रविवार, 27 फ़रवरी 2011

मर्दुमशुमारी-लम्बा चौड़ा हिसाब-कठिन परीक्षा की घड़ी -- ब्लॉग4वार्ता --- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार,आज मुकेश कुमार मिश्र, मस्तान सिंह का जनमदिन है इन्हे ढेर सारी मुबारकबाद।

 


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पिछले दिनों हुई मुलाकात कुछ ब्लॉगरों सेमित्रों ने बहुत शिकायत की कि कई दिनो से कुछ लिखा नहीं! दरअसल मंशा यह भी थीकि अब अपने ब्लॉगों को www.BSPABLA.com पर ले जाने के बाद ही कुछ लिखूँगा, किन्तु 11 वेबसाईट्स की योजना में इतना रम गया कि यह इरादा टलत...तंबाकू कंपनियां पचास वर्षों तक बेचती रहीं सफ़ेद झूठमुझे याद है कि सत्तर के दशक में मेरे जो रिश्तेदार उन दिनों 35-40 रूपये का सिगरेट का पैकेट पिया करते थे, सारे परिवार में उन का अच्छा खासा दबदबा हुआ करता था कि इन की इतनी हैसियत है कि ये अपनी सेहत के प्रति जाग...

सिंहावलोकन पर हो रही है मर्दुमशुमारी - उन्नीस सौ साठादि के दशक में पहली बार सुना- मर्दुमशुमारी। एकदम नये इस शब्द को कई दिनों दुहराता रहा। कुछ ऐसे शब्द होते हैं, खास कर जब वे आपके लिए नये हों,... कठिन परीक्षा की घड़ी - मौसम की जानकारी देने वाले ने अपने नक्शे को दिखाते हुए कहा "मुझे भय है कि स्थिति सुधरने से पहले और कठिन होगी।" उसकी यह भविष्यवाणी इस्त्राएल की प्रजा का चित...लम्बा चौड़ा हिसाब - दिन भर जिस्म की चक्की चली फिर गहराई लम्बी काली रात सरहाने रख चली गयी कुछ टूटे-फूटे ख्वाब कुछ गीलापन कुछ चमक सुनहरी सी इन आँखों के आस -पास पलकों...  

हर कोई अपनी सुरक्षा तलाशता है, ... साहित्य भी - मनुष्य ही है जो आज अपने लिए खाद्य का संग्रह करता है। लेकिन यह निश्चित है कि आरंभ में वह ऐसा नहीं रहा होगा। उस के पास न तो जानकारी थी कि खाद्य को संग्रह किय...  पत्र(लड़की की शादि के लिए) - कई बार आदमी किसी शादि समारोह में शामिल नहीं हो पाता और वहाँ कोई सन्देश भेजना चाहता है, लेकिन दिमाग में तुरन्त कोई विचार नहीं आता है। उस समस्या के समाधान के... नेता जी का फलसफा - *मेरी इस सरकार में सबको है यह छूट ;* *जनता है भोली बड़ी ,लूट सके तो लूट ,* *सच्चाई को छोड़कर बोलो मिलकर झूठ;* *गठबंधन पक्का रहे ,देखो जाये न टूट .* ... 

 उसने फिर से,.. गजल सुनाई हैं - जख्म अश्कों से, धो गया कोई ख्वाब आँखों मैं,, बो गया कोई उसके हाथों मैं,.. कारसाज़ी थी थपकियों मैं ही,.. सो गया कोई दिलकी खिड़की तो बंद कर लेते फिर न कहना ... अलमारी---- (कविता)---- मोनिका गुप्ता - कमरे मे माँ की अलमारी नही अलमारीनुमा पूरा कमरा है जिसमे मेरे लिए सूट है सामी के लिए खिलौना है इनके लिए परफ्यूम है मणि के लिए चाकलेट है एक जोडी चप्पल है सेल म... हर मोड़ पर दो राह मिलती हैं.. - कभी मिलती हैं मांगे से, कभी बिन चाह मिलती हैं, अजब है ज़िन्दगी, हर मोड़ पर दो राह मिलती हैं.. चलूं गर राह पर दिल की, तो मिलती ठोकरें हर दम, बढ़ाऊं होश से क... 

देखिये मेरा डांस ----ओ पिया , लेके डोली आ :) - आज आप सबको अपना पहला डांस वीडियो दिखा रही हूँ ....वैसे पहला डांस तो मैंने मंगलम गणेशं से शुरू किया था लेकिन यह पहला डांस है जो अच्छे से रिकार्ड किया गया . ... आज मेरी परदादी की पुण्यतिथि है - मेरी दादी आज मेरी दादी (माधव की परदादी )की पुण्यतिथि है . २५ फरवरी २००९ को उनका निधन हुआ था . उनकी मृत्यु के समय माधव करीब सवा साल का था .माधव को-- बदतमीजी और बेशर्मी की राजनीति से पीड़ित है समूचा देश - कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह कहते हैं बाबा रामदेव को राजनैतिक बातें नहीं करनी चाहिए , राजनीति करना ही है तो वे एक राजनैतिक पार्टी बनाना चाहते हैं , बना कर...  

छत्तीसगढ के साथ सौतेला व्यवहार -- रेल बजट - वर्तमान रेल बजट को देख कर लगता है कि यह देश का रेल बजट न होकर सिर्फ़ बंगाल के लिए ही है। बिलासपुर जोन से रेल्वे को सर्वाधिक कमाई होती है। लेकिन बजट के अवसर...कठिन परीक्षा की घड़ी - मौसम की जानकारी देने वाले ने अपने नक्शे को दिखाते हुए कहा "मुझे भय है कि स्थिति सुधरने से पहले और कठिन होगी।" उसकी यह भविष्यवाणी इस्त्राएल की प्रजा का चित...कविता : राम-राम हरे-हरे ( बोधिसत्त्व ) - कवि बोधिसत्व आज कवि बोधिसत्व कै कबिता आपके सामने रखत अहन। कविता है : “राम-राम हरे-हरे” ! यहि कबिता का अभय जी के बलाग से सादर लियत अही। अभय जी यहिकै अनुमति ...

वार्ता को देते हैं विराम--सभी को राम राम, मिलते  हैं ब्रेक के बाद
 

7 टिप्पणियाँ:

मर्दुमशुमारी की चर्चा के लिए धन्‍यवाद.

ब्लागशुमारी की चर्चा के लिये आप का दिल से आभार, बहुत सुंदर चर्चा किये हे.

मर्दुमशुमारी ने मार डाला..........

अच्छी रही वार्ता.

मेरी ग़ज़ल को वार्ता में शामिल करने के लिए हार्दिक धन्यवाद!

मन आनंदित हो गया ! पुन: आभार......

बढ़िया लिंक्स मिले ... ललित दादा ... आभार !

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