बुधवार, 7 सितंबर 2011

आधा खिला चांद हो या जमुहाई लेता सूरज.



ललित शर्मा का नमस्कार, एक पखवाड़े से ब्लॉगर की समस्या से जूझ रहे हैं. डेशबोर्ड ही गायब है, इसलिए नए डेशबोर्ड का उपयोग किया जा रहा है. कंप्यूटर भी अनशन से आज ही लौटा है. इसके बाद नेट अनशन पर चला गया. एक परेशानी दूर होती है तो दूसरी चली आती है. संगीता जी ने कहा था कि कंप्यूटर सुधरने १५ दिन लगेंगे और १५ दिन पुरे लग गए. नया मदर बोर्ड, कल नया प्रोसेसर लगाने के बाद हार्ड डिस्क को मदर बोर्ड ने नहीं अपनाया. पराया पूत समझ कर दूर ही रखा. दिन भर लगा बहलाने फुसलाने में. तब कहीं जाकर आज कंप्यूटर चलने के लायक हुआ. नए पी.सी. से वार्ता लगायी जा रही है. अब चलते हैं ब्लॉग नगरिया की सैर पर ..........

ऐसी वाणी बोलिए ................ मन का आपा खोय....मैं कैसे करूँ आभार ................डा. राधाकृष्णन मेनन और मेरा जन्मदिन एक ही तारीख को पड़ता है . इसे बहुत कम लोग जानते है . पिछले वर्ष भाई ललित शर्मा को जानकारी हो गई थी सो उन्होंने अपने ब्लाग में एक पोस्ट लगा दी . जिससे अनेक ब्लागरों को जन्मतिथि ज्ञात हो गई फलस्वरूप टिप्पणियों के माध्यम से अनेक बधाई सन्देश प्राप्त हुए . इस वर्ष चंपारण में भाजपा की कार्यशाला में किसी कार्यकर्ता माध्यम से पूरी महफ़िल को पता चल गया . मंच से ऐलान हो गया . जैसे ही मैने परिसर में प्रवेश किया कार्यकर्ताओं से घिर गया . घर लौटा तो आफिस के कुछ अधिकारी कर्मचारी व जनप्रतिनिधि पहले से इंतजार कर रहे थे . कंप्यूटर खोला तो पता चला कि बीएस पाबला ...  आगे पढ़ें »»------»

एक ऊँची उड़ान बादलों का शहर उन पर ठहरा सा प्रतीत होता ,मेरी कल्पना का जहान मुस्कुराते ,चिढाते ... कुछ आँखों से अठखेली करते ये बादल .. यहाँ सांसे भी चलती है कुछ बाते मेरे दिलो-दिमाग में भी बसती है पर हर वक़्त लबों के दरमियान खामोशियाँ ही क्यूँ बसती है ? क्या बताएँ उसको और क्या छुपाएँ उस से कि ... एक ही नज़र में ले ली तलाशी उसने मेरे दिलो दिमाग की .... जहाँ मन है खोया खोया और तन की भाषा भी बदली बदली सी है .... इस खुले आसमान में रात भी जगी जगी सी है .... जब तुमको देखा तो बरसो की साध पल में मुस्कान में बदल गई ... सुनो अगर मेरे दिल की धड़कन तो ... सांसो में बसी आवाज़ हो तुम ... आगे पढ़ें »»------»



जरा इधर भी अभी चारों ओर हरियाली बिखरी पड़ी है। बारिश थमते ही जब त्योहारों का दौर शुरू होगा तो संस्कृति अपने पूरे यौवन में नजर आएगी।देश के दिगर हिस्सों की तरह दीपावली का त्योहार यहां का सबसे बड़ा त्योहार है। राऊत समाज इसे अपने ही अंदाज में मनाता है। वे नाच-गाकर अपनी खुशियां बिखेरते हैं। रायपुर के टाउन हाल में राऊतों का एक ऐसा ही दल मुझे कुछ साल पहले नजर आया। एक कलाकार ने जिस तरह का वेश धर रखा था, उसने मुझे बेहद प्रभावित किया। शायद इसलिए भी कि पहले एक नाटक में मैंने भी लगभग ऐसी ही भूमिका अदा की थी, जिसकी तस्वीर पुरानी पोस्ट में है। मैंने उससे अनुरोध करके उसकी तस्वीर ... आगे पढ़ें »»------» आरंभ आदरणीय संजीव जी,,,, सादर नमस्ते मैं विश्व हिंदी सचिवालय का कार्यवाहक महासचिव व विश्व हिंदी समाचार पत्रिका का सम्पादक गुलशन सुखलाल हूँ... आपके कार्यों, प्रयासों व विशेषकर आरम्भ का समर्थ-प्रशंसक भी... कुछ वर्ष पहले बहुत कठिनाई से माइक्रोसॉफ्ट का हिंदी IME प्राप्त हुआ था... सीर्फ इंस्टॉल कर पाया.. बाँट नहीं पाया... जब वह खराब हुआ तो काफी दिनों तक बाराहा से काम चलाया और उसका खूब प्रचार भी किया.. लेकिन अब शायद उसके लिए पैसे आदि की मांग होती है जो छात्र छात्राओं के लिए कठिनाई का कारण बना... फिर एक दिन एक मित्र के माध्यम से 'आरम्भ' तक पहुँचा... अब खुद इस्तेमाल करता हूँ और प्रचार... आगे पढ़ें »»------»




स्पंदनडेढ़ महीने की छुट्टियों के बाद भारत से लौटी हूँ. और अभी तक छुट्टियों का खुमार बाकी है.कुछ लिखने का मन है पर शब्द जैसे अब भी छुट्टी पर हैं,काम पर आने को तैयार नहीं. तो सोचा आप लोगों को तब तक इन छुट्टियों में हुई मुलाकातों का ब्यौरा ही दे दूं. भारत जाने से पहले भी कुछ जाने माने ब्लॉगरों से मुलाकात हुई थी.जिनमें से डॉ कविता वाचकनवी और दीपक मशाल से तो पहले भी मैं मिल चुकी थी .परन्तु कनाडा वाले एलियन यानि समीर लाल जी से मिलने का यह पहला मौका था. वह अपने बेटे के यहाँ, जो कि यॉर्क में रहते हैं. आये थे अत: सुप्रसिद्ध उड़न तश्तरी के मालिक से मिलने की हमारी दिली इच्छा थी. उन्होंने भी हमें नि... आगे पढ़ें »»------» मनोरमा हँसना रोना जिन्दगी मगर मूल है प्यार और प्यार के दर्द में काँटे कई हजार एक तरफ का प्यार क्या जब दूजा अनजान बिना किसी सम्वाद के भीतर से हलकान बेचैनी में दिन कटे खुली आँख में रात काश समझता गर कोई बिन बोले जज्बात बिना प्यार के जिन्दगी बस गुड़ियों का खेल पल अनुपम वो है सदा मन से मन का मेल परम्परा सौतन कभी और कभी अज्ञान खोते जो पल प्यार के बन जाते नादान अक्सर होते साथ में लेकिन मन से दूर हाल यही प्रायः सभी लोग दिखे मजबूर छोटी सी ये जिन्दगी सुमन गिने दिन रैन यादों में वो पल जहाँ मिले नैन से नैन


एक चिटठी अन्ना हजारे के नाम !!अन्ना जी, अरविंद जी जय हिंद १ - "राईट टू रिजेक्ट" के सांथ सांथ आपके एजेंडे में एक सुझाव और शामिल करने हेतु आग्रह है - "एक व्यक्ति एक स्थान से ही चुनाव लड़ सके ! अक्सर देखा गया है कि कुछेक प्रत्याशी ( मंजे हुए नेता जिन्हें चुनाव हारने का भय होता है ) २-२, ३-३ चुनाव क्षेत्रों से नामांकन दाखिल कर चुनाव लड़ते हैं तथा कहीं-न-कहीं से तिकड़म कर चुनाव जीत जाते हैं ! नए प्रस्तावित प्रावधान के तहत ऐसा होना चाहिए कि - एक व्यक्ति सिर्फ एक स्थान से ही चुनाव लड़ सके, ऐसी स्थिति में खुद को बहुत बड़ा नेता समझने वाले नेताओं को वास्तविक जनाधार का सामना करना पडेगा जो लोकतंत्र के लिए सकारात्मक व हितकर होग... आगे पढ़ें »»------» मेरे दोस्त तेरे नाम ५० का आंकड़ा कर लिया है तुमने भी पार ईश्वर को यूँ ही दया बनी रहे तुम पर अपार हम दोनों को शायद इश्वेर ने एक साथ ही दिया होगा आकर कई समानताएं कई बातें आती रहीं हैं बार- बार मै और तुम दोनों यहीं खेले और पले- बढें और सुख पाए माँ- पिता की छत्र-छाया और जो सुख चाहा वो सभी पाए किस्मत में था एक शहर में रहना साथ दोनों का वो भी निभाएं हम दोनों ने ही ईश्वर प्रदत्त, एक- एक होनहार पुत्र रत्न पाए माँ भी हम दोनों की जो घर से निकली, दुर्घटनावस् लौट ना पायीं पर आज हम दोनों पर ही ईश्वर ने छोड़ी जिम्मेदारिया- जो हम जा रहें हैं निभाए मै पापा के पास और तुम्हारे पास पापा देखो है कितनी समानतायें ईश्वर न... आगे पढ़ें »»------»


महंगाई से परेशान कोई किराने की दुकान पर तो कोई आटे की चक्की पर है , फिर भी उनका कहना है कि देश तरक्की पर है ! कभी -कभी लगता है कि उनकी बातों में दम है , तरक्की के रास्ते पर ... आगे पढ़ें »»----->>*डॉ. महेश परिमल* भाजपा के लिए अब मुश्किल भरे दिनों की शुरुआत हो गई है। अवैध खनन को संरक्षण देने के आरोप में पूर्व मुख्यमंत्री येद्दियुरप्पा को अपना पद छोड़ना पड़ा था, अब सीबीआई ने रेड्डी बंधुओं को गिरफ्तार कर पार्टी को परेशानी में डाल दिया है। अब तक भ्रष्टाचार को लेकर अपना परचम ऊँचा करने वाली भाजपा घिर गई है। नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज का वरदहस्त रेड्डी बंधुओं पर है। यह सभी जानते हैं। पर यही रेड्डी बंधु भाजपा के गले की हड्डी बन गए हैं। फिर भी उसे यह उम्मीद है कि जर्नादन रेड्डी पाक साफ निकलेंगे। साथ ही यह कहने में नहीं चूकती कि पूरा मामला उनके निजी व्यवसाय से सबंधित है, न कि पार्टी स... आगे पढ़ें »»------»


प्रतिभा की दुनिया ...शाम दरवाजे पर ऊंकड़ू बैठे-बैठे ऊंघने लगी थी. उसके हाथ में उम्मीद का कोई सिरा भी तो न था कि लड़की उसकी ओर एक निगाह देखेगी भी या नहीं. लड़की इन दिनों जाने कहां गुमख्याल रहने लगी थी. शाम कितने ही खूबसूरत रंगों में ढलकर आये, वो लड़की को लुभा नहीं पाती. शाम ही क्यों दिन के सारे पहर उन दिनों उस दरवाजे से उदास होकर जाते थे. चाहे आधा खिला चांद हो या जमुहाई लेता सूरज. लड़की किसी की तरफ देखती भी न थी. वो कई दिनों से एक तस्वीर बना रही थी. उस तस्वीर में उसने वो सारे मौसम रचे, जो उस पर से होकर गुजरे. वो सारे दृश्य जो आंखों में भरे थे. वो सारा संगीत जो कानों से होकर गुजरा था. वो सारी आवाजें जिन... आगे पढ़ें »»------»





अब देते हैं वार्ता को विराम-----सभी को ललित शर्मा का राम-राम ----- मिलते हैं एक ब्रेक के बाद

12 टिप्पणियाँ:

बहुत बढिया वार्ता ..
अच्‍छे लिंक्‍स .. आभार !!

वार्ता अच्छी है, पर लिंक कम हैं, कम्प्यूटर की परेशानी उस का कारण भी समझ आता है। हमने भी सीपीयू बदला है और ऑपरेटिंग सिस्टम भी। अभी उसे समझ रहे हैं। हम भी कहाँ लिख पा रहे हैं।?

समस्या दूर तो हुई ...
शुरुआत अच्छी है !

बहुत बढिया वार्ता...

क्या बात है विस्तृत और बढ़िया वार्ता.आभार.

मिस्टर पि.सी. का अनशन आखिर आज दम तोड़ ही गया ----उसको गुठने टेकने ही पड़े ---फिर संगीता जी की भविष्यवाणी का भी तो बेचारे को ख्याल रखना था --कब तक भूखा प्यासा रहता ..फिर भी अन्ना से २ दिन ज्यादा ही खेंच गया .. badhai!!!!!

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