बुधवार, 9 फ़रवरी 2011

सखि बसंत मादक अधिक ,करू मैं कौन उपाय -- ब्लॉग4वार्ता ---- ललित शर्मा

नमस्कार, बसंत पंचमी धूम-धाम से मनाई गयी, कालोनियोँ में, गलियों में, सड़क पर शाम-रात को धमाल रहा। मुन्नी बदनाम का डांस गली-चौराहों पर चलता रहा। कुछ 60 से अधिक बसंत देखे लोगों ने अपना 30वां बसंत याद किया,  सरस्वती पूजन के साथ जगह-जगह कवि गोष्ठियाँ हुयी। जम कर बासंती कविता पाठ हुआ। कुल मिला कर धमाल चलता रहा। सभी ने अपने-अपने स्तर पर बसंत का स्वागत किया। ब्लॉग जगत भी बासंती रंगो से सराबोर था, फ़ेसबुकिए भी बसंत पर्व का आनंद उठा रहे थे। एक जगह गायत्री मंदिर में बेनर लगा था कि "यहाँ पर सोलह संस्कार सम्पन्न कराए जाते हैं, सम्पर्क करें-परिव्राजक"अब चलते हैं ब्लॉग4वार्ता पर और चर्चा करते हैं कुछ बासंती रंगों से सराबोर चिट्ठों की...



बिलकुल ऐसा ही चित्र हमने भी एक हैंचा था। आज आप इससे ही काम चलाईए, उस चित्र को फ़िर कभी लगाएगें। यहाँ पूछा जा रहा है हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग के शहंशाह कौन हैं? बताईए और भरपुर इनाम पाईए। स्वराज्य करुण लेकर आए हैं कुछ वासन्ती ख्वाब! पढिए बसंत ने क्या क्या ख्वाब दिखाए।इधर पता ही न चला बसंत तू कब आया ?ये भी गजब हुआ, कुन्डी तो खड़काना जरुरी थी, वरना भू राजस्व संहिता की धारा 250 के तहत कार्यवाही की संभावना प्रबल है।मेरी बहिन गार्गी चौरसिया के लिए वसंत- दीपक मशाल ने कई दिनों के पश्चात एक पोस्ट लिखी है। हम और बसंत दोनो इंतजार रहे हैं इनकी घर वापसी का। नहीं सांसद दिलीप सिंह जूदेव जी से सम्पर्क करना पड़ेगा। उन्हे ऑपरेशन करना आता है, घर वापसी के लिए, गाँव-गाँव कैम्प लगा कर ऑपरेशन करते हैं घर वापसी का।

कन्‍या लग्‍नवाले संभल जाएं, बसंत से अधिक मेल जोल उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। गुलाबी ठंड और गुलाबी धूप से बचें। संग छतरी लेकर चलें।क्या जाने मार डाले, ये दीवानापन कहाँ- दीवानों की मत पूछो, हां! नही तो, अदा जी से साभार---, जगदीश्वर चतुर्वेदी 'निराला' ,सरस्वती,बसंत और नए की तलाश में हैं। बताईए अब बसंत की राशन के कोटे में मिल रहा है और बसंत नेताओं के खाते में स्पेशल जमा हो गया है। कामरेड बसंत से मिलना है तो यहाँ  पर जाएं, वरना आम बसंत से ही काम चलाएं।बाहर वाले भी हमारी बेवकूफी पर हंसते होंगे वो तो हंसेगे ही, जब होली में दीवाली मनाओगे तो। त्यौहार भी मौसम के हिसाब से मनाना चाहिए :)

आ गई बंसत ऋतु की बहार, बहने लगी बासंती बयार, बुढे, बच्चे , जवान, लोग-लुगाई सभी बासंती बयार की चपेट में हैं, यह महामारी पूरे फ़ागुन तक रहने की तैयारी में है, अगर बचना है तो डॉ झटका से सम्पर्क करें, फ़िर न कहना कि चेताया नहीं।सरस्वती वंदना सुनना है तो यहाँ पर  जाईए, 61 बरस के जवान पूछ रहे  हैं  क्यों हृदय हर्षोल्लास से भर उठता है वसन्त पंचमी के दिन, अब इसका जवाब तो यही दे सकते हैं, अनुभव का सीधा प्रसारण करना चाहिए। सोनल रस्तोगी जी के ब्लॉग पर उम्दा बासंती रंग छाए हैं सखि बसंत मादक अधिक है।  एक नया  धांसू एग्रिगेटर आया है। जो सभी बंद एग्रीगेटरों की समस्या हल कर सकता, लागिन करें और अपने चिट्ठे का लिंक लगाएं।

बसन्त राजा फ़ूलइ तोरी फ़ुलवारी फ़लती-फ़ूलती रहे अवधी कै अरघान में, लखनऊ में हिन्‍दी ब्‍लॉगर और मीडिया का अद्भुत समन्‍वयन तथा इस पर ताऊ की "तपस्या" और भतीजे की चुटकी जबर रही। आज बसंत पंचमी पावन पर्व पर शुभकामनाएं और एक रचना से रुबरु होईए, मिसिर जी सुबे से ही फ़ोन टनटना रहे थे। बसंत ने रंग जमा दिया था। भांग के गोले का असर काफ़ी देर तक रहा। ड्राई-डे से हलकान, मित्र गोदियाल, हम तो पहले से ही इंतजाम करे रखते हैं। फ़िर ड्राई-डे हो या फ़्राई डे, यहां भर आया मेरा दिल गजल होकर, थोड़ी जगह खाली रखना था बसंत के लिए।सरस्वती मेरे भीतर वास करती है सच कह रहे हैं आप।

माँ शारदे तुझको नमन सरस्वती पूजन पर शुभकामनाएं ए जी......सुना कल आप मुखमंत्री की जूती पोंछ रहे थे......सच है का ? ई तो पद्म सिंह ही बताएगें, ऊ वाले, कल रात हम ही नाम के फ़ेर में फ़ेरा खा गए थे।प्रेरणादायी व्यक्तित्व से मिलिए। बहुत प्रेरणा मिलेगी। ब्लॉग जगत से हिंदी में ऑनलाईन फोरम की शुरूआत  हो चुकी है, बधाईयाँ जी बधाईयाँ, ढेर सारी बधाइयाँ, जगत भर की बधाईयाँ।प्रकृति के रंग  बिखरे हैं बसंत में

यह सुबह रात से ही हो गयी,जगजीत सिंह साहब - जन्मदिन की बहुत बहुत हार्दिक बधाइयाँ हमारी तरफ़ से, राजघाट से गाजा तक कारवां तक पहुंच गया है, सोए मत रहिए, जागिए।आगे-आगे बसंत के महीना छा गे- छा-गे बसंत के महीना छा गे।आंसुओं ने चूम लिए कदम-अरे बसंत में आंसुओं का बात काहे करते हैं जी, बाकी के अग्यारह महीना पड़ा है रोने के लिए, एक महीना तो मौज मस्ती लीजिए, गम और आंसू को भूला कर, बहुत हो गया. ब्लागरों को सीधी बात करना आना ही चाहिये, जब हम पुराने हो कर सीधी बात कर लेते हैं और बिना दाम के लेख नहीं देते, तो इनको भी सीधा बात करना चाहिए। सही कह रहे हैं झा जी।"भियाजी, काम की बड़ी-बड़ी मछली तो पानी क भित्तर मिलच, नहीईईईईई ! हमने कल उड़ती हुई भी देखी थी।जियो, ऑर्नब और मित्रों बसंत आ चुका है, पिया गए रंगून वहाँ से किया है टेलीफ़ून लगता है सभी फ़गुना गए हैं, कुछ का कुछ लिखे जा रहे हैं।  उड़न तश्तरी कनाडा पहुंच गई सही सलामत, लेकिन फ़ोन नहीं आया है, अब कोई हवलदार चालान करता तो जरुर आता। मतलब सही सलामत है।:)

चलते चलते एक व्यंग्य चित्र


अब चलते हैं ब्लॉग4वार्ता को देते हैं विराम- सभी को बासंती वार्ता समर्पित है।...........................

17 टिप्पणियाँ:

mjo aa gyo baabuji bsnt pr chokhi kvita chokhaa git maand diyo mubark ho . akhtar khan akela kota rajsthan

बसंत पंचमी की हार्दिक बधाई .....
आज तो सारी वार्ता महकी महकी हुई है........मेरी रचना लेने के लिये आभार.....

पूरे मन से लगायी है आपने आज की वार्ता .. एग्रीगेटर बंद होने के बाद इतने लिंको को प्राप्‍त करना .. सबको पढकर इस ढंग से प्रस्‍तुत करना .. कम मेहनत का काम नहीं !!

जय हो बढ़िया वार्ता लगाईं है ... कल तो चकाचक रहा ... देखिये u.tube
http://www.youtube.com/user/mmmmjbp

badhiya charcha .... meri rachna ko sthaan dene ke liye dhanyawaad

बढिया चर्चा। धन्यवाद। ।

बहुत सुन्दर चर्चा ... लिंक बेहतरीन ...

बहुत अच्छी वार्ता ...बहुत ही उम्दा लिंक्स सहेजे आपने ।

सुन्दर वार्ता उम्दा लिंक्स .

बासंती रंग में रंगी वार्ता अच्छी लगी.

इस बसंती वार्ता के लिए आपका बहुत बहुत आभार !

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