मंगलवार, 11 सितंबर 2012

!शतरंज के खेल मे शह मात ………ब्लॉग4वार्ता………ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, खंडवा में 17 दिनों से 150 ग्रामींण धरनें पर बैठे थे और उनमें से 51 ग्रामींण जल समाधी लिये घोघलगांव में बैठे थे..! नर्मदा बचाओं आंदोलनकर्ता जिनमें कई विवादास्पद चेहरे दिखते हैं इस आंदोलन के पीछे उनकी बुद्धी काम कर रही थी.. ! प्रदेश सरकार और केन्द्र सरकार दोनों पिछले 17 दिनों से इस आंदोलन को तमाशा बनाये थीं और आज राजनैतिक प्रतिद्वंदता में आगे रहनें की होड़ के चलते आज इन आंदोलनकारियों को राहत मिली है और उनकी मांगें मानीं गयी हैं...!!!!  यह अभूतपूर्व आन्दोलन था……………अब चलते हैं आज की वार्ता पर…………

 जगदीश राय कुलरियाँ की लघुकथाएँ - लघुकथाएँ साँप कई दिनों से बरसात रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी। लोग पशुओं के चारे के लिए भी परेशान थे। साहसी लोग सिर पर खाली बोरियाँ ओढ़ खेतों में से चारा ... शब्दों पर पहरे ! - न कुछ बोलो न कहो कुछ शब्दों पर हैं पहरे, उठाओ न नक़ाब शरीफ हैं चेहरे बनो तुम सब हम जैसे अंधे-बहरे !शतरंज के खेल मे शह मात देना अब मैने भी सीख लिया है …400 वीं पोस्ट - तुम्हारा प्रश्न आज की आधुनिक क्रांतिकारी स्त्री से शिकार होने को तैयार हो ना क्योंकि नये नये तरीके ईज़ाद करने कीजिन्दगी का सफ़र ... - नहीं मिलूंगा, मैं तुमको सन्नाटों में गर ढूंढोगे, तो - तूफानों में, मैं तुमको मिल जाऊँगा ? आज नहीं तो कल ... ये दुनिया देखेगी जुबां-जुबां पे -...

इंफोसिस परेशान है ममता सरकार की दिशाहीन नीतियों से - हाल ही में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ब्लूमवर्ग मार्केट मैगजीन ने दुनिया में आर्थिक क्षेत्र में प्रभावशाली 50 नेताओं में स्थान दिया है और लिखा है कि... मुझे उस पेड़ का दर्द मालूम है..... - मोदी...फिर नीतिश कुमार...अब बाल ठाकरे ने सुषमा स्वराज का नाम प्रधान मंत्री पद के लिए आगे बढ़ाया....अडवाणी का नाम तो खैर है ही...राहुल का नाम दूसरी तरफ से ... चाय का दूसरा कप... (1) - कई दिनों से कोई किताब पढने का सोचते सोचते, आखिर इस वीकेंड में चार किताबें खरीद लाया... *१. कव्वे और काला पानी- निर्मल वर्मा* *२. रात का रिपोर्टर- निर्मल ... पलकें और आँसू - (चित्र एक ग्रुप- साहित्यिक मधुशाला की वॉल से लिया है) वादे के बाद मेरे जाने के बाद रोई क्यों तुम?... रोया ना करो मोती गिर जाते हैं चमकीले से... बूँदों को...

होता है. होता है... - ट्रेन में डेली पैसेंजरी का जिक्र कई बार कर चुका हूँ, ऐसे ही एक सफ़र की बात है - कोई त्यौहार का दिन था| उस दिन सभी स्कूल, सभी कार्यालय बंद थे लेकिन बैंक खुले ... अब ख़ुशी के गीत गाना व्यर्थ है - *अब ख़ुशी के गीत गाना व्यर्थ है* *श्यामनारायण मिश्र* *जल रहीं धू-धू दिशाओं की चिताएं* *अब ख़ुशी के गीत गाना व्यर्थ है* ** *जो मसीहा शांति के संदेश... सूर्यास्त के बाद - आज की शाम उमस भरी शाम सूर्य अस्त होने की तैयारी में बादलों का कोई नामो निशान नहीं शांत था तालाब का पानी ठहरी-ठहरी पत्तियाँ दमसाधे कर रही थीं सूर्य के डू... अमर्यादित शब्द और वाक्य ......... - अमर्यादित शब्द और वाक्य ...पढ़ते वक्त चुभते हैं ...उनके शब्दों और चरित्र से अहंकार की बू आती है ...जो इंसान ,इंसान में फर्क करना सीखती है | हमें जो सिखाय...

मैं बोझिल बदरिया ... - तुमने तार क्या छेड़े पुकार क्या दे दी सोया गीत जाग उठा... मेरे सँभलने के पहले ही उनींदे नयन-पाटल ऐसे खुले कि इस मन-मधुबन से मेरा ही मधुमास लुटा... आह ! निश्... जगह थोड़ी सी साबुत भी बचाए रखो, अपनी समाधियों के लिए ! - *बर्बाद करके छोड़ोगे क्या वतन को,ऐशो-आराम,उपाधियों के लिए,* *आत्म-सम्मान को दृष्टि-बंधित रखोगे कब तक,गाँधियों के लिए !* * * *बादल ये जो समाजिक असंतोष के उमड... बुद्धिजीवी और बुद्धिखोर का अंतर ही अभिव्यक्ति की आज़ादी की अंतरकथा है - "बुद्धिजीवी और बुद्धिखोर का अंतर ही अभिव्यक्ति की आज़ादी की अंतरकथा है. इसके बीच से जाती है पत्रकारिता की पगडंडी. चूंकि पत्रकारिता बाजार है सो बाजार का आचरण... नारी एक शमा - मैं , शमा - दान की अधजली शमा हूँ । जब अँधेरा होता है तो जला ली जाती हूँ मैं और उजेरा होते ही एक फूँक से बुझा दी जाती हूँ मैं ओ ! रोशनी

कालसर्प योग कब जाएगा भारत का ? - पति को , देवर को , सास को मार गयी फिर पूरे भारत को चट से डकार गयी रेफरी बनी खड़ी है केंद्र में घेरे के , चाटुकार खिलाड़ी हैं चारों तरफ खेमे में जोर से बजाती ह... कोई आया भी तो. जब बीत गया सावन घिरकर क्या करेंगे घन सूखे मन के उपवन में कोई आया भी तो क्या आया ख़ुशी बसंती बयार हो कोयल गीत गाती हो बसंती राग पतझर ने कोई गाया भी तो क्य... ओंकारेश्वर बांध पर जल समाधी आंदोलन की ऐतिहासिक सफलता - Photo from: http://www.bhaskar.com *राजीव खण्डेलवाल:* विगत 17 दिन से चला आ रहा मात्र ओंकारेश्वर बांध पर घोघल गांव के मात्र 51 ग्राम निव... सूचनार्थ : ब्लॉग कंटेंट्स की उठाईगिरी - अभी मैं अपने लिखे पर कुछ सर्च कर रहा था तो एक ब्लॉगर (विवेक पाण्डेय - बहुत संभव है फर्जी प्रोफाइल हो) लेख को पढ़ते हुए कुछ-कुछ याद आया कि शायद इसे प.....

चलते-चलते एक कार्टून......

 http://1.bp.blogspot.com/-sgWFwqRL2yU/TzijpFLi2TI/AAAAAAAAE5I/iJjcTHJqmPQ/s1600/000000.jpg

वार्ता को देते हैं विराम, मिलते हैं ब्रेक के बाद राम-राम....

4 टिप्पणियाँ:

बढिया लिंक्स
अच्छी वार्ता

बहुत सु्न्दर लिंक्स संयोजन... आपका बहुत - बहुत आभार ललित जी

बहुत बढिया लिंक्स संजोये हैं।

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