शुक्रवार, 4 नवंबर 2011

हिंदी ब्लॉगरों का दीपावली मिलन -- ब्लॉग4वार्ता -- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, सुबह-सुबह अखबार ने नहीं, महफ़ूज ने बताया कि पिटरोल का रेट बढ गया है। दिल्ली नखलेऊ नजीक होने के कारण महफ़ूज के पास समाचार जल्दी पहुंच जाता  है, मतलब सबसे तेज चैनल, महफ़ूज चैनल। जब इतना ही चलता है तो काहे हलाल करवा रहे हैं, दू-दू रुपया में तो बहुत नुसकान हो रहा है, सीधे सौव्वे पे आने दीजिए, तभे कुछ बात बनेगी। पिटरोल पंप पर भी छूट्टे का लफ़ड़ा रहता है, या फ़िर राजाए या मोझी के खाते से सब्सीडी आने दीजिए, जनता को राहत मिलेगी और उन्हे भी पूण्य लाभ। शायद इस पूण्य के प्रताप से अंदर से बाहर आ जाएं। खैर जो भी हो, इतनी भयानक खबर आहिस्ता आहिस्ता दिया करो महफ़ूज भाई। कहीं झटके से झटका ही न आ जाए, अभिए तो दीवाली निकली है :), अब चलते हैं आज की ब्लॉग4 वार्ता पर........

सबसे पहले चर्चा करते हैं इस वर्ष जल्‍द ही पडने लगेगी ठंड कभी अतिवृष्टि तो कभी अनावृष्टि को झेलना भारतवर्ष की मजबूरी रही है। इसी वर्ष जुलाई से सितंबर तक होनेवाले लगातार बारिश से देश के विभिन्‍न भागों में लोग परेशान रहें। जहां गांव के कृषकों को खेत की अधिकांश फसलो...टूटा हुआ खिलौना खुद ही मरहम पट्टी कर पहले जैसा जुड़ जाएगादेखने सुनने में भले ही अविश्वसनीय लगे लेकिन कल्पना की जा सकने वाली बात को साकार कर दिखाया है विज्ञान ने. दरअसल वैज्ञानिकों ने अब एक ऎसी तकनीक विकसित कर ली है जिससे टूटे खिलौनों, चश्मों के टुकड़े जोड़ने के ...दुनिया में इससे मीठा कुछ हो तो बताइए.आप कभी न कभी तो दूसरे की किसी बात पर ज़रूर झल्लाते होंगे...मैं भी झल्लाता हूं...चलो झल्लाने की बात बाद में, पहले कुछ मीठा हो जाए..ठंडा ठंडा, कूल कूल...क्या मात्र पच्चीस हज़ार डॉलर का चॉकलेट संडे खाएंगे......

जन-गण-मनराज्य स्थापना दिवस की 11वीं वर्षगांठ के अवसर आज राजभवन के दरबार हाल में राज्यपाल श्री शेखर दत्त ने छत्तीसगढ़ के प्रगतिशील स्वरूप एवं गौरवशाली परंपरा को दर्शाने वाली तथा राष्ट्रगान 'जन-गण-मन' पर आधारित लघु...बच्चों के साथ..............सीखने की नई शुरूआत...बच्चों के साथ हम बड़ों के लिए भी सीखने समझने की एक नई यात्रा आरंभ होती है। एक ऐसी यात्रा जो हमें फिर से बचपन में लौटा ले जाती है। ऐसा लगता है मानों जो कुछ आज तक सीखा है, जाना है वो सब भूलकर उन्हीं की तर...पिण्डारी ग्लेशियर यात्राअक्टूबर 2011 की सुबह करीब छह बजे मे...दुनिया गोल है----मेरी अपनी जिन्दगी में जब पहली बार किसी ने कहा था कि 'भाई, दुनिया गोल है' तो इस बात के पीछे छिपा गूढ़ रहस्य उस समय उजागर नहीं हुआ था. बस मन में कुछ-कुछ ऐसा ही ख्याल आया था कि इसमे कौन सी नई बात कह दी या 'य...

नकली चेहरा : असली सूरत !भारत में बोलती फिल्मों का इतिहास एक सौ साल का भी नहीं हो पाया है. हमारे यहाँ पहली बोलती फिल्म 'आलम-आरा ' सन 1931 में रिलीज हुई थी . उसके बाद तो जैसे आजादी के आंदोलन के समान...जाने दो मुझे, आज जाने दोबजने दो आज फोन की घंटियां मर भी जाए तो क्या है मर जाए एक और डेडलाईन। गुज़र जाने दो घंटों को पटरियों पर दौड़ती रेल की तरह। आने दो ई-मेलों को घबराए हुए कबूतरों की तरह भरने दो इनबॉक्स। जाने दो ट्रैफिक के शोर क...नई दुनिया में हिंदी ब्लॉगरों के दीपावली मिलन का समाचार3 नवंबर 2011 को नई दुनिया, भिलाई संस्करण में 30 अक्टूबर को हुए छत्तीसगढ़ स्थित हिंदी ब्लॉगरों के दीपावली मिलन का समाचार..

बस्तर में ब्रह्मजगदलपुर के रविराज ने फेसबुक पर कुछ पुरातात्विक तस्वीरें पोस्ट की हैं। उन्होंने जो जानकारी दी है, उसके मुताबिक ये तस्वीरें बस्तर के बीजापुर जिले के गांव मिरतुर की हैं। गांव भैरमगढ़ तहसील में है। उन्होंने दा...गुरु गोविन्द सिंह जी ****गुरु गोविंद सिंह जी * * * *जन्म ---22 दिसंबर 1666 ई. * *मृत्यु ---7 अक्तुम्बर 1708 ई. * * * आज के भौतिक युग में अपने बहु संख्यक होने के कारण देश के शासन -प्रशासन में अपना प्रभुत्व कायम हो जाने के कार...आदिवासी कला-सामग्रियों का एक ऐसा भी संग्रहपत्रकारिता के अपने शुरुआती दिनों में मेरी एक धारणा ये बनी थी कि कला-वस्तुओं के निजी संग्रह का शौक 'चोर-वृत्ति' को बढ़ावा देता है। और यह बात मैंने अपने एक आलेख (नयी दुनिया-इंदौर) में लिखी भी थी। इसलिए उस ...

जबकि ऐसी कोई वजह नहीं...इन सुस्ताई हुई रातों की भोर के पहले पहर में आने वाले ख्वाबों में बच्चों की सेहत और एक उपन्यास जितना लम्बा अफ़साना लिखने के दृश्य होने चाहिए थे. लेकिन आज सुबह बदन में ठण्ड की ज़रा झुरझुरी हुई तब देखा क...चल बे .......पैसे निकाल ........चल त्यौहार मना छठ पूजा का त्योहार बीत गया, ........ अखबारों में खूब चर्चा रही ...........बाजारों में खूब रौनक रही ............खूब खरीदारी हुई .............आदमी पे आदमी चढ़ा जा रहा ...पशु-बलि : प्रतीकात्मक कुरिति पर आधारित हिंसक प्रवृतिईद त्याग का महान पर्व है, जो त्याग के महिमावर्धन के लिए मनाया जाता है। हमें संदेश देता है कि हर क्षण हमें त्याग हेतू तत्पर रहना चाहिए। प्रेरणा के लिए हम हज़रत इब्राहीम के महान त्याग की याद करते है। किन्तु ...

मिलते हैं ब्रेक के बाद -- राम राम............

8 टिप्पणियाँ:

पेट्रोल की कीमत तो बढ़ ही रही है पर आपनेअन्य रोज उपयोग में आने वाली वस्तुओं को भी तो अनुभव किया होगा |क्या दीपावली का मजा फीका नहीं लगा | खैर अच्छी वार्ता |
आशा

बहुत अच्‍छी वार्ता .. आभार !!

अच्‍छी वार्ता .. आभार

सुन्दर लिंक्स सहेजे हैं।

पेट्रोल के बढते रेट तो दुखदायी है पर आपकी वार्ता बढ़िया रही.

बहुत अच्‍छी वार्ता .. आभार !!

एक- दो रुपये की बढोतरी ही जोर का झटका धीरे से है यदि सौव्वे तक बढोतरी अचानक कर देंगे तो जोर का झटका अति जोर से लग जायेगा.

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