शुक्रवार, 4 मार्च 2011

मर्ज़ी का प्यार बनाम मज़बूरी का प्यार--युगपुरुष--- ब्लॉग4वार्ता--- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, चलते हैं फ़टफ़टिया वार्ता पर, ताऊ के ब्लॉग पर जूतम पैजार हो रही है, देखिए--

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ब्लागर जूतमपैजारियता को लेकर घोषित ब्लेक बूट एवार्ड - 2011 के नामांकन की अंतिम तिथि आ चुकी है, लेकिन नामिनेशन नहीं हुआ है।इन नामांकनों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि इनमें से किसी का चुनाव करना त्रि-सदस्यीय जूतमपैजारियता कमेटी के लिये टेढी खीर बन गई इस कार्य में निपुण सुश्री समीरा टेढी को इस महती जिम्मेदारी को निभाने के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था और उन्होनें ना केवल आमंत्रण स्वीकार किया बल्कि तुरंत उडनतश्तरी लेकर आ पहुंची. उनके पहुंचते ही नामांकनों को छांटने का कार्य शुरू किया गया और आये हुये तमाम नामों से पांच नाम छांट लिये गये हैं इसके बाद जूतमपैजारियता कमेटी के तीनों सदस्य और स्वयं मिस समीरा टेढी भी काफ़ी थक चुकी थी. अत: शाम को थोडा विश्राम करने के बाद डिनर के लिये होटल में इकठ्ठे हुये जहां डिनर के साथ साथ आगे की रूपरेखा भी तय की गई।

खुशदीप सहगल बता रहे हैं बिल की लाइन और बुज़ुर्ग कल मैं बीएसएनएल ब्रॉडबैंड का बिल जमा कराने के लिए गया...वहां जाकर देखा तो लंबी लाइन लगी हुई थी...मुझे फिक्र हुई कहीं ड्यूटी पर लेट न हो जाऊं...लेकिन बिल की भी आखिरी तारीख थी, इसलिए जमा कराना ही था सो लाइन.  पंडित जी  कह रहे हैं कि .माँस मनुष्य का भोजन नहींपशु,पक्षी,कीट, पतंगे आदि संसार में जितने भी प्रकार के प्राणी हैं, सब के सब अपने-अपने स्वाभाविक भोजन को भलीभाँती जानते तथा पहचानते हैं. अपने भोजन को छोडकर दूसरे पदार्थों को सर्वदा अभक्ष्य समझते हैं, उनको दे...

अलबेला खत्री पहुंच रहे हैं जबलपुर, भोले शंकर लगे हुए हैं स्वागत की तैयारी में, कभी चैटियाते हैं तो कभी बोम बोजर पर बम फ़ोड़ते हैं, मिलन के लिए काफ़ी व्याकुल हैं।बाबा........आपने आज क्या माँगा भोलेनाथ से ? वही मांगा जो नित्य काम आता है, यौगेन्द्र मौदगिल भी वही मांग रहे हैं। यहाँ देख आओ, आशा जी की कविता पढिए बादल आगे देखिए नाच न जाने आंगन टेड़ा राजस्थान की राजधानी जयपुर की महापोर जो निगम में अल्पमत में हें और इसी कारण अब तक समितियों का गठन नहीं कर पायी हे खुद इतनी अक्षम हें के पार्टी के लोग तो दूर अधिकारी और कर्मचारी भी उनकी नहीं सुनते । जयपुर के...

सिंहावलोकन पर देखिए चित्रकारी महानदी, सोढ़ुर और पैरी संगम पर स्थित राजिम, छत्तीसगढ़ की प्राचीन नगरी है। नदी के बीच स्थापित कुलेश्वर महादेव और दाहिने तट पर राजीव लोचन मंदिर है। राजिम अंचल की पारम्परिक पंचक्रोशी के साथ मेला, अब राजिम कुंभ के नाम से प्रसिद्‌ध है। त्रिवेणी संगम पर माघी पुन्‍नी मेला वाले छत्‍तीसगढ़ के दो प्रमुख वैष्‍णव केन्‍द्र राजिम और शिवरीनारायण क्रमशः राजिम तेलिन और जूठे बेर वाली शबरी की कथा के साथ लोक समर्थित हैं।पूर्णमासी का चन्द्र दर्शन और पद्‌म क्षेत्र में नदी की रेत पर इस दुकान की सजावट बना रेखांकन देखा हमने। 'राजिम' नाम की व्युत्पत्ति, लोक में राजिम तेलिन और शास्त्र में राजीव लोचन से मानी जाती है। लगा कि राजिम तेलिन के किसी अवतार ने रेखांकन कर माघ पुन्नी पर उत्फुल्ल पद्‌म, राजीव लोचन को अर्पित किया है।

सबका जलचढ़ी ( शिवरात्रि ) केरि सुभकामनामोहारे के सिवाले पै माई.. सिव द्रोही मम दास कहावा। सो नर सपनेहुँ मोहि न पावा॥ सैव-बैसनौ के बीचे रारि अपनी आँखी अपने इलाका मा नाहीं देखेन। होइ सकत है कि कौनौ समय रहत रही हुवै, तौ तुलसी बाबा यक दुसरे कै, सुनिए अवधी लोक भजन ..तथाकथित भगवानों की कलई खुली, कृष्ण -तुलसी पर टिप्पणी से मचा बवाल पत्रिका के विवादित अंश पत्रिका का विवादित अंश छत्तीसगढ़ के राजिम में अर्ध कुंभ मेले के आयोजन में मंगलवार 1 मार्च को साधु-संतों का आक्रोश फूट पड़ा। हरि...

वाणी गीत द्वारा गीत मेरे   पर पढिए कुछ क्षणिकाएं--अदा जी कह रही हैं कम से कम मुझसे ज़रा सी तुम नफ़रत तो कर लो सचमुच !! मेरे मन के आँगन में उसका इक ख़त आया है, जाने कैसा है वो सच है या साया है, लिखा है .. तुम्हारी मुस्कुराहट ग़ज़ल बन कर सामने फैले कागजों में पसर जाती है, तुम्हारा अंदाज़ मेरे जीने का सबब बन जात...जिसने नहीं पी गांजे की कली माघ की पुर्णिमा और छत्तीसगढ का प्राचीन राजिम मेला। दोनो एक दूसरे के पूरक हैं। त्रिवेणी संगम का स्थान प्रयाग जैसा ही महत्व रखता है। बचपन में जब माघ की पूर्णिमा आती थी तो दो दिन पहले से ही बैल गाड़ियों का र...गोवा में द्वि-दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय चिकित्सा सम्मेलनगत सप्ताह गोवा में मेडिकल नेग्लिजेंस पर एक अंतरराष्ट्रीय कॉन्फेरेन्स में शामिल होने का अवसर मिला । प्रस्तुत है इसकी एक छायाकृत रिपोर्ट--

युगपुरुष उड़न तश्तरी पर, उस रात किसी बड़ी किताब का भव्य विमोचन समारोह था. यूँ भी हिन्दी में किताबों के बड़े या छोटे होने का आंकलन उसके लेखक के बड़े या छोटे होने से होता है और लेखक के बड़े या छोटे होने का आंकलन उसके संपर्कों के आधार ...डॉयबीटीज़ की मैनेजमेंट में हो रही विश्व-व्यापी गड़बड़ मैं अकसर यही सोचता रहा हूं कि डायबीटीज़ की मिस-मैनेजमैंट भारत ही में हो रही है, लेकिन कुछ रिपोर्टें ऐसी देखीं कि लगा कि इस से तो अमीर देश भी खासे परेशान हैं। भारत में बहुत से लोगों को तो पता ही नहीं कि उन्...शहर का मुसाफिरन हुआ इल्म मुझे कोई दिल में समा गया दिल-ए-जान बन मेरी निगाहों में आ गया पूछते रहे उनके दिल का पता गली-गली वो अजनबी शहर का मुसाफिर बता गया।

मिसिर जी के ब्लॉग पर कुछ है आज हँसने के लिए एक राह चलती लड़की को पकड़कर एक लडके ने उसका जोरदार किस(चुम्बन) ले लिया तो लड़की ने कहा - यह क्या है तो लडके ने मुस्कुराकर जबाब दिया - डार्लिंग ये डायरेक्ट मार्केटिंग है . थोड़ी देर बाद लड़की ने एक जोरदार थप्पड़...चार साल और हम जब दुनिया मिलेनियम वर्ष मना रही थी, मैं और ज्योति विवाह के बंधन में बंधे थे. एक कापीराइटर के पास क्या होता है अपनी पत्नी को देने के लिए. बस विज्ञापन सी कवितायें. आज के दिन फिर जब कार्य की विवशता के कारण ----

मर्ज़ी का प्यार बनाम मज़बूरी का प्यार दोस्तों प्यार क्या है ? हरेक प्रेमी और विचारक अपनी २ समझ + रूचि और स्वभाव के अनुसार इसकी अलग -२ व्याख्या करता है ….. लेकिन एक बात तो तय है की हरेक युग में प्यार में स्वार्थीपन और त्याग + बलिदान में संघर्ष ...धन्य और सौभाग्यशाली धर्मपालसौभाग्यशाली धर्मपाल धन्य हो गया। सौभाग्यशाली इसलिए क्योंकि वह पुलिस में हैं। धन्य इसलिए कि उसने अपने धर्म का पालन किया है। जब नाम धर्मपाल है तो उसका पहला फर्ज है धर्म का पालन करना। किसी पुलिस ...

जर्मन मेड लट्ठ की जबरद्स्त डिमांड जबसे लोगों को ताई द्वारा ताऊ का जन्मदिन जर्मन मेड लट्ठ द्वारा मनाये जाने का पता चला है। तभी से मुझे सभी महिला ब्लॉगर्स और पुरुष ब्लॉगर्स की बीवियों के फोन, ईमेल, टिप्पणीयां और चिट्ठियां आ रही हैं। सभी को ...अखिल ब्रह्माण्ड ब्लागर्स संगठन मे "रंग-महोत्सव" की तैयारियां ज़ोरों पर पिछले कुछ दिनों से हिन्दी ब्लागिंग मे ढेर सारे संगठनों का निर्माण और पदाधिकारियों की नियुक्तियाँ/भर्तियाँ चालू हैं। जिन क्षेत्रों के संगठन बन चुके हैं उधर के ब्लागर पदाधिकारी अपनी अपनी कुर्सियों मे तेल लगा...ताल्‍लुक ऐसा तो अक्‍सर हो जाता है मेरे ही साथ बैठे हों पास-पास या चल रहे हों साथ-साथ हाथ को सुझाई नहीं देता हाथ ऐसे में भला कैसे हो आदमी से आदमी के बीच फासले की सही नाप. 11.07.1989 अंदेशे और संदेशे के बीच भटका मन...आओ महाराज .......... आप भी लटको !!


चलते चलते व्यंग्य चित्र

 

वार्ता को देते हैं विराम-- मिलते हैं ब्रेक के बाद, कुछ नई पोस्टों के साथ.................................

12 टिप्पणियाँ:

धन्‍यवाद, सिंहावलोकन की चित्रकारी यहां भी दिख गई और भी बहुत कुछ.

मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |कार्टून बहुत अच्छा लगा |
आशा डाइबिटीज पर रचना भी ज्ञान वर्धक है |
अच्छी चचा रही |बधाई |
आशा

lalit bhaia ko meraa nmskaar kafi dinon bad hui he aapki pukaar aapne to hmara kr rkha he tirskaar kyaa yhi he bhavna apnon kaa tirskaar or dusron ko purskaar . yeh to hui mzaaq ki baat lekin aapke guldste bog ki is duniyaa ko sjaa dete hen sch kuchh baat he aap me . akhtar khan akela kota rajsthan

बढ़िया रही यह वार्ता भी... कुछ अच्छे लिंक्स मिले पढने के लिए... धन्यवाद!

बहुत खूब मस्त वार्ता.

बढिया चुनाव लिंक्स के.

शानदार वार्ता ! अच्छे लिंक्स ! मेरा
कार्टून शामिल करने का शुक्रिया !

महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाये

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