सोमवार, 5 सितंबर 2011

गुरु वंदना .. सियासत के बदलते रंग ..ब्लॉग4वार्ता.. संगीता पुरी




आप सबों को संगीता पुरी का नमस्कार , जन लोकपाल बिल पर सरकार को झुका देने वाली टीम अन्‍ना के सदस्‍य और वरिष्‍ठ वकील प्रशांत भूषण को संसद के विशेषाधिकार हनन का नोटिस मिला है। भूषण पर सार्वजनिक रूप से यह कहने का आरोप है कि सांसद पैसे लेकर कानून पास करते हैं। अन्‍ना के सबसे करीबी सहयोगी अरविंद केजरीवाल को भी विशेषाधिकार हनन का नोटिस भेजा गया है। किरण बेदी को पहले ही नोटिस भेजा जा चुका है। टीम अन्‍ना के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की भी तैयारी हो रही है। दिल्‍ली पुलिस ने तय किया है कि टीम अन्‍ना ने रामलीला मैदान में आंदोलन के लिए जो लिखित हलफनामा दिया था, उसकी चार अहम शर्तों का उल्‍लंघन हुआ है और इसके लिए टीम अन्‍ना को कठघरे में खड़ा किया जा सकता है। आगे आगे देखा जाये , और क्या क्या होता है . इस खबर के बाद आपलोगों को लिए चलते हैं आज की वार्ता पे .......


कल शिक्षक दिवस है एक विद्यार्थी और शिक्षक का सम्बन्ध अन्य सामाजिक सम्बन्धों की तरह किसी स्वार्थ पर नहीं टिका होता, वह विश्वास, प्रेम और ज्ञान के तंतुओं से बुना होता है... प्रस्तुत है एक संवेदनशील विद्यार्थी की डायरी से अपनी. गुरु वंदना समस्त सम्माननीय मित्रों का सादर अभिनन्दन करते हुए ५ सितम्बर "शिक्षक दिवस"के अवसर पर राष्ट्र निर्माताओं/गुरुजनों को सादर समर्पित *"भाव सुमन" **.* * आज तिमिरों में निःशंक हो अपने कदम बढाऊँ मैं. अति असीम ... शिक्षक दिवस पर कुछ विचारशिक्षा एक सतत प्रक्रिया है जो जीवन पर्यंत चलती रहती है |पूरे जीवनकाल में न जाने कितने लोगों से हम कुछ न कुछ सीखते हैं |शिक्षक एक मार्ग दर्शक होता है जो विद्यार्थी को अंधकार से प्रकाश की और ले जाता है | ... "शिक्षक दिवस"*आता है शिक्षक दिवस, एक साल के बाद।*** *गुरुओं के सम्मान की, हमें दिलाने याद।।*** *सर्वपल्ली को आज हम, करते नमन हजार।*** *जिसने शिक्षक दिन दिया, भारत को उपहार।।*** *धन्य हुए गुरुजन सभी, पाकर यह सौगात...एक रि पोस्ट :- शिक्षक दिवस पर विशेष - तीन ताकतों को समझने का*यह संयोग भारत में ही संभव हो सकता था कि एक शिक्षक राष्ट्रपति बन जाए और एक राष्ट्रपति शिक्षक। * *बात हो रही है क्रमश: डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन (जिनका जन्मदिन आज शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जा रहा है...शिक्षक दिवस




सियासत के बदलते रंग ..पिछले दिनों अन्ना जी के आन्दोलन से हिली सरकार अब थोड़ा संभलने लगी हैं | और देश के नेता भी अपने रंग में आ गए है | यानि आरोप प्रत्यारोप के रंग में या यूँ कहें की अपने असली रंग में बयान बदलने में तो यह कितने राजाओं के राजा !!हम तो कह रहे हैं आओ, चलो, लड़ लो, भिड़ लो चुनावी अखाड़े में ... पर ये - अनशन आन्दोलन नारेबाजी भीडबाजी चक्कर घनचक्कर जंतर-मंतर रामलीला मैदान जन लोकपाल बिल पास-फ़ैल अच्छी बात नहीं न है ! रोज-रो....कदम चलते रहें, और भीड़ बढ़ती रहे !काश ! हमारे देश का मुखिया गूंगा, बहरा, या मूकबधिर होता पर जो होता, जैसा होता, हमारे सामने तो होता !! ... कूदने को कूद जाओ, क्या फरक पड़ता हमें रंज मत करना कभी, क्यों हमने रोका नहीं ! ... नहीं होता मैं ...नायक किस मिट्टी से बनते हैं - भाग 2. अन्ना बनना है तो शब्द और कृति को एक करो ... शुद्ध आचार, निष्कलंक जीवन, त्याग करना सीखो, कोई कुछ कहे तो अपमान सहना सीखो ~अन्ना हज़ारे (27 अगस्त 2011, रामलीला मैदान) पिछली प्रविष्टि और आपकी टिप्पणियों में हम..






.टीम अन्ना का एक और सदस्य निशाने पर [Cartoon][बलमुआ लउटि चलौ वहि ठाँ बलमुआ लउटि चलौ वहि ठाँव, सबसे सुन्नर, बहुत पियारा बाटै आपन गाँव। बलमुआ लउटि चलौ... बीते राति सबेरा होई, चिरइन कै कलराँव, यहि ठौं दिनवा रतियै लागै, घाम कहाँ?.. विशेषाधिकार हनन के तहत संसद में दवे जी की पेशी साहब नुक्कड़ मे तेजी से खबर फ़ैली कि दवे जी को संसद ने विशेषाधिकार हनन के आरोप मे नोटिस भेजी है। , हम भी सकते में थे। लोगो ने पूछा कैसे लपेटे मे आ गये दवे जी, हमने बताया- " अफ़जल गुरू को कोसा था एक लेख मे क..सॉफ़्टवेयरों सावधान बयान देने पर अवमानना का नोटिस मिल सकता हैपिछली पोस्ट *आखिरकार कम्प्यूटर से वायरस निकलने को सहमत हुए* के बाद सदन हरकत में आ गया और जैसे ही कम्प्यूटर को बिजली मिली और बूट हुआ, वैसे ही रैम ने ऑफ़िस सॉफ़्टवेयर पर आरोप लगाया कि कार्य धीमा होने ..






राजीव गांधी के हत्यारों,अफ़ज़ल गुरू के साथ-साथ कसाब को भी माफ़ कर दिया जाना चाहिये!सज़ा देने के लिये है ना,अन्ना की पूरी टीम राजीव गांधी के हत्यारो की फ़ांसी की सज़ा माफ़ कराने के लिये इसी देश के लोग सक्रिय हो गये हैं,विधानसभा में प्रस्ताव आ रहे हैं,अब संसद पर हमले के आरोपी अफ़ज़ल गुरू के लिये भी एक विधायक सामने आ गये हैं,दूसरी ... कांग्रेस क्या है? - शरद जोशी की व्यंग रचना "तीस साल का इतिहास" का एक और अंशतीस सालों की यह यात्रा कांग्रेस की महायात्रा है। वह खादी भंडार से आरम्भ हुई और सचिवालय पर समाप्त हो गई। पूरे तीस साल तक कांग्रेस हमारे देश पर तंबू की तरह तनी रही, गुब्बारे की तरह फैली रही, हवा की तरह सन.. माई नेम इज खुशदीप एंड आई एम नॉट ए कांग्रेसमैन. माई नेम इज खुशदीप एंड आई एम नॉट ए कांग्रेसमैन... माई नेम इज ख़ान एंड आई एम नॉट ए टेररिस्ट...शाहरुख ख़ान के इस डॉयलॉग ने ही उनकी फिल्म माई नेम इज़ ख़ान को नए मायने दिए थे...देश में ही नहीं विदेश में भी ...










दर्शन - 04-09-2011श्री राधा श्यामसुन्दर श्री राधा श्यामसुन्दर श्री कृष्ण बलराम श्री कृष्ण बलराम श्री गौर निताई श्री गौर निताई .शिवजी ने सिर्फ एक बालक के हठ के कारण उसका अंत नहीं किया होगा शिवजी तो देवों के देव हैं, महादेव हैं, भूत- वर्तमान-भविष्य सब उनके अनुसार घटित होता है, वे त्रिकालदर्शी हैं, भोले-भंडारी हैं, योगी हैं, दया का सागर हैं, बड़े-बड़े असुरों, पापियों को उन्होंने क्षमादान दिया ह.समाज के लिए अभिशाप बनता नशा‏ खुशबु(इन्द्री) नशा जिसे हम एक सामाजिक बुराई कहते हैं,के कारण आज के युवा विनाश की गर्त में जा रहे हैं। आज समाज में नशाखोरी कंी प्रवृति इस कद्र अपना साम्राज्य फै ला चुकी है कि युवा इसके कारण मौत के आगोश मे......गुड़ियाराजिम कुंभ में कैमरा लिए भटक रहा था, यह तस्वीर मिली।इस श्रृंखला की तस्वीर तब दैनिक छत्तीसगढ़ में छपी थी। अखबार और संपादक श्री सुनील कुमार के पुनः आभार के साथ यह पोस्ट






खबर है कि आदमी ने सांप को काटाकहते हैं खबर तब बनती है जब आदमी कुत्ते को काटता है मगर यहाँ खबर तब भी बनी जब आदमी ने सांप को काट खाया ..मामला कैलीफोर्निया का है जहां ४५ वर्षीय डेविड सैंक को पुलिस ने इसलिए गिरफ्तार कर लिया है कि उसने अपने प........पैसे बरसाने वाला भूत एक बार मेरे पास एक अनोखा मामला आया। श्रीमान इलीजर के घर में कुछ दिनों से भूत का आतंक छाया हुआ था। वह भूत दिन में घर के प्रत्‍येक हिस्‍से में कंकड़-पत्‍थर बरसाया करता था। कभी-कभी कंकड़ों के आज का प्रश्न-६८ question no.६ Qus.no 68 : चित्र मे जो दो बिंदु दिखाए गए हैं वो वास्तव मे क्या है ?










मौन होते हुए रिश्ते !खतरनाक होती हैं पसरती हुई खामोसी खतरनाक होते हैं बातों के सिमटते दायरे खतरनाक हैं शब्दों कि बदलती हुई परिभाषाएं जज्बातों की खोती हुई गरिमा खतरनाक है टूटते हुए भरम भावनाओं के उधड़ते जाल *खतरन....२४. ठाँव कहीं इक शांत एकांतकंकर-पत्थर के जंगल में गगन भेदते कोलाहल में बौराया मन ढूँढता फिरता ठाँव कहीं इक शांत- एकांत भागाभागी -आपाधापी आगे पीछे लोग ही लोग छूटी जाए समय की गाडी चहूँ दिशा में भागें लोग बीच गली की भीड़ -भाड़ म...परत दर परत आज जब कुछ भी नया नहीं है कहने को नीरवता में नदी के शांत जल की सतह पर एक कंकर फेंकता हूँ तुम्हारी स्मृति का और धीरे धीरे खुलने लगते हैं अनकहे रास्ते देख पाता हूँ वो सब जो किया है तुमने मेरे वा..वो पत्थर दिल पिघलता ही ग़ज़ल वो पत्थर दिल पिघलता ही नहीं है. मेरा कुछ ज़ोर चलता ही नहीं है. तकूँ मैं राह सुब्हो-शाम उसकी, वो इस रस्ते निकलता ही नहीं है. झरे हैं अश्रु बारहमास अपने, यहां मौसम बदलता ही नहीं है. मैं दिल को यूँ तो....भारतीय काव्यशास्त्र – 82भारतीय काव्यशास्त्र – 82 - आचार्य परशुराम राय पिछले अंक में गुणीभूतव्यंग्य पर चर्चा समाप्त कर दी गयी थी। इस अंक से * काव्य-दोष* पर चर्चा प्रारम्भ की जा रही है। *काव्य-दोष* को परिभाषित करते हुए ..






स्कूल चलें हम यह व्यंग्य तब लिखा गया था जब दूरदर्शन में एक विज्ञापन आता था...स्कूल चलें हम। लिखकर भूल चुका था। दिसम्बर 2009 में* रचनाकार* द्वारा एक व्यंग्य लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया तो मैने इसे यूँ ही भेज दिया..असंभव लगताअसंभव लगता कह पाना यूँ मानो अपने आप को दोहराता हुआ देह से भिन्न कोई आस्वादन, सत्य के अनुकरण में क्या इतना कुछ काफी नहीं, या फिर इसका उल्टा साल दर साल किसी का अनुयायी बने रहना शायद असंभव ही | असमंजस के भँवरअसमंजस के भँवर मन के समुद्र में आते रहते शब्द मगर मुंह से नहीं निकलते व्यथा किस से कहें सोचते रहते किस पर विश्वाश करें सवालों से झूझते रहते दर्द का बोझ निरंतर ढोते रहते 04-09-2011 1443-18...मोहभंग....ज़िन्दगी के संकरे रास्तों पर यथार्थ के कंकड़ इतने नुकीले होते हैं कि मायूस एहसास हाथ से छूटने लगते हैं .... * * * * *रश्मि प्रभा * * * * * * *इसका साग बनाया जाता।* *पूड़ी के संग खाया जाता।।* * **जब बेलों पर पक जाता है।* *इसका ...अहाताअहाता यादों के अहाते में उजड़ने बसने के कई किस्से हैं अवसाद कि कहीं खाई, कहीं खुशियों के टीले हैं गिरती हुईं दीवारें, कहीं छत से झड़ते पलस्तर हैं मिश्री सी मीठी बातें कहीं स्वर कर्कश और कंटीले हैं..वैवाहिक सप्तपदी (वर-वचन)पढ़ने के लिए बहुत दिनों से सँजो कर रखी अपने प्रिय चिट्ठों की फीड देखते-देखतेवाणी जीकी एक प्रविष्टि पर टिप्पणी करने चला । उस प्रविष्टि में वैवाहिक सप्तपदी का उल्लेख था, सरल हिन्दी में उसे प्रस्तुत करने क...






नाटक में नौटंकीएक नाटक में नौटंकी का दृश्य है यह। नाटक इप्टा की संस्था का था और जगदलपुर इकाई द्वारा कोंडागांव में मंचित किया गया। नाम था चंद्रमासिंह उर्फ चमकू। निर्देशक विजयसिंह। लेखक भानूभारती। नौटंकीवाली के वेश में मैं.... टीवी देखे अपने कंप्यूटर परअगर आपको टीवी देखने का शोक है तो आज मैं आपके लिए ऐसा सोफ्टवेयर लाया हु जिसे डालने के बाद आप अपने देश के अलावा दुसरे देश के भी चेनल देख सकते है इस सोफ्टवेयर में आपको हर तरह का चेनल मिल जायेगा तो देर किस ब सेरोलसर झील और जलोडी जोत (JALORI PASS) बहुत दिन पहले मैं कुल्लू जिले का नक्शा देख रहा था और उसमें भी कुल्लू का वो इलाका जो पर्यटकों में बिल्कुल भी मशहूर नहीं है लेकिन घुमक्कडों में लोकप्रिय है- तीर्थन घाटी। आमतौर पर कुल्लू जिला जहां से शुरू ह.






कर्ज नहीं चुकाया जा सकता हैदो कोशिकाओं का युग्मन फिर सतत बिखंडन बिखेर रहा है तमाम ज्ञात अज्ञात पीढ़ियों का अहशास जिस्म के कतरे-कतरे में.. जीवन की आधार कोशिकाएं बिखर रही हैं एक जिस्म से कई जिस्मों में बृहत् से बृहत्तर कर रही हैं जीवन क.. है नमन उनको है नमन उनको कि जो यशकाय को अमरत्व देकर इस जगत मैं शौर्य की जीवित कहानी हो गए हैं. है नमन उनको कि जिनके सामने बौना हिमालय जो धरा पर गिर पड़े, पर आसमानी हो गए हैं पिता, जिनके रक्त ने उज्जवल किया कुल-वंश-माथा ..हास्य कविता -मातमी कविता नहीं सुनाएं तो और क्या करें ?एक कविता प्रेमी मशहूर घाघ नेता ने हास्य कवी सम्मलेन का आयोजन किया नामी गिरामी हास्य कवियों को बुलाया भारी पारिश्रमिक का वादा किया कवियों का दिल बाग़ बाग़ हो गया जोश खरोश से सम्मलेन शुरू हुआ पहले...क्यों निराश इतना क्या सूर्य बुझ गया....क्यों निराश इतना क्या सूर्य बुझ गया सूख गए सागर, या हिमालय झुक गया आ बता कहाँ तुझे चोट है लगी धरती मां है देख लिए औषधि खड़ी इस उमर में थक गया संसार देख कर या डर गया सच्चाई का अंगार देखकर चल खड़ा हो, हार अभी.






उल्टी गंगा के देश में हमने कोई बड़ी बात की गुजारिस नहीं की ना ही कोई ना हो सकने वाली बात हमने तो सामने ला दी वो जो तुम्हारे मन में छिपी बैठी थी सदियों से और तुम लाचार कभी रिश्तों से कभी रिश्तों को निबाहने की कशमकश से स्वय...जब तसव्वुर मेरा, चुपके से तुझे छू आये...अपनी हर साँस सें, मुझको तेरी खुशबू आए | यादें ....अपनी पिछली पोस्ट में ,किए वादे के मुताबिक आप सब के सामनें..... ...हाज़िर हूँ ,एक अपनी पसंद की गज़ल ले कर आप सब की नज़र करने को ....भरपूर उम्मीद रखत .फिर भी तंहा हैं हम *कहने को हमसफर साथ है फिर भी तंहा हैं हम हमें सताते हैं दुनिया के गम हो जाती हैं अक्सर आंखें नम सोचते हैं क्यों है दुनिया में इतने ज्यादा गम दूसरों के गमों से हमें तो है सरोकार वैसे आज के जमाने में प्...क्यों इंसां समझ पाए ना इंसां के पीर को ये बारिश का पानी है या निगाहों की नमी है, रोया है आसमां क्यों भीगी जमीं है . समझ जाता है बादल क्यों धरा की पीर को, क्यों इंसां समझ पाए ना इंसां के पीर को. कोई फर्क नहीं आया मौसम



12 टिप्पणियाँ:

शिक्षक दिवस की शुभकामनाएँ और सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी को नमन!

बढ़िया लिंक्स देने के लिए आभार और शिक्षक दिवस की शुभकामनाएँ.

गुरुजनों को सादर प्रणाम ||

सुन्दर प्रस्तुति पर
हार्दिक बधाई ||

शिक्षक दिवस पर मैं अपने सभी शिक्षकों का पुण्य स्मरण करते हुए नमन करता हूँ |
भगवान् उन सब को दीर्घजीवी बनाये ... ताकि वह सब ज्ञान का प्रकाश दूर दूर तक पंहुचा सकें |


मेरी पोस्ट को इस वार्ता में शामिल करने के लिए आपका बहुत बहुत आभार !

बहुत ही वृहद वार्ता।

शिक्षक दिवस पर सभी गुरु जनों को प्रणाम और आप सब को शुभ कामनाएं |
मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |
आशा

शिक्षक दिवस की शुभकामनाएँ .....सार्थक वार्ता

पहली कक्षा की शिक्षिका--
माँ के श्रम सा श्रम वो करती |
अवगुण मेट गुणों को भरती |
टीचर का एहसान बहुत है --
उनसे यह जिंदगी संवरती ||


माँ का बच्चा हरदम अच्छा,
झूठा बच्चा फिर भी सच्चा |
ठोक-पीट कर या समझाकर-
बना दे टीचर सच्चा-बच्चा ||


लगा बाँधने अपना कच्छा
कक्षा दो में पहुंचा बच्चा |
शैतानी में पारन्गत हो
टीचर को दे जाता गच्चा ||

अन्ना को घेरन लगे, मंत्री-पुलिस-दलाल,
भूषण द्वय के साथ में., किरण-केजरीवाल |

किरण - केजरीवाल, उजाड़ा बाबा टीला,
है अन्ना पर चार्ज, किया उत्पात कबीला |

पर तिहाड़ के कई, अभी भी खाली पन्ना |
सबको अन्दर भेज, तभी बैठेगा अन्ना ||

अन्ना निर्देशक बने, फिल्म महा-अभियोग,
केजरि के बैनर तले, सारोकार- सुयोग |

सारोकार-सुयोग, सुनों सम्वाद ओम के,
फ़िदा किरण का नाट्य, वितरकी हुए रोम के |


कह 'रविकर' इतिहास, जोड़ता स्वर्णिम पन्ना,
व्युअर-शिप का शेर, हमारा प्यारा अन्ना ||

File:Ashoka Chakra.svg
नाटक-शाला में घुसें, दीवारों को तोड़,
आगे-आगे ओम जी, पीछे कई करोड़ |


पीछे कई करोड़, सुधारो खुद को भाई,
आँगन कुटी छवाय, रखो बाकी अच्छाई |

कह रविकर अफ़सोस, कुटिल काला दिल सा ला,
मिटा रहे सम्मान, बना के नाटक-शाला ||

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