सोमवार, 24 जनवरी 2011

बिन ब्‍याहे घर नहीं लौटे ..बफेट के दस निवेश सिद्धांत ..; ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

आप सबों को संगीता पुरी का नमस्‍कार , व्‍यवसायीकरण के दौर में हमारे देश में गाय को माता कहे जाने की परंपरा खत्‍म होती जा रही है। हमने अपनी देसी गायों को गली-गली आवारा घूमने के लिए छोड़ दिया है, क्योंकि वे दूध कम देती हैं और इसलिए उनका आर्थिक मोल कम है, लेकिन आज ब्राजील हमारी इन्हीं गायों की नस्लों का सबसे बड़ा निर्यातक बन गया है। ब्राजील भारतीय प्रजाति की गायों का निर्यात करता है, जबकि भारत घरेलू दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए अमरीका और यूरोपीय प्रजाति की गायें आयात करता है। वास्तव में, तीन महत्वपूर्ण भारतीय प्रजाति गिर, कंकरेज और ओंगोल की गायें जर्सी गाय से भी ज्यादा दूध देती हैं, यहां तक कि भारतीय प्रजाति की एक गाय तो होलेस्टेन फ्राइजियन जैसी विदेशी प्रजाति की गाय से भी ज्यादा दूध देती है। जबकि भारत अपने यहां दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए होलेस्टेन फ्राइजियन का आयात करता है। हाल ही में ब्राजील में दुग्ध उत्पादन प्रतियोगिता हुई थी, जिसमें भारतीय प्रजाति की गिर गाय ने एक दिन में 48 लीटर दूध दिया। तीन दिन तक चली इस प्रतियोगिता में दूसरा स्थान भी भारतीय नस्ल की गिर गाय को ही प्राप्त हुआ। इस गाय ने 45 लीटर दूध दिया। तीसरा स्थान आंध्र प्रदेश के ओंगोल नस्ल की गाय (जिसे ब्राजील में नेरोल कहा जाता है) को मिला। उसने भी एक दिन में 45 लीटर दूध दिया।विस्‍तार से इस लेख को यहां पढा जा सकता है

 गगन शर्मा जी सही बता रहे हैं कि हमारे ऋषी-मुनियों तथा विद्वानों ने अवाम की जिंदगी को सुंदर, सुखमय, निरोग बनाए रखने के लिए जितने उपाय हो सकते थे उन्हें खोज कर हमें सौंप दिया था। पर समय के साथ-साथ हमारी निष्ठा व सोच विदेशों की चकाचौंध में गुम होती चली गयी। डॉ ओ पी वर्मा जी के द्वारा कहानी के रूप में आयुर्वेदिक ज्ञान की महत्‍ता के बारे में एक ज्ञानवर्द्धक पोस्‍ट लिखी गयी है .. एक नजर अवश्‍य डालें। स्‍वास्‍थ्‍य सबके लिए में पढिए .. बुलंदशहर के डीएवी पीजी कालेज के रसायन विभाग की एक शोध छात्रा ने मेडिकल क्षेत्र में तहलका मचाने वाली खोज की है। उसने एक ऐसी दवा की खोज की है जो कैंसर को फैलने से रोकती है। महिलाओं को भी फलों की उतनी ही आवश्यकता है , जितना पुरुषों औरबच्चों की .. बता रही हैं डॉ दिब्‍या श्रीवास्‍तव जी।संसदीय सचिव विजय बधेल का कहना है कि आज की व्यावसायिक शिक्षा ने पूरी तरह से भारतीय संस्कृति को चौपट कर दिया है। एक समय वह था जब स्कूल और कॉलेजों में व्यावाहारित शिक्षा भी दी जाती थी, लेकिन काफी समय से इसको बंद कर दिया गया है .. लिख रहे हैं राजकुमार ग्‍वालानी जी


आजकल हिंदी ब्‍लॉग जगत के ब्‍लोगरों की मीटिंग लगातार चल रही है , इससे कुछ सार्थक निकलकर जरूर आएगा , इसकी हम कामना करते हैं। दैनिक हिंदुस्‍तान में छपी खबर को पढने के लिए यहां क्लिक किया जा सकता है। नुक्‍कड पर लगातार इस मीटिंग के वीडियो जारी किए जा रहे हैं। समीर लाल जी की पुस्‍तक 'देख लूं तो चलू' के बारे में  विभिन्‍न समीक्षकों के विचार पढने हों तो गिरीश बिल्‍लौरे जी के मिसफिट में पहुंचिए। फेससबुक के लिए कई शार्टकट कीबोर्ड कीज लेकर आए हैं .. राहूल प्रताप सिंह राठौर जी। इंटरनेट पर राजस्थानी को अपनी पहचान दिलाने के लिए ब्लॉग सशक्त माध्यम बनकर उभरे हैं , पूरा लिस्‍ट लेकर आए हैं ... अजय कुमार सोनी मोटियार जी। 


नीलिमा सुखीजा अरोडा जी की एक समस्‍या है .. ब्‍लॉग कैसे पढें , एग्रीगेटर बंद हो गए तो क्‍या हुआ , मेरा तो मानना है कि कई चर्चाएं प्रतिदिन चल रही हैं, जहां बहुत लिंक मिल जाएंगे आपको। जादू के पूरे रविवार का कार्यक्रम यहां देखें , वह शंकर अंकल के घर मौज मस्‍ती करके अब सो गया है। अरविंद मिश्र जी धोबीघाट फिल्‍म की समीक्षा  कर रहे हैं। राजकुमार सोनी जी पूछ रहे हैं .. इतना सन्‍नाटा क्‍यूं पसरा है ?? वंदना जी का मानना है कि .. मगर झीलें कब बोली हैं ?? बिखरे मोती में संगीता स्‍वरूप जी की रचना पढिए .. नीलकंठ । अरविंद जांकगड जी के सुंदर गजल पर भी एक नजर डालिए .. सोंचते हैं थी वो आग भी कैसी ?? दर्पण शाह जी ने भी आज एक अच्‍छी रचना पोस्‍ट की है .. वक्‍त को चलने दें आगे .. रास्‍ता मत मांगिए । गांव की याद में एक सुंदर रचना बन गयी है ... स्‍वराज्‍य करूण जी के द्वारा। 


नया वर्ष तो तो 23 दिन पहले शुरू हो गया था , पर वीना शर्मा जी आज शुरू हुई हैं दिलचस्‍प कहावतों के पीछे दिलचस्‍प कहानियां भी होती हैं , . ऐसी ही एक कहानी पढिए राजभाषा हिंदी में .. बिन ब्‍याहे घर नहीं लौटे। वारेन बफेट के बारे में आपने जरूर सुना होगा , उनका कहना है कि शेयर बाजार के लोग जब रोते हैं , मैं हंसता हूं। उनको एक सेंट भी अपने परिवार से नहीं मिली। आज केवल अपने खुद के निवेश के दम पर वे अरबों डालरों के मालिक हैं। कल्‍प तरू में विवेक रस्‍तोगी जी लेकर आए हैं .. बफेट के दस निवेश सिद्धांत। 26 जनवरी पर विशेष श्रृंखला चल रही है ... खुशदीप सहगल जी के देशनामा में, सारे आलेख ज्ञानवर्द्धक हैं। नेता जी सुभाष चंद्र बोस के बारे में जानकारी देते एक लिंक के साथ शिवम मिश्रा जी की पोस्‍ट हाजिर है। सुभाष चंद्र बोस जी का जबलपुर से भी नाता था ... बता रहे हैं महेन्‍द्र मिश्र जी।  नेता जी के बारे में विस्‍तार से जानकारी देते हुए एक पोस्‍ट मिथिलेश दूबे जी ने भी लिखी है। 


जनम दिन के खास मौके पर उन्‍हें हमारा भी नमन !!


अब आज्ञा दीजिए .. मौका निकालकर इसी तरह आप लोगों को लिंक उपलब्‍ध कराते रहेंगे !!

14 टिप्पणियाँ:

अच्छी रही वार्ता !

आज की बार्ता में पढ़ने के लिए बहुत अच्छे लिंक मिले!
आभार!

बहुत बढ़िया वार्ता ...काफी नए लिंक्स मिल गए ...आभार

खासा चर्चा दिये हैं आप
वाह तरीका भी गुरु गम्भीर
वाह ताई वाह

बेहद उम्दा लिंक्स से सजी है आज की वार्ता ... आपका बहुत बहुत आभार , संगीता दीदी !

सुंदर वार्ता के लिए आभार
शाम को ब्लॉग पढते हैं।

बहुत बढ़िया वार्ता .

काफी सारे लिंक्स हैं ..पूरे दिन का काम कर दिया आपने.
आभार.

काफ़ी सुन्दर लिंक्स लगाये है…………बढिया वार्ता………आभार्।

बहुत अच्छी रही वार्ता

तमाम लिंकों के लिए शुक्रिया।

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