शुक्रवार, 3 अगस्त 2012

सुना था आज उड़ेगें पुर्जे गालिब के ---------- ब्लॉग4वार्ता ------ ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, गालिब ने कहा - सुना था  आज उड़ेगें पुर्जे गालिब के, देखने हम भी गए पर तमाशा न हुआ। कुछ ऐसा ही  हुआ, आज अन्ना का अनशन खत्म हो गया। बाबा सलवार से बाहर ही नहीं निकल पाए। भ्रष्टाचार के विरुद्ध आन्दोलन की भ्रूण हत्या हो गयी। लोकपाल शायद ही बन पाए, काला धन शायद ही वापस आए। लेकिन एक आस तो हिन्दुस्तानियों में पैदा हो गयी। आज नहीं तो कल, सफ़लता मिलनी है। भले ही रास्ता कंटक भरा हो। अब चलते हैं आज की वार्ता पर प्रस्तुत हैं कुछ उम्दा लिंक्स ……………

माँ को राखी जरूरत है कि आज (भारत) माँ को राखी बांधी जाये । वचन देने के लिये कि यह राखी उसकी रक्षा के लिये है, जो दर असल हमारी ही रक्षा है । मां जिसके गोद में कांधों पर खेल कर हम बडे हुए । मां जिसने हमें पाल पोस कर बडा...वो अनजाना सा व्यक्ति जब आप किसी शादी में जाते हैं .. अक्सर एक व्यक्ति से टकरा जाते हैं .. वो आपको देख कर मुस्कुराता है .. आप बिना पहचाने ही मुस्कुराते है .. वो सबसे ...मेरी मुट्ठी में सूखे हुए फूल हैं बदहवास दौड़ती हुई ज़िन्दगी को कभी कोई अचानक रोक ले तो कितना अच्छा हो. हासिल के लिए भागते हुए, नाकामी का मातम झोली में भरते जाना और फिर ज़रा रुके नहीं कि दौड़ पड़ना. याद के वे खाने सब खाली. जिनमें रखी ह...

बात एक अनकही सी-प्यारा सा-एक घर हमारा प्यारा सा-एक घर हमाराआइये मकान को घर बनायें------- *"**घर” **और "मका**न**”**शब्द दो हैं पर अर्थ एक ही है अर्थात ' **रहने की जगह'. **और **दोनों शब्दों में एक मूलभूत अंतर है.'**मकान' **ईंट, **रेत, **सीमेंट ...भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक. रक्षा-बंधन इस पर्व ने जात-पात, धर्म-अधर्म, ऊंच-नीच से सदा अपने को अलग रखा। इसीलिए आज भी यह उतने ही उत्साह, प्रेम, स्नेह से याद रखा जाता है और अनेकानेक झंझावतों के बावजूद मनता चला आ रहा है। * रक्षा-बंधन यानि रा... काव्य वाटिकामन का पंछी चाँद का तन्हा सफ़र कैसे देखूँ अक्स उसकी बेचारगी का कैसे झेलूँ कोई तो रंग बिखेर दे अमा की रात निराकाश में छेड़ दे प्रेम की बात । प्यार नहीं बंधा है रिश्तों की रेखाओं में नर्म ...
बहन-रक्षा का प्रण लेने की जरुरत नहीं अभी पिछले हीं दिन अखबार में छपी एक खबर में पढ़ा था बारहवीं की एक छात्रा के साथ हुए सामूहिक बलात्कार के मुख्य नामजद अपराधी प्रशांत कुमार झा तीन बहनों का भाई है, उसकी बहन के बयान से शर्मिंदगी साफ़ झलक रही थ...राखी हो, कलाई हो,पर जब बांधने वाला कोई नहीं न होरक्षाबंधन एक ऐसा त्यौहार है, जिस दिन दफ्तर और अस्पताल सभी खाली पड़े होते हैं , लेकिन बसें और मेट्रो भरी होती हैं . ज़ाहिर है , महिलाएं राखी बांधने के लिए और पुरुष राखी बंधवाने के लिए छुट्टी कर लेते हैं . ...खिल उठे पलाश / पुस्तक परिचय / सारिका मुकेशगर्भनाल पत्रिका के अगस्त अंक में प्रकाशित पुस्तक परिचय --- खिल उठे पलाश " खिल उठे पलाश " काव्य संग्रह है कवयित्रि सारिका मुकेश जी का जो इस समय वी॰ आई॰ टी॰ यूनिवर्सिटी वैल्लोर ( तमिलनाडु) में ...
हमारा राष्ट्रीय फूल -कितना काम का यह कमल का फूल है ,देवी लक्ष्मी को बहुत प्रिय है ,पूजन सामग्री में इसका होना बहुत शुभ माना जाता है।इसका वैज्ञानिक नाम होता है- Nelumbium speciosum , इसे अम्बुज, पंकज, पद्म,पुण्डरीक, कलंग, सामरा, अम्बल,नी... बंधन..... ऐसे ही होते है .
बंधन कुछ ऐसे होते हैं साथ जुडें तो बने हिमालय टूटें तो सदियों रोते है बंधन बस ऐसे होते हैं पक्के हों या निर्मल कच्चे धवल दुग्ध से मोती सच्चे शिशु से पालित स्नेह तिरोहित गहरी जड़े जमीन बोत...राखी याद ही होगा तुम्हें भी जब साथ होने की कोई अहमियत न थी . राखी ...आती थी और ले आती थी अपने साथ शर्तें,फरमाइशें यह देना वो देना .. इतने रुपयों से कम दोगे तो राखी नहीं बांधेंगे . वक़्त बदलता है एक सा कब रहता...
अभी नहीं, तो कभी नहीं अभी नहीं, तो कभी नहीं ? इसलिए छोडो मनाना जन्मदिन ... श्रद्धांजलि ... वर्षगाँठ ... बगैरह-बगैरह ... किसी दिन, फिर मना लेंगे ?? आओ ... जागो ... उठो ... चलो ... बढ़ो ... लड़ो ... जीतो ... भदेश मेरा फिर दहल गया देश मेरा फिर दहल गया । किसी के लिए चार धमाके हुए ।। किसी के लिए ब्रेकिंग न्यूज़ बनी । किसी के लिए रियलटी शो शुरू होगया ।। किसी के लिए फेसबुक का स्टेटस हुआ । किसी के लिए ट्विट हुआ । किसी के लिए व्यपार होग...आज कुछ तूफानी करते हैं 'वेरी सिम्पल ' कितना सरल है कहना और कितना कठिन है करना. जिसे देखो जुटा है कुछ तूफानी करने में. आखिर ये तूफानी कहां से आया? सिम्पल..ये तो ऐड का स्लोगन है. ऐसे ही कुछ दूसरे स्लोगन भी याद हैं...ठंडा मतलब.....
यह अनुपम त्योहार आस लिए मन में बहुत, बहन मिलेगी आज। मिला पत्र न आऊँगी, उसे बहुत हैं काज।। बहन सामने हो अगर, तब राखी अनमोल। सुन्दर टीका भाल पे, और प्यार के बोल।। ईश्वर के इन्साफ पर, कभी कभी है क्रोध। बहन सहोदर न मिली, यह जब...पड़ता है सा’ब! फरक पड़ता है पहली चूक - कुछ अनुचित करना। दूसरी चूक - अनुचित घटित होते हुए, चुपचाप, बिना बोले देखते रहना। तीसरी - चूक - अनुचित घटित हो जाने के बाद हल्ला मचाना कि यह अनुचित हो गया जो नहीं होना चाहिए था। चौथी चूक - ऐसा...रेशम की डोरमैं तुझसे लड़ती भी हूँ, झगड़ती भी.. मैं तुझसे बड़ी भी हूँ छोटी भी.. बाँधा है मैंने तुझको शब्दों के बन्धन से... महकता है ये रिश्ता बिना ही चन्दन के डोर ये ऐसी नहीं कि टूट जाए झट से.. चलो अब मुँह ख...
वार्ता को देते हैं विराम, मिलते हैं ब्रेक के बाद………… राम राम

7 टिप्पणियाँ:

रेशम की डोर पर केन्द्रित पोस्ट्स से सजी वार्ता अच्छी लगी ...!

राखी से सजी पोस्टें अच्छा लगा आना

रंग -बिरंगी राखी की डोरी सी सजी सुन्दर वार्ता...

सुन्दर और रोचक सूत्र..

बहुत सारे लिंक्स मिले ...उपयोगी वार्ता .... आभार

सतरंगे धागों की बनी राखी से,
सजी ब्लॉग वार्ता आज,
रक्षा किसकी कौन करे,
अब उठने लगे सवाल
यही सवाल मन चंचल करते
कभी व्यथित भी कर जाते
पर वार्ता का आनंद
दुगुणित करते जाते |
अच्छी और विस्तृत वार्ता है आज की |
आशा

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