बड़े बड़े को बदल दिया तो यह क्या है जी ?

बीमा कब कर रहे हैं :- हम भी यही पूछते है !



इतिहास में घूमना :- पर इतिहास मत बन जाना !


बात का कच्चा भंडुआ, नेद की कच्ची छिनारी.. :- इसको देख लो बात समझ आ जाएगी सारी ! 

गिद्ध बैठे होंगे, प्रजातंत्र की डाल पर ! :- हर शाख पर उल्लू बैठा है .........अंजामे गुलिस्तान क्या कहिये !! 

लगवा/कटवा दो इण्टरनेट पिया :- क्यों पिया क्या आज कल दूरसंचार विभाग में है ?

किसी से प्यार करो पर विश्वास नहीं..... क्या संभव है ? :- सवाल ने तो विचार ही शुन्य कर दिए ......तो बोले क्या ??



मल्लू अंकल के साथ मल्लू आंटी भी...खुशदीप :- डबल धमाका :- एक पर एक मुफ्त .......मुफ्त....... मुफ्त ! 

पीपली [लाइव]: मीडिया का स्टिंग ऑपरेशन :- अरे, कौन काट लिया जो ऑपरेशन की जरूरत पड़ गयी ??


हरि मेहता - दीवानगी नाटक की :- है जूनून ......तो है मज़ा जीने में !  


एक बिहारी डकैत जो दिलों पर डाका डालता है :-  खतरनाक और संवेदनशील आदमी है भाई ........बच के रहियो !

खाली सा कुछ :- पर आखिर क्या ?

बूढी पथराई आँखें .....रानीविशाल :-  खट्टे मीठे अनुभवों से भरी हुयी !

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आज की ब्लॉग वार्ता बस यही तक अगली बार फिर मिलुगा एक और ब्लॉग वार्ता के साथ तब तक के लिए .................

जय हिंद !!

शुक्रवार, 20 अगस्त 2010

ब्लॉग गुरु की पाठशाला - पाठकों और टिप्पणियों के लिये क्या ये तरीका सही है - ब्‍लॉग4वार्ता - शिवम् मिश्रा


प्रिय ब्लॉगर मित्रो 
प्रणाम !

रुपये के प्रतीक चिन्ह के इस्तेमाल को लेकर उत्साह चरम पर है। मीडिया में तो इसका इस्तेमाल खूब हो ही रहा है, अब इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण बनाने वाली कंपनियां भी इस मामले में पीछे नहीं रहना चाहतीं। उनके लिए तो रुपये का प्रतीक चिन्ह फैशन सिंबल बन गया है। यही वजह है कि कंप्यूटर का कीबोर्ड हो या मोबाइल फोन का कीपैड, कंपनियों ने रुपये के प्रतीक चिन्ह को अलग जगह देने की कोशिशें तेज कर दी हैं।
देश की प्रमुख आईटी हार्डवेयर निर्माता टीवीएस इलेक्ट्रॉनिक्स ने 15 अगस्त को 'टीवीएस गोल्ड भारत' नाम से एक की बोर्ड लांच किया। इसमें पारंपरिक क्वेर्टी कीबोर्ड में दिए जाने वाले टैब बटन के ऊपर रुपये का प्रतीक चिन्ह दिया गया है। चेन्नई की इस कंपनी ने नए कीबोर्ड की कीमत 1,495 रुपये रखी है।
15 जुलाई को सरकार ने जब रुपये के प्रतीक चिन्ह को मंजूरी दी थी, तब विशेषज्ञों ने कहा था कि इसे कंप्यूटर में शामिल करना मुश्किल होगा। कंपनियों ने इस कठिन काम को एक महीने के भीतर ही कर दिखाया है। रुपये के प्रतीक चिन्ह का इस्तेमाल अब तक एक फॉन्ट को डाउनलोड कर किया जाता है। इसे फोरैडियन टेक्नोलॉजी ने लांच किया है, लेकिन यह पहली बार है जब कीबोर्ड में इसके लिए अलग जगह बनाई गई है।
रुपये के प्रतीक चिन्ह के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए लावा मोबाइल्स ने भी ऐसे ही प्रयास किए हैं। मोबाइल बनाने वाली इस देसी कंपनी ने अपने कीपैड में रुपये के प्रतीक चिन्ह के लिए अलग 'की' बनाई है। कंपनी ने इस मोबाइल फोन को 'बी5' नाम दिया है। बाजार में यह 4 हजार 400 रुपये में उपलब्ध है।
आप सब को एक काम की जानकारी तो दे दी ......................अब आप को सीधे लिए चलता हूँ आज की ब्लॉग वार्ता की ओर !  

ब्लॉग 4 वार्ता  मंच की यह १५९ वी ब्लॉग वार्ता होगी .........आशा है आप सब को यह वार्ता पसंद आएगी !

सादर आपका 

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कुम्भ के बिछड़े भाई-बहिनों का मिलन..-----दीपक मशाल :- मनमोहन देसाई की कोई नयी फिल्म है क्या ?



भला काहे देखें पीपली लाइव :- आइना देखने के लिए !





लघुकथा - धूलकण और बादल .... :- दोनों है अपनी पहेचान की खोज में ! 



न्यूयार्क : संवेदना उबाल पर हैं - एक मस्जिद यहाँ भी विवाद में है! :- बधाइयाँ जी बधाइयाँ ......वैसे खून कब बहेगा ?




पीपली [लाइव] :-  बिलकुल लाइव !




साकार सरासर और सरेआम :- बहुत कुछ हो गया !


धर्म में इतने अंधे कैसे हो जाते हैं माँ-बाप??? :- यहीं तो समझ के बाहर है !

अनाज सड़ने में यमराज का हाथ :- यमराज को भी सरकार ने मंत्री मंडल में शामिल कर लिया ??

आंत्रशोध पर शोध का परिणाम ---ओ आर एस --दस्तों की रामबाण दवा -- :- आभार जानकारी का !

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आज की ब्लॉग वार्ता बस यहीं तक .........अगली बार फिर मिलुगा एक और ब्लॉग वार्ता के साथ तब तक के लिए ......

जय हिंद !!

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