बुधवार, 22 अगस्त 2012

उनके कूचे को, हम यूँ अलविदा नहीं कहते ---------ब्लॉग4वार्ता ----- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार,  तहलका के पत्रकार राजकुमार सोनी जी एक मंजे हुए थियेटर कलाकार हैं, और इसी क्रम में एक कदम आगे फिल्‍मों के प्रति इनका रूझान सर्वविदित है। मै इनका गायन पहले भी सुन चुका हूं।  राजकुमार स्‍टील सिटी का लोहा मिश्रित खारा पानी पीकर भी मधुर सुर में गानें गाते हैं । किशोर दा के गीतों को राजकुमार सोनी की आवाज में सुनना मुझे सुखद लगा। इन्होनें सात गीतों को अनौपचारिक रुप से रिकार्डिंग स्टुडियो में रिकार्ड किया और यू ट्यूब पर अपलोड कर दिया, आप भी सुनें किशोर दा के गाए गीतों को जिसमें तहलकाई पत्रकार नें अपना मधुर स्‍वर दिया है गाने का लिंक यहां पर है ………… अब चलते हैं आज की वार्ता पर............

शब्द यात्रा वाक् -युद्ध * *वाक् -युद्ध * *वाक् युद्ध याने शब्दों की लड़ाई। बिना शस्त्र या अस्त्र के लड़ा जाने वाला ऐसा युद्ध जिसमें कोई भी ख़ून खराबा नहीं होता और जिसमें किसी भी तरह के युद्ध क्षेत्र की आवश्यकता नहीं ...बस्तर: पहला पड़ाव जगतुगुड़ा बस्तर की धरा किसी स्वर्ग से कम नहीं। हरी भरी वादियाँ, उन्मुक्त कल-कल करती नदियाँ, झरने, वन पशु-पक्षी, खनिज एवं वहां के भोले-भाले आदिवासियों का अतिथि सत्कार बरबस बस्तर की ओर खींच ले जाता है। बस्तर के वनों में...खतरनाक है समाज का बाजार में बदलनाःप्रख्यात उपन्यासकार एवं कथाकार *कमल कुमार* का कहना है कि स्त्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह कि वह समाज से बाजार बन रहे समय में किस तरह से प्रस्तुत हो। वे यहां माखनलाल चतुर्वेदी पत्...

मुंबई की हिंसा: जवाबदार कौनहमारे देश में जब भी कोई समस्या सामने आती है, तब पहले तो सरकार उसकी पूरी तरह से उपेक्षा करती है, उसके बाद जब स्थिति गंभीर होने लगती है, तब सरकार नींद से जागती है। पूरी तरह से चैतन्य होने में...नई कविता की प्रवृत्तियां प्रयोगवाद और नई कविता की प्रवृत्तियों में कोई विशेष अंतर नहीं दिखाई देता। नई कविता प्रयोगवाद की नींव पर ही खड़ी है। फिर भी कथ्य की व्यापकता और दृष्टि की उन्मुक्तता,ईमानदार अनुभूति का आग्रह,सामाजिक एवं व्यक...अलविदा सच ! दर्द दिल का बयां कैसे करें अब तलक उनका बसेरा है वहां ? ... तमाम कोशिशें हमारी, नजर अंदाज की गईं थी 'उदय' वर्ना, उनके कूचे को, हम यूँ अलविदा नहीं कहते ? ... दिखावे की, बनावटी दौड़ों से हमे...

तेरी और मेरी ईद अव्वल अल्ला नूर उपाया ,कुदरत के सब बंदे. एक नूर ते सब जग उपज्या ,कौन भले कौन मंदे ... जी हाँ सारे बन्दे उसी रब्ब की ,उसी खुदा की , उसी एक ईश्वर की देन हैं . ईश्वर को तो हमने बा...वो इमली का पेड़ १. खेतों के बीच हुआ करता था एक इमली का पेड़ (अब वे खेत ही कहाँ हैं) २. सुस्ताया करते थे खेत जोतते बैल और हरवाहे उस इमली के पेड़ के नीचे (अब वे बैल और हरवाहे ही कहाँ हैं ) ३. हुआ करता था गौरैया का घ...मुझ सी ही नटखट मेरी परछाइयाँ हाय रे ये इश्क़ की बेताबियाँ ले रही हैं ज़िन्दगी अंगड़ाइयां क्या कहूँ इस से ज़ियादा आप को मार डालेंगी मुझे तन्हाइयां आजकल मातम है क्यूँ छाया हुआ सुनते थे कल तक जहाँ शहनाइयाँ दौर है ये ज़ोर की आज...

विश्व बंधुत्व की एक मिशालवाह-वाह-वाह ... माशाल्लाह, इसे कहते है विश्व बंधुत्व की मिशाल.... ! इस नेक कार्य के लिए इन सरदार बूटासिंह जी को कोटिश धन्यवाद ! ये कही वो ही वाले बूटा सिंह जी तो नहीं है जो ...क्या ये चंद्रमा तुम जैसा नहीं हैइस ब्रह्मांड में हजारों ग्रह - नक्षत्र है , और इन ग्रहों के कई - कई चंद्रमा है ....... लेकिन पूरे ब्रह्मांड में इस धरा जैसा तो कोई भी ना होगा , इसका तो चंद्रमा भी एक ही है .. केवल धरा के लिए ही और इसके ह...रेडियो श्रोता सम्मेलनदे*श में रेडियो श्रोता दिवस मनाने की परम्परा शुरू करने का श्रेय छत्तीसगढ़ को है। इस नये राज्य के रेडियो श्रोताओं ने भारत में 20 अगस्त 1921 को हुए प्रथम रेडियो प्रसारण की याद में हर साल आज ही के दिन ...

मोह की क्षणभंगुरता में वीरानें में लटकती सांसों को घुंघुरू की तरह प्रतिध्वनित होना था जिंदगी दो चार कदम पर गहरी कुआँ थी वक्त बेवक्त नमी सूखता रहा प्यास प्याउ पर बिखरा तन्हाई को टटोलता रहा सन्नाटों के गहराने पर असंख्य या... आसान था तुझे भूल जाना.....  आसान था तुझे भूल जाना.... जैसे आसान था कभी, रह रह कर तेरा याद आना... भुला दिया तुझे मेरे दिल ने बड़ी जल्दी,बड़ी आसानी से.... थे जो तेरी मोहब्बत के दस्तावेज, वो कॉफी के कुछ बिल जलाए और खत खुशबुओं वाले, फाड़े ...चिरनिद्रा से वापसी...आज अचानक असमय सो गई सोते हुए स्वपन में जाग उठी उठते ही कविता की कॉपी याद आई बैचेनी से इधर-उधर ढूँढने लगी अचानक पाँव तले पानी महसूस हुआ इतना पानी देखक... 

चलते चलते व्यंग्य चित्र
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वार्ता को देते हैं विराम, मिलते हैं ब्रेक के बाद राम राम...

8 टिप्पणियाँ:

वार्ता के रोचक सूत्र..

बहुत सुंदर ..

राजकुमार जी को शुभकामनाएं !!

अच्छी लिंक्स |
आशा

बहुत ही अच्‍छे लिंक्‍स एवं प्रस्‍तुति।

बढ़िया लिंक्स, शानदार शीर्षक के साथ... स्थान देने के लिए आभार...

हमेशा की तरह रोचक वार्ता ....

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