मंगलवार, 25 दिसंबर 2012

इहै नगरिया तू देख बबुआ …... ब्लॉग4वार्ता / संगीता स्वरूप

आज की वार्ता मे संगीता स्वरूप  का नमस्कार ....

चलती बस में दुष्कर्म के मामले में एक मौत हो गई है। इस वारदात के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान घायल सिपाही सुभाष तोमर की मंगलवार सुबह मौत हो गई।.... और अब पुलिस वीडियो फुटेज देख कर दोषी को ढूँढने का प्रयास करेगी ....... सरकार चाहती है कि  लोग मुख्य मुद्दे से भटक जाएँ .... चलिये देखते हैं आज के लिंक्स ...

बलात्कार , विरोध ,और नगरवधू

नगरवधू !
मेरे मन में बढ़ गया  तेरा सम्मान...

नहीं उठते तेरे लिए कभी झंडे-बैनर,
नहीं सहता कोई पानी की तेज़ बौछार,
नहीं मोमबत्तियों के साथ निकलता मोर्चा,
नहीं जोड़ता तुझसे कोई अपना अभिमान,

अब तो तस्वीर बदलनी चाहिये

इतनी लाठियाँ एक साथ ……नृशंसता की पराकाष्ठा………दोष सिर्फ़ इतना न्याय के लिये क्यों गुहार लगायी ?
बहुत हो चुका अत्याचार
बहुत हो चुका व्यभिचार
अब बन दुर्गा कर संहार

जब दवा ही दर्द देने लगे तो बंद करना ही बेहतर होता है --

यदि बुखार हो जाये तो हम तुरंत दवा लेने लगते हैं। लेकिन जब लम्बे समय तक दवा लेने के बाद भी बुखार न उतरे और सारे टेस्ट भी सामान्य आयें तो डॉक्टर सारी दवाएं बंद कर देते हैं और बुखार उतर जाता है। इसे हम ड्रग फीवर कहते हैं।
कुछ ऐसा ही हो रहा है गैंग रेप के विरुद्ध आन्दोलन में। गुंडागर्दी के विरुद्ध आक्रोश का प्रदर्शन करते करते कहीं न कहीं हम स्वयं ही पथ भ्रष्ट हो गए हैं।

महामना

आदमी यों ही बड़ा नहीं बनता है, उसके बड़प्पन या महानता के पीछे उसकी लगन, सच्चाई औए अध्यवसाय होता है. दुनिया भर में मानव जाति की सेवा करने वाले मनीषियों ने विभिन्न क्षेत्रों में अपने चिरंतन कर्मों के द्वारा महत्ता प्राप्त की है.
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, जिसे B.H.U. के नाम से भी जाना जाता है, के वर्तमान विराट स्वरुप को देख कर अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है कि इसके संस्थापक पण्डित मदन मोहन मालवीय जी थे,

बदलनी होगी अब तस्वीर

युवा शक्‍ति को नमन! दामिनी/निर्भया को सलाम और उस बच्ची की सलामती की दुआ के साथ आज की प्रस्तुति -
कुहासा है या
घनीभूत हो गई है पीर
या शर्मसार हो रवि
छिप गया है घन के चीर

नया अंदाज

क्या देख कर
मुस्कुरा रही हो
जाने  क्या सोच रही हो
सभी को लुभा रही हो |

तपस्विनी....! (कहानी)

ऐसा क्यों होता है, किसी भी सफ़र में ख़ामोशी की दीवार जब टूटती है तो,  तो बीच का अटपटापन बाकी नहीं रहता। बातें, मौसम, देश की राजनीति से होती हुई, व्यक्तिगत बातों तक आ जातीं हैं। बातों के प्रवाह में, गजब की गति आ जाती है। सहयात्री की फ़िक्र तक हो जाती है, उसका साथ यूँ लगता है, जैसे अब कभी छूटने वाला ही नहीं है, लेकिन मंजिल तक पहुँचते ही, रास्ते जुदा हो जाते हैं

इहै नगरिया तू देख बबुआ …………… ललित शर्मा

प्राचीन राजधानी श्रीपुर के अवशेषों को देखने पर्यटक आते हैं, जरा चर्चा वर्तमान सिरपुर गाँव की भी कर ली जाए। प्राचीन राजधानी के वैभव को तो मैने देखा नहीं परन्तु उसके खंडहरों को देखकर उसके वैभव एवं महत्ता को महसूस किया है। वर्तमान में सिरपुर ग्लोब पर 21.40’51.13 उत्तर एवं 82.10’54.07 पूर्व में रायपुर से 81 किलोमीटर की दूरी पर महासमुंद तहसील, जनपद एवं जिलान्तर्गत आता है।

अगर कुछ दे सको तो ..

सेंटा !
सुना है
तुम बिना मांगे
अपनी झोली से निकाल कर
खुशियाँ बांटते हो 
मुस्कुराहटें बांटते हो

मेरी क्रिसमस---दुआएँ ले लो हमारी

आज मुझसे किसी ने कहा कि वह अपनी बर्थडे विश मेरे ब्लॉग पर ही स्वीकार करेंगी...मैं उनके लिए कुछ लिखूँ...तो मंजु जी आपकी इच्छा शिरोधार्य है...

सबसे अच्छी बात है कि आज क्रिसमस भी है...सबको क्रिसमस की बधाइयाँ और हार्दिक शुभकामनाएँ !!

इश्क के दो रंग


पहला रंग इश्क का--- नीला-नीला......
वो सर्दी की इक शाम थी. वो ट्रेन से उतरता है,  टैक्सी लेकर सीधे बताये पते पर. 
' आ गये तुम?' वो देखकर उससे पूछती है.
'चैम्प, मैं तुझे एक घंटे से ढूंढ रहा हूँ.'
'अरे शादी बाले घर में आया है, लड़की इतनी जल्दी थोड़ी न दिखेगी.'

मुझे सपना सच होने का डर है

मुझे माफ कर दो,
दोस्तों
कल रात नई दिल्ली में
मैं सोनिया के घर
कुछ बलात्कारी जबरन
घुस गए

मन के प्लेटफॉर्म पर

ऐसा कभी नहीं हो सकता
कि मन के प्लेटफॉर्म पर
तुम्हारी यादों से भरी
धीरे धीरे चलने वाली
मालगाड़ी न आये .

घृणा का स्‍वाद : एक पुरातन आखेट कथा

तुम्हारे नीचे पूरी धरती बिछी थी
जिसे तुमने रौंदा
वह सिर्फ़ स्त्री नहीं थी
एक समूचा संसार था फूलों और तितलियों से भरा
रिश्तों और संभावनाओं से सजा

सुशीला श्योराण की दो कविताएँ

खड्‍ग ले जीना होगा

सदियों से रिसी है
अंतस् में ये पीड़ा
स्‍त्री संपत्ति
पुरुष पति
हारा जुए में
हरा सभा में चीर

बाहर कोई मां नही जो तूझे बचा लेगी.

बेटी हुं मै मांगती हूं..... जीने का अधिकार
क्या मां तुम मुझे इस दूनिया में आने न दोगी ?

विनती

यह दीन दशा अब देख देश की,
रोती  प्याला, रोती हाला।
चहु ओर व्यथा है, औ' विषाद है,
थर-थर काँपे मन-साक़ी बाला।

धूल सने हाथ पांव,खिलखिलाती हंसी ...

बचपन कौन भूलता है भला .... धूल सने हाथ पांव,खिलखिलाती हंसी - माँ की गोद में बेपरवाह छुप जाती है . माँ का आँचल साफ़ होने के लिए सबसे ख़ास अनमोल होता है और माँ के आँचल में बच्चे के आंसू हीरे जवाहरात बन जाते हैं . लड़ना-झगड़ना,चौकलेट चुराना, इधर-उधर से सीखी गलियाँ धड़ल्ले से बोलना .... कान उमेठे जाने पर भी दांत पिसना ..... बचपन की पोटली की अमीरी सबसे जुदा होती है .

सामाजिक बहिष्कार से बड़ी सजा कोई नहीं हो सकती-एसपी

दिल्ली की घटना के बाद से पुलिस दवाब में है। इसी संदर्भ में हमने एसपी संतोष चालके से बात की। हमनेउनसे पूछा,दिल्ली की घटना के बाद पुलिस पर कितना दवाब है? दवाब पर ज़ोर देते हुए एसपी बोले,दवाब शब्द उचित नहीं है। महिलाओं की गरिमा,आत्म सम्मान के बारे में पुलिस को संवेदनशील होना ही चाहिए

एहसास ..

मेरे लिए खुशी का दिन

ओर तुम्हारे लिए ...

सालों बाद जब पहली बार घर की देहरी से बाहर निकला

समझ नहीं पाया था तुम्हारी उदासी का कारण

मेरी क्रिसमस कथा (तातियाना के लिए) : माइकल येट्स

जब मैं छोटा था तब ज़्यादातर औरों के उतारे हुए कपड़े पहना करता। पड़ोसियों का बेटा मुझसे साल-दो साल बड़ा था और लगभग मेरी ही साइज़ का था और उसकी उतारी हुई कमीज़ें और पतलूनें मुझे मिलतीं। दादी या मेरी माँ उन्हें छोटा-बड़ा कर देती

आया हूँ मैं प्रेम लहर बन

अंधकार में जो बैठे थे
ज्योति उन्हें जगाने आई,
मृत्यु की छाया थी जिन पर
जीवन सरिता थी लहराई !

सेंटा क्लॉज़ का इंतज़ार है

जब क्रिसमस त्यौहार है आता, 
खुशियाँ छा जाती हैं मन में.
जगमग करता है घर सारा,
क्रिसमस ट्री सजता आँगन में.

कुछ क्षणिकायें

हम तो थे परिंदा
हमारी हर उड़ान के साथ
अपने लोग भी हमें
अपने दिलों से
उड़ाते गये

किसे सुनाएँ हाल-ए-दिल...नज़र और जुबां पे सबके ताले पड़े हुए हैं

दिल्ली में घटी उस शर्मनाक घटना पर फेसबुक मेरी त्वरित प्रतिक्रिया थी,

"दिल्ली में वहशीपन की इस घटना पर सबका खून खौल रहा है .पर सिर्फ खून खौलने की नहीं, खून का ये उबाल बनाए रखने की जरूरत है, जब तक ऐसी घटनाएं बंद न हो जाएँ;.
दोषियों को सजा न मिल जाए और लडकियां अपने आप को सुरक्षित न महसूस करने लगें।
ये नहीं कि कुछ दिनों में हम इसे भूल जाएँ और फिर किसी अगली खबर का इंतज़ार हो। "

स्त्रियों को शक्ति स्वीकारने वाले देश में स्त्रियों के सम्मान और प्राणरक्षा के लिये आन्दोलन

यह संयोग की ही बात है कि बिहार की साहसी बेटी अनायास ही पूरे भारत की चहेती बेटी बन गयी। आज पूरा देश चिंतित है फ़िजियोथेरेपिस्ट कुमारी दामिनी के लिये ......लोग आन्दोलित हो रहे हैं। भारत की राजधानी में प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों के गुस्से का समर्थन कर रही हैं दिल्ली की मुख्य मंत्री और उनके सांसद बेटे

अरे वो अधर्मी !

अरे वो अधर्मी, 

शरमा रही अब

तुझसे बेशर्मी,

कड़क सर्दी में,

ताप रहा देश,

मैं लाचार हूँ--आपका सहयोग चाहिए

आज़ादी के बाद देश में भ्रष्टाचार बढ़ा है ।

लोकतन्त्र के साये में कुल का आकार बढ़ा है॥

भारत भ्रष्टाचार राशि दोनों की एक रही है ।

काँग्रेस के साथ करप्शनका भी हाल यही है॥

अब कानून से ज्यादा आवश्यक है जागरूकता

वर्ष 2012 ने जाते-जाते देश को हिला देने वाली दो घटनाओं से परिचित करवा दिया। दिल्ली में हुई गैंग रेप की बर्बर घटना और उस घटना के बाद देशव्यापी-विशेष रूप से दिल्ली के युवाओं का स्वस्फूर्त रूप से बलात्कार की घटनाओं के विरोध में सड़कों पर उतर आना अपने आपमें वे दो घटनायें हैं जिनको आसानी से भुलाया नहीं जाना चाहिए।

न्‍याय की माँग में !!

आँख नम है
न्‍याय की माँग में
जुल्‍म देख
...
पीड़ा के क्षण
मन का संताप ये
किससे कहें

अजगरी सिस्टम......अजगरी धार

पिछले कुछ दिनों से युवा छात्र-छात्राओं पर चल रहे सरकारी दमनचक्र के दृश्य देख बार-बार आँखें नम हो रही हैं। एक ओर से प्रदर्शनकारी खदेड़े जा रहे हैं तो दूसरी ओर से फिर आ डटते हैं। लगातार आँसू गैस के गोले छोड़े जा रहे थे लेकिन नौजवान थे कि डटे रहे। पूरी ताकत से लाठी भांजते पुलिसिये तड़-तड़ लाठी बरसाते रहे

ब्लू डनहिल्स- पास्ता विद ब्लैक कॉफी

कोई विदेशी वायलिन की धुन थी. शाम के ताने बाने से मेरे लिए दुशाला तैयार कर रही थी.

घुसपैठिया...डाकू...जाने मन के किस किस कोने पैठ गयी थी उसकी याद...सुबह कब नींद खुली याद नहीं बस ये याद था कि सपने में उसे देखा है,

हैप्पी क्रिसमिस ..

चलो मिल कर ज़िंदगी को मीठे केक सा कर जाए:) आओ सिखाएं आपको इस केक को बनाना इसके लिए जरा यह सब सामान तो ले के आना एक कप प्यार , में १०० ग्राम दयालुता , ५०० ग्राम दुआ [प्रार्थना ] मिला के इसको नरम बनने तक हिलाना फ़िर इस में १५० ग्राम भावना त्याग की , और १०० चम्मच मदद सबके लिए ५ मिनट तक रख जाना अब इस में १०० बूंदे मुस्कराहट की १ चम्मच सहन शक्ति के साथ अच्छे से इन सबको मिला के फ़िर इसको पकाना

और अंत में---

कार्टून :- ठीक है

आज के लिए बस इतना ही ..... फिर मिलते हैं ... नमस्कार

 

8 टिप्पणियाँ:

कार्टून को भी जगह देने के लिए आपका आभार

बढ़िया वार्ता... ढेर सारे लिंक मिले... आभार

बहुत सुंदर ..
अच्‍छे लिंक्‍स मिले !!

बहुत बढ़िया लिंक्स दिए हैं आपने संगीता जी ! बहुत सारगर्भित और सामयिक वार्ता है। कार्टून भी पसंद आया। मेरे स्वर (रचना) को वार्ता में स्थान देने के लिए शुक्रिया।

बेहतरीन लिंक्स सहेजे हैं रोचक वार्ता

कई लिंक्स और उम्दा संयोजन संगीता जी |मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |
आशा

सुन्दर और पठनीय सूत्र..

वाह,कमाल है मनमोहन बाबू!

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